गॉखुलधाम सोसायटी (अडल्ट वर्ज़न) 2

अंजली :- शरमाते हुए…क्या कर रहे हो तारक…

तारक :- अंजली तुमने … अपनी बातों से … मेरा खड़ा कर दिया है….अब जब तक इससे शांत नही कृंगा तो आर्टिकल नही लिख पौँगा…प्लस्सस कुछ करो ना….

अंजली :- मुस्कुराते हुए..तारक आप भी सुभह सुभह….इतना बोलते हे अंजली हल्की सी सिस्क उठी है….

क्यूँ की तारक ने अंजली के सलवार के उपर से उसकी चुत को कस के प़ड़क लिया होता है….

अंजली :- तारक चोदा ना…सुभह सुभह तो मत करो..में गरम हो जौंगी…

तारक :- हाँ तो हो जाओ ना मेरी आत्म….

इतना बोलते हे तारक अपने होठ अंजली के रसीले होठों के उपर रख देती है और शुरू होता है एक घेररे चुंबन की शुरुवत…

तारक बड़ी प्यार से अंजली के होठों को चूस्टा रहता है…और अंजली भी तारक के होंतों को चूस्टी रहती है…तदी देर ऐसे चूसने के बाद तारक अपनी जीभ अंजली की मूह में डाल देता है…और अंजली बड़े प्यार से उससे अंदर आनने देती है…दोनो की जीभ एक दुरसे के रास का स्वाद छकते रहते हैं….एक किस चलता रहता है…इसी डरॅन तारक अंजली की चुत को स्लवार के अंदर हाथ डाल कर पेंटी की उपर से सहलता रहता है…उसकी पेंटी पूरी तरह गिल्ली हो जाती है…बड्डे प्यार से अंजली की चुत को घिसटा रहता है…..इधर अंजली…तारक के पेंट के अंधार हाथ डाल के अंदरवियारार के उपर से लंड को उपर नीचे कराती रहती है…..साथ हे साथ एक डुसुरे को किस भी करते रहते हैं…दोनो के होठ के चारो तरफ एक दूसरे का थूक लगा जाता है फिर भी वो दोनो को छोड़ते हे नही है…ऐसा लगता है जैसे उन्हे दुनिया की परवाह हे नही है…बस आपस में खोए हुए होते हैं…..इनटी देर से चुत पे छल रहे हाथ और लंड पे चल रहे हाथ से बाट जादा गर्मी पैदा हो जाती है…दोनो की सासें मूह के अंदर फूलने लगती है ….और दोनो झड़ने के बेहद करीब होते हैं………और तभी…….

दरवाजे पे दस्तक होती है और दोनो एक दम से अलग हो जटते हैं…दोनो एक दुरसे को देखते हैं और फिर अंजली दरवाजे के पास जाकर दरवाजा खोलती है…

अंजली :- अजीब से भाव आइन..अरी अब्दुल भाई आप कैसे???

अब्दुल :- अंजली भाभी आप खुद हे भूल गये..अपने हे तो भाजी के लिए समान मँगवाया था….

तभी अंजली को याद आता है की उसने अब्दुल से भाजी मँगवाई थी…

अंजली :- अरी हाँ अदूल भाई….आपका बहुत बहुत शुकरिया…

इधर तारक बखुलाया हुआ था क्यूँ की वो झदा नही था जिसकी वजह से वो काफ़ी परेशन था और उसने अंजली और अब्दुल की बातों पर ध्यान नही दिया था…

अंजली गेट बंद करके अत्ती है…और तारक की तरफ़ देख कर वो बोलती है..

अंजली :- तारक , तारक …. ख़ान खो गये??

तारक :- चौंकते हुए…अंजली क्या यार सारा मज़ा खराब हो गया..तुम्हे पता है ना मेरी कितनी बुरी हालत हो रही है इस वक़्त…मूज़े नही टा तुम जो अधोरा चोदा था वो पूरा करो…मेरा चूस के जल्दी मुझे रिलॅक्स करो…

अंजली :- तारक आप भी ना…मेरी भी तो यही हालत है…में भी तो नही झड़ी मेरा हाल भी तो आपके जैसा है…और न अब में नही कर सकती..मुझे कम है…

तारक :- गुस्से में..थेक है करो अपना काम….यह्न पाती की थोड़ी कोई परवाह है…जो करना है वो करो…

और तारक गुस्से में सोफे पे बैठ जाता है…

अंजली :- अरी गुस्सा क्यूँ हो रहे हैं…मेरे पर आपके लिए एक सर्प्राइज़ है आज..

तारक :- झट से खड़ा होते हुए….क्या सच में तो जल्दी कारू ना…

अंजली :- हंसते हुए अरी वो नही….मेने आज आपके लिए पाऊ भाजी बनाई है….

तारक :- अरी थोड़ा कुश होते हुए..अपनी नाराज़गी हटते हुए…अंजली तुम भी ना….और हंस पड़ता है….

ये देखकर अंजली भी हंस देती है … और फिर तारक अपने आर्टिकल लिखने बैठ जाता है…और अंजली किचन में चली जाती हाईईईईई………. उधर अईयर भाई अपने घर के सोफे पे बैठ के कॉफी पे रहे होते हैं…और न्यूसपेपर पढ़ रहे होते हैं…….उधर से अत्ती है उनकी हॉट सेक्स बॉम्ब बीवी बबिठा…जो की बहुत गुस्से में होती है…और आ हे अईयर से बोलती है…..

बबिठा :- गुस्से मे अईयर…तुम बिल्कुल बेकार हो … क़िस्सी कम के नही हो…

अईयर :- चौंकते हुए…. क्या हुआ डार्लिंग…मेने ऐसा क्या कर दिया जो तुम इतना नाराज़ हो मुझसे…

बबिठा :- अछा तो तुम्हे नही टा … नाटक मत करो अईयर….कल रात तुमने कितना ग़लत किया तुम्हे टा भी है…

अईयर :- सोच मे पढ़ जाता है….और बोलता है…ऐसा क्या ग़लत कर दिया कल रात में मेने बबिठा…??

बबिठा :- ओफू अईयर…कल रात मुझे इतना गरम करके खुद सो गये…तुम्हे टा भी है क्ल मेरी चुत आग बाबूला हो रही थी…तुमने तो अपना लंड मुझसे चुस्वा के अपनी शांति कर ली…और खुद झाड़ते हे सो गये….और में वाह्न अपनी गरम चुत को लेके करवाते बदलती रही…बड़ी मुश्किल से उंगली कर के मेने अपने आप को शांत करने की कोशिश की….और बोलते हो मने क्या किया…हा…..!!!

अईयर :- घबराते हुए…सॉरी डियर…वो मुझे थकान के वजह से नींद आ गयी थी….और कुछ सोचते हुए बोलता है…बबिठा अपना हाथ मुझे दो..

बबिठा :- सवालीयो नरज़रों से देखते हुए दे देती है….और जैसे हे वो हाथ देती है वो कहुंक जाती है…

अईयर बबिठा का हाथ लेकर अपनी पेंट की इपर से उसके लंड पे रख देती है..

बबिठा :- अईयर ये क्या है??

अईयर :- बबिठा वो तुम्हारी बात सुनके मेरा लंड कब खड़ा हो गया टा हे नही चला….और अब जब तक ये झदेगा नही तब तक में लब नही जा पौँगा..

बबिठा :- नही अईयर में नही कृंगी…खुद तो मुझे शांत नही करते और खुद रिलॅक्स हो के चले जटते हो…

अईयर :- डियर बबिठा आज ऐसा नही होगा प्लस्स करू ना…..

बबिठा :- सोचते हुए …… थेक है…..

और बबिठा ढेरे ढेरे पेंट के उपर से अईयर के लंड को उपर नीचे कराती रहती है…

अईयर :- आआहह बबिठा डार्लिंग…वाहह आईईयूऊ…..ँज़ा आ रा है …..लंड को बाहर निकल के चूसो ना…

और बबिठा अईयर के लंड को बाहर निकलती है….अईयर का लंड जादा बड़ा तो था नही….पर बबिठा कम च्ला लेती थी उससे….

अब बबिठा अईयर के लंड को मूह में लेके चूसना शुरू कर देती है….सबसे पहले बबीते अईयर के लंड के सूप़ड़े को छाती है…उसके बाद जीभ से पूरे लंड को चती है…और बॉल्स को भी चूस्टी है…इससे अईयर मचल्ल उठता है…और ज़ोर ज़ोर से सिसकियाँ भराता है….अहह ओह ँज़ा आ गया….ओह उूुुुुुुुुउउ…..अब बबिठा पूरा लंड मूह में लेके ज़ोर ज़ोर से चूसना शुरू कर देती है…पूरे कमरे में अज्जेब सी आवाज़ें गूँजनी शुरू हो जाती है…..आब बबिठा बढ़ता ब्डा देती है और तेज़ी से लंड चूसनी शुरू कर देती है….अईयर इस हमले को सम्भहाल नही टा और मूह में हे अपना पानी चोद देता है…..और बबिठा एक अछी बिच की तरह सारा पानी गतक जाती है….

बबिठा :- हानफते हुए..कक्चालूओ अईयर अब तुंमहरिी बारीी….

अईयर :- हाँ डार्लिंग बिकुल….. और जैसे हे अईयर बबिठा की चुत की तरफ बदता है…… वैसे हे…

अईयर का फोन बाज उठता है…..

अईयर :- हेलू…..हाँ हर्रिहरण … अचला अछा….हाँ बस अभी पहुहनकता हूँ…और फोन कॉल कट कर देता है…. सॉरी बबिठा डार्लिंग मुझे ऑफीस आइयिये पड़ेगा बहुत ज़रूरी मेत्टिंग है..

बबिठा :- छिलते हुए……इएर्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्ररर….चले जाऊ यह्न से और कुछ मत कहना….और बिंगाली में अईयर को गली देते हुए कमरे के अंदर चली जाती है…

और अईयर भी सोचता है रात में म्ना लूँगा और वो भी वाह्न से ऑफीस के लिए निकल जता है…. उधर पोपट्लाल…..तैयार हो के ..सोफे पे बैठे हुए..मागज़िने पढ़ रहे थे….बेचारा कुँवारार है ना तो कोई है तो नही जो उसका ख्याल रखा करे या फिर उसके लंड का ख्याल रखा करे … तो उससे खुद हे अपना ख्याल रखना पड़ता है…..मागज़िने पड़ते पड़ते ढेरे ढेरे अपने लंड को घिसटा रहता है….क्यूँ की वो मागज़िने न्यूड फोटोस से भारी हुई थी…

पोपट्लाल अक्सर अपनी शांति के लिए ऐसी मागज़िने पड़ता रहता है…

अब पोपट्लाल एक एक करके न्यूड गर्ल्स को देख कर लंड हिलाए जा रा था…अब लंड बिल्कुल तन कर पूरी तरह खड़ा हो चुका था..वैसे बीटीये दम पोपट्लाल का लंड उससी की तरह पतला सा है पर लंबा बाट है अपने छाते की तरह….8.5 इंच का……

तेज़ी से अपने लंड हो हिलाते हुए….पोपट्लाल एक एक करके पन्ने बदल रा था….अब वो लंड को बहुत तेज़ी से उपर नीचे कर रा था…उसकी साँस अब फूलने लगी थी….ऐसा लग रा था कुछ हे पलों में वो झाड़ जाएगा…और कुछ 2 मीं ऐसे तेज़ी से हिलने के बाद उसके लंड से एक तेज़ धारा बेर निकली और वो झाड़ गया…

पोपट्लाल :- हांफता हुआ…..आअहह…उफफफ्फ़….मज़ा आ गया….लेकिन कुछ पलों में अपने आप से बोलते हुए…क्या खाक मज़ा आ गया…हर रोज़ मुझे ऐसे हे शांत होना प़ड़ता है….कब मेरा ये लंड कोई और पकड़ के मूठ मरेगा..अहकीर कब मेरी शादी होगी…कबतक में ऐसे हे नंगी लड़कियूं की फोटो को देखता रहूँगा….

और झिल्लाता हुआ … अपने ओफ्फिक्से की और निकल पड़ता है…..

उधर डॉक्टर.हाथी अपने क्लिनिक में पटेंट को देख रहे होते हैं….उनकी बीवी कोमल भी उनही के साथ होती है….

पटेंट :- डॉक्टर. साहब मुझे एक प्राब्लम हो गयी है…

डॉक्टर.हाथी :- क्या हुआ भाई बोलो?

पटेंट :- डॉक्टर. मेरा लंड में से कम पानी निकलता है….पहली बार करने के बाद …दूसरी बार में तो एक बॉन्ड भी नही टपकती..कुछ करिए ना डॉक्टर.साहब…

डॉक्टर.हाथी :- ऑश अच्छा तो ये प्राब्लम है…जी ये तो बहुत गंभीर बात है..देखिए वैसे तो में सेक्स का डॉक्टर नही हूँ …. लेकिन आपको एक द्दवई दे देता हूँ…और एक अच्छे से सेक्स डॉक्टर का नो. भी…अगर दवाई कम ना करी तो आप इन डॉक्टर से जाके मिल लेना….

पटेंट :- थॅंक उ डॉक्टर…

इधर कोमल ज़रा से बात सुनकर हे गरम हो जाती है….क्यूँ की इससे कम चूड़ने को मिलता है…और वो बोलती है…

कोमल :- हंस …. कुछ करो ना…में गरम हो गयी..

डॉक्टर.हाथी :- हंसते हुए…क्या कोमल तुम भी इतनी से बात पे गरम हो गयी…और इस वक़्त में कुछ नही कर सकता ..मेरे पटेंट्स बाहर हैं…

कोमल :- झिलते हुए…कोई नही बाहर जल्दी से कर दो ना मुझसे अब रा नही जा रा..

डॉक्टर.हाथी :- कोमल तुम्हे टा है ना मेरा जल्दी खड़ा नही होता ..इससे बहुत टाइम लगता है….इतनी जल्दी में खड़ा होगा पर जरा सा..और वो तो तुम्हे दिखेगा भी नही…

देखिए डॉक्टर.हाथी की एक अनोहकि बात है…उनका लंड खड़ा तो होता है मगर उनका पेट इतना बड़ा है की लंड दिखता नही है…इसलिए वो एक स्पेशल दवाई लेते हैं जिससे खाते हे उनका लंड हाथी जैसा हो जता है…तभी वो चुदाई करते हैं…

कोमल :- सोचते हुए…हंस थेक बोल रहे है..लेकिन अब में क्या करना मुझसे तो रा भी नही जा रा…फिर उसके दिमाग़ में आइडिया आता है…हंस तुम मुझे लंड से तो नही कोहड़ सकते …मगर अपनी ये बड़ी बड़ी उंगलीयुं से तो ज़रूर कर सकते हो ना..

दे.हाथ :- सहिी बात हाईईईईईईईईईईईईईईईईई………….

इतना सुनते हे…अपनी पेंट उतार देती है और पेंटी भी…..चुत बिकुल सॉफ होती है कोई भी बाल नही होता…चुत बहुत जादा गिल्ली होती है…और हाँ बीटीये दम की कोमल ने उंगलीयुं से चूड़ने की बात क्यूँ की …क्यूँ की डॉक्टर.हाथी की उंगलियाँ कुछ कम नही है…साली इतनी बड़ी है की लंड को भी मॅट दे दे…

डॉक्टर.हाथी :- कोमल तुमहरि चुत तो बहुत पानी चोद रही है….

कोमल :- हंस कुछ बोलो मत अब जल्दी कारू…

और डॉक्टर.हाथी अपनी एक उंगली अंदर चुत मेल डाल देते हैं जिसकी वजह से कोमल हाली सी सिशकउठी है..अहह…और अब डॉक्टर.हाथी कोमल की चुत में उंगली अंदर बेर करना शुरू कर देता है….कोमल को बहुत मज़ा आने लगता है…वो डॉक्टर.हाथी के शोल्डर पे हाथ रख कर खड़ी हो जाती है…क्यूँ की उसके लिए खड़ा होना मुश्किल हो जाता है….अब डॉक्टर.हाथी..2 उंगलियाँ अंदर डाल की चुत को मरने लगते हैं…..जैसे हे दूसरी उंगली अंदर जाती है कोमल ज़ोर से चिल्ला उठी है…..हन्ंननन्न्न्स्स्स्स्स्स्स्स्स्सस्स अहह………..ओह…..मार गयी……भौत मज़ा आ रा है…..उईईईईईईईईईईईईईईईईई……….उफफफफफफफफफफफफ्फ़….और तेज़ करो…..अब डॉक्टर हाथी बढ़ता बड़ा ज़ेटा है…और कमरे में पच पच की आवाज़ें शुरू हो जाती है….कोमल हफ्ते हुए बोलती है..हंस में झड़ने वाली हूँ…और तेज़ करो…..अब डॉक्टर. हाथी पूरी ताक़त से चुत मरने लगते हैं….जिससे कोमल से अब सहन नही हो पता और चिल्लाते हुए…………अहह ओह..माआआआआआआआआआअ….में तो गयी….और अपना कमरस चोद देती है….और यूयेसेस रस को डॉक्टर. हाथी अपनी जेभ से सारा चाट लेते हैं..

कोमल :- पेंट उपर करते हुए…थॅंक यू हंस…तुमने ने तो मुझे स्वर्ग की सैर करा दीए थी…

डॉक्टर.हाथी :- उर वालेकम कोमल..मगर इतनी मेहनत करने के बाद बहुत भुख लगी है कुछ खाने को दो ना…

कोमल…हंसते हुए….हंस तुम भी ना….

कोमल को हंसटा देख डॉक्टर .हाथी भी हंस देता है और फिर कोमल किचन में चली जाती है………….!!!!!!!!!!सेकरेटरी के एक मावाए आत्मराम भिड़े अपने घर पे बैठे स्टूडेंट्स की टेस्ट पेपर चेक कर रहे थे…

भिड़े :- पेपर चेक करते हुए मदवी को आवाज़ लगते हैं…माधवी चाय..कितनी देर हो गयी है

माधवी :- जी लाई..

और माधवी चाय लेके आती है…हर रोज़ की तरह मदवहि मराठी सारी और स्लेवलेशस ब्लाउस में आती है…बहुत हे जदा सेक्सी लग रही थी..

भिड़े :- क्या बात है माहद्वी आज तो तुम भत सेक्सी लग रही हो..

माधवी :- क्या आप भी..सुभह सुभह शुरू हो जटते हैं..

भिड़े :- क्या करूँ माधवी तुम्हे जब भी देखता हूँ .. मेरा ये तंबू खड़ा हो जाता है…और भिड़े अपने लंड की तरफ़ इशारा करते हुए कहता है..

माधवी :- भिड़े की इशारे की और देखती हुई उसकी लंड पे नज़र डाल के बोलती है…क्या आप ना ..कल रात को हे तो मारी थी मेरी इतनी … और सुभह सुभह फिर शुरू हो गये…और मूड की जानने लगती है ई..तभी उसके मूह से हाली सी आह निकल जाती है…

क्यूंकी भिड़े ने माधवी की गान्ड को पीछे से दबा देता है…

माधवी :- ये क्या कर रहे हैं … छोड़िए ना मुझे आचार पप़ड़ बनाने है..

भिड़े :- माधवी अछा पप़ड़ बनते रहेंगे…लेकिन अब जो ये गरम महॉल ब्ना है उससे तो पहले पूरा कर लो…

और फिर भिड़े मदवी को खिच के अपने उपर बिठा लेंटा…इसकी वजह से भिड़े का लंड माधवी की गान्ड पे चुबने लगता है….और भिड़े माधवी की पूरे फेस पर चुम्आंटी की बारिश सी कर देता है…माधवी पूरी तरह मदहोश हो जाती है…और वैसे हे बैठे बैठे लंड पे उपर नीचे होने लगती है ..जिससे भिड़े और पागल सा हो जाता है….और अब वो माधवी के होंठो का रस पं लरना शुरू कर देता है…माधवी का पूरा सेहरा एक चुदकड़ औरात जैसा लगने लगता है…..भिड़े माधवी का पल्लू नीचे गिरा देता है…और ब्लाउस के उपर से हे माधवी के कचुचे दबाना शुरू कर देता है….और होनोटों को चूमता रहता है….फिर द्धेरे ढेरे वो अपनी जीभ मदवहि के मूह में डाल के उसका मूह का रस को चूसने लगता है…इधर माधवी की चुत पूरी तरह गिल्ली हो जाती है जिसकी वजह से उसकी पेंटी चिपक जाती है….और वो वैसे हे भिड़े के लंड पे उपर नीचे होने लगती है….

फिर भिड़े माधवी के ब्लाउस और ब्रा को खोल के माधवी के बड़े बड़े और नरम चुकचे को अपने हाथों से मसलना शुरू कर देता है….भीड़ के ठंडे हाथून का स्पर्श अपने छुचे पे पड़ने के वजह से माधवी पागल हो जाती है और वो भिड़े को और जदा होंठो को चूसना शुरू कर देती है….2 मीं बाद भिड़े होंतॉह्न को चोद देता है….और माधवी के चुचों को मूह में लेकर चूसना शुरू कर देता है….

ऐसा करते हे माधवी के मूह से सिशकनिकल जाती है…..ओह…..हन्णन्न्… बहुत अच्छा लग रा है सोनू के पापा और चूसिए …और भिड़े बारी बारी मदवहि के दोनो कूचों को चूस्टा है….और निपल्स को भी चूस्टा रहता है…जिससे माधवी के सबर का बंद टूट जाता है और वो खड़ी हो जाती है….और भिड़े के लंड को बेर निकालने लगती है की तभी…

नीचे से सोढी की आवाज़ आती है ऊओ भिड़ुउऊ जाली नीचे आ….

सोढी की आवाज़ सुन कर दोनो को बाह्य गुस्सा आता है…फिर भिड़े अपना गुस्सा शांत कर के अपनी बालकोमणी में सोढी से बात करने चले जाता..

भिड़े :- क्या बात है सोढी..क्या हुआ??

सोढी :- ओये भिड़े यार तूने आज बोराद पर कोई सुविचार नही लिखा इसलिए तुखे आवाज़ लगाई..

भिड़े :- मन में सोढी को गलीी देते हुए….आता हूँ भाई अभी लिखता हूँ..

और इतना कह कर वो च्ला जाता है…सुविचार लिखने…….!!!

दोस्तों आप सोच रहे होंगे की अभी तक सेक्स क्यूँ नही हुआ किसी का…आप सब चिंता मत करिए ये तो बस एक शुरुवत है…बस आप मुझसे जड रहें आगे देखिए अभी बहोत कुछ बाकी है इधर जेठालाल नहा दो कर Cआये पिई रा था…..तभी दया और बोली अरी टप्पू के पापा अपने अभी तक चाय नही पी…दुकान नही जाना क्या.

झेतला :- हाँ भाई बस पे ले जा रा हूँ…चलो जाई जीनेंद्रा..

दया :- जे जीनेंद्रा…

और जेठालाल अपनी विंग की सीढ़ियूं से नीचे कोनपुंद में आता है…और जैसे उसकी नज़र सोसायटी के गेट पे पढ़ती है उसका मूह खुला का खुला रह जाता है…क्यूँ की उसकी फेव चीज़ वाह्न खड़ी थी…बिल्कुल सही समझे आप वाह्न बबिठा खड़ी थी…और जेठालाल बबिठा को देख कर कुश हो जाता है और उसके पास चला जाता है…

जेठालाल :- गुड मॉर्निंग बबीटाजी..

बबिठा :- स्माइल देते हुए…गुड मॉर्निंग झेताजी…क्या हाल चल है आपके??

जेठालाल :- बस अब आपको देख लिया मेरे हाल चल बिकुल थेक हो गये हैं..

बबिठा :- थोड़ा ब्लश होते हुए…आप भी ना झेताजी हमेशा मेरी तारीफ हे करते रहते हैं….

जेठालाल :- अरी आप हैं हे इतनी तारीफ के काबिल तो तारीफ तो करूँगा….वैसे एक बात कहूँ बबीटाजी अगर आप बुरा ना माने तो..

बबिठा :- अरे बिलबुल बोलिए ना … आपकी बात का बुरा क्यूँ मानेगी..

जेठालाल :- वैसे आज आप बहुत हे जादा …. मतलब बहुत हे जादा सुंदर…और ग़ज़ब लग रही है…बस इतने सेक्सी लग रहे हो की क्या बतुन..

बबिठा :- थोड़ा चुंकते हुए और थोड़ा ब्लश होते हुए…..झेताजी आपने मुझे सेक्सी खा??

जेठालाल :- मन में…लगता है बबीटाजी को बुरा लग गया….सॉरी सॉरी बबीटाजी वो आप आज इतने सेक्सी लग रहे थे ना इसलिए बोल दिया….श सॉरी मेने दुबारा बोल दिया सॉरी बबीटाजी…

बबिठा :- हंसते हुए…..अरे झेटाजी आप सॉरी क्यूँ बोल रहे हैं …मुझे बुरा नही लगा..वो तो मेने आपसे इसलिए पूछा क्यूंकी में इतनी भी सेक्सी नही हूँ थेक तक हूँ…

जेठालाल :- हिमात बढ़ते हुए….अरी नही बबीटाजी आप बहुत हे जादा सेक्सी लग रहे हो..मान कर रा है आपको देखता रहूं…
गॉखुलधाम सोसायटी (अडल्ट वर्ज़न) – Gokuldham Society

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