एक चूत को पाने के लिये दूसरी चूत को भी चोदना पड़ा

हाय फ्रेंड्स, मेरा Antarvasna नाम रोहित है, मेरी उम्र 25 साल की है और मैं जमशेदपुर के एक गाँव का रहने वाला हूँ। दोस्तों मुझे भी आप सभी की तरह कामलीला डॉट कॉम पर सेक्सी कहानियाँ पढ़ने में बहुत मज़ा आता है। मैंने अब तक ना जाने कितनी कहानियों के मज़े लिए और आज मैं अपनी भी एक सच्ची चुदाई की घटना आप सभी को बताने आया हूँ।

दोस्तों यह बात उन दिनों की है, जब मैं 12वीं कक्षा में पढ़ता था गाँव में 12वीं तक का स्कूल ना होने के वजह से मैं पास ही के शहर में पढ़ने जाता था। जहाँ शहर की लडकियाँ भी पढ़ने आती थी और उनमें से एक लड़की थी जिसका नाम दिव्या था। हमारी क्लास के सारे लड़के उस पर मरते थे। जिनमें से मैं भी एक था, दिव्या काफ़ी सेक्सी लड़की थी उसके बब्स तने हुए और गांड एकदम मस्त और इतनी लचीली थी कि, अगर कोई उसकी गांड के बीच की दीवारों पर अपना लंड टिकाए तो फिसलकर वह उसकी गांड फाड़ दे। जब वह चलती तो उसकी गांड देखकर मेरा लंड अपने आपे से बाहर होने लगता था। क्लास में एक लड़की और थी जिसका नाम मीनाक्षी था, उसका दिल मुझ पर आया था पर मैं उस पर ध्यान नहीं देता था, क्योंकि वह दिखने में तो अच्छी थी लेकिन वह थोड़ी साँवले रंग की थी लेकिन वह भी थी तो बड़ी जबरदस्त लेकिन जब मस्त गोरी चूत पर दिल आ जाए, तो कोई दूसरी चूत क्यों देखे भला? मीनाक्षी मुझको एक बार प्रपोज़ भी कर चुकी थी, पर मैंने उसे मना कर दिया था। एक दिन शिक्षक दिवस पर मीनाक्षी ने मुझसे फिर अपने प्यार का इज़हार किया तो मैंने उसे तब भी मना कर दिया था। और फिर उस रात को जब मैं सोया तो मेरे दिमाग़ में एक बात आई कि, क्यों ना मीनाक्षी के ज़रिए ही दिव्या तक पहुँचा जाए? और फिर मैंने ऐसा ही किया। और फिर दूसरे दिन स्कूल जाकर मैंने मीनाक्षी से कहा कि, अगर मैं तुमसे प्यार करूँगा तो क्या तुम मेरा एक काम करोगी? तो फिर वह मुझसे बोली कि, तुम जो बोलोगे मैं वह करूँगी। तो फिर मैंने उसको कहा कि, ठीक है तुम दिव्या को मुझसे पटवा दो बदले में तुम जो चाहोगी, मैं वह करूँगा। और फिर वह तैयार हो गई थी, शायद उसको भी मुझसे प्यार नहीं था, बस वह तो मुझसे अपनी चूत की खुजली को मिटवाना चाहती थी। और फिर मैंने उसे खुश करने के लिए उसकी वहीँ पर चुम्मी ले ली थी और उसके बब्स भी दबाने शुरू कर दिये थे। वह बोली अभी हम स्कूल में है आगे का काम फिर कभी करेंगे। तो फिर मैंने उसको कहा कि, ठीक है, पर तुम्हे मेरा काम आज ही करना पड़ेगा।

और फिर मैंने उसको दिव्या के लिए एक लव-लेटर दिया और फिर मैं वहाँ से चला आया और फिर मैं सोच रहा था कि, कहीं दिव्या मना ना कर दे। और फिर दूसरे दिन हम फिर मिले तो मैंने उससे पूछा कि, क्या हुआ? तो मीनाक्षी मुझसे बोली कि, रोहित, तेरे लिए तो मैं पूरी दुनिया को पटवा सकती हूँ, तो दिव्या क्या चीज़ है। और फिर यह सुनते ही मेरा लंड खड़ा हो गया और मैंने मीनाक्षी को ज़ोर से पकड़कर उसके दोनों बब्स को दबाना शुरू कर दिया और फिर मैं उसकी चूत पर भी हाथ फेरता रहा और फिर इतने में घंटी बज गई थी। और फिर वह मुझसे बोली कि, शाम को मेरे घर आ जाना मेरे घर में कोई नहीं है। और फिर हम अपने अपने घर चले गये थे और फिर शाम को मैं मीनाक्षी के घर पहुँच गया था। और फिर मैंने देखा, तो वहाँ पर दिव्या भी खड़ी थी और फिर मैं उसके पास गया और मैंने उससे पूछा कि, दिव्या क्या तुमको मेरा लेटर मिला? तो वह मुझसे कहने लगी कि, पागल तुमको पहले ही कह देना चाहिए था ना अब तक तुमने मुझसे कहा ही नहीं था। और फिर यह सुनते ही मैंने उसको ज़ोर से पागलों की तरह गले लगाकर चूमना शुरू कर दिया था. और फिर इतने में मीनाक्षी वहाँ पर आ गई थी और फिर वह मुझसे बोली कि, कमरे में चलो। लेकिन उस समय मुझे कुछ समझ में नहीं आया कि, आखिर यह चक्कर क्या है? और फिर मीनाक्षी ने अन्दर जाकर दरवाज़े की कुण्डी लगा दी और फिर वह मुझसे बोली कि, रोहित जो तुम्हारे पास है, वह हमें चाहिए और जो हमारे पास है वह तुम्हे चाहिए। और फिर मैंने सोचा कि, दिव्या के सामने मेरी पॉल खुल गई है, लेकिन दिव्या भी हँस रही थी और फिर मैं सबकुछ समझ गया था कि, इन दोनों ने पहले से ही आपस में बातें कर ली है और आग दोनों तरफ बराबर लगी हुई है। तो फिर मैंने उनको जलाते हुए कहा कि, अच्छा, तो अब मैं चलता हूँ। तो फिर दिव्या मुझसे बोली कि, मुझे यहाँ बुलाकर अब तुम कहाँ जा रहे हो?

और अब मैं भी पीछे नहीं हटा और मैंने उसको बोला कि, ठीक है तो आ जाओ बिस्तर पर और फिर वह आकर मुझसे लिपट गई, और एक बार फिर चूमा चाटी का सिलसिला शुरू हो गया. इतने में हमें देखकर मीनाक्षी भी गरम हो गई, तो मैंने उसे भी बुला लिया था आख़िर उसी की वजह से तो यह सब हो रहा था। और फिर वह भी आकर मुझे सहलाने लगी. दोस्तों जिस चूत के लिए मैं इतना परेशान था, आज वह और उसके साथ एक और चूत मुझको मिल रही थी। पहले तो मैंने दिव्या से कहा कि, अपनी जीन्स उतारो और फिर मैं भी अपने कपड़े उतारने लगा, और मीनाक्षी भी अपने कपड़े उतार रही थी। और फिर उन दोनों को मैंने पलंग पर लेटा दिया था दोस्तों उस समय वह दोनों प्यासी लौंडिया मेरे सामने केवल अपनी पैन्टी में ही थी और उनका फिगर एकदम जबरदस्त लग रहा था। दोस्तों मैं सोच रहा था की कहां से शुरु करू और फिर मैंने अपने दोनों हाथों से उन दोनों की चूतों को सहलाना शुरू कर दिया था. और फिर मैं दोनों के बब्स को भी मसलने लग गया था। दोस्तों मीनाक्षी के बब्स दिव्या के बब्स के मुकाबले काफ़ी बड़े थे। और फिर मैंने उन दोनों की पैन्टी को निकाल दिया था दोस्तों दिव्या की चूत तो मानों किसी चाँद का टुकड़ा थी और मीनाक्षी की चूत थोड़ी काली सी थी। और फिर मीनाक्षी खड़ी होकर बिस्तर से नीचे आई और फिर वह मेरा लंड अपने मुहँ में लेने लगी और इधर मैं दिव्या के बब्स को चाट रहा था और फिर मुझसे रहा नहीं गया और फिर मैंने उनको बेड के साइड में बैठाकर अपने दोनों हाथों से उन दोनों की जांघों को पूरा फैलाकर उनकी चूत के होठों पर अपने मुहँ को लगाकर उनकी चूत का बारी बारी से रस पीने लगा। मैं उनको किसी रसीले आम की तरह चूस रहा था, क्या मस्त अमृत की धार बह रही थी उनकी चूत से जिसकी वजह से मुझे बड़ा मजा आ रहा था। दोस्तों यह कहानी आप कामलीला डॉट कॉम पर पढ़ रहे है।

और फिर कुछ देर के बाद वह दोनों भी मेरा पूरा पूरा साथ देने लग गई थी। और फिर वह दोनों मुझसे बोली कि, अब देर मत करो, जल्दी से अन्दर डाल दो अब हमसे रुका नहीं जाता। बहुत खुजली हो रही है हमारी चूतों में प्लीज जल्दी से अपना लंड डालकर इन दोनों प्यासी चूतों को शांत करो ना जान। उसके बाद मैं उनके ऊपर चढ़ गया और मैंने उन दोनों की चूत में बारी बारी से अदल बदल करके अपना मोटा लंड घुसाया। और फिर दिव्या की चूत में जोर का धक्का देते हुए अन्दर डाल दिया और फिर वह आहहह… आईई… ऊहहह… आहहह… करने लगी। और फिर मेरे तीन जोरदार धक्को में मेरा लंड पूरा उसकी चूत के अन्दर चला गया था। दिव्या को थोड़ा दर्द तो होने लगा लेकिन चुदाई के सुख के आगे वह कुछ भी नहीं था और फिर मैं तेज तेज धक्के लगाने लगा और उसके बाद करीब 5-7 मिनट तक उसको वैसे ही धक्के देकर मैंने चोदा तो उसकी चूत का रस निकल गया था और वह शांत हो गई थी। फिर मैंने मीनाक्षी की चूत में अपना लंड सेट करके थोड़ा सा अन्दर किया तो मेरा लंड अभी थोड़ा सा ही अन्दर गया था कि, वह झटपटाने लगी और साथ ही वह मुझसे बोली कि, बाहर निकालो इसे, मुझे बहुत दर्द हो रहा है। तो फिर मैं वहीं रुक गया और फिर थोड़ी देर के बाद मैंने फिर से धक्का लगाया, तो वह धीरे से चिल्लाई उईईई… माँ, आआ… यह तो बहुत दर्द कर रहा है। अब मैं उसके बब्स को दबाने लगा था और उसके गालों को भी चूमने लग गया था। और फिर मैंने अपना लंड थोड़ा सा बाहर करके एकदम से फिर से ज़ोर लगाया, तब वह मुझसे बोली कि, रोहित प्लीज इसे बाहर निकालो, मुझे बहुत दर्द हो रहा है। और फिर मैं ऐसे ही लेटे लेटे उसे प्यार करने लगा था। अब उसकी आँखों में से आँसू आने लग गए थे। शायद यह उन दोनों का ही पहली बार था इसीलिए। और फिर मैंने थोड़ा सा अपना लंड बाहर निकाला और फिर से मैं धीरे धीरे अन्दर बाहर करने लगा था। अब वह तड़प रही थी और फिर मैंने अपने लंड को और ज़्यादा अन्दर कर दिया और उसके जवाब का इन्तजार करने लगा। और फिर मुझे लगा कि, अब वह पहले से अच्छा महसूस कर रही है तो फिर मैं अपनी कमर को जल्दी जल्दी आगे पीछे करने लगा। उसकी चूत बहुत टाईट थी, जिससे मुझको बहुत मज़ा आ रहा था। अब उसे भी बहुत मज़ा आ रहा था। अब वह मेरा पूरा साथ दे रही थी, अब वह भी अपनी कमर को हिलाने लग गई थी। और मेरा लंड उसकी चूत में फका-फक जा रहा था और दिव्या भी अपने बब्स को मीनाक्षी के मुहँ में डालकर उसको रसपान कर रही थी और मैं भी दिव्या की गांड में ऊँगली कर रहा था उसकी गांड काफ़ी टाइट थी लेकिन सेक्सी भी बहुत थी मन तो बहुत कर रहा था दिव्या की गांड मारने को लेकिन समय बहुत कम था इसलिए मैं मन मारकर रह गया। और फिर थोड़ी देर के बाद मीनाक्षी का भी शरीर अकड़ गया और फिर वह खाली हो गई थी। और फिर जब मेरा माल निकला तो उन दोनों सहेलियों ने अपना मुहँ खोल के मेरा सारा रस पी लिया था। उन दोनों सहेलियों को चोदने का मुझे भी खूब मज़ा आया। उसके बाद भी जब कभी भी मुझको मौका मिला तो, मैंने उन दोनों को खूब तबीयत से चोदा था और उनकी गोरी और काली गांड भी मैंने खूब जमकर मारी। दोस्तों मुझको इतना मज़ा आया था उनको चोदने में कि, क्या बताऊँ मैं तो दिनभर और रातभर उन दोनों की चुदाई ही करता रहूँ लेकिन ऐसा हो नहीं सकता था।

धन्यवाद कामलीला के प्यारे पाठकों !!