पहाड़ों पर विदेशी चूत में डाला गरमा

हाय फ्रेंड्स, Antarvasna मेरा नाम राज है, मेरी उम्र 28 साल की है और मैं इन्दौर का रहने वाला हूँ. दोस्तों मैं अभी तक एकदम कुँवारा हूँ लेकिन मैंने सेक्स तो बहुत बार किया हुआ है. मैं इन्दौर में ही एक फेक्ट्री में सुपरवाइजर का काम करता हूँ. दोस्तों आज मैं आप सभी को कामलीला डॉट कॉम के माध्यम से अपनी एक चुदाई की कहानी बताने जा रहा हूँ और इस कहानी में मैंने एक विदेशी लड़की की चुदाई करी है. हाँ तो दोस्तों अब मैं आप सभी को बताऊँगा कि, कैसे मैंने उस विदेशी लड़की की चुदाई करी थी।

दोस्तों यह बात आज से 2 साल पहले की है और तब मैं अपनी कम्पनी से छुट्टी लेकर अपने एक दोस्त के साथ कुल्लू-मनाली घूमने के लिये गया हुआ था. दोस्तों वहाँ पर बहुत से विदेशी लोग भी आते है काफ़ी तादाद में योग और सम्भोग का असली आनन्द लेने. दोस्तों गोरी चमड़ी का अपना एक अलग ही आकर्षण होता है और जो मज़ा गोरी मेम की चुदाई में आता है वह और किसी दूसरे की चुदाई में कहाँ. उनके बारे में तो ज़रा सा सोचकर ही लंड नाग की तरह फनफनाने लगता है और फिर यह भी सोचता है कि, कब इस गोरी मेम की गुलाबी चूत के बिल में सररर से अपना लंड घुसाकर अपना ठिकाना बनाऊँ और ऊपर अपने हाथों से मोटे-मोटे और गोरे-गोरे बब्स को दबाऊँ. दोस्तों उनके बब्स पर उभरे हल्के भूरे रंग के निप्पल एक अलग ही सुख देते है और उनकी गोरी गांड भी अपने लंड के टोपे को एक विशेष निमंत्रण देती है. उनकी गांड के ऊपर हाथ फेरने से और उनकी एकदम साफ गुलाबी चूत का रस चाटने से ही हम देशी लंड वालों को किसी जन्नत के दर्शन हो जाते है।

हाँ तो दोस्तों वहाँ पर हम भी एक विदेशी गोरी मेम की चूत की गहराई नापने के लिए उतावले थे और मैंने भी एक गोरी मेम को अपने देशी लंड के रॉकेट पर सैर करवाने की सोच रखी थी. और फिर मैंने सोचा कि, क्यों ना मैं भी एकबार किसी गोरी मेम की गांड मारूं और क्यों ना उसकी गुलाबी मखमली चूत के दर्शन किया जाए और देखा जाए तुलना करके की गोरी मेम की चूत, गांड, और बड़े-बड़े बब्स क्या वाकई में देशी गोरियों से ज्यादा मीठे होते है? और सेक्स की उनकी जानकारी और मज़ा देने की ताक़त क्या देशी सेक्स करने वाली आंटियों, बीवियों और भाभियों से ज्यादा होती है? दोस्तों यही सोचकर, कुल्लो-मनाली के मार्केट में घूमते हुए मेरी नज़र एक मस्त, जवान और खूबसूरत विदेशी मेम पर पड़ी. उसने ऊपर तो एक टी-शर्ट पहनी हुई थी जो गुलाबी रंग की थी और जिसमें क़ैद उसके बड़े-बड़े बब्स हिल-हिलकर मुझे अपने पास बुला रहे थे और साथ ही उसके उन बब्स का उठाव और सेक्सी चाल पीछे पहाड़ों से बहुत मिल रहे थे. दोस्तों उस समय मेरा तो मन कर रहा था कि, इसके खड़े पहाड़ जैसे बब्स पर ही चढ़ाई कर दूँ. और दोस्तों उसकी उभरी हुई गांड भी उसकी जीन्स के अन्दर काफ़ी टाइट और फूली हुई थी. उसकी गांड बहुत मस्त और भरी हुई थी और उसकी दोनों जांघे उफ क्या कहना और फिर मैंने उसके पास जाकर कहा नमस्ते तो वह बहुत ही खुश हुई और फिर वह भी बोली नमस्ते।

दोस्तों उसका जवाब पाकर मेरा मन बहुत खुश हुआ और फिर मैंने सोचा कि, चलो जवाब तो मिला, मतलब आधा काम तो हो गया और लाइन का पहला सिग्नल तो क्लियर हुआ. और फिर उससे बात करते-करते मैंने पूछा कि (वेहर आर यू फ्रॉम?) आप कहाँ से आई हैं? तो उसने मुझको बताया कि, न्यूजीलैंड से. और फिर मैंने उससे थोड़ी देर तक इंग्लीश में बात करके उसे पहाड़ों की खूबसूरती दिखाने के लिए राज़ी किया. हक़ीकत में तो मैं उसकी सुडौल जवानी की खूबसूरती का नज़ारा लेना चाहता था. और फिर मैंने उससे पूछा कि (वाट इस योवर नेम?) आपका नाम क्या है? तो उसने मुझको कहा कि, लीज़ा. और फिर मैंने लीज़ा को अपने साथ लिया और फिर मैं सामने के एक पहाड़ पर ऊपर चढ़ने लगा तो वह भी मेरे साथ बातें करती हुई चलने लगी. और फिर मैंने उसको थोड़ा ऊपर जंगल में जाकर कहा कि “हनी, क्या तुम एक देशी सेक्स का मज़ा लेना चाहोगी? और एक देशी लंड को क्या तुम अपनी चूत की सैर करवाओगी? दोस्तों यह सब बात मैंने उसको अँग्रेज़ी में पूछी थी और मुझको तो पता था ही कि, बाहर की गोरी मेम भी हमारे काले नाग जैसे लंड को काफ़ी मस्त होकर निहारती है और बड़ी ही आतुरता के साथ उस काले देशी लंड को अपनी चूत मे घुसवाने के लिए बैताब रहती है. दोस्तों देशी लौड़ा अगर पूरा तना हुआ और खिला हुआ हो तो उसके गुलाबी टोपे और आस-पास उगी हुई काली घुँगराली लम्बी झांटें जो नज़ारा पैदा करती है वह किसी भी विदेशी गोरी मेम की चिकनी, बिना बालों वाली सपाट चूत के खुले दरवाज़े जैसा ही मजा देती है. और फिर दोस्तों चूत को चोदने की कला भी हम देशी लोगों को बहुत अच्छी तरह से आती है कि, कैसे पहले एक औरत को उसके बब्स को दबाकर गरम करना है. उसके बाद उसके बब्स के निप्पल को अपने मुहँ में किसी बच्चे की तरह लेकर खूब देर तक पीना है और साथ ही उसके दूसरे बब्स के निप्पल को अपनी चुटकी में लेकर धीरे-धीरे मसलना है ताकि वह गरम हो सके. और साथ ही हम देशी लंड वाले अपने एक हाथ को खाली रखकर नीचे से औरत की चूत के दरवाज़े पर अपने प्यार का एहसास भी करवाते जाते है।

दोस्तों ज़रा सोचिए कि, आप लेटे हुए है और आपके साथ आपके बगल में एक नंगी गोरी मेम लेटी हुई हो जो कि, बदन से एकदम खिली हुई और एकदम गोरी सफेद मलाई सी हो कि, आपको मज़ा आ जाए. और फिर आप भी अपने नंगे जिस्म पर उस गोरी मेम के हाथ का स्पर्श पाकर अपने लंड में एक तनाव सा महसूस करने लगेगें. और फिर आप आराम से उसके दोनों बब्स को बारी-बारी से दबा रहे हों. और फिर दोस्तों उसकी रजामंदी मिलते ही मैंने उसको वहीँ पर जमीन पर लिटाकर अपने एक हाथ को उसके सिर के नीचे से डालकर उसकी टी-शर्ट को ऊपर करके उसके एक बब्स को दबाया और फिर दूसरे बब्स की निप्पल को अपने मुहँ में भरकर चूसने लगा और इस बीच मैंने उसकी जीन्स भी उतार दी थी और फिर मैंने अपने खाली हाथ को उसकी चूत के ऊपर रखकर उसकी चूत को सहलाते हुए उसकी चूत को चिकना करना शुरू कर दिया था. दोस्तों मेरी दोनों उंगलियाँ उसकी चूत के गुलाबी होठों को फैलाकर रगड़ रहे थे. दोस्तों मेरे ऐसा करने से लीज़ा की चूत चिकनी हो रही थी और मैं अपने मुहँ से उसके एक बब्स के निप्पल को और दूसरे हाथ से उसके बब्स को छोड़ ही नहीं रहा था. और फिर 10 मिनट के बाद मुझको उसकी चूत को चाटने का ख़याल आया तो नीचे उसकी टाँगों के पास लेटकर मैंने आराम से उसकी गोरी मलाईदार रसभरी चूत पर अपने थूँक का लेप लगाया. और फिर मैंने मज़े से उसकी चूत को लप-लप करके चाटने लगा था और उसकी चूत की भीनी-भीनी खुश्बू मुझपर बहुत नशा चढ़ा रही थी।

दोस्तों औरत की चूत से आती उसके पैशाब की भीनी-भीनी महक हर मर्द को दीवाना कर देती है और उससे आदमी पर इतनी मदहोशी चढ़ जाती है कि, मर्द औरत की चूत की उस भीनी-भीनी खुश्बू को पाने की खातिर शादी जैसे बन्धन में भी बन्ध जाता है और यह सोचता है कि, अब तो हर रात ही चूत की वह खुश्बू उसके जीवन को महका सके और उसके लंड को हर रात चूत खिलाकर बड़ा कर सके. दोस्तों मैंने भी फिर उसकी गोरी चूत को कसकर चाटा और फिर मैंने भी उसको अपने काले लंड को चाटने के लिए आमंत्रित किया. और फिर लीज़ा ने मेरे काले लंड को बहुत आराम से पकड़ा और फिर अपनी ज़बान को निकालकर एक लम्बी साँस लेते हुए वह मेरे पूरे लंड को धीरे-धीरे अपने मुहँ निगल रही थी. दोस्तों वह मेरे लंड को अपने मुहँ में लेती जाती और मैंने भी उसके बब्स को दबाना और मसलना जारी रखा, जैसे कोई बच्चा अपने खिलोने से खेलता है. मेरा लंड अब काफ़ी कड़क हो चुका था और उसकी जीभ मेरे लंड के टोपे को जैसे ही छूती तो एक करंट सा मेरे पूरे बदन में दौड़ जाता था. दोस्तों मेरा खड़ा लंड मुझको भी बहुत अच्छा लग रहा था. और फिर मैंने उसके दोनों बब्स को पकड़ा और फिर मैं अपने लंड को उसके दोनों बड़े-बड़े और गोरे बब्स के बीच में फँसाकर आगे-पीछे हिलने लगा था।

दोस्तों यह मजेदार सेक्स कहानी आप कामलीला डॉट कॉम पर पढ़ रहे है।

दोस्तों लीज़ा भी मेरे लंड के आगे-पीछे होने और उसके बब्स के बीच में आने-जाने से काफ़ी उत्साहित थी और वह अपनी ज़बान को निकालकर मेरे लंड के टोपे को अपने मुहँ के करीब आने पर अपनी ज़बान निकालकर चाट लेती थी. दोस्तों उसके दोनों बब्स के बीच में से मेरे लंड का उसके मुहँ तक जाने का सुहाना सेक्सी सफ़र 5-7 मिनट तक जारी रहा. उसके बाद मैंने लीज़ा को ऊपर अपनी गोद में उठाया और फिर अपने लंड के मुहाने पर उसकी चूत का दबाव डाला जिससे उसकी चूत के दोनों गुलाबी होंठ एक पल में ही फैल गये थे और मेरा तना हुआ लौड़ा उसकी नरम और गरम मखमली चूत में अन्दर तक समा गया था और मैंने अपने हाथों से उसको ऊपर ही उठा रखा था ताकि मुझको उसकी चूत में लंड डालने में आसानी रहे. दोस्तों उसके हवा में ऊपर रहने से मेरा लंड नीचे से उसकी गरम चूत की सैर अच्छे से करने लगा था। छप-छप, गप-गप करके मेरा लंड पूरी मस्ती में उसकी चूत को दना-दन चोद रहा था. और लीज़ा को भी देशी लंड के झटके और गहरे धक्के बहुत भा रहे थे. और फिर जल्दी ही मैंने उसको नीचे लिटाकर उसकी दोनों जाँघों को फैला दिया था और फिर मैं खुद उसकी चूत के सामने खड़ा होकर उसकी दोनों जाँघों को नीचे से अपने हाथ में भरकर दूर करके सीधा अपने लंड को उसकी चूत में घुसा दिया था. और फिर मैंने अपने लंड को पूरी ताक़त और जोश के साथ उसकी चूत का पूरा स्वाद चखाया ताकि मेरे लंड की हर तमन्ना पूरी हो सके कि, एक विदेशी लड़की की चुदाई में कितना सुख मिलता है।

दोस्तों मैं उसको चोदने के साथ ही बार-बार लीज़ा की आँखो पर, गाल, गर्दन और उसके बब्स पर किस किए जा रहा था ताकि मेरे लंड के हर धक्के का पूरा मज़ा उसको मिल सके. दोस्तों अब मेरी चोदने की स्पीड और भी बढ़ गई थी और मैं अब अपनी मंज़िल के करीब आ गया था. मैंने लीज़ा को बताया कि, अब मेरा तो स्टेशन आने वाला है, तो लीज़ा ने झट से मेरे लंड को अपनी चूत से निकालकर अपने मुहँ से अपनी ज़बान निकालकर उसके ऊपर रगड़ना शुरू किया ताकि मेरे लंड से निकलने वाले गरमा-गरम मर्द-मक्खन को वह अपनी ज़बान पर ले सके. और फिर वैसा ही हुआ लीज़ा ने मेरा सारा मर्द-मक्खन अपने मुहँ में भर लिया और पी गई जैसे उसको कोई असली देशी अमृत मिल गया हो. और फिर हम वहाँ से वापस अपने-अपने होटलों में आ गए थे।

धन्यवाद कामलीला के प्यारे पाठकों !!