साली ने आग लगाई 5

एक मजबूत किस्म का इंसान. रंग सांवला लेकिन कद कती कसराती. वो भी अपने सामने खड़ी समीरा को देखता रह गया. अफ क्या नशीला बदन है. एक मिनी नाइटी पहने हुए तो कयामत ढा रही थी. च्चातियाँ नाइटी मे समा नही रही थी. आधे मुम्मे बाहर च्चालक रहे थे. गहरी साँस लेते हुए बोला, “रवि साहेब ने बुलाया है. क्या कोई नाल खराब है.”

“हन.. हन. बाथरूम का शवर और नाल दोनो खराब है. पानी नही आ रहा है.”

सुरेश, यही नाम था प्लमबर का, सीधे बाथरूम मे चला गया. बात्ट्च्ब का शवर और नाल चालू कर के देखा लेकिन पानी नही आ रहा था. तो उसने शवर को निकाल दिया और फिर भतरूम के अंदर बनी हुई टंकी जो सीलिंग से लगी हुई थी से नाल को चेक करने लगा.

“लगता है की टंकी से पानी नही आ रहा है. उपर चेक करना पड़ेगा. कोई टेबल है क्या?”

समीरा ने एक मिड्ल साइज़ की टेबल ला कर दी. वो उस पर चढ़ कर टंकी चेक करने लगा और बोला, “पानी तो पूरा भरा पड़ा है. पीपे और फिटिंग चेक करना पड़ेगा.”

यह कह कर अपनी पेंट और शर्ट निकालने लगा. एक बनियान और स्विम्मिंग कॉस्ट्यूम जैसा अंडरवियर पहने हुया टेबल पर चढ़ गया. समीरा उसके गतीले बदन को देखी तो देखते ही रह गयी. मझडूर आदमी का जिस्म था. एक दम कड़क.

उपर से पीपे को खोलते हुआ बोला “मेमसाहेब, आप ज़रा बात्ट्च्ब के पास रहना. जब पानी आए तो शवर को पीपे के उपर पकड़ कर रखना.”

बाथरूम मे जगह कम थी. टेबल ने जगह घेर कर रखी थी. समीरा बात्ट्च्ब मे जाकर खड़ी हो गयी. जब पानी आने लगा तो वो शवर को पीपे के उपर लगाने लगी लेकिन बात्ट्च्ब मे खड़ी होने की वजह से समीरा पूरी तरह से भीग गयी. उसका बदन नाइटी से झलकने लगा. उसके कबूतर नाइटी से आधे तो पहले ही दिख रहे थे अब बाकी आधे नाइटी के पारदर्शी (ट्रॅन्स्परेंट) हो जाने की वजह से दीखने लगे. उसके डार्क निपल एक दम से तन कर आमंत्रण दे रहे थे. झंघों से नाइटी चिपक गयी थी. उसके उभरे हुए नितंब आकर्षित कर रहे थे. सुरेश ने जब नज़र नीचे कर यह नज़ारा देखा तो उसका लंड दान-दान कराता हुआ खड़ा हो गया. उसका लंड एक गोरी और मस्त लौंडिया को देख कर फड़फड़ने लगा. वो पीपे वापस फिटिंग करते हुए कभी पीपे को देख रहा था तो कभी समीरा की उफनती हुई जवानी को देख रहा था. तभी उसके हाथ से रेणच-पाना (आन इन्स्ट्रुमेंट तो टाइट पीपे) नीचे बात्ट्च्ब मे गिर गया और उसके हाथ से पीपे भी चुत गया.

पानी उपर पीपे से नीचे गिरने लगा. खुद भी पूरी तरह से भीग गया. उसके बदन के कपड़े भी भीग गये. कॉस्ट्यूम जैसे अंडरवियर से लंड का साइज़ सॉफ दिख रहा था. उपर से ही कहा, “मेमसाहेब, ज़रा वा रेणच-पाना देना प्ल्ज़्ज़.”

समीरा ने रेणच-पाना उठाया तो शवर अपनी जगह से खिशकगया. जिसकी वजह से पानी फिर गिरने लगा. एक हाथ से शवर को पकड़े हुए दूसरे हाथ से उस रेणच-पाना को देने लगी. लेकिन पानी गिराते रहने की वजह उसका ध्यान शवर की तरफ ही था. दूसरा हाथ रेणच-पाना सुरेश को देने के लिए आगे बढ़ाया हुआ था. उपर सुरेश भी पीपे से पानी गिराते रहने की वजह से पीपे की और ही देख रहा था. उसने उपर ही मूह किए हुए वापस कहा, “मेमसाहेब, प्ल्ज़्ज़. वा रेणच-पाना देना.”

समीरा भी शवर की और देखते देखते बोली, “दिया तो है. लेलो.”

तभी दोनो की नज़र आपस मे टकराई तो देखा की रेणच-पाना समीरा ने अंजान-वश सुरेश के मोटे फूले हुए लंड मे फँसा दिया था. सुरेश यह देखकर मुश्कराया और समीरा ने अपनी नज़र नीचे झुका ली. सुरेश रेणच-पाना अपने लंड पर से निकाल कर पीपे को फिटिंग करने लग गया.

समीरा ने नज़र उठा कर देखा की है रब्बा कितना मजबूत लंड है. एक मूसल की तरह खड़ा था. उसकी साइज़ 10″ इंच से कम नही होगी और मोटा भी पूरा था. उसकी चुत तो कल रात से ही उसके काबू मे नही थी. अब तो उसकी हालत एक दम से बेकाबू हो गयी. पूरे बदन मे खून सई-सई कर के बहने लगा. चुत का पानी रोके से नही रुक रहा था. बार-बार नज़र सुरेश के लवदे पर जाकर अटक रही थी. “उफ़फ्फ़,” ऐसी सिसकारी निकल पड़ी. “काश ऐसे लंड से मेरी चुदाई हो जाती तो मैं निहाल हो जाऊं.”

उधर सुरेश का मन भी कुच्छ ऐसा ही सोच रहा था. “काश मेमसाहिब की गौरी चुत छोड़ने को मिल जाए तो .. ”

तभी पीपे को आधा फिट किया तो शवर का पानी आना बंद हो गया. सो उसने समीरा से कहा, “मेमसाहिब, आप ज़रा यहाँ टेबल पर खड़ी हो जाए तो मैं शवर को भी वापस चेक कर लू.”

समीरा तो लंड और चुदाई की सोच मे खोई हुई टेबल पर खड़ी हो गयी. उसे होश ही नही था की उसकी भीगी हुई नाइटी से उसका पूरा जिस्म झाँक रहा है. बदन की कोई भी चीज़ चुपी हुई नही थी. उसकी मखमली झाँटे केवल उसकी चुत को हल्का सा उपर से केवल च्छुपाए हुई थी. जब उसने अपना हाथ बढ़ा कर पीपे को पकड़ा तो उसकी नाइटी भी उपर हो गयी. चुत जो थोड़ा बहुत झांतों से चुपी हुई थी वा भी बेपर्दा हो गयी. वासना की आग मे जलते हुए बदन की गर्मी पूरे बाथरूम मे तूफान ला दिया.

सुरेश ने नीचे से यह नज़ारा देखा तो सुलग उठा. उसके सामने समीरा का नशीला बदन ही नाच रहा था. सुडोल बदन की मल्लिका, गड्राया हुआ सुन्दर बदन, गोल-गोल गाल, होंठ एसे की जेसे शहद से भारी दो पंखुड़ीयान, बाल लूंबे-लंबे नितंब को छ्छूते हुए, गर्दन सुराही की तरह, उरोज मम….मुममे भरे-भरे, दो कलश, गोल-गोल उभरे हुए सख़्त-सख़्त कसे हुए हापूस-आम. मलाई जैसा बदन, गुलाबी होठ चूसने के लिया तैयार और न्योता देते हुए. चुचि उठी हुई मस्त मस्त नाइटी से बाहर आने के लिए बेकरार. देखते ही लगता था हाथ बढ़ा कर दबा दो. कब इसे चोद पाऊँगा, कब इसकी चुत को चूसूंगा, कब इसकी चुचियों को कस कर दबाओंगा, कब इसके होठों को चूस चूस कर मज़ा लूँगा, कब इसकी चुत मे मेरा लंड घुसेगा, और कब इसे कस कस कर दबोच पाऊँगा. आह हा, क्या मम्मे हैं – एक दम तने हुए मानो की कह रहे हों – आओ मुझे पकड़ लो, मुझे दबाओ, मुझे चूसो. होठों पर एक मुस्कुराहट सी खेल रहती है. गीला गीला गुलाबी जिस्म बुला रहे है की आओआ ना, मुझे चूसो ना.

यह सोचते सोचते उससे रहा नही गया. उसने शवर को छोड़ बात्ट्च्ब से बाहर आ कर अपने होतो से उसकी चुत के होतो के साथ संगम कर लिया. “उफ़फ्फ़.. कितनी गरम है.”

समीरा चुदाई के सपने मे खोई हुई थी की उसे लगा की यह चुत मे अचानक वोल्टेज कैसे बढ़ गया. नीचे देखा तो सुरेश अपने होठों से उसकी चुत चूज़ रहा है. वो मन कड़ा कर बोली, “यह क्या कर रहे हो.”

सुरेश ने कुच्छ भी ना बोलते हुए उसकी चुत और उसके दाने को चूसना चालू रखा. समीरा विरोध कराती रही लेकिन धीरे-धीरे उसका विरोध सिसकारीओं मे बदल गया. अब यह छूसा उसे शकून दे रही थी. शकून के साथ-साथ जिस्म मे एक आग भी भर रही थी.

चुत पर से मुहन ना हटते हुए सुरेश ने समीरा को टेबल से उतारकर बात्ट्च्ब पर बैठा दिया. बात्ट्च्ब पर बैठी हुई वा अपने हाथ से सुरेश का बाल पकड़ कर उसे और ज़ोर से चूसने के लिए प्रेरित कर रही थी. उसकी सिसकारियाँ बड़ाती ही जा रही थी. तभी उसके मुहन से निकलना शुरू हो गया, “एस.. एस.. ज़ोर से चूसो मेरी चुत को.. अफ .. जीभ पूरी अंदर डाल दो. एस… मेरी चुत की गर्मी पूरी तरह से शांत कर दो. चूसाते रहो.. आअहह.. मुझसे अब रहा नही जा रहा है… अफ.. क्या … एस… जीभ से ऐसे ही चोदो.. चूवसो…” सुरेश अपनी जीभ की बढ़ता उसकी चुत मे बढ़ा दी. जब जीभ थोड़ी तक जाती तो अपने नाक से उसके दाने को सहलाने लगता. समीरा की सिसकारियाँ चालू थी, “चाट मेरी चुत, छूतिए! खा जा मेरी रसभरी चुत को!”

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