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मेरी बेटी की पहली चुदाई

मैं 42 साल का हूँ, मैं अपनी एक सच्ची कहानी लिख रहा हूँ. मेरी शादी करीब 20 साल की उमर में हुई. मेरी पत्नी डिलिवरी के समय हमारी बेटी को जन्म देते ही मर गई. उसके बाद मेरे घर वालों ने मुझे दूसरी शादी के लिए बहुत कहा लेकिन सौतेली मां के डर से मैं नहीं माना.

मैं अपनी बेटी से बहुत प्यार करता था और मेरी बेटी मोनिका भी मेरी कुर्बानी को जानती थी इसलिए वो मेरा बहुत ख्याल रखती.

मगर हमारी जिन्दगी में बदलाव तब आया जब एक दिन मेरी बेटी अपनी दोस्तों के साथ बाहर गई और मैंने सोचा कि उसकी अलमारी की सफाई कर दूँ.

मैंने देखा कि उसकी अलमारी में अडल्ट बुक्स और सी डी रखी थी.

उस दिन सालों से सोई मेरी वासना जाग उठी और मैं अपनी बेटी को दूसरी नज़रों से देखने लगा. मेरी बेटी 18 साल की सेक्सी लड़की थी, उसका साइज़ 32-28-32 था. मैं हर समय उस पर नज़र रखने लगा.

वो अक्सर घर में शोर्ट्स पहनती है. मैं अक्सर उनमे उसके सेक्सी लेग्स और पेंटी को देखता रहता. उसके ब्रा को लेकर मुठ मारता. आप यह बाप बेटी की चुदाई कहानी फ्री सेक्स कहानी डॉट इन पर पढ़ रहे हे।

मेरा और उसका कमरा साथ साथ है, मैंने उसके कमरे में देखने के लिए बीच में एक मोरी भी कर ली.

एक दिन मैंने देखा कि रात को करीब 12 बजे उसके कमरे से आवाज़ आ रही है. मैंने देखा तो मोनिका अडल्ट फ़िल्म देख रही थी. उसका फेस दूसरी तरफ़ था और वो सिसकियाँ ले रही थी. मैं अपने आप को रोक न सका और मैंने उसके कमरे का दरवाजा खोल दिया.

वो मुझे देख कर डर गई और रोने लगी. मैंने उसके पास जाकर उसे पकड़ लिया.

वो मुझे कहने लगी – पापा, यह क्या कर रहे हैं?

मैंने कहा – वही जो एक मरद और औरत करते हैं.

‘पर मैं आपकी बेटी हूँ’ उसने कहा.

पर मैंने उसकी बात नहीं सुनी और उसकी नाईटी फाड़ दी. उसने अंदर से कुछ नहीं पहना था. उसके गोरे गोरे मुम्मे देख कर मैं होश खो बैठा और उन्हें चूसने लगा. उसकी चूत पर एक भी बाल नहीं था, मैं अपनी बेटी की चूत को चूसने लगा.

अब तक मोनिका भी गर्म हो गई थी, वो भी मेरा साथ देने लगी.

मैंने अपने कपड़े उतार दिए और अपना लंड उसके मुंह में डाल दिया फिर मैंने उसकी टांगें खोल कर अपना लंड उसकी चूत पे रखा. पहले ही स्ट्रोक में मैंने अपना 6 इंच लंड अपनी बेटी की चूत के अंदर घुसा दिया.

मोनिका चीखने लगी थी, मैंने उसके लिप्स को अपने लिप्स से दबा दिये, दूसरे स्ट्रोक में मैंने अपना पूरा लंड अन्दर घुसा दिया. उसकी आँखों से आंसू आने लगे मगर मैं लगातार स्ट्रोक लगाता रहा.

अगली सुबह मैं अपनी रात वाली बात से बहुत दुखी था. मैं मोनिका से नज़रें नहीं मिला पा रहा था. मगर रात को मोनिका मेरे रूम में आई और बोली – आपने मेरी खातिर अपनी सारी जिन्दगी ख़राब कर दी, तो मैं क्या आपकी खातिर कुछ नहीं कर सकती!

उसने अपने कपड़े उतार दिये और मेरे भी उतारने लगी.

उसके बाद हम डेली सेक्स करने लगे, जब भी हम घर पर होते नंगे ही रहते.

करीब 2 महीने के बाद मोनिका प्रेग्नेंट हो गई. तब हम लुधियाना से दिल्ली आ गए और यहाँ आकर शादी कर ली और पति पत्नी के तरह रहने लगे. यहाँ किसी को नहीं पता कि हम बाप बेटी हैं. आप यह बाप बेटी की चुदाई कहानी फ्री सेक्स कहानी डॉट इन पर पढ़ रहे हे।

जब मोनिका के डिलिवरी हुई तो मैं बहुत डरा क्यूँकि मैं अपना दूसरा जीवनसाथी नहीं खोना चाहता था.

अब मोनिका मेरे दो बेटों की माँ है. मगर कभी कभी मैं सोचता कि मोनिका हमारे बेटों की माँ है या बहन?

मेरी बेटी की चूत की चुदाई की हिंदी सेक्स कहानी आपको कैसी लगी? मुझे मेल करके जरूर बताये। 

रिश्ते की मामी को चोदा। Mami Fuck Kahani – Family Sex Stories

 में मैंने होटल में एक दूर के रिश्ते की मामी को चोदा। वह शादी में हमारे घर आई थी, लेकिन मैं उन्हें स्टेशन से लाते समय पटा कर होटल में ले गया।

मित्रों, मैं रवि हूँ। मैं 29 साल का चौड़ा लंबा मर्द हूँ।

ये Porn Xxx Mami Fuck Kahani मेरी दूर की मामी मीनू की है।

मेरे भाई का विवाह दो दिन पहले हुआ था।

दिल्ली से मामी हमारे घर आ रही थीं।

यह ट्रेन सफर चार घंटे का था।

मैं घर से गाड़ी लेकर स्टेशन पर उन्हें ले गया।

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जब वे आई तो मैंने उन्हें देखकर नमस्ते की और उनका सामान गाड़ी में रखकर आगे बैठा लिया।

मामी ने पंजाबी सलवार सूट पहना हुआ था।

उनकी हाइट पांच फुट आठ इंच की थी और उनका भरा हुआ बदन ऐसा था जैसा कि MILF पॉर्न फिल्म्स में होता है।

लाल सूट में वो एकदम सेक्सी लग रही थीं।

इस समय दोपहर हो गई थी। यह ठंड का मौसम था।

उनसे वैसे ही बातचीत होती रही।

तब उसने कहा: “मुझे हील्स लेने हैं, किसी अच्छी दुकान पर चलो।”

उन्हें मैं लेकर चला गया।

मैं उनको लेकर शॉप में पहुंचा तो हम दोनों को हर कोई देखने लगा।

हम दोनों आकर्षक और औसत से कुछ ज्यादा ऊंचे लग रहे थे।

जब वे हील्स चैक करने के लिए अपने हील्स उतारे, तो मैं उनके चिकने पांव और गोरेपन को देखकर पागल हो गया।

मुलायम, सफ़ेद मक्खन के पैर देखकर मैं हैरान हो गया।

मैं उनके पैरों को देखकर सोच रहा था कि ऐसे पैरों की चूत कैसी होगी।

ये सब सोचते ही मेरा लिंग उठने लगा।

मैं खड़ा था, लेकिन वे कोई प्रतिक्रिया नहीं दी।

कुछ देर बाद उन्होंने अपने लिए हील्स लेकर वापस गाड़ी में बैठ गईं।

अब वो पूछने लगीं, “तुम मेरे पैरों को इतना ध्यानपूर्वक क्यों देख रहे थे?”

मुझे नहीं रहा गया और मैंने कहा कि जो होगा देखा जाएगा: मामी, आपके पांव इतने सुंदर हैं कि मैं आपकी हील्स में होता। सच में, आप बहुत सुंदर हैं मामी। तुमसे एक बार प्यार करना चाहता हूँ।

वह हंसते हुए कहा, “हम्म… ये इरादा अच्छा है?”

क्योंकि उनके पति अब नहीं थे।

मैंने पूछा: हां, आपका क्या लक्ष्य है?

उसने वासना से मुझे देखकर कहा कि यही मेरा भी है। लेकिन अभी नहीं!

मैंने बहाने बनाकर उन्हें आश्वस्त किया।

कुछ देर के बाद वह मान गईं।

फिर मैंने घर पर फोन किया और कहा कि मामी का फोन आया है, वह कल आएगी और मैं काम से जा रहा हूँ।

मेरे ऐसा फोन करते हुए देखकर मामी मुस्कुराने लगीं।

मैंने पांच स्टार होटल में एक कमरा बुक किया और एक रेड लेबल व्हिस्की की बोतल ले ली।

होटल में हम दोनों एक कमरे में चले गए।

मैं कमरे में जाते ही मामी के गले लग गया।

मामी ने भी बहुत हल्की हग की।

मैं बहुत खुश हो गया।

उनके हग से मुझे पता चला कि मामी भी प्यार के लिए तड़प रही हैं।

क्योंकि कोई पति नहीं होने पर एक स्त्री के दुःख को समझ सकते हैं।

फिर चूमाचाटी शुरू हुई और हमारा आलिंगन कुछ कम हुआ।

हम दोनों एकदम शांत हो गए जब शुरुआत धीमी हुई।

उनके दोनों होंठ मेरे होंठों में फंस गए।

हम एक दूसरे की जीभ चूसने लगे।

उनके चूतड़ों को मेरे दोनों हाथों से मसला जा रहा था।

वह मेरे बालों में हाथ डाल रही थी और उनका दूसरा हाथ लंड पर चल रहा था।

हम लगातार एक दूसरे के होंठ चूसते रहे।

हम दोनों के चेहरे जल गए।

फिर मैं रुका नहीं।

मैंने उनको दीवार के साथ उल्टा खड़ा करके उनके चूतड़ों में मुँह डाला।

दो मिनट बाद, उन्होंने कहा, “अभी रुको, जरा सब्र करो, बहुत मज़ा आएगा।”

मैं उठकर मामी को चूमने लगा।

मामी ने मुझे बाहर निकालकर सोफे पर बैठ गईं।

अब मैंने पैग बनाया और हम दोनों चियर्स करके कुछ पेग लेने लगे।

तीन पैग के बाद मैं उनके साथ खोने लगा।

मैं चौथा पैग बनाकर उनके सामने नीचे बैठ गया।

मामी ने नीचे बैठे होने का कारण पूछा।

मैंने कहा, मामी, जो प्यार आप चाहते हैं। तुम्हारे शरीर का हर अंग मुझे चूमना है।

ये सुनकर उनका शरीर गर्म हो गया।

तब मैंने नीचे बैठे बैठे उनका एक पांव उठाकर हील्स के ऊपर से किस किया।

उनके पांव और हील्स की सुगंध क्या सुंदर थी!

फिर मुँह से ही उनके पैरों को चूमने लगा।

धीरे-धीरे उसके पूरे पंजे को, पैर के अंगूठे से सभी उंगलियों तक चूमता चला गया।

इससे मामी भी थक गईं।

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फिर उन्होंने हील्स पहने हुए अपने पैर मेरी गर्दन के पीछे करके डाल दी।

मैं अपने पैर से नीचे झुकाकर दूसरे पैर पर मुँह लगाया।

मैं पागल हो गया।

उसने कहा, “तुम मेरा टॉय ब्वॉय जहाज हो।”

उसने दूसरे पांव से एक थप्पड़ जैसा मारा और अपनी हील्स मेरे मुँह में डाल दी।

मैं इतना उत्तेजित हो गया कि मैं बता नहीं सकता।

रब करके दोनों पांव मुँह पर रखकर एक को मुँह में डाल दिया।

फिर वे सीधे आगे आईं और मेरे मुँह पर ज़ोर से थप्पड़ मारकर मेरा कान खींच लिया।

तुरंत बाद, मामी ने मुझे ज़ीभ चुसवाना शुरू कर दिया और मुझे किस करना शुरू कर दिया।

मैंने जो सोचा था, उससे कुछ अधिक हो रहा था। मैं फटने को तैयार था।

मुझे उठाते हुए वे सोफे पर चढ़ गई।

बाद में मैंने उन्हें गोदी में उठाकर बेड पर लेटा दिया।

रवि, मैं तुम्हें प्यार करती हूँ… बस आज मुझे पूरी तरह प्यार करो। मैं प्यासी हूँ।

मैंने उनकी लाल ब्रा और कमीज उतारी। मेरे सामने गोल, टाइट चूचियां थीं।

मैं लपककर दबाने और चूसने लगा। मामी का दूध चूसने लगा।

“आह आह आअहह…” वह अपने मुँह से बोलने लगी।

फिर मैं बारी-बारी से मामी की चूचियों के निप्पलों को दांतों से चूसने लगा।

मामी भी मुझे अपने सीने में दबाकर दूध चुसवाने और लेने का मजा देती थीं।

हम दोनों एक साथ सातवें आसमान में उड़ रहे थे।

फिर गर्दन के नीचे उनको किस करने लगा।

उन्हें पागलपन आने लगा।

मैं फिर से उनके पेट पर आ गया और सलवार उतार दी। मैं मामी की मक्खन सी जांघों को चाटने लगा।

मुझे अपनी जांघों के बीच दबाती हुई पागल होने लगीं, अपने पैर फैला कर।

मैं उनके पैरों को चाटने लगा और उनके नीचे आ गया।

मैंने उन्हें फिर से बेड पर उलटा कर दिया।

मैंने अपने दांतों की मदद से मामी की पैंटी खींचकर उतार दी और उनकी गांड की खुशबू ली।

अब मामी पूरी तरह से नंगी थीं।

मैं अपनी जीभ को उनके पांव से लेकर गर्दन तक ले गया।

वह तड़प रही थी और पूरी तरह पागल हो गई थी।

फिर नीचे उतरा और मामी की गांड चाटने लगा।

मामी की गांड की गंध इतनी सुगंधित थी!

मैं उसी बीच मामी की गांड में एक उंगली डालकर उनके चूतड़ों पर बाईट करने लगा।

उन्हें गांड में उंगली मिलते ही उनके मुँह से एक मादक सिसकारी निकल गई।

मामी ने कहा, “आह बस करो बाबा… दर्द होता है।”

तो मैंने कहा कि दर्द में ही मज़ा आता है।

मैंने उनके हाथ पीछे करके उनकी गांड चाटते हुए उन्हें सीधा कर दिया।

मामी ने मुझे अपने ऊपर लिया और एक रसभरी स्मूच दी।

मुझे नंगा होना चाहिए था।

मैं तुरंत नंगा हो गया और उनकी चूत पर मुँह रख दिया।

टाँग खोलकर दोनों हाथों से चूत चाटनी शुरू कर दी।

वह मेरे मुँह को अपनी चूत में दबाने लगी।

मामी की चूत का स्वाद क्या बताऊं?

वह भी अपनी कमर ऊपर उठाकर चूत चुसवाने लगी।

कुछ मिनट बाद मामी की चूत से पानी निकल गया।

जब उनकी चूत का पानी मेरे मुँह में आया, तो मैं पीता चला गया।

उन्हें चूसने के बाद मैं उन्हें चुंबन करने लगा।

अब वो मेरे ऊपर आ गईं और ज़ीभ से मेरे लंड को चाटने लगीं।

वह मेरा लंड पकड़ कर कही, “आज सालों बाद एक लंबा लंड मिल गया है।”

यह कहते हुए, वे मेरे लंड को मुँह में लेकर हलक तक चूसने लगीं।

वो कुल्फी की तरह मेरे लिंग को चूस रही थीं।

फिर ज़ीभ से लंड का टोप चूसने लगीं।

कुछ समय बाद मामी उठकर मुझे किस करने लगीं।

मैंने उन्हें नीचे करके अपना लंड उनकी चूत में डालने लगा।

अपने आप को सैट होने दो, मामी ने कहा और मेरा हाथ हटाया।

लंड ने अपने आप चूत का मुँह खोज लिया, और मैंने गांड उठा कर लंड को हल्का सा अंदर डाल दिया।

जब मोटे लंड का मोटा सुपारा उनकी प्यासी चूत में घुस गया, तो उन्होंने सिसकारी दी।

मामी ने कहा, “आह, आह, जन्नत मिल गई, आह, रुकना मत, पीते जाओ!”

इसके बाद उन्होंने मुझे कसकर पकड़ लिया।

मैंने एक बार फिर झटका दिया और अपना लंड अंदर डाल दिया।

मैंने चार धक्कों में पूरा लंड अंदर डाल दिया।

मेरी कमर पर नाखून मारने लगीं और दर्द के मारे लंबी सांसें लेने लगीं।

उन्हें चोदते हुए मैं झटके मारता रहा।

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हर चुनौती का मज़ा अलग था।

मैं होंठ पीता, चूची पीता और कभी-कभी कान में जीभ डालता।

दस से पंद्रह मिनट के बाद, वो किस करते हुए मेरे ऊपर आ गईं और लंड पर बैठकर कूदने लगीं।

मामी ज़ोर से चिल्लाने लगीं, “आअहह अहह अआह आअह…” जब लंड उनकी चूत में खलबली मचा रहा था।

फिर दस मिनट कूदने के बाद वह मेरी छाती पर सर रखकर शांत हो गईं।

मामी ने कहा कि अगर कुछ और करना हो तो आ जाओ।

मैंने उन्हें घोड़ी बनाया और उनके चूत में लंड लगाया।

मैं उनकी गांड में उंगली डालने लगा।

वह खुशी से चिल्लाती रहीं, “आह कम ऑन बेबी… आह फास्ट आआहह फक मी बेबी फास्ट!”

मैं भी पूरी गति से चोदता रहा।

उसने मुझे गांड में उंगली मारने से रोकने के लिए अपने हाथों को पीछे किया. मैंने अपने दोनों हाथों को कमर के पीछे करके तेज तेज झटके मारने लगा।

उन्हें अधिक दर्द होने लगा।

अब रुक भी जाओ,मादरचोद, मामी ने कहा।

जब मैं रुकने वाला था, तो उनकी चूत में एक लंड पड़ा।

आवाज ठप रही।

फिर मैं उनके बालों को खींचकर किस करने लगा।

पोर्न मामी दर्द से पीछे घूमी और मेरे होंठ चूसने लगी।

मामी एक बार फिर जोरदार चुदने के बाद झड़ गईं।

उन्हें नीचे फर्श पर बैठाकर मैं अपना लंड मुँह में डालकर चोदने लगा।

मैं सिर्फ उनके मुँह में रस छोड़ दिया।

वह सब कुछ पी गईं।

मैंने उन्हें गोदी में उठाया और उन्हें नंगा करके सोफे पर बैठा दिया।

जब मैंने पैग बनाया, वो मेरे कंधे पर सर रखकर भावुक होने लगीं।

मैं उन्हें किस करता रहा और एक हाथ से उनकी गोल गोल चूचियों को मसलता रहा।

फिर उठकर वॉशरूम में मूतने के लिए चली गईं।

मैंने उन्हें पकड़ा और उनके साथ गया।

उसने कहा, “तुम क्यों आए हो?” मैं पेशाब करूँगी।

मैंने कहा कि प्यार का अंतिम चरण अभी बाकी है।

उसने पूछा, “वह क्या है?”

मैं बिना कुछ कहे सीधा फर्श पर लेट गया।

उठो, उन्होंने कहा।

मैंने कहा कि तुम मेरे मुँह में सुसु डालो। मैं सारी पीयूंगा!

उन्हें आश्चर्य हो गया।

मैंने कहा कि अगर आप कुछ मानते हैं तो ऐसा करो।

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कुछ देर बाद उन्हें विश्वास आया।

फिर मैं बैठने से पहले मामी ने मेरे मुँह पर पैर डालकर कहा, “तू मेरा पालतू कुत्ता है।”

मैंने कहा, “जी मालकिन!”

उसने यह कहते ही मुँह पर अपनी चूत रखकर मूत्रस्त्राव करना शुरू कर दिया।

परीक्षा कुछ देर के लिए अजीब लगी, लेकिन फिर भी मैं पूरी तरह मूत पी गया।

फिर पोर्न मामी उठकर मुँह पर चूत रगड़ने लगी।

मेरे कान पकड़कर मुझे टॉयलेट से बाहर ले आईं।

मैं कुत्ते की तरह निकल गया।

बाहर आकर मैं उनके पैरों में सर रखकर उनके पैरों को चाटने लगा। उन्हें अपने पैरों से मेरे मुंह को रगड़ते हुए पैग बनाया।

पोर्न मामी फक पूरी रात चलता रहा।

मेरा तीन साल का सपना आज पूरा हो गया।

मैं अगले भाग में मामी की गांड मारने की सेक्सी कहानी लिखूँगा।

यह Porn Xxx Mami Fuck Kahani आपको कैसी लगी?

चचेरी बहन की कुंवारी चूत चोदने का मजा लिया

| Hot Cousin Sister Xxx Sexy Kahani – Bhai-Bahan Chudai Kahani पढ़े। मैं अपने पैतृक गाँव में अपनी चचेरी बहन की कुंवारी चूत चोदने का मजा लिया। उसने मेरा मोबाइल गेम खलेने के लिए लिया, लेकिन फिर से नहीं दिया। Brother Sister Sex Story

मित्र, आज से चार साल पहले मैंने यौन संबंध बनाए थे।

हम सभी शहरवासी हैं। हमारा गांव ट्रेन से 20 घंटे की दूरी पर है, इसलिए बहुत कम समय लगता है।

मैं बहुत देर बाद गाँव गया, जहां हमारे घर में सिर्फ दादा जी (जिनके पास दादी नहीं हैं) रहते हैं।
दादाजी एक कृषक हैं।

वहाँ लोग सुबह जल्दी उठकर अपने जानवरों को खेतों में ले जाते हैं। उन्हें चारा चराने के लिए ले जाना पड़ा।
11-12 तक वे वापस घर आ जाते हैं।

शाम को 3 से 6 बजे तक घर में रहना था, फिर चौपाल पर जाना था।
यह वहाँ हर दिन होता था।

मेरे बड़े पापा (ताऊजी) वहां एक घर में अकेले रहते हैं, इसलिए उनका भोजन मेरे बड़े पापा से आता है।
बड़े पापा का घर करीब दो सौ मीटर दूर होगा।

मैं गांव गया तो वहां बहुत गर्मी थी।
मैं टीवी वाले कमरे में था और प्रशंसक चला गया और फोन देख रहा था।

तभी मेरी चचेरी बहन दादाजी को खाना देने आई और मुझे घर चलने को कहा।

मुझे खाना खाने का मन नहीं था जब वह खाना खाकर आई थी।

मैंने कहा कि मुझे अभी भूख नहीं है; बाद में खाऊँगा।
मैं भी रुक गया।

यह Hot Cousin Sister Xxx Sexy Kahani है जिसमें उसके साथ सेक्स किया गया है।

पानी चल रहा था और फसल लगी थी, इसलिए दादा एक घंटे बाद खेत चले गए।

अब हम दोनों ही घर में थे और बाहर से कोई नहीं आता था।
कभी-कभी लोग आते थे।

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मैं अपने फोन चला रहा था। भाई, क्या कर रहे हो? बहन आ गई।
मैं उससे एक साल छोटा हूँ।

मैं अपने मोबाइल फोन पर खेल रहा हूँ।
बहन, मुझे भी खेलो; अकेले नहीं खेलो।

मैं: ओके, एक बार तुम बाहर होने पर मैं खेलूँगा।
बहन, ठीक है, गेम से जल्दी निकल जाओ।

मैं थोड़ी देर बाद बाहर निकल गया और उसे खेलने के लिए फोन किया।

वह भी थोड़ी देर बाद चली गई, लेकिन मुझे फोन नहीं किया।

उसे दो बार खेलना पड़ा, लेकिन वह नहीं दिया।

मैंने फोन उठाने की कोशिश की क्योंकि मैं उसका गेम देखकर थक गया था।

हम सब बेड पर लेटे खेल रहे थे।
उसने जबरदस्ती करने की कोशिश करते हुए दूसरी ओर मुड़ दिया।

मेरे हाथ से उसका हाथ दूर चला गया।
मेरे सीने के सामने अब उसके पीछे का हिस्सा था।

मैंने एक बार फिर कोशिश की।
इस बार मैं कुछ आगे बढ़कर फोन लेने के लिए उत्सुक था।
जबकि फोन मेरे हाथ में था, वह भी उसे पकड़ा हुआ था, इसलिए हम दोनों फोन को लेकर खींचने लगे।

उसकी पीठ और मेरा सीना अब तक पूरी तरह चिपक चुके थे।
फोन उसके हाथ में था और मैं भी।

मैं फोन खींचने की कोशिश करते हुए भी उसने जोर लगाया।

थोड़ा अधिक जोर लगाने से वह मेरे सीने पर चिपक गई।
पहली बार था।

मुझे खुशी होने लगी, लेकिन मैंने इसे नजरअंदाज कर दिया।

फोन अभी भी उसके हाथ में था।
जब मैंने फिर जोर लगाया, तो उसने फोन को अपने पेट से चिपका लिया।

अब वह मेरे हाथ से लेकर मेरे पूरे शरीर से चिपका हुआ था।
बगल में टीवी था।

मैं गर्म होने लगा और मज़ा लेने लगा।
मैं पूरी तरह से भूल गया कि वह मेरी बहन है।

तब उसने कहा, “भाई, एक बार फिर खेलो।” एक बार फिर..।
मैं फोन पकड़ा हुआ था और मेरा हाथ उसके शरीर पर था।

मैंने कहा कि फिलहाल नहीं। तुम मेरे बाद खेलो, मेरा नंबर है।
मैंने इतना कहते ही फोन उठाने की एक बार फिर कोशिश की, लेकिन उसने फोन उठाने से इनकार कर दिया।

अब तक वो मुझसे कुछ इस तरह चिपक गई थी कि मैं क्या कहूँ? आप खुद सोचिए।

“बस एक बार भाई… उसके बाद तुम,” उसने अपनी गांड मेरे लौड़े से रगड़ते हुए कहा।

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मैं उसकी इस कार्रवाई से मान गया और हाथ ढीला कर दिया।
वह फिर से फोन उठाकर खेलने लगी।
लेकिन मेरा हाथ उसकी कमर पर था और वह अभी भी मुझसे चिपकी हुई थी।

ना ही मैंने अपना हाथ और लंड हटाया, और ना ही वो आगे बढ़ी।

उसे भी लगता था कि मेरा लंड कड़क होने लगा था। तब भी उसने अपनी गांड को मसला।
वह खेलने के बाद दो मिनट आउट हो गई।

मैंने फोन करने की कोशिश की, लेकिन उसने फिर से मना कर दिया और एक बार फिर अपनी गांड हिलाकर कहा, “यह सिर्फ अंतिम है।”
पर इस बार मैं नहीं माना और वही काम फिर से किया।
फोन उठाने की कोशिश शुरू हुई।

फिर से उसने कसके के हाथ में फोन पकड़ा।
उसने फोन अपनी छाती के पास रख लिया जब मैंने फोन खींचने की कोशिश की।

मैंने फोन छोड़कर उसकी कमर के पास हाथ लगाकर उसको अपने ऊपर उठाया, मैं नहीं जानता क्या हुआ।

उसने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी। वह लगातार हंसती रही।
अब मैं उसके ऊपर था। उसकी पीठ मेरे सीने से चिपक गई। उसकी कमर मेरी कमर से चिपक गई।
उसके पीछे वाले छेद में मेरा औजार लगा हुआ था। दोनों हम चिपके हुए थे।

मैं बहुत उत्साहित था।
मैंने अपना दूसरा हाथ उसके दूध के नीचे रखा और उसे दाएं-बाए हिलाने लगा।
ऐसा करने से मैं खुश हो गया और वो अभी भी हंस रही थी।

बस एक बार और, उसने कहा, फिर लेना पड़ेगा। आपका फोन है।
मैंने कहा कि मेरा फोन है, लेकिन अब खेलो..। मैं भी आपको खेलने नहीं दूंगा जब तक आप फोन नहीं करेंगे।

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मैं उसके साथ लगा रहा और वह फोन में खेलने लगी।
मैं यहां बहुत गर्म हो गया था, लेकिन उसे लगता था कि मैं उसे परेशान करके खेलने नहीं दे रहा हूँ।

मैं उसे दाएं से बाएं और बाएं से दाएं उठाकर रख रहा था। मुझे इसमें बहुत मजा आया।

मैं 2-3 मिनट बाद झड़ गया।
बहन को वहीं बाजू में लिटाकर मैं निकल गया।

मैंने सोचा कि धोना तो पड़ेगा।

मुझे पहली बार अच्छा लगा। उन्होंने इतना होने के बाद मुझसे कुछ नहीं कहा।

अब मैं इसे चोद सकता था। क्योंकि इतना सब होने पर भी किसी को पता चल जाता, फिर भी उसने मुझे मना नहीं किया।

रात को हम दोनों बिस्तर पर जाकर सोने लगे।
मैं भी उसके साथ था।

हम एक साथ सो गए।
तीन बिस्तर और बहन भाई होने के कारण घर में कोई समस्या नहीं थी।

दादाजी घर के बाहर एक पर लेटे हुए थे।
मैं और वो कमरे में थे।

मुझे कोई खुशी नहीं आई; हम दोनों सो गए।
रात के लगभग दो बज रहे थे जब मैंने उसके दूध पर हाथ लगाया।

मैं सपने में ही उसका दूध दबा रहा था।
मैं अचानक जागा और भयभीत हो गया कि ये क्या हुआ।
यह इतना अनजाने में हुआ था, लेकिन मैं गर्म हो गया था।

मैं नहीं जानता कि क्या हो रहा था। मैं इतना गर्म हो गया था कि वह मेरी बहन नहीं है और मुझे उसके साथ ऐसा नहीं करना चाहिए।

मैंने तुरंत उसके नीचे के कपड़े उतारे और अपने भी।

मैंने उसके नीचे के कपड़े उतारने में बहुत कम समय लगा। ताकि वह जग न जाए, मैंने उसे बहुत आराम से उतारे थे।

कपड़े उतारते ही मैंने उसकी गांड में अपना लंड डालने लगा।
मैं आराम से सारा काम पूरा किया।

मैं एकदम से घुस नहीं सकता था, इसलिए मैं बहुत गर्म हो चुका था और अपना दबाव धीरे-धीरे बढ़ा रहा था।
इसलिए मैं धीरे-धीरे उसकी गांड के छेद पर लौड़े को रगड़ रहा था।

सुपारे को उसके छेद में जगह मिली।
धीरे-धीरे मैंने झटके मारने शुरू किए।

मेरा लंड उसकी दोनों जांघों के बीच में घुस गया, लगभग दो मिनट बाद उसने अचानक अपने पैर उठाए।

वह शायद जाग रही थी और मैं भी करने के लिए तैयार था।

हॉल से अचानक आवाज आई। मैंने सोचा कि कोई जग गया है।
हम सब अंदर के कमरे में थे। फिर भी मैंने अपना पैंट उठाकर आगे कुछ नहीं किया।

यह लगता था कि मेरी बहन जाग रही थी जब मैं पैंट ऊपर कर रहा था, तो मैंने देखा कि वह भी अपने नीचे के कपड़े ऊपर चढ़ाने लगी।

मेरी छोटी बहन भी मुझसे चुदने को तैयार हो गई।
उस रात हमें कुछ भी नहीं हुआ।

अगले दिन मैं उसके आने की प्रतीक्षा कर रहा था।

मेरी बहन दादा के लिए भोजन लेकर आई। दादा ने खाना खाकर खेत पर चले गए।
आज हम दोनों फिर से अकेले हो गए।

वह उस कमरे में वापस आई और मेरे फोन को देखकर गेम खेलने लगी।
मैं आज इसे चोदने के लिए तैयार था।

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मैंने बाहर का मुख्य गेट बंद कर दिया ताकि कोई अचानक अंदर नहीं आए।
जब मैं कमरे में वापस आया, तो मैंने देखा कि बहन गेम खेल रही है।

वह खड़ी थी, जब मैं अचानक पीछे से गया और उसे धीरे-धीरे पकड़कर अपने पूरे शरीर से चिपका दिया।
उसकी सांसें बढ़ गईं और मैं भी उत्साहित हो गया।

मैंने तुरंत उसके होंठों पर लिपकिस करने लगा।
वह भी सहयोग करने लगी, लेकिन खुद कुछ नहीं कर रही थी।

वह लगातार दो मिनट की किस के बाद भी चुंबन नहीं लगाया; शायद वह शर्मा रही थी।

कुछ देर बाद, मैंने उसके दूध को थोड़ा दबाया, तो वह उचक गई।
मैंने कुछ देर उसके शरीर का आनंद लिया और फिर अपने मूल काम में लग गया।

मैंने भी अपने पैंट उतारे और उसके नीचे के कपड़े उतारे।

मैंने उससे कहा कि वह लेट जाए।

वह पूरी तरह से नंगी थी और पैर फैला कर लेट गई।
मैं भी उसके ऊपर चढ़ गया और अपने हाथ में अपना लंड उसकी चूत पर रख दिया।

उसकी चूत में हल्का पानी आने लगा।
उसकी चूत में मेरा लंड जोर से घुस गया।

मेरी बहन ने हल्की सी चीख दी और आंसू बहने लगे।
फिर भी वह नहीं बोली।

लंड को आगे-पीछे करने के लिए मैंने अपने आप को एक मिनट रोका।
धीरे-धीरे चुदाई होने लगी, और ऐसा करते हुए पांच मिनट बीत गए।

तब मैंने पूरा लंड निकाल लिया और देखा कि कुछ खून बह रहा था।
मेरी बहन की चूत फटने से ऐसा लग गया।

मैं फिर से उसकी चूत में अपना लंड डालने लगा और आगे पीछे करने लगा।
उसने ऊपर के सारे कपड़े पहने हुए थे, और मैंने नीचे के कपड़े उतारे हुए थे।

ये सिलसिला चूत और लंड के मिलन से जारी रहा।

Antarvasna Chudai Cousin Sister Ki Kahani

थोड़ी देर बाद मेरी बहन ने पहली बार कहा, “भाई, थोड़ा आराम से..।” दर्द होता है।
बहन, मैंने कहा कि दर्द होगा ही..। यह पहली बार नहीं है!
उसने मुस्कराया।

मैंने उससे पूछा कि आपका क्या अनुभव है?
अच्छा लग रहा है भइया, उसने शर्माते हुए कहा।

मैंने पूछा कि क्या आपको मजा आ रहा है?
उसने हम्म कहा।

मैंने पूछा कि क्या आप रात भर जग रहे थे और फिर भी कुछ नहीं कहा?
उसने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी।

मैंने एक बार फिर पूछा: क्या आप जानते हैं कि जो हम कर रहे हैं, उसकी प्रतिक्रिया क्या है?
उसने हम्म कहा।

मैंने पूछा: आपको क्या लगता है?
उसे कुछ नहीं कहा।

ये सब चोदने के बीच में हुआ।
जब मैं अपनी बहन को चोद रहा था, तो वह भी मज़ा ले रही थी।

अब तक मेरा लंड उसकी चूत में एकदम कसा हुआ चल रहा था और उसकी चूत से हल्का पानी बहने लगा था।

पानी निकलने के लिए कुछ भी जगह बाकी नहीं लगी।

कुछ पंद्रह मिनट बीत गए जब मैं बहन को चोदने लगा।
उसने पूछा, भाई, कब तक करेंगे?
मैंने कहा, “जब तक आप इसका मतलब नहीं बताते?”

फिर कुछ नहीं कहा।

मैंने पूछा: दर्द है क्या?
उसने कहा, हम्म, हल्का।

मैंने पूछा: तुम्हें करने का मन नहीं है? अगर आप कहेंगे तो मैं नहीं करूँगा..। मैं रुकूँ क्या?
उन्होंने कुछ नहीं कहा।

मैं जानता हूँ कि वह मना नहीं कर रही है।
मैं फिर भी रुक गया, लेकिन मेरा लंड अभी भी उसकी चूत में था।

मैंने कहा: “अगर आप नहीं चाहते तो ठीक है..।” मैं नहीं करूंगा अगर आप चाहते हैं।

भाई, मैंने कब मना किया? उसने तुरंत पूछा।
मैंने कहा कि थोड़ी देर तक भाई मत बोलना।
अब मैं क्या कहूँ?

मैंने कहा, “कुछ भी नहीं, भाई।”
ठीक है, उसने कहा।

मैंने कहा कि अगर आप चाहें तो पति देव बोल सकते हैं।
उसने पूछा कि क्यों? भैया, तुम मेरे पति नहीं हो।

मैंने कहा कि क्यों नहीं, मैं पति-पत्नी की तरह व्यवहार कर रहा हूँ। इसलिए आप हमेशा मुझे पति कहते हैं, चाहे कौन सा हो। थोड़ी देर नहीं!

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उसने कहा, “ठीक है, पति देव जी, अब आप ये बताओ कि कितनी देर और होगी?”
मैंने कहा कि मैं प्यार करता हूँ, यह सुनकर अच्छा लगा।

मैंने उसे तुरंत गले लगा लिया और उसके दूध को दबाने और चोदने लगा।

मैंने कहा, बस कुछ समय और!
हम दोनों झड़ गए जब मैंने अपनी सेक्सी बहन की देसी चुदाई की।
मैं दो मिनट बाद में झड़ गया।

फिर मैंने अपने आप को बाथरूम में साफ किया और उसने भी।

अब मैं जा रही हूँ भैया, वह वापस कमरे में बोली।
मैंने कुछ नहीं कहा, तो वह चली गई।

मैं तुरंत उसके पास भाग गया और पूछा, क्या आज रात यहां सोने आओगी?

ठीक है, मैं आ जाऊंगी, उसने कहा।
यह सुनते ही मैंने उसे किस किया और उसके दूध को एक मिनट तक दबाया।

इसके बाद वह चली गई।

अगली कहानी में आगे की कहानी लिखूँगा।

Hindi sex story – Bhabhi Poori Masti Me Chudwa Rahi Thi sex story

Hindi sex story: Hindi Sex Story, Hello dosto mujhe umeed hai aap sab thik honge aur jam kar chudai kar reh honge. Main aap ka dost rakesh aaj ek baar fir se apni sachi ghatna le kar aaya hoon. Meri aaj ki ye hindi nonveg stories meri apni jindgi ki ek sachi ghatna ke upar hai. Chubby Lady Fuck

Ye story meri aur mere brother-in-law ki wife (meri bhabhi) ki chudai ki hai. Yeh baat kuch 2 week pehlay ki hai. Meri marriage ko abhi 5-6 months hue hain. Meri bhabhi ka naam Rekha hai and who thodi chubby hai. 36-34-38. Her age is 28. Kuch din pehlay main meri wife apne maikay gayi hui thi aur bhabhi Almora aayi hui thi.

Meri job Almora main hai aur mera sasural Dehradun. Maine sham ko wapis jana tha to wife ne kaha ki please bhabhi to unke ghar se pick kar lena. Miane ok kaha aur bhabhi to call kiya. Jab unhone call uthaya to unki saas phooli hui thi. To maine poocha.

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Me – kahan ho. Saans kyon chadi hai.

Bhabhi – kuch nahin aur hasi.

Me – batao koi problem hai kya.

Bhabhi – main apko nahin bata sakti jiju.

Maine aise hi keh diya bhai sahib srinagar gaye hain to hand use kar to nahin rahi.

Bhabhi – haan aapne kya karna hai.

Me – get ready at 6.00 pm u have to go with me phir rastay main bataunga maine kya karna hai.

Bhabhi – acha ji dekhte hain.

Bhabhi ne phone cut kar diya. Mujhe laga shayad bhabhi aaj de degi. Agar de de to maja aa jaye. Jane se pehlay maine kohinoor xtratime ka packet liya. Main office se nikalte late ho gaya. 6.30 baj gaye. Dustance 65 km ka hai. Gadi chali aur city se byepass road par aakar maine poocha bhabhi kya hua aapne mujhe call kar lena tha.

Bhabhi – kab

Me – main help kar deta sham ko. Khud se majaa aata hai.

Bhabhi – parents ghar par the. Kabhi bula kar dekhun gi apko bhi.

Maine bade slow se bhabhi ki leg par hatha rakha to bhabhi boli. Aise mat karo yeh galat hai maine apki bhabhi hoon.

Me; bhabhi to mere sasural main ho yahan par to kuch bhi ho sakta hai.

Bhabhi sharma gayi aur bahar dekhne lagi. Mera lund khada ho chukka tha. Bhabhi ka hath pakda aur mere lund par rakha. Meri taraf dekhe bina lund dabane lagi. Maine samajh gaya ab to pakka legi mera lund. Maine apni pant ki zip open kari aur lund babhar nikala.

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To bhabahi ek dum se mudo aur boli gadi rook. Maine gadi roki to boli wow yeh to un se bhi bada hai. Unka to chota sa hai. Yeh kehtay hi bhabhi ne lund muh main le liya aur suck karne lagi. Wow maja aa gaya

Maine bhabhi to kaha lets fuck on the way. Who kuch nahin boli. Maine 4-5 baar poocha. To boli ok par jaldi karna aur kahan karengay. Meri to lottery lag gayi thi.

Maine highway se gadi ek link road par utar li jo nagrota se ho kar jati hai. No traffic on that road. Maine gadi roki aur bhabhi ka face apni side turn kiya aur bhabhi ke lips par kiss karna shuru kiya. 2 min bad bhabhi saath dene lagi.

Maine bhabhi ki tongue ko bhi kiss kiya aur hum mast ho gaye the, mene unke boobs dabai aur phir hath unki salwar ke pandar panty main daal diya , unki chut gili ho gayi thi. Chut ki sehlatay time bhabhi machal rahi thi.

Ab to garam ho gayi thi poori. Maine bhabhi ki shirt uthai aur unko gol gol boobs ko choosa nipple par cut kiya. Bhabhi paggal ho gayi thi. Aur boli jiju ab aur mat tadpao please fuck me. Maine tease karne ke liya poocha kya. Boli apna lund meri chut main dal do please ab.

Maine bhabhi ko salwar utar kar back seat par aane to kaha. Bhabhi ne bhi salwar kholi aur pichay chali gayi maine window kholi aur andar gaya aur bhabhi ki legs spread kar ke licking shuru ki 3-4 mins bad bhabhi ne pani chod diya apna lund bahar nikala aur suck karvaya.

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Thodi time bad main gadi se nichay utra aur maine bhabhi ko window ke pass pull kiya. Kya mast chut thi. Ek kiss ki chut par condom nikala aur lund par chada kar bhabhi ki chut par thook lagai. Lund ka topa bhabhi ki chut par masla.

Bhabhi boli ab dalo bhi jaan loge meri kya? Phir maine slowly lund bhabhi ki chut main ghusaya. She was crying. Bahar nikalo. Maine lund andar bahbar karna shuru kiya. In out bhabhi maja le ne lagi ahhhhh jiju choodo ahhhh choodo aahhhh tezzz texzzzz.

Maine ek dum speed badai to unhe majaa aane laga to kehnay lagi chodo choodo ahh ahhh ahhhh ahhhhh. Poori gadi main puch puch ki sound aa rahi thi. Maine jhat se. Utha aur seat par baitha aur bhabhi mere lund par aa kar baith gayi.

Ab poora maja le kar upper nichay hone lagi. Muje majaa aa raha tha. Aur bhabi screame kar rahi thi. Shhhh ahhhhhhh ahhhh ohhhhhh jijuuuuuu humne kul 20 min chudai ki aur main jhar gaya. Bhabhi ne mujhe seat par baithaya aur bhabhi mera lund choosne lagi.

Phir maine bhabhi ko gand ke liye kaha to mana kar diya par boli agar mouka laga to ghar par dongi. Hum ghar pahunchay sab normal tha par bhabhi bahut happy thi. Next day was sunday aur meri wife ka exam tha to who apni friend ke sath gadi le kar exam dene gayi.

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Main, meri saas and bhabhi were at home. Maine bhabhi to apne room se call kiya. Mera room 1st floor par hai. Bhabhi kya kar rahi ho. Kal ko yaad kar ke kush ro rahi hoon. Bhabhi upar aa jao sasu maa bhi so rahi hogi 15 mins main free kar donga bada man hai. Bhabhi ne mana kar diya.

Par 20 mins bad mere room ka door knock hua. Door khola to bhabi thi. Andar aayi to maine kiss kar diya aur bhabhi par toot pada pata nahin kab dono ne kapde utar diya maine bhabhi ki legs spread kar di aur chut chatne laga. “Chubby Lady Fuck”

Bhabhi machalney lagi, ahhh ahhhh chatooo ahh ahhh ahhhhhh aahhhhh hhhhhh, fuck me. Jiju bas karo ab meri chut main apna bada sa lauda dalo. Meri chut bade time se pyasii hai. Maine bhabhi ko 69 position main set kiya aur bhabhi ne mera lund muh main liya to tha par mere lick karne se unka ahhh ahh ah ah aha aha ha aha h ruk nahi rahi thi aur who beec h beech main chuupa lagati.

Maine bhabhi to kaha yaar condom gadi main reh gaye ab. Bhabhi boli bina condom ke bina bhi to chod sakte ho condom ke bina hi dal do abhi bas maall mere muh me dena I wanna drink. Maine usi time apna lund ka topa bhabhi ki chut par rakha aur andar dala aur chodna chalu kar diya slow slow fucking.

Bhabhi uchal uchal kar chut chudwa rahi thi. Phir maine bhabhi ki apne upar le liya aur nichay se hil hil kar chodta raha. Bhabhi maje le kar mujhe kiss kar rahi thi. Thode time ke bad bhabhi jhar gayi. 10 mins bad bhabhi normal ho gayi aur boli maine chali.

Maine rokaaur kaha abhi mera kaam to hua hi nahin nahin hua. Bhabhi boli apka time lagega aur koi aa jayega. Maine bhabi to kaha please bend like my bitch. Bhabhi maan gayi. Maine bhabhi to ghodi banan aur chut main lund dala. “Chubby Lady Fuck”

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I was fucking but poora maja nahin aa raha tha becoz of bhabhi liquid inside. Maine lund nikala aur gand main dalne laga. Pehlay mana karne lagi. Thoda request ki to maan gayi. Mine gand ke paas ponds cream lagai. Thoda andar dalla to challa uthi.

Maine bhabahi ke face par hand rakha aur zor lagaya. Bhabhi ki gand main lund to gaya par eyes se tears aa gaye. Lund andar gaya aur majaa aa gaya. Humne 25 mins chudai ki aur pir main bhabhi ki gand main hi maal chod diya. Mera to man kar raha tha ki aaj koi na aaye to main poori rat iski chut main hi ghusa kar rakhoon lund. Bhabhi ne kapde pehnay aur khushi main chali gayi. Hope to fuck my sexy bhabhi soon in hardcore position and make her screme a lot.

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मामा जी के बेटी की सील तोड़ चुदाई | Sexy Sister Porn Kahani – Family Sex Stories

मामा जी के बेटी की सील तोड़ चुदाई | Sexy Sister Porn Kahani, में पढ़ें कि मैं अपने मामा जी के घर गया हुआ था तो उनकी जवान बेटी को देखकर मेरा लंड एकदम गर्म हो गया.

मेरी बहन भी मुझे देखकर वासना की नजर को पहचान कर मुस्कुरा रही थी. मेरा नाम राहुल है. यह मेरा बदला हुआ नाम है. मैं उत्तर प्रदेश के मऊ शहर से हूँ. इस समय मैं बीए (2nd ईयर) का स्टूडेंट हूं. यह सेक्सी सिस्टर पोर्न कहानी मेरी और मेरे मामा जी की लड़की सृष्टि की है. मेरे मामाजी कानपुर में रहते हैं, उनकी दो बेटियां हैं.

मैं अपने मामाजी के यहां चार साल पहले गया था, तब उनकी छोटी लड़की इतनी बड़ी और हॉट नहीं थी. उनकी बड़ी बेटी का नाम दृष्टि और छोटी बेटी का नाम सृष्टि है. मैं इस बार उनके यहां गया, तो उनकी छोटी बेटी सृष्टि काफी बड़ी हो गई थी. जब मैं उनके यहां पहुंचा तो उसे देखता ही रह गया. मैं उसकी चूचियों को देखते ही सन्न रह गया.

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मुझे सिर्फ उसकी चूचियाँ इतनी अधिक जानलेवा लग रही थीं कि मैं सब कुछ भुला बैठा कि मैं कहां हूँ. मेरा लंड भी एकदम से कड़क होने लगा था. सृष्टि का साइज 34-32-36 का हो गया था. मेरा लंड मेरी पैंट में फूलने लगा और एकदम से उभर कर बाहर से दिखाई देने लगा था. मेरा मन कर रहा था कि अभी इसे इसकी चूत में उतार दूँ.

फिर मैंने खुद पर कंट्रोल किया, उससे हैलो बोला और हल्की फुल्की बात की. वो भी शायद मेरी पैंट में खड़े होते लंड की दशा समझ चुकी और उसकी आंखों में हल्की सी मुस्कान थी.

मामी ने मेरे लिए चाय बनाई और चाय लेकर उनकी लड़की सृष्टि ही आई. उसने झुक कर चाय टेबल पर रखी तो मेरी मादरचोद निगाहें उसकी टी-शर्ट के गहरे गले से झाँकती उसकी चूचियों के क्लीवेज पर ही टिकी हुई थीं.

सच में वो एक माल थी, जो मुझे उकसा रही थी. हमने शाम का खाना एक साथ किया, फिर हम बाहर टहलने के लिए निकल गए. मैं आप सबको बता दूँ कि हम दोनों आपस में काफी खुले हुए हैं. इससे पहले भी मेरी उससे फोन पर काफी बात होती रहती थी और हम दोनों व्हाट्सैप पर काफी बोल्ड चैट करते रहते थे.

मैंने उससे पूछा- और सुनाओ सृष्टि, तुम्हारा कोई बॉय फ्रेंड बना या नहीं? उसने बताया- अभी तक तो कोई पसंद ही नहीं आया है, क्यों तुम्हें कोई परेशानी है? मैंने उसके दूध देखते हुए कहा- परेशानी कुछ नहीं है, बस जानना था कि तुम्हारी खूबसूरती के पीछे किसका हाथ है? वह अपनी खूबसूरती की बात सुनकर खुश हो गई.

उसे मेरी बात समझ में ही नहीं आई थी कि मैं उसके बड़े बड़े मम्मों को इतने बड़े कर देने में किसके हाथों का कमाल है, ये पूछ रहा हूँ. खैर … इसी तरह की बातें चलती रहीं और बातों ही बातों में मैंने उसका हाथ पकड़ लिया. वह मेरी तरफ प्यार भरी निगाहों से देखने लगी और उसने हल्की सी एक प्यार भरी स्माइल दे दी.

मैंने कहा- मतलब तुम खुद ही अपनी खूबसूरती के इस निखार के लिए मेहनत करती हो? वो बोली- ये तो नेचुरल है यार! मैंने कहा- क्या नेचुरल है? वो बोली- मेरी खूबसूरती. मैंने इस बार खुल कर कहा- और तुम्हारे ये माउन्टेन भी? वो मेरी बात सुनकर एकदम से हड़बड़ा गई और बोली- क्या मतलब? मैंने कहा- कुछ नहीं.

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वह मेरी पीठ पर धौल जमाती हुई बोली- तुम कहना क्या चाहते हो, साफ साफ बताओ! मैंने हंस कर कहा- तेरे हाथों में बड़ी ताकत है. मुझे तेरी इस धौल से समझ आ गया कि तूने खुद ही अपने पहाड़ बड़े बड़े बनाए हैं. अब वह सब समझ गई थी कि मेरा मतलब क्या है. वह मुझे मारने दौड़ी तो मैं भी खुद को बचाता हुआ भागा और हंसने लगा.

कुछ देर तक इसी तरह की मस्ती करने के बाद हम दोनों घर आ गए. मेरे मामाजी नाइट ड्यूटी करते हैं. इसलिए घर में हम तीन लोग ही रह गए थे. मामाजी की बड़ी बेटी एक हॉस्पिटल में नर्स है इसलिए वो अधिकतर घर से बाहर से ही रहती है. अब हम तीन लोग ही थे.

मामी किचन में बर्तन साफ कर रही थीं और हम दोनों टीवी देख रहे थे. अपना काम समाप्त करके मामी अपने रूम में चली गई थीं. बाहर हम दोनों ही बचे थे. उसी समय टीवी में एक सेक्सी सीन आ गया. हम दोनों एक दूसरे को देख कर मुस्कराने लगे. फिर मैंने अपना एक हाथ उसकी जांघों पर रख दिया और धीरे धीरे सहलाने लगा.

वह मेरा जरा भी विरोध नहीं कर रही थी. उसका शरीर अकड़ने लगा था; शायद वो गर्म होने लगी थी. तभी अचानक मामी जी के आने की आहट मिली तो वह मुझसे अलग हो गई. मामी जी ने टीवी बंद करने को बोला और बोलीं- बहुत रात हो गई है, अब सो जाओ. सच में रात काफी हो गई थी.

उस वक्त लगभग साढ़े बारह बजे का समय हुआ था. अब हम दोनों अपने अपने रूम में चले गए. मुझे बिल्कुल भी नींद नहीं आ रही थी.

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मैं बाहर बने कॉमन बाथरूम में गया और उसके नाम की मुट्ठी मार कर अपने रूम में आकर सो गया. सुबह जब मैं फ्रेश होने के लिए बाथरूम की तरफ गया तो मैंने देखा कि दरवाजा हल्का सा खुला हुआ है और दृष्टि बाथरूम में नहा रही है.

उसके नहाने से पानी गिरने की आवाज आ रही थी, इससे समझ आ रहा था कि वो नहा ही रही है और शायद भूलवश उसे मेरे घर में होने की याद नहीं रही थी. मैं भी अनजान बन कर बाथरूम के अन्दर चला गया. वह मुझे अन्दर आया देखकर एकदम से घबरा गई और बोली- तुम यहां कैसे? मैं उसके जिस्म को देखते खो गया.

वह सिर्फ ब्रा और पैंटी में थी. उसके ब्रा सिर्फ मम्मों पर अटकी हुई थी, उसका हुक नहीं लगा हुआ था. उसने सहज भाव से मुझसे दोबारा पूछा- तुम अन्दर कैसे आए? मैंने भी उसकी जवानी को निहारते हुए उसे तुरंत उत्तर दिया- तुम्हें दरवाजा अन्दर से बंद कर लेना था. मैंने सोचा कि अन्दर कोई नहीं होगा इसलिए मैं अन्दर आ गया.

वह पलट गई और जल्दी जल्दी अपनी ब्रा का हुक लगाने की कोशिश कर रही थी. लेकिन उसकी ब्रा इतनी टाइट थी कि उससे हुक लग नहीं रहा था.

मैंने अपने हाथों से उसकी ब्रा का हुक लगा दिया और उसके दोनों मम्मों के निप्पलों को जोर से दबा दिया. वह चिहुंक उठी और मुझसे बोली- तुम बाहर जाओ वरना कोई हमें देख लेगा! मैं तुरंत बाहर आ गया. अब मेरा मन उसे चोदने को कर रहा था. मुझे रात होने का इंतजार था. मैंने किसी भी तरह पूरा दिन काटा.

शाम को खाना खाने के बाद फिर हम दोनों टहलने के लिए बाहर निकल पड़े. मैंने उससे पूछा- क्या वास्तव में तुम्हारा कोई बॉयफ्रेंड नहीं है? उसने ना में जवाब दिया तो मैंने उसका हाथ पकड़ कर उससे कहा- क्या मैं तुम्हारा बॉयफ्रेंड बन सकता हूं? उसने हल्की सी स्माइल दे दी. मैंने तुरंत उसे अपनी बांहों में कस लिया और उसे एक किस किया.

वह मचलने लगी और मेरे साथ हल्का सा सहयोग भी करने लगी. शायद खुले में वो इस तरह से प्रेमालाप नहीं कर सकती थी
मैंने उससे कहा- चलो कहीं बैठ कर बात करते हैं. वह हां में सर हिलाती हुई सड़क से नीचे उतर कर एक खाली और सुनसान सी जगह पर बनी एक पट्टी पर बैठ गई. मैं भी उसके बाजू में बैठ गया.

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उसने मुझसे कहा- क्या तुम सच में ये नहीं जानते थे कि बाथरूम में कोई है? मैंने कहा- वो मैं बाद में बताऊंगा, पहले तुम ये बताओ कि क्या तुमने जानबूझ कर दरवाजा खुला छोड़ा था? वो हंसने लगी और मैं भी हंस दिया. मैंने उसे चूमा तो वो बोली- चलो घर चलते हैं. वहीं ये सब करेंगे. हम दोनों घर आ गए. आज मामी जी के सर में दर्द था

इसलिए वे अपने रूम में जाकर सो गई थीं और सृष्टि किचन में जाकर बर्तन साफ करने लगी थी. मैं भी उसको साथ देने के बहाने से वहां पहुंच गया और उसे पीछे से पकड़ कर उसकी चूचियों को दबाने लगा. उसकी गर्दन पर किस करने लगा. वह भी गर्म होने लगी.

मैंने उसे अपने रूम में चलने को कहा. उसने कहा- तुम चलो, मैं अभी आती हूं. कुछ देर बाद वह मेरे रूम में आ गई. मैंने दरवाजा अन्दर से बंद कर दिया और अपनी सेक्सी सिस्टर बेड पर गिरा कर किस करने लगा. एक हाथ से उसकी चूचियों को दबाने लगा. वह भी मेरा पूरा साथ देने लगी.

उससे मैंने मामी के बारे में पूछा तो वह बोली- मम्मी दवा कर गहरी नींद में सो गई हैं और अब वे सुबह ही उठेंगी. मैंने उसकी आंखों में देखा तो वो शरारत से मुस्कुरा रही थी. मैं समझ गया कि इसने मामी को नींद की दवा दे दी है. फिर मैंने उसके कपड़े निकाल दिए और खुद भी अपने कपड़े निकाल दिए. वह मेरे लंड को देखकर डर गई और बोली- इतना बड़ा! मैंने कभी नहीं देखा.

मैं पाठिकाओं को बता दूँ कि मेरे लंड का साइज 6.8 का इंच है और काफी मोटा है. जब उसने ये कहा कि इतना बड़ा वो अपने अन्दर नहीं ले सकती है. तो मैंने कहा- फिर ऑप्शन क्या है? क्या काट कर छोटा कर दूँ! वो हंस दी. फिर मेरे समझाने पर वो मान गई. अब वो सिर्फ ब्रा और पैंटी में थी.

मैंने उसके पूरे शरीर को चूमना शुरू कर दिया. कुछ ही देर में उसकी जिस्म पर एक भी कपड़ा नहीं था. उसके दूध वाकयी में बहुत मस्त और रसीले थे. मैंने उसे चित लिटाया और उसकी चिकनी चूत में मुँह लगा दिया. कुछ ही देर में वो मेरे सर को अपनी चूत पर दबाने लगी थी और अकड़ने लगी थी.

पाँच मिनट बाद वो झड़ चुकी थी और मैं उसकी चूत से निकला सारा पानी पी चुका था. अब मैंने उससे अपना लंड मुँह में लेने को कहा तो उसने मुझे मना कर दिया. मैंने भी ज्यादा जोर नहीं दिया.

फिर मैंने उसकी चूत पर वैसलीन लगाकर अपने लंड को उसकी चूत के मुँह पर रखा और एक झटका दे मारा. मेरा लंड फिसल गया. मैंने फिर से अपने लंड को उसकी चूत के मुँह पर सैट किया और एक जोरदार झटका मारा. मेरा आधा लंड उसकी चूत के अन्दर समा गया. वह बहुत तेजी से चीखने को हुई.

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मैंने तुरंत ही अपना एक हाथ उसके मुँह पर रख कर दूसरे हाथ से उसकी चूचियों को दबाने लगा. कुछ समय बाद जब उसका दर्द कम हो गया. तब मैंने फिर से लंड को धीरे धीरे आगे पीछे करना शुरू किया. कुछ पल बाद फिर से एक जोरदार झटका मारा. इस बार मेरा पूरा लंड उसकी चूत में समा गया और उसकी चूत से खून निकलना शुरू हो गया

क्योंकि उसकी सील टूट चुकी थी. वह मुझसे लंड निकालने को कह रही थी लेकिन मैंने उसकी बात को अनसुना किया और अपना काम लगातार करता रहा. कुछ ही समय बाद उसे भी मजा आने लगा और वह अपनी गांड उठाकर चूत चुदाने का आनन्द लेने लगी. मैं उसे 15 मिनट तक लगातार चोदता रहा. तब तक वह दो बार झड़ चुकी थी.

अब मैं भी झड़ने वाला था. मैंने उससे पूछा- रस कहां निकाल दूँ? उसने अन्दर ही निकालने को बोला. मैंने अपना सारा माल उसकी चूत में ही छोड़ दिया. मैंने सुबह के 3:00 बजे तक उसे दो बार और चोदा, फिर वह अपने कमरे में चली गई. जब मैं सुबह उठा, तो मुझे पता चला कि उसकी तबियत खराब है.

मुझे तुरंत समझ में आ गया कि उसकी तबीयत रात की घमासान चुदाई के कारण खराब है. उससे चला भी नहीं जा रहा था. मामी जी ने मुझसे कहा- डॉक्टर को घर पर बुला लो. लेकिन मुझे पता था कि सृष्टि की तबियत किस कारण से खराब है. मैंने मामी जी से कहा- मैंने डॉक्टर से बात कर ली है, मैं दवा लेने जा रहा हूं.

मैं एक मेडिकल पर गया और वहां से पेनकिलर और गर्भनिरोधक गोली लाकर सृष्टि को चुपचाप दे दी. फिर मैंने दोपहर में उससे पूछा- कैसी तबीयत है तुम्हारी? उसने एक प्यारी सी स्माइल दी. शाम तक वो सही हो गई और उस रात फिर से मेरे लंड के नीचे आ गई. उसके बाद तो वो मेरे लंड से प्यार कर बैठी. और जब तक मैं वहां रहा, वो रोजाना मेरे लौड़े की सेवा में रही.

दोस्तो, आपको मेरी यह मामा जी के बेटी की सील तोड़ चुदाई | Sexy Sister Porn Kahani कैसी लगी, कमेंट में जरूर बताएं.

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बाप खिलाड़ी बेटी महाखिलाड़िन- 8 – बाप बेटी की चुदाई

जवान लड़की की गांड चुदाई का मजा ही कुछ अलग होता है. और जब बेटी ने बाप से गांड मरवाई होगी तो दोनों को कितना मजा आया होगा?

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दोस्तो, मैं राकेश अपने दोस्त रमेश और उसकी बेटी की गांड मरवाई कहानी का अगला भाग आपको बताने जा रहा हूं. कहानी के पिछले भाग में आपने जाना कि कैसे रमेश ने अपनी बेटी को अपनी मन-मर्जी के मुताबिक चोदा.

अब आगे जब बेटी ने बाप से गांड मरवाई:

गांड चुदाई के लम्बे दौर के बाद रमेश और रिया दोनों थक कर लेट गये थे.
रमेश- खाना खाकर कुछ देर रेस्ट कर लेते हैं. फिर तेरी गांड मारूँगा साली रंडी।

दो घंटे रेस्ट करने के बाद रमेश फिर से रिया के पास आ गया जो बेड पर थक कर सो रही थी।
कुछ देर उसकी रसीली गांड और चूत का स्वाद लेने के बाद रमेश का लण्ड पत्थर की तरह कड़क हो चला था जिसे अब रिया की गांड ही अपने अंदर लेकर मोम सा पिघला सकती थी।

रमेश ने रिया के चूतड़ों पर एक तमाचा मारा और बोला- उठ साली रंडी की बच्ची! छिनाल कुतिया, चल घोड़ी बन जा।
रिया- हां-हां जरूर डैड … उफ़्फ़फ़ … ये एक नया ही अहसास था। क्या मस्त मज़ा मिला आज। आज इस लण्ड को मैं अपनी गांड की पूरी गहराई का अहसास कराऊंगी.

वो बोला- पहले कुतिया बनकर चूस इसे। अपने थूक से नहला दे इसे साली कुतिया। तेरी गांड तो पहले से ही गीली है।
रिया झुककर कुतिया बन गयी और अपने बाल संवारते हुए लण्ड को अपने प्यासे मुंह में गले तक ले गयी।

वो लण्ड चूसने की उस्ताद थी। पापा का लंड उसे वाकई बहुत कड़क लग रहा था। उसने अपनी जुबान का भरपूर उपयोग किया। रमेश के आण्डों को सहलाते हुए वो उसका लंड मस्ती में चूसने में पूरी मग्न थी.

रमेश ने अपने एक पैर को रिया की पीठ पर रखा हुआ था और रिया के बाल सहलाते हुए उसको खूब गालियाँ दे रहा था- मादरचोद, मां की लौड़ी, भोसड़ीवाली, चुदक्कड़ रांड …
और भी कई अलंकारों से रमेश ने उसको नवाज़ा।

रिया गालियां सुनकर और ज्यादा जोश में आ रही थी और लंड चूसने की उसकी गति बढ़ती जा रही थी.

थोड़ी देर के बाद रमेश ने रिया के मुंह से लण्ड निकाल लिया।

फिर रिया उसी तरह घोड़ी बनी हुई थी. वो रमेश की ओर बेसब्री और कामुक अंदाज़ से उसको पीछे आते देख रही थी।
वो बोली- डैड, इस रंडी की गांड मारने के लिए तेल लगा लो! नहीं तो दुखेगा।

रमेश- तेरी गांड पहले से ही खुली हुई है साली रंडी. तेरी गांड को गीला करने के लिए थूक ही काफी है.
उसने काफी सारा थूक रिया की गांड पर लगा दिया. रिया भी थूक को अपनी गांड पर फैलाने लगी.

फिर रमेश ने रिया की गांड के छेद पर लण्ड टिकाया और पहले खूब रगड़ा लण्ड को उसके भूरे सिकुड़े हुए गांड के छेद पर। रिया को ये अहसास हुआ और उसे पता लग गया कि उसकी जिंदगी का सबसे बड़ा लण्ड फिर से उसकी गांड में घुसने वाला है।

वो वासना से ओत प्रोत थी। रमेश ने रिया के बालों को कसकर पकड़ा और लण्ड को दूसरे हाथ से गांड में घुसाने लगा। लण्ड धीरे से गाँड की छेद की परिमिति को बढ़ाते हुए गाँड में प्रवेश करने लगा।

रमेश धीरे से लण्ड घुसा रहा था मगर रिया की चीख अभी एक तिहाई सुपारा घुसने के समय ही निकलने लगी। रमेश डर गया और रुक गया. तब रिया पीछे मुडी और हंसते हुए बोली- अरे, डैड मजाक किया था, डालो ना।

इस पर रमेश ने उसके बालों को कसकर खींचा और बोला- साली देख अब तू, कैसे तेरी गाँड का गड्ढा बनाता हूं मैं. इतना चोदूंगा कि अपनी माँ को याद करोगी।

उसने एक जोर का धक्का मारा और पूरा लण्ड एक साथ रिया की कसी हुई गाँड में उतर गया।

रिया ने हालांकि गाँड बहुत मरवाई थी, मगर इतना मोटा तगड़ा लौड़ा ले रही थी इसलिए उसकी चीख निकल गयी। वो लगभग रोते हुए बोली- डैड आराम से तो पेलते, कहीं गांड फट जाती तो?

रमेश- तुमको अब पता चला ना कि कैसा लगता है गाँड में लण्ड घुसता है तो। अब तो घुस गया. थोड़ी देर में गाँड उसको जगह दे देगी और तुमको मज़ा आएगा।

रिया- अरे डैड, मैं अपना सब तुमको दे चुकी हूं और साथ में मज़ा लूटना है ना! आआहह … थोड़ी देर बस लण्ड को गाँड में स्थिर रखो फिर खूब चोदना। तुमने तो लंड ऐसे घुसाया कि लंड को गांड से डाल कर मुंह से निकाल दोगे!

रमेश- ठीक है साली रंडी, मगर तूने ही मुझे उकसाया था. तेरे मस्त चूतड़ और तेरी गांड के उभरे हुए छेद को देख कर मुझसे रहा नहीं गया.
कुछ देर ऐसे ही रहने के बाद रिया ने कहा- हाँ अब लगता है कि गाँड अभ्यस्त हो गयी है। अब चोदो अपनी रंडी बेटी की गाँड को जितना जी चाहे। अब मज़ा आएगा डैडी।

ये सुन कर रमेश ने रिया की गाँड के छेद, जिसमें उसका लण्ड ऐसे फंसा था जैसे गूँथे हुए आटे में किसी ने लकड़ी गाड़ दी हो, पर थूक दिया। गाँड के छेद के किनारे गहरे भूरे रंग के थे।

रमेश ने अपनी उंगली से थूक को छेद के चारों ओर पोत दिया। फिर उसने लण्ड को धीरे धीरे आगे पीछे करना शुरू किया. लण्ड को वो बमुश्किल आधा इंच ही अंदर बाहर कर रहा था।

धीरे धीरे उसने अपनी रफ्तार बढ़ानी शुरू की। उसे अपने लण्ड पर गाँड का कसाव मूंग के हलवे की तरह लग रहा था। लण्ड का अहसास रिया को भी बहुत आनन्ददायक लग रहा था।

गाँड के अंदर जो नर्व एन्डिंग्स होती हैं वहां पर रिया को लंड का घर्षण बहुत मजा दे रहा था. इसलिए गाँड की चुदाई का मज़ा डबल हो रहा था। रमेश गाँड मारने में मस्त था तो रिया गाँड मरवाने में मस्त थी।

धीरे धीरे उनकी मस्ती अब आक्रामक कामुक जोश में बदलने लगी। रमेश अब आधे से भी ज़्यादा लण्ड अंदर बाहर कर रहा था। रिया भी अपनी गाँड पीछे करके लण्ड लेने में कोई कोताही नहीं बरत रही थी। रमेश एक हाथ से रिया के बाल खींच रहा था और दूसरे हाथ से उसके चर्बीदार चूतड़ों को मसल रहा था।

अब पूरी तेज़ी से गाँड की चुदाई चल रही थी। रिया की गाँड से कुछ ग्रीज़ की तरह तरल पदार्थ रिसने लगा और रमेश के लण्ड पर चिपकने लगा। रमेश ने ये देखा तो उसने सोचा कि क्यों न रिया की गांड के इस लसलसे पदार्थ को रिया से ही चटवाया जाये!

रमेश ने ये सोचकर कमर की हरकत रोक दी। फिर दोनों चूतड़ों को फैलाकर अपने लण्ड को धीरे धीरे बाहर निकाला। रिया की गांड का छेद रमेश के लंड की गोलाई के जितना चौड़ा हो गया था. लंड पर पूरा चिपचिपा पदार्थ लगा हुआ था.

रिया की गांड का अंदर का गुलाबी हिस्सा साफ साफ दिख रहा था. लंड बाहर निकला तो रिया की सांसों के साथ ही उसकी गांड के अंदर का हिस्सा भी ऊपर नीचे हो रहा था. रमेश ने गांड के अंदर ही थूक दिया। वो ये दृश्य देखकर जैसे मदहोश हो रहा था.

तभी रिया ने टोका- क्या हुआ डैड? क्यों निकाल लिया लण्ड बाहर?
रमेश ने उसकी ओर मुस्कुरा कर देखा और बोला- इधर आ साली कुतिया और चूस इस लण्ड पर लगे अपनी गांड के रस को.

रिया पीछे घूम गयी और उसने लण्ड को जड़ से पकड़ लिया. फिर रमेश की आंखों में देखते हुए अपनी जीभ बाहर निकाली और लण्ड के निचले हिस्से को चाटने लगी। फिर सुपारे पर चूसने लगी और फिर लंड के दायें बायें और फिर ऊपरी हिस्से पर अपनी जुबान फिराने लगी.

रमेश उसके बालों को संवारते हुए उसकी ओर प्यार से देख रहा था। रिया ने उसकी ओर देखा और कहा- मेरी गांड तो बहुत मीठी है डैड.
रमेश- क्यों ना होगी? तुम हो ही स्वीट, अब पता चला कि हम मर्द लोग गांड को क्यों चाटते हैं?

रिया के मुंह मे लण्ड था, मगर फिर भी उसकी हंसी रुक नहीं पाई।
वो बोली- अब रोज़ चटवाऊंगी और चाटूंगी लंड से चुदवाने के बाद। डैड, ये एक नई चीज पता चली मुझे आज।

फिर रमेश ने लण्ड को छुड़ा लिया और बोला- अभी पहले तुम्हारी गांड की चुदाई अधूरी है। तुम अपनी चूत को मसलती रहना, तब तुमको और मज़ा आएगा।

रमेश ने रिया को पीठ के बल अपने सामने लिटा दिया। उसके बाल बिखरे हुए थे। होंठों पर लण्ड चूसने के बाद चमक थी। आंखों में कामुकता की प्यास थी। चूचियां तनकर पहाड़ सी लग रही थीं। रमेश ने उसकी गांड़ के नीचे तकिया लगा दिया और फिर उसकी गांड में लण्ड घुसा दिया।

रिया अपनी चूत मसलने लगी और रमेश ने उसकी दोनों चूचियों को अपने पंजों की गिरफ्त में ले लिया। अब फिर से घमासान चुदाई शुरू होने वाली थी।
रमेश ने अब रिया की गांड फिर से मारनी शुरू कर दी।

अब रिया की गाँड भी ढीली हो चुकी थी। अब लण्ड के आवागमन में कोई दिक्कत नहीं थी। वो गांड मरवाते हुए अपनी चूत के दाने को छेड़ रही थी। रमेश ने उसकी चूत पर थूक दिया तो रिया उसे पूरी चूत पर मलने लगी।

रिया- आआहह डैड … ऐसे ही! आआहह … उफ़्फ़फ़ … चोदो इस्स! लण्ड चाहे चूत में घुसे या गाँड में, लण्ड को पाने के बाद लड़की मस्त हो ही जाती है।

रमेश- बेटी, देखो ना तुम्हारी गाँड कैसे लण्ड को अपने अंदर समा रही है। जैसे यह मेरे लण्ड का स्वागत कर रही है और कह रही है कि आओ और मुझे जरा और ज्यादा फैला दो।

रिया- लड़कियों की गाँड चुदने के लिए ही बनी है डैड, ये बात समझ लो। तो फिर क्यों ना स्वागत करे वो। उस पर इतना मस्त लौड़ा … आआहह हह्ह। चोदो अपनी रंडी बेटी की गाँड को और अपने लण्ड की मोहर लगा दो. उफ़्फ़फ़ … मुझे पेशाब भी लग रहा है।

रमेश- तुम फिक्र मत करो बेटी. थोड़ी देर रुक जाओ. तुम्हारी तबियत से गांड मरवाई होगी. कोई कमी नहीं रहने दूंगा। अपनी रंडी की हर ख्वाइश पूरी करेंगे। तेरी गाँड ने पहले से ही लण्ड को जकड़ रखा है, जैसे उसे अंदर खींच रही है. उफ़्फ़फ़ … आह … ओह्ह … साली रांड।

रिया- मुठ गिरने वाला है क्या डैड?
रमेश- हाँ, पियोगी? आह्हह …
रिया- अंदर ही गिरा दो डैड! मेरा भी होने वाला है।
रमेश- ठीक है, ये ले रंडी।

करीब 15 मिनट की चुदाई के बाद रमेश ने मुठ अपनी रंडी बेटी की गाँड में निकाल दिया। करीब 5-7 पिचकारी मारते हुए रमेश चीखता हुआ रिया की चूचियों पर सर रखकर लेट गया।

उधर चूत के मसलने और गाँड में मुठ की धाराओं को महसूस करके रिया भी झड़ गयी और दोनों उसी तरह लेटे रहे। थोड़ी देर बाद रमेश का लण्ड धीरे से निकलने लगा तो रिया ने अपनी गाँड में पास पड़ी अपनी पैंटी घुसा ली और फिर अपने डैड को गले से चिपका लिया।

रमेश जैसे बेहोश था। दोनों गांड मरवाई से थक चुके थे।

कुछ देर बाद:

रमेश- अब तेरा सूसू नहीं आ रहा क्या साली रंडी? गाण्ड मारने के वक्त तो बहुत चिल्ला रही थी तू?
रिया- डैड उस वक्त आया था. अब नहीं आ रहा है।

रमेश- जा अब कर ले. नहीं तो फिर से लौड़ा चूत के अन्दर जाएगा तो दोबारा बोलोगी. तब तक मैं थोड़ा रेस्ट कर लूँ।
रिया- हाँ डैड, सही कहा आपने. चुदाई के वक्त फिर से आ गया तो हमारा मज़ा खराब हो जाएगा।

रिया जब उठी तो उसको गाण्ड में दर्द महसूस हुआ. वो जब चलने लगी तो दर्द की वजह से उसकी चाल बदल गई. वो कूल्हे उठा कर चल रही थी। रिया गाण्ड को मटकाती हुई सीधी बाथरूम की तरफ़ चली गई।

रमेश आराम से लेटा हुआ था.
तभी उसके दिमाग़ में कोई बात आई और वो उठकर सीधा बाथरूम की तरफ़ भागा तो देखा रिया पेशाब करने बैठी ही थी.
रमेश को देख कर खड़ी हो गई और चौंकती हुई बोली- ओह्ह … डैड ये क्या है! मैं तो डर गई. आप ऐसे अचानक आ गए?

वो बोला- अच्छा हुआ साली रंडी तूने सूसू नहीं किया. मेरा भी सूसू आया है. चल दोनों साथ में करेंगे. मज़ा आएगा.
रिया- हा हा हा … कुछ भी बोलते हो डैड। सूसू साथ में करने में क्या मज़ा?

रमेश- तू देख तो सही रंडी कि मैं क्या करता हूँ? मज़ा ना आए तो कहना!
रिया- जो करना है जल्दी करो डैड. अब मुझसे रुका नहीं जा रहा. बड़ी ज़ोर का सूसू आया है।

फिर रमेश नीचे बैठ गया और रिया को करीब खींच कर अपनी जाँघों पर बिठा कर उसके मम्मों को चूसने लगा। उसका लौड़ा एकदम कड़क हो गया. उसने रिया की चूत पर लौड़ा टिका दिया और हल्का सा अन्दर पेल दिया।

रिया सिसकारते हुए बोली- आह्ह … डैड क्या कर रहे हो … पहले सूसू तो करने दो … आप बाद में आराम से चोद लेना।
रमेश- मेरी जान … मैं चोद नहीं रहा हूँ. अब तू ज़ोर लगा के सूसू कर. देख कितना मज़ा आता है!

रमेश की बात को रिया समझ गई. वो मुस्कराने लगी और अपने डैड के गले में हाथ डालकर उसने एक किस कर दिया।
रमेश- अब सूसू करो. मैं धीरे-धीरे तुम्हारी चूत में लौड़ा डालूँगा. बहुत मज़ा आएगा।

रिया ने सूसू करना शुरू कर दिया. उसकी चूत से सीटी की आवाज़ निकलने लगी. उसकी गर्म-गर्म सूसू रमेश की जाँघों पर लगी तो उसको बहुत मज़ा आया और उसी पल रमेश ने भी सूसू की धार रिया की चूत में मार दी।

इससे रिया एकदम से चिहुँक सी गई. उसको चूत में अजीब सा अहसास होने लगा। कुछ देर तक दोनों सूसू करते रहे। कितना आनंद आ रहा था। जब दोनों सूसू कर चुके तो एक-दूसरे को देख कर हँसने लगे।

रिया- हा हा हा डैड, आपकी सूसू कितनी गर्म थी. मेरी चूत की सिकाई हो गई. थोड़ा सा गाण्ड में भी कर देते तो मज़ा आ जाता।
रमेश- तेरी चूत से कौन सी कोल्ड ड्रिंक बाहर आई है साली कुतिया? वो भी गर्म ही थी और तेरी गाण्ड में सूसू करने वाली इच्छा भी दोबारा मैं पूरी कर दूँगा।

वो बोली- डैड आपकी पूरी जाँघें और पेट सूसू से सन गया है. पहले नहा लेते हैं. उसके बाद बेडरूम में जाएँगे, नहीं तो पूरा बिस्तर खराब हो जाएगा और बदबू भी आएगी.

रमेश- ठीक है मेरी जान. लेकिन ऐसा मत कहो कि बदबू आएगी. ये तो अमृत है. मेरा तो दिल करता है कि तेरी चूत से निकला इसका एक-एक कतरा पी जाऊँ।

रिया- छी: छी: कितने गंदे हो डैड. सूसू पीने की बात कर रहे हो!
रमेश- अरे मजाक कर रहा हूँ साली रंडी।
फिर दोनों फ्रेश होकर बाहर आ गए।

कहानी अगले भाग में जारी रहेगी.
बाप-बेटी की इस गंदी गांड मरवाई कहानी में आपको मजा आया हो तो अपने विचार मुझ तक जरूर पहुंचायें. आप कहानी के नीचे दिये गये टिप्पणी वाले खाने में अपने कमेंट्स छोड़ सकते हैं.

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ननद के आशिक से चुद गई बन्नो !

अब मैं अंतर वासना की पक्की पाठक बन चुकी हूँ ! जबसे इस वेबसाइट से नाता जोड़ा है, मेरी जवानी की प्यास और बढ़ने लगी है ! जब लोग अपनी बिस्तर की हरक़त हकीकत में अन्तर्वासना पे ले आते हैं तो सोचा, मैं भी अपनी एक ऐसी चुदाई सबके सामने लाऊँ जो मुझे कभी नहीं भूलेगी !

दोस्तों ! मैं एक बहुत ही चुदासी औरत हूँ ! स्कूल से लेकर कॉलेज टाइम में मैंने बहुत नाम कमाया! लड़कों के साथ मेरे किस्से जुड़ने आम बात थी! कॉलेज के अच्छे से अच्छे लड़के के साथ मेरा नाम जुड़ता ! कम उम्र के लड़कों का चस्का मुझ में हवस डाल गया!

तभी मेरे कॉलेज के किस्से जब घर तक आने लगे तो माँ ने लड़का ढूंढ़ लिया और मेरी शादी का फैसला ले लिया, जिसका मैंने बहुत विरोध किया और माँ को कई खरी खोटियाँ सुनाई ! आखिर उनके ही बनाये गए माहौल में जो देख देख कर बड़ी हुई थी !

खैर, छोड़ो इस बात को !

आखिर मुझे हां करनी ही पड़ी और मैंने एक लड़के के लिए हां कर दी और शादी करवा के ससुराल आ गई ! यहाँ मेरा ज्यादा वक़्त तो घरेलू काम काज में निकल जाता! अपनी सारी शौकीनी अब काम में लगने लगी! टाइट सूट डाल कर लड़कों को बहकाना और फिर उनसे चुदवाना सब कुछ अब पीछे रह गया !

अपनी ननद के साथ मेरी बहुत पटती थी और मैं उसको उसके आशिकों से मिलने में उसकी मदद करती रहती! मेरे पति का लौड़ा इतना बड़ा नहीं था, ऊपर से मेरी रांड ननद सुन्दर – सुन्दर लड़कों से मिलती ! उसका एक आशिक उसे आधी रात को मिलने आता था और कभी कभी उसको चोद भी लेता था ! सब मिलना मिलाना मेरे राह से निकल कर जाता था ! मैंने जल्दी ससुराल में पकड़ बना ली ! मैं किसी से डरती नहीं थी! अब कोई काम-काज किस से कैसे करवाना है, जान गई थी !

उसके आशिक ने जिस रात मिलने आना होता, वो मेरे मोबाइल पे ही कॉल करता और पूछ लेता की आज गीता कहाँ सोयेगी, उसको कहना चौकन्नी रहना !

एक दिन मेरे दिमाग ने पलटी खाई, सोचा अब जब उसका फ़ोन आयेगा तो तो तो  ????

वैसा ही हुआ शाम को मुझे कॉल आई ! उस दिन मेरे पति घर पे नहीं थे! मैंने उसको कह दिया कि आज गीता मेरे कमरे में होगी क्यूंकि मैं आज सासू माँ के कमरे में सो जाउंगी ! तू आराम से मिलना, पिछली खिड़की खुली होगी !

वो बोला- ठीक है भाभी !

मैंने गीता को कुछ नहीं बताया और आराम से अपने कमरे में सो गई और कमरा बंद कर लिया !

करीब रात १२ बजे उसने दस्तक दी ! बत्ती बंद थी, उसने टॉर्च से बेड ढूंढा ! मैंने भी बारीक सी कुर्ती डाली थी ! वो मेरी चादर में घुस गया, मैं भी उसके साथ लिपट गई !

उसने अपने होंठ मेरे होंठों पे रख दिए और चूसने लगा- गीता मेरी जान !

मैं भी गरम हो उसका साथ देने लगी ! उसने मेरी कुर्ती में हाथ डाल मेरे मम्मे दबाने शुरु कर दिए !

वहां से उसको शक हुआ ! मेरे मम्मे गीता से कहीं ज्यादा सेक्सी और गोल थे ! उसने टॉर्च चेहरे पर की !

मैंने आंख मारते हुए कहा,”हाय राकेश ! और मसल न !”

भाभी………. आप ??

“हां मैं ! क्यों क्या हुआ ??

वो ख़ुशी से पागल हो गया- वाह भाभी ! जिसके बारे में सोचते हुए गीता को चोदता हूँ, मुठ मारता हूँ, वो आज मेरे नीचे लेटी है !!

मैंने अपनी कुर्ती उतार फेंकी और उसको नंगा करते हुए उसका मोटा लौड़ा निकाल लिया !

“हाय ! क्या शानदार लौड़ा था उसका ! कितना मोटा लंबा !”

वो मेरे मम्मे को चूसने लगा ! मैं, हाय ! हाय ! करने लगी ! मैंने भी उसको पीछे लिटा कर उसका लौड़ा मुहं में डाल कर चूसना शुरू किया !

“ओह मेरे राजा, चोद मुझे ! हाय बहुत दमदार है ! कब से तेरा मूसल अपनी चूत में डलवाना चाहती थी!”

अभी ले, मेरी कमीनी कुतिया ! भाभी, तेरा यह  देवर है न तुझे रौंदने के लिए !

“हाय रानी, तू तो साली गीता से भी ज्यादा बढ़िया माल है !”

तजुर्बा है, लल्ला जी !

“हाय……. !!!!”

उसने ६९ में ला मेरी चूत पे जैसे तपते होंठ रखें, मैं सी सी सी करने लगी और उसने अपनी ज़ुबान के खेल से मुझे मोहित कर दिया !! बोला अब चोद दूँ ?? सब जाग जायेंगे !

“हट साले, मेरे कमरे में कौन आयेगा ?

यह कह कर मैंने टांगें खोल दी और उसको बीच में आने को कहा और उसने अपना मूसल लौड़ा चूत पे रख घस्सा मारा (पंजाबी में झटके को घस्सा कहते हैं) !

“हाय और घस्से मार ना कस कस के !

“हाय ! साईं, तेरी दीवानी रांड भाभी तुझसे चुदाना चाहती है !”

“कम ओन, फाड़ डाल !” हाय !!! और और और !!!!!!!!!

वो भी ज़बरदस्त प्रहार करने लगा और और मेरे बालों को नोंचते हुए कहा,”चल बहिन की लौड़ी, बन जा घोड़ी !

” यह ले, यह ले !!”

मैंने घोड़ी बन गांड उठा ली उसने तेज़ तेज़ धक्के मारे और मैं झड़ गई !! मैंने उसे कहा- मैं झड़ गई ! हाय !!

उसने बाहर निकाला और थूक लगा कर गांड में डालते हुए करीब ५ मिनट की चुदाई में सारा माल मेरी गांड में डालते हुए मुझ से लिपट गया ! मैं भी बेल की तरह उसके बदन से चिपक गई !!

पूरी रात में मैंने उस नौजवान पट्ठे को निचोड़ दिया !!

“वो ठहरा था गीता की कभी-कभी लेने वाला और मैं थी जनम जनम से प्यासी चुदाई की हसीना !!!!!!”

उसका बुरा हाल हो गया ! उसने सोचा नहीं होगा कि सारी रात दम लगाना पड़ेगा ??

खैर !! अपनी ननद के आशिक से चुद गई आपकी बन्नो !!!

मेरे प्यारे पाठको, अब आपके लौड़ों का इंतज़ार रहेगा  comment के ज़रिये !!!!!!!!

गर्म बीवी ने डॉक्टर से चूत चुदवायी – Doctor sex story

हाय दोस्तो!

मेरा नाम शालिनी है।

मेरी अभी-अभी शादी हुई है, और मेरा पति राहुल है।

वह मुझसे कहता है कि मैं बहुत खूबसूरत और मस्त माल हूँ। लेकिन सच कहूँ तो शादी के बाद से उसने मुझ पर ज्यादा ध्यान ही नहीं दिया। काम के चक्कर में व्यस्त रहने की वजह से वह मेरी पूरी चुदाई भी नहीं कर पाता था। एक दिन तबीयत खराब होने की वजह से राहुल मुझे डॉक्टर के पास ले गया। लेकिन जब मैं अकेली अंदर गयी, तो वहाँ जो हुआ, उसकी कहानी अब मैं तुम्हें बताने जा रही हूँ।

शादी के तुरंत बाद राहुल काम में इतना busy हो गया कि मुझे अकेलेपन का एहसास होने लगा। उसने मुझे वक्त नहीं दिया, और मेरे अंदर की गर्मी बढ़ती ही जा रही थी। इस बीच अपनी इस आग को शांत करने के लिए मुझे डॉक्टर से अपनी चूत चुदवानी पड़ी।

तो चलिए, अब उस वाइफ पोर्न स्टोरी की शुरुआत करती हूँ।

कई दिनों से मुझे अजीब सी बेचैनी हो रही थी। लेकिन इसे बयान करने के लिए मेरे पास कोई नहीं था। राहुल को अपने काम से फुर्सत ही नहीं थी कि मेरी तरफ ध्यान दे सके। एक दिन जब वह घर आया, तो मैं उस पर फट पड़ी। मैंने कहा, “राहुल, तुम्हें मेरी जरा भी फिक्र नहीं है! तुम बस इतना कहते हो कि डॉक्टर के पास जाना है, लेकिन क्या तुम्हें कभी ये ख्याल आता है कि मुझे वहाँ ले जाओ?”

आगे मैंने कहा, “खैर, दो दिन पहले मैं ऑफिस गयी थी, वहाँ मेरी तबीयत बहुत खराब हो गयी। इतनी कि मुझे डॉक्टर के पास जाना पड़ा। आज फिर से बुलाया है। तुम्हें मेरे साथ चलना है तो चलो, वरना मैं अकेली चली जाऊँगी।” मेरी बात सुनकर राहुल चुप हो गया। उसकी चुप्पी में मुझे उसकी गलती का एहसास दिखा।

फिर वह तुरंत तैयार होने लगा और बोला, “माफी तो माँग नहीं सकता, तुम्हें लगेगा कि मैं नाटक कर रहा हूँ। तो पहले डॉक्टर के पास चलते हैं, फिर कहीं घूमने जाएंगे और बाहर कुछ खाएंगे।” मैंने कुछ जवाब नहीं दिया और बस तैयार होने लगी।

कुछ देर बाद हम दोनों डॉक्टर के क्लिनिक पहुँच गए।

डॉक्टर वर्मा कोई 35-37 साल के थे। उनका शरीर गठीला था। दिखने में बहुत सुंदर तो नहीं थे, लेकिन अपने काम के प्रति बहुत गंभीर थे। उनका क्लिनिक आसपास के इलाके में काफी मशहूर था।

थोड़ी देर इंतजार करने के बाद मेरा नंबर आया। मैंने राहुल को बाहर रुकने को कहा और खुद अंदर चली गयी।

डॉक्टर ने मुझे आते ही पहचान लिया और पूछा, “अब आपकी तबीयत कैसी है?” मैंने जवाब दिया, “पहले से दर्द कम है, लेकिन बेचैनी और अजीब दर्द जैसा अभी भी होता है।”

डॉक्टर ने मुझे केबिन में बेड पर लेटने को कहा। मैं पहले भी चेकअप के लिए आ चुकी थी, तो मुझे पता था कि क्या करना है। मैं अंदर गयी, बेड पर लेट गयी और अपनी कमीज को पेट के ऊपर उठा लिया।

डॉक्टर ने पहले सैनिटाइजर से अपने हाथ साफ किए और फिर केबिन में आए। उन्होंने मेरे पेट के दाहिने तरफ दबाया और पूछा, “कहाँ दर्द हो रहा है, यहाँ?” मैंने कहा, “हाँ, थोड़ा दर्द है!”

फिर डॉक्टर ने मुआयना जारी रखा। उन्होंने नाभि के पास हल्का दबाया। वहाँ भी दर्द था, तो मैंने कहा, “थोड़ा और नीचे भी दर्द है!” डॉक्टर ने अपना हाथ नीचे की ओर ले जाना शुरू किया। मैंने फिर कहा, “हाँ, वहाँ पर भी है।”

उनका हाथ नीचे ले जाते हुए शायद गलती से मेरी योनि के पास छू गया। मुझे लगा कि मेरा बदन गर्म हो गया है। डॉक्टर खुद पर संयम रखने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन मेरे लिए ये आसान नहीं था।

मैं इतनी खूबसूरत हूँ कि बड़े-बड़े योगी का दिल डोल जाए, और यह तो बस एक डॉक्टर था। फिर भी, डॉक्टर वर्मा इस पेशे में 10-12 साल से थे, तो उन्होंने खुद को संभाल लिया। लेकिन उनकी वो छुअन मेरे अंदर एक हल्की सी आस जगा गयी।

काफी समय से राहुल के साथ मेरी कोई नजदीकी नहीं हुई थी, न ही संभोग। एक नवविवाहिता लड़की को अपने पति से बहुत सी अपेक्षाएँ होती हैं, लेकिन राहुल उनमें से किसी में भी खरा नहीं उतर रहा था।

डॉक्टर वर्मा ने अपना हाथ बाहर निकाल लिया। लेकिन मेरे मन में कुछ और चल रहा था। मुझे लग रहा था कि शायद ये आगे बढ़े।

डॉक्टर वर्मा के मन में भी शायद वही बात चल रही थी जो मेरे मन में थी—कि कुछ और आगे बढ़ जाए। उनकी पत्नी पिछले चार साल से बिस्तर पर है, और उनका सेक्स जीवन तो जैसे खत्म ही हो चुका था। वैसे तो हर दिन उनके पास महिला मरीज आती थीं, लेकिन मुझे लगता है कि उन्हें मुझमें कुछ खास दिखाई दिया।

उन्होंने मुझसे पूछा, “बताएं, क्या महसूस हो रहा है?” मैं थोड़ी झिझक रही थी, लेकिन सच कहूँ तो उनकी छुअन की प्यास मेरे अंदर कहीं न कहीं जाग चुकी थी। मैंने हिम्मत करके कहा, “हाँ सर… थोड़ा दर्द बढ़ा जैसा महसूस हो रहा है।”

डॉक्टर ने कहा, “ठीक है, मैं चेक करता हूँ। आप थोड़ा सलवार को और नीचे कर लीजिए।” फिर उन्होंने अपनी नजर दीवार की ओर कर ली। मैंने सलवार को नीचे किया, और वे अपने हाथ को मेरी नाभि के सबसे निचले हिस्से की ओर ले गए और टटोलने लगे। मैं एकटक उनकी ओर देखती रही। मेरे मन में था कि काश वे मेरी आँखों में देखकर सब कुछ करें।

फिर मैंने हिम्मत की और उनका हाथ पकड़ लिया। मैंने उसे दिशा देते हुए अपनी योनि के थोड़ा ऊपर के हिस्से पर रखा और कहा, “यहाँ सबसे ज्यादा दर्द है।” डॉक्टर ने मेरी तरफ देखा। उन्हें दिखा कि मेरी सलवार पूरी तरह नीचे जा चुकी थी, और उनका हाथ मेरी गोरी योनि के थोड़ा ऊपर रखा हुआ था। वे समझ गए कि मेरा दर्द कुछ और ही है।

उन्होंने कहा, “मुझे समझ नहीं आ रहा कि क्या करना है। आप थोड़ी देर के लिए सलवार ऊपर कर लीजिए!” मुझे लगा कि मेरी उम्मीद पर पानी फिर गया। मैंने कहा, “नहीं डॉक्टर साहब, आप ठीक से चेक कीजिए!” वे समझ गए कि मैं पूरी तरह गर्म हो चुकी हूँ।

फिर उन्होंने कहा, “ठीक है, मैं देखता हूँ। बस आपको कोई आपत्ति न हो!” मैंने तुरंत कहा, “कोई आपत्ति नहीं है!”

डॉक्टर वर्मा ने अपनी जगह बदल ली। उन्हें भी तसल्ली थी कि अब वे मेरी मर्जी के खिलाफ कुछ नहीं कर रहे। उन्होंने उस जगह पर हल्के से दबाया। मेरे मुँह से हल्की सिसकारी निकल गयी, और मैंने कहा, “थोड़ा और नीचे जाइए!” वे बोले, “अब तो यहाँ गर्माहट बहुत हो रही है। दर्द भी है क्या?” मैंने हाँ में सिर हिलाया।

मुझे लग रहा था कि डॉक्टर भी अब उत्तेजित हो रहे थे। इतने समय बाद किसी जवान लड़की के शरीर से इस तरह खेलने का मौका उन्हें नहीं मिला था। उनकी पैंट में उनका लिंग उफान मार रहा था, और यह मेरी नजरों से छुपा नहीं था।

डॉक्टर ने मेरी योनि के सबसे ऊपरी भाग पर अपनी उंगली से हल्की खराश की। मुझे ऐसा लगा जैसे करंट लग गया हो। मैं चिहुँक उठी और बोली, “हाँ, वहीं पर कुछ लग रहा है!” फिर मैंने एक जोर की सिसकारी ली।

उन्होंने मेरी योनि के दोनों होंठों को हल्का सा खोला। अंदर से मेरी योनि पूरी तरह भीगी हुई थी। इतनी नर्म और गुलाबी योनि देखकर वे खुद को रोक नहीं पाए। उन्होंने मेरी योनि के दाने पर अपनी एक उंगली रख दी। मेरी योनि से एक जोर का फव्वारा फूट पड़ा, जो सीधे उनके होंठों के नीचे जा लगा।

डॉक्टर ने कहा, “आपका दर्द कुछ और ही है मैम, इसका इलाज आसान नहीं है!” मैंने जवाब दिया, “आप तो डॉक्टर हैं, समझ सकते हैं! इलाज जो भी हो, मुझे इस दर्द से छुटकारा चाहिए!”

उन्होंने कहा, “सोच लीजिए, फिर मुझ पर किसी तरह का कोई आरोप न लगाएँगी?” मैंने उनका हाथ पकड़कर अपनी योनि पर रखते हुए कहा, “इसकी हालत देखिए। आपको लगता है कोई शिकायत होगी?”

यह सुनते ही डॉक्टर ने अपने गर्म होंठ मेरी योनि के दाने पर रख दिए। मेरे शरीर में जैसे हज़ार वॉट का करंट दौड़ गया। मैं कभी अपनी योनि को सिकोड़ने की कोशिश करती, तो कभी उसे आगे करके उनके होंठों को और करीब लाने की कोशिश करती। वे भी मेरे यौवन के इस रस को पूरा पी जाना चाहते थे।

उन्होंने मेरी जाँघों को फैलाया और जगह बनाकर अपनी जीभ मेरी योनि के अंदर डाल दी। जीभ के अंदर जाते ही मेरी योनि थरथराने लगी। मुझे ऐसा लग रहा था जैसे मुझे एक साथी मिल गया हो, जो मेरी प्यास को बुझाने में मेरे साथ है—या शायद इस आग को और भड़का रहा हो।

मैं चाह रही थी कि मेरी योनि में लगी ये आग किसी तरह शांत हो जाए। डॉक्टर भी अब बेकाबू हो रहे थे। वे और जोर-जोर से मेरी योनि के हर भाग को चूसने लगे, मुझे उत्तेजना के चरम तक ले जाने की कोशिश करने लगे।

इतने में मेरी योनि से एक गाढ़ा, सफेद तरल निकलने लगा। यह संकेत था कि अब संभोग के आखिरी पड़ाव की ओर बढ़ने का वक्त आ गया है।

डॉक्टर ने मेरी हालत को भाँप लिया। समय की गंभीरता को देखते हुए उन्होंने मेरी योनि को ठीक से खोला और अपनी पैंट की जिप खोलने लगे। जिप खुलते ही उनका 7 इंच का मोटा लिंग फुफकारता हुआ बाहर आ गया। मैंने अपनी बंद आँखों की झिरी से उसे देखा और कहा, “प्लीज, अब इसका इलाज आप ही कर सकते हैं। मुझसे और सहन नहीं हो रहा है!”

उन्होंने अपने लिंग को हल्के से मेरी योनि के किनारे पर टिका दिया। इससे पहले कि वे कुछ करते, मैंने अपनी कमर आगे करके उनके लिंग को एक झटके में आधा अंदर ले लिया। लेकिन ऐसा करने से मेरी हालत खराब हो गयी।

डॉक्टर ने कहा, “यह क्या किया तुमने?” मैंने जवाब दिया, “सहन नहीं हो रहा था!” लेकिन उस धक्के से मेरी योनि बहुत फैल गयी। फिर भी उनका मोटा लिंग और ज्यादा मोटा हो गया और अंदर-बाहर करना मुश्किल हो गया।

मैंने अपनी योनि को गीला करने के लिए थोड़ा थूक उनके लिंग के पीछे वाले हिस्से पर लगाया, जिससे योनि पर दबाव कम हुआ। लेकिन उनकी उत्तेजना की वजह से उनका लिंग और फैलता जा रहा था। मैंने कहा, “अंदर-बाहर कीजिए और थोड़ा थूक लगाइए।”

डॉक्टर ने वैसा ही किया। साथ ही उन्होंने मेरी कमीज को मेरे स्तनों के ऊपर कर दिया और दोनों स्तनों को पकड़कर निप्पल मसलने लगे। उत्तेजना के चरम पर मेरी योनि का रस बार-बार उनके लिंग पर बौछार कर रहा था, उसे संभोग के लिए और उत्साहित कर रहा था। मेरी योनि से टपकते रस की महक कुछ अलग ही थी।

डॉक्टर को इतने सालों की तपस्या के बाद मेरे जैसे सुंदर, गदराए बदन वाली युवती के साथ ये आनंद मिल रहा था। ये अनुभूति हमें दोनों को चरम की ओर ले जा रही थी। मैंने अपने दोनों पैरों से उनकी कमर को जकड़ रखा था। वे चाहते थे कि पूरा लिंग बाहर निकालकर अंदर करें, लेकिन मैं उन्हें छोड़ ही नहीं रही थी।

डॉक्टर स्खलित होने की स्थिति में थे, लेकिन उनका मन नहीं भर रहा था। उन्होंने कहा, “अभी बाहर निकालने दो, नहीं तो पूरा अंदर ही गिर जाएगा।” मैंने उनके कान में कहा, “पूरा अंदर ही डाल दो। मेरी योनि को अपने रस से सराबोर कर दो, डॉक्टर साहब!”

अब मेरी योनि के यौवन रस की मादक गंध, उनके लिंग के अंदर-बाहर जाने से गूंजने वाली आवाज, और मेरी मंद-मंद सिसकारियाँ—ये सब उन्हें वीर्य छोड़ने की सीमा तक ले जा चुके थे। डॉक्टर ने झटके तेज किए, और मैं भी अपनी कमर उठा-उठाकर उनका भरपूर साथ देने लगी।

लिंग का अंदर-बाहर जाना इतना तेज था कि कई बार झटके से उनकी लिंग मेरी योनि के आखिरी हिस्से तक जा लगती, जिससे मेरी साँस अटक जाती। लेकिन इस काम-क्रिया की तृप्ति के आगे ये सब घबराहट से ज्यादा उत्तेजना और संभोग की इच्छा का नतीजा था।

डॉक्टर को कई साल बाद इतना अच्छा महसूस हुआ। उनके सामने मैं थी—एक यौवन से भरी सुंदर लड़की, जिसके भरे हुए स्तन उनके हाथों में थे और सुर्ख गुलाबी योनि उनके लिंग में फंसी हुई, संभोग के लिए छटपटा रही थी। उन्हें और क्या चाहिए था!

मैं पूरी तरह थक गयी थी। आखिरी झटके के साथ मेरी योनि से बहुत जोर का फव्वारा निकला, जो उनके लिंग के हर तरफ से बाहर निकलकर नीचे गिर रहा था। उनके लिंग से निकलने वाला गाढ़ा वीर्य मेरी योनि की गहराइयों में समा रहा था। उस गर्म-गर्म बहाव को मैं अपनी योनि के आखिरी छोर तक महसूस कर रही थी।

मैंने अपनी योनि को सिकोड़कर उनके वीर्य की आखिरी बूंद तक को समाहित करने की पूरी कोशिश की। फिर भी बहुत सारा वीर्य बाहर निकल ही गया। थोड़ी देर बाद हम दोनों निढाल हो गए।

डॉक्टर मेरे ऊपर ही गिर गए। उनका लिंग मेरी योनि से बाहर निकला हुआ था, लेकिन बिल्कुल चिपका हुआ था। फिर कपड़े पहनते हुए मैंने उनके लिंग को पकड़कर कहा, “डॉक्टर साहब, मैं तो कल ही ठीक हो गयी थी। लेकिन कल जब आपने गलती से मेरी योनि को छुआ, तब से मैं तड़प रही थी।” इतना कहकर मैं जाने के लिए उठने लगी।

तब डॉक्टर ने कहा, “मुझे याद ही नहीं ऐसा कुछ, लेकिन आज तुमने मुझे जिंदा होने का अहसास दिला दिया।” मैंने आँख मारते हुए कहा, “यह अहसास आगे भी जारी रख सकते हैं।”

दोस्तो, मेरी यह वाइफ पोर्न स्टोरी आपको पसंद आई होगी। मुझे मेल में बताइएगा! आगे की कहानी बहुत जल्द लेकर आऊँगी।

पति, पत्नी और गैर मर्द – top-call-girls.com

हैल्लो फ्रेंड्स.. में अपनी सम्भोग गाथा आज आप लोगो के सामने पेश कर रही हूँ। फ्रेंड्स हमारी मित्र का नाम नम्रता है और आप सभी को हमारी तरफ से नमस्ते.. फ्रेंड्स आप सभी की ही तरह में भी इस साईट की बहुत बड़ी दीवानी हूँ और हमे इस साईट पर कहानियाँ पड़ना बहुत अच्छा लगता है।

फ्रेंड्स में नम्रता हमारी उम्र 32 है और हमारा रंग गौरा है। हमारा फिगर 36-30-36 है ये सम्भोग गाथा हमारे और हमारे भैया के मित्र बीच हुए सेक्स की है। वह भी दिखने में गौरा था और अच्छा खासा लंबा और मज़बूत जिस्म था उसका। हमारी शादी 7 साल पहले हो चुकी है लेकिन में अभी हमारे माता पिता के घर में हूँ बच्चा ना होने की वजह से हमारे पति और उसके घर वालो ने हमे हमारे माता पिता के पास भेज दिया था। अब रोज बच्चे की बात से हमारे ससुराल वाले हमसे बहस करते और झगड़ा हो जाता था। लेकिन फिर उन्हे क्या पता था कि हम दोनों के बीच कभी कुछ हुआ ही नहीं वह साला मादरचोद नामर्द इंसान जो हमे कभी भी संतुष्ट नहीं कर पता था वह बच्चे कहाँ से पैदा कर पाता। लेकिन परिवार को अपनी चीज जैसी भी हो प्यारी लगती है.. लेकिन फिर क्या उंगली करके बच्चे तो नहीं हो सकते थे। तभी उन लोगो ने हमे यहाँ पर भेज दिया था और अब में तभी से अपने मायके में हूँ।

अब हमारा छोटा भैया जिसकी उम्र 30 साल की है और उसकी शादी हो चुकी है। उसकी बीवी उसके मायके गई हुई थी क्योंकि वह पेट से थी। अब हमारे भैया का एक मित्र अक्सर हमारे घर आता जाता था। वह हमारे बारे में सब कुछ जानता था और वह हमसे हमेशा हंसी मजाक करता था। क्योंकि में हमेशा उदास रहती थी। वह क्या घर के सभी लोग हमे खुश देखना चाहते थे.. लेकीन माँ बाप के घर रहना किसे अच्छा लगता है और वह भी शादी के बाद.. यही बात हमे खाए जा रही थी। अब एक दिन हमारे भैया के ससुराल से फ़ोन आया कि हमारी भाभी को अस्पताल में एडमिट किया गया है और डिलवरी कभी भी हो सकती है। तभी हमारा भैया जल्दी से अपने ससुराल चला गया क्योंकि भाभी ने उसे बुलाया था और दूसरे दिन उसने एक लड़के को जन्म दिया। तभी भैया का फोन आया तो घर के सभी सदस्य भी जाने को तैयार हो गये और वह हमे भी ले जाना चाहते थे..

लेकिन हमने मना कर दिया क्योंकि शायद इसके लिए में तैयार नहीं थी और हमारी माँ भी समझ गई थी.. लेकिन वह हमे अकेले भी नहीं छोड़ना चाहती थी। तभी उतने में वीरेंद्र घर पर आया। हमारे भैया का मित्र जिसकी उम्र 28 साल की है और उसकी अभी शादी नहीं हुई थी.. क्योंकि वह अपने काम के सिलसिले में बहुत व्यस्त रहता था और अब उनके घर में वह अकेला कमाने वाला था। तभी माँ ने उससे कहा कि हम लोग बाहर जाने के लिए सोच रहे है.. लेकिन ये घर पर अकेली रहेगी। तभी वह बोला कि आप चिंता ना करे में रुक जाऊंगा नम्रता के साथ। तभी घर वालो को इसमे कोई दिक्कत नहीं थी.. क्योंकि वह हमेशा से हमारे घर आता जाता था और सबको उस पर पूरा पूरा भरोसा भी था और अब सभी घर वाले चले गए।

वह बारिश का समय था और अब वह रात हमारे घर आकर रुकता और सुबह अपने काम से चला जाता था। अब दो दिन बाद भैया का फोन आया कि हम यहाँ का प्रोग्राम खत्म करके 15 दिन में लौटेंगे। अब हमने कहा कि ठीक है और अब शाम को वीरेंद्र आया तो हमने उसे ये बात बता दी.. लेकिन वह अपने घर से टिफिन लाता था उसके और हमारे लिए तो हमने खाना खाया और तभी बिजली कड़कने लगी और ज़ोर से बारिश शुरू हो गई थी और हमे बहुत डर लगता था.. में थी ही इतनी डरपोक। थोड़ी देर बाद हम टीवी देख रहे थे और रात के 10:30 बज चुके थे और अचानक लाईट भी चली गई और अब जोर से बिजली कड़कने लगी और अब में डर के मारे वीरेंद्र के सीने से लिपट गई.. अंधेरा हो चुका था और दरवाजा पहले से ही बंद था।

अब में उससे ऐसे लिपट गयी कि हमारे शरीर से हवा भी पास नहीं हो सकती थी और हमारे बूब्स उसके सीने से दब रहे थे। अब में हर बार बिजली की आवाज सुनकर उसे जोर से पकड़ लेती। तभी हमारी मजबूत पकड़ से हमारे बूब्स उसकी छाती पर और दब जाते.. ऐसा बार बार होने की वजह से वह भी फिर गरम हो चुका था.. क्योंकि ठंडी हवा चल रही थी और उसमे हमारी गरम सांसे उसे मदहोश कर रही थी और वह हमारी पीठ पर हाथ घुमा रहा था और अब में भी बेकाबू हो चुकी थी और शायद में बहुत दिनों से चुदी नहीं थी उसका भी असर था। अब वह धीरे धीरे हमारी गर्दन तक पहुँच चुका था। वह फिर हमे आगे हाथ बड़ा कर हमारे बूब्स को छूने लगा और अब धीरे धीरे हमे सहलाने लगा।

तभी वह हमे उठाकर हमारे रूम में ले गया और अब उसने हमे चूमना शुरू कर दिया.. हमारे चहरे से गले तक और गले से पेट तक.. में बहुत गरम हो चुकी थी। इस तरह का हमारी जिंदगी में पहला एहसास था। अब वह हमे चूमे जा रहा था और एक एक करके कपड़े हमारे जिस्म से अलग अलग हो रहे थे। अब सबसे पहले उसने हमारी साड़ी निकालकर अलग की और अब वह हमारी चूचियों को ब्लाउज के ऊपर से ही दबा रहा था। अब ऐसे ही अंधेरे में दस मिनट वह ब्लाउज के ऊपर से हमारी चूचियों को ज़ोर ज़ोर से दबा रहा था और में सिसकियाँ ले रही थी। अब उसने हमारे ब्लाउज के बटन खोल दिए और अब उसने हमारे ब्लाउज को निकालकर दूर फेंक दिया। अब वह अपने मुहं से ब्रा के ऊपर से ही हमारी चूचियों को चूसने लगा। ठंडी हवा में उसके मुहं का गरम स्पर्श मदहोश कर देने वाला था और इस तरह का मज़ा शायद हमारे पति ने भी कभी नहीं दिया था। में आनन्द के सागर में जैसे गोते लगा रही थी और उस पल के मज़े ले रही थी। अब शायद ही हमे इतना मज़ा पहले कभी किसी मर्द से आया हो और अब हमारी ब्रा भी हमारे जिस्म से अलग हो गई थी और अचानक लाईट आ गई और अब हमे होश आया तो हमने उसे अपने से दूर कर दिया.. लेकिन अचानक से ज़ोर से बिजली कड़कड़ाई तो में अब उसी अवस्था में उससे लिपट गई।

अब उसने बटन बंद करके लाईट बंद कर दी और अब मुझ पर आकर गिरा और हमारी चूचियों को जोर ज़ोर से भिचने लगा। हमे इतना तेज दर्द हुआ कि हमने उसे अब अपने से अलग कर दिया। तभी उसने कहा कि क्या हुआ तो अब हमने कहा कि तुम तो दरिंदो की तरह करते हो और अब में बेड के कोने पर सो गई.. में ऐसे ही सोई थी हमने अपने कपड़े भी नहीं पहने थे.. पता नहीं क्यों? शायद में भी चुदना चाहती थी.. लेकिन वह बहुत ईमानदार था उसने बाद में हमे छूने की कोशिश भी नहीं की और वह दूसरे कोने में पड़ा रहा.. लेकिन आज की रात शायद हमारी किस्मत में कुछ और ही लिखा था। अचानक बिजली कड़की और में उससे अब चिपक गई.. लेकिन उसने तब भी हमे नहीं छुआ। वह कहता था.. जब तक तुम नहीं कहोगी में आगे कुछ नहीं करूंगा।

अब हम ऐसे ही पड़े थे और अचानक जोरो से बिजली कड़की और में उससे और नज़दीक हो गई और कहा कि तुम्हे जो करना है कर लो.. बस हमे अकेले मत छोड़ना। अब उसने कहा कि सोच लो.. अब मत पछताना कि हमने अगाह नहीं किया। अब हमने कहा कि ठीक है.. तभी वह ज़ोर ज़ोर से दोबारा हमारी निप्पल चूसने और काटने लगा दर्द तो हो रहा था.. लेकिन डर के मारे सब कुछ सहन कर रही थी और अब कुछ ही पल में उसने हमारा पेटीकोट और पेंटी भी उतार दी और अपनी बड़ी ऊँगली हमारी चूत में डाल दी हमे इतना दर्द हुआ कि हमारी चीख निकल गई। तभी वह ये देखकर दंग रह गया कि हमारी सील भी नहीं टूटी थी। तभी हमने कहा कि साला हिजड़ा था.. नामर्द हमारी सील भी नहीं तोड़ पाया था और उस हरामी को बच्चा चाहिए था.. हमे बांझ कहता था। तभी वीरेंद्र ने अपने कपड़े उतार कर पूरी तरह नंगा हो गया और हमे घुटनो पर बैठाकर अपने लंड से हमारे मुहं को चोदने लगा। उसका लंड इतना बड़ा था कि हमारे मुहं में भी पूरा नहीं आ रहा था।

अब थोड़ी देर मुखमैथुन बाद उसने हमे बेड पर सुला दिया और हमारी टांगो के बीच हमारी चूत के पास बैठ गया और एक जटके में अपना लंड हमारी चूत में डाल दिया हमारी तो चीख निकल गई और उसका लंड हमारी चूत की सील तोड़ता हुआ अंदर चला गया हमे ऐसा लगा जैसे किसी ने हमारी चूत में खंजर घोप दिया हो। एक पल के लिए ऐसा लग रहा था मानो हमारी जान ही निकल गई हो और अब वह ज़ोर ज़ोर से अपना लंड डाल रहा था और अब थोड़ी देर बाद जैसे में राहत की साँस लेती तो कमबख्त लंड हमारी चूत से बाहर निकालता और ज़ोर से ठोक देता और हमारी चीख निकल जाती थी और अब वह इस तरह चार बार हमे चोद चुका था और हमारा दर्द बड़ता ही जा रहा था।

वह कहता था कि जब तक लड़कियों की चीख नहीं निकलती.. कट्टर चुदाई में मज़ा ही नहीं आता। अब हमने कहा कि तुम सच में बड़े जालिम हो ऐसे भला कोई करता है क्या? और वह भी अपने मित्र की बहन के साथ। वह बोला लेकिन मज़ा तो आ रहा है ना हमारी जान। उसकी ये बात सही थी और आज पहली बार हमे चुदने का एहसास हो रहा था। दर्द और मज़ा दोनों ही आ रहा था। आज की रात शायद ही कभी भूल सकूँ और अब करीब दस मिनट चोदते चोदते वह झड़ने वाला था तो उसने पूछा कि कहाँ पर निकालू हमारी जान अंदर या बाहर? तभी हमने कहा कि इतनी मेहनत करने के बाद बाहर निकालने से क्या फ़ायदा तुम अंदर ही छोड़ दो वह साला हिजड़ा तो वैसे भी कुछ नहीं कर सकता.. तुम ही हमे अपने बच्चे की माँ बना दो।

तभी उसने हमारी चूत में ही अपना सारा वीर्य निकाल दिया और में आज पहली बार संतुष्ट हुई थी और कितनी बार झड़ी थी ये में भी नहीं जानती और वह थकान की वजह से मुझ पर ही गिर पड़ा और हम थोड़ी देर पड़े रहे। अब वह उठकर नंगा ही बाथरूम में चला गया और फ्रेश हो कर नंगा ही बाहर आ गया और अब में भी उठकर बाथरूम गई और फ्रेश हो गई। हमने देखा तो कपड़े सब बाहर ही थे तो में एक मेक्सी पहन कर बाहर आ गई। अब उसने कहा कि ये क्या तुमने कपड़े क्यों पहने? तभी हमने कहा कि फिर क्या है? इतनी देर तो जालिम की तरह चोद चुके हो। अब वह बोला कि अभी तो पूरी रात है अभी सेक्स का खेल खत्म कहाँ हुआ है।

अब उसने दोबारा हमे बेड पर खींचा तब हमने मना किया तुम जालिम हो आराम से नहीं करते और बहुत दर्द देते हो। अब वह बोला कि फिर आप जैसा चाहोगी वैसा ही करूँगा.. अब में बेड पर से उठी और वापस मेक्सी उतार कर बिल्कुल नंगी उसके पास में सो गयी और वह अब से हमे चूमने लगा चाटने लगा। उसने हमारे पूरे शरीर को ऊपर से नीचे तक चूमा और अब वह हमारी चूत में उंगली करने लगा और हमारी चूत चोदने लगा। अब वह धीरे धीरे करते हुए दो उंगलियां हमारी चूत में डालने लगा और हमारी चूत अपनी जीभ से चाटने लगा। उसकी जीभ के स्पर्श से में अब गरम हो गई थी और वह हमारी चूत को चाटे जा रहा था जैसे कोई आईसक्रीम चाट रहा हो।

अब उस दौरान में तीन बार झड़ चुकी थी और जितनी भी बार झड़ती वह हमारी चूत का पानी अपने मुहं में भरता और हमारी चूचियों पर छोड़ देता वैसे उसने हमारी दोनों चूचियाँ हमारी चूत के पानी से गीली कर दी और अपना लंड हमारे मुहं में दे दिया और चूसने को बोला.. वह जैसे जैसे बोलता में करती रही। अब पहले कम से कम आधे घंटे वह नहीं झड़ा और जब झड़ने लगा तो हमारे मुहं से लंड निकालकर हमारे बूब्स के बीच में रख दिया और हमारे बूब्स को चोदने लगा। अपने लंड का पूरा पानी हमारी चूचियों पर गिरा दिया और हमारे सारे बूब्स पर मल दिया। हमारे बूब्स लाईट में उसके लंड के और हमारी चूत के पानी से चमक रहे थे और अब उसने हमारी चूत को चाटकर चिकना किया और अब से हमे चोदने लगा। इस बार झड़ने की वजह से वह डेड़ घंटे तक हमारी चूत चोदता रहा। उस दौरान में दो बार झड़ चुकी थी। फिर तो शायद में खुद नहीं जानती थी कि उस एक रात में कितनी बार झड़ चुकी थी.. लेकिन आज की रात जो चुदने का अनुभव हुआ था उससे हमारी जिंदगी बदल चुकी थी और आज में सही तरह से औरत बनी थी। अब रात के 4:30 बजे हम दोनों नंगे ही एक दूसरो की बाहों में सो गये।

सुबह करीब 10 बजे भैया का फोन आया। अब हम ऐसे ही बेड पर पड़े थे उसने सुबह उठते ही हमे किस किया और हमने भैया का फोन उठाया तो उसने कहा कि वहाँ पर उसके ससुराल में सब हमारे लिए पूछ रहे है तो में वहाँ पर आ जाऊँ.. क्योंकि हमारा पति भी वहां गया था। तभी हमे विरेंद ने कहा कि तुम्हे जाना चाहिए.. शायद तुम्हारी सारी परेशानियां खत्म हो गई हो। अब हमने भैया से कहा कि हम शाम तक वहाँ पर पहुंच जाएँगे और फोन रख दिया। अब उसने दोबारा हमे चूमा और अब कहने लगा कि फिर तो इस ख़ुशी में जश्न होना चाहिए और तभी उसने हमे पकड़ा और वहीं पर हमे चोदने की तैयारी करने लगा और अब में भी उसका साथ देने लगी। अब उसने हमारे कपड़े उतार कर किचन से थोड़ा तेल लिया और हमारी गांड में लगाकर हमारी गांड मारने लगा। अब करीब दस मिनट तक उसने हमारी ताबड़तोड़ चुदाई की। आज उसने हमे चोद चोद कर पूरा सुख दिया और उसने हमारी गांड और चूत दोनों को फैला दिया जिसे कि फिर तक हमारा पति नहीं चोद पाया था।

अब करीब दस मिनट बाद वह हमारी गांड की हालत पूरी तरह से खराब करने के बाद हमारी गांड में ही झड़ गया और दोनों हाथों से हमारे बूब्स दबा रहा था और अपनी बाकि की कसर निकाल रहा था। अब करीब बीस मिनट बाद चुदाई खत्म होने पर हमे जब होश आया तो हमने कहा कि अभी हटो हमे नाश्ता बनाना है और जाने की तैयारी भी करनी है और अब वह बोला कि अभी तो जो नाश्ता पड़ा है वह एक बार और कर लूँ.. अब दूसरा नाश्ता करेंगे और वह अब से हमे दोबारा सुबह सुबह किचन में उसने हमे अपनी बाँहों में पकड़ा और अब हमे वहीं पर पटक कर चोदने लगा और में उसके हर धक्के पर उसका शुक्रिया कर रही थी। हमारी चूत और हमारा पूरा जिस्म उसका साथ दे रहा था। अब आधे घंटे बाद हम उठे और साथ ही बाथरूम चले गये.. अब नहा धोकर फ्रेश होकर हम बाहर आए और अपने अपने कपड़े पहन कर तैयार होकर निकल पड़े। वीरेंद्र ने अपने बॉस को फोन करके दस दिन कि छुट्टियाँ ले ली और हम दोनों भैया के ससुराल चले गये जहाँ पर सब हमे देखकर बहुत खुश हुए और रात की उस चुदाई के बाद में भी बहुत खुश थी और हमारे पति ने भी हमसे माफी माँगी और घर चलने के लिए कहा। फिर में भी खुश थी.. तो राज़ी हो गई और अब वहां पर हम दस दिन रुके और उन दस दिनों में हमने मौका देखकर अपनी चूत विरेन्द्र खूब चुदवाई। अब में अपने पति के साथ ससुराल चली गई और तीन महीने बाद पता चला कि में प्रेग्नेंट हूँ। तभी सब लोग बहुत खुश हुए..

में भी खुश थी लेकिन हमारे पति को ये पता था कि वह उसका बच्चा नहीं है लेकिन उसने इस बात को किसी से नहीं कहा और ना ही हमसे कुछ पूछा.. क्योंकि वह भी जानते थे कि घर वाले सब इस बात से खुश थे और अब वीरेंद्र का फोन आया तो उसने हमे बहुत बधाईयाँ दी और हमने भी उसका धन्यवाद किया। आख़िर वह ही पहला इंसान था जिसने हमे पहले औरत और अब माँ बनाया था और हमारा संसार सवांरा था। उसका ये एहसान में कभी नहीं उतार सकती थी और हमारे पति को अभी तक इस बारे में नहीं पता था कि वह इंसान कौन है? तो फ्रेंड्स ये था हमारी ज़िंदगी का सच जो हमने आप लोगो से शेयर किया ।

पति ने की मम्मी की चुदाई

हम लगभग घर पहुंचे तब थोड़ा थोड़ा अंधेरा हो चुका था। फिर पापा और पति जीप से उतरकर चौकी पर चारपाई पर बैठ गए। पति कपड़े पहनने लगे तो पापा ने रोक दिया और कहा के यहाँ का माहौल भी आपके घर जैसा है तो कपड़े पहनने की कोई जरूरत नहीं है। फिर मैं भी उतरकर घर के अंदर चली गई। अंदर जाते ही देखा के मम्मी, दाई और काका आँगन में चारपाई पर बैठे है। मुझे देखकर काका मेरे पास आये और मुझसे लिपट गए। फिर  मैं और काका उनके पास जाकर बैठ गये और फिर मैंने बताया के पति भी साथ आये है। तो मम्मी ये सुनकर कपड़े पहनने के लिए कमरे में जाने लगी।

तो मैंने मम्मी को पकड़ लिया और कहा के कल तो आपको अपने दामाद स्व चुदना है तो कपड़े किसलिए पहन रही हो और आपका दामाद भी बाहर नंगा ही बैठा है। ये सुनकर मम्मी थोड़ी शर्मा गई। फिर काका बोले के तुम दोनों माँ बेटी जैसी तो इस दुनिया में कोई नहीं होगी जो एक दूसरे के पति से चुदती है। ये सुनकर मैं और मम्मी हँसने लगी।

फिर मैं जाकर गरम पानी से नहाकर आई तब जाकर मेरे बदन का दर्द कुछ कम हुआ। फिर मैं मम्मी, काका और दाई को उन ग्वालों के साथ कि चुदाई की बात बताने लगी। ये सुनकर काका गरम  हो गया और मुझे पीछे से पकड़ कर अपना लंड मेरी गाँड में डालने लगा। फिर मैं काका से बोली के आज रात तुम्हारे पास ही रहूँगी अब छोड़ दीजिए तो काका ने मुझे छोड़ दिया।

फिर खाना बन गया था तो मैं खाना लेकर नंगी ही पापा और पति के पास गई। मैं गई तब पापा और पति बाहर वाले कमरे में सोये थे और बातें कर रहे थे और साथ में अपना लंड सहला रहे थे। फिर मेरे जाते ही वो खड़े हो गए और खाना खाने लगे। फिर पति ने मुझे अपनी गोद मे बैठा लिया और अपने साथ मुझे खाना खिलाने लगे और साथ मे मेरे बूब और चूत सहलाने लगे। हमारे सामने ही पापा बैठे थे तो वो हमें देखकर अपना लंड सहला रहे थे और साथ मे खाना खा रहे थे।

फिर हमने खाना खा लिया तो मैं बर्तन लेकर बाहर आई तो देखा के मम्मी, दाई और काका खिड़की से हमे देख रहे थे। मम्मी तो अपनी चूत में उंगली भी कर रही थी। ये देखकर मैं बोली के अपने दामाद का लंड देखकर चूत में अभी से पानी आने लगा क्या। तो ये सुनकर हम सब हँसने लगे।

फिर मैं काका को भी पति से मिलवाने कमरे में ले गई। मैं और काका नंगे ही गए थे और मैंने काका की कमर में हाथ डाल रखा था। फिर काका पति से मिले और फिर वो बातें करने लगे। तब मैं भी वहीं काका के पास बैठ गई और पति के सामने ही काका का लंड हिलाने लगी। काका के बारे में मैंने पहले ही पति को सब बता दिया था।

फिर पापा उठकर अंदर चले गए। फिर मैं उठकर काका की गोद में बैठ गई तो पति मुझे देखकर हँसने लगे। फिर इतने में पापा आ गए और साथ मे दाई को ले आये वो भी नंगी। दाई काफी शर्मा रही थी फिर काका ने दाई को पति के पास बैठा दिया। फिर दाई उठने लगी तो पति ने दाई का हाथ पकड़ लिया और दाई को अपनी गोद मे बैठा लिया। ये देखकर हम सब हँसने लगे।

फिर पति दाई के बूब सहलाने लगे और उसकी चूत पर अपनी उंगलियां फिराने लगे तो दाई को भी मजा आने लगा तो वो सिस्कारियाँ लेने लगी। फिर पति दाई को अपने दोनों हाथों में उठाकर पापा के पास बेड पर ले गए और फिर दाई को अपना लंड चुसवाने लगे।

फिर उन्हें वैसे ही छोड़कर मैं और काका वहाँ से आ गए और कमरे में चले गए। तब रात को ठंड हो जाती थी तो हम सब अंदर ही सोते थे। फिर हम अंदर गए तो देखा के मम्मी रामु से अपनी चूत चटवा रही थी। फिर काका ने भी मुझे मम्मी के साइड में लेटा दिया और फिर काका भी मेरी चूत चाटने लगा। फिर हम दोनों माँ बेटी एक ही बिस्तर पर अपनी टांगें फैलाकर दो मर्दों को अपनी चूत चटवा रही थी। फिर हम गर्म हो गए तो काका ने मेरी चूत में अपना लंड डाल दिया और रामु ने मम्मी की में। फिर दोनों जने हमे चोदने लगे।

मेरी और मम्मी की सिस्कारियाँ काफी तेजी से निकल रही थी। फिर काका ने मुझे घोड़ी बना लिया तो मम्मी भी रामु से घोड़ी बनकर चुदने लगी। फिर कुछ देर बाद काका मेरी गाँड में झड़ गया तो मैं बेड पर पसर कर सो गई। मैं करवट लेकर सोई थी तो काका मेरे पीछे गाँड में लंड डालकर सो गया औऱ धीरे धीरे करने लगा। फिर पता नहीं मुझे कब नींद आ गई।

फिर सुबह मम्मी उठी और फिर मम्मी ने मुझे भी जगाया। फिर काका भी जाग गया था तो हम तीनों उठकर कमरे से बाहर गए और चुल्हे के पास जाकर बैठ गए। मम्मी चाय बनाने लगी सबके लिए। फिर मैंने काका से कहा के आज तुम मम्मी के साथ आँगन में नंगे होकर घूमना और मम्मी के बदन से खेलना। फिर काका बोला के इससे क्या होगा।

फिर मैं बोली के मैं कमरे के अंदर से तुम्हारी और मम्मी की रंगरलियां पति को दिखाउंगी। फिर पति मम्मी को देखकर गर्म हो जाएंगे तो वो अपने आप तुम्हारे पास आ जाएंगे और मम्मी को चोदने लग जाएंगे। फिर काका बोला के तुमने तो अपनी मां चुदवाने का पूरा प्लान बना लिया।  ये सुनकर मम्मी मुस्कुराने लगी।

फिर मैं पति और पापा को चाय देने के लिए गई तो काका भी मेरे साथ आ गए। फिर मैं और काका कमरे में गए तो देखा के पापा और पति बेड पर सोये है और दाई उन दोनों के बीच सोई है। फिर मैंने उन्हें जगाया और चाय दी। दाई तो उठकर अंदर चली गई और पापा और पति चाय पीने लगे। फिर मैंने पति से कहा के रात तो खूब चुदाई की होगी। फिर पति बोले के नहीं थके हुए थे तो बस एक दो बार करके सो गए थे। तब मैं कमरे में उन तीन मर्दों के बीच अकेली थी।

फिर मैं जाकर पापा और पति के बीच बैठ गई। फिर मैंने उन दोनों के लंड पकड़ लिए और हिलाने लगी। फिर हम बातें करने लग गए। फिर पापा ने फ्रेश होने के लिए खेत चलने को कहा। फिर पति ने पूछा के खेत भी नंगे जाएंगे। फिर पापा बोले के हाँ हम गाँव से बाहर की तरफ रह जाते है तो नंगे जा सकते है। फिर हम चारों मैं, पापा, काका और पति खेत जाने लगे। फिर थोड़ी देर बाद हम खेत से आ गए तो फिर पति और पापा नहाने लगे। फिर बाकी हम सब भी नहा लिए और खाना वगैरह खा लिया। फिर मैंने काका को सुबह जो प्लान बनाया था वो याद दिलाया तो काका तुरंत काम पर लग गया। मैं पापा और पति के साथ बाहर वाले कमरे में थी।

पापा लेटे हुए थे और पति बैठे थे। फिर मैं उनके पास आने लगी तो पति खड़े हुए और मुझे पीछे से पकड़ लिया। फिर पति मेरे बूब सहलाने लगे। फिर मैंने बाहर खिड़की से देखा के मम्मी नहाकर आँगन में आई और फिर खिड़की के सामने खड़ी होकर अपने बाल सुखाने लगी। फिर मैंने पति को खिड़की के पास जाने के लिए कहा। फिर हम दोनों खिड़की के पास आ गए और पति ने मम्मी को पूरी नंगी देखा तो पति देखते ही रह गए।

लेकिन ये तो अभी शुरुआत थी आगे तो बहुत कुछ होना था। काका भी वहीं मम्मी के पास खड़ा था और वो मम्मी को देखकर अपना लंड सहला रहा था। उसका लंड एकदम खड़ा था। फिर मम्मी ने बाल सूखा लिए तो मम्मी अपने बालों का जुड़ा करने लगी। मम्मी जुड़ा कर रही थी तो काका मम्मी के पास चला गया और मम्मी के दोनों बूब पकड़ लिए और सहलाने लगा। ये देखकर पति का बुरा हाल हो रहा था और पति भी साथ मे मेरे बूब जोर से दबा रहे थे। पापा भी हमारे पास आकर खड़े हो गए थे और भी अपनी बीवी को पराए मर्द से मजे लेते हुए देखने लगे। फिर काका मम्मी के बदन सहलाने लगा। बदन सहलाने से मम्मी के गुदगुदी होती तो मम्मी हँसने लगी।

मम्मी को हँसता हुए देख पति और ज्यादा गर्म हो गए। फिर मम्मी तेल से मालिश करवाने के लिए वहीं पास ही धूप में रखी चारपाई पर सीधी सो गई। फिर मम्मी ने दाई को तेल लाने के लिए आवाज दी। फिर दाई तेल लेकर आ गई तो काका अपने हाथ मे तेल लेकर मम्मी के बदन की मालिश करने लगा। काका मम्मी के बूब पर बहुत सारा तेल डालकर मसलने लगा। मम्मी अपने दोनों हाथ पीछे करके और अपने दोनों पैर खोलकर मस्त होकर सोई थी।

ये नजारा देख कर तो पति ने मुझे वहीं खिड़की के सहारे झुका कर खड़ा कर लिया और मेरी गाँड में लंड डालकर करने लगे थे। पापा मेरे पास ही खड़े थे तो मैं एक हाथ से उनका भी लंड हिला रही थी। फिर कुछ ऐसा हुआ के जिसे देखकर तो पति और भी पागल हो गए।

काका मम्मी की चिकनी चूत पर तेल लगाकर मालिश कर रहा था तो मम्मी भी अब मादक सिस्कारियाँ लेने लगी थी। फिर हमारा नौकर रामु भी वहाँ आ गया। फिर काका ने मम्मी को उल्टा लेटने के लिए कहा तो मम्मी उल्टी लेट गई। फिर काका ने रामु से मम्मी की पीठ की मालिश करने को कहा और काका खुद मम्मी की गाँड की मालिश करने लगा। दो-दो नंगे मर्दों के बीच मम्मी नंगी लेटी थी और उनसे अपने बदन की मालिश करवा रही थी।

ये देखकर तो जैसे पति एक दम बहुत ज्यादा गर्म हो गए और वो तेजी से मेरी गाँड में अपना लंड अंदर बाहर करने लगे। फिर मम्मी की तेल मालिश पूरी हो गई तो मम्मी खड़ी हो गई। मम्मी का बदन धूप में चमक रहा था। फिर मम्मी रामु और काका के बदन से अपना बदन रगड़ने लगी तो रामु और काका भी मम्मी के बदन को सहलाने लगे। फिर पति से नहीं रहा गया तो पति नंगे ही आँगन में सीधे मम्मी के पास चले गए। पति को आता देख नौकर और रामु मम्मी से दूर हो गए और पति ने जाते ही मम्मी को अपनी बाहों में भर लिया और मम्मी को चूमने लगे।

ऐसे अचानक पति के आने के कारण मम्मी पहले तो थोड़ी शर्मा रही थी। मम्मी गदराए बदन की थी और पति भी एक अच्छे शरीर के मालिक थे तो उन दोनों की जोड़ी बहुत जच रही थी। फिर पति ने मम्मी को वहां रखी चारपाई पर सीधा सुला लिया और उनकी चूत चूसने लगे। ऐसा नजारा देखकर पापा मेरे पीछे आये और मेरी गाँड में लंड डालकर करने लगे। काका और रामु भी खड़े खड़े अपना लंड हिला रहे थे।

थोड़ी देर मम्मी की चूत चूसने के बाद पति ने अपना लंड मम्मी की चूत पर रखा और एक ही झटके में अपना लंड मम्मी की चूत में घुसा दिया। जिस कारण मम्मी पहले तो थोड़ा चीखी और फिर जोर जोर से सिस्कारियाँ लेने लगी और पति से चुदने लगी। पति भी मम्मी को पूरी ताकत लगाकर चोद रहे थे। मम्मी ने अपने दोनों पैर पूरे फैला लिए थे और जितना अंदर तक हो सके पति का लंड ले रही थी। चूत में करने के बाद पति ने मम्मी को घोड़ी बना लिया और फिर पति मम्मी की गाँड मारने लगे तब मम्मी और पति चुदाई करते हुए काफी सेक्सी लग रहे थे।

उनकी चुदाई देखकर पापा मेरी गाँड में झड़ चुके थे। फिर मैं और पापा वहीं आ गए जहाँ पति मम्मी को चोद रहे थे। फिर पापा तो उन्हें देखकर अपना लंड हिलाने लगे और मुझे काका ने पीछे से पकड़ लिया और फिर काका मुझे भी घोड़ी बनाकर वहीं चोदने लगा। दाई भी वहाँ आ गई थी और वो भी पति और मम्मी की चुदाई के मजे ले रही थी और साथ मे अपनी चूत में उंगली कर रही थी।

फिर पति झड़ गए तो पति ने मम्मी की चूत और गाँड चाटकर साफ कर दी। फिर वो वहीं चारपाई पर बैठ गए। वो मम्मी की कमर में हाथ डालकर बैठे थे। पापा अपना लंड हिला रहे थे फिर वो झड़ने लगे तो उन्होंने अपना पानी जाकर मम्मी के बदन पर गिराने लगे। फिर मम्मी ने पापा का पानी को अपने बदन पर मसलने लगी।

जब काका भी झड़ गया तो मैं भी जाकर पति के दूरी तरफ बैठ गई। फिर पापा ने दाई से दूसरी चारपाई मंगवाई और पापा, काका और रामु उस पर हमारे सामने बैठ गए। पति हम दोनों माँ बेटी की कमर में हाथ डालकर बैठे थे और मैं और मम्मी ने पति का लंड पकड़ रखा था। पति मम्मी को चोदकर काफी खुश थे। वो बोले के बहुत मजा आया आज तो अपनी सासु माँ को चोदकर। फिर पति हम सबके सामने ही मम्मी के बदन की तारीफ करने लगे। ये सुनकर मम्मी मुस्कुरा रही थी। फिर काका पति से बोला के आगे आपका क्या इरादा है।

फिर काका पति से बोला के आप एक बार इन दोनों माँ बेटी को एक साथ एक ही बिस्तर पर चोदिए फिर देखिए आपका मजा दुगुना हो जाएगा। फिर पति बोले के दोनों माँ बेटी की एक साथ चुदाई ये सोचकर ही मैं तो काफी गर्म हो रहा हूँ। फिर मैं पति से बोली के आज रात को हम दोनों माँ बेटी आपके साथ एक साथ सुहागरात मनाएंगे। ये सुनकर पति काफी खुश हुए और बोले के फिर तो मजा ही आजायेगा। फिर पति ने मेरी और मम्मी की कमर में अपना हाथ और टाइट कर लिए और मुझे और मम्मी को अपने से पूरा चिपका लिया।

फिर पति मेरे और मम्मी के बूब एक साथ दबाने लगे। इतने में पति का लंड फिर से खड़ा हो गया। फिर मैंने पति को पीछे की तरफ सुला दिया और फिर मैं और मम्मी एक साथ पति का लंड चूसने लगी। फिर पति ने मम्मी को अपने बूब के बीच डालकर अपना लंड सहलाने को कहा तो मम्मी पति के सामने नीचे घुटनों के बल बैठ गई और पति के लंड को अपने बूब के बीच डालकर मसलने लगी। जिससे पति को काफी मजा आ रहा था।

फिर पति झड़ने लगे तो उनके लंड का पानी मम्मी के मुँह पर गिरने लगा। जो कुछ तो मम्मी पी गई और कुछ मम्मी के बूब और मुँह पर गिर गया। फिर वो पानी मैं चाटने लगी। फिर मैं और मम्मी एक दुसरे की बांहों में बांहे डालकर खड़ी हो गई और एक दूसरे के बूब चूसने लगी और किस करने लगी। ये देखकर पति बोले के तुम दोनों माँ बेटी तो सच में बहुत सेक्सी हो।

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