Antarvasna आह.. क्या पल था वो 1

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Antarvasna अपने व्यापार के काम से मुझे लुधियाना अक्सर जाना पड़ता है। रात में देर हो जाने के कारण मैं अपने चाचा के लड़के संजीव के घर रुक जाता हूँ। उनकी वहाँ काफ़ी बड़ी कोठी है। 2011 में जून के महीने में भी मैं लुधियाना गया। चाचा का लड़का और उसकी पत्नी दोनों एक प्राइवेट कंपनी में अच्छी पोस्ट पर हैं। रात करीब नौ बजे मैं उनके घर पहुँचा और फ्रेश होकर खाना खाकर करीब ग्यारह बजे ऊपर के कमरे में सोने के लिए चला गया। उन्होंने कोठी के ऊपर अलग से गेस्ट-रूम बनाया है और मैं वहीं सोता हूँ।
वहाँ एक अलग टू-रूम सैट भी है जो अभी कुछ दिन पहले ही एक विवाहित जोड़े को किराए पर दिया था।
मैं जैसे ही सोने लगा तो लाइट चली गई। एसी बंद होते ही काफ़ी गर्मी लगने लगी। इनवर्टर से पंखा तो चल रहा था लेकिन मुझे नींद नहीं आ रही थी। मैं कमरे से बाहर आकर खुले में टहलने लगा। तभी मैंने देखा कि पास के किरायेदार वाले कमरे से एक औरत बाहर आई। चाँद की हल्की रौशनी में मैंने देखा कि वो कोई 30 साल के करीब की महिला होगी। उसने गुलाबी नाइटी पहनी हुई थी और हाथ में मोबाइल से शायद मैसेज कर रही थी। वो मुझे देख कर एकदम से सकपका गई।
मैंने एकदम से कहा- मैं संजीव का कज़िन हूँ। लाइट चली गई तो बाहर आ गया।
‘इट्स ओके, मैं भी इसी लिए बाहर आ गई।’
इस बीच मैं उसके ज़रा करीब आ गया। मैंने गौर से देखा कि उसने नाइटी के नीचे ब्रा नहीं पहनी थी।
उसके मम्मों का साइज़ करीब 34 था और उसके निपल्स का उभार भी साफ़ नज़र आ रहा था। खुले बालों में वो बहुत हसीन लग रही थी।
मैंने बात बढ़ाते हुए कहा- आप को यहाँ रहते कितन समय हुआ, मैं तो यहाँ आता रहता हूँ, आपको कभी नहीं देखा?‘हमें यहाँ आए अभी दो हफ्ते ही हुए हैं। आज तो मेरे पति भी अमृतसर गए हैं, मुझे नींद नहीं आ रही थी, लाइट भी चली गई तो बाहर आ गई।’
‘और बच्चे?’
‘एक बेटा है, वो तो सो रहा है। मैं टाइम पास करने के लिए अपनी सहेली से मैसेज पर चैटिंग कर रही थी। आप कहाँ रहते हो?’
‘जालंधर… मेरा नाम कमल है, आपका?’
‘मैं रजनी।’
तभी लाइट आ गई।
‘ओके गुड-नाइट कमल जी..।’रजनी बोली और अपने कमरे की ओर चल दी।
मेरा लंड इतनी सेक्सी औरत को देख कर खड़ा हो चुका था।
‘गुड-नाइट रजनी जी, एक मिनट।’
‘जी.. कहिए।’
‘मुझे नींद नहीं आ रही, क्या हम मैसेज पर बात कर सकते हैं, अगर आप ठीक समझो।’
एक मिनट तो वो सोचती रही, फिर बोली- आपका सेल नंबर?
मेरा दिल बाग-बाग हो गया। मैंने तुरंत अपना नंबर बोला और अपने रूम में चला गया।
अभी बिस्तर पर लेटा ही था कि ‘हैलो’ का मैसेज आ गया।
मैंने ‘हाय’ में जवाब दिया।
रजनी ने बताया, ‘उसके पति टूर पर रहते हैं। उसने बी.एड. किया है और वो स्कूल जॉब के लिए ट्राई कर रही है, उसका बेटा चार साल का है।’
इधर-उधर की बातें करके मैंने लिख दिया कि आप बहुत खूबसूरत हो।उसका ‘थैंक्स’ का जवाब आया तो मैंने जान-बूझ कर ‘गुड-नाइट’ का मैसेज भेज दिया।
जवाब आया, ‘क्या हुआ, इतनी जल्दी नींद आ गई क्या?’
‘नहीं तो, मैंने सोचा कहीं आपको बोर ना कर रहा होऊँ?’
‘नहीं.. नहीं.. मुझे तो आपसे बात करना अच्छा लग रहा है।’
मैंने हिम्मत करके मैसेज भेजा, ‘आप आ जाओ मेरे रूम में, यहीं कुछ देर बैठ कर बातें करते हैं।’
दो मिनट तक तो कोई जवाब नहीं आया, फिर मैसेज आया, ‘ऐसे अच्छा नहीं लगता, मैसेज पर भी तो बातें हो रही हैं।’
मैंने जानबूझ कर कोई जवाब नहीं दिया।
पाँच मिनट बाद मैसेज मिला, ‘नाराज़ हो गए आप?’
‘नहीं तो, नाराज़ तो उससे होते हैं जहाँ हक हो, मेरा क्या हक आप पर?’
‘ऐसा मत कहो, मैं आ रही हूँ।’
‘ओके.. मैं आपका इन्तजार कर रहा हूँ।’
एक मिनट बाद ही दरवाज़े पर आहट हुई, मैंने झट से दरवाज़ा खोल दिया। रजनी बहुत हसीन लग रही थी। मैंने नोट किया कि वो अब वो ब्रा पहन कर आई थी। मैंने उसका स्वागत किया और ध्यान से देखा कि उसका फिगर 34-30-36 का रहा होगा। रजनी आकर बिस्तर के पास सोफे पर बैठ गई। पहले हम इधर-उधर की बातें करते रहे। हमने एक-दूजे से कॉलेज टाइम की बातें की, घर की बातें की। बातों में मैंने उसको आराम से बिस्तर पर बैठने को कहा। वो मुझसे कुछ दूर बिस्तर पर आकर बैठ गई। मैंने खुद उससे दूरी बनाए रखी। मैं सोचने लगा कि आगे बात कैसे बढ़ाऊँ।
आख़िर हिम्म्त करके मैंने कह ही दिया, ‘आपने खुद को इतना मेंटेन कैसे करके रखा है?’

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