संचीता मेडम को चुदते देखा 2

राकेश ने अब संचीता मेडम की गांड और पीठ को सहलाना शुरू कर दिया। संचीता मेडम उसको चूम रही थी और वो भी संचीता मेडम के होठों को अपने होठों से दबा रहा था और मेरी तरफ मेडम की गांड थी, जिस पर में राकेश का हाथ देख रहा था, वो संचीता की गांड को हाथ से दबा रहा था और कभी संचीता मेडम की पीठ को सहला रहा था, मेडम भी उसकी गांड को कसकर मुट्ठी में दबाने लगी, उसने उत्तेजित होकर संचीता मेडम को ज़ोर से अपनी बाहो में जकड़ लिया, आह्ह्ह्ह संचीता मेडम के मुँह से आवाज़ निकल गई। फिर राकेश संचीता मेडम के ऊपर चड़ गया और संचीता मेडम ने उसको ज़ोर से पकड़ लिया।

राकेश अब मेडम को ज़ोर ज़ोर से चूम रहा था। संचीता मेडम भी उसका पूरा सहयोग कर रही थी। फिर राकेश संचीता की बड़ी बड़ी चूचियों पर अपना मुँह रगड़ने लगा। उसका निप्पल 1 इंच का होगा, एकदम ब्राउन। वो मेडम की एक चूची को मुँह में लेकर चूसता तो दूसरे को हाथ से मसलता। संचीता मेडम अपने एक हाथ से उसकी गांड सहला रही थी और दूसरे हाथ को अपने और उसकी बॉडी के बीच घुसा रखा था। शायद वो उसके लंड को पकड़े हुए थी, क्योंकि उसका हाथ आगे पीछे हो रहा था। कुछ देर तक संचीता मेडम की चूचियों को चूसने के बाद राकेश संचीता के होठों को चूसने लगा, उसने मेडम के मुँह में अपनी जीभ घुसाना शुरू किया तो मेडम भी अपनी जीभ उसकी जीभ से टच करने लगी और साथ ही वो एक हाथ से उसकी गांड पकड़े हुए थी और दूसरे से उसका लंड। इतना करते करते राकेश संचीता के ऊपर से उतर के बगल में हो गया।

मेडम ने उसकी तरफ मुँह किया, तो मुझे उसकी गोरी और बड़ी गांड दिखी, जो कि एकदम चिकनी थी और एक भी बाल नहीं था। वो मेडम की गांड को एक हाथ से पकड़कर दबा रहा था, तो कभी सहला रहा था। संचीता मेडम उसका लंड अपने हाथ में लेकर दबा रही थी। इस तरह से काफ़ी देर तक दोनों फोर प्ले करते रहे। उसका लंड पूरा टाईट होकर संचीता मेडम की मुट्टी में फंसा हुआ था और मेडम भी शायद पूरी चुदसी हो चुकी थी, क्योंकि अब वो उसको अपने ऊपर खींचने लगी थी। संचीता मेडम तभी बोली कि आ जाओ अब, उसकी आवाज़ काफ़ी भारी हो गई थी, शायद चुदसी की वजह से। अब मेडम पीठ के बल सीधी लेट गयी और राकेश मेडम के पैर के बीच आकर बैठा। उसका काला लंबा मोटा लंड फंनफना रहा था, जैसे ही वो संचीता मेडम के पैर के बीच में बैठा, तो संचीता उसका लंड पकड़कर चूत पर रख लिया और उसने थोड़ा दवाब दिया, तो उसका पूरा लंड संचीता की बालों से भरी चूत में चला गया। राकेश लंड डालकर संचीता के ऊपर लेट गया और धक्का मारना शुरू कर दिया। दोस्तों ये कहानी आप चोदन डॉट कॉम पर पड़ रहे है।

मेडम उसकी पीठ पर अपने दोनों हाथ रखे हुए थी और आँख बंद करके लंड का मज़ा ले रही थी। वो नॉर्मल स्पीड से संचीता की चूत में लंड आगे पीछे कर रहा था। कुछ देर तक इसी तरह से चोदने के बाद उसने करवट बदल ली और संचीता मेडम को अपनी तरफ मुँह करने को बोला। फिर मैंने देखा कि उसका काला लंड एकदम चमक रहा था, शायद संचीता की चूत का पानी उस पर लगा था। संचीता उसकी तरफ हो गई, तो उसने मेडम का एक पैर अपनी कमर पर रख लिया और अपना लंड उसकी चूत में डालकर आगे पीछे करने लगा। मेडम की गांड मेरी तरफ थी और में उसकी चूत में उसके लंड को आते जाते साफ देख रहा था।

राकेश संचीता की गांड को हाथ से पकड़कर दबाते हुए उसको पेले जा रहा था, संचीता मेडम के मुँह से मज़े के कारण आहहहईई की आवाज़ निकल रही थी। वो भी अब लंड के धक्के का जबाब देते हुए अपनी कमर उसकी कमर से टकरा रही थी। इस स्टाईल में वो संचीता को करीब 10 मिनट तक चोदता रहा। फिर वो मेडम को वापस सीधा करके उसके ऊपर चड़कर उसको चोदने लगा। राकेश ने पूछा कि मज़ा आ रहा है जानू, संचीता ने उसकी गांड पर अपने दोनों हाथ रखे हुये बोली कि ज़ोर से धक्का मारोगे तब मज़ा आयेगा। धीरे चोदने में मज़ा नहीं मिलता मुझे, ज़ोर के धक्के का मज़ा ही कुछ और है। वो बोला अच्छा तो ये लो मेडम जी, संचीता सिसक पड़ी और वो ताव में आ गया था और मेडम को खूब ज़ोर से धक्का मारा। मेडम बोली कि हाँ इसी तरह करो, अब अच्छा लगा ना। संचीता मेडम उसको जोश में लाते हुए बोली कि अब ज़ोर ज़ोर से पेलो।

उसकी ज़ोरदार चुदाई से संचीता भी अपनी गांड हिलाने लगी, वो उसके हर धक्के पर नीचे से अपनी गांड उठाने लगी थी और साथ ही उसके मुँह से मस्ती भरी आवाज़ निकलने लगी थी। 5-6 मिनट लगातार कस कसकर धक्के मारने के बाद वो धक्के लगाना बंद करके संचीता के ऊपर लेट गया। उसके हांफने की आवाज़ मुझ तक पहुँच रही थी। संचीता की भी हालत वैसी ही थी और वो भी हांफ रही थी। 1-2 मिनट रुककर वो उठा और मेडम से बोला कि संचीता अब पीछे से आ जाओ, तो वो उठी और बिस्तर पर कुत्तिया बन गई और वो खड़ा होकर मेडम की गांड पर झुका और संचीता की चूत में लंड घुसा दिया। में उसको साईड से देख रहा था तो मुझे मेडम की चूत में लंड आता जाता नहीं दिख रहा था। वो झुककर मेडम की गांड पर हाथ जमाकर धक्के लगाने लगा।

इस बार जब जब लंड संचीता की चूत में अंदर जाता तो मुझे पच पच की आवाज़ सुनाई देने लगी, वो जब धक्का देता तो मेडम की बड़ी बड़ी चूची आगे पीछे हो रही थी। संचीता मेडम मस्ती से आँख बंद कर सिसकारी लेती हुई उससे कुछ बोलती थी, जो कि मुझे सुनाई नहीं दे रहा था। राकेश अब थोड़ा और संचीता के ऊपर झुक गया था और मेडम की लटकी हुई चूची को पकड़कर उसको चोदता रहा। जब उसका बेलेन्स समाप्त होने लगा तो वो संचीता की गांड के पीछे कुत्ता बनकर बैठ गया और दोनों हाथ से मेडम की गांड को साईड से पकड़कर उसकी चूत चोदता रहा। संचीता को कुत्तिया बनाकर राकेश बहुत देर तक चोदता रहा। फिर अचानक से वो बोला कि मेडम अब आपकी गांड मारूँगा।

इतना सुनते ही मेडम उससे अलग हो गई और बोली नहीं बहुत दर्द होता है संचीता इनकार करते हुए बोली कि आपका लंड ज़्यादा मोटा है, तो वो बोला कि हाँ मेरे जैसा लंड बहुत कम लोगों का ही होता है। फिर संचीता बोली कि तभी तो आपको जब उस दिन पेशाब करते देखा और आपका लंड देखा, तो में हैरान रह गई थी कि हमारे यहाँ भी मर्दो का सामान ऐसा होता है और मैंने उसी दिन सोच लिया था कि एक दिन इस सामान से मज़ा ज़रूर लूँगी। अच्छा कोई बात नहीं संचीता रानी, किसी और दिन गांड मार लूँगा, अभी चूत तो मारने दो, मेडम बोली कि तो मारो ना जितना मार सकते है मारो, उसके लिए में हमेशा तैयार हूँ। यह कहती हुई मेडम सीधी लेट गई और उसने मेडम के पैर को खोलकर लंड डालकर उसकी चूची को पकड़ा और दबाते हुए मेडम की चूत पेलने लगा। संचीता उुउऊहह आआईईईइ हहाई आपके जैसा मज़ा किसी ने नहीं दिया मुझे आज तक अहह्ह्ह चोदो मुझे, ज़ोर ज़ोर से चोदो, मेरी चूत की सारी गर्मी निकाल दीजिये, आहह बड़ा मज़ा रहा है।

अब वो शायद लास्ट स्टेज में आ चुका था। राकेश अब संचीता मेडम के ऊपर लेटा और दोनों हाथ मेडम की गांड के नीचे रखकर नीचे से मेडम की गांड को पकड़ लिया। उसके ऐसा करते ही संचीता मेडम ने अपने दोनों पैर उठाकर हवा में खोल दिये। राकेश संचीता की चूची को मुँह से रगड़ते हुए घोड़े जैसी स्पीड से संचीता को पेलने लगा। मेडम उससे कसकर लिपटी हुई थी, आहह में झड़ने वाली हूँ। राकेश भी हाफते हुए बोला कि हाँ अब मेरा भी निकलेगा संचीता। उन दोनों को उस स्टाईल से चुदते देख मुझे ऐसा लग रहा था कि जैसे दो पहलवान कुश्ती लड़ रहे हो और एक दूसरे को हरा देना चाहते हो। तभी राकेश ने अपना हाथ संचीता मेडम की गांड के नीचे से निकाला और मेडम को कंधे से पकड़ लिया और जोर से धक्का मारने लगा और ज़ोर ज़ोर से हाँफते हुए मेडम से चिपक गया।

संचीता भी ज़ोर से सीसीयाई अहहहहहाः और राकेश को कसकर पकड़ लिया। दोनों एक साथ झड़ रहे थे और संचीता ने अभी भी अपने दोनों पैर हवा में उठा रखे थे, जिसको उसने कुछ देर के बाद बिस्तर पर रखे और लगभग दस मिनट तक दोनों एक दूसरे से उसी तरह लिपटे रहे। फिर संचीता मेडम उसकी गांड पर हाथ मारकर बोली कि उठो ना अब, राकेश उठा और संचीता भी उठकर बैठी हो गई और नाईटी से अपनी चूत साफ करने लगी। फिर उसने घड़ी देखी और बोली कि अब आप जाइये, 4 बजने वाले है।

मैंने भी टाईम देखा तो 3:40 हो रहा था। मतलब कि लगभग 1:30 घंटे तक चुदाई का खेल चला। राकेश कपड़े पहनने लगा और संचीता ने भी अपनी नाईटी पहन ली। राकेश बोला कि अब कब आना है? संचीता बोली कि में बाद में बता दूँगी, अब जल्दी से निकलो आप। फिर में वहां से हटा और अपने रूम में आ गया। मैंने भी संचीता मेडम को चुदते देखा तो मैंने भी अपना पानी निकाल डाला, जिससे में थक गया और चुपचाप सो गया ।।

धन्यवाद …

 

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