वाशिंग मशीन के साथ चूत और गांड की सर्विस फ्री

हैल्लो दोस्तों, Antarvasna मेरा नाम सरिता है। और मैं भी आप सभी लोगों की तरह अपने खाली समय में कामलीला डॉट कॉम पर सेक्सी कहानियों को पढकर खूब मज़े लेती हूँ. लेकिन दोस्तों आज मैं अपनी एक सच्ची घटना को लेकर आप सभी के सामने आई हूँ और अब जो कहानी मैं आप सभी लोगों को बताने जा रही हूँ वैसे तो यह घटना कोई प्यार की नहीं है, लेकिन बेवफ़ाई की है और सेक्स की है। अब मैं इस काम में बहुत अनुभवी हो चुकी हूँ। मुझे अपनी दूसरी चुदाई के समय बुरा तो बहुत लगा, लेकिन फिर मुझे भी उस ज़ोर जबरदस्ती में मज़ा आने लगा और अब आगे आप ही पढ़कर इसके मज़े ले।

दोस्तों मैं एक शादीशुदा औरत हूँ और मेरी उम्र 36 साल की है और मेरे दो बेटे है। मेरी शादी को हुए 12 साल हो चुके है। मैंने अब तक अपने पति के अलावा किसी और के साथ सेक्स का रिश्ता नहीं रखा था, क्योंकि मैंने सोचा था कि मुझे प्यार करने वाला सिर्फ मेरा पति ही होगा और हमारा एक प्यारा सा परिवार होगा। लेकिन जैसा हम चाहते है हमेशा वैसा होता नहीं है। मेरे दोनों बच्चो को कुछ समय पहले मेरे पति ने होस्टल में पढ़ने के लिए घर से बाहर भेज दिया था और अब वह भी मुझे वक़्त नहीं देते है और घर में जैसे उनसे बात करना तो बिल्कुल संभव ही नहीं बल्कि बहुत मुश्किल था। क्योंकि उन्हें बात करना पसंद नहीं था घर पर एक वीरान सी खामोशी रहती थी, बस टीवी की आवाज़ के अलावा बाहर काम करना या बिना इजाज़त के बाहर घूमना यह तो बिल्कुल असंभव था। और अब मेरे तो सभी सपने पिंजरे में बंद थे। दोस्तो मैं दिखने में बहुत अच्छी हूँ और मेरे फिगर का साइज़ 34-30-36 का है और मेरी लम्बाई 5.6 फुट की है और मैं रंग में गोरी और बहुत खूबसूरत हूँ। खैर अब यह सब बताने की ज़रूरत नहीं है मैंने कभी मेरे पति के मुहँ से मेरी अपनी तारीफ़ नहीं सुनी और मेरे पति को चाहिए कि, मैं सेक्स के दौरान लेटी रहू और वह जो मन में आए करे, लेकिन मेरा चुदाई के लिए आग्रह करना उन्हें बर्दाश्त नहीं था। वह मुझसे कहते है कि, घरेलू औरत को सिर्फ़ शरमाना चाहिए, हाय-रे! मेरी फूटी किस्मत, लेकिन मुझे पूरी-पूरी उम्मीद थी कि, यह एक दिन खुलने वाली थी और कुछ पलों के लिए ही सही, लेकिन मैं एक दिन जन्नत की सैर करने वाली थी और दोस्तों यह वही कहानी है।

दोस्तों हमारे भूत बंगले जैसे घर में काम करने वाली बाई तो आती है, लेकिन एक वॉशिंग मशीन भी है। मेरे पति एक दिन एक नई वॉशिंग मशीन ले आए थे और फिर उन्होंने मुझसे कहा कि, अगर तुम्हें इसमें कोई भी दिक्कत होती है तो तुम इस नम्बर पर सर्विस सेंटर कॉल करना। और फिर वह मशीन 10-15 दिनों तक तो बिल्कुल ठीक तक चली, लेकिन उसके बाद में पता नहीं वह चालू ही नहीं हो रही थी, तो फिर मैंने सर्विस सेंटर में फोन किया और फिर उन्होंने मुझे बताया कि, उनके आदमी मेरे घर पर आ जाएँगे।

दोस्तों यह 7-8 महीने पहले की बात है दरअसल मैं उन दिनों कामलीला डॉट कॉम में आने वाली सेक्स और प्यार की कहानियों में अपने आप को ढूँढने लगती थी और मैं उस समय कमरे में बैठकर अन्दर अपने ही हाथों से अपनी चूत में ऊँगली को डाल-डालकर बहुत खुश हो रही थी। तभी इसी बीच वह खराब वॉशिंग मशीन को ठीक करने के लिये कम्पनी से दो इंजिनीयर घर पर आए थे, उस समय घर पर काम वाली बाई भी थी तो मैंने उसको कहा कि, वह खुद ही उनको मशीन दिखा ले और फिर मैं अन्दर अपने कमरे में चली गई थी, लेकिन मुझे पता नहीं चला कि, बाहर क्या हुआ? लेकिन मुझे बाद में पता चला कि, वह काम वाली तो जल्दी ही अपने घर निकल गई थी और फिर उन इंजिनीयर ने यह तय कर लिया था कि, वह पूरी मशीन को ही बदलकर देंगे तो उन्होंने सर्विस-सेंटर में शिकायत दर्ज़ करवा दी थी और अब उन्हें एक पेपर पर सिर्फ़ मेरे साइन लेकर चले जाना था। और फिर जब वह मुझे ढूँढ रहे थे तब वहाँ पर एक छोटी सी खिड़की ने सारी बातें बता दी। मैं जिस कमरे में बैठकर अपनी चूत में ऊँगली डालकर सहला रही थी वह कमरा तो बन्द था, लेकिन दूसरा दरवाजा पूरी तरह से बन्द नहीं था और उस कमरे की खिड़की भी थोड़ी सी खुली रह गई थी और जब वह दोनों इंजिनीयर मुझे ढूँढ रहे थे, तभी शायद उनमें से एक की नजर मुझ पर पड़ी, लेकिन मैं तो अब तक अपने काम में बहुत मस्त थी। और फिर वहाँ पर एकदम से एक इंजिनियर सीधा मेरे कमरे के अन्दर चला आया था।

मैं उसको वहाँ पर देखकर एकदम से चौंक गई थी और मेरे गले से आवाज़ तक नहीं निकल पाई थी और मैं हिल भी नहीं पाई थी। और फिर उसने मेरे पास आकर मुझे बिल्कुल चुप रहने का इशारा किया और अब वह सीधे मेरी चूत में धीरे-धीरे अपनी ऊँगली डालने लगा और मुझे कुछ भी समझ में नहीं आ रहा था कि, मैं कैसे उससे मना करूँ, मैं एकदम सन्न रह गई थी, लेकिन मुझे उसका छुना बहुत अच्छा भी लगा था। और फिर मैंने उसके आगे फिर कुछ नहीं सोचा, लेकिन आज जब भी मैं उस पल के बारे में सोचती हूँ तो मुझे एक धक्का सा लगता है लेकिन उस समय में बहुत बेबस थी और उस समय मैं और कुछ सोचना भी नहीं चाहती थी। और इतने में वह दूसरा लड़का भी कमरे के अन्दर आ गया था और फिर उसने मुहँ पर अपनी एक ऊँगली रखते हुए सीसीसी… कहते हुए मुझे चुप रहने को कहा और फिर वह मेरे नज़दीक आकर मुझसे बोला कि, मेरा नाम सुधीर है और इस बात की तो तुम बिल्कुल भी चिंता मत करो कि, किसी को कुछ पता चलेगा. और फिर इतने में संजय ने मुझको कहा कि, मुझे लगता है कि, आप बरसों से बहुत प्यासी है? और हम दोनों आपकी यह प्यास ज़रूर बुझा देंगे. आपकी चूत बहुत ही सुंदर और कोमल है। और फिर सुधीर ने भी मुझको कहा कि, हाँ आप एकदम सेक्सी हो। और फिर दोस्तों उनके मुहँ से यह बात सुनकर जैसे मेरी चरम सीमा के सारे बाँध टूट गये थे और अब मैं भी मजे लेने लगी थी और सुधीर मुझे किस करने लगा। और फिर वह मुझसे बोला कि, किस करते वक़्त अपना इतना मुहँ इतना जकड़कर मत रखो अपने होठों को होठों से मिलने तो दो मेरी रानी। दोस्तों मैंने पहली बार इतना गहरा किस किया था कि, मैं शब्दो में उस बात को बता नहीं सकती और मुझे इतनी खुशी मिल रही थी। और अब सुधीर ने अपनी शर्ट को उतार दिया था और पेन्ट को भी और अब उसने मेरा टॉप भी उतार दिया और वैसे हमेशा में घर पर ब्रा नहीं पहनती थी और अब मेरे बब्स पर वह दोनों टूट पड़े थे। सुधीर और संजय उनको मसलने लगे, काटने लगे और ज़ोर-ज़ोर से दबाने लगे और फिर वह दोनों मेरे बब्स के निप्पल को काटने लगे थे। मेरे लिए यह सब बहुत ही अजीब था और मेरी सोच से कुछ ज़्यादा था।

सुधीर सिर्फ़ अंडरवियर में था और अब उसके खड़े लंड का साइज़ मुझको साफ-साफ दिख रहा था, वह बहुत बड़ा था और अब संजय ने भी अपने कपड़े उतार लिए मैं तो सुधीर का लंड देखकर ही एकदम डर गई थी, क्योंकि वह अभी से लगभग 6.5” का था कुछ देर तक किस करने के बाद सुधीर ने अपना लंड बाहर निकाला और मेरे मुहँ के सामने ला दिया और कहा कि, चूसो इसे। मैं इस काम में थोड़ी ना समझ थी, क्योंकि मैंने पहले कभी ऐसा नहीं किया था और फिर जैसे कि, मैंने पहले बताया है कि, मेरे पति ऐसा कुछ नहीं करते थे। अब मुझे देखकर संजय उसी बेडरूम के फ्रीज़ में से चॉकलेट और सॉस बॉटल ले आया और फिर उसने उसको अपने लंड पर लगाया और बोला कि, अब तो मुहँ में ले लो मेडम, तुम्हें यह बहुत अच्छा लगेगा। दोस्तों मैं उस वक़्त कुछ भी करने को तैयार थी, मैंने संजय का लंड अपने मुहँ में ले लिया और फिर मैं उसे चूसने लगी और अब सुधीर भी आ गया और मैं अब बारी-बारी से दोनों के लंड को चूस रही रही थी। और कितना मज़ा आ रहा था मैं बता नहीं सकती कि, मैं उस समय कितनी खुश थी। संजय का लंड बड़ा होकर करीब 7” का हो गया था और सुधीर का 7.5” का काला मोटा नाग बहुत देर तक उन दोनों के लंड को मैं एक-एक करके चूस रही थी। और फिर कुछ देर के बाद संजय वहाँ से बेड पर जाकर सीधा लेट गया और वह फिर मुझसे बोला कि, आ जाओ मेडम हम तुमको आज जन्नत की सैर करवाते है और फिर सुधीर ने मेरी चूत में दो तीन बार ऊँगली डाली और मेरी चूत का गरम रस निकल गया। और फिर संजय ने सुधीर से कहा कि, लगता है यह अब तैयार हो चुकी है और फिर उन्होंने मुझको देखकर कहा कि, चलो सेक्सी आज कुछ तूफ़ानी करते है और अब उसने मुझे संजय के लंड पर बैठने को कहा सुधीर का लंड करीब 7.5” का था और मैंने इतना बड़ा लंड इससे पहले कभी नहीं लिया था. और फिर संजय मुझसे बोला कि, तुम बिल्कुल भी डरो मत, बस थोड़ा सा दर्द तो होगा, लेकिन दर्द में ही तो मज़ा है। और फिर सुधीर ने मुझसे कहा कि, आ जाओ मेडम मुझे आपकी चूत को देखकर लगता नहीं कि, आपने कभी असली लंड से सेक्स किया हो, आ जाओ। और फिर मैंने बहुत साहस किया, लेकिन जैसे ही संजय का लंड मेरी चूत के अन्दर आया तो मैं तो बहुत ज़ोर से चीख पड़ी और अब मैं खड़े होने की नाकाम कोशिश करने लगी, लेकिन सुधीर ने मुझे कसकर पकड़ लिया और ऊपर से भी ज़ोर से झटका देकर मुझे संजय के खड़े बड़े 7” के लंड पर दे मारा। मैं तो ज़ोर से चीख पड़ी आहह… आई…. उईईईई… माँ, सुधीर ने मेरे मुहँ पर हाथ रख दिया जिससे मेरी आवाज़ बाहर ना जाए और फिर उसने संजय को बोला कि, जल्दी-जल्दी धक्के लगाओ अच्छा लगेगा। और फिर मैंने उनको कहा कि, उहह.. प्लीज़ इसे आईईइ… बाहर निकालो। और फिर संजय ने भी मुझको कहा कि, इसे धक्के लगाओ यह तभी बाहर निकलेगा और अब यह घोड़ा मेरा कहा नहीं मानेगा और फिर मैं ज़ोर-ज़ोर से धक्के लगाने लगी और मुझे कुछ देर बाद बहुत अच्छा लगने लगा, लेकिन दर्द भी बहुत हुआ था अहह.. उफफफ्फ़.. और अब मैं सच में जन्नत में थी. वह बहुत दमदार लंड था और आज मुझे पहली बार सेक्स करते समय इतना मज़ा आ रहा था, लेकिन कुछ ही देर में एक बार फिर मज़ा दर्द में बदल गया था। दोस्तों यह कहानी आप कामलीला डॉट कॉम पर पढ़ रहे है।

मैं तो संजय के लंड पर ही थी और अब सुधीर ने मुझे ज़ोर से आगे की तरफ धक्का देकर संजय के ऊपर सुला दिया और पीछे से अपना लंड मेरी गांड में घुसा दिया अहह… उईईईई… माआअ… मर गई हाय मैं मर गईई। और फिर मैंने उससे कहा कि, नहीं, यहाँ पर नहीं, और फिर संजय मुझे नीचे से पकड़ते हुए बोला कि, मज़े करो मेडम, तेरी चूत और गांड दोनों किसी कुँवारी लड़की की जैसी ही है, क्या हमें पागल समझा है जो अब हम चोदेंगे नहीं, मज़ा लो। और फिर इस बार मैं ज़ोर-ज़ोर से रो ही पड़ी थी, क्योंकि मैं उन दोनों के बीच में थी और अब मेरा दर्द बर्दाश्त के बाहर था। सुधीर ने अब डॉगी स्टाइल में मुझे बैठने को कहा और फिर पीछे से मेरी गांड में अपना लंड घुसा दिया और संजय ने अपना लंड मेरे मुहँ में डाल दिया अहहहह आहह. मैं अब फिर से एक बार जन्नत में थी मैं जैसे अब कुछ ही पलों में बिखरने वाली थी और मैं अपने चरम पर पहुँचने वाली थी इस पोज़िशन में सुधीर ने बहुत देर तक मुझे चोदा और मैं भी अपनी कमर को हिला-हिलाकर उसका साथ दे रही थी और संजय मेरे मुहँ को चोद रहा था और अब मैं चरम सीमा पर पहुँच गई थी, लेकिन वह दोनों बारी-बारी से अभी भी मेरी चूत को मार रहे थे। और फिर मैंने उनको कहा कि, अब बस करो, मैं अब बहुत थक चुकी हूँ, तभी इतने में संजय ने कहा कि, हमने आज तक कभी भी इतनी अच्छे से किसी के घर की मशीन को ठीक नहीं किया है। आज तो हमने जमकर मेहनत की है मेडम और फिर संजय ने अपना वीर्य छोड़ दिया और वह भी मेरे मुहँ में और मेरा मुहँ पकड़कर रखा जिससे मैं बाहर ना निकाल सकूँ। और फिर मैं थोड़ी नाराज़ भी हो गई थी तो सुधीर ने अपना सारा वीर्य मेरी छाती पर गिरा दिया था और कहा की तुम सिर्फ़ सुंदर ही नहीं एकदम सेक्सी भी हो। फिर वह दोनों अब अपने अपने कपड़े पहनने लगे और फिर मैंने भी अपने कपड़े पहन लिए थे. और तभी संजय ने मुझसे कहा कि, मेडम जी अब तो इस पेपर्स पर अपने साइन कर दो, बाकी हमारे प्यार की निशानी तो आपके पास है ही। मुझे संजय का यह शरारती स्वभाव बहुत अच्छा लगा और फिर मैं थोड़ा सा उनकी तरफ मुस्कुराई और फिर मैंने उन पेपर पर साइन कर दिया और फिर वह दोनों चले गए थे।

और फिर एक महीने के बाद उन दोनों ने फिर से मुझे फ़ोन किया, लेकिन मैंने इसबार उनको साफ साफ मना कर दिया था। दोस्तो ऐसा नहीं था कि, मुझे उनकी चुदाई में मज़ा नहीं आया था, लेकिन अब मेरी दुनिया अलग थी, सज़ा जैसी ही क्यों ना हो, लेकिन वह ही मेरी दुनिया है और वह ही मेरी वास्तविकता भी है और मैं इसमें ही बहुत खुश हूँ कि, मुझे एकबार ही सही बेहतरीन सेक्स का आनंद तो मिला। और मैंने पहलीबार सेक्स में चरम सीमा पाने का आनंद भी लिया था। मैंने उसके बाद अपने पति से ही अपनी चुदाई करवाना उचित समझा और अब मैं उनके साथ ही बहुत खुश हूँ, चाहे वह कैसे भी हो, मुझे उस बात से कोई फ़र्क नहीं पड़ता। हाँ तो दोस्तों मैं उम्मीद करती हूँ कि, आप सभी को मेरी यह कहानी ज़रूर पसंद आई होगी।

धन्यवाद कामलीला के प्यार पाठकों !!