चोर पुलिस के खेल में चलाई चुदाई की रेल

हाय फ्रेंड्स, Antarvasna मेरा नाम सुरेश है मेरी उम्र अभी 27 साल की है और मैं झाँसी का रहने वाला हूँ। दोस्तों मैं भी आप सभी की तरह ही कामलीला डॉट कॉम वेबसाइट की सेक्स कहानियों का एक नियमित पाठक हूँ और मुझको इस वेबसाइट की सभी कहानियों को पढ़ने में बहुत मज़ा आता है। अच्छा तो दोस्तों चलो आज मैं आप सभी को अपनी जिन्दगी की एक सच्ची कहानी बताता हूँ और यह एकदम सच्ची कहानी है इसलिए प्लीज़ आप सब इसे अपने साथ भी कल्पना कर सकते है चलिए अब मैं अपनी उस कहानी को शुरू करता।

दोस्तों यह बात तब की है जब मैं 22 साल का था और मैं अपने परिवार यानी कि, मेरे पापा और मम्मी के साथ अपनी बुआ जी के घर मुगलसराय गया हुआ था। दस्तों मेरी बुआ जी की एक ही लड़की है और उसका नाम प्रीती है उस समय उसकी उम्र 20 साल की थी और हम दोनों की आपस में अच्छी पटती भी थी। दोस्तों वहाँ पर एक दिन सब लोग बाज़ार गए हुए थे और हम दोनों अकेले ही घर पर रुक गए थे क्योंकि बाहर बहुत धूप थी और मम्मी और बुआ जी के साथ बाज़ार जाने का हम दोनों का ही मन भी नहीं था इसीलिए हम दोनों ने ही मना कर दिया था कि, इतनी धूप में हम उनके साथ नहीं जाएँगे। और फिर दोपहर के 1 बजे तक मम्मी और बुआ जी बाज़ार के लिए घर से निकल गए थे और मैं अपनी बुआ की लड़की प्रीती के साथ घर पर अकेले ही रुक गया था। दोस्तों प्रीती बहुत गोरी और स्मार्ट थी और वह बिल्कुल किसी हिरोइन की तरह दिखती थी और फिर हम दोनों ही घर में खाली बैठे थे तो उसने मुझसे पूछा कि, भैया क्या आप चाय पियोगे? तो मैंने उसको कहा कि, ठीक है बना लो. और फिर वह चाय बनाने के लिये किचन में चली गई थी और मैं बैठक वाले कमरे में बैठा हुआ टी.वी. देख रहा था, मैंने तब एक शॉर्ट्स (नेकर) और टी-शर्ट पहनी हुई थी और प्रीती ने भी स्कर्ट पहनी हुई थी। दोस्तों मैंने 19 साल की उम्र से मूठ मारना शुरू कर दिया था इसलिए उस समय मेरे दिमाग में प्रीती के साथ कुछ करने का मन होने लग गया था और फिर पहले तो मैं टी.वी. पर कोई इंग्लीश सेक्सी फिल्म तलाश करने लगा, लेकिन दिन के समय पर कोई भी सेक्सी फिल्म नहीं आ रही थी और उनके केबल टी.वी. पर फैशन टी.वी. भी नहीं आता था। और फिर मैं सोचने लगा कि, क्या करूँ? और तभी फिर मैं किचन में प्रीती के पास गया और उसके पीछे जाकर खड़ा हो गया था तो फिर उसने पीछे मुड़कर के देखा और फिर वह मुझसे बोली…

प्रीती :- क्या हुआ भैया?

मैं :- कुछ नहीं बस अन्दर अकेले बैठे हुए मेरा मन नहीं लग रहा था (और मेरी निगाह उस समय उसकी स्कर्ट के नीचे उसकी चिकनी नंगी टाँगों पर थी)

प्रीती :- भैया आप चलो मैं चाय लेकर अभी आती हूँ।

मैं :- ठीक है।

और फिर मैं किचन से बाहर चला आया और फिर मैंने सोचा कि, चलो बाथरूम में जाकर एकबार मूठ ही मार लेता हूँ, और फिर मैं बाथरूम में मूठ मारने के लिये चला गया और फिर वहाँ जाकर मैंने प्रीती के नाम की मूठ मारी। दोस्तों कसम से मुझको उसके नाम की मूठ मारने में ही इतना मज़ा आया कि, मैं आपको क्या बताऊँ और फिर थोड़ी ही देर में प्रीती चाय लेकर आ गई थी पर मैं तो उस समय बाथरूम में था और फिर जब मैं उसको कमरे में कहीं नज़र नहीं आया तो उसने मुझको आवाज़ लगाई।

प्रीती :- भैया कहाँ हो आप?

मैं :- आ रहा हूँ अभी, (और फिर मैं जल्दी से अपने हाथ धोकर बाथरूम से बाहर आ गया था)

और फिर उसने मुझे बाथरूम से निकलते हुए देखा तो वह मुझसे पूछने लगी कि, भैया आप बाथरूम में क्या करने गए थे? आप तो सुबह ही नहा चुके हो।

तो फिर मैंने उसको कहा कि, मैं हाथ-पैर धोने गया था और फिर हम दोनों ही बेड पर बैठकर टी.वी. देख रहे थे और चाय भी पी रहे थे। मैं चोरी-चोरी उसकी तरफ भी देख रहा था और मेरी नज़र उसकी छाती पर थी मैं मन ही मन कल्पना कर रहा था कि, इसके बब्स कैसे होंगे? शायद गोरे और गुलाबी निप्पल वाले होगें। और फिर मैं उसकी स्कर्ट में से बाहर निकलती हुई उसकी चिकनी टाँगों को देखकर उसकी चूत की कल्पना करने लग गया था कि, कैसी होगी इसकी चूत? और फिर मैं यह सोचता ही रहा और हम दोनों की चाय खत्म हो गई और फिर मैंने उससे कहा कि, प्रीती चलो हम दोनों कुछ खेलते है तो फिर वह मेरी बात पर हँसने लगी और बोली कि, क्या खेलते है, हम अब बच्चे थोड़े ही रह गये है जो खेलेगें. तो फिर मैंने उसको कहा कि, हम बचपन में कैसे खेलते थे एक साथ जब मैं यहा आता था या तुम मेरे घर आती थी, मुझे आज अचानक उन दिनों की याद आ रही है। तो फिर वह मुझसे बोली कि, हाँ वह दिन मुझे भी याद आते है. तो फिर मैं उससे बोला कि, तो फिर आज हम अपने बचपन की तरह ही कुछ करते है और पुराने दिनों को याद करते है. और फिर वह मुझसे बोली कि, पर भैया कैसे?

तो मैंने उसको बोला कि, प्लीज़ प्लीज़ प्लीज़. तो फिर वह मुझसे बोली कि, ठीक है भैया बताओ कौनसा खेल खेलें?

मैं :- चलो चोर-पुलिस का खेल खेलते है।

प्रीती :- ठीक है भैया मैं चोर बनती हूँ और तुम पुलिस।

मैं :- ठीक है. और फिर मैंने उससे कहा कि, तुम कुछ चोरी करो और फिर मैं तुमको पकड़ता हूँ। तो फिर वह मुझसे बोली कि, ठीक है और फिर मैं छुप गया और फिर वह किचन में गई और वहाँ पर से कुछ चुराने का नाटक करने लगी और फिर तभी मैं पुलिस वाला बनकर उसके पास आया और उसे पकड़ने के लिए दौड़ा और खेल के नियम के मुताबिक़ वह भी मुझसे बचने के लिए वहाँ से भागने की कोशिश करने लगी, तो फिर मैंने उसे कसकर पकड़ लिया तो वह मुझसे छुटने की कोशिश करने लगी पर मैंने उसे कसकर पकड़कर रखा और फिर मैंने उसको बोला कि,

मैं :- बताओ क्या चुरा रही थी?

प्रीती :- कुछ नहीं सर, मैंने कुछ भी नहीं चुराया।

मैं :- तुम चोर हो और पुलिस वालों को सबकी ज़ुबान खुलवाना आता है, और फिर मैं उसकी तलाशी लेने का नाटक करने लगा और फिर मैं उसकी स्कर्ट के ऊपर से उसकी बॉडी को दबाने लगा।

तो वह मुझसे मना करती रही कि, मैंने कुछ नहीं चुराया है सर, लेकिन मैंने उसकी एक बात भी नहीं सुनी और फिर मैं उसकी स्कर्ट को उतारने की कोशिश करने लगा और प्रीती यह सोच रही थी कि, यह सब खेल का ही हिस्सा है। और फिर मैंने उसके हाथ कसकर पकड़े और फिर मैं उसकी स्कर्ट को ऊपर करके निकालने लगा और प्रीती मुझसे कहती रही कि, मैंने कुछ नहीं चुराया है सर. लेकिन फिर मैंने उसकी स्कर्ट को खींचकर उतार दिया था और फिर अब वह मेरे सामने सिर्फ़ समीज़ और पैन्टी में थी और उसकी नंगी बॉडी मुझे अब साफ नज़र आ रही थी। और अब प्रीती समझ गई थी कि, कुछ तो गड़बड़ है और भैया ने मुझे खेल-खेल में नंगा क्यों कर दिया है और फिर वह मुझसे कहने लगी कि, भैया यह आप क्या कर रहे हो? खेल में यह सब नहीं होता है। तो फिर मैंने उसको कहा कि, ऐसे ही मज़ा आएगा और फिर जब तुम भी पुलिस बनना तो तुम भी मेरे साथ जो चाहो कर लेना (मेरे ऊपर तो वैसे भी जुनून चढ़ा हुआ था, उसे नंगा करने का) और फिर मैंने उसके हाथ पकड़े और कहा कि, मैं तुमको गिरफ्तार करता हूँ और फिर यह कहते हुए मैंने उसके हाथ एक कपड़े से बाँध दिए और वह भी अब तक इसे सिर्फ एक खेल ही समझ रही थी।

और फिर मैंने उसके बाल पकड़कर उसको ज़ोर से खींचा और फिर उसके पैरों को फैलाकर मैंने उसको बोला कि, बताओ कहाँ छुपा रखा है चोरी का सामान? और फिर ऐसा कहते ही मैंने उसकी पैन्टी भी उतार दी थी और अब वह नीचे से एकदम नंगी हो गई थी और फिर वह मुझसे कहने लगी कि, प्लीज़ भैया मुझे यह खेल नहीं खेलना। पर अब मैं कहाँ मानने वाला था और फिर मैंने उसको कहा कि, चुपकर एक तो चोरी करती है और ऊपर से पुलिस वाले से ज़ुबान लड़ाती है, और फिर मैंने उसकी दोनों टाँगों को फैलाकर के अपना मुहँ उसकी टाँगों के बीच में ले जाकर के उसकी चूत को देखने लगा, कसम से दोस्तों क्या कमाल की चूत थी उसकी एकदम गोरी और हल्की-हल्की सी गुलाबी रंग की और बिल्कुल एकदम सील-पैक चूत की तरह और उसपर एक भी बाल नहीं था। और फिर मैंने अपनी ऊँगली उसमें डाल दी थी और फिर मैंने उसको बोला कि, इसके अन्दर क्या छुपाया है? और फिर मैं उसकी चूत में अपनी एक ऊँगली डालने लगा तो फिर धीरे-धीरे वह भी मज़ा लेने लग गई थी पर मुझे दिखाने के लिए वह मुझको रोक भी रही थी। लेकिन मैंने तो उसे बाँधा हुआ था और मैं उसको ऐसा अहसास करवा रहा था कि, मैं अब भी खेल ही रहा हूँ और मैं यह भी समझ चुका था कि, वह नाटक कर रही है और उसे पूरा मज़ा आ रहा है।

तो फिर मैंने उसकी चूत में अपनी एक ऊँगली डाल दी और फिर मैंने ज़ोर-ज़ोर से अपनी ऊँगली उसकी चूत में अन्दर-बाहर करनी शुरू कर दी थी तो मेरे ऐसा करने से उसकी चूत में से थोड़ा सा पानी निकलने लगा तो फिर मैं समझ गया था कि, यह अब धीरे-धीरे गरम हो रही है। और फिर मैं खड़ा हुआ और फिर उससे बोला कि, चुप-चाप बता दो कि, चोरी का माल कहाँ छुपाया है और मैं बहुत गुस्से वाला पुलिस वाला हूँ। और फिर वह बड़ी मादक नज़रों से मुझे देखने लगी और फिर वह मुझसे बोली कि, मैंने कुछ नहीं चुराया है सर. तो फिर मैंने उसको कहा कि, सब चोर यही कहते है। और फिर मैं उसके पास गया और उसकी समीज़ को उतारने की कोशिश करने लगा पर उसके हाथ बँधे हुए थे तो इसलिए उसकी समीज़ पूरी तरह से नहीं उतार पाया था। और अब मेरी नज़रों के सामने उसके नंगे-नंगे और छोटे-छोटे बब्स थे और उनके निप्पल भी अभी छोटे ही थे और फिर मैंने उनको दबाया और फिर मुझसे और नहीं रुका गया और फिर मैं उसके छोटे-छोटे निपल्स को अपने मुहँ में भरकर पीने लगा और वह सिसकारियाँ लेने लगी और शायद मेरा उसके निप्पल को पीना उसे भी अच्छा लग रहा था।

और अब मैं अपने एक हाथ से उसके एक निप्पल को नोंच रहा था और दूसरे निप्पल को ज़ोर ज़ोर से पी रहा था, कसम से मुझको उस समय बहुत मजा आ रहा था एक अजीब सा ही स्वाद था, दोस्तों वह स्वाद मुझे आज भी याद है और फिर अब वह मेरे बालों को खींचकर के मुझे अपने निप्पल को और चुसवाने लगी और साथ ही आहहह… इस्सस… भी करने लग गई थी। और अब मैं इस खेल को चुदाई में बदलने के लिए एकदम तैयार था क्योंकि अब उसकी चूत भी मेरा लंड माँग रही थी और मुझे उसकी यह इच्छा पूरी करनी थी और फिर मैंने तभी उससे कहा कि, बोलो बेबी लंड चाहिए? तो फिर वह मेरे मुहँ से लंड का नाम सुनकर शरमा सी गई थी और फिर मुझको उसकी तरफ से हरी झण्डी मिल गई थी। और फिर मैंने झट से अपना लंड बाहर निकाला और उसके हाथ में थमा दिया था। और फिर वह बड़े गौर से मेरे लंड को देखने लग गई थी और फिर वह मेरे लंड को आगे-पीछे करने लग गई थी। और फिर मैं यह देखकर एकदम हैरान हो गया था कि, वह बड़े मज़े से मेरे लंड की आगे-पीछे कर रही थी. और फिर तभी मैंने उसे उठाया और उससे पूछा कि, क्या आज से पहले तुमने कभी चुदाई करी है, तो फिर वह मेरी तरफ देखकर हँसने लगी थी। दोस्तों यह कहानी आप कामलीला डॉट कॉम पर पढ़ रहे है।

और फिर मैं समझ गया था कि, इसकी सील तो पहले से ही टूट चुकी है, तो फिर मैंने बिना देर किए उसे एक टेबल पर झुकाया और उसकी नरम चूत पर अपना खड़ा लंड सटाया और फिर एक जोरदार झटका मारा और उससे मेरा लंड सीधा उसकी चूत में घुस गया था और वह आहहह… उईईई… करने लग गई थी। दोस्तों उस समय मुझको भी बड़ा मज़ा आया और फिर मैं उसे पूरी तेज़ी से चोदने लग गया था और वह आहह… इस्सस… करती रही और फिर 15-20 मिनट की चुदाई के बाद मैं झड़ने वाला था तो मैंने उसको कहा कि, मैं अब झड़ने वाला हूँ तो उसने मुझसे कहा कि, मेरे बब्स पर और मेरे मुहँ में निकाल दो, और फिर वह सीधा अपने घुटनों के बल बैठ गई थी और फिर मेरे लंड से निकली गरमा-गरम पिचकारी ने उसके सारे बब्स को मेरे माल से भर दिया था और मैं हैरान था कि, वह मुझे देखकर हँस रही थी। और फिर उसने मेरे लंड को चाटकर पूरा साफ़ कर दिया था और वह चुदाई मैं आज तक नहीं भूला हूँ।

धन्यवाद कामलीला डॉट कॉम के प्यारे पाठकों !!