हमारे दूर के रिश्तेदार की सेक्सी बेटी – 1

हमारे दूर के रिश्तेदार की सेक्सी बेटी – 1

मेरे परिवार में मैं मेरी आंटी अंकल और मेरी सेक्सी कज़िन हैं. वो हमारे दूर के रिश्तेदार की बेटी है. हमारे बीच कभी भी भाई बहन का रिश्ता नहीं रहा. मेरी कज़िन बहुत ही सेक्सी है और मैं उससे बचपन से ही बहुत प्यार करता था. मैं हमेशा उसे हसरत भारी निगाहून से देखता था पर कभी हिम्मत नहीं पड़ी के कुच्छ कह सकूँ. आज से 4 साल पहले मैं यहां मुंबई में जॉब लगाने की वजह से आ गया. और यहीं पर रहने लगा. कुछ दीनूं बाद जब मैं गाँव गया तो एक दिन मैं चाट पर डूप में बैठा था तो मैंने कविता ( में यंगर सिस) को आँगन में नहाते देखा और बस देखता ही रही गया. उसने कुछ भी नहीं पहना हुआ था उसके 36 के बूब बिलकुल खड़े थे ओह गोद ई गॉन मद उसकी पुस्सी पर एक भी बाल नहीं थे मेरा मान कर रहा था के अभी जाकर उसे पकड़ लंड पर नहीं कर सका. बस उसे नहाते और अपने बूब को रब करते हुए देखता रहा.

अब तो बीए उसका ही चेहरा और वो दूध जैसा जिस्म ही मेरे सामने गूम्था रहता था. बस मेरे ख्याल में एक ही बात आ रही थी के बस ऐसी ही लड़की मुझे शादी के लिए चाहिए. पर कैसे. बस उस दिन मैंने देसिडे किया की मैं एक दिन अपनी बहन से शादी करूँगा और सुहाग रात मनौँगा. अब मैं कोई भी मौका नहीं चूड़ता था उसे और उसके खूबसूरत बूब्स को डेकहने का.

एक दिन मैंने उससे कहा “कविता क्या तू मेरे साथ मुंबई चलेगी” तो उसने कहा ” क्यों नहीं पर मां और बाबू जी नहीं जाने डेंजे” तो मैंने मान ही मान सोचा के हाँ ये भी सही है और उसके रिश्ते की भी बात चल रही है तो वैसे भी नहीं जाने देंगे.

तब मैंने एक प्लान बनाया. और छुट्टियाँ खत्म होने की वजह से मुझे मुंबई भी जाना था. पर जाते वक्त मैं कविता से अकेले में मिला और उसे गले लगा कर उससे धीरे से कहा “मैं तुझे तेरी शादी से पहले मुंबई घूमने जरूर ले जाऊंगा” और उसके गाल पर एक प्यारा सा किस कर दिया. उसे तो लगा के भाया बस प्यार कर रहें हैं पर मैंने तो अपनी होने वाली बीबी को किस किया था. बस उसके बाद मेरे प्लान का पहला चरण शुरू हो गया.

मैं मुंबई आ गया. कुच्छ दिन बाद मेरे बाबूजी का फोन आया और उन्होंने बताया के कविता की शादी तय हो गयी है और तीन महीने बाद की डेट फिक्स हुई है. तब मैंने कहा ” बाबूजी क्या मैं कविता को कुछ दीनूं के लिए मुंबई ला सकता हूँ उसकी अपने पसंद से शॉपिंग भी हो जाएगी और मुंबई भी घूम लेगी. पता नहीं शादी के बाद फिर मौका मिले ना मिले.” बाबूजी ने कहा ” ठीक है ले जा” मेरे तो का ठिकाना ही नहीं रहा क्योंकि अब मैं अपने बहन के सटा कुच्छ दीनूं तक अकेला रही सकता था.

मैंने सबसे पहले एक 1भक का फ्लैट किराए पर लिया और ऑफिस से छुट्टी ले कर गाँव चला गया अपनी होने वाली बीबी को लेने ई मीन बहन को लेने. कुच्छ दीनूं बाद उसे लेकर वापस आ गया. आते वक्त बाबूजी और मां ने कहा के इसका अच्छे से खाया रखना वहां पर कोई शिकायत नहीं मिलनी चाहिए तो मैंने कहा ” आप लोग बिलकुल चिंता मत कीजिए.”

और यहाँ आ गया. हम सुबह आता बजे के करीब अपने फ्लैट पर बहुचे. मैंने कविता से कहा ” कविता अब नहा कर आराम कर लो और मैं भी ऑफिस जाकर आता हूँ फिर शाम को कहीं घूमने चलेंगे. उसने कहा ठीक है और नहाने चली गयी.

अरे आप लोगों तो बताना ही भूल गया मैंने बाथरूम में एक कमरा लगा रखा था ताकि मैं देखा सकूँ की मेरी बहन के प्राइवेट जगह को अच्छी तरह से देखा सकूँ और जान सकूँ

मैं शाम को जब ऑफिस से आया तो कविता पूरी तरह तैयार बैठी थी. टाइट सवार में गजब ढा रही थी वो उसके 36 के बूब्स बाहर आने के लिए मचल रहे थे और उसके आस के तो क्या कहने. “ओह गोद क्या लग रही हो कविता” बस मैंने ऐसे ही कह दिया और उसने एक प्यार सा स्माइल देदिया. मेरी तो घंटी ही बज गयी. मैं उसके पास गे और उसके कंधों पर हाथ रख कर कहा ” क्या बात है कविता आज तो बस गजब ही ढा रही हूँ तुम्हें देखा कर तो सभी मारे ही जाएँगे” और उसके बाल खूल दिए. वो बस शमा के रही गयी. मैंने कहा के मैं फ्रेसस होकर आता हूँ. और बाथरूम में चला गया और कॅम को देखने लगा … वाउ क्या पिक्चर्स तीन मैं पागल हुआ जा रहा था उसकी पुस्सी को देखा कर और सकसे ज्यादा उसकी पुसी पर एक छूते से तिल को देखकर उससे भी ज्यादा. उसके बाद मैं कविता के नाम की मूठ मारी और नहा कर बाहर आ गया.

“भैया आप लेट क्यों कर रहे हूँ” कविता ने कहा.

मैंने कहा “क्यों”

“अरे 6 बजाने वाले है और मैं सोच रही थी के क्यों ना एक मूवी देखा ली जाए” कविता ने कहा.

मैंने कहा “ओके”

और मैं जल्दी से तैयार हो गया और हम दोनों मेरी बाइक पर मूवी के लिए निकले. घर से कुच्छ दूर जाने पर मैंने बाइक रुक दी और कहा ” कविता क्या तुम दोनों तरफ पैर करके बैठ सकती हो मुझे बाइक चलाने में प्राब्लम हो रहही है” उसने कहा “ठीक है” “अच्छे से पकड़ की भीयातो नहीं तो गिर्जाओगी” मैंने कहा तो उसने मेरे कंधे पर हाथ रखा दिया तो मैंने कहा “अरे बाबा कमर पकड़ के बैठो ये मुंबई है गाँव नहीं है ट्रफ़िक में कट मारना पड़ता है गिर जाओगी.” तो उसने वैसा ही किया और मेरी कमर में हाथ डाल दिया अब मैं उसके दोनों बूब्स को अपनी पीठ पर महसूस कर रहा था. और मजा लेने के लिया मैं हमेशा कट मरता और साथ में ब्रेक भी तो मुझसे और चिपक जाती और मैं स्वर्ग का मजा लेने लगता. तूदी देर में हम माल पहुँच गये. और “ओम शांति ओम” की टिकट लेकर मूवी देखी.

मूवी के बाद हम एक ज्वेलेरी शॉप पर गये और कुच्छ शॉपिंग की फिर कपादून की दुकान पर गये और कुच्छ साड़ियाँ ली और ुआपस आ गये.

दूसरे दिन मेरा संडे ऑफ था तो हम सुबह तैयार हो कर घूमने चले गये. सबसे पहले गेट्वे ऑफ इंडिया गये वहां से निकले तो एक होटल में ल्यूक किया और फिर इधर उधर घूमने के बाद हम शाम को बंद स्टॅंड पहूच गये. वहां पर सभी कपल्स में ही बैठे थे और एक दूसरे में खोए हुए थे. मैंने कहा ” कविता ये है मुंबई की सबसे खूबसूरत जगह जहां पर सब बस समंदर की लहारून का मजा लेते हैं और एक दूसरे में खो जारे हैं.” और मैंने उसे कंधहो से पकड़ कर अपने उूर खीक लिया.उसने कोई आपत्ति नहीं की और कहा ” भैया’ यहां पर सब एक दूसरे के सामने ये सक करते हैं कोई कुच्छ कहता नहीं ?” मैंने कहा “अरे पागल ये प्यार है और यहां पर कोई किसी को कुच्छ नहीं कहता” “पर गाँव में तो सब…..” उसने कहा..

मैंने मजा लेते हुए कहा “क्यों तू भी वहां पर किसी के साथ मजा करती थी क्या…” उसे शर्ंते हुए कहा धत्त!! और मुझसे अलग हो गयी. और हम घर वापस आ गये…

कुच्छा दिन ऐसे ही बातें.

एक दिन मैंने उसके लिए एक शादी का लाल झोड़ा ले आया. कविता उसे देखते ही जैसे पागल ही हो गयी और मुझे अपने गले से लगा लिया और कहने लगी ये मेरे लिए है ना… तो मैंने कहा मेरी जान ये तुम्हारे लिए नहीं मेटी बीबी के लिए है. तो उसका चेहरा उतार गया. तो मैंने कहा ” क्या हुआ मेरी जान?” वो चुप रही .. तो मैंने कहा ” पूच्ोगी नहीं वो है कौन?” कौन है वो ” उसने धीरे से कहा. मैंने उसमें से चुनरी निकली और कहा उसके सर पर उधा कर कहा वो “तुम हूँ” उसका चहता लाल हो गया ुआर वो गुस्से में वहां से चली गयी और अपने आपको कमरे में बंद कर लिया. मैं बहुत डर गया के कहीं वो कुच्छ कर ना बैठे.

इसलिए मैं कमरे के धरवाजे पर गया और कहा ” कविता प्लीज़ मेरी बात सुनू मैं मज़ाक कर रहा था ” पर उसने दरवाजा नहीं ख़ूला. मैं बहुत परेशान था. तूदी देर बाद उसने दरवाजा खोला और बाहर आजाई और कहा ” आप सच में मज़ाक कर रहे थे?” और अजीब नज़ारूण से मुझे देखने लगी. मुझे कुच्छा समझ में नहीं आ रहा था. फिर भी मैंने हिम्मत लगा कर कहा (क्योंकि मैं ये मौका नहीं गवाना चाहता था) नहीं मैं मज़ाक नहीं कर रहा था” उसे बहुत ही बड़ा झटका सा लगा और उसकी आँखें भर आईं. फिर मैंने कहा ” कविता मैं जनता हूँ तुम क्या शूच रही हूँ पर मैं क्या करूँ मैं तुम्हें बचपन से चाहता हूँ और मैंने तुममे हमेशा अपनी बीबी ही देखी है. मुझे नहीं पता ये सही है या गलत पर मैं तुमसे शादी करना चाहता हूँ और सिर्फ़ यही वजह थी के मैंने हमेशा अपनी शादी के लिए बाबूजी से इनकार किया. अब ये तुम्हारे ऊपर है के तू मेरे बारे में क्या सूछती हूँ” इतना कह कर मैं वहां से चला गया.

हमने साआँ तक कोई बात नहीं की करीब 10 बजे हमने डिनर किया और सोने चले गये. कारीक 12.00 को कविता मेरे पास आई और उसने कहा ” मैं अच्छी तरह से जानती हूँ के आप मुझसे बहुत प्यार करते हूँ पर ऐसा करते ये नहीं जानती थी और आपने कभी भी मेरे साथ कुच्छा भी गलत नहीं किया आज आप मुझसे शादी करना चाहते हूँ जो की कभी भी कोई समाज हमें इस तरह स्वीकार नहीं करेगा और मेरी शादी भी तय हो चुकी है तो आप मुझसे शादी क्यों और कैसे कर सकते हो.” मैंने धीरे से कहा “बस जब तक तेरी शादी का डेट नहीं आ जाता क्या हम शादी करके नहीं रहा सकते इस घर में?” मुझे तूदा “वक्त चाहिए” उसने कहा और चली गयी.

सुबह करीब 5 बजे किसी ने मुझे छूआ. आवाज़ आई ” उठिए” ये कविता की आवाज़ थे. मैंने घड़ी की तरफ देखा और कहा ” अभी तो सिर्फ़ 5 बज रहे हैं” तो उसने कहा ” मुझे मुंबा देवी मंदिर जाना है. चलिए तैयार हो जाए” मैंने कहा ठीक है बगैर ये पूछे के “क्यों”. उठा और सीधे बाथरूम में नहाने चला गया. और जब बाहर निकाला दो देखा ‘कविता!!!!!!!‚ वाउ क्या लग रही थी वो पिक डिसिज्नेर शादी और हाफ कट बलऊस में. मैंने उसे कभी भी शादी में नहीं डेकः था. जैसे कोई पड़ी हो उसके आधे बूब्स बलऊस और हल्के शरीर के झरोखे से बाहर की उूर झाँक रहे थे और उसके खुले हुए बाल हवा से हल्के हल्के उड़ रहे थे मैं उनमें इतना खोया था के कब मेरा टॉवेल नीचे गिर गया मुझे पता ही नहीं चला और मेरा 7.5 इंच का औजार खुले में फाड़ फाड़ने लगा. ये देखा कर कविता हँसने लगी और वहां से जाते हुए कहने लगी संभलो अपने आपको. तब मुझे याद आया और मैं तावेल उठकत बाथरूम में भगा.

बस यही सोचता रहा के लड़की हंसी समझो फँसी.

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