Hindi Sex Stories मेरा बाय्फ्रेंड 10

राहुल – मजा आ गया यार शिखा..क्या फादू काम किया हे तूने मेरी जान और इतना कह के वो पीछे आ गया..

राहुल-”कैसी हे मेरी जान..मजा आया की नहीं मेरी शिखा को..?

में-”चलो कम से कम नाम तो याद है..वरना तुम तो पता नहीं क्या समझ रहे हो मुझे जो ऐसे काम करवा रहे हो..
मैंने नज़रे बिना उठाए कहा…

राहुल-”बड़ी नाराज़ लग रही हे मेरी जान, क्या बात है?..’वैसे तू है बहुत सुंदर और सेक्सी..

में-‘किसने कहा?

राहुल-‘मैंने आज खुद देखयार क्या प्यारी बातें करती हे तू..

में-हम रहने दो तुम तो..बहुत बुरे हो तुम..पता नहीं क्या क्या करवाते हो..और वो शॉप वाला कितनी गंदी नज़र से देख रहा था मुझे और तुम्हारा दोस्त है ना वो भी बहुत गंदी नजरों से मुझे देखता है.

में ऐसी बात इसलिए कर रही थी क्योंकि आज मुझे वो सब करने का मान हो रहा था जो शादी के बाद होता है..पता नहीं अजीब से खुजली हो रही थी आज मेरी चुत में..और बार बार पानी निकल रहा था..

राहुल-कौन सेनटी..अरे वो थोड़ा लड़कियों के मामले में फास्ट है बस इसलिए..”खैर अब तू मुझसे नज़र मिलकर बात कर तो चुपचाप..

में-क्यों आज इतने उतावले क्यों हो रहे हो?”

राहुल- मेरी जान कितने दिन हो गये हमारे प्यार को पर मैंने अभी तक तेरी चुत नहीं मारी..इतना जुल्म तो मत किया कर.”

में चुप रही पर मुझे अजीब सा लग रहा था..ऐसा लग रहा था जैसे आज सब पहली बार हो रहा है..

उसने मुझे गले से लगा लिया और मेरे होठों को चूमने लगा.. मैंने महसूस किया की मेरे शरीर में हल्का हल्का कंपन हो रहा है. जैसे किसी सितार के तार को चेरने के बाद उससमें कंपन होता है..मुझजे सच में आज मजा आ रहा था और डर भी लग रहा था.. उसने मुझे चिपकाए हुए और किस करते हुए ही लेता दिया सीट पर.. और मुझे घुमा दिया अब मेरी पीठ उसकी छाती से चिपक गयी और उसने मेरे बगलों से हाथ डालकर दोनों मम्मे अपनी हाथों में ले लिए. जैसे उसके हाथों में दो टेनिस बॉल्स आ गयी हो..वो उन्हें बड़ी ज़ोर ज़ोर से दबा रहा था और वो क्यों ना दबाए मेरे मम्मे थे ही इतने बारे और इतने ही टाइट..
उसने उन्हें अपने हाथों में ऐसे भरा के उसकी उंगलियाँ मम्मे के नीचे, हथेलियन दोनों साइड्स में और दोनों अंगूठे छ्हूचकों के थोड़ा उप्पर थे. मेरे दोनों चूचक आज़ाद थे और मैं देख रही थी की उत्तेजना के कारण मेरे शरीर पर गूस बंप्स उभर आए हे और मेरे दोनों निपल्स संकुचित हो कर अंदर को धाँसे हुए थे.वो उन्हें दबा रहा था बार बार इतने मुलायम और नरम थे मेरे चूचक..

मैं बहुत रोमांचित थी आज इतने समय बाद राहुल की बाहों में जो थी और में उसका आनंद ले रही थी..अब उसने बारे प्यार से मेरे ब्रेस्ट सहलाना शुरू किया..मेरे मुँह से अयाया, उूुउऊः की आवाजें आनी शुरू हो गयीं थी राहुल ने पूछा, क्यों जान मजा आ रहा है ना. तो में लंबी सान लेकर बोली के बहुत ज्यादा, इतना के बता नहीं सकती, लेकिन बहुत ही ज्यादा. यार राहुल ई लव यू बेटा..

उसने अपनी दाईं तंग उठाकर मेरी दाईं जाँघ को प्यार से रगड़ना शुरू कर दिया. मेरी साँस अटकाने लगी. बीच-बीच में में एक लंबी साँस खींच लेती और फिर से मेरी सान तेज हो जाती..उसने अपना हाथ मेरे दोनों मुममे के बीच में रखा तो उसे महसूस हुआ के मेरा दिल इतनी ज़ोर से धारक रहा है जैसे अभी छाती फड़कर बाहर आ जाएगा..उसने मुझे घूमकर सीधा किया और अपने सीने से लगा लिया और अब में सीट पर उसके नीचे लेती थी और वो पूरी तरह से मेरे उप्पर छाया हुआ था.

उसके दोनों हाथ मेरी पीठ पर थे. उसने मुझे इसी स्थिति में प्यार से भींच लिया और मैंने भी अपनी दोनों बहन उसकी पीठ पर ले गई..अब उसने मुझे जोरों से कस्स किया. ऐसा करने से मेरी उत्तेजना थोड़ी कम हुई और मैंने उसे अधखुली अनंखों से बारे प्यार से देखा.. उसने मुस्कुराते हुए पूछा, क्यों कैसा लग रहा है तो में बोली के में नहीं जानती थी के इतना मजा भी आ सकता है. उसने कहा के मेरी जान अभी तो शुरूआत है असली मजा तो आगे आएगा. में हैरानी से आंखें फाड़ के बोली और कितना मजा आएगा. उसने कहा के लेती रहो, सब पता चल जाएगा.

. . . . . . . . …. . . . . . . . . और मुझे मेरी चुत आज कुछ अलग लग रही थी. मैंने देखा अपनी पैंटी को तो वो कुछ ज्यादा ही गीली हो गयी थी..अब उसने मेरी पैंटी नीचे खींच दी और साथ ही अपना आंडरवेयर भी उतार दिया और दोनों आंडरवेयर को एक सीट पर डाल दिया और बोला के दोनों गीले हो गये हैं और हँसने लगा..में शर्मा गई..मैंने कहा राहुल आज कुछ कुछ निकल रहा है यार है उसके अंदर से..वो शायद समझ गया था की में एक बार झाड़ चुकी हूँ..

उसने मेरी चुत को अपनी हथेली से ढक लिया. मेरी चुत पर अभी रोनयदार छोटे बॉल थे मुश्किल से आधा इंच के होंगे और मेरी गीली चुत में सनसनाहट होने लगी..

उसने प्यार से मेरी चुत को सहलाया और बैठा रहा..और फिर एक दम से उसने मुझे अपनी गोदी में खींच लिया. और उसने अपने लेफ्ट हॅंड से मेरा लेफ्ट मम्मा पकड़ा और पहले से थोड़ा ज्यादा ज़ोर से मसलना शुरू कर दिया…आस यार कितना मजा आ रहा है ना राहुल आज पहली बार..ये सुनकर उसने मेरे मुममे और ज़ोर से दबाना शुरू कर दिया…और राइट मम्मे को मुँह में लेकर ज़ोर ज़ोर से चूसने लगा और चुत की दरार में उंगली चलानी शुरू कर दी..उसकी पूरी हथेली मेरी चुत को ढके हुए उप्पर नीचे हो रही थी और उसकी उंगली मेरी दरार को रगर्ति हुई नीचे गान्ड के छेद को छू कर वापिस आ रही थी..

वो बहुत ज़ोर ज़ोर से ऐसा कर रहा था और में उसकी गोदी में उछल रही थी. मेरी मुँह से एक लंबी आ…आह…हह निकली और मैं फिर से झाड़ गई. फिर उसने मुझे अपने ऊपर से हटा कर फिर से लेता दिया..और मेरी टांगे उठाकर अपने हाथ उसके नीच करके सख्ती से पकड़ लिया और अपना मुँह मेरी चुत पर चिपका दिया..में थोड़ा पीछे हटी पर राहुल के हाथों की मज़बूत पकड़ ने मुझे हिलने भी नहीं दिया. उसने अपनी जीभ मेरी चुत पर चलानी शुरू कर दी और एक हाथ आगे लाकर अंगूठे से मेरी चुत के उपरी भाग (कोलाइटिस) को सहलाना शुरू कर दिया…आस में पागल हो रही थी और मेरी आंखें बंद हुए जा रही थी..

मेरा शरीर ज़ोर ज़ोर से कांप रहा था और उसके बाद काँपता चला गया.. उसका मुँह मेरी चुत पर चिपका हुआ था. 2-3 झटकों के साथ मेरी चुत ने पानी छोड़ दिया जिसे राहुल पूरा चाट गया..मैंने अपनी टाँगे और ज़ोर से भींच लीं और वो मेरी बगल में आ के लेट गया..में उससे लिपट गई और उसकी छाती से शुरू होकर उसके मुँह तक छोटे-छोटे किस करती रही..उसने दोनों हाथों में लेकर मेरा चेहरा अपने सामने किया और मेरे होठों को चूम लिया. अब राहुल का लंड जो अब एक स्टील रोड की तरह सख्त हो गया था मेरी जाँघ पर चुभने लगा.

में-राहुल इसे क्या हो गया बेटा..

ऐसा कह के मैंने अपना हाथ बरहा कर उसके लंड को हाथ में ले लिया और उससे दबाने लगी. फिर में उठ कर बैठ गयी और बोली के क्या में इससे किस कर सकती हूँ जान..उसने हंसते हुए कहा के तू जो चाहे कर सकती हे मेरी जान और तरीका भी यही है..

मैंने बारे प्यार से राहुल का लंड अपने गालों पर लगाया और फिर उसके लंड पर किस किए. 2-3 चुंबन के बाद मैंने देखा के पानी की एक चिकनी बंद राहुल के लंड की टोपी पर चमक रही है..मैंने उसे सूँघा पर कोई स्मेल नहीं थी.., फिर अपनी जीभ की नोके उसे पर लगलाई और फिर उससे बारे प्यार से चाट गई..और राहुल मुझे देख के हँसने लगा..

उसने उत्तेजना के साथ मेरा सर पकड़ कर मेरा मुँह अपने लंड पर टीका दिया और थोड़ा दबाव डालने लगा तो मेरे मुंह में उसका लंड चला गया..में सर को इधर उधर करने लगी तो उसने मेरे मम्मे दबाते हुए कहा की मेरी कुतिया को अगर अच्छा नहीं लग रहा है तो रहने दे और अगर लग रहा है तो प्लस्ससस्स बेटा इस्सको लॉलिपोप की तरह चूस ज़ोर ज़ोर से..मैंने तिरछी नज़र से राहुल को देखा और पूरे जोश से उसके लंड को थोड़ा और अंदर कर के चूसने लगी और अपनी जीभ भी उसपर चलाने लगी..अब राहुल आहें भर रहा था और मुझे मजा आ रहा था..

वो कुच्छ देर तक इसका मजा लेता रहा और फिर मेरी कमर पकड़ कर अपनी तरफ खींच लिया और बोला, तू यह करती रहा कर बस…और में उसके लंड को चुस्ती रही..पर अभी उसे शायद मुझे बहुत कुच्छ सीखना बाकी था..उसने मुझसे कहा के इस्सको चूसते हुए अंदर बाहर भी कर ना प्लीज़ मुझे बहुत मजा आता है बेटा…पर ध्यान रहे के दाँत ना लगें इससपर ओके बेटा..और में एक अग्यकारी शिष्या की तरह वैसा ही करने लगी और कुच्छ ही मिनट में एक एक्सपर्ट की तरह लंड अंदर बाहर भी करने लगी.. में चूस भी रही थी और अपनी जीभ भी राहुल के लंड पर फिरा रही थी..

फिर उसने मेरी दोनों टाँगें अपने दाएँ-बाएँ कर दी और मुझे घुटनों के बाल कर दिया. अब हम 69 की पोज़िशन में थे और उसका लंड फिर मेरे मुँह के पास आ गया..

में-राहुल्ल्ल्ल क्या है बेटा ये..

राहुल-मजा लेना है ना मेरी कुट्टी को

में-हां

राहुल-तो जान बस लंड चूष्टि रही और मुझे अपनी चुत चाटने दे..

फिर उसने अपने बाएँ हाथ की बीच की उंगली अपने मुँह में डाल कर गीली की और थोड़ा थूक लेकर मेरी गान्ड के छेद पर रगड़ने लगा..और उसके बाद राहुल ने थोड़ी सी उंगली मेरी गान्ड में डाल दी.. और में एक दम उछल गई और कहा की ये क्या पागलपन हे राहुल्ल्ल..वो हंसा और कहने लगा की मजा लेने के लिए तैयार रहो मेरी जान..

में उसका लंड लगातार चूसे ही जा रही थी..उसने उंगली को मेरी गांड में ऐसे ही रहने दी और मुँह उठाकर अपनी जीभ मेरी चुत की दरार पर फेरने लगा..में नशे में होती जा रही थी और कुछ समझ में नहीं आ रहा था..फिर राहुल ने अपना मुँह मेरी गीली चुत से चिपका दिया और उसे ज़ोर ज़ोर से चूसने लगा.. फिर उसने अपनी जीभ को कड़ा करके मेरी चुत के अंदर बाहर करने लगा.. यह पहली बार था जब मेरी चुत में इतनी अंदर कोई चीज़ गई थी और अब सब मेरे बर्दाश्त के बाहर हो रहा था और आज मेरा मान सच में कर रहा था की राहुल अपना लंड मेरी चुत में डाल दे और चोद दे मुझे..जैसे उन क्षकशकश मूवी में होता है..

पर शायद आज वो दिन नहीं था..

इतने में राहुल को किसी का कॉल आया और उसने फोन रख कर मुझसे कहा..

राहुल-जान जल्दी जल्दी कर..जरूरी काम है तो जाना पड़ेगा मेरी कुतिया को यही छोड कर..

मैंने उसका लंड चूसते हुए कहा-नहीं यार ऐसे मत जाओ प्लीज़

राहुल-अरे जान जरूरी है यार वरना में तो दिन रात तेरी चुत चतु तो भी कम है..

में-बस कहते रहते हो कभी करते तो हो नहीं कुछ..

राहुल-जान अब जाने दे मुझे प्लीज़ वरना देर हो जयगी..

और राहुल ने मेरा मुंह पकड़ा और ज़ोर ज़ोर से अपने लंड लो अंदर बाहर करने लगा और उसका काम हो गया..वो झहहाद गया था और पूरा वाइट वाइट मेरी ब्रा पर गिरा दिया था कुत्ते ने..मुझे बहुत गुस्सा आया उस पर..एक तो इतनी आग लगा के बिना अपना लंड डाले ही जा रहा था और ऊपर से ब्रा खराब कर दी..

फिर उसने और मैंने कपड़े पहने और वो चला गया..और में भी अपने रूम पर आ गई..और बाथरूम में जाकर अपनी ब्रा औतरी और टॉप बिना ब्रा के पहन के आकर लेट गई..उफफफफफफफ्फ़ आज का दिन बड़ा अजीब था..

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