Antarvasna इधर दुकान इधर तो जवान

Antarvasna Hindi Sex Stories इधर दुकान इधर तो जवान
Antarvasnamp3 Kamukta antarvasnajokes antarvasna antervasna antrvasna antarwasnaantarvasana Antarvasna

आज मैं आपको जो कहानी सुनाने जा रहा हूं वह मेरे एक दोस्त है जो बचपन में पढ़ाई छोड़कर खुदरा दुकान चलाने लगा. इसके अनुसार जिस मोहल्ले में खुदरा दुकान के वहीं पर मुझे दुकान चलाते लगभग दस साल बीत गए पहले साथ अब्बा बैठते थे वे बूढ़े हुए तो मैं अकेला ही दुकान सम्भालने लगा. जिस मोहल्ले में मैं दुकान के वहाँ मेरी दुकान के सामने वाला घर नवाब साहब का था वैसे तो उनका नाम मिर्जा मुनीर था मगर लोग उन्हें नवाब साहब के नाम से जानते थे इसकी वजह यह थी कि उनके बड़े, आबाो पूर्वज रईस नवाब गुजरे थे लेकिन अब उनकी स्थिति ऐसे न थे मगर लोग फिर भी उन्हें नवाब साहब कह कर बुलाते थे नवाब साहब और मेरी उम्र लगभग पैंतीस छत्तीस साल थी या एक दो साल का ही अंतर होगा. नवाब साहब के दो बच्चे थे जबकि नवाब साहब की पत्नी बुर्का बहनती थी इसलिए उसका चेहरा देखने का कभी अवसर ही न मिला. एक दिन दुकान पर बैठा था तो मुझे एक मुहल्ले दार ने आकर बताया कि नवाब साहब का दुर्घटना हो गई है. मुझे नवाब साहब के मरने की खबर सुनकर बहुत दुख हुआ. फिर दिन इसी तरह गुजरते रहे. एक दिन नवाब साहब का बड़ा बेटा जो उम्र लगभग पांच साल होगी वह मेरे पास आया और कहा कि सामने दरवाजे पर माता बुला रही हैं. मैं दुकान छोड़ कर नवाब साहब के दरवाजे पर गया तो वहां नवाब साहब की पत्नी दरवाजा ाोड़ में खड़ी थी. उसने दरवाजे के पीछे से कहा कि मुझे अपनी दुकान से कुछ सामान चाहिए था लेकिन मेरे पास अभी पैसा नहीं है मैं आपको बाद में पैसे दे दूंगी. क्योंकि मुझे मोहल्ले में दुकान करते काफी समय हो गया था और वैसे भी नवाब साहब मेरे पड़ोसी थे तो मैंने नवाब साहब की पत्नी को कहा कि मुझे सामान बता में दुकान से वह सामान आपको लाकर दे देता हूँ. नवाब साहब की पत्नी ने एक पर्ची जिस पर कुछ सामान लिखा था वह मुझे थमा दी. मैंने वह पर्ची ली और वापस दुकान पर आ गया. सामान कुछ दालों, आटा और कुछ अन्य सामान लिखा था. मैं सभी सामान खरीदारी बीगज़ में डाला और एक हाथ में आटे का बैग पकड़ा और फिर नवाब साहब के घर के सामने चला गया. मैंने दरवाजा खटखटाया तो फिर नवाब साहब की पत्नी दरवाजे के पीछे आ गई मैंने कहा जी में सामान ले आया हूं और सामान पर्ची है. मैं शॉपिंग बैग नवाब साहब की पत्नी को पकड़ा दिया तो वह अपने पीछे रख दिया और उसे अब बीस किलो आटा बैग पकड़ा चाहा तो वह एक हाथ में थम ही ना सका और आटे का बैग वहीं नीचे गिर गया . मैंने उसे कहा कि आटा वजन अधिक है अगर आप कहें तो मैं उसे अंदर रख दूँ तो उसने कहा जी ठीक है और साथ ही दरवाजा खोला. वह मेरे आगे चल रही थी जबकि उसके पीच्चे हम आंगन से गुज़रकर पिछले कमरे में चले गए. मैं आटे का बैग नीचे जमीन पर रखा तो उसने कहा आपका बहुत बहुत धन्यवाद. जब उसने मुझे धन्यवाद कहा वह दस साल में पहला मौका था जब मेरी नज़र नवाब साहब की पत्नी पर पड़ी थी नहीं तो कभी ऐसा मौका ही नहीं मिला था कि मैं या कोई और उसे देख पाता. जैसे ही मैंने नवाब साहब की पत्नी को देखा तो उसे देखता ही रह गया. मैं सच में बहुत सुंदर लड़की आज तक अपने जीवन में न देखी थी सभी नैन तकश ऐसे तराशे गए थे कि जो भी देखता उसकी नजर वहीं जम जाती. न केवल उसके नैन नक़्श बल्कि उसके शरीर के सभी अंगों इतना अनुपात में करने वाले ने बनाए थे कि मैं शब्दों में बयान नहीं कर सकता उसकी उम्र लगभग चौबीस पच्चीस साल थी. मैंने बड़ी मुश्किल से अपनी दृष्टि नीचे झुकाया और कहा कि कोई बात नहीं पड़ोसियों इतना तो मान होता है कह कर वापस दुकान पर गया. वापस आकर काफी देर तक वह मेरे मन पर सवार रही. बार बार उसी का चेहरा मेरी नज़रों के सामने आ जाता. मगर मैं ऐसा व्यक्ति नहीं था जो किसी की माँ बहन बड़ी नजर रखे. खैर वह रात उसे भुलाने के बावजूद बहुत मुश्किल से कटी. दो तीन दिन इसी तरह बीत गए. इसके बारे में न सोचने की कोशिश करने के बावजूद मेरी नज़र बार बार नवाब साहब के घर चली जाती. इसी तरह तीसरे दिन नवाब साहब वही पुरुष फिर मेरे पास आया और बोला कि अम्मी आप को बुला रहे हैं. फिर दुकान छोड़कर नवाब साहब के दरवाजे पर चला गया. वहाँ नवाब साहब की पत्नी दरवाजे के पीछे खड़ी थी मगर आज और उस दिन यह अंतर था कि आज बाकी शरीर तो दरवाजे के पीछे था उसका चहर दरवाजे से बाहर. मैंने उसका दर्शन किया तो पता नहीं क्यों दिल को सुकून सा मिला. मैंने पूछा जी दीजिए. तो उसने कहा कि कृपया कि आप जब अपनी दुकान का बिल जमा कराने जाएं तो हमारे घर भी जमा करवा दीजिएगा. मैंने कहा यह तो कोई काम ही नहीं लाेये में करवा दूंगा और उसने बिल के पैसे और बिल मुझे तमा दिया जबकि बिल तमाते समय उसके हाथ मेरे हाथ मिस कर गया. मुझे ऐसा लगा जैसे मेरे शरीर में चार सौ चालीस वोल्ट का करंट लग गया हो. बिल लेकर वापस दुकान पर आ गया. फिर इस तरह नवाब साहब की पत्नी को कोई भी काम होता वह मुझे ही याद करती इस तरह मुझे दर्शन भी हो जाता. अब मेरी हालत यह थी कि मैं उसे देखे बिना आराम नहीं मिलता था और जब भी उसके बारे में सोचता ज़हन में गंदे गंदे विचार आ जाते. यहां तक ​​कि कई बार मुझे सपने में उसके साथ सेक्स करने ाखतलाम हो गया. एक दिन की बात है कि दुकान पर बैठा था कि नवाब साहब की विधवा ने मेरे पास अपने लड़के को भेजा जब दुकान से उठकर गया तो उसने कहा कि मैं अपने अपने पहचान पत्र बनवाना है पहला पहचान पत्र गुम हो गया है इसलिए नवाब साहब की पेंशन मिलने में समस्या हो रही है क्या आप मेरी मदद कर सकते हैं तो मैंने कहा कि क्यों नहीं मैं आपको पहचान पत्र फॉर्म ला दूंगा मुझे पड़ कर दे दीजिएगा. उसने कहा आपका बहुत बहुत धन्यवाद. फिर मैंने अपने एक दोस्त कहकर पहचान पत्र फार्म मंगवाने और दो ​​दिन बाद फिर नवाब साहब के घर चला गया. नवाब साहब की पत्नी दरवाजे पर आई तो मैंने उसे बताया कि यह उसकी फोटो भी लगेगी और साथ आपको नादरह कार्यालय जाना होगा. उसने कहा ठीक है लेकिन क्या आप मेरे साथ नहीं जाएंगे क्या? तो मैंने कहा बेफिक्र रहें मैं आपके साथ चला जाऊंगा और फिर दुकान पर वापस आ गया. अगले दिन मैंने अपनी बाइक ली और सीधा दुकान बजाय नवाब साहब के घर चला गया. दरवाजा हिलाया तो नवाब साहब की विधवा बाहरआई कहा चलें नादरह कार्यालय चलना था इसलिए मैं आ गया हूँ. मैंने इसीलिए आज दुकान नहीं खोला सोचा पहले आपका काम करवा दूं तो दुकान खोलों जाएगा. उसने कहा आप फिर अन्दर आ जाओ मैं कपड़े बदल लूं बस. मैंने कहा नहीं मैं यहीं ठीक हूँ तो वह बोली कोई बात नहीं आप आ जाएं और उसके पीछे अंदर चला गया. अंदर जाकर उसने मुझे सोफे पर बैठाया और मेरे लिए चाय बनाने चली गई. फिर मुझे जाए देकर वह वाश रूम में चली गई और मैं बाहर बैठ कर चाय पीता रहा जबकि उसका बड़ा बेटा इस समय स्कूल चा चुका था. मैं अभी चाय ही पी रहा था कि इतने में वह लड़की बाथरूम से नहा कर गीले बालों के साथ बाहर निकली. उसने अपने बालों के आसपास तौलिया लपेट रखा था. उसने कहा मैं माफी चाहता हूँ आप मेरी वजह से बहुत इंतजार करना पड़ रहा है और वे जल्दी जल्दी ड्रेसिंग की ओर चल दी कि चित्र रूम के साथ वाले बरामदे में पड़ी थी. जैसे ही वह चली तो मेरी नजर उसकी शर्ट पर पड़ी तो उसकी ज़िप खुली थी. शायद वह ज़िप बंद करना भूल गई थी. जबकि क़मीस से उसके ब्रा की सटपस साफ़ नज़र आ रही थी मैंने उसे कहा कि आपकी शर्ट ज़िप खुला है शायद आप बंद करना भूल गई हैं. उसने जल्दी से अपने हाथ पीछे की ओर किया और ज़िप नया करने की कोशिश शुरू कर दी. लेकिन जल्दबाजी में यह ज़िप बंद न हो सकी और ज़िप थोड़ा ऊपर जाकर अटक गई वह जोर लगाना शुरू कर दिया तो मैं अपनी जगह से उठा और उसे कहा लाेये में बंद कर देता हूँ. मैं उसके पास गया और उसकी कमीज़ के हुक पकड़ कर ऊपर शुरू कर दी लेकिन दिल नहीं चाह रहा था कि ज़िप जल्दी बंद हो मैं न चाहते हुए भी अपने हाथ की उंगली उसकी पीठ पर और बुरा के स्टेप पर फेरना शुरू कर दें. मेरे इस सब के बावजूद वह बिल्कुल चुप रही. तभी मैंने अपना पूरा हाथ उसकी कमीज़ में घुसा दिया अब मेरे हाथ उसकी कोमल और नाजुक पीठ पर रेंग रहा था. लेकिन वे अब भी चुप थी. मैंने तभी उसके ब्रा की हुक खोल दी और उसका चेहरा अपनी ओर कर लिया. जैसे ही उसका चेहरा मेरे सामने आया उसने आँखें बन्द कर लीं. मैंने उसके होठों पर किस करना शुरू कर दिया. अभी मैंने उसके होंठों पर अपने होंठ रखे थे वे भी अपनी भावनाओं पर काबू नहीं रख सकी उसने भी मेरी क्या जवाब अपने होंठ सरसराहट से देना शुरू कर दिया. मैंने उसे अपने बाहों में दबोच लिया और उसे एक ही बेड रूम में ले गया और वहां जाकर उसकी कीमीज़ उतार दी. अब यह चांदी जैसा शरीर मेरे सामने बिल्कुल नंगा था. इसके गोल गोल मम्मे पहले ही ब्रा से मुक्त हो चुके थे मैंने अब उसके गोल गोल स्तनों को चूमना और चूसना शुरू कर दिया. वह सच में बहुत सुंदर थी न केवल चेहरे बल्कि उसका शरीर भी बहुत सुंदर था जब तक उसके बूब्स के नेपल्स भी गुलाबी थे. दिल चाह रहा था कि बस सारा जीवन अपने बूब्स को चूसता ही बीत जाए. मैंने तभी उसकी सलवार की ओर देखा और झट से उसकी सलवार उतार दी जबकि उस समय वह भी मेरे साथ मेरे सेक्स की दुनिया में पूरी तरह खो चुकी थी.मैं ने अपनी सलवार उतार दी और अपना साढ़े छह इंच लिन उसकी फदी पर गतने लगा. जैसे ही मेरा लिन उसकी चूत को छू वह हल्की सी आह भर लेती और मेरा लिन और अधिक तन जाता. फिर एक ही पल में उसकी चूत गीली हो गई मैंने यही उचित समय समझा और अपने लिन उसकी चूत में घुसा दिया. मेरा लिन उसकी चूत में आसानी से चला गया. मगर इस चूत की तंगी मेरे लिन महसूस हो रही थी यानी इस फदी भी फिदा नहीं बनी थी. जैसे जैसे उसकी फदी को झटके देता वह इतना सिसकियाँ भरती जाती. यहां तक ​​कि एक समय आया कि वह मेरे सेक्स में इतना मदहोश हो गया कि वह बिस्तर पर लेटी हुई अपने ऊपर नीचे होने लगी. मैं भी अपने सेक्स के प्यार में इस कदर ानजवाये कर रहा था कि मैं दस मिनट में ही खत्म हो गया. लेकिन समाप्त होने के बावजूद दिल से भरा नहीं था. दिल अभी भी यही चाह रहा था कि उसके साथ सेक्स करता जाऊं इसलिए मेरा लिन कुछ ही क्षणों में फिर चुदाई के लिए तैयार हो गया. मैंने उसी समय अपने अपने बूब्स पर रख कर उनके केंद्र में रगड़ना शुरू कर दिया. मेरे इस विधि को वह खुद भी ानजवाये कर रही थी इसलिए उसने अपने मम्मे साईडों खुद पकड़ रखे थे. फिर तीन चार मिनट बाद मैंने उसे उठने को कहा और उसे गाण्ड वाली साइड मेरी तरफ करने को कहा. वह इस काम के लिए न मानी लेकिन कहा कुछ नहीं होगा जैसे तुम सेक्स ानजवाये करना चाहती हो वैसे ही मैं भी चाहता हूँ और इससे हम दोनों को मज़ा आएगा तभी वह बोली आप मुझ पर बहुत अहसानात हैं आप न नहीं कर सकता और वह खुद डॉगी स्टाइल बनाते हुए मेरे सामने कोडी वह गया अब उसकी गांड बिल्कुल मेरे सामने मेरे लंड के निशाने पर थी.मैं समय बर्बाद किए बिना तेल लगाए बिना अपना लिन उसकी गाण्ड में घुसा चाहा. मगर उसकी गाण्ड अभी चुदी नहीं थी स लिए लिन था कि उसकी गाण्ड में घुसने ही नहीं पा रहा था. मैं अपने हाथ को अपनी लार से गीला किया और अपनी लार अपने लंड के सुपारे पर लगा दी अब फिर मैंने अपना लंड उसकी गांड पर रख दिया इस बार मेरा लिन पहले ही झटके में उसकी गाण्ड में घुस गया. मगर वह मेरे लिन का प्रवेश बर्दाश्त न कर सकी और उसने मुझे कहा कि प्लीज़ उसे निकाल लें मुझे सचमुच बर्दाश्त नहीं हो रहा. बहुत दर्द हो रहा है. मैंने लिन कोई झटका नहीं लगा क्योंकि मुझे पता था कि उसे दर्द हो रहा है और मैं लिन बाहर निकाले बिना उसे कहा कि मैं लिन बाहर निकाल लिया है. जबकि मेरा लिन अभी उसकी गाण्ड में ही था. उसने कहा नहीं मुझे आपका लिन मेरी बंड में महसूस हो रहा है. तो फिर कहा ऐसा नहीं है. फिर उसे कुछ संतोष हुआ. जब वह थोड़ा म्मेन हो गई तो मैंने अपने लिन के हल्के हल्के झटके देना शुरू कर दिया. लेकिन अबकी बार उसे दर्द कम हो रहा था और कुछ ही क्षणों में समय आया कि उसे भी मजा आ रहा था और वह मेरा लिन अपनी गाण्ड में ानजवाये कर रही थी. अभी भी मेरे दोस्त की दुकान वहीं है लेकिन नवाब साहब की विधवा वहां से घर छोड़ कर अपने भाई के घर जा चुकी है. लेकिन फिर भी मेरा दोस्त और कभी कभी होटल में मिलकर सेक्स करते हैं. आशा है आपको कहानी पसंद आई होगी. कृपया कमनटस करके उत्साहित जरूर कीजिएगा.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *