एक अंजान कुंवारी चूत के लिये मजे

हाय दोस्तों, मेरा Antarvasna नाम कुमार है और मेरी उम्र 25 की साल है और मैं दिखने में काफ़ी स्मार्ट हूँ। मेरी लम्बाई 5.8 इंच है और मेरे लंड का साइज़ 7 इंच लम्बा है जो की हर किसी की चूत को बड़े ही आराम से शांत कर सकता है जिस बात की मुझे बहुत ज़्यादा खुशी भी है क्योकि एक यही चीज़ होती है जिसके चलते सब कुछ ठीक हो सकता है। मैं आज आप सबके लिए एक कहानी लेकर आया हूँ जो की मेरे साथ ही बीती हुई है और एकदम सच्ची कहानी है जिसको पढ़कर आपको बहुत ज़्यादा मज़ा आने लग जाएगा जिसकी मैं गारंटी लेता हूँ।

मैं अपनी कहानी शुरू करने से पहले मैं आपको थोड़ा और भी कुछ बता देता हूँ मेरे बारे में थोड़ा बहुत तो आप जान ही चुके हो तो थोड़ा बहुत और भी जान लो। मैंने ये तो बता दिया की मैं कैसा हूँ पर मैंने ये नहीं बताया की मेरा नेचर कैसा है। दोस्तों मेरा नेचर काफ़ी अच्छा है मतलब की मैं काफ़ी ज़्यादा हँसमुख इंसान हूँ मैं सबको सताता रहता हूँ मेरे साथ जो भी कोई रहता है वो काफ़ी ज़्यादा खुश रहता है और ये देखकर मुझे खुशी भी मिलती है। वैसे मुझे गुस्सा बहुत ही कम आता है पर जब भी आता है तो काफ़ी ख़तरनाक आता है जिसके चलते काफ़ी कुछ नुकसान भी हो जाता है पर हाँ मैं हमेंशा अपने गुस्से पर काबू करने की कोशिश करता रहता हूँ चलो अब मैंने आपको अपने बारे में काफ़ी कुछ बता दिया है इसलिए अब मैं आपको अपनी कहानी की तरफ ले चलता हूँ। ये बात आज से एक साल पहले की है जब मेरी जॉब लगी थी और मुझे जॉब के सिलसिले में दिल्ली जाना था मुझे तो बस तब अपने काम की ही पड़ी हुई थी इसलिए मैंने अपने एक दोस्त से बात करी क्योकि मुझे अब वही पर रहना था तो मैंने जब अपने दोस्त को सब बताया तो उसने मेरी मदद के लिए मुझे मना नहीं किया तब मैंने उसको धन्यवाद कहा और फिर अगले दिन ट्रेन से दिल्ली के लिए रवाना हो गया जब मैं ट्रेन में अपनी सीट पर बैठा तो देखा की ट्रेन काफ़ी ज़्यादा खाली थी और मेरा भी रास्ता लम्बा था इसलिए मैं ट्रेन में अपनी सीट पर सीधा लेट गया। क्योकि ना तो कोई मेरी सीट पर बैठा हुआ था और ना ही मेरे सामने वाली सीट पर कोई बैठा हुआ था मैं मज़े में सीट पर सीधा लेट गया और काफ़ी मज़े से अपने मोबाइल में इयरफोन कानो में लगाकर गाने सुनने लग गया। मैंने ऐसे ही यू.टुब पर भी काफ़ी कुछ देखा क्योकि मेरा टाइम पास तो हो ही नहीं रहा था। अब जब इतना कुछ होने के बाद मुझे नींद सी आने लग गई तो मैं सो भी गया पर मुझे नींद ज़्यादा देर तक नहीं आई क्योकि ट्रेन की खिड़की से हवा आ रही थी जो की मुझे सोने में दिक्कत दे रही थी। मैं अब खुद खड़ा हुआ और फिर टाइम पास करने के लिए ट्रेन के दरवाजे पर आकर खड़ा हो गया मैं ऐसे ही ठंडी हवा का मज़ा ले रहा था की तभी टी.टी. आ गया और मेरे टिकट चेक करने लग गया तब मैंने अपनी जेब से टिकट निकालकर उसको दिखाई और वो देखकर आगे की और चल दिया ऐसे ही मैं अब वही खड़ा रहा की कुछ देर बाद मुझे किसी लड़की की थोड़ी डरी हुई, सहमी हुई सी आवाज़ सुनाई दी। मैंने पीछे मूढ़कर देखा तो सामने वाले डिब्बे में टी.टी. के पास एक लड़की खड़ी थी जिसकी उम्र यही कोई 21 साल की होगी जो काफ़ी सुन्दर और जवान थी मेरा तो उसको देखते ही उसपर दिल आ गया लेकिन उसके पास टिकट ना होने की वजह से वह माफी माँग रही थी पर वो टी.टी उससे ऊँची आवाज़ में बात कर रहा था ये देखकर मुझसे रहा नहीं गया और मैं फिर उसके पास चला गया मैंने तब टी.टी. से वजह पूछी तो उसने बताया की इस लड़की पास टिकट नहीं है इसलिए इसे अगले स्टेशन पर उतरने को कह रहा हूँ। ये सुनकर मैंने उस लड़की की टिकट भी ले ली और उसका सारा जुर्माना भी भर दिया।

फिर उस टी.टी. ने उसे मेरे सामने ही बैठा दिया मैं आपको थोड़ा उस लड़की के बारे में भी बता दूँ, वो लड़की दिखने में ठीक लग रही थी और उस लड़की का नाम परी था मैं अब उससे टाइम पास के लिए बातें करने लग गया पहले तो वो मुझसे झूठ बोलने लग गई पर बाद में खुद ही सब कुछ सच बताने लग गई परी ने मुझे बताया की उसके पापा शराब पीते है और उसकी मम्मी भी नहीं है और उसके पापा घर पर दिनरात झगड़ा करते रहते है इसलिए वह उसने दूर जा रही है, और फिर इतने में ऐसे ही कुछ बातें हो गई और फिर दिल्ली स्टेशन भी आ गया तो मैं उतर गया और वो भी वही उतार गई मैं अब ऑटो लेने लगा तो मैंने देखा की वो भी मेरे पीछे थी मैंने तब उससे पूछा की तुम कहाँ जाओगी तो वो बोली की मुझे नहीं पता की मैं कहाँ जाऊँगी। ये सुनकर मैंने उसे अपने साथ आने को कह दिया मैं और परी घर की और चल पड़े जब हम वहां पर पहुँचे तो वहां पर मेरा दोस्त पहले ही था जिसे मैं मिला और फिर उसने मुझे घर दिखाया जो की काफ़ी अच्छा था और फिर वह मुझे बाइक की चाबी देकर चला गया उसके जाने के बाद मैं फ्रेश होने चला गया और परी चुपचाप एक कौने में बैठी थी। जब मैं बाहर आया तो मैंने उसे फ्रेश होने को कहा तो वो बोली की मेरे पास कपड़े नहीं है ये सुनकर मैंने उसे अपना कुर्ता पजामा दे दिया अब अगले दिन मैं ऑफीस के लिए चला गया और जब घर वापिस आया तो मैंने देखा की उसने घर की साफ सफ़ाई कर रखी थी और मेरे लिए खाना बना लिया था ये देखकर मुझे बहुत अच्छा लगा फिर मैं अंदर आया और थोड़ी देर बाद उसे मेरे साथ चलने को कह दिया फिर मैंने अपनी बाइक निकाली तो वो बोली की मैं नहीं बैठूंगी मुझे डर लगता है तब मैंने कहा की डरने की कोई ज़रूरत नहीं है मुझे पकड़कर बैठ जाना अब वो मेरे कहने पर वैसे ही बैठ गई और उसके बब्स मुझे मेरी पीठ पर महसूस होने लग गये मैंने फिर उसे कपड़े दिलाए और घर आ गया। अगले दिन मैं ऑफीस से जल्दी आ गया तो मैंने उसे बाहर घूमकर आने को कहा तो वो तैयार हो गई मैंने फिर उसे एक फ़िल्म दिखाई और होटल में रुककर हमने खाना खाया और घर की तरफ चल दिए पर रास्ते में बहुत तेज बारिश होने लग गई जिसकी वजह से हम पूरे भीग गये थे। हम फिर जैसे तैसे घर पहुँचे तो वो किचन में जाकर अपने कपड़े बदलने लग गई तभी एकदम से लाइट चली गई और बादलो में बिजली की करकराहट होने लगी जिसके डर से परी भागकर मुझसे आकर लिपट गई मुझे तब बुरा भी नहीं लगा था और मैंने भी उसे अपनी बाहों में जकड़ लिया जैसे ही फिर लाइट आई तो मैंने देखा की वो नीचे से पूरी नंगी थी और मैं ऊपर से नंगा था ये देखते ही मेरा लंड खड़ा हो गया, उसका शरीर एकदम बबकता हुआ था यानि एकदम सेक्सी, और फिर मैंने उसे अपनी बाहों में से छोड़ा ही नहीं फिर मैंने उससे कहा की क्यो ना तुम भी अपने सारे कपड़े उतार दो ये सुनकर वो मेरे साथ कपड़े उतारने लग गई अब वो मेरे सामने बिल्कुल नंगी थी और मैं भी अब उसके सामने बिल्कुल नंगा था उसका चिकना जिस्म देखकर मेरा लंड खड़ा हो गया था अब मैंने उसे बाहों में ले लिया और उसे किस करने लग गया जिसमें वो भी मेरा साथ देने लग गई। अब मैंने बिना कोई देर किए मेरे लंड को उसे चाटने को कहा तो वो मेरे लंड पर अपनी जीभ लगाकर उसको अपने मुहँ में लेकर चाटने लग गई जिससे मुझे मज़ा आने लगा और परी मेरे लंड को जैसे जैसे अपने मुहँ में आगे पीछे करती तो मेरा हाल बुरा हो जाता था। परी मेरे लंड को बहुत ही अच्छे से चूस रही थी मन तो कर रहा था की जिंदगी भर इसको लंड ही चूसाता रहूँ लेकिन ऐसा हो नहीं सकता था। और फिर मैंने उसे बेड पर लेटाया और उसकी चूत को अपनी उंगलियो से चोदने लग गया जिसके चलते वो गरम साँसे निकालने लग गई और आहह… आहह… करने लग गई और इसी बीच उसका पानी निकल गया। दोस्तों यह कहानी आप कामलीला डॉट कॉम पर पढ़ रहे है।

फिर मैंने भी बिना कोई देर किए मेरा लंड उसकी चिकनी और रसीली चूत पर रखा और एक धक्के में ही अंदर डाल दिया लंड अंदर जाते ही वो चिल्लाई पर मैंने कोई परवाह ना करते हुए अपना लंड पूरा अंदर तक डालकर उसको चोदने लग गया। परी ज़ोर ज़ोर से चिल्लाने लग गई आईई… उईई… कहने लगी मैं पहली बार यह सब कर रही हूँ तुम धीरे से डालो ना, मुझे बहुत दर्द हो रहा है। फिर उसके ऐसे कहते ही मैं भी उसकी चूत में धीरे-धीरे से झटके देने लगा जब उसका दर्द कुछ कम हुआ तो उसने भी मेरा पूरा साथ देना शुरु कर दिया और वह भी मज़े लेने लग गई और फिर मैं उसकी चूत में जोर जोर से झटके देने लगा और साथ ही उससे पूछने लगा की क्या तुमने पहले भी अपनी चूत मरवाई है क्या? तो वह बोलने लगी बाबु यह सब तो हमारे यहाँ मेरे साथ बहुत ही पहले हो चुका है लेकिन तुम्हारा लंड बहुत मोटा है इसलिये मुझे बहुत दर्द हो रहा है, उसकी यह बात सुनकर मैं और भी जोश में आ गया और उसकी और जोर जोर से ठुकाई करने लगा और करीब 20 मिनट की चुदाई के बाद मैंने उसकी चूत में ही अपना पानी निकाल दिया और वो भी अब शांत हो चुकी थी उसकी चूत ने भी अपना पानी छोड़ दिया था। अब मैं उसके साथ जब चाहूं ये सब कर सकता हूँ और वो भी मुझे रोकती नहीं है लेकिन अब मैंने उसे अपने घर पर भेज दिया है।

धन्यवाद कामलीला डॉट कॉम के प्यारे पाठकों !!