चाची सास की चूत की आस पूरी करी

हाय फ्रेंड्स, Antarvasna मैं राज हूँ और मैं अहमदाबाद से हूँ. दोस्तों आज मैं आप सभी लोगों के लिए अपने जीवन की एक और प्यारी सी सेक्सी घटना को कामलीला डॉट कॉम के माध्यम से लेकर आया हूँ. दोस्तों मैंने अब तक जितनी भी आप-बीती आप सभी लोगों को बताई है उनको आप सभी लोगों ने बहुत सराहा है और आप सभी ने उसके लिए मुझे बहुत प्यार भी दिया है, जिसका मैं बहुत-बहुत आभारी हूँ. दोस्तों मुझको तो हमेशा से ही लगता था कि, मेरे ससुराल की सारी औरतें बड़ी ही चुदक्कड़ है या फिर उनके खसमों के लौड़े जरूर छोटे होंगे. खैर चलो इस बात को यहीं छोड़ते है।

दोस्तों मेरे ससुर जी कुल चार भाई–बहन थे और मेरे ससुर जी उनमें सबसे बड़े थे, और फिर उनकी एक बहन थी और फिर दो भाई थे. दोस्तों मेरे सबसे छोटे चाचा ससुर की उम्र इतनी ज़्यादा नहीं थी और उनकी बीवी यानी मेरी चाची सास बहुत ही सेक्सी किस्म की औरत है. पहले तो दोस्तों मैंने इस बात पर इतना गौर नहीं किया था और सच पूछो तो मैंने उनको चोदने की कभी कल्पना तक भी नहीं करी थी और ना ही ऐसे विचार तक कभी दिमाग़ में आए थे, लेकिन खुद उनकी ही सेक्सी हरकतों ने मेरा ध्यान उनकी तरफ खींचा था. उनके दो बच्चे भी है. लेकिन मेरे चाचा ससुर एक दुर्घटना में चल बसे थे और उनके दोनों बच्चे दिल्ली में उनके मामा के यहाँ पर पढ़ने के लिए गये हुए थे. और इसिलिए मेरी चाची सास बिल्कुल अकेली पड़ गई थी. इसलिए मैं और मेरी बीवी कविता अक्सर उनके घर आते-जाते रहते थे। और इसी तरह आज से 2 साल पहले मैं एक दिन गर्मी के दिनों में उनके घर के करीब से निकल रहा था तो मैंने सोचा कि, क्यों ना उनसे मिलता हुआ चलूँ. और फिर जब मैं वहाँ पहुँचा तो उनके घर का दरवाजा अन्दर से बन्द नहीं था और फिर मैंने उनको बाहर से ही आवाजें भी लगाई, लेकिन वह तो उस समय बाथरूम में नहा रही थी तो पानी की आवाज़ की वजह से उन्होंने मेरी आवाज़ सुनी नहीं थी. दोस्तों उनका बाथरूम कमरे के साथ में था. और फिर मैं चुप-चाप अन्दर जाकर कुर्सी पर बैठ गया था और फिर जब वह नहाकर बाहर निकली तो वह मुझको देखकर एकदम से चौंक सी गई थी और मैं खुद भी शर्मिंदा सा होकर रह गया था. दोस्तों वह सिर्फ़ एक छोटा सा तौलिया लेकर बाथरूम से निकली थी और उनके जिस्म को देखकर मेरा लंड खड़ा हो गया था और फिर मैं जल्दी से उठकर उनके कमरे से बाहर चला आया था। दोस्तों क्या हुस्न था उनका एकदम कसा हुआ बदन, वह दूध से भी ज़्यादा सफेद और गोरी थी. लेकिन मेरा रिश्ता ही कुछ ऐसा था कि, मैं एकदम से शर्मसार हो गया था. लेकिन उन्होंने मेरी बात का बुरा नहीं माना था और फिर वह एकदम सामान्य सी होकर कमरे से बाहर आई एक गुलाबी रंग की पारदर्शी सी नाइटी पहनकर जिसके नीचे उनकी काले रंग की ब्रा और पैन्टी साफ़ दिख रही थी. दोस्तों उनके बब्स बहुत कसे हुए दिख रहे थे. और फिर मैंने उनको कहा कि, माफ़ करना चाची जी, घर के सभी दरवाजे ऐसे ही खुले हुए थे और मैंने सोचा भी नहीं था कि, आप इस तरह से निकलकर आ जाओगे मैंने आपको बहुत आवाजें भी लगाई थी।

चाची :– पानी की आवाज की वजह से नहीं मालूम पड़ा, अच्छा बोलो, कैसे आना हुआ?

मैं :- इधर से निकल रहा था तो मैंने सोचा कि, आपके यहाँ पानी पीने से गर्मी से थोड़ा आराम भी मिल जाएगा और मिलना भी हो जाएगा।

और फिर वह मेरे साथ सोफे पर बैठी थी, और फिर वह उठी और मटकती हुई किचन में गई और दो ग्लास में ठण्डा बनाकर ले आई और फिर मुझको देने के लिए जब वह झुकी तो मुझको उनके बब्स दिख गए थे. और फिर वह मुझसे कहने लगी कि, इसमें आपका कोई कसूर नहीं है दामाद जी, मुझको तो शुरू से ही आदत है कि, मैं कमरे में ही आकर कपड़े पहनती हूँ. और फिर वह मुझसे कहने लगी कि, आपको तो ए.सी. में भी पसीने आने लग गए है।

मैं :- नहीं तो.

चाची :- क्यों नहीं, देखो तो.

और फिर उस दिन, मैं उनके यहाँ कुछ देर तक बैठकर वहाँ से चला आया था, लेकिन चाची का नंगा जिस्म बार–बार मेरी आँखों के सामने घूमने लग गया था और मैं सोचने लग गया था कि, क्या मस्त औरत है मेरी छोटी सास. दोस्तों मेरी एक मौसी सास इन्दौर में रहती है और उनके लड़के की शादी थी और मुझको शादी के लिये अपने काम में से इतने दिन निकालने मुश्किल थे तो घर के सभी लोग तो शादी से कुछ दिन पहले ही जा रहे थे, लेकिन मेरी ट्रेन की टिकट शादी से एक दिन पहले की थी और फिर शादी में जाने से पहले हम एक दिन मेरी चाची सास के घर पर थे तो वहाँ पर बातों ही बातों मेरी बीवी कविता मुझसे बोली कि, इतने दिन तक आपका खाना–वाना कैसे होगा? तो मेरी चाची सास कविता से बोली कि, क्या तू मुझमें और अपनी माँ में फरक रखती है क्या?

कविता :- नहीं चाची जी, ऐसी तो कोई बात नहीं है।

चाची :- तो फिर खाने के बारे में इतना क्यों सोचती हो? दामाद जी यहीं से निकलते है तो दोपहर का खाना मेरे घर पर खा लिया करेंगे और रात का खाना पैक करके मैं घर पर ही दे आया करूँगी, बस 5-6 दिन की ही तो बात है, और तुम लोग कौन सा मुझसे दूर रहते हो।

दोस्तों उस दिन के बाद तो मेरी चाची सास बहुत ही सेक्सी कपड़े पहनने लग गई थी और उनके बोल-चाल, हाव-भाव सब उस दिन के बाद से सब बदल से गये थे. और फिर अगले दिन, रात को जब मैं घर पर बैठकर पैग ले रहा था तो वह उसी समय मेरे लिये खाना लेकर आ गई थी और मैं तब तक 2 भारी पैग ले चुका था तो मुझको थोड़ा नशा हो गया था. उन्होंने उस समय बेहद गहरे गले का सफेद रंग का जालीदार सूट पहना हुआ था जिसमें से उनकी लाल रंग की ब्रा और पैन्टी साफ़ दिख रही थी. और मैं तो बस उनको देखता ही रह गया था।

चाची :- क्या हुआ दामाद जी आप मुझको ऐसे क्यों देख रहे हो?

और फिर वह मेरे बिल्कुल बगल में बैठकर मेरी जाँघों पर अपना हाथ रखते हुए बोली कि, लगता है, शराब चढ़ने लगी है आपको?

मैं :- आपको देखकर तो मेरा नशा दुगना होने लगा है, दोस्तों नशे में सच मेरी ज़ुबान पर आ गया था।

चाची :- क्यों, ऐसा क्या हो गया, दामाद जी?

मैं :- आप मेरे साथ बैठकर खाना खाओ और आपके ड्राइवर को तो घर भेज दो. मैं आपको छोड़ आऊँगा बाद में।

और फिर जैसे ही वह बाहर अपने ड्राइवर को बोलकर लौटी तो मैंने उनको खींचकर अपनी जाँघों पर बैठा लिया और एक पैग उनके होठों से लगाया, तो वह उसको पी गई थी।

चाची :- आप हमारे घर के दामाद हो और आपकी सेवा करना हमारा फ़र्ज़ है, हमने आपको अपनी बेटी दी है और बेटी के घर में आकर ऐसे दामाद से अपनी सेवा नहीं करवाई जाती।

मैं :- अच्छा, तभी आपने मेरे खाने-वाने की ज़िम्मेदारी उठाई है।

चाची :- बिल्कुल, चलो अब अगला पैग मैं बनाती हूँ और फिर वह ग्लास लेकर मेरी गोद से उठ गई थी।

दोस्तों वह जब उठी तो उनकी सलवार का नाडा मैंने पकड़ रखा था और फिर मैं सोच ही रहा था कि, इसको अपनी जाँघों पर तो बैठा लिया है, अब इसकी चिकनी जाँघों को करीब से कैसे देखूँ? और फिर वह एकदम झटके से मेरी गोद में से उठी तो उनकी सलवार के नाडे का एक सिरा जो मेरे हाथ में था उसकी गाँठ खुल गई थी और फिर उनकी सलवार नीचे गिर गई थी।

चाची :- हाय! यह क्या कर दिया आपने? आप तो बहुत शरारती हो।

मैं :- तो फिर सासू जी, अब आप ऐसे ही चलकर जाओ, मुझको अच्छा लगेगा।

चाची :- हाँ मेरे राजा, मज़ा लेना है तो पूरा लेना चाहिए।

और फिर उसने अपना कुर्ता भी उतार दिया था और दोस्तों लाल रंग की ब्रा और पैन्टी में उसका हुस्न कहर ढा रहा था. दोस्तों इस उम्र में भी कसम से बहुत कसा हुआ बदन था उनका. दामाद जी, आग तो आपने उसी दिन लगा दी थी. जब मैं नहाकर बाहर निकली थी. और फिर दो पैग बनाकर लेकर वह मेरे करीब आई. और फिर मैं खड़ा हुआ और आगे बढ़कर मैंने उसको अपनी बाहों में भर लिया था. और फिर मैं उसकी गर्दन, होंठ और गले को पागलों की तरह चूमने लग गया था. और साथ ही मैंने अपने दोनों हाथों से उसके बब्स को भी पकड़ रखा था. और फिर मैं उनके बब्स को दबाते हुए उनके होठों को भी चूसने लग गया था।

चाची :- हाययय… दामाद जी, आप कितने रोमांटिक किस्म के मर्द है. हमारी कविता तो सबसे भाग्यशाली है, जो उसको ऐसा मर्द मिला है।

और फिर मैंने अपने हाथ उनकी पीठ के पीछे ले जाकर उनकी पीठ को सहलाते हुए उनकी ब्रा का हुक खोल दिया था, और फिर उसने अपनी ब्रा भी उतार फैंकी थी. और फिर तो मैं भी शरम को एक तरफ फैंककर उनके बब्स पर टूट पड़ा था और मैं उनको चाटने लग गया था. और फिर उसने अचानक से मेरे लंड को पकड़कर मुझसे कहा कि, सब कुछ मेरा ही देखोगे क्या? यह खड़ा है या अभी तक सोया हुआ ही है?

मैं :- अभी तो आधा खड़ा है, चाची जी।

चाची :- यह कितना बड़ा है?

और फिर मैंने उसको अपनी बाहों में उठाया और फिर अपने कमरे में ले जाकर बिस्तर पर पटक दिया और फिर मैंने कमरे का दरवाजा बन्द करके उसको दबोच लिया था. और फिर उसने भी जल्दी से मेरा लोवर उतारा और फिर झट से मेरा अंडरवियर भी. दोस्तों वह मेरे लंड को देकर एकदम से पागल सी हो गई थी. और फिर वह मुझसे कहने लगी कि, कितना बड़ा है आपका यह तो है आपने तो कविता की चूत का तो भोसड़ा बना दिया होगा अब तक। और फिर वह जल्दी से झुकी और फिर अपना पूरा मुहँ खोल–खोलकर वह उसको चूसने लगी।

मैं :- वाह, क्या बात है चाची जी? बहुत आग लगी है. क्या जाँघों के बीच में?

चाची :- अब तो और आग लग गई है, इसको देखकर।

मैं :- इसको भी मेरी तरह अपना ही समझो. मैं पूरी रात आपको प्यार के झूले झुलाता रहूँगा रानी।

और फिर वह फिर से पैग बनाने गई थी और इसबार वह बिल्कुल नंगी थी. उसके हिलते हुए कुल्हे देखकर मेरा लंड भी हिलने लग गया था और झटके भी खाने लग गया था. और फिर वापस आते ही, मैंने उसको दबोच लिया था।

चाची :– लो राजा, अब घुसा दो इसमें।

और फिर मैंने उसकी दोनों टांगे उठाई और झटके लगाते हुए अपना पूरा लंड उसकी चूत में उतार दिया था दोस्तों काफ़ी कसी हुई चूत थी उनकी।

चाची :– दामाद जी, पूरा घुसा डालो।

और फिर मैंने अपना पूरा लंड उतार दिया था. और फिर मैं उसको चोदने लगा तो वह भी अपनी गांड को उठा-उठाकर चुदने लगी थी और साथ ही 10 मिनट की चुदाई के बाद वह मुझसे बोल रही थी कि, तेज और तेज करो अब मैं झड़ने वाली हूँ. और फिर आहहह… इस्सस… करके उसने मेरा लंड अपनी चूत में एकदम से जकड़ लिया था लेकिन मैं कैसे रुकता क्योंकि मैं तो अभी तक झड़ा भी नहीं था।

चाची :– हाययय… दामाद जी, थोड़ा रुककर कर लेना. मेरी चूत में दर्द हो रहा है. और उतनी देर तक मैं तुम्हारे लंड को चूस लेती हूँ।

और फिर वह मेरा लौड़ा चूसने लगी और फिर मैंने उसकी गांड में ऊँगली घुसा दी थी।

चाची :– लगता है इस पर भी नीयत खराब है दामाद जी आपकी?

मैं :- हाँ.

और फिर मैंने उसकी गांड पर थूँक लगाकर उसको गीला किया और फिर मैं अपना लंड उसमें उतारने लगा तो वह जोर-जोर से चिल्लाने लगी और फिर वह मुझसे बोली कि, मैं तुम्हारे हाथ जोड़ती हूँ तुमको जो कुछ भी करना है मेरी चूत में कर लो, नहीं तो इससे तो मैं मर ही जाऊँगी. लेकिन फिर मैंने अपना पूरा लंड उसकी गांड में ही घुसा डाला, तो जल्दी ही वह भी मेरा साथ देने लग गई थी। पूरी रात मैंने मेरी चाची सास को चोदा और उसके बाद पूरी 6 रात तक वह मेरे साथ ही सोई और अब तो वह मेरे लंड की गुलाम बन गई है।

धन्यवाद कामलीला के प्यारे पाठकों !!