वीरा को बनाया बिस्तर की रानी

डियर फ्रेंड्स, मैं antarvasna संदीप आप सबके लिए एक बहुत ही कमाल की सेक्स कहानी लेकर आया हूँ मैंने आज तक बहुत सारी कहानीयां पढ़ी है जिससे मुझे काफ़ी कुछ सीखने को मिला है पर आज की सेक्स कहानी मेरी अपनी है और मैंने कभी सोचा भी नहीं था की मैं भी अपनी एक कहानी भी लिखूंगा पर कहते है ना दोस्तों समय सब कुछ करवा देता हूँ। ऐसा ही कुछ मेरे साथ हुआ जो आज मैं आप सबको बताने जा रहा हूँ। मुझे उम्मीद है की आपको मेरी ये पहली सेक्स कहानी ज़रूर पसंद आएगी तो अब मैं आप सबका ज़्यादा समय खराब नहीं करूँगा और बस सीधा ही आप सबको अपनी कहानी पर ले चलता हूँ।

जैसा की मैंने आपको बताया की मेरा नाम संदीप है मेरी उम्र उस समय 19 साल की थी मैंने अपने गाँव में 12 पास कर ली थी अब मुझे आगे की पढ़ाई करनी थी, पर मेरे गाँव में एक भी ढंग का कॉलेज नहीं था इसलिए मम्मी पापा ने मुझे दीदी के पास जाने के लिए कह दिया जब दीदी से बात करी तो दीदी ने भी झट से हाँ कह दिया था फिर मैं अपनी आगे की पढ़ाई के लिए दीदी के पास शहर में चला गया। मेरे कॉलेज में होस्टल नहीं था इसलिए मुझे दीदी के घर पर ही रहना था दीदी के सुसराल में जीजू उनके मम्मी पापा और उनकी छोटी बहन वीरा रहती थी घर भी काफ़ी बड़ा और अच्छा था मेरा भी मन वहां पर जल्दी ही लग गया, मुझे वहां सब एक परिवार के मेंबर की तरह समझते थे पर जब मैंने वीरा को देखा तभी से मेरा दिमाग़ खराब हो गया था वीरा एक कुंवारी जवान लड़की थी जो मेरी ही उम्र की थी पर जिस हिसाब से उसका जिस्म था वो 22 साल की लगती थी क्यूंकि उसके बूब्स और गांड एक 22 साल की लड़की की तरह थे पर जैसी भी थी साली ने पहली ही नज़र में मुझे अपना बना लिया था मुझे वो पसंद थी और मैं उसको एक बार अपने बिस्तर की रानी बनाना चाहता था। वीरा 19 साल की थी उसका फिगर 32-28-34 था मुझे नहीं पता था की उसकी इतनी कम उम्र में भी इतने बड़े बूब्स कैसे हो गये थे पर जैसे भी थे उसके बूब्स और गांड दोनों एकदम मस्त थे जिसे देखते ही मुहँ खुला का खुला रह जाता था मुझे मूठ मारने का बहुत शौक था क्यूंकि मुझे अभी तक चूत मारने का मौका ही नहीं मिला था। जब मैंने वीरा को देखा था तभी से मेरा दिल उसको चोदने का करने लग गया था मुझे उसकी चूत किसी भी हालत में मारनी ही थी इसलिए मैं उसको सोच सोचकर मूठ मारने लग गया मैंने उससे बोल चाल शुरू कर दी और धीरे धीरे हम दोनों काफ़ी अच्छे से घुल मिल गये थे। अब हम दोनों एक साथ कॉलेज जाते थे और साथ ही वापिस आते थे घर में भी हम दोनों बातें करते रहते थे मेरा बहुत मन करता था की मैं वीरा को अपने दिल की बात बता दूँ पर ना जाने क्यों मेरी उससे बात कहने से गांड फटती थी। एक दिन की बात है हम दोनों घर पर ही थे मुझे वीरा से एक अर्जेंट काम था इसलिए मैं उसे पूरे घर में इधर उधर देखता हुआ घूम रहा था।

तभी मैं उसके रूम में जाने लगा तो वो अंदर से बंद था मैंने नीचे बैठकर दरवाजे के होल में से अंदर देखा था तो मेरे सामने वीरा एकदम नंगी खड़ी थी वो शायद अपने कपड़े चेंज कर रही थी वो शीशे के सामने खड़ी होकर अपने नंगे जिस्म को देख रही थी मैं बाहर खड़ा उसके जिस्म के मज़े ले रहा था सच में मैंने पहली बार उसको इस हालत में देखा था उसके गोरे बूब्स गोरी गांड चिकनी कमर और बिना बालो की चूत मेरे आँखो में बस चुकी थी मेरा लंड पेंट फाड़कर बाहर आने वाला हो गया था मैं तभी उठकर सीधा बाथरूम की और भागा और वहां जाकर मैंने सबसे पहले वीरा के जिस्म को सोचकर मूठ मारी मूठ मारने के बाद मेरा लंड और मेरा दिमाग़ शांत हुआ उस दिन के बाद मुझे वीरा ने अपना पूरा दीवाना बना लिया था। मेरे दिलो दिमाग़ पर अब सिर्फ़ वीरा ही छाई हुई थी अब मैं वीरा के जिस्म को टच करने की कोशिश करता था और उसको बड़े ध्यान से उसकी हर एक अदा को देखता था एक दिन की बात है हम दोनों कॉलेज नहीं गये थे दोपहर का समय था घर पर कोई नहीं था मेरे दिमाग़ में वीरा को चोदने का प्लान चल रहा था पर चुदाई इतनी जल्दी नहीं हो सकती थी ये मुझे भी अच्छे से पता था पर मैं फिर भी एक बार ट्राइ करना चाहता था मैं उठा और वीरा के कमरे में जाकर बोला वीरा यार क्या तुम मेरा सर दबा सकती हो, दीदी घर पर नहीं है वरना मैं उनके पास चला जाता वीरा बोली अरे कोई बात नहीं मैं दबा देती हूँ इधर आओ, मैं बेड पर लेट गया और मेरा सर वीरा की गोद में था और वो बड़े प्यार से मेरा सर अपने कोमल कोमल हाथों से दबा रही थी उसका ये अंदाज मुझे बहुत पसंद आ रहा था। क्यूंकि हम दोनों एक दूसरी की आँखो में ही देख रहे थे हम दोनों एक दूसरे में खो रहे थे तभी मैं उसकी आँखो में देखते हुए बोला वीरा मैं तुमसे कुछ कहना चाहता हूँ।

वीरा :– हाँ बोलो अखिल क्या बात है।

मैं :– पहले तुम वादा करो की तुम मेरी बात का बुरा नहीं मनोगी।

वीरा :– हाँ बाबा हाँ, मैं बिल्कुल भी बुरा नहीं मानुगी तुम बताओ क्या बात है।

मैं :– देखो यार वीरा मैं तुम्हे बहुत प्यार करता हूँ मैं तुम्हे हमेंशा के लिए अपना बनाना चाहता हूँ।

मेरी बात सुनते ही वीरा एकदम शांत हो गई और कुछ देर सोचकर बोली अखिल सच कहूँ तो मैं भी अब तुमसे प्यार करने लग गई हूँ मुझे नहीं पता था की तुम भी मुझसे प्यार करते हो पर ये सब हम दोनों में नहीं हो सकता क्यूंकि अगर किसी को ज़रा सा भी पता चल गया तो हम दोनों बहुत बुरे फसेगें।

मैं :– धन्यवाद वीरा तुमने मेरी मोहब्बत को समझा अब यह बात किसी को पता नहीं चलेगी मेरी जान, हम दोनों कोई ऐसा काम ही नहीं करेंगे जिससे हमारी या हमारे घर की बदनामी होगी।

मेरी बात सुनकर वीरा मान गई और उसने मेरे हाथ माथे पर किस किया उस दिन के बाद हम दोनों का प्यार का सिलसिला शुरू हो गया हम दोनों अभी तक सिर्फ़ सिर्फ किस पर ही थे, उससे आगे अभी तक हम दोनों नहीं जा पाए थे क्यूंकि एक तो हम दोनों कभी भी अकेले नहीं होते थे और ना ही वीरा आगे कुछ करना चाहती थी अगर मुझे वीरा की चूत मारनी थी तो मुझे वीरा को गरम करना था इसलिए मुझे सबसे पहले वीरा को गरम करने का तरीका सोचना था कुछ ही दिनों बाद हम दोनों की परीक्षा शुरू हो गई और परीक्षा शुरू होते ही हम दोनों पर पढ़ाई का वजन आ गया हम दोनों रात रात भर पढ़ाई करते थे तभी मैंने दीदी से कहा की दीदी क्या हम दोनों रात को एक साथ बैठकर पढ़ाई कर सकते है क्यूंकि अगर हम दोनों एक साथ पढ़ाई करते है तो जल्दी पढ़ाई होती है।

दीदी ने मेरी बात को समझा और थोड़ी देर सोचकर बोली देखो बात पढ़ाई की है तुम दोनों को जैसा ठीक लगे वैसा ही तुम दोनों करो, पर हमें तो अच्छे नंबर चाहिये बस, दीदी की बात सुनकर मैं बहुत खुश था क्यूंकि अब मुझे और वीरा को रात को एक ही कमरे में बैठने की इजाजत मिल गई थी पर दीदी ने मुझे बाद में ये भी कह दिया था की पढ़ाई एक कमरे में करो पर सोना अलग अलग कमरे में ही है, जब मैंने ये बात वीरा को बताई तो वो भी खुश हो गई थी मैं रात होने का इंतजार कर रहा था आख़िर रात हो गई सबने एक साथ डिन्नर किया और डिन्नर के बाद सब अपने अपने कमरे में सोने के लिए चले गये मैं आज अपनी बुक्स लेकर वीरा के कमरे में चला गया हम दोनों बड़े आराम से पढ़ाई कर रहे थे जैसे ही सब सो गये तो हम दोनों ने अपनी पढ़ाई को बंद कर दिया फिर हम दोनों बैठकर बातें करने लग गये, बातें करते हुए मैंने वीरा के गाल पर किस कर दिया। किस करते ही वो तोड़ा सा गुस्सा हो गई और अपना मुहँ बनाकर बैठ गई। जब मैंने उससे पूछा की क्या हुआ है तो उसने मुझे कहा की ये बताओ की किस करना ज़रूरी है क्या, उसकी बात का जवाब देते हुए मैं बोला वीरा किस एक बहुत ज़रूरी है एक अच्छी दोस्ती और प्यार करने वालों के लिये क्यूंकि जब दो दिल आपस में किस करते है तो उन दोनों का विश्वास एक दूसरे की और ज़्यादा पक्का हो जाता है अब तुम मुझे ये बताओ की क्या तुम मुझसे प्यार करती हो?

वीरा :– हाँ अखिल आई.लव.यू.,

मैं :– आई.लव.यू.टू. तो अब से किस करने में ज़्यादा ताक़त नहीं होना चाहिये।

मेरी ये बात वीरा के दिमाग़ में अच्छे से बैठ गई थी उस रात के बाद जब भी हम दोनों पढ़ाई करते थे तो सब के सोने के बाद हम दोनों किस करना शुरू कर देते थे। पर मैं किस करने से आगे जाना चाहता था पर ऐसा कुछ नहीं हो रहा था एक रात की बात है जब मैं वीरा बैठकर पढ़ाई कर रहे थे तो कुछ ही देर बाद सब सो गये। उनके सोने के बाद ही हम दोनों बातें करने लग गये पर उस दिन वीरा को नींद आ रही थी इसलिए वो जल्दी सो गई मैंने सोचा क्यों ना आज मैं इसके साथ ही सो जाऊ और मैं वीरा के साथ ही सो गया और उसको मैंने अपनी बाहों में भर लिया धीरे धीरे मैं उसके बूब्स को मसलने लग गया वीरा को दर्द हुआ और वो उठकर बैठ गई और गुस्से से बोली अखिल क्या तुम्हें समझ में नहीं आता, मुझे ये सब नहीं करना प्लीज़। मुझे उसकी बातें अच्छी नहीं लगी इसलिए मैं वहां से उठकर अपने कमरे में आ गया पर आते हुए मैंने एक बात उससे कही वीरा मैं तुमसे प्यार करता हूँ और मैं सिर्फ़ तुम्हें प्यार ही करना चाहता हूँ। ये कहकर मैं अपने कमरे में आकर सो गया अगले 2 दिन तक मैंने वीरा से कोई बात नहीं करी वो मुझसे बोलने की कोशिश कर रही थी पर मैंने उसकी एक ना सुनी तीसरे दिन वो दोपहर को मेरे कमरे में आई और आते ही मुझसे बोली क्या बात है अखिल तुम मुझसे बात ही नहीं कर रहे हो क्या बात है गुस्सा हो क्या। मैं कुछ नहीं बोला वो मेरे सामने ना जाने क्या क्या बोलती रही आख़िर में वो बोली देखो यार तुम मुझसे प्यार करना चाहते हो तो करो जो मर्ज़ी कर लो मेरे साथ पर प्लीज़ कुछ बोलो मैं तुम्हें ऐसे नहीं देख सकती उसके ये कहने की देर थी मैंने उसे तभी अपनी बाहों में ले लिया और उसको किस करने लग गया वीरा तभी बोली मेरी जान अभी नहीं अभी दिन है रात को जो मर्ज़ी कर लेना। ये सुनकर मैंने उसे छोड़ दिया और फिर उसे कहा की तुम आज रात मेरे कमरे में पढ़ाई के लिए आना बस फिर क्या था अब वीरा चुदने के लिए तैयार थी बस मुझे उसे चोदना था रात बड़ी मुश्किल से हुई फिर डिन्नर करने के बाद वीरा अपनी बुक्स लेकर मेरे कमरे में आई उसने आज कसा हुआ सूट और जीन्स डाली हुई थी मैं उसको ऐसे ही देखता जा रहा था सच कहूँ तो मुझे उस पर बहुत प्यार आ रहा था।

कुछ ही देर बाद सब सो गये और फिर मैंने अपनी और उसकी बुक्स को साइड में किया और उसे अपनी बाहों में लेकर उसके होठों को चूसने लग गया वो भी किस में मेरा पूरा साथ दे रही थी मेरे हाथ अब उसके बूब्स पर आ रहे थे जिन्हे मैं बहुत ज़ोर ज़ोर से दबाकर मसल रहा था उसके मुहँ से आहह… आईई… की बहुत ही मस्त आवाज़ें निकल रही थी कुछ ही देर बाद मैंने उसका सूट उतार दिया सूट के नीचे पिंक कलर की ब्रा थी, पिंक कलर की ब्रा में गोरे गोरे बूब्स देखकर मैं पूरी तरह से पागल हो रहा था उसके बूब्स को ब्रा के बाहर से चूसने लग गया फिर अपने दोनों हाथ पीछे करे मैंने उसकी ब्रा को उतार दिया अब उसके बूब्स मेरे हाथों में थे जिन्हे मैं ज़ोर ज़ोर से चूस रहा था मैं पागल हो चुका था क्यूंकि मैं पहली बार बूब्स को चूस रहा था बूब्स को चूसने के बाद मैंने अपना एक हाथ उसकी जीन्स में डाल दिया और उसकी चूत को मसलने लग गया मैंने नोटीस किया की उसकी चूत में से पानी निकल रहा है जिस वजह से पूरी पेंटी गीली हो चुकी थी। अब मैं नीचे गया और मैंने उसकी जीन्स को उतार दिया उसकी पेंटी की खुशबू ने मुझे पागल बना दिया था मैंने जोश में आकर उसकी पेंटी को भी फाड़ दिया फिर मैंने वीरा की दोनों टाँगे खोली और उसकी चूत पर अपना मुहँ रखा और ज़ोर ज़ोर से उसकी चूत को चाटने लग गया चूत पहले से ही काफ़ी गीली हो चुकी थी इसलिए मेरी जीभ ने 5 मिनट में ही वीरा की चूत का पानी बाहर निकाल दिया। अब बारी थी चुदाई की इसलिए मैंने अपना लंड बाहर निकाल लिया और उसकी चूत पर रगड़ने लग गया फिर वीरा बोली क्यों तड़पा रहे हो डालो इसे मेरी चूत में, मुझे अच्छे से पता था की वीरा को बहुत दर्द होने वाला है इसलिए मैंने अपने होठों से उसका पूरा सील कर दिया फिर मैंने अपनी पूरी ताक़त से एक धक्का मारा और मेरा लंड उसकी चूत में उतरता चला गया एक बार दर्द तो बहुत हुआ वीरा को, पर मुझे पता था की उसे दर्द तो होना ही है मैं धक्के मारता रहा और उसकी चूत को फाड़ता रहा। दोस्तों यह सेक्स स्टोरी आप कामलीला डॉट कॉम पर पढ़ रहे है।

पहले 10 मिनट तक तो वीरा रोती रही पर उसके बाद उसने 20 मिनट तक मेरे लंड के मज़े लिए मैंने उसकी चूत को फाड़कर रख दिया था उसकी चूत का पानी 2 बार और निकल गया था मेरे लंड ने भी आख़िर अपना सारा पानी उसकी चूत में डाल दिया था फिर हम दोनों एक दूसरे के ऊपर लेटकर आराम करने लग गये। रात काफ़ी हो चुकी थी इसलिए अब वीरा को उसके कमरे में जाना था मैंने उसे सहारा देकर खड़ा किया जब हम दोनों ने बेड को देखा तो बेड खून से सना हुआ था मैंने उसे कहा की तुम टेंशन ना लो इसकी, वीरा से चला तक नहीं जा रहा था। मैं उसको पकड़कर उसके कमरे तक ले गया और उसे एक दर्द की गोली भी दे आया उस खूबसूरत रात के बाद मैं और वीरा दोनों हर रोज चुदाई करते है अब उसे मेरा लंड अच्छा लगता है और मुझे उसकी गांड।

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