दीपावली पर मेरे लंड को मिला चूत का तोहफा

हाय फ्रेंड्स, Antarvasna मेरा नाम निखिल है, मेरी उम्र 27 साल की है और मैं पटना के पास एक कस्बे का रहने वाला हूँ। दोस्तों आज मैं आप सभी कामलीला डॉट कॉम के चाहने वालों की सेवा में अपनी एक सच्ची घटना को लेकर हाजिर हुआ हूँ जिसमें मैंने अपनी दीदी के साथ मिलकर अपनी चुदाई की भूख को शान्त किया था और पहली बार यह काम करने के बाद हम दोनों को ही बड़ा मज़ा भी आया था और फिर उसके बाद तो हमारा यह अब हर दिन का ही काम हो गया है।

दोस्तों यह बात आज से 4 साल पहले की है और तब जैसे ही मैंने 12 वीं पास करी थी और मैं अपनी आगे की पढ़ाई के लिया पटना आ गया था, मेरा यहाँ पर कोई भी जान पहचान वाला नहीं था बस एक दूर का रिश्तेदार था तो मैं उनके घर पर रहने लगा था और फिर कुछ ही दिनों में मेरा कॉलेज में दाखिला भी हो गया था और फिर मैं कॉलेज के हॉस्टल में शिफ्ट हो गया था। और फिर मैं हर हफ्ते रविवार की छुट्टी पर अपने रिश्तेदार के घर जाता था दोस्तों उनको कोई औलाद नहीं थी, तो वह मुझे काफ़ी मानते थे। लेकिन एक बार मैं जब उनके घर गया तो मैंने वहाँ पर देखा कि, उनके यहाँ पर 3 लड़कियाँ आई हुई है और फिर मुझको पता चला कि, वह भी वहाँ पर पढ़ने के लिए ही आई है। वैसे तो वह दिखने में ठीक ठाक थी, लेकिन उनके बब्स काफ़ी बड़े थे इसलिए मैं उनको दीदी बोलता था और मेरे मन में उनके लिये ऐसा कुछ भी नहीं था। और फिर हम लोग हर हफ्ते मिलने लगे और हम काफ़ी अच्छे दोस्त बन गए थे और हमने अपने फ़ोन नम्बर भी एक दूसरे को दे दिये थे। और फिर हम लोग फ़ोन पर बातें करने लग गए थे और वह मुझे अपनी हर बात बताती थी। माफ़ करना दोस्तों मैं तो उनके नाम तो बताना ही भूल गया था, उनके नाम शिखा, रानी और दीपा था। लेकिन उनमें से दीपा दीदी से मेरी काफ़ी अच्छी पटने लग गई थी और फिर हम रोज़ बात करते थे और रोज़ फिर वह मुझे बताती थी कि, आज किसका बॉयफ्रेंड आया है और कौन पीकर आया है और कौन रात में उनके पास रुकता है वगेरा-वगेरा। और फिर एक दिन मैंने हिम्मत करके उनसे पूछ ही लिया कि, आपका मन नहीं करता बॉयफ्रेंड बनाने का? तो फिर वह मुझसे बोली कि, करता तो है लेकिन कौन बनेगा मेरा बॉयफ्रेंड? तो फिर मैंने उनको मजाक में ही कहा कि, अरे! आपको तो काफ़ी लोग मिल जाएगे और अगर आप बोलो तो मैं ही बन जाता हूँ। तो फिर वह हँसने लगी और बोली कि, हाँ तू ही मेरा बॉयफ्रेंड बनेगा, और फिर तो मैं भी हँसने लगा और फिर इस तरह से हम लोग काफ़ी घुल-मिल गये थे और फिर तो हम एक-दूसरे को कभी कभी किस भी और कभी प्यार और दोस्ती के मैसेज भेज देते थे। और फिर जैसे-जैसे दिन बीतते गये और दीपावली भी नजदीक आ गई थी और हम लोग मेरे रिश्तेदार के घर पर फिर मिले थे लेकिन मेरे रिश्तेदार अपने दीपावली के काम में काफ़ी व्यस्त थे, क्योंकि उनको बहुत सारी तैयारियाँ करनी थी और फिर हम भी उनकी मदद करने लगे उनका घर साफ करने में, तो फिर साफ सफाई में मैं कभी कभी दीपा दीदी के बब्स देख लेता था जब वह नीचे झुकती तो जानबूझकर के मैं उनको छू भी लेता था और उनकी गांड को कपड़ों के ऊपर से अपने लंड से भी छू लेता था।

लेकिन फिर वह मुझसे कुछ भी नहीं बोली तो मुझे भी उसकी तरफ से हरी झण्डी मिलना शुरु हो गई थी और मेरी हिम्मत और बढ़ने लग गई थी और फिर दीपावली की रात आ गई और फिर पूजा होने के बाद हम लोग पटाखे फोड़ने लगे और फिर कुछ देर के बाद मैंने दीपा को बोला कि, चलो चलते है छत पर और फिर वहाँ से सारे शहर का रोशनी से भरा नजारा देखते है। और फिर हम लोग छत पर आ गए और फिर हम लोग शहर की रोशनी और आसमान में उड़ने वाले रोकेट देखने लगे लेकिन ठण्ड भी काफ़ी थी तो मुझे ठण्ड भी लगने लग गई थी और मैंने सिर्फ़ एक टी शर्ट ही पहनी हुई थी और दीपा दीदी के पास एक शॉल थी तो उन्होंने मुझको बोला कि, आ जाओ मेरे पास शॉल में। और फिर मैं और वह एक ही शॉल में आ गए थे और फिर मुझे काफ़ी अच्छा लगने लगा क्योंकि उनके शॉल में काफ़ी गर्मी थी और मेरा हाथ ही बार बार उनके बब्स को लग रहा था, जिससे मेरा लंड भी खड़ा हो गया था। और फिर मैं धीरे धीरे अपना हाथ आगे बढाने लगा और मेरा लंड भी उनको छूने लगा, लेकिन वह फिर भी मुझसे कुछ भी नहीं बोली तो मुझे उनकी तरफ से पूरी तरह से हरी झण्डी मिल गई थी और फिर मैं धीरे धीरे आगे बढ़ने लगा और फिर मैं उनके बब्स को दबाने लगा तो उनकी साँसें तेज़ होने लगी तो मैं उनके बब्स को धीरे धीरे से सहलाने लगा तो उनकी आँखें भी बन्द हो गई थी और साँसें भी तेज़ हो गई थी तो मैं समझ गया था कि, उनको भी मज़ा आ रहा है। और फिर अब मैं उनके बब्स को थोड़ा तेज तेज दबाने लगा तो फिर उनके मुहँ से आहहह… इस्सस… की मादक सी आवाजें आने लग गई थी और फिर मैंने उनको किस किया लेकिन उनकी तरफ से कुछ प्रतिक्रिया नहीं हुई तो मैंने उनके चेहरे को पकड़ा और मैं फिर से उनको किस करने लगा तो फिर तो वह भी धीरे धीरे मेरा साथ देने लग गई थी। दोस्तों यह बात तो आप भी जानते हो की दिवाली की रात को छत पर कौन जाता है सब नीचे ही रहकर त्यौहार का मज़ा लेते है इसलिये मैं भी बेफिकर होकर उनके कपड़ों के अन्दर अपना हाथ डालकर उनके बब्स को भी दबाने लगा तो वह काफ़ी गरम हो गई थी और आहहह… आहहह… ज़ोर से ज़ोर से बोलने लग गई थी। और फिर मैं अपने एक हाथ से उनकी चूत को रगड़ने लगा तो वह और भी ज़ोर जोर से सिसकारियाँ भरने लग गई थी, आहहह… उफ्फ्फ… और फिर उसने भी मेरे हाथ को पकड़ लिया और फिर वह भी मेरे साथ मेरे हाथ को अपनी चूत पर रगड़ने लगी और फिर धीरे-धीरे मैंने अपना हाथ उसकी चूत के अन्दर डाल दिया था और फिर मैं उसकी चूत में ऊँगली करने लग गया था उसकी चूत पहले से ही काफ़ी गीली हो चुकी थी जिससे मेरी ऊँगली काफ़ी आसानी से अन्दर बाहर हो रही थी और वह आहहह… इस्सस… कर रही थी और उस समय उसकी आँखें बन्द थी और वह अपने एक हाथ से मेरे हाथ को पकड़कर अपनी चूत में डाल रही थी और भी ज्यादा अन्दर तक डालने की कोशिश कर रही थी। दोस्तों उस समय मेरे लंड से भी हल्का हल्का पानी निकल रहा था और वह काफ़ी कड़क हो गया था. फिर मैंने उनका हाथ अपने लंड पर रख दिया तो वह भी धीरे-धीरे मेरे लंड को आगे पीछे करने लग गई थी हम दोनों हमारी कामलीला में पूरी तरह डूब चुके थे और फिर मैंने अपना लंड अपने कपड़ों से बाहर निकाल लिया था और दीपा दीदी मेरे लंड को धीरे धीरे आगे पीछे कर रही थी. उस समय मुझको काफ़ी अच्छा लग रहा था और फिर कुछ ही देर में मेरा माल निकल गया था और फिर मैं शान्त हो गया था।

लेकिन वह अभी तक शान्त नहीं हुई थी क्योंकि उनकी चूत की गर्मी अभी भी बाकी थी तो फिर मैं फिर से उसको किस करने लगा और वह फिर से मेरे लंड को सहलाने लगी। और फिर कुछ ही देर में मेरा लंड फिर से खड़ा हो गया था. और फिर मैंने दीदी को बोला कि, अब आप अपनी लैगी और पैन्टी को नीचे कर दो। और फिर उन्होंने अपनी लैगी और पैन्टी को नीचे किया और फिर मैंने उनकी चूत देखी जो एकदम गुलाबी थी और काफ़ी गीली भी थी और फिर मैंने उनको बोला कि, अब आप आगे की तरफ थोड़ा झुक जाओ और फिर वह झट से आगे की तरफ झुक गई थी. और फिर मैंने अपना लंड उनकी चूत पर रखा और फिर मैं अपने लंड को उनकी चूत के अन्दर डालने की कोशिश करने लगा लेकिन मेरा लंड उनकी चूत में नहीं गया था. तो फिर उन्होंने मेरा लंड पकड़ा और फिर उसको अपनी चूत के छेद पर सेट किया और फिर मैंने धीरे से धक्का लगाया और मेरे लंड का टोपा उनकी चूत में थोड़ा सा अन्दर चला गया था और वह आहहह… करके चिल्लाई और फिर मैंने थोड़ा सा रुककर धीरे से एक और झटका मारा तो मेरा आधा लंड उनकी चूत में चला गया था और वह आहहह… करके चिल्लाने लग गई थी. दोस्तों उस समय मुझको तो लग रहा था कि, जैसे मुझको तो कोई जन्नत मिल गई हो और मेरा लंड धीरे-धीरे उनकी चूत में काफी अन्दर तक जा रहा था. और फिर मैंने धीरेधीरे झटके मारना शुरु किया और फिर मैं उनको चोदने लगा और वह ऊहहह… आहहह… इस्सस… करने लग गई थी। और फिर मैं धीरे धीरे अपने झटकों को तेज़ करने लगा तो वह और भी जोर जोर से चिल्लाने लग गई थी इसस्स… आहहह… मुझे काफ़ी मज़ा आ रहा है। दोस्तों यह कहानी आप कामलीला डॉट कॉम पर पढ़ रहे है।

और फिर मैं भी जोश में आकर उनको और भी ज़ोर ज़ोर से चोदने लगा और मेरे झटकों से छप छप की आवाजें आने लग गई थी। और फिर 20-25 मिनट के बाद मुझे लगा कि, मेरा अब निकलने वाला है, तो मैंने उनको पूछा कि, दीदी मेरा आने वाला है? तो फिर उन्होंने मुझको कहा कि, अन्दर ही डाल दो। और फिर 5-7 हल्के हल्के झटकों के बाद मैंने मेरा माल उनकी चूत में ही निकाल दिया था और वह भी मेरे साथ ही झड़ गई थी। और फिर मुझको उस समय ऐसा लग रहा था कि, जैसे उसकी चूत में कोई गरम चीज़ डाल दी हो। और फिर कुछ देर के बाद हमने अपने कपड़े ठीक किए और उन्होंने छत पर ही बने बाथरूम में जाकर अपनी चूत को साफ़ किया और फिर हम दोनों नीचे चले आए और फिर नीचे सबके पूछने पर हमने कह दिया कि, हम तो छत पर शहर की रौशनी देख रहे थे।

उसके बाद तो हमने पूरे 2 साल तक खूब जमकर कई बार सेक्स किया था और फिर उसकी पढ़ाई पूरी हो गई थी तो वह अपने घर चली गई थी।

धन्यवाद कामलीला के प्यारे पाठकों !!