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बीवी की सहेली पे दिल आ गया-1

दोस्तो, आप मुझे जानते ही होंगे, मैं अन्तर्वासना का पुराना लेखक हूँ. मैंने करीब 200 कहानियां अन्तर्वासना पर लिखी हैं. आज आपको मैं इस नयी साईट पर अपने एक पाठक की भेजी हुई कहानी बताने जा रहा हूँ। इन पाठक महोदय ने अपने अंदाज़ में कहानी लिख कर भेजी थी, मगर मैंने उसे सिर्फ उनसे पूछ पूछ कर इस कहानी को थोड़ा और रोचक बनाया है.
लीजिये पढ़िये।

दोस्तो, मेरा नाम रत्न लाल है, मेरी उम्र इस वक्त 50 साल की है। मैं मेरी पत्नी और मेरा बेटा … बस यही मेरा परिवार है।

अभी कुछ समय पहले मेरी पत्नी की एक सहेली बनी। वो औरत हमारे मोहल्ले की दूसरी गली में रहती है। दोस्ती की वजह यह हुई कि मेरी पत्नी और उस औरत, दोनों का नाम रूपा है। उस औरत रूपा के दो बेटियाँ है, बड़ी बेटी दिव्या 20 साल की है, और छोटी बेटी रम्या 18 साल की है। छोटी लड़की तो पतली दुबली सी, साँवली सी है। बड़ी लड़की दिव्या भी पतली है मगर वो गोरी है, देखने
में भी सुंदर है और अभी बी ए कर रही है।

रूपा का पति पहले तो यहीं रहता था और दोनों मियां बीवी छोटे मोटे काम करके अपना गुज़ारा करते थे तो घर के हालात कुछ खास अच्छे नहीं थे।
फिर रूपा के पति को विदेश जाने का मौक़ा मिला तो वो पैसा कमाने विदेश चला गया।

वैसे तो हमारा एक दूसरे के घर आना जाना हो जाता था। मगर जब रूपा का पति विदेश चला गया तो मुझे रूपा कुछ विशेष लगने लगी। हालांकि रंग रूप में, या शारीरिक बनावट में वो मेरी पत्नी के मुक़ाबले कहीं भी नहीं ठहरती थी मगर पराई औरत तो पराई औरत ही होती है। अच्छी न भी हो, तो भी बस उसके मम्मे, उसकी गाँड, उसकी फुद्दी आपको अपनी ओर आकर्षित करती ही करती है।

मेरे मन में भी कई बार इस बात का ख्याल आया कि रूपा को थोड़ा टटोल के देखूँ, पति इसका पास में नहीं, तो रात को ये भी तो बिस्तर पर करवटें बदलती होगी. अगर किसी तरह से बात बन गई, तो अपने को बाहर मुँह मारने का मौका मिल जाएगा।

हालांकि मैं उसके घर कम जाता था, मैं तो अपने काम धंधे में ही बिज़ी रहता था मगर कभी कभार आना जाना हो जाता था या कभी कभी वो भी आ जाती थी।

अब मेरी बीवी के साथ उसका अच्छा दोस्तना था, वो मेरी बीवी को दीदी और मुझे जीजाजी कहती थी। मगर मैंने कभी उसके साथ साली कह कर कोई हंसी मज़ाक नहीं किया, मैं थोड़ा रिज़र्व ही रहता था. हाँ उसकी बेटियों के साथ मैं हंस बोल लेता था।

पति के विदेश जाने के बाद उसने घर के कई कामों में कई बार मेरी मदद भी ली मगर मैंने खुद आगे बढ़ कर कभी कुछ नहीं किया. मेरे और रूपा के बीच मेरी पत्नी हमारी कड़ी थी। सारा
काम, बातचीत मेरी पत्नी के द्वारा ही होती थी।

मगर एक बात जो मैं नोटिस कर रहा था कि रूपा का व्यवहार अब बदलने लगा था। जब भी मौका मिलता उसे, वो मुझे जीजाजी कह कर खूब हंसी मज़ाक कर लेती। मुझे अक्सर लगता कि वो अपनी आँखों से अपनी बातों से अपने हाव भाव से यह जता रही थी कि जीजाजी हिम्मत करो और मुझे पकड़ लो, मैं आपको ना नहीं करूंगी।

मगर मैं अपनी पत्नी के सामने होते उसे कैसे पकड़ सकता था।

समझती वो भी थी कि जब तक हम अकेले नहीं मिलते तब तक कोई भी सम्बन्ध हमारे बीच नहीं बन सकता था। मगर अकेले मिलने का कोई भी मौका हमें नहीं मिल रहा था।

हमारी दोस्ती या यूं कहो कि दिल में छुपा हुआ प्यार इसी तरह चल रहा था। अपने अपने मन में हम दोनों तड़प रहे थे। मैं कम तड़प रहा था, वो ज़्यादा तड़प रही थी। वो कई बार कह भी चुकी थी- जीजाजी, आपके पास कार है, मुझे कार चलानी सिखाइए। जीजाजी, किसी दिन अपन दोनों कोई फिल्म देखने चलते हैं। मेरी तो इच्छा है कि बरसात हो रही हो, और हम दोनों जीजा साली कहीं दूर तक गाड़ी में घूम कर आयें।

ये सब बातें वो बातों बातों में मेरी पत्नी के सामने कह चुकी थी और ऐसी ही बातों से मेरे दिल में ये विचार आए कि शायद ये मुझसे अकेले मिलने का बहाना ढूंढ रही है।

फिर एक दिन उसने और बड़ा ब्यान दाग दिया।
हुआ यूं कि हम बाज़ार गए थे, वहीं वो भी मिल गई, अपनी दोनों बेटियों के साथ। तो औपचारिकतावश हमने उन्हें शाम के खाने का न्योता दिया।
वो झट से मान

हम एक मिठाई की दुकान में गए, ऊपर उनका ही रेस्टोरेन्ट बना था। सब कुछ शाकाहारी था। हमने वहाँ बैठ कर खाना खाया।

अब उसकी बड़ी बेटी मेरे साथ बैठी जबकि रूपा, उसकी छोटी बेटी, और मेरी पत्नी मेरे सामने बैठी।
दिव्या वैसे भी मेरे से बहुत स्नेह करती थी।

हम दोनों चुपचाप बैठे खाना खा रहे थे, वो रूपा बोली- देखो दोनों कैसे बिल्कुल एक ही स्टाइल से खाना खा रहे हैं, जैसे दिव्या आपकी ही बेटी हो।
मैंने कहा- हाँ, मेरी बेटी है।
अब मैं और क्या कहता।
मगर तभी रूपा बोली- आपकी कैसे हो सकती है, हम कभी मिले तो है नहीं?

मैं तो सन्न रह गया। मिले नहीं मतलब सेक्स नहीं किया। मैंने सोचा- अरे भाई ये तो चुदवाने के चक्कर में है, और मैं यूं ही शराफत में मारा जा रहा हूँ।
मगर उस वक्त मैंने सिर्फ हाथ उठा कर आशीर्वाद देने का ढोंग कर दिया कि दिव्या तो मेरी आशीर्वाद से पैदा हुई बेटी है।
तो दिव्या बोली- मौसा जी, अगर आप बुरा न माने तो मैं आपको पापा कह लिया करूँ।
अब उस बेटी की यह नन्ही सी प्यारी सी गुजारिश को मैं ना नहीं कर सका, मैंने कहा- हाँ, बेटा, मुझे तो खुशी होगी, मेरी कोई बेटी नहीं, तुम मेरी बेटी बन जाओ।

उस दिन के बाद दिव्या मुझे हमेशा पापा ही कहती। मगर छोटी बेटी कभी पापा तो कभी मौसा जी कह देती थी। उसके साथ मेरा रिश्ता ठीक ठाक सा ही था क्योंकि वो चुप ज़्यादा रहती थी।

फिर एक दिन दिव्या ने मुझसे मेरा फोन नंबर मांगा, उसके बाद वो मुझे कभी कभी फोन भी करती, सुबह शाम को कभी कभी मेसेज भी करती और मैं भी उसे अच्छे अच्छे मेसेज भेज दिया करता था जैसा कोई भी बाप बेटी करते हैं।

एक दिन मैं और मेरी पत्नी उनके घर गए, तो उस दिन रविवार था और वो सब लोग सर के बाल धोकर बैठे थे।
फिर दिव्या तेल ले कर आई और तीनों माँ बेटी एक दूसरी के सर में तेल लगाने लगी।

मैंने भी बैठे ने यूं ही कह दिया- अरे वाह, दिव्या, बहुत बढ़िया से तेल लगाती हो तुम तो!
वो बोली- पापा, आपके भी लगा दूँ?
मैंने कहा- हाँ, लगा दो।

जब उनका निबट गया तो दिव्या तेल की शीशी लेकर मेरे पास आई। मैं उनके दीवान पर बैठा था, वो मेरे पीछे आई और कटोरी से तेल लेकर मेरे बालों में लगाने लगी।
“आहह … हह … आहा …” कितना आनंद आया, जब बेटी पिता के सर में तेल लगाये अपने नर्म नर्म हाथों से।

रूपा बोली- अरे जीजाजी, मैं लगा दूँ आपके तेल?
उसकी बात में एक तंज़ मैं समझ गया मगर मैंने कहा- अजी नहीं शुक्रिया, बिटिया बहुत बढ़िया लगा रही है।

उसके बाद उनके घर ही हमने खाना खाया और जब वापिस आए, तो अपनापन दिखाने के लिए रूपा ने पहले मुझे नमस्ते बोली और फिर आगे बढ़ कर मुझे आलिंगन भी किया. मगर उसने आलिंगन करते हुये अपना मम्मा मेरी बगल से अच्छे से रगड़ दिया और मेरी तरफ देख कर शरारत से मुस्कुराई।
वो मुझे साफ से साफ इशारे कर रही थी कि आओ मुझे पकड़ो मगर मैं ही ढीला चल रहा था।

मैंने सोचा कि अब अगर एक भी मौका और मिला, तो मैं रूपा से बात कर लूँगा।

फिर एक दिन मौका मिला, वो हमारे घर ही आई हुई थी, मेरी बीवी रसोई में थी। मैंने पूछा- अरे रूपा, तुमने मेरा मोबाइल नंबर लिया था, पर कभी फोन तो किया नहीं?
वो बोली- आप तो वैसे ही कम बात करते हो, क्या पता फोन पर बात करो भी या नहीं।
मैंने कहा- अरे नहीं, मैं तो बल्कि इंतज़ार कर रहा था कि कभी हैलो हाई, नमस्ते, गुड मॉर्निंग, आई लव यू, कुछ तो मेसेज करो।
वो मेरी बात सुन कर बहुत हंसी, बोली- अच्छा अब करूंगी।

और अगले ही दिन सुबह उसका मेसेज आया ‘गुड मॉर्निंग’ का। जवाब में मैंने भी उसको गुड मॉर्निंग का मेसेज भेजा। और दिन में ही हम दोनों ने 40 करीब व्हाट्सअप मेसेज एक दूसरे को कर दिये।

जितना मैं खुल कर चला, वो उससे भी ज़्यादा खुल कर चली और अपने जीजा साली के रिश्ते की सारी मान मर्यादा तोड़ कर हम दोनों ने एक दूसरे को खुल्लम खुल्ला प्यार का इज़हार तक कर दिया। यहाँ तक के उसने ये भी कह दिया कि अगर आप न कहते तो मैं खुद ही कहने वाली थी।

अब जब प्यार का इज़हार ही हो गया, तो और क्या बाकी रहा। वो पूरी तरह से मेरे साथ सेट हो चुकी थी। मन में खुशी के लड्डू फूट रहे थे कि यार कमाल हाई, 50 साल की उम्र में भी माशूक पटा ली।

उसके बाद तो अक्सर हम फोन पर बाते करते, दो तीन दिन में ही, बातें शीशे की तरह साफ हो गई। दोनों ने एक दूसरे से कह दिया कि अब जिस दिन भी मिलेंगे, अकेले में मिलेंगे, और उसी दिन हम सभी हदें पार कर जाएंगे।

मैंने सोचा, अब माशूक के पास जाना है, तो पूरी तैयारी के साथ जाया जाए। बुधवार की मैंने अपने काम से पहले ही एक दिन की छुट्टी ले ली थी।
मगर मंगलवार को मैंने कुछ और काम भी किया। मैंने आधी गोली *** की खा ली। यह गोली खाने से आप जब कहो, तब आपका लंड आपके इशारे पर खड़ा हो जाता है, और वो भी पूरा कड़क, पत्थर की तरह सख्त। बस इतना ज़रूर है कि ये गोली यूरिक एसिड बढ़ा देती है। मगर इसका असर 2-3 दिन रहता है।

बुधवार की सुबह मैंने एक चने के आकार की गोली अफीम की कड़क चाय के साथ निगल ली। अब सफ़ेद गोली लंड को खड़ा रखने के लिए और काली देर तक न झड़ने के लिए।

हमारा 11 बजे मिलने का प्रोग्राम था। मगर मैं 10 बजे से पहले ही हर तरह से तैयार था। करीब पौने 11 बजे मैंने रूपा को फोन करके पूछा- हां जी क्या हाल हैं साली साहिबा?
वो बोली- बहुत बढ़िया, आप सुनाओ।
मैंने पूछा- मैं तो सोच रहा था, सुबह सुबह आपके दर्शन हो जाते तो, सारा दिन बढ़िया गुज़रता।
वो उधर से बोली- तो आ जाइए, किसने रोका है, आपका ही घर तो है।

मैं तो उड़ता हुआ उसके घर पहुंचा। गेट खोल कर अंदर गया, अंदर घर में वो रसोई में कुछ कर रही थी। मैंने आस पास देखा, घर में और किसी के होने की आहट नहीं थी। मगर फिर भी मैं रसोई में गया, उस से नमस्ते की, उसका, बच्चों का हाल चाल पूछा।

फिर पूछा- बच्चे कहाँ हैं।
वो बोली- बड़ी कॉलेज, छोटी स्कूल। बस घर में मैं अकेली हूँ।
मतलब जो मैं पूछना चाहता था, वो उसने खुद बता दिया।

वो गैस पर चाय बना रही थी, मैं उसके पीछे जा कर खड़ा हो गया। दिल तो कर रहा था कि इसे पीछे से ही बांहों में भर लूँ, मगर फिर भी दिल में एक डर सा था। मगर फिर भी मैंने हिम्मत करके उसको अपनी बांहों में भर लिया।

वो एकदम से चौंकी- अरे जीजाजी, ये क्या कर रहे हो?
वो गुस्सा नहीं हुई तो मेरी भी हिम्मत और बढ़ गई, मैंने झट से उसकी गर्दन पर एक दो चुंबन जड़ दिये और उसे कस कर अपने से चिपका कर बोला- उम्म्ह … अहह … हय … ओह … मेरी रूपा, अब सब्र नहीं होता यार!
और मैंने उसकी गर्दन कंधो को चूमते हुये, उसका चेहरा घुमाया, और उसके गाल पर भी चूम लिया।

वो मुस्कुरा कर बोली- आप तो बड़े बेशर्म हो, छोटी साली तो बेटी जैसी होती है।

ट्रेन में बनी सहेली के साथ लेस्बियन सेक्स

 मैं 40 साल की हूँ, मेरा फिगर 38सी 36 40 है और मैं दिखने में बहुत ही हॉट और सेक्सी हूँ.

एक बार मैं रेलगाड़ी से अपने पति के पास असम जा रही थी, मेरा रिजर्वेशन राजधानी एक्सप्रेस में लखनऊ से 5.30 बजे शाम को फस्ट क्लास एसी में डी लोअर बर्थ में था और अपर बर्थ अभी खाली थी.
मैंने अपने केबिन का गेट बन्द कर लिया. करीब 10 मिनट बाद ट्रेन गुवाहाटी के लिये चल पड़ी.
6 बजे के आसपास टीटीई आया और मेरा टिकट देखकर चला गया.

रात को करीब 10.30 बजे ट्रेन वाराणसी में रूकी, तब केबिन के दरवाजे को किसी ने नॉक किया, मैंने दरवाजा खोला तो देखा कि एक हसीन मस्त औरत जिसकी उम्र लगभग 35-36 रही होगी, मेरे सामने खडी थी.
हम दोनों ने एक-दूसरे को हाय हैलो किया और फिर वो अपना सामान अपनी सीट पर रख कर मेरी सीट पर ही नीचे बैठ गई और बोली- आपका नाम क्या है डीयर?
“मैं निशा और आपका नाम?”
“मैं अनुप्रिया!”

और फिर हम दोनों काफी देर बातें करती रही. तब उसने बताया- मैं बनारस की रहने वाली हूँ और गुवाहटी जा रही हूँ अपनी माँ के घर!
उसने पूछा- आप कहाँ से हो?
तब मैंने उसे बताया कि मैं लखनऊ से हूँ और असम जा रही हूँ अपने पति के पास… वो आर्मी में हैं तेजपुर में!

बात करते करते करीब 11.00 बज चुके थे मुझे भूख भी लग रही थी, मैंने अनुप्रिया से पूछा- खाना खाओगी? मुझे तो भूख लग रही है। मैं तो खाना लेकर आई हूँ.
फिर हम दोनों ने साथ में खाना खाया और फिर इधर-उधर की बातें करने लगी.
सफर काफी लम्बा था हम बातें करती रही, तभी हम सेक्स की बातें करने लगी.

अनुप्रिया बोली- आप सेक्स में सन्तुष्ट हो?
मैंने कहा- नहीं यार… और तुम?
वो बोली- मेरे पति भी सेक्स ठीक से नहीं कर पाते हैं. मैं तो उँगली से या फिर केला, खीरा से काम चला लेती हूँ.

अनुप्रिया मुझसे पूछने लगी- आप क्या करती हो?
तब मैंने उसे बताया- मैं तो लेस्बीयन सेक्स कर लेती हूँ.

तब वो और ज्यादा मुझसे घुलमिल गई और बोली- दीदी, आप लेस्बीयन सेक्स कैसे करती हो और किससे करती हो?
मैंने उसे सब कुछ बताया, बताते-2 वह गर्म हो गई और मेरे पेट पर सर रख लिया और बोली- दी आप तो बहुत अच्छी हो, क्या आप मेरे साथ लेस्बीयन सेक्स करोगी?
मैंने कहा- हाँ क्यों नहीं!
फिर मैंने दरवाजे को अन्दर से बन्द कर लिया और लाईट बन्द कर दी.

हम दोनों ने एक दूसरी को नंगी किया, धीरे धीरे सब कपड़े उतार दिये. अनुप्रिया बहुत ही गोरी और मस्त थी, उसके चूतड़ तो बहुत ही गोरे और मोटे थे, देखकर मेरी चूत में पानी निकलने लगा था.
फिर क्या था, अनुप्रिया को मैंने सीट पर लिटा लिया और उसके बूब्स को चूसने लगी. अभी उसके बच्चे नहीं हुए थे तो वह कुँवारी चूत की तरह ही थी.
15 से 20 मिनट तक हम दोनों ने एक दूसरे के बूब्स को बहुत चूसा.

अनुप्रिया बोली- दीदी, मैंने लेस्बीयन सेक्स देखा बहुत है लेकिन कभी किया नहीं है.
मैंने कहा- आज कर भी लो!

फिर हम दोनों 69 की पोजीशन में आ गई और एक दूसरी की चूत को चूसने लगी.
अनुप्रिया बोली- दीदी, चूत चटवाने में मुझे बहुत मजा आ रहा है.
और सही में वह अपनी चूत को उठा उठा कर चुसवा रही थी और मैं उसकी चूत को खूब चाट भी रही थी. उसकी चूत का रस भी बहुत ही मजेदार था. हाय… ऐसा रस मैंने अभी तक किसी की चूत का नहीं देखा था, यहाँ तक कि मेरी बेटी का भी नहीं था!

फिर वह भी मेरी चूत को ऐसे खाये जा रही थी जैसे कि खाना खा रही हो! सच बताऊँ तो उसकी चूत बहुत मस्त थी.
उसने बताया- मैंने अभी 5 दिन पहले ही अपनी चूत को साफ किया है, इसमें बहुत बाल हो गये थे.
आगे उसने बताया- मेरे पति को झाँटों वाली चूत ज्यादा पंसद है.

फिर वो मुझसे पूछने लगी- दीदी, आपको कैसी चूत पसंद है?
मैंने कहा- मुझे तो चूत चाटना ज्यादा पसंद है इसलिये क्लीन होनी चाहिये.
वह मेरी चूत को चाटे जा रही थी. इसी बीच मैं उसके मुँह में झड़ गई और मेरी चूत का पानी उसके मुख में निकल गया.

उसने अपना मुँह हटा लिया, बोली- दीदी, आपकी चूत से बहुत सारा पानी निकल रहा है.
मैंने कहा- उसको चाट लो, बहुत अच्छा लगेगा!
वो बोली- दीदी, मैंने कभी चाटा नहीं है, क्या आप चाटती हो?
मैंने कहा- हाँ, बहुत अच्छा लगता है।

फिर मैं उठी और अनुप्रिया की चूत को खूब चाटने लगी. करीब 15 मिनट वो बहुत ज्यादा गर्म हो गई और वह चिल्लाने लगी- डालो प्लीज… कुछ डालो मेरी चूत में!
मैं और जोर से चाटने लगी और उसने मेरे सर को पकड़ लिया और अपनी चूत में धक्का मारने लगी और बहुत तेजी के साथ वह मेरे मुँह में अपनी चूत को ऊपर नीचे करते हुये झड़ गई और उसकी चूत का सारा पानी मेरे मुँह में चला गया.

मस्त पानी था उसकी चूत का… और फिर वह निढाल होकर मेरे ऊपर गिर गई, बोली- दीदी, आज तो चुदाई से ज्यादा मजा आपने लेस्बीयन सेक्स में दे दिया!
और करीब 20 मिनट तक वह मेरे ऊपर लेटी रही.

फिर उसने अपना मोबाईल निकाला, बोली- दीदी अपना नम्बर दे दो मुझे जिससे कि हम आपसे दुबारा सेक्स कर सकें!
मैंने अपना नम्बर उसे दे दिया और उसने अपना नम्बर मुझे दे दिया.

फिर कुछ देर बाद वो उठी और मुझे किस करने लगी जैसे कि वह मेरा पति हो. फिर क्या था जैसे मैंने उसकी चूत को चाटा था वैसे ही वह मेरी चूत को चाटने लगी और बोली- मेरी जान, तुम्हारी चूत तो बहुत गीली है, क्या मैं इसे साफ कर दूँ?
मैंने कहा- हाँ जानू, इसकी गर्मी को भी शांत कर दो!

फिर क्या था… वह मेरी चूत को चाटने लगी और करीब 20 मिनट तक उसने मेरी चूत को चाटा. अब मैं पूरी तरह से झड़ने की चरम सीमा पर थी, मैंने कहा- अनुप्रिया, मैं झड़ने वाली हूँ.
फिर वह और तेजी से मेरी चूत में उंगली पेलने लगी और साथ में चूत को चाटने भी लगी. वो अपनी जीभ को मेरी चूत में घुसा दे रही थी जिससे मुझे और ज्यादा उत्तेजना हो रही थी और आखिरकार मैं उसके मुँह में झड़ गई ‘अअआ हहहह उम्म्ह… अहह… हय… याह… हहहह हहह अनुप्रिया अअइइई!
फॅच च्च च्चच ख्चच से उसके मुँह में सारा पानी छोड़ दिया और उसने भी बड़े मजे से मेरी चूत का रस पिया।

फिर हम दोंनों एक दूसरी के साथ चिपक कर लेट गयी. हम दोनों सो गई.

मेरी आँख खुली तो देखा कि ट्रेन चल रही है. घड़ी में टाईम देखा तो 4.15 बजे थे.
फिर मैंने अनुप्रिया के बूब्स को पकड़ा और किस किया ही था कि अनुप्रिया जाग गई और बोली- दीदी, मेरा फिर मन हो रहा है सेक्स करने का!
मैंने कहा- हाँ मेरी जान, मेरा भी मन हो रहा है।

हम लोगों ने फिर सेक्स किया और तब तक घड़ी में सुबह के 6.00 बज चुके थे और अभी भी हम दोनों नंगी ही थी, एक दूसरी को नंगी देख रही थी.
फिर हम दोनों ने कपड़े पहने और फ्रेश हुई. ट्रेन अभी चल ही रही थी और हम गुवाहाटी करीब शाम को 7.00 बजे तक पहुँचने वाले थे.

ट्रेन जब सुबह 8.30 बजे कटिहार जंक्शन में रूकी, तब हमने चाय पी.
तब अनुप्रिया बोली- दीदी, यहाँ से कुछ डालने के लिये ले लें?
मैंने कहा- यहाँ क्या मिलेगा यार?
बोली- देख लेती हूँ!
और वह देखने गई और जाकर खीरा और केला ले आई, बोली- दीदी केले को चूत में डालकर खायेंगी और खीरे से चूत को मजा देंगी.

तब मैंने अनुप्रिया से कहा कि तुम भी बहुत चूत में उंगली पेलती हो अपने?
बोली- हाँ दीदी, ये तो है!

और फिर 10 मिनट बाद फिर ट्रेन चल दी और हम लोग फिर अन्दर पैक हो गये.
अनुप्रिया बोली- दीदी, मुझे तो आपके साथ नंगी रहना बहुत अच्छा लग रहा है, क्या मैं कपड़े उतार दूँ?
मैंने कहा- जैसी तुम्हरी इच्छा मेरी जान!

फिर क्या था, उसने अपने कपड़े उतार दिये और फिर वो मेरे कपड़े भी उतारने लगी. अब हम दोनों नंगी हो गयी और शाम को 7.00 बजे तक हमने ट्रेन में खूब जमकर सेक्स किया.
फिर हमने अपने कपड़े पहने.

अनुप्रिया बोली- दीदी, अब मैं आपके यहाँ जल्दी आऊँगी जिससे कि मैं आपके और आपके सभी चाहने वालों से सेक्स कर सकूँ! खासतौर से आपकी बेटी के साथ सेक्स करूँगी।
मैंने कहा- मैं अगर फ्री हुई तो हम दोनों यहीं गुवाहाटी में मिलेंगी किसी होटल में!
वह बोली- हाँ दीदी, आप मुझे फोन जरूर करना!

और हम दोनों रोज बात करने लगी.

फिर मैं अपने पति के साथ तेजपुर पहुँच गई और फिर एक दिन मैंने उन्हें अनुप्रिया के बारे में बताया और फिर उससे उनकी बात कराई जिससे कि उन्हें सन्तोष हो जाये.
अनुप्रिया ने कहा- दीदी को लेकर आप आइए किसी दिन मेरे यहाँ!
तो वो बोले- ठीक है, मैं कोशिश करता हूँ!

करीब 15 दिन बीत जाने के बाद एक दिन हुआ ये कि मेरे पति को ऊपर पोस्ट पर जाने के लिये आदेश आ गया और उन्हें वहाँ लगभग दो से तीन दिन लगने वाले थे तो मैंने कहा कि मुझे दो दिन के लिये आप अनुप्रिया के यहाँ छुड़वा दो.

और यही हुआ, मैं अनुप्रिया के घर पहुँच गई, वहाँ उसकी मम्मी, पापा और वो थी.
मेरे पति ने मुझसे कहा- मैं पोस्ट से सीधा वहीं आ जाऊँगा एक दिन के लिये!
मैंने कहा- ठीक है।

सच में उन दो दिनों में उसके घर पर बहुत तरह की सेक्स पोजीशन में सेक्स किया और उसके पापा को भी उसकी मम्मी के साथ सेक्स करते हुये देखा मैंने!

लॉकडाउन में पड़ोसन टीचर को चोदा- 1 | Sexy Teacher

 मेरे पड़ोस में रहने वाली एक अविवाहित शिक्षिका की सेक्स कहानी है। लॉकडाउन में हम घरों में कैद हो गए। तो मैंने समय बिताने के लिए उससे बातचीत शुरू की।

मैं रोहित श्रीवास्तव हूँ, आपका दोस्त।

कुंवारी देसी भाभी को पुराने घर में चोदा वाली मेरी पहली सेक्स कहानी पर मुझे बहुत से संदेश मिले।
आप सभी का बहुत बहुत धन्यवाद कि मेरी कहानी आपको बहुत पसंद आई।

आज मैं आपके सामने एक नवीनतम स्कूल टीचर की सेक्स कहानी लाया हूँ।

मैं आज आपके साथ अपने पड़ोस में रहने वाली एक महिला शिक्षिका और उनकी सहेलियों को लॉकडाउन में चोदने का अनुभव शेयर करने वाला हूँ। Sexy 

लॉकडाउन में कार्यालय बंद होने के कारण मैं Work From Home से ही काम कर रहा था।

क्योंकि मैं चूत की व्यवस्था नहीं कर पा रहा था, मैं इस सब में मन नहीं लगा रहा था।
मेरे लंड को सुकून नहीं मिलता जब तक कोई चूत नहीं मिलती।

यही कारण था कि मैं अपने पड़ोस में रहने वाली अर्चना मेम, जो एक स्कूल में पढ़ाती हैं, को लाइन मारने लगा।

वे बहुत सुंदर नहीं थी, लेकिन उसका 36-32-38 का शरीर बहुत सेक्सी था।

जब भी मैं उसे देखता था, मेरा लंड पैंट में घुस जाता था।
लेकिन अर्चना मेम सांवली थी, मैं उसकी मटकती हुई गांड को हर बार देखता रहता था।
उसकी गांड बहुत हिलती थी।

मुझे लगता था कि ये साली बहुत चुदी हुई है, लेकिन किस्मत ने मुझे उसकी सील तोड़ने का अवसर दिया, तो मैं पूरी तरह से गलत था।
ऊपर वाले ने मुझे उसकी चूत की दुकान की शटर उठाने की अनुमति दी।

वास्तव में, मैं आपको बता दूं कि वह कितना मनोहर क्षण था।

जब मैंने अर्चना मेम के बारे में सोचा, तो मैंने पाया कि वह उससे भी अधिक सुंदर थी।

वह 36 साल की हो गई थी, लेकिन अविवाहित थी।

एक दिन मैंने सोचा कि लॉकडाउन के दौरान इसी की चूत का रस निकालना चाहिए।
इसलिए मैंने उसे लाइन मारना शुरू कर दिया।

जब भी वह छत पर मुझसे मिलती, मैं उसे देखकर स्माइल करता; वह भी प्रतिक्रिया में स्माइल देती।
धीरे-धीरे सिलसिला शुरू हुआ।

अब मैं उसे कुछ अधिक देखने लगा था।
उसकी मुस्कराते हुए मुझे लगता था कि शायद वह भी मुझे पसंद करती है।

धीरे-धीरे मैंने उससे बात करनी शुरू की।
वह भी मुझसे बात करती थी और हम दोस्त बन गए।

एक दिन, गर्मी की वजह से मैं रात को छत पर ही सो गया।
मैं सिर्फ अंडरवियर में लेटा था।

मैंने सुबह उठकर उसे देखा।
वह मेरे लंड को घूर रही थी, जो मेरे अंडरवियर में ही काफी कठोर और कठोर था।

जैसे ही मैंने उसे देखा, उसकी नजरें मेरी नजरों से नहीं मिल रही थीं।

मेरे खड़े लंड को वह एकटक देखती रही।
तो मैं धीरे-धीरे खांस पड़ा।  
अब लौड़े से हटकर मेरी ओर देखा।

मैंने सोचा कि लोहा गर्म है जब वह शर्माकर भाग गई। कोई भी इसे जल्दी से बिस्तर पर लाना चाहिए।

ठीक है, मैं भी अपने कमरे में आकर खिड़की खोलकर मुस्कुराता हुआ खड़ा हो गया।

मैं अपने अंडरवियर से लंड निकालकर हाथों से हिला रहा था और उसकी नजरों से अपने लौड़े को देखने की उस बात को याद कर रहा था।
साथ ही, मैं उसके सामने वाली खिड़की में आने का इंतजार कर रहा था, ताकि मैं उसे अपना पूरा लंड दिखा सकूँ।

लेकिन वह नहीं आई।

फिर मैंने नहाकर तैयार होकर कमरे में लैपटॉप लेकर बैठकर काम करने लगा।

वह छत पर कपड़े फैलाने आई, लेकिन मेरी खिड़की की तरफ देखती थी।
वह चुपचाप खिड़की की ओर बार-बार देखती रहती थी।

वह मेरे कमरे में मुझे बुलाने आई जब मैं बहुत देर से नहीं आया था।
उसे मेरी ओर आने के लिए छत पर कूदना पड़ा।

जब वह कमरे में आया, मैंने देखा कि वह अपने लैपटॉप पर काम करने लगा।
वह मेरे कमरे के दरवाजे के पास आई और बंद कर दिया।

वह मेरे सामने खड़ी थी जैसे ही मैंने दरवाजा खोला।
उसने डार्क टेन कलर की लिपस्टिक लगाई थी और काले सूट पहना हुआ था।
उसका शरीर बहुत सुगंधित था।

उसके कमीज से साफ दिखने वाली उसकी क्लीवेज को मैं देख रहा था।
मैं उसके दूध देख रहा था कि उसने मेरी नजरों को ताड़ लिया।

उसने मुझसे इठलाकर पूछा: क्या देख रहे हो?  
मैंने कहा, “कुछ नहीं, बस एक नज़ारा ऐसा आया कि दृष्टि टिक गई।”

वह मुस्कुराकर कहा—ठीक है..। सुबह भी बहुत अच्छी थी।
मैंने कहा कि अब क्या करें क्योंकि इस लॉकडाउन में सब कुछ बंद है। वह भी मायूस था। क्या मदद कर सकता हूँ?

वह हंसते हुए कहा, “मेरा मोबाइल का चार्जर खराब हो गया है, क्या आपके पास कोई चार्जर है जो मेरा मोबाइल चार्ज कर सकता है?”
मैंने उसे चार्जर दिया और कहा कि उसे चार्ज करके दे देना चाहिए था।

वह चली गई और मेरा फोन नंबर भी ले गई।

पचास मिनट बाद, वह एक संदेश भेजकर चार्जर के लिए धन्यवाद देता था।
मैंने भी उसे धन्यवाद दिया।

उसने पूछा, “ये वाला धन्यवाद क्यों?”
मैंने कहा, “तुमने सिर्फ सुबह कुछ सपने दिखाए कि मेरा सारा दिन अच्छा रहा।”

वह शरारत से पूछा, “आपकी कोई गर्लफ्रेंड है?”
मैंने कहा कि हमें कोई नहीं पसंद है। इसलिए मैं अभी तक कोई प्रेमिका नहीं बना सकी है।

वह कहती थी कि मुझे लगता है कि तुम भी मेरी तरह ही हो।
मैंने पूछा: मतलब? Sexy Teacher
प्यासे, उसने धीमे से कहा।

मैंने सुना और कहा, “तो क्यों न हम एक दूसरे की प्यास बुझा दें?”
मेरे इस संदेश के बाद उसने कोई संदेश नहीं भेजा।

जब मैं छत पर गया, तो वह अपनी सहेली के साथ छत पर बैठी हुई थी।
लॉकडाउन के दौरान, मेरी सहेली भी इसी इमारत में कमरा किराए पर लेकर रहती थी, लेकिन वह घर नहीं जा पाई थी।

किराया बचाने के लिए वे अब एक कमरे में रहने लगे।

वह भी मेरी तरफ देखकर अपनी सहेली से बात करने लगती, जब मैं छुप छुप कर उससे नजरें मिलाने की कोशिश करता।

वह उठकर कमरे में चली गई जब उसकी दोस्त का फोन आया।
जब वह मेरे पास आई, मैंने पूछा कि सुबह की प्रस्तावना के बारे में आपने क्या सोचा?

उसने कहा, “हां, आज रात मैं आपके कमरे में आऊंगी, लेकिन किसी को नहीं बताना।”
मैं खुश होकर उससे प्यार करने लगा।

“यह प्यार मुझे नहीं चाहिए,” उसने कहा और मेरे गाल पर एक थप्पड़ मार दी। तुम्हारे पास सब कुछ है जो मैं चाहता हूँ। और मैं आपको चाहिए सब कुछ देता हूँ। हम एक दूसरे को खुश करना ही हमारा रिश्ता है।

मैंने भी सोचा कि तुम्हें झेलने वाला कौन है; मैं सिर्फ तुम्हारा सेक्सी शरीर चाहता हूँ। बाकी, तुम अपनी माँ को छोड़ देते हो।
मैं भी सामने से ओके कहा।

मैं अपने कमरे में आ गया और रात होने का इंतज़ार करने लगा कि मैं आज रात को अपने कमरे में इसकी बेहतरीन चुदाई करूँगा। Sexy Teacher

फिर मैं रात को उसका इंतजार करने लगा।
ठीक उसी समय दरवाजे पर दस्तक हुई।

जब मैंने दरवाजा खोला, तो मैंने सुना, “ओह!” वह बेवकूफ लग रही थी!

वह मेरे कमरे में घुसकर दरवाजा बंद कर दिया।
वह सीधे मेरे सीने से लिपट गई और हमारे लब एक दूसरे से मिल गए।

मैं उसे वहीं दरवाजे पर क़िस कर रहा था।
वह मेरी जीभ से भी खेल रही थी।

वह बेताबी से मेरी जीभ चूस रही थी।
मैं उसके पास आकर उसे अपनी बांहों में पकड़ा।

उसके बड़े-बड़े बूब्स मेरे सीने पर दबने लगे, और मैं एक हाथ से उसके कंधों को पकड़े हुए था और दूसरे हाथ से उसके मम्मों पर रखकर उन्हें प्यार से सहला और दबा रहा था।

वह गर्म और उत्तेजित हो गई।
हम दोनों ने लगभग दो घंटे तक एक दूसरे की लार को चूसा और मदहोश होते चले गए।

मैं बहुत देर तक उसके होंठों को चूसता रहा, इतनी मदहोशी में।

तब मैं उसके गालों को चाटने लगा।
फिर लगातार उसके दोनों कानों को चूसने लगा।

वह लगातार गर्म होती जा रही थी और अपने मुँह से सेक्सी आवाजें निकालने लगी: आह!

मैं नीचे चला गया, उसकी साड़ी के पल्लू को हटा दिया, उसके कंधे को चाटने लगा, उस पर दांत गड़ा कर काटने लगा।

उसने और अधिक तेजी से आहें भरने लगी।
उसे वहीं रखे सोफ़े पर बैठाकर मैंने उसे किस किया।

मैंने फिर उसकी साड़ी उसके घुटनों तक उठा दी।
वह भी भूखी शेरनी की तरह मेरे होंठ चूसने लगी, जब उसने मुझे पैरों से जकड़ लिया।

मैंने उसके कंधे से उसका ब्लाउज खींच लिया।
मैंने अपनी जीभ से उसके एक कंधे को चाटने और बहुत से चुंबन दिए, अब वह अदृश्य था।
वह बहुत गर्म हो गई और रोने लगी।  

मैं उसके ब्लाउज के हुक जल्दी से खोलने लगा।
जल्दी-जल्दी दो हुक और ब्लाउज भी टूट गए।

वह खुद अपने ब्लाउज के बटन खोलने लगी जब उसने ऐसा देखा।

वह जालीदार लाल रंग की ब्रा पहने हुए थी जब मैंने उसका ब्लाउज उतारा।
उसके बड़े बड़े रसभरे दूध वाले लोटे ब्रा से छुटकारा पाना चाहते थे।

साथ ही, उसने जो पर्फ्यूम लगाया था, वह मेरे मन में और भी अधिक यौन इच्छा पैदा कर रहा था।
मैं अपने गालों को उसके मम्मों से रगड़ने लगा और मुँह से उसके मम्मों को दबाने लगा।

मैं उसके दूध को ब्रा के ऊपर से चाटने और काटने लगा।
फिर मैंने उसकी ब्रा उतारी, तो वह कुछ ज्यादा ही फूल गई।

जब मैंने उसके एक निप्पल पर अपनी जीभ की नोक से कुरेदा, तो वह तड़फ उठी और उचक कर आआह ऊहह करने लगी।

मैं उसके एक निप्पल को अपने होंठों में दबाकर चूसने लगा।
दूसरी ओर, वह इतनी मस्त हो गई कि मेरा सर उसके मम्मों पर गिर गया और आहें भरने लगा।

मैंने नीचे से उसकी साड़ी को छुआ और उसकी पैंटी को छुआ।
वह पूरी तरह से गीली हो चुकी थी और मेरे हाथों पर उसकी चूत का नमकीन अमृत फैल गया था।

वह लपककर मेरी उंगलियों को अपने मुँह में लेकर चूसने लगी जब मैंने उसके सामने उस नमकीन रस को अपनी उंगलियों में लेकर चूसा।

मैंने धीरे-धीरे उसकी पैंटी उतार कर उसकी चूत में दो उंगलियां डाल दीं।
आह जानू… वह तुरंत उचक गई। आराम से..। अब भी मैं कुंवारी हूँ।
मैंने सोचा: क्या?
“हूँ…” उसने फिर कहा और मुझे देखने लगी।

इतनी उम्र में भी मास्टरनी साहिबा को लंड नहीं मिला, इस बात से मैं बहुत आश्चर्यचकित था।

अब अगले भाग में मैं मास्टरनी की चुत का भोसड़ा बनाने वाली चुदाई कहानी लिखूँगा।
अब तक स्कूल शिक्षक की सेक्स कहानी पर आपका क्या विचार था?

मेरी देसी चूत को मिला सामूहिक चुदाई का सुख

हैल्लो दोस्तों पहले मैं आप सभी को अपना परिचय दे दूँ.. मेरा नाम मोना है और मैं 21 साल की हूँ और मैं बहुत सेक्सी लड़की हूँ और मैं एक इंजिनियरिंग स्टूडेंट भी हूँ। मेरा फिगर 32-30-36 और 5.4 इंच हाईट और गोरा कलर, सिल्की बाल, और मैं बहुत सुंदर दिखती हूँ और मेरा एक बॉयफ्रेंड भी है.. जिसका नाम पंकज है। पंकज की हाईट 5’11 इंच, लंड 8 इंच.. अच्छी खासी बॉडी है.. उसने कई बार मेरी चुदाई भी की है जिससे मुझे पता चलता है कि उसका लंड हर किसी की चूत को एक बार मैं ही फाड़ देगा और उसके लंड को झेलने की ताकत हर किसी की चूत मैं नहीं वो बस एक बार मैं ही पसीने ला देता है।
तो दोस्तों मैं जो स्टोरी यहाँ पर आप सभी को बता रही हूँ वो 100% सच है। मैं और पंकज बहुत खुलकर एक दूसरे के साथ रहते है। हमने बहुत बार सेक्स भी किया है और मैं 18 साल की थी जब मैंने अपने भाई के दोस्तों से अपनी सील तुड़वाई थी।
मैं और पंकज साथ मैं ब्लूमूवी देखते थे और हम ज्यादातर ग्रूप सेक्स या नये नये तरीके की चुदाई की ब्लू मूवी देखते थे। इसके बाद एक दिन हमने कॉलेज से बंक मारकर मूवी देखने का प्लान बनाया। फिर हम सभी लोग एक फ्लॉप मूवी देखने गये। थियेटर पूरा करीब करीब खाली ही था। फिर जैसे ही मूवी स्टार्ट हुई.. फिर पंकज भी अपना काम करने मैं स्टार्ट हो गया। उस दिन मैंने सफेद शर्ट और शॉर्ट मिनी स्कर्ट पहनी हुई थी। फिर उसने शर्ट के सारे बटन खोल दिए। इसके बाद पंकज मेरे बूब्स मेरी ब्रा के ऊपर से चूस रहा था। फिर मैंने उसे अपनी ब्रा खोलकर अपने निप्पल उसके मुहं मैं डाल दिए। अब वो एक छोटे बच्चे की तरह मेरे बूब्स दबाकर चूस रहा था। फिर उसने मेरी शर्ट पूरी तरह निकाल दी और मैं ऊपर से पूरी नंगी हो गयी थी। फिर वो कभी मेरे सीधे बूब्स को दबाता तो कभी उल्टे बूब्स को। अब उसने चूस चूस कर मेरे दोनों बूब्स लाल कर दिए थे।
फिर मैंने उसकी पेंट की ज़िप खोलकर उसका 8 इंच मोटे लम्बे लंड को बाहर निकालकर सहलाने लगी और अब उसे अपने मुहं मैं लेकर चूसने लगी और इसके बाद मुझे बहुत मज़ा आ रहा था। मैंने बहुत लोगो का लंड कई बार चूसा है इसलिए मुझे बहुत अनुभव है.. लंड चुसाई में और चूस चूसकर खड़ा करने मैं। फिर पंकज ने मेरा सर पकड़ा और ज़ोर जोर से मेरे मुहं को चोदने लगा। लेकिन उसने मेरी आज हालत बहुत खराब कर दी क्योंकि उसे आज बहुत दिनों के बाद मौका मिला था और वो आज पूरा हिसाब चुकाना चाहता था। फिर उसकी इस चुदाई ने मेरी आँखों से आंसू तक ला दिये थे और पूरा का पूरा मुहं लाल कर दिया। इसके बाद करीब थोड़ी देर बाद उसने मेरे मुहं मैं ही अपना सारा वीर्य निकाल दिया और अब मैं उसका सारा वीर्यपान कर गयी।
फिर पंकज मूवी देखते देखते मेरी देसी चूत मैं उंगली कर रहा था। फिर वहाँ पर दो लड़के और एक औरत हमारे आगे आकर बैठ गए। फिर मैंने तुरंत मेरी शर्ट लेकर मेरे बूब्स छुपा लिए लेकिन उन्होने शायद मेरे बूब्स देख लिए थे। अब थोड़ी देर बाद मैं चौक गयी.. मैंने देखा कि वो दो लड़के उस औरत के मज़े ले रहे थे। एक लड़के उसके बूब्स दबा रहा था और दूसरा उसके होंठो को किस कर रहा था। फिर मेरे और पंकज के सामने ग्रुप सेक्स चल रहा था। फिर मेरी चूत गीली हो गई और फिर पंकज भी अब मुझे जमकर किस करने लगा और फिर मैंने भी अपनी शर्ट उतार कर अब से साईड मैं रख दी। मेरी स्कर्ट भी ऊपर आ गई थी और अब मुझे ऐसा लग रहा था जैसे मैं नंगी बैठी हूँ।
फिर मैंने देखा कि उनमे से एक लड़का पीछे मुड़कर हम लोगो को देख रहा था। इसके बाद इस बार मैंने जान बूझकर मेरे बूब्स उसको दिखाए और अपने दोनों हाथों से अपने बूब्स दबाने लगी। फिर पंकज ने देखा कि मैं उसको बूब्स दबाकर दिखा रही हूँ और फिर उस लड़के ने सामने देखा और कहा कि क्या आप दोनों हमारे साथ मैं मिलकर यह सब करना चाहोगे? उस लड़के ने पंकज से पूछा। अब पंकज ने बिना मुझे पूछे हाँ कह दी क्योंकि वो दो लड़के जिस औरत के साथ सेक्स कर रहे थे वो 40 साल की होगी और बहुत बड़े बड़े बूब्स वाली थी। फिर जैसे ही पंकज ने हाँ कहा फिर वो तीनों लोग हमारे पीछे आ गये। मैं ज़रा सी डरी हुई थी।
फिर हमने एक दूसरे का नाम पूछा.. एक का नाम राज था.. उसकी उम्र 21 साल और दूसरे लड़के का नाम सागर था.. उसकी उम्र 23 साल थी और उस औरत का नाम शिल्पा था। फिर पहले राज ने शुरुआत करते हुए मेरे हाथ सहलाने शुरू किए और मेरा मुहं उसकी तरफ करके किस करने लगा। अब सागर भी मेरे दूसरी तरफ आकर मेरे बूब्स दबाने लगा। पंकज शिल्पा की बाहों मैं चला गया था और दोनों प्यार कर रहे थे। इसके बाद मैं पंकज को भूलकर उनके साथ सेक्स करने लगी। अब मैं राज को किस करने मैं साथ देने लगी और अपने एक हाथ से सागर का सर पकड़ कर मेरे बूब्स पर दबा रही थी। फिर थोड़ी देर बाद सागर मेरी चूत चाटने लगा और राज मेरे बूब्स चूसने लगा। मुझे ऐसे लग रहा था जैसे मैं जन्नत मैं पहुँच गयी। फिर सागर अपनी पूरी जीभ मेरी चूत मैं डाल रहा था और जीभ से चूत चाट चाटकर चुदाई कर रहा था और मजे ले रहा था। फिर मैं ज़ोर ज़ोर से सिसकियाँ लेने लगी।
मैंने इससे पहले कभी एक साथ दो लड़को से मजे नहीं लिये थे। फिर मैंने आँख खोलकर साईड मैं देखा तो पता चला कि पंकज शिल्पा को बहुत बुरी तरह से चोद रहा था और शिल्पा रो रही थी क्योंकि पंकज का लंड बहुत बड़ा था। अब फिर.. हम भी तुझे ऐसे ही चोदेंगे.. राज ने मुझे पंकज की तरफ देखते हुए बोला। लेकिन सागर अभी भी मेरी चूत चाट रहा था और मैं अपने अंतिम छोर मैं पहुँच चुकी थी और फिर कुछ दो- तीन मिनट के बाद मैंने अपना सारा पानी सागर के मुहं मैं छोड़ दिया और वो उसे पी गया।
फिर सागर ने अपना लंड निकालकर मेरे मुहं मैं डाला और इसके बाद राज अब मेरी चूत चाट रहा था। फिर मैं सागर का लंड पूरे जोश के साथ चूस रही थी। फिर मूवी खत्म होने वाली थी और सागर ने मेरा सर पकड़ा और जोर जोर से आगे पीछे करने लगा शायद अब वो भी झड़ने वाला था इसलिए एकदम से इतने जोश मैं आ गया था। अब थोड़ी देर मैं ही सागर ने उसका वीर्य मेरे मुहं मैं छोड़ दिया और मैं उसे पी गई और राज ने भी मेरी चूत का जूस पी लिया। फिर उधर शिल्पा पंकज की गोदी मैं बैठी थी और दोनों किस कर रहे थे। फिर शिपा और पंकज ने पूरे कपड़े पहन लिए।
अब मैं भी शर्ट पहनने लग गई.. फिर राज ने कहा कि तुम यह क्या कर रही हो अभी तो पूरी चुदाई बाकी है? इसके बाद मैंने कहा कि लेकिन अब तो मूवी खत्म होने वाली है और अब आगे कुछ करना मुमकिन नहीं है। तो फिर इसे होटल मैं ले जाकर चोदो.. आज तो इसे चोद चोद कर पूरी की पूरी रांड बना दो.. पंकज ने शिल्पा को किस करते हुए बोला। फिर मैं पंकज की बातें सुनकर चोंक गई और अब सब हँसने लगे। इसके बाद जब मूवी खत्म हुई फिर मैं पंकज के साथ जाने लगी। फिर एकदम से राज ने मेरा हाथ पकड़ा और बोला आज तू हमारे साथ चल.. हम तुझे तेरे घर पर छोड़ देंगे। अब मैं कुछ बोलती उससे पहले सागर ने मेरी कमर पर हाथ रख कर मुझे ले गया और पंकज शिल्पा को लेकर चला गया। फिर मुझे बिलकुल भी विश्वास नहीं हुआ की पंकज मेरा बॉयफ्रेंड किसी और औरत के साथ चला गया और मुझे दो अंजान लड़को के साथ छोड़ गया।
फिर रास्ते मैं मुझे पता चला था कि शिल्पा जो पंकज के साथ गई थी वो राज और सागर की माँ थी। मुझे बिलकुल भी विश्वास नहीं हुआ.. फिर मैंने उनसे पूछा कि क्या तुमने अपनी माँ को भी चोद डाला? फिर सागर कहने लगा कि हमारी माँ रंडी है और उसे भी नहीं पता होगा वो अब तक कितनों से चुदी हुई है। फिर राज और सागर मुझे एक गार्डन लेकर गये और वहाँ पर हम एक बेंच पर बैठ गये। अब मैंने देखा कि वहाँ पर सभी लोग हम उम्र थे और कुछ कपल आधे नंगे एक दूसरे की बाँहों मैं बाहें डालकर प्यार कर रहे थे और कुछ लोग रंडियों को लेकर वहाँ पर आए थे। फिर राज ने मेरे बूब्स दबाने शुरू किए और सागर मेरी गर्दन पर चूमने लगा लेकिन ऐसी जगह पर मुझे सेक्स करने का ज़रा भी मन नहीं था। लेकिन मुझे बस दिखावा करना पड़ा।
फिर राज बैठ गया और इसके बाद मुझे राज ने उल्टा खड़ा किया और अब मेरी स्कर्ट थोड़ी उँची करके उसके लंड पर मेरी चूत सेट हो जाए ऐसे अपनी गोद मैं बैठाया और फिर मेरी चुदाई शुरू की। फिर राज ने चुदाई करते करते मेरी शर्ट के बटन खोल दिए और मेरे बूब्स दबाने लगा। फिर सागर ने अपनी ज़ेब मैं से केमरा निकाला और मेरी वीडियो बनाने लगा। फिर राज मुझे कमर से पकड़ कर जोर जोर से ऊपर नीचे करने लगा। अब राज मेरी धमाधम चुदाई किये जा रहा था। फिर उसने करीब दस मिनट तक मुझे चोदा और फिर तेज और जोरदार धक्को के साथ झड़ गया। फिर राज की चुदाई खत्म होने के बाद उसने मुझे सागर का लंड चूसने को कहा और राज वीडियो बनाने लगा। अब उन दोनों ने मेरी पूरी चुदाई का वीडियो बना लिया था। फिर थोड़ी देर बाद मैं सागर का लंड ना चाहते हुए भी चूसने लगी। फिर करीब दस मिनट चूसने के बाद वो भी झड़ गया और उसने पूरा का पूरा वीर्य मेरे मुहं मैं लंड को हिला हिला कर निकाल दिया और एकदम शांत हो गया जैसे कि उसकी पूरी जान मेरे मुहं मैं ही निकल गई हो।
फिर पता नहीं क्या हुआ लेकिन सभी लोग भागने लगे और गार्डन खाली करने लगे। सागर ने भी जल्दी से अपना लंड पेंट के अंदर डाला और राज और सागर भाग गये। अब मैं आधी नंगी बेंच पर बैठी थी। फिर मैंने अपनी स्कर्ट ठीक की और फिर शर्ट पहनती कि उसके पहले पुलिस आ गयी। फिर मैं बहुत डर गयी। अब पुलिस ने आकर मुझे पकड़ा और इसके बाद मुझे वो लोग पुलिस स्टेशन ले जाने को कहने लगे। फिर मैंने शर्ट पहनी और पुलिस की जीप मैं बैठ गयी। फिर वो लोग मुझे और 2-3 लोगों को पुलिस स्टेशन ले गये। फिर मैंने अपना पता बताया और उन्होंने मुझसे कुछ बातें पूछी और मेरे साथ साथ सभी लोगो को छोड़ दिया और कहा कि अगली बार कुछ ऐसा हुआ तो नहीं छोड़ेगे। इसके बाद उसके बाद मैं घर पर आ गई और मैंने अपने बॉयफ्रेंड से रिश्ता तोड़ दिया और इसे एक हादसा समझकर भुला दिया ।।

सगी मौसी को ही चोद दिया | Desi Family Sex Stories

 मैंने अपनी मौसी के साथ गंदा सेक्स किया! मैंने मौसी को बुर्का और हिजाब लाकर दिया। मुझे मौसी ने पहना और अपने बुर्के में डाल दिया। मैंने मौसी की गांड चाटी और उनका पेशाब भी पीया।

मित्रो, आपने मेरी मौसी-मौसा के साथ थ्री-सम सेक्स की मेरी कहानी पढ़ी।

प्रिय, अब गन्दा सेक्स:

उस दिन मौसा काम पर गया था, और मैं और मौसा चुदाई में लगे हुए थे।

सेक्स करने के बाद हम दोनों बहुत थक गए थे, इसलिए बेडरूम में आकर सो गए।

मौसी ने नीली ब्रा, लाल पैंटी और मेरी पिंक पैंटी पहनी हुई थी।
हम दोनों केवल इन कपड़ों में सो गए।

थकान की वजह से मुझे पता ही नहीं चला कि मुझे मौसा जी मिल गया था।
वे आए, स्वस्थ हुए, खाना खाकर हमारे पास आकर सो गए।

मेरे दोनों अगल बगल में मौसा मौसी सो रहे थे, और मैं बीच में था।
हम तीनों एक चड्डी में सो गए।

मेरी नींद खुलने पर मैंने देखा कि मौसा जी हॉल में सोफे पर चड्डी में बैठे हुए खाना बना रहे थे, और मौसा जी गाउन पहने हुए किचन में काम कर रहे थे।
ऊपर से उनकी पीजी की लड़कियां नीचे आकर मौसी से बात कर रही थीं।

मैं उठकर बाथरूम से साफ होकर किचन में गया और पानी पीने लगा।
मैं वापस आ गया जब मौसी ने मुझे देखा और स्माइल दी।

लड़कियां फिर अपने कमरे में चली गईं।
हम तीनों एक सोफे पर बैठ गए।

मैं अपने पति से कहा कि मेरी गांड दर्द हो रहा है।
“मुझे तो बहुत मज़ा आया,” मौसी ने कहा, हंसते हुए।

हम फिर से सेक्स विषय पर चर्चा करने लगे।
मैं अब मौसी मौसी से खुलकर बोलने लगा।

मैंने पूछा कि आपकी पहली सुहागरात कैसी रही?
“इन्होंने मुझे इतना चोदा था कि मेरी सील तोड़ दी और खून बह गया,” मौसी ने कहा।

मैंने पूछा, मौसी जी, क्या इसका अर्थ है कि शादी से पहले आपको कोई दूसरा नहीं चोदा था?
हाँ, मैंने किसी से चुदवाया नहीं था।

मैंने पूछा कि मैं चुदवाया नहीं था और कोई नहीं मिला था।
उन्हें हंसते हुए कहा कि मन बहुत था, लेकिन कोई सही आदमी नहीं मिला। मैं कोई ऐसा दोस्त चाहता था जिसके साथ मैं स्वतंत्र रूप से सेक्स कर सकता था।

मैंने पूछा, “ओके मौसी, आपका मन तो था लेकिन लंड नहीं था, इसलिए आप मौसा को पैक माल की तरह मिल गया।”
मौसी: हाँ।

अब मैंने मौसा जी से पूछा: और आपका सीन क्या था? शादी से पहले आपने किसी की शादी की थी?
हां, मोसा ने कहा। एक की क्या..। मैंने कई लोगों को बाहर निकाला था।

मेरे मौसा का व्यक्तित्व बहुत दिलचस्प था; पीजी में रहने वाली लड़कियां उनके साथ सैट हो गईं।

फिर मौसी ने उन लड़कियों को किचन में बुला लिया और कहा, “जाओ, मैं काम करती हूँ।” तुम अपने अंकल के पैर दबाते रहो। उन्हें बहुत परेशानी हो रही है।
लड़कियां ही कमरे में जाकर मौसा जी के पैर दबाते थे।

उस समय मौसा जी चड्डी में सो गए।
धीरे-धीरे मौसा जी ने लड़कियों को पकड़कर उनके ऊपर भी तेल लगाने को कहा।

जब वे तेल डालने लगीं, मौसा जी धीरे-धीरे लड़कियों को पकड़कर उनके साथ सेक्स करने लगे।

फिर मैंने पूछा, मौसी, उस समय आप कहां रहते थे?
मैं अपनी सहेली के घर चली जाती थी, वह कहती थी। तुम्हारे मौसम के लिए मैं कुछ भी कर सकता हूँ।

हमारे बीच चुदाई की बातें इसी तरह होती रहीं।

शाम होते-होते महफ़िल जम गया।
जैसे ही मौसा जी ने शराब की बोतल खोल दी, हम तीनों दारू पीने लगे।
हम धीरे-धीरे पैग करते रहे और दो घंटे में चार चार पैग हो गए।

अब हम तीनों भोजन खाकर भूखे हुए। हम सब एक दूसरे को चिपककर सो गए जब हमें बहुत नशा हो गया था।

मौसी की चूत में उंगली डालकर मैं उसके दूध को मुँह में दबाकर सो गया।

सुबह मौसा जी अपने काम पर चले गए।
मैं ट्रैनिंग किया।
घर के काम में मौसी बिजी हो गईं।

फिर मैं वापस आया और फ्रेश होकर सो गया।
मौसी लेट गई।

मैं मौसी के ऊपर चढ़ गया और उनके बाजू में लेट गया।
मैंने अपना फोन निकाला और मौसी और मैं एक दूसरे से पॉर्न देखने लगे।
पॉर्न देखने में बहुत मजा आया।

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मुझे मौसी ने किस किया।
मैंने पूछा कि क्या तुम पॉर्न देखती हो, मौसी?
हां, तुम्हारे मौसा मुझे दिखाते हैं, जब हम दोनों बेड पर न्यूड लेटे हुए हैं, मैंने कहा।

मैंने मौसी से पूछा कि वह किस श्रेणी के पॉर्न वीडियो को पसंद करती है?
“मुझे थ्रीसम और बाथरूम सेक्स बहुत पसंद है,” मोसी ने कहा।

मैंने पूछा कि क्या आपने कभी थ्रीसम संबंध बनाए हैं?
मौसी ने हां कह दिया।

अब मौसी ने पूछा कि तुम्हें किस तरह की चुदाई की फिल्म देखना अच्छा लगता है?
मैंने कहा, “मौसी, मुझे तो दो ही केटेगरी अच्छे लगते हैं।” एक फिल्म में एक बंगाली महिला को व्हाइट रेड साड़ी में चुदाई करते देखा जाता है, जबकि दूसरी फिल्म में एक बुरका और हिजाबी लड़की की चुदाई होती है। मैं इन दो सेक्स वीडियो को बहुत पसंद करता हूँ।

तब मेरी प्यारी मौसी ने कहा कि मैं आज तुम्हारी दोनों ख्वाहिशें पूरी करूँगी। मुझे पहले हिजाब पहनना सिखाओ।
मैंने कहा कि बाजार से हिजाब लाना होगा।

मैं बाजार चला गया जब मौसी ने ओके कहा।

मौसी के लिए मैंने हिजाब और बुरका खरीदा।
मैंने मौसी के लिए भी एक सेक्सी ब्रा पैंटी खरीद ली।
हॉट सी नाइटी के साथ फेसक्रीम, आइ-लाइनर और काजल भी ले गया।
मैंने कुछ मोगरा के गजरा भी ले लिया।

मौसा भी घर आ गया।
मैंने आज रात की योजना भी बताई और बाजार से खरीदा सब कुछ दिखाया।

“आज मैं बहुत थक गया हूँ,” मोसा ने कहा। तुम दोनों मनोरंजन करो।
हमने एक साथ कहा कि कोई बात नहीं।

मैंने मौसी की तरफ देखा और उनकी हल्की मुस्कान ने बताया कि वह मेरे साथ ये सब करने में कितनी उत्सुक थीं जब हमारे मुख से ये बात निकली।

रात में हम सभी को डिनर और अन्य व्यस्तताओं से छुट्टी मिली।
वीडियो में मैंने मौसी को सारा हिजाब और बुरका पहनकर तैयार होने के लिए कहा था।

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मैंने मौसी से कहा कि मैं कमरे में जाकर इंतजार करूँगा। आधे घंटे में मैं तैयार होकर आ जाऊँगा।

मैं रूम में गया, खुद को तैयार करके लेट गया और मौसी के आने का इंतजार करने लगा।

तब तक मैं हिजाब वाली पॉर्न देखता रहा और अपने लौड़े से खेलने लगा।

रूम में, मौसी ने पूरा मेकअप कर लिया और नई चड्डी ब्रा पहन ली।
तब उन्होंने काला बुरका पहना और मेरे कमरे में प्रवेश किया।

जब मैंने मौसी को देखा, तो मैं चौंक गया और खड़ा हो गया कि ये कौन सी मोहतरमा आई है।
जब मौसी मेरे पास आईं, तो मैंने उनकी चाल से पता चला कि ये मौसी हैं।

मैंने मौसी को अपनी बांहों में पकड़ा और उनसे कहा, “आओ मेरी बेगम..।” मैं बहुत देर इंतजार कर रहा था।
मैं उनकी गर्दन को चुंबन देने लगा।
मुझे भी मौसी चूमने लगी।

हम कुछ मिनट तक किस करते रहे, फिर मौसी ने मुझे अपने बुरके के नीचे ले लिया. फिर मैंने मौसी की चूत चाटना शुरू किया।

सेक्सी आवाज में मौसी ने मुझसे कहा, “आह चाट ले..।” आह, आज पूरी हिजाबी मौसी खाओ!

थोड़ी देर चूत चाटने के बाद मैं बाहर निकला और मौसी को खड़ी करके बुर्क़े के ऊपर से ही उनकी गांड और बूब्स दबाने लगा।
मैंने मौसी को कुछ मिनट चाटने, चूमने और दूध मसलने के बाद काम को आगे बढ़ाने की सोची।

बुर्क़े में मौसी खड़ी थीं।
नकाब उनके होंठों से नीचे सरक गया।

मैं अपने सारे कपड़े निकालकर मौसी के सामने नंगा हो गया।
मेरे सामने मौसी हाथ बांधकर खड़ी थीं।

मौसी के पीछे आकर मैंने उनकी फूली हुई गांड को दांतों से चबाना और दबाना शुरू कर दिया।

मौसी लगातार रोई और रोई।
मैं अपना काम आगे बढ़ाता हुआ उनके दूध तक आ गया, फिर पीछे से हाथ आगे लाकर उनके मम्मों का मलींदा बनाने लगा।
धीरे-धीरे मौसी की चूत को भी एक हाथ से दबाना शुरू कर दिया।

कुछ देर बाद मैं मौसी का बुरका उठाने लगा।
मैं चड्डी के ऊपर से ही उनकी गांड को चाटने लगा।

मौसी अपने पैर आगे पीछे करते हुए लगातार हटा रही थीं।
तब मैंने मौसी की गांड के छेद के पास से चड्डी निकालकर अपनी जीभ उसके गांड में डाल दी।

मैंने मौसी की गांड को चाटना शुरू किया जैसे ही उनकी मादक आह निकल गई।
“आह आह…” वे खड़े होकर बोलने लगे।

मैं मौसी की गांड और चूत चाटने लगा।
मौसी ने मुझे हटने को कहा जब मैंने उसकी चूत चाटना शुरू किया।

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तब मैंने कहा: “अब मज़ा आना शुरू हुआ है।” मौसी, तुम मुझे क्यों निकाल रहे हो?
मुझे सुसू आ रही है, मौसी ने कहा। जरा हटो, मुझे पहले शांत होने देना।

जब मैं मौसी की चूत से मुँह नहीं हटाया, तो उनकी चूत से पेशाब की कुछ बूंदें निकल आईं।

मैंने मूत चाटकर गन्दा सेक्स किया।
उनकी सुसू का स्वाद बहुत अच्छा था।

मैंने अपनी पूरी जीभ मौसी की चूत में डाल दी और उसके मुँह से लगभग पूरी तरह ढक दी, जैसे मैं उनकी चूत से निकलने वाली हर एक बूंद को खराब नहीं करने दूंगा।

“पेशाब आ रहा है, हट जाओ…” मौसी लगातार कहती थीं कि मुझे हटाना चाहती थीं।
मैंने उन्हें हाथ से संकेत दिया कि वे मेरे मुँह में ही मूत दें।
और मैं मौसी की चूत चाटने लगा।

मौसी को पेशाब नहीं रोक पाया, तो उन्होंने अपनी चूत का नल खोला।
मुझे मूत टपकना शुरू हुआ।
मैंने मौसी की चूत से पूरा पानी पी लिया।

पेशाब पीने के बाद मैं मौसी की चूत चाट रहा था, तो कभी उनकी जांघों पर जीभ से चूत का पानी लगा रहा था।

मेरी एक उंगली मौसी की गांड में भी अंदर बाहर हो रही थी।
फिर मैंने मौसी से कहा, “आज भी तुम्हारी गांड मारनी है।”

मौसी ने अपनी गीली चड्डी को मेरे मुँह में डाल दी और अपनी पेशाब से गीले बुर्क़ा को फर्श पर फेंक दिया।
तब मौसी केवल नकाब और ब्रा में थीं, और उनकी पेशाब फर्श पर फैली हुई थी।

मैंने मौसी को फर्श पर लेटने को कहा।
मौसी पेशाब करते हुए लेट गई।

मैं आज उनके साथ पूरी तरह से खुश होने के मूड में था, इसलिए मैं किचन में गया और केक पर क्रीम लेकर आया।
मैंने मौसी की चूत और चूचियों पर क्रीम लगाया।
फिर मैंने कुछ क्रीम अपने लंड में लगाया।

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अब मैंने मौसी को चाटना शुरू कर दिया और उनकी पेशाब को हाथ से समेट लिया।
मेरे लंड को मौसी ने चूसना शुरू किया और सारी क्रीम खा ली।

मैंने कहा कि आपकी क्रीम में शायद स्वाद नहीं है।
मौसी नहीं जान सकीं कि क्या कमी है।

मैंने पेशाब टपका और मौसी के मुँह में लंड डाला।
उनका लंड हट गया और वे कुछ पेशाब पी गए।

अब हम दोनों गीले हो गए और फर्श पर पेशाब कर रहे थे।

फिर मैंने मौसी को चुदाई की मुद्रा में लेकर उनकी चूत में अपना लंड डालकर धकाधक चोदना शुरू किया।

हम दोनों गीले थे, इसलिए फछ फछ की आवाज आई।

वासना का सैलाब कुछ ही देर में बढ़ने लगा और मैंने मौसी को घोड़ी बनाकर चोदना शुरू कर दिया।
मेरा लंड बहुत देर तक चुदाई करने के बाद सूख गया।

मैंने मौसी की चूत से लंड निकालकर उनके मुँह में डाला।
लंड अपनी चरम सीमा पर था, इसलिए बहुत देर नहीं टिक सका और सिर्फ मौसी के मुँह में फट पड़ा।

मैंने मौसी के मुँह में लंड का सारा माल निकाल दिया।
मौसी ने भी लंड को चूसकर चाटकर खाया।

तब हम नहाने गए और फव्वारे के नीचे खड़े होकर नहाने लगे।
फिर कमरे में वापस आकर बेड पर लेट गए।

हम दोनों नंगे ही चिपक कर सो गए और कुछ ही देर में नींद आ गई।

दोस्तो, मौसी के साथ समय बिताना जारी रहेगा।
आपको सेक्स कहानी कैसी लगती है मुझे मेल करें।

नौकरानी से लंड की मालिश कराई

मेरा नाम पुलकित है और मैं एक स्टूडेंट हूँ। ये कहानी मेरे और मेरी नौकरानी की है। जिसका नाम हीना। दोस्तों बात तब की है जब मैं अपनी ग्रेजुएशन की स्टडी के लिए लखनऊ गया था। मैंने कॉलेज में अपना एडमिशन करवाया और रहने के लिए रूम ढूंढने लगा। मुझे रूम कॉलेज से दूर मिला, लगभग 5 या 6 किमी। खैर मैंने वो रूम ले लिया और अपनी स्टडी करने लगा। Garam Kaamwali Porn Story

मैं साइकिल से कॉलेज जाता था फिर वहां से आकर खाना बनाना, रूम साफ करना, और स्टडी भी करना। इसलिए मैं बहुत थक जाता तो मैंने एक फ्रेंड से ये बात बताई तो उसने मुझे कोई नौकरानी रख लेने को कहा। मुझे उसका आइडिया पसंद आया, और मैंने अपने लैंडलॉर्ड से इसके बारे में बात की तो उसने एक नौकरानी का जुगाड़ कर दिया। फिर वो मेरा सारा काम करने लगी।

कुछ दिन बाद उसने मुझे बताया कि खाने का सामान खत्म हो गया है। मैंने उससे कहा जो जो लेना हो उसकी एक लिस्ट बना लो। कल मेरा कॉलेज ऑफ है साथ में चलकर मार्केट से सामान ले लेंगे। उसने ठीक है कहा और सामानों की लिस्ट बना ली।

अगले दिन मैं उसे लेकर सिटी आ गया बस से। फिर हमने सामान खरीदा और फिर बस में आने का वेट करने लगे। कुछ देर बाद बस आ गई लेकिन वो पूरी तरह से भरी थी। हम दोनों भी बस में चढ़ गए पर सीट खाली नहीं थी। और हम खड़े हो गए।

वो मेरे आगे थी और जगह न होने की वजह से मैं भी उससे चिपक कर खड़ा था। मेरा लंड बार-बार उसकी गांड से रगड़ रहा था। मैं गरम होने लगा और मेरा लंड खड़ा हो गया और उसकी गांड में चुभने लगा। वो एक बार पीछे मुड़ के देखी और कुछ कहा नहीं।

खैर फिर हम घर आ गए। उस वक्त रात में 8 बज रहे थे। मैंने उससे रूम पे ही रुक जाने को कहा तो वो मान गई। फिर उसने खाना बनाया और हमने खाना खा लिया। अब मेरी नजर उसके ऊपर थी मैं ये सोच रहा था कि कैसे उसको मनाऊं। फिर मुझे एक आइडिया आया। मैंने उससे कहा कि क्या तुम मेरे पैरों की मालिश दोगी क्योंकि सुबह से चलने की वजह से दर्द हो रहे हैं तो उसने कहा ठीक है और तेल लेने चली गई।

मैंने अपने कपड़े उतार दिए और अंडरवियर भी। और सिर्फ बरमूडा पहन लिया। वो तेल लेकर आई और मेरे पैरों की मालिश करने लगी। उसके हाथों ने जैसे ही मेरे पैरों को छुआ मुझे करंट सा लगा और मेरा लंड लहसाने लगा। थोड़ी ही देर में वो पूरा खड़ा हो गया। अब मेरा लंड बरमूडा में साफ खड़ा दिख रहा था।

वो भी बार-बार उसे देख रही थी। अब मुझसे बर्दाश्त नहीं हुआ और मैंने उसका हाथ पकड़ के अपने ऊपर खींच लिया और उसे किस करने लगा। वो कहने लगी ये गलत है और मुझे धक्का देने लगी। पर मैंने भी उसे कस कर पकड़ रखा था। अब मैं उसके होंठों को चूसने लगा। अब वो भी गरम होने लगी थी। फिर मैंने उसके सारे कपड़े उतार दिए और अपना बरमूडा भी उतार दिया। वो मेरे लंड को देख के आंखें बंद कर ली।

मैंने उसका हाथ पकड़ा और अपना लंड उसके हाथ में पकड़ा दिया पर उसने हाथ हटा लिया। मैंने गुस्से में उसे 2 थप्पड़ मारे और अपना लंड उसके मुंह में डाल दिया। वो रो रही थी पर मैं उसका मुंह चोद रहा था और हाथों से चूची को मसल रहा था।

करीब 15 मिनट बाद मैं उसके मुंह में ही झड़ गया। उसने तुरंत मेरे लंड रस को थूक दिया। फिर मैं उठा और उसी तेल से उसकी मालिश करने लगा। पैर पे, हाथ पे, चूची पे, सब जगह। फिर मैंने उसकी चूत को खोलकर उसमें अपनी एक उंगली घुसा दी। वो सिसिया उठी उयुयुयुयु ईईईईईईईई अह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्..

फिर मैं उसकी चूत को चाटने लगा और अपनी उंगली को अंदर बाहर करने लगा। 10 मिनट में उसका हाथ मेरे सर पे आ गया अब वो भी गरम हो चुकी थी। फिर मैं उठ कर खड़ा हो गया और उसके ऊपर चढ़ के 69 की पोजीशन में लेट गया और अपना लंड उसके मुंह में डाल दिया। इस बार उसने मेरे लंड को चूसना शुरू किया और मैं भी उसकी चूत को अपनी जीभ से चोदने लगा।

10 मिनट बाद वो अकड़ने लगी, मैं समझ गया कि वो झड़ने वाली है इसलिए मैं और तेजी से चूत चाटने लगा। फिर वो झड़ने लगी और मैं उसका सारा रस पी गया। फिर मैं उठा और जाके उसके पैरों के बीच खड़ा हो गया और अपना लंड उसकी चूत पर रगड़ने लगा।

वो फिर से गरम होने लगी और कहने लगी अब देर मत करो जल्दी से मुझे चोद दो पर मैं उसे और तड़पाना चाहता था। इसलिए मैं लंड रगड़ता रहा। कुछ देर बाद उसकी चूत गीली होने लगी तभी मैंने वो जोरदार शॉट मारा और मेरा आधा लंड उसकी चूत में घुस गया, वो मम्म्म अहहहह करने लगी।

मैंने फिर से एक शॉट मारा इस बार मेरा लंड उसकी चूत में जड़ तक घुस गया। वो कराह उठी आआआह्ह्ह् अम्म्म पर मैं कहां मानने वाला था, मैं दनादन उसे चोदता रहा। उसने अपने पैर मेरे कमर पर बांध लिए और बोलने लगी और तेज और तेज मम्म्म साआआआआ ह्ह्ह्ह्ह मजा आ रहा है आह्ह्ह्ह आह्ह्ह्ह मम्म्म.. इधर मैं भी उसे दकादक चोदे जा रहा था। फिर मैंने उसे खड़ा किया और उसका एक पैर उठा कर पीछे से अपना लंड चूत के होल में घुसा दिया और उसे चोदने लगा।

15 मिनट बाद वो झड़ गई पर मैं उसे चोदता रहा। फिर उसने कहा बस करो अब जलन हो रही है तो मैंने अपना लंड निकाल लिया। और उसे कुतिया की पोजीशन में कर दिया और तेल लेकर उसकी गांड में लगाने लगा। वो मना करने लगी कि बहुत दर्द होगा। मैंने कहा धीरे-धीरे करूंगा। पर वो मान नहीं रही थी। बहुत मनाने के बाद वो राजी हुई।

मैंने पहले उसकी गांड में एक उंगली डाली, वो ह्ह्ह्ह्हाह्ह्ह्ह और उठी। फिर मैंने उसका मुंह तकिए पर रखवा दिया और अपने लंड पे तेल लगाया और लंड को गांड के छेद पर फिट किया। और धीरे से धक्का मारा, मेरे लंड का सुपाड़ा गांड में घुस गया। वो ईईईईईई मम्म्म कर उठी, फिर मैं उसकी चूचियों को सहलाने लगा, थोड़ी देर में उसे आराम मिला। फिर मैंने एक जोरदार शॉट मारा और मेरा पूरा लंड उसकी गांड में घुस गया, वो आआआआआआआआआआआ मर गईईईईई चिल्लाने लगी।

उसकी आंखों में आंसू आ गए थे पर मैं रुका नहीं और उसे चोदता रहा। थोड़ी देर बाद उसे भी मजा आने लगा और वो भी अपनी गांड हिलाने लगी। फिर थोड़ी देर में मैं उसकी गांड में झड़ गया और हम नंगे एक साथ चिपक के सो गए। मैं जब तक वहां था रोज उसे चोदता था और वो भी खुलकर मुझसे चुदवाती थी।

मेरी गांड चुदाई की पहली कहानी। Desi Gand Chudai Ki Kahani

Desi Gand Chudai Ki Kahani पढ़े। मैं बहुत गर्म हूँ। मेरी चूचियों और मटकती गांड पर मर्दों का ध्यान है। मैं खुश हूँ। मैं किसी भी लंड को अपने अंदर लेने को तैयार रहती हूँ।

नमस्कार दोस्तो, मैं खुश हूँ कि आपके सामने अपनी पहली सेक्स कहानी लायी हूँ. मैं आशा करती हूँ कि आप इसे पसंद करेंगे।

मेरी उम्र २२ वर्ष है। यह घटना तीन साल पहले हुई, जब मैं 19 साल की थी।

मैं 5 फुट 2 इंच लंबी हूँ और मेरा फिगर 34-30-36 है। मैं बहुत गर्म हूँ। भूखे कुत्तों की तरह लोगो की दृष्टिकोण मेरी चूचियों और मटकती गांड पर हैं।

वासना से भरी उनकी निगाह भी मुझे बहुत अच्छी लगती हैं। मैं भी ज्यादा से ज्यादा खुली हुई ड्रेस पहनकर मर्दों को रिझाने की कोशिश करती रहती हूँ। अब मुझे चुदवाना बहुत अच्छा लगता है।

मगर ये Desi Gand Chudai Ki Kahani तब की है जब मैं कुंवारी थी और मैंने किसी का लंड या उंगली भी नहीं देखा था।

मैं मेरे पापा के एक दोस्त की शादी में जा रही थी। हम सभी पापा के दोस्तों के घर गए। जिनकी शादी थी वे हमारे पापा के अच्छे दोस्त थे इसलिए हमारे पूरे परिवार को जाना पड़ा।

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मेरे परिवार में मेरी मम्मी और पापा हैं; मेरा भाई अधिकांश समय बाहर रहता है क्योंकि वह काम करता है। शादी में मैं और मेरे माता-पिता गए थे।

हम तीनों शाम को वहां पहुंचे। जब हम वहाँ पहुंचे तो माँ ने कहा कि बेटा हमे आने में देर हो गई है अब आराम करने का समय नहीं है, जल्दी से तैयार हो जाओ।

मैं जल्दी से शादी की तैयारी करने लगी। मैं शादी में जाने के लिए लैगी और स्लीव लैस टॉप पहनी हुई थी। इस कपड़े में मेरे दूध बड़े मस्त उठे हुए दिखाई देते थे। हमेशा की तरह, मर्दों की कामुक निगाहें मेरी गांड और चूचियों को देख रही थीं।

शादी का कार्यक्रम शुरू हुआ। बारात में लड़कों का डांस मैंने देखा। यह बहुत मनोरंजनपूर्ण था। मैं भी कुछ लड़कियों के साथ डांस की।

शादी में कुछ समय बिताने के बाद मैं छत पर चली गई। वहां घर के पीछे की तरफ अंधेरा था। जब मैं दीवार के पास गई तो एक लड़का सुसु कर रहा था। उसने फोन की लाईट जला दी, जिससे मुझे उसका लंड दिखाई दिया। उसने सुसु करने के बाद अपना लंड आगे पीछे करने लगा।

न जाने कैसे एक छोटा लकड़ी का टुकड़ा ऊपर से नीचे गिर गया।वह दीवार से पीछे हो गया जब उसने ऊपर की तरफ देखा।

जब मैं सीढ़ियों पर चढ़ने लगी, तो एक लड़का सीढ़ियों के नीचे खड़ा था। मैं उसे देख रहा था। मैंने सोचा कि यह वही लंड था जिसे मैंने अभी देखा था। मैंने उसकी तरफ नहीं देखा। मैं माँ के पास गई।

शादी का कार्यक्रम लगभग समाप्त होने लगा था। थकान से मैं सोने लगी। मुझे कुछ देर इधर-उधर घूमने के बाद नींद आने लगी, इसलिए मैंने अपनी माँ को बताया कि मुझे सोना है।

तो मेरी माँ मुझे एक कमरे में ले गई, जहां बहुत से बिस्तर थे। मम्मी ने दीवार के पास बिस्तर पर सोने को कहा। मैं दीवार से कुछ दूर सो गई।

सभी लोग फरवरी महीने में रजाई ओढ़कर सो रहे थे। कुछ बिस्तर खाली भी थे। मैं सो गई तो मेरी माँ लाइट बंद करके चली गई।

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जब मैंने रात को उठकर देखा कि कोई मेरे पीछे सो रहा था और मेरी जांघ पर हाथ लगा रहा था। डर से मैं हिली ही नहीं बस सोती रही।

वह कुछ देर बाद मेरे चूतड़ों को दबाने लगा लेकिन मैं सिर्फ दम साधे सोती रही।

थोड़ी देर बाद वह मेरे पैरों के बीच में अपना हाथ घुमाने लगा। उसका ये स्पर्श मुझे भयभीत और बहुत अच्छा भी लगा।

मेरी चूत पर अचानक उसका हाथ आने लगा। उसका हाथ मेरी चूत तक नहीं पहुंच पाया क्योंकि मेरे पैर एक दूसरे से चिपके हुए थे। मैंने अपना एक पैर आगे बढ़ाया जब उसने कुछ ज्यादा कोशिश की। उसने इससे पता लगाया कि मैं जाग रहा हूँ। बस वह लैगी के ऊपर से मेरी चूत मसलने लगा। फिर उसने पीछे से मेरी लैगी में हाथ डाला।उसने उठकर मेरी गांड दबाई और फिर मेरी चूत मसलने लगा।

अब तक उसके किए गए कामों से मेरी चूत गीली हो गई। वह कभी-कभी मेरी गांड के छेद पर उंगली घुमाता, कभी-कभी मेरे दाने को रगड़ता।

फिर उसने मेरी लैगी अचानक घुटनों तक उतार दी। मैं भी सीधा सो गयी। वह मेरी चूत को ऊपर से मसलने लगा। फिर उसने मेरा हाथ अपने लंड पर रखा। 6 इंच लंबा और 2 इंच मोटा लंड था। उसने मेरा हाथ पकड़ लिया और लंड पर आगे पीछे करवाने लगा।

उसका लंड मसलने में मुझे बहुत मजा आया। उसकी लंड की चमड़ी बहुत आराम से आगे पीछे हो रही थी, क्योंकि थोड़ा पानी उसके लंड से बहने लगा था। मैं उसके लंड को देखना चाहती थी लेकिन अँधेरा और झिझक के कारण मैं नहीं कर सकी।

कुछ देर बाद उसने हाथ हटा दिया और वह अपने लंड को मसलता रहा। थोड़ी देर बाद, वह नीचे को खिसक गया और मुझे अपनी तरफ कर लिया। उसने पैंटी को खींचकर मुझे पूरी तरह से नंगा कर दिया और मेरी टांगों को खींच लिया। नंगी होने के बाद उसने सामने से मेरी चूत चाटने लगा।

उससे चुत चटवाने में मुझे बहुत मजा आया। वह कभी-कभी जीभ डालकर मेरी चूत को चाटता और कभी-कभी दांतों से। अब तक मैं बहुत गर्म हो गई थी। मेरे पैर स्वचालित रूप से खुल गए और हवा में उठ गए। वह मेरी चूत को बुरी तरह चाट रहा था। मैं अचानक अकड़ गई। उसने मेरी चुत से पानी पी लिया।

वह अब मेरा सिर अपने लंड की ओर दबाने लगा। मैं उसकी इच्छा को समझ गई। मैं भी उसके लंड की ओर मुड़ गई। मैंने उसके लंड की चमड़ी अपने हाथ से पीछे की और उसके आगे का हिस्सा अपने मुँह में लेकर उसे चूसने लगी। लंड थोड़ा नमकीन था।

जब मैं जोर से उसके लंड को चूस रही थीं, उसने मुझे रोका और ऊपर की तरफ खींच लिया। अब उसने मुझे सामने से घेर लिया। मेरी चूत में उसका लंड था। फिर उसने मेरे मम्मों को चूसा और मेरा टॉप उतारा। मैं उसका लंड अपनी चूत में रगड़ रही थीं। तभी मेरी चुत के छेद में उसका लंड आ गया। उसने दबाव दिया जैसे ही मैंने लंड को छेद से लगाया। मेरी चुत की फांकों को उसके लंड की टोपी ने चीर डाला। मुझे इतना दर्द हुआ कि मैं अचानक उठ गई और उसका लंड बाहर निकल गया।

तुमने पहले कभी ऐसा किया है? उसने फुसफुसाकर पूछा।

मैंने धीरे-धीरे कहा कि मैंने ऐसा नहीं किया।

ठीक है, उसने कहा।

वह फिर से मेरी चूत पर लंड रगड़ने लगा। लंड से चुत का दाना रगड़ने में मुझे बहुत मजा आया। तभी उसने मेरी चूत पर थूक लगाकर अपना लंड पकड़ा।

वह चुत में लंड डालने की कोशिश करने लगा। पहले से ही मुझे डर था कि दर्द होगा। मैं ऊपर चढ़ गई और उसका लंड फिर से फिसल गया।

मैंने उससे कहा, “अंदर मत डालो, ऊपर से मजा करो।”

ठीक है, उसने कहा।

फिर उसने मुझे पीछे से घेर लिया और अब वह मेरी गांड में लंड रगड़ने लगा। उसके लंड मुझे बहुत मजा आ रहा था।

मुझे गांड हाथ से खोलने को कहा। वह मेरे छेद पर लंड का सुपारा रगड़ने लगा जैसे ही मैं अपनी गांड खोली। मैं बहुत खुश थी।

उसने फिर से मेरी गांड के छेद पर थूक लगाकर रगड़ने लगा। मैंने सोचा कि ये सिर्फ लंड रगड़ेगा। मैं उसके खुले लंड का मजा लेते हुए आराम से गांड को ढीली कर रही थी। तब उसने अपनी उंगली से मेरी गांड में क्रीम लगाया।

मैंने पूछा कि आप इन पर क्या लगा रहे हैं?

कुछ नहीं, बस इससे मजा ज्यादा आएगा, उसने कहा।

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लंड घिसने के बाद उसने मुझे एक टांग आगे करने को कहा। जैसे ही मैंने अपनी टांग आगे बढ़ाया, उसका लंड मेरी गांड के छेद पर खेलने लगा। उसकी लगाई हुई क्रीम मुझे बहुत अच्छा लगा।

मुझे पता नहीं था कि क्या होने वाला था, इसलिए मैंने अपनी गांड को पूरी तरह ढीला छोड़ दिया। मैं सिर्फ गांड में दर्द महसूस करने लगी थी।

अपनी गांड को खोले हुए उसके लंड के सुपारे से मैं खुशी से मजा ले रही थी। वह अचानक मेरी गांड में अपने लंड का टोपा डालने लगा। उसने एक हाथ से मुझे पकड़ लिया और दूसरा हाथ मेरे मुँह पर रख दिया, इससे पहले कि मैं चीख या चिल्लाऊँ। मैं असहनीय दर्द महसूस कर रही थी। किंतु उसका लंड मेरी गांड में काफी अंदर था।

वह मुझे चूमते हुए धीरे-धीरे अपनी कमर हिलाता रहा।

जब मेरा दर्द कुछ कम हुआ तो उसने मुझे छोड़ दिया और मेरे एक दूध को मसलने लगा। मुझे इससे मज़ा आने लगा और मैंने गांड ढीली छोड़ दिया।

उसी समय उसने एक तीव्र धक्का मारा। उसका लंड अंदर घुस गया। उसके हाथ मेरी चूची को मजा दे रहे थे, हालांकि मुझे बहुत दर्द हो रहा था। मैं दुःख और खुशी दोनों के मिश्रण में मग्न थी।

थोड़ी देर बाद उसकी गति कम होने लगी। मुझे लगता था कि उसका लंड मेरी गांड में एक डंडे की तरह जा रहा था।

अब भी मुझे मजा आ रहा था। मैं भी उसका साथ देकर गांड हिला रही थी। थोड़ी देर बाद उसने धक्कों को तेज कर दिया। इस समय मुझे बहुत अच्छा लगा। पहली बार मैंने अपनी गांड में एक लंड डाला था। अचानक उसने मेरी गांड को बहुत जोर से पीटा। तभी उसने एक और कठोर झटका मारा और पूरा लंड मेरी गांड में डाल दिया।

मैं अपने अंदर रस की पिचकारी महसूस कर रहा था। फिर वह रुक गया और उसका लंड ढीला हो गया।

अब उसने मुझे सीधा करके मेरी चूत चाटने शुरू किया। मैं फिर से झड़ गई। उसने फिर से मेरी गांड मारी और मेरी चूत पर लंड रगड़ा।

मैंने सुबह उठकर देखा कि वह पहले ही चला गया था। सुसु करते हुए उसने कुछ देर बाद मुझे देखकर मुस्कुराया। रात को मुझे पता चला कि इसने ही मेरी गांड मारी थी।

उसने संकेत दिया कि चुत चुदाई का समय आ गया है। मैंने हंसते हुए नजरें नीचे कीं।

प्रिय लोगों, आप सभी को मेरी पहली Desi Gand Chudai Ki Kahani पसंद आई होगी।

मुझे मेल करके जरूर बताएं; मैं जल्द ही आपके लिए अपनी चुत चुदाई की कहानी लाऊंगी।

पड़ोस वाली सुंदर आंटी को चोदा। Aunty Ki Chudai Hindi Me

Aunty Ki Chudai Hindi Me में पढ़ें कि गांव की महिलाएं और लड़कियां मुझसे चुदवाने को तरसती हैं क्योंकि मैं बहुत मोटा हूँ। लेकिन मैंने सबसे पहले पड़ोस में रहने वाली एक सुंदर आंटी को चोदा था।

मैं ऋतिक हूँ।

मैं गांव का 19 वर्षीय देसी गबरू लड़का हूँ; मैं सांड जैसा हो गया हूँ क्योंकि मुझे अच्छी खिलाई पिलाई मिलती है।

गांव की लड़कियां और महिलाएं मेरी कद काठी को देखकर मुझसे चुदवाने को तरसती हैं।

अब तक मैंने बहुत सी चूतें फाड़ी हैं।

गांव के नवजात बच्चों का डीएनए टेस्ट करवाया जाएगा तो मेरे बीज से लगभग आधे बच्चे पैदा होंगे।

मेरा यौन जीवन इस Aunty Ki Chudai Hindi Me से शुरू हुआ।

मैं उस समय तक किसी को नहीं चोदा था।

मैं जानता था कि बहुत सी भाभियां और आंटियां मुझे अपने साथ ले जाना चाहती हैं।

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मेरे आसपास एक आंटी रहती थीं।

हमारे पास उनसे काफी संपर्क था।

मैं लगातार उनके घर आता जाता था।

मैं अक्सर उनके घर में अकेले सो जाता था।

क्योंकि गांव में इसे बुरा नहीं मानते..। और क्योंकि यह मेरे पड़ोस की बात थी, मुझे कुछ अधिक छूट मिली।

पड़ोस में रहने वाली आंटी का फिगर 34-30-36 था।

उनके उठी हुई गांड और बड़े ही सुंदर बूब्स थे।

जब भी मैं आंटी को देखता था, मैं उन्हें चोदना चाहता था।

आंटी एक बार नहाने जा रही थीं जब मैं उनके घर गया।

आंटी ने मुझे देखा तो पूछा: ऋतिक, क्या कर रहे हो?

मैंने कहा कि कुछ नहीं, बस आया था।

ओके, अभी बाहर जाओ, मुझे नहाना है, आंटी ने कहा।

मैंने कहा कि मैं छत पर जा रहा हूँ, आंटी।

हां, जाओ, आंटी ने कहा।

आप सब जानते हैं कि गांव में नहाने के लिए बाथरूम नहीं हैं। या बहुत कम घरों में होते हैं।

आंटी ने कोई बाथरूम नहीं रखा था।

आंगन में स्थित हैंडपंप पर ही वे नहाती थीं।

मैं ऊपर चला गया।

आंटी की छत जाल से ढकी हुई थी।

धूप और ताजी हवा के लिए बनाया गया था।

जाल के पास चुपचाप बैठकर मैं आंटी को देखने लगा।

कुछ देर बाद आंटी ने अपने कपड़े उतारने शुरू कर दिया।

आंटी ने पहले अपना ब्लाउज और फिर अपना पेटीकोट खोला।

अब आंटी पैंटी और ब्रा में थीं।

कुछ देर बाद आंटी ने पैंटी और ब्रा भी उतारे।

अब आंटी पूरी तरह से नंगी होकर पानी पी रही थीं।

मेरा उत्साह लगातार बढ़ा।

आज आंटी को नग्न देखने की पहली बार थी।

उनके बूब्स और गांड बेहद सुंदर लग रहे थे।

आंटी बहुत सुंदर लग रही थीं।

मैं अभी नीचे जाकर आंटी को चोद दूंगा।

वह सिर्फ लंड हिलाने के अलावा कुछ नहीं कर सका।

कुछ देर बाद आंटी ने पानी पी लिया और फिर कपड़े पहन लिए।

फिर आंटी ने कहा कि मैं नीचे आ जाऊँ। मैंने पीया है।

मैं आंटी के सामने खड़ा हो गया।

मैं सीधा खड़ा था।

मेरे लिंग को आंटी देखने लगी।

वह हैरान होकर मुझे देखकर पूछा: ये क्या है?

मैंने कहा कि कुछ नहीं है।

यह कहते ही मुझे शर्म आ गई और मैं भागकर अपने घर चला गया।

आंटी जोर से हंसने लगी।

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उन्हें हंसते हुए सुनकर मुझे अजीब सा महसूस हुआ।

मैं अपनी कार्रवाई को समझ नहीं पा रहा था।

लंड ने बैठने का नाम नहीं लिया।

घर पहुंचते ही मैंने बाथरूम की ओर देखा और अंदर जाकर मुठ मारने लगा।

उस समय मेरी आंखें बंद हो गईं और आंटी की नंगी जवानी मेरे सामने थी।

मुठ मारने के बाद शांत हो गया।

फिर मैं नहाने चला गया, और कुछ देर बाद आंटी के घर फिर से आ गया।

ऋतिक, अब क्या हुआ? आंटी पूछा।

मैंने कहा कि मैं सिर्फ आपको देखने आया था, आंटी।

ठीक है, बैठो, आंटी ने हंसकर कहा।

मैंने आंटी को बताया कि मुझे बहुत अच्छा लगता है।

ठीक है, आंटी ने कहा। इसलिए तुम मुझे देखने आते हो क्या?

मैंने कोई उत्तर नहीं दिया।

कुछ देर बाद आंटी ने हंसते हुए कहा कि तुम आ जाओ। तुम भी आना चाहते हैं।

अब मैं हर दिन आंटी के घर जाकर कैरम बोर्ड खेलने लगा।

आंटी के पति, यानी अंकल जी, एक दिन हिमाचल में काम करने चले गए।

मैं आंटी के घर पहुंचा।

ऋतिक ने कहा कि आज तुम्हारे अंकल हिमाचल गए हैं, आंटी ने कहा। अब तुम मेरे घर में सो जाओगे।

मैं एक अवसर पाया।

मैंने कहा: ठीक है, आंटी।

जब मैं घर पहुंचा, मुझे बताया गया कि मुझे आंटी के घर में सोना है।

घरवालों ने कुछ नहीं कहा।

कुछ समय बाद रात हो गई। आंटी के घर मैं गया।

उस समय रात के दस बज चुके थे।

आंटी ने घर में दो कमरे बनाए थे। मेरे लिए आंटी ने एक कमरे में सोने की व्यवस्था की थी।

लेटकर मैं फोन चलाने लगा।

दूसरे कमरे में आंटी टीवी देख रही थीं।

थोड़ी देर बाद आंटी ने टीवी बंद कर दिया और सो गईं।

वे फोन चलाने लगीं।

मैं सो नहीं रहा था।

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मैं चुपचाप आंटी के कमरे के पास गया और धीरे-धीरे दरवाजा खोला।

तो मैंने देखा कि आंटी अपने फोन पर एक काली फिल्म देख रही थीं।

वे अपनी चूत में हाथ डाल रहे थे।

तुरंत आंटी ने सभी कपड़े उतार दिए।

यह सीन देखकर मेरा लंड फट गया।

मैं अभी आंटी के पास जाकर उनको चोद दूंगा।

उस समय आंटी पूरी तरह से गर्म हो गई थीं और चूत में उंगली करती थीं।

“आह ऊह आह” की आवाज उनके कंठ से निकल रही थी।

मैं रहा नहीं गया और आंटी के पास गया।

आंटी ने मुझे देखा और अपने कपड़ों से अपना शरीर ढकने लगी।

तुम यहाँ क्या कर रहे हो, वे पूछीं। अपनी वार्ड में जाओ।

मैंने कहा कि मैं पहले तुम्हें चोदूंगा। वैसे भी मैं बहुत दिनों से आपको चोदने का विचार कर रहा था।

ठीक है, आंटी ने हंसकर कहा।

मैंने उत्तर दिया: हां, आंटी।

फिर आंटी ने कहा, “आज नहीं, कल।”

मैंने कहा, “एक बार प्लीज, आंटी!”

नहीं, कल मैंने ऐसा नहीं कहा, आंटी ने कहा।

मैंने कहा, “अरे यार आंटी, आप नखरे कर रहे हैं और इधर लंड फटा जा रहा है।”

आंटी ने कहा: “चल, मैं मुँह में लेकर निकाल देती हूँ..।” लेकिन कल दूँगी!

जब मैंने उनकी बात को समझा, तो मैंने कहा, “ठीक है।”

मैं खड़ा होकर आंटी के पास गया।

आंटी मेरे सामने घुटनों पर बैठकर लंड लेने लगीं।

जब मैंने अपना लंड निकाला, आंटी ने मुझे देखकर कहा, “हाय, इतना बड़ा है!” आपके अंकल भी इतना बड़ा नहीं है।

मेरा लंड सामान्य से अधिक मोटा और लंबा है।

मैंने कहा, “अब हाय-हाय न करो आंटी..।” तुरंत चूसना शुरू करो।

मेरा लौड़ा आंटी ने मुँह में लेना शुरू कर दिया।

आंटी के मुँह में मेरा आधा लंड जा पा रहा था।

मैं आंटी का मुँह और सिर चोदने लगा।

कुछ देर के बाद मैंने आंटी के मुँह में अपना सारा सामान डाल दिया।

जब आंटी ने पूरी बोतल पी ली, तो उन्होंने कहा, “यह बहुत अच्छा था!”

फिर हम दोनों एक साथ बेड पर लेटकर सो गए।

मैं सुबह अपने घर चला गया।

आंटी आज रात वादा करती थी।

मैं रात होने की प्रतीक्षा कर रहा था।

कुछ सोचकर मैं मेडिकल स्टोर में गया और मैनफोर्स टैबलेट और के-वाई जैल खरीद लिया।

मैं भी आंटी की गांड मारने का मन बनाने लगा।

कुछ देर बाद रात गहरा गई।

मैं आंटी के घर गया तो उन्होंने सैक्सी नाईटी पहनी हुई थी।

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वे सिर्फ मेरा इंतजार कर रहे थे।

आंटी मेरे लौड़े से चुदवाने को तैयार थीं।

मैं आंटी से मिलने गया।

हम दोनों ने कुछ देर तक चर्चा की।

तब आंटी ने मुझे पकड़ा और मुझे चुम्मा चाटने लगी।

कोई दो घंटे तक आंटी ने चुम्मा चाटी।

फिर आंटी ने मेरे सारे कपड़े उतार दिए, और मैं भी।

मेरे हाथों में आंटी बिल्कुल नंगी थी।

मैंने आंटी को बिठाकर मुँह में लंड डाला।

आंटी ने मेरा लंड कुछ देर तक चूसा।

मैं आपकी चूत चाटना चाहता हूँ, आंटी।

आंटी ने उत्तर दिया: ठीक है। हम एक दूसरे के लंड चूत से मजा लेते हैं।

हम दोनों 69 में आ गए जब मैंने उनकी बात समझी।

यह पहली बार था जब मैं आंटी की चूत इतनी करीब से देखता था।

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मैंने उसे चाटना शुरू किया।

दस मिनट के भीतर आंटी का पानी निकल गया। मैंने पूरा पानी चाट लिया और चूत को गर्म कर दिया।

आंटी कुछ देर चुदने के लिए पूरी तरह से गर्म हो गईं।

“अब मुझे चोद दो, ऋतिक,” उन्होंने कहा। मैं अपने लंड को अपनी चूत में लेना चाहता हूँ।

मैंने आंटी को सीधे बेड पर लेटने को कहा।

आंटी लेट गई।

मैंने लंड का सुपारा आंटी की चूत पर रखकर रगड़ने लगा।

अब भी ऋतिक, आंटी ने विनती की।

मैंने तुरंत आंटी की चूत पर लंड रखकर धक्का दिया।

लंड चिकनी चूत में सरकता चला गया।

आंटी ने चीखकर कहा कि वह मर गई।

मैंने दूसरा धक्का लगाया।

आंटी ने फिर से चीखकर कहा कि वह मर गई।

आंटी ने बहुत तेज आवाज निकाली।

मैंने धकापेल मचा दी और उनके मुँह पर अपना मुँह रखा।

धीरे-धीरे आंटी को धक्का लगने लगा।

अब उनका स्वर बदल गया: “ऋतिक, आह चोदो और तेज धक्के लगाओ।” आज मेरी चूत फाड़ दो..। आह, मैं मर गया।

मैं और तेज धक्के मारने लगा।

Tamil Aunty Hindi Sex Stories

मैं लगभग पंद्रह मिनट बाद झड़ गया, और आंटी भी उतनी देर में दो बार झड़ गईं।

कुछ देर बाद लंड उठ गया।

आंटी को फिर से कुतिया बनाकर चोदने लगा।

मैं आंटी को इतनी तेजी से चोद रहा था जितना वे चीख रही थीं।

मैंने इसी तरह आंटी को आठ बार चोदा, लेकिन मेरा लंड अभी भी खड़ा था।

‘अब बस करो, मेरी चूत दुख रही है’, आंटी ने कहा।

मैंने कहा कि मैं गांड मारूँगा।

आंटी ने गांड मरवाने से स्पष्ट रूप से इनकार कर दिया।

मैंने सोचा कि आज रहने दो। बाद में गांड मारूंगा।

तीन दिन बाद आंटी ने चूत नहीं चुदवाई।

लेकिन चूत की चुल्ल इतनी बड़ी समस्या है कि बिना लंड के चैन नहीं मिलता।

यही हुआ।

जब मैं अंकल के घर से चला गया, आंटी मुझे घर बुला लेती और हम दोनों सेक्स खेलते।

अब मैं आंटी को हर दिन चोदता हूँ।

मैं अभी भी उनकी गांड नहीं चोद सका।

पर मैं एक दिन आंटी की गांड में मेरा लंड जरूर जाएगा।

मेरी Aunty Ki Chudai Hindi Me हिंदी में आपको कैसा लगा? कृपया टिप्पणी करें।

ससुर जी का जवान लंड-6

 एक दिन फिर से सासू मा को शहर जाना था। इस बार रामलाल ने फिर उन्हें अकेला ही भेज दिया. बीवी के जाने के बाद वो कंचन से बोला, ” बहू आज बदन में बहुत दर्द हो रहा है ज़रा कमला को बुला दो. बहुत अcछि मालिश करती है. बदन का दर्द दूर कर देगी.” ये सुन के कंचन को जलन होने लगी. वो जानती थी कमला कैसी मालिश करेगी.

कंचन ने सोचा आज अक्च्छा मौका है. सासू मा भी नहीं है. वो बोली, ” क्यों पिताजी ? घर में बहू के रहते आप किसी और को क्यों मालिश के लिए बुलाना चाहते हैं? आपने हमारी मालिश कहाँ देखी है? एक बार करवा के देखिए, कमला की मालिश भूल जाएँगे.”

” अरे नहीं बेटी, हम अपनी बहू से कैसे मालिश करवा सकते हैं ?” रामलाल के मन में लड्डू फूटने लगे. वो सोच रहा था की ये तो सुनेहरी मौका है. हाथ से नहीं जाने देना चाहिए. “आप हमे बेटी बोल रहे हैं लेकिन शायद अपनी बेटी की तरह नहीं मानते? आपकी सेवा करके हुमें बहुत खुशी मिलती है.”

” ऐसा ना कहो बहू. तुम बेटी के समान नहीं हमारी बेटी ही हो. तुम सुचमुच बहुत अक्च्ची हो. लेकिन तुम्हारी सासू मा को पता चल गया तो वो मुझे मार डालेगी.” ” कैसे पता चलेगा पिताजी वो तो शाम तक आएगी. चलिए अब हम आपकी मालिश कर देते हैं. आपको भी तो पता चले की आपकी बहू कैसी मालिश करती है.”

” ठीक है बहू. लेकिन अपनी ससासू मा को बताना नहीं.” ” नहीं बताएँगे पिताजी, आप बेफिकर रहिए.” रामलाल ने जल्दी से ज़मीन पे चटाई बिच्छा दी और धोती को छ्होर के सब कापरे उतार के लेट गया. उसका दिल धक धक कर रहा था. कंचन रामलाल के गथे हुए बदन को देखती ही रह गयी. वाकाई में सुच्चा मरद था. चौरी छ्चाटी और उसपे घने काले बाल देख कर तो कंचन के दिल पे च्छूरियँ चलने लगी. कंचन ने रामलाल की टाँगों की मालिश शुरू कर दी. सारी के पल्लू से उसने घूँघट भी कर रखा था. बहू के मुलायम हाथों का स्पर्श रामलाल को बहुत अक्च्छा लग रहा था.

कंचन ने पहले से ही प्लान बना रखा था. अचानक तैल की बॉटल कंचन की सारी पे गिर गयी. ” ऊफ़ हमारी सारी खराब हो गयी.” ” बहू सारी पहन के कोई मालिश करता है क्या. खराब कर ली ना अपनी सारी? चलो सारी उतार लो, फिर मालिश करना.” ” जी, मैं सलवार कमीज़ पहन के आती हूँ.”

” अरे उसकी क्या ज़रूरत है? सारी उतार लो बस. सलवार पे तैल गिर गया तो सलवार उतारनी पर जाएगी. अगर सलवार उतारना मंज़ूर है तो ठीक है सलवार कमीज़ पहन आओ.” ” हा …. सलवार कैसे उतारेंगे . सलवार उतारने से तो अक्च्छा है की सारी ही उतार दूं, लेकिन आपके सामने सारी कैसे उतारुन. हुमें तो शरम आती है.’

” शरम कैसी बहू? तुम तो हमारी बेटी के समान हो. और फिर हम तो तुम्हें पेटिकोट ब्लाउस में कई बार देख चुके हैं. अपने ससुर से कोई शरमाता है क्या?” ” ठीक है पिताजी. उतार देती हूँ.” कंचन ने बरी अदा के साथ अपनी सारी उतार दी. अब वो केवल पेटिकोट और ब्लाउस में थी. पेटिकोट उसने बहुत नीचा बाँध रखा था. ब्लाउस भी सामने से लो कट था. अचानक कंचन कमरे से बाहर भागी, ” अरे क्या हुआ बहू कहाँ जा रही हो?” रामलाल ने पूचछा. ” जी बस अभी आई. अपनी चुननी तो ले आउ.” रामलाल तो बहू के ऊपेर नीचे होते हुए नितुंबों को देख कर निहाल हो गया.

कंचन थोरी देर में वापस आ गयी. अब उसने चुननी से घूँघट निकाल रखा था. लेकिन कमर पे बहुत नीचे बँधे पेटिकोट और लो कट ब्लाउस में से उसकी जवानी बाहर निकल रही थी. कंचन रामलाल के पास बैठ गयी और उसने फिर से रामलाल की टाँगों की मालिश शुरू कर दी. इस वक़्त कंचन का सिर रामलाल के सिर की ओर था.

मालिश करते हुए बहू इस प्रकार से झुकी हुई थी की लो कट ब्लाउस में से उसकी बरी बरी झूलती हुई चूचियाँ रामलाल को सॉफ दिखाई दे रही थी. मालिश करते हुए दोनो इधेर उधेर की बातें कर रहे थे. कंचन को अक्च्ची तरह मालूम था की ससुर जी की नज़रें उसके ब्लाउस के अंडर झाक रही हैं. आज तो कंचन ने ठान लिया था की ससुर जी को पूरी तरह तरपा के ही छ्होरेगी. मर्दों को तरपाने की कला में तो वो माहिर थी ही.

इतने में रामलाल ने बहू से पूछा, ” बहू तुमने वो गाना सुना है, ‘ चुनरी के नीचे क्या है? चोली के पीच्चे क्या है?” ” जी पिता जी सुना है. आपको अक्च्छा लगता है.?” कंचन आगे झुकते हुए ससुर जी को अपनी गोरी गोरी चूचीोन के और भी ज़्यादा दर्शन कराती हुई बोली. ” हां बहू बहुत अच्छा लगता है.” कंचन समझ रही थी की ससुर जी का इशारा किस ओर है. ससुर जी की जांघों तक मालिश करने के बाद कंचन ने सोचा की अब ससुर जी को उसके नितुंबों के दर्शन कराने का वक़्त आ गया है. कंचन जानती थी की उसके नितूंब मर्दों पर क्या असर करते हैं.

उसने जांघों से नीचे की ओर मालिश करने के बहाने अब अपना मुँह ससुर जी के पैरों की ओर और अपने विशाल चूटर ससुर जी के मुँह की ओर कर दिए. मालिश करते हुए उसने अपने चूतर बरे ही मादक धुंग से पीच्चे की ओर उभार दिए थे. रामलाल के दिल पे तो मानो च्छुरी चल गयी. पेटिकोट के महीन कापरे में से बहू की गुलाबी रंग की कच्ची झाँक रही थी.

रामलाल बहू के विशाल चूतरो को ललचाई नज़रों से देखता हुआ बोला, ” अरे बहू ऐसे मालिश करने में परेशानी होगी. हमार ऊपर आ जाओ.” ” है राम आपके ऊपर कैसे आ सकते हैं?” ” अरे इसमें शरमाने की क्या बात है? अपनी एक टाँग हमार एक तरफ और दूसरी टाँग दूसरी तरफ कर लो.” ” जी आपको परेशानी तो नहीं होगी ?” कंचन रामलाल के ऊपर आ गयी. अब उसका एक घुटना ससुर जी के कमर के एक तरफ और दूसरा घुटना कमर के दूसरी तरफ था. पेटिकोट घुटनों तक ऊपर करना परा. इस मुद्रा में कंचन के विशाल चूटर रामलाल के मुँह के ठीक सामने थे.

घुटनों से नीचे कंचन के गोरे गोरे पैर नंगे थे. कंचन रामलाल के पैरों की ओर मुँह करके उसकी जांघों से नीचे की ओर मालिश कर रही थी. रामलाल का मन कर रहा था की बहू के छूटरों के बीच मुँह दे दे. वो पेटिकोट के मेअहीन कापरे में से बहू के विशाल छूटरों पे सिमाटाती हुई ककच्ची को देख रहा था. ” बहू तुम जितनी समझदार हो उतनी ही सुन्दर भी हो.” ” सच पिता जी ? कहीं आप हुमें खुश करने के लिए तो नहीं बोल रहे हैं.”

” तुम्हारी कसम बहू हम झूट क्यों बोलेंगे? तभी तो हुमने तुम्हें एकद्ूम राकेश के लिए पसंद कर लिया था. शादी से पहले तुमाहरे पीच्चे बहुत लड़के चक्कर लगाते होंगे.?” ” जी वो तो सभी लड़कीों के पीछे चक्कर लगाते हैं.” ” नहीं बहू सभी लड़कियाँ तुम्हारी तरह सेक्सी नहीं होती. बोलो, लड़के बहुत तुंग करते थे क्या?” ” हां पिता जी करते तो थे.” ” क्या करते थे बहू?” ” अब हम आपको वो सब कैसे बता सकते हैं?” ” अरे फिर से वही शरमाना.

चलो बताओ. हुमें ससुर नहीं, अपना दोस्त समझो.” ” जी सीटियाँ मारते थे. कभी कभी तो बहुत गंदे गंदे कॉमेंट भी देते थे. बहुत सी बातें तो हुमें समझ ही नहीं आती थी.” ” क्या बोलते थे बहू?” ” उनकी गंदी बाते हमें सम्झ नहीं आती थी. लेकिन इतना ज़रूर पता था की हमारी च्चटिओं और नितुंबों पे कॉमेंट देते थे. कैसे खराब होते हैं लड़के. घर में मा बेहन नहीं होते क्या?” ” और क्या क्या करते थे?”

” जी, क्लास में भी लड़के जान बूझ के अपनी पेन्सिल हमार पैरों के पास फेंक देते थे और उसे उठाने के बहाने हमारी स्कर्ट के अंडर टाँगों के बीच में झाँकने की कोशिश करते थे. स्कूल की ड्रेस स्कर्ट थी नहीं तो हम सलवार कमीज़ ही पहन के स्कूल जाते. लड़के लोग होते ही बहुत खराब हैं.” ” नहीं बहू लड़के खराब नहीं होते. वो तो बेचारे तुम्हारी जवानी से परेशान रहते होंगे.”

” लेकिन किसी लड़की पे गंदे गंदे कॉमेंट देना और उसकी टाँगों के बीच में झाँकना तो बदतमीज़ी होती है ना पिताजी?” ” इसमें बदतमीज़ी की क्या बात है बहू. बचपन से ही हर मारद के मन में औरत की टाँगों के बीच में झाँकने की जिगयसा होती है और जब वो बरा हो जाता है टब तो औरत की टाँगों के बीच में पहुँचना ही उसका लक्ष्या बन जाता है.” ” हा! ये भी क्या लक्ष्या हुआ.? मारद लोग तो होते ही ऐसे हैं.”

” लेकिन बहू लड़कियाँ भी तो कम नहीं होती. देखो ना आज कल तो शहर की ज़्यादातर लड़कियाँ शादी से पहले ही अपना सुबकुच्छ दे देती हैं. तुम भी तो शहर की हो बहू.” ” अक्च्छा पिता जी! क्या मतलूब आपका? हम वैसे नहीं हैं. इतने लड़के हमार पीच्चे परे थे, यहाँ तक की काई मास्टर जी लोग भी हमार पीच्चे परे थे, लेकिन हुमने तो शादी से पहले ऐसा वैसा कुकच्छ नहीं किया.”

“सच बहू? यकीन नहीं होता की इतनी सेक्सी लड़की को लड़कों ने कुँवारा छ्होर दिया होगा.” ” हुँने किसी लड़के को आज तक हाथ भी नहीं लगाने दिया.” ” आज तक ? बेचारा राकेश अभी तक कुँवारा ही है. सुहाग रात को भी हाथ नहीं लगाने दिया?” रामलाल हंसता हुआ बोला. ” हा …पिता जी आप तो बहुत खराब हैं. सुहाग रात को तो पति का हक़ बनता है. उन्हें थोरे ही हम माना कर सकते हैं.” कंचन बारे ही मादक धुंग से अपने छूटरों को रामलाल के मुँह की ओर उचकाती हुई बोली. रामलाल कंचन के छूटरों से सिमट कर उनकी दरार में जाती हुई कच्ची को देख देख कर पागल हो रहा था. ” बहू एक बात कहूँ? तुम शादी के बाद से बहुत ही खूबसूरत हो गयी हो.”

” पिता जी आप तो ऐसे बोल रहे हैं जैसे शादी से पहले हम बदसूरत थे.” ” अरे नहीं बहू शादी से पहले भी तुम बहुत सुन्दर थी लेकिन शादी के बाद से तो तुम्हारी जवानी और भी निखार आई है. हर लड़की की जवानी में शादी के बाद एकद्ूम निखार आ जाता है.” ” ऐसा क्यों पिताजी?” कंचन ने भोलेपन से पूकच्छा. ” बहू, शादी से पहले लड़की एक कक़ची कली होती है. कली को फूल बनाने का काम तो मारद ही कर सकता है ना. सुहाग रात को लड़की एक ककच्ची कली से फूल बुन जाती है. जैसे कली में फूल बुनके निखार आ जाता है वैसे ही लड़की की जवानी में शादी के बाद निखार आने लगता है.”

” ऐसा क्या निखार आया हमारी जवानी में? हम तो पहले भी ऐसे ही थे.” ” बहू तुम्हारी जवानी में क्या निखार आया वो हुंसे पूच्छो. तुम्हारा बदन एकद्ूम भर गया है. कापरे भी टाइट होने लगे हैं. देखो ये नितूंब कैसे फैल गये हैं.” रामलाल कंचन के दोनो छूटरों पे हाथ फेरता हुआ बोला. ” तुम्हारी ये ककच्ची भी कितनी छ्होटी हो गयी है. करीब करीब पुर ही नितूंब इस ककच्ची के बाहर हैं. शादी से पहले तो ऐसा नहीं था ना.”

आख़िर कंचन का प्लान सफल होने लगा था. रामलाल का हाथ उसके उछके हुए छूटरों को सहला रहा था. कभी कभी रामलाल उसकी पंटयलिने पे हाथ फेरता. कंचन को बहुत मज़ा आ रहा था. रामलाल फिर बोला, ” बहू लगता है तुम्हें ये गुलाबी रंग की ककच्ची बहुत पसंद है.” ” हा..! पिताजी आपको कैसे पता हुँने कौन से रंग की ककच्ची पहनी है?” ” बहू तुम्हारे नितूंब हैं ही इतने चौरे की उनके ऊपर कसे हुए पेटिकोट में से ककच्ची भी नज़र आ रही है.”

अगला भाग: ससुर जी का जवान लंड-7

मौसी माँ की ज़बरदस्त चुदाई।

मेरा नाम अनमोल है और मैं 21 साल का हूँ। मेरा लंड सामान्य से बड़ा है।

मैं, मेरी दूसरी माँ और पापा ही मेरी परिवार में हैं।

मम्मी घरेलू काम करती हैं और पापा ठेकेदारी करते हैं।

पापा अक्सर बिजनेस से दूर रहते हैं।

पढ़ी थी।

मेरी माँ ४० वर्ष की है, लेकिन लगता है ३२। मेरे पिताजी की दूसरी पत्नी हैं।

उनका रूप कुछ ऐसा है। 34D चूची का पेट 32 और 38 है। मम्मी का रंग पूरी तरह से दूध सा सफेद है। ये रूप किसी भी लंड से पानी निकालने के लिए पर्याप्त हैं।

यह Hot Step Mom Xxx Kahani लगभग दो वर्ष पहले की है।

तब मैं बारहवीं के पेपर देने के बाद घर पर छुट्टी बिता रहा था।

अन्तर्वासना और फ्री सेक्स कहानी वेबसाइटों पर घरेलू सेक्स कहानियाँ पढ़ने में मेरा बहुत दिलचस्पी थी।

उसमें भी मुझे माँ-बेटे की चुदाई की कहानी बहुत अच्छी लगी।

उस दिन से ही मेरा अपनी माँ को देखने का दृष्टिकोण ही बदल गया।

मैं अक्सर अपने कमरे में नंगा होकर मुठ मारता था और अपनी सौतेली माँ को सोचता था।

मम्मी एक दिन बाथरूम में नहाने गईं।

वे सिर्फ अपनी ब्रा पैंटी को निकालना भूल गए।

मुझे कहते हुए, “बेटा, मेरे कपड़े बाहर रह गए हैं, मुझे दे दो।”

मैं उनके कपड़े देने गया तो उन्होंने बाथरूम का दरवाजा कुछ खुला छोड़ दिया।

उस खुले दरवाजे से बाहर निकलते ही मुझे उनका शरीर दिखाई दिया।

जब मैं उनकी बड़ी-बड़ी चूचियों को देखा तो मेरा लंड तंबू का बांस बन गया और मेरा लंड लोअर को टेंट बना दिया।

उनके नहाने के बाद मैंने देखा कि उनकी ब्रा और पैंटी फिर से खड़ी हैं।

मम्मी की ब्रा में अपना लंड डालकर मैंने उनकी पैंटी सूंघी और मुठ मार दी।

उस दिन मैंने सोचा कि मम्मी की नहाते हुए वीडियो बनाना चाहिए।

वह अगले दिन नहाने से पहले बाथरूम में गंदे कपड़े धुलने के लिए टंगे हुए थे, इसलिए मैंने फोन को उसकी जेब में छिपा दिया।

मैंने तुरंत अंदर जाकर फोन निकाला और वीडियो चैक की जब मम्मी नहा कर बाहर आईं।

मम्मी की नहाते हुए वीडियो देखने के बाद मैं इतना खुश हो गया कि मैं रोने लगा।

मैंने इतने दिनों बाद अपनी माँ को पूरी तरह से नंगी देखा।

वीडियो में मम्मी ने पहले अपनी पैंटी और ब्रा निकाल दी।

उसने फिर अपनी झांटें साफ की।

जिससे उनकी गुलाबी चूत पूरी तरह से दिखाई देती थी।

मैंने वह वीडियो दो बार देखा और फिर मुठ मारी।

अब बस माँ को चोदने का मन कर रहा था।

यह मेरा सपना भी जल्द ही पूरा हो गया।

मम्मी ने उसी रात पापा को फोन किया और बताया कि कल करवाचौथ है।

पिताजी ने अधिक जानकारी के लिए पूछा तो माँ ने कहा कि आप भी कल की तैयारी कर लेना क्योंकि आपने बहुत दिनों से मेरी चुदाई नहीं की है। बहुत सोच रहा है। यदि कल मेरी अच्छी चुदाई नहीं हुई, तो मैं किसी और से चुद जाऊंगा। मैंने झांटों को भी साफ कर लिया है और कल पार्लर में सजने जाऊंगा।

Papa ने कुछ नहीं कहा।

अगले दिन माँ अपनी सहेली के साथ पार्लर गई।

मैं उस समय घर पर अकेला था।

मैंने काफी देर बाद अपने लंड पर मालिश करने का विचार किया।

मैं अपनी माँ के कमरे में गया और उनकी टेबल पर मौजूद मसाज ऑयल लेकर वहीं बैठकर लंड को मालिश करने लगा।

तेल से मालिश करते समय मम्मी की बड़ी बड़ी चूचियां और चिकनी चूत ही उसके ध्यान में थीं, इसलिए लंड ने अपना आकार बना लिया।

तब मैंने माँ-बेटे की सेक्स कहानी पढ़ते हुए मोबाइल पकड़ा और उसे सहलाने लगा।

मम्मी की वीडियो देखते ही मुझे बुरा लगा।

मैंने वीडियो शुरू करते ही अपने कपड़े उतारे और नंगा हो गया।

अब मैं मम्मी के कमरे में ही बैठकर अपना लिंग हिलाने लगा।

मालिश के बाद मेरा लंड काफी मोटा और बड़ा लग रहा था।

वीडियो में मैं इतना खो गया था कि मुझे मम्मी के आने का पता नहीं चला।

पीछे से आकर माँ ने मेरा फोन छीन लिया।

डर से मैंने पीछे देखा और देखा कि मेरे पैरों के नीचे जमीन गिर गई।

तुम्हारी मम्मी ने कहा, “ये क्या कर रहे हो?” और मेरी ये वीडियो कहां से मिली?

मैं मम्मी के सामने हाथ जोड़ कर अपनी गलती की माफी मांगने लगा।

मम्मी ने कहा कि आज तुम्हारे पिता आने वाले हैं। क्या मैं उनसे ये सब कहूँ?

मेरी गांड फट गयी।

मैंने कहा कि मम्मी आगे से ऐसा कभी नहीं करेगी।

मम्मी ने पूछा कि ऐसी गलती हुई क्यों?

तुम इतनी सुंदर हो कि किसी की भी नियत डोल जाएगी, इसमें मेरी क्या गलती?

मम्मी ने अपनी तारीफ सुनकर मुस्कुरा दी।

लेकिन वे उसे छिपाकर कहा, “तुम मेरा और तुम्हारा रिश्ता नहीं जानते?”

मैंने कहा: हां जानता हूँ, लेकिन क्या करूँ?

मम्मी डांटने लगीं, लेकिन मेरे लंड पर ही उनका ध्यान था।

कपड़े पहनकर जाओ, उन्होंने कहा।

मैं कपड़े लेकर चला गया।

कुछ देर बाद मेरी माँ मेरे पास आई और मुझे बताने लगी कि ये सब गलत है। यह सब करने की उम्र अभी आपकी नहीं है।

फिर थोड़ी देर बाद शांत होकर पूछने लगीं कि मैं कैसा महसूस कर रही हूँ?

मैंने कहा, मम्मी, आज आप बहुत सुंदर लग रहे हैं। Papa देखते ही पागल हो जाएगा।

हम हंसने लगे।

मैंने मांग की, मम्मी, आज की घटना अपने पिता को मत बताना।

ओके, ये हमारे दोनों के बीच रहेगा, वे कहने लगीं।

जब पापा रात को आए, मम्मी ने उनसे कुछ नहीं कहा।

मम्मी ने पापा को छत पर व्रत खोलने के लिए तैयार होते देखा।

मैं भी वहीं था।

मम्मी ने कहा कि तुम सबका वीडियो बनाओ।

मैंने सारी वीडियो बनाने के बाद मम्मी की तस्वीरें लेने लगा।

जब मैं फोटोशूट के पोज को बताने लगा तो मम्मी समझ नहीं आई।

इसलिए मैंने उनकी कमर को पकड़ा और उन्हें पोज बनाने को कहा।

मैंने मम्मी को पकड़ा और मेरा लंड लोअर में घुसने लगा।

फिर मेरी माँ मेरे लोअर पर ध्यान देने लगीं और स्माइल करने लगीं जैसे मैं फोटो क्लिक करने लगा।

मैंने कहा कि आप पापा के पास जाकर आनंद लें।

मम्मी ने पूछा कि वीडियो क्यों नहीं बनाना है? नीचे भी आओ।

मम्मी नीचे आकर हंसने लगीं।

मैं बैचैन हो गया।

फिर मैं बीस मिनट बाद नीचे चला गया।

मैं अपने माता-पिता की चुदाई देखना चाहता था।

नीचे गया तो पापा का मीटर गिर गया।

मम्मी पापा से कह रही थीं कि मैंने नहीं कहा था कि आज तैयार होकर आना चाहिए था। आज भी अधूरी चुदाई छोड़ दी है। मैंने पहले ही आपसे कहा था कि मैं किसी से भी चुद जाऊंगा अगर आज चुदाई अधूरी रह गई।

पिताजी ने कहा कि मैंने जो करना था, वह किया। मैं सोने जा रहा हूँ। आप भी सो जाओ।

मम्मी ने कहा कि आपको सोने की जरूरत है क्योंकि मेरी आग अभी शांत नहीं हुई है। मेरी चूत एक लंड चाहती है।

पिताजी ने कहा कि वे थक गए हैं। मैं सो जाऊँगा। जो कुछ आपको लगता है सो जाओ।

यह कहकर पिता सो गए।

मम्मी चूत पर उंगली फेरने लगी।

मेरे मन में एक विचार आया।

मैंने मम्मी को फोन किया और कहा कि मैं वीडियो बनाने या काम खत्म करने के लिए आऊं। मम्मी, आप अपनी चूत में उंगली डाल रहे हैं। इधर आओ। मैं ऊपर वाले कमरे में आपकी प्रतीक्षा कर रहा हूँ। तैयार होकर आना।

15 मिनट बाद, मेरी माँ बिल्कुल दुल्हन की तरह तैयार होकर मेरे कमरे में आईं. आओ, आज अपनी माँ को चोदने का अपना सपना पूरा करो!

वह इतना बोलते ही मैंने उनके होंठों को चूसने लगा और उनकी बांहों में भर लिया।

किसी भूखी शेरनी की तरह वे मेरे होंठ खाने लगीं।

मैं उनके ब्लाउज के ऊपर से उनकी दोनों चूचियों को दबाने लगा।

उनकी सांसें बहुत तेज थीं।

मैंने मम्मी का ब्लाउज निकालकर उनकी गर्दन पर किस करने लगा और उनकी चूचियों को जोर से दबाने लगा।

मैंने ब्रा से उनकी बड़ी-बड़ी चूचियों को बाहर निकाल दिया।

उन्हें देखकर मैं पागल हो गया और उनके दोनों चूचों को बीच-बीच में चूसने लगा।

मैं कहीं भागी नहीं जा रही हूँ, वे कहने लगीं..। आप आराम से चूसो। मैं आज पूरी रात तुम्हारे साथ रहूंगा।

मैं उनको जोर से दबाने, चूसने और बीच-बीच में उनके दूध पर काटने लगा, जिससे वे अधिक उत्तेजित हो जातीं।

“आह ऊऊऊ आह,” उन्होंने कहा।

नीचे बैठकर, वे मेरे कपड़े निकालकर मेरे सवा सात इंच लंबे और तीन इंच मोटे लंड को देखकर सीत्कार करने लगे।

लौड़े को मुँह में लेकर चूसने लगीं।

मेरा लंड पहली बार मेरी माँ के मुँह में गया था।

किसी रंडी की तरह वे मेरे लंड को अपने गले में डालकर बाहर निकालतीं।

मैंने उनके बाल पकड़े और उनके मुँह में अपना लंड धक्का देना शुरू किया।

उन्हें सांस लेने में परेशानी होने लगी।

“बेटा, तुम्हारा लिंग बहुत बड़ा है,” उन्होंने कहा और मेरा लिंग निकाला। थोड़ा धीरे करो; ये तुम्हारे पिता से बड़ा है।

यह कहते ही मैं और उत्साहित हो गया।

जब मैं फिर से अपना लंड उनके मुँह में डालने लगा, वे गों-गों की आवाज निकालने लगे।

मैं धक्का मारने लगा।

मम्मी, मेरा रस निकलने वाला है, मैंने कहा जब मैं झड़ने वाला था।

बेटा, मेरे अंदर रस निकाल।

मैंने उनके मुँह में रस डाला।

वे मेरे लंड से एक-एक बूंद चूस गए।

तब मैंने उनके पेटीकोट निकालकर उनके पैरों पर किस करने लगा।

फिर उनकी गोल गोल जांघों पर चुंबन लगाया।

मम्मी की पैंटी पूरी तरह से गीली हो गई थी।

मैंने पैंटी निकाली और उनकी सफाचट चूत को चाटने लगा।

वे अपने बेटे से अपनी चूत चुसवाने का पूरा मजा लेने लगीं, आंखें बंद करके।

मैं फिर से खड़ा हो गया।

फिर हम दोनों 69 में आ गए।

वे मेरे लंड को मुँह में लेकर चूस रही थीं जबकि मैं उनकी चूत को चाट रहा था।

मम्मी ने कहा, “बाबू, अब रहा नहीं जा रहा”। तुरंत अपनी मां को चोदें..। मेरी प्यास बुझा दो!

मैंने उनकी चूत पर लंड डालकर उनकी एक टांग कंधे पर रखी और अंदर घुसने लगा।

मैं अपनी मां की चूत के लिए अपना लंड बहुत टाइट महसूस कर रहा था।

मम्मी ने कहा: आराम से डाल दो..। आज तक मैंने इतने बड़े लंड से चुदाई नहीं की है।

मैंने खुशी से पूछा, मम्मी, अब तक आपने कितने बड़े लंडों से चुदाई की है?

मम्मी ने समझ लिया।

तुम्हारे पापा तो सिर्फ चार इंच का है, उन्होंने कहा। तुम्हारे पिता ने भी अपने अधिकारियों से दो बार बिजनेस बढ़ाने के लिए चुदवा लिया था। उनके पाँच इंच भी थे। उनमें से सबसे बड़ा आपका है।

मैंने कहा कि इसी कारण आपने अपने पिता को बताया था कि मैं किसी से भी चुद जाऊंगा।

मम्मी मेरे लंड को पकड़कर चूत पर घिसने लगी, हंसते हुए।

धीरे-धीरे मैंने पेलना शुरू किया और पूरा लंड अंदर चला गया।

उन्हें आंसू आ गए।

“अन्नू, बहुत दर्द हो रहा है,” वे कहा। थोड़ा बाहर निकालें।

मैं धीरे-धीरे उनकी एक नहीं सुनी और चोदने लगा।

थोड़ी देर बाद, मम्मी को भी मज़ा आने लगा और उन्होंने ऊऊ आह की आवाज निकाली।

तब मैंने उनको घोड़ी बनाकर पीछे से उनकी चूत में लंड डाला।

इस पोज में, मैं उनकी कमर पकड़कर मेरा पूरा लंड उनकी चूत में डालने लगा।

उस वक्त मैं सातवें आसमान में था।

मम्मी ने कहा, “आज तुमने अपनी माँ को जन्नत दिखाई।” अपनी रंडी माँ को चोदना..। आह करो और जोर से चोदो।

मैंने और तेजी से उनकी चूत में लंड डाला।

उन्हें गांड और ऊपर करके लंड को चूत में लेने लगे, मुँह में तकिया दबाकर।

मां चरम पर आने लगी। आआह और तेज कर, वे बोलीं। मैं गिरने वाला हूँ।

वे यह कहते हुए रो पड़ी।

झड़ने के बाद उन्होंने मेरा लंड फिर से मुँह में लेकर चूसने लगीं।

मम्मी ने कहा, बेटा, आज तुमने वास्तव में जन्नत दिखाई।

मैंने कहा कि अभी बहुत कुछ बाकी है।

मैंने उनके बालों को पकड़ा और उनके मुँह को चोदने लगा।

वे लंड को बाहर निकालकर अपनी चूत में डालकर मेरे ऊपर बैठ गईं।

मम्मी धक्के मारने लगी जब लंड उनकी चूत में चला गया।

उन्हें बहुत मजा आ रहा था। मैं उनकी मोटी चूचियों को चूस रहा था।

वे अधिक तेज धक्के मारने लगे।

हम दोनों ने फिर से पोजीशन बदली।

अब मैं मम्मी की दोनों टांगें अपने कंधों पर रखकर उसके चूत में जोर से चोदने लगा।

उन्हें बहुत तेज आवाज आने लगी।

Mom Chudai Ki Desi Kahani

कमरे में चुदाई का दृश्य था।

लगभग बीस मिनट बीत गए जब मैं अपनी माँ को चोदने लगा।

वे दो बार झड़ चुकी थीं और फिर बोलने लगी: “जल्दी करो, अब और कुछ नहीं होगा।”

मैंने फिर से चूत से लंड निकालकर उनके मुँह में डाल दिया।

वे चूसने लगीं, लंड गीला हो गया।

जब मैं उनके पीछे लेट गया, मैंने उनकी एक टांग ऊपर उठाकर पीछे से उनकी चूत में लौड़ा डाला।

वह हँसते हुए बोले, “आज तुम्हें आह मारनी पड़ेगी क्या?

“हाँ, बहन की लौड़ी..। रंडी, आज मैं तुम्हें फाड़ दूँगा..। तुम्हारी कल्पना बहुत मुश्किल हो गई!

हॉट स्टेप मॉम Xxx ने कहा, “मुझे गाली देकर चोद, बेवकूफ।”

“हां, आज मैं भी तुम्हारी गांड फाड़ दूँगा, रंडी!“

हाँ, इस रंडी की भी गांड फाड़ दो। मेरे प्यारे राजा, ये सिर्फ तुम्हारे लंड से चुदेगी!“

मैं उनकी चूत में अपना लंड तेजी से डालने लगा।

मैंने उनकी तरफ इशारा करते हुए लंड निकाला।

वे तुरंत बेड से नीचे आकर रंडी की तरह मुँह खोलकर लंड चूसने लगीं।

मैंने अपना सारा माल उनके चूचियों और मुँह पर डाल दिया जब मेरा होने वाला था।

वे अपनी उंगलियों से उठा उठा वीर्य को जीभ से चाटने लगीं, फिर मुँह से लंड को चाटकर साफ करने लगीं।

मेरी माँ और मैं उस दिन बहुत चुदाई की।

साथ ही मैंने उनकी गांड मारी।

वह अगली यौन कहानी बताएगी।

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