एक यादगार चुदाई की दास्तान भाग -2

हाय फ्रेंड्स, Antarvasna मैं मनीषा एकबार फिर से आप सभी के सामने हाज़िर हूँ अपनी कहानी “एक यादगार चुदाई की दास्तान” के दूसरे भाग के साथ और मैं आशा करती हूँ कि, आप सभी को इस कहानी का पहला भाग जरूर पसन्द आया होगा। अब आगे की कहानी कुछ इस प्रकार से है।

और फिर स्टोर-रूम का दरवाजा बन्द करके रोहित ने लाइट चालू कर दी थी और फिर उसने मुझको अपनी बाहों में ले लिया था। दोस्तों वैसे नीचे स्टोर-रूम में हम ज़्यादा सुरक्षित थे क्योंकि नीचे से ऊपर आवाज़ भी नहीं जाने वाली थी और जब कोई ऊपर से नीचे आता तो हमें पहले ही पता चल सकता था. और फिर रोहित ने फिर से मेरे होठों को चूसना चालू कर दिया था और साथ ही वह मेरे बालों में हाथ भी घुमाने लग गया था और मैं भी उसका पूरा साथ दे रही थी। फिर उसने मेरी नाइटी को भी उतार दिया था मैंने ब्रा तो पहले से ही नहीं पहनी थी, मैं तो बस पैन्टी में ही थी। और फिर मैंने भी आगे बढकर रोहित की पेन्ट और अंडरवियर को एकसाथ ही उतार दिया था और फिर जिससे उसका साँप जैसा काला लंड मेरी आँखों के सामने आ गया था, रोहित का लंड उस समय एकदम तना हुआ था और फिर मैंने बिना देर किए ही उसको झट से अपने मुहँ में ले लिया था। और फिर यह सब देखकर तो रोहित जैसे गदगद हो उठा था और फिर वह भी बड़े ही प्यार से मेरे बालों में हाथ घुमाता हुआ मेरे सिर को पकड़कर आगे-पीछे करने लग गया था। और फिर मैं काफ़ी देर तक उसका लंड चूसती रही, उसका लंड इतना बड़ा था कि, वह पूरा मेरे मुहँ में नहीं जा रहा था। मगर रोहित अपना पूरा लंड मेरे मुहँ में डालना चाहता था और फिर इसीलिए वह मेरे सिर को पकड़कर अपनी कमर को जोर-जोर से हिलाने लग गया था, मगर ऐसा करने से मुझे तकलीफ़ होने लगी थी और मेरी साँस भी अटकने लग गई थी और फिर मैंने जल्दी से रोहित का लंड अपने मुहँ से बाहर निकाल लिया था और फिर मैं रोहित की तरफ देखने लग गई थी. और फिर रोहित को भी अपनी ग़लती का एहसास हो गया था तो उसने मुझे सॉरी कहा और फिर उसने मुझे मेरी बाहों से पकड़कर खड़ा कर दिया था। और फिर वह फिर से मेरे नंगे बदन के साथ चिपक गया था, मेरी मुहँ की चुदाई के दौरान रोहित ने अपनी शर्ट भी उतार दी थी। और फिर अब रोहित ने मेरी पैन्टी भी उतार दी और फिर वह अपना हाथ मेरी चूत पर मसलने लग गया था। दोस्तों मेरी चूत तो पहले से ही पानी छोड़ रही थी और ऊपर से फिर उसका हाथ लगते ही मेरी चूत के होंठ खुल गए थे और रोहित ने फिर अपनी ऊँगली मेरी चूत में घुसा दी थी और उसके हाथ पर मेरी चूत अब अपना रस निकालने लग गई थी। और फिर रोहित ने वहाँ पर पड़े टेबल पर मुझे बैठा दिया था और वह खुद मेरी दोनों टाँगों के बीच में आ गया था, मेरी चूत अब बिल्कुल उसके लंड के सामने थी और फिर उसने मेरी चूत के मुहँ के ऊपर अपना लंड रखा। दोस्तों यह कहानी आप कामलीला डॉट कॉम पर पढ़ रहे है।

और फिर उसने अपने दोनों हाथों को मेरी गांड पर रखकर मुझे अपनी और खींचा तो रोहित का लंड अब धीरे-धीरे मेरी चूत के अन्दर घुसने लगा था और वह मेरी चूत की दीवारों से टकराने लग गया था। और फिर मैंने झट से रोहित का लंड अपने हाथ में लिया और फिर थोड़ा संभलकर उसके लंड को अपनी चूत में डालने लगी और रोहित भी धीरे-धीरे आगे-पीछे हो रहा था और उसका काला लंड मेरी गोरी चूत के लाल होंठों में समाता जा रहा था, उसका आधे से ज़्यादा लंड मेरी चूत में घुस गया था और जिससे अब मुझे भी थोड़ा-थोड़ा दर्द होने लग गया था। और फिर मैंने अपनी दोनों बाहों के ऊपर वजन डालकर अपने दोनों कूल्हों को उठाकर उसके लंड को ठीक से अपनी चूत में सेट करना चाहा तो रोहित ने मुझे ऊपर ही उठा लिया था जिससे मेरा सारा वजन उसके लंड पर पड़ा और उसका लंड मेरी चूत की दीवारों को फाड़ने लगा और अन्दर घुसने लग गया था, जिससे मेरी हल्की सी चीख भी निकल गई थी और मेरी टाँगे अपने आप रोहित की कमर से लिपट गई थी और मेरी बाहें भी उसके गले के साथ लिपट गई थी। और फिर मैं थोड़ा सा संभल तो गई थी, मगर अभी भी रोहित का लंड मेरी चूत में घुसता जा रहा था और रोहित को भी वह सब अच्छा लग रहा था। और फिर वह टेबल से दूर हट गया था और फिर वह मुझको वैसे ही उठाए हुए अपने लंड को हिला-हिलाकर मुझको चोदने लग गया था और मैंने भी अब उसके लंड को अपनी चूत में ठीक से सेट कर लिया था और मुझे भी अब खूब मज़ा आ रहा था, मेरे बाल खुले हुए थे और वह मेरी पीठ पर लटक रहे थे और मैं रोहित की कमर के ऊपर उसके बदन से चिपकी हुई थी और नीचे से रोहित का लंड मेरी चूत के अन्दर-बाहर हो रहा था। और फिर रोहित 10-15 मिनट तक वैसे ही मुझको उठाकर चोदता रहा और मैं तब तक 2-3 बार झड़ चुकी थी और मेरी चूत का सारा माल रोहित के लंड के सहारे बहता हुआ नीचे आ रहा था। और फिर रोहित मुझे टेबल के पास ले गया और फिर उसने मुझको टेबल के ऊपर लिटा दिया था मगर उसने मेरा सिर और कन्धे ही टेबल पर रखे थे, मेरा बाकी का बदन तो उसने अपने हाथों से संभाल लिया था और फिर वह वैसे ही झुककर मेरी चूत को पेलने लग गया था और मेरी टाँगे भी अब उसकी कमर से खुल चुकी थी मगर मैंने उनको ऊपर ही हवा में उठाकर रखा था। रोहित अब अपने लंड को मेरी चूत में से बाहर निकालता और फिर से मेरी चूत में डालता, जिससे मेरी चूत से फच-फच की आवाज़ निकल रही थी।

दोस्तों मुझे तो अब यह भी याद नहीं रहा था कि, मैं कितनी बार झड़ चुकी हूँ, मगर रोहित था की मुझे बहुत बुरे तरीके से चोदे जा रहा था और उसका लंड अभी भी पूरा तना हुआ था। और फिर रोहित ने फिर से मुझे अपना लंड मेरी चूत में डाले हुए ही टेबल से उठा लिया था और फिर वहाँ पर पड़ी एक दूसरी बैंच पर मुझे लिटा दिया था, उस बैंच के ऊपर गद्दा लगा हुआ था और रोहित बैंच के दोनों तरफ अपनी टाँगें करके मेरे ऊपर आ गया था और अब रोहित मुझे और भी बेदर्दी से चोदने लग गया था और वह अब जोर-जोर के धक्के मारने लग गया था जिसकी वजह से मेरे मुहँ से आहहह… इस्सस… की आवाज़ें निकल रही थी। और फिर रोहित का बदन भी अकड़ने लगा था और फिर कुछ ही धक्कों के बाद रोहित ने अपने गरमा-गरम लावे को मेरी चूत में उडेल दिया था। दोस्तों उसका आखरी धक्का इतना तेज़ था कि, मुझे ऐसा लगा कि, जैसे उसका लंड मेरी चूत को ही नहीं मेरे पेट को भी फाड़कर बाहर आ जाएगा। और फिर रोहित अब रुक-रुककर धक्के मारने लगा और उसका माल भी मेरी चूत से बहने लग गया था और मैं एकबार और झड़ गई थी। और फिर रोहित मेरे ऊपर ही लेट गया था और मैंने भी रोहित के गले में कसके अपनी बाहें डाल ली थी और अपनी टाँगें भी मैंने उसके साथ समेट ली थी।

और फिर हम दोनों वैसे ही 10 मिनट तक लेटे रहे और रोहित का लंड अभी भी मेरी चूत में ही था, मगर अब वह ढीला पड़ चुका था और फिर मेरी चूत में से बहते पानी के साथ वह भी फिसलकर बाहर आ रहा था। और फिर रोहित मेरे ऊपर से उठ गया था और उसका लंड भी मेरी चूत में से निकल गया था और मेरी टाँगें जो मैंने ऊपर उठा रखी थी वह दर्द के मारे अब नीचे नहीं हो रही थी। और फिर मैं किसी तरह धीरे-धीरे उठी और फिर खड़ी हो गई थी मेरी टाँगें उस समय बुरी तरह से काँप रही थी और मेरी चूत का भी बहुत बुरा हाल था, मगर फिर भी मैं सन्तुष्ट थी, जिस तरह से मुझे रोहित ने चोदा था, मैं भी वैसे ही चुदना चाह रही थी। और फिर मैंने अपनी नाइटी पहनी और रोहित ने भी अपनी पेन्ट और शर्ट पहन ली थी मगर रोहित फिर से मुझे अपनी गोद में लेकर बैंच पर बैठ गया था और वह मेरे गालों को और गर्दन को चूमने लग गया था। हमको नीचे आए हुए करीब 1 घंटा हो चुका था, इसलिए मैंने रोहित से जल्दी ऊपर जाने को कहा ताकि किसी को पता ना चल जाए। और फिर रोहित भी मेरी बात को मान गया था और फिर हम दोनों ऊपर जाने लग गए थे मगर मैंने रोहित को कहा कि, तुम पहले जाओ और मैं थोड़ा सा बाद में आती हूँ। ताकि कोई हमें एक साथ ना देखे, इसलिए फिर रोहित पहले ऊपर चला गया और मैं वहीं रुक गई थी. और फिर थोड़ी देर के बाद मैं भी ऊपर आ गई थी, मगर सीढ़ियाँ चढ़ते समय मेरी चूत और टाँगों का बहुत बुरा हाल हो रहा था। और फिर जैसे ही मैं ऊपर आई तो मैंने देखा कि, मौसा जी अपने कमरे में से बाहर निकलकर बाथरूम की तरफ जा रहे है, और मौसा जी ने भी मुझे देख लिया था और फिर मौसा जी ने लाइट जलाई और मुझसे कहा कि, मनीषा, तुम नीचे से कहाँ से आ रही हो, और तुम अब तक सोई नहीं क्या? तो फिर मैंने उनको कहा कि, नहीं मौसा जी बस नींद नहीं आ रही थी तो वैसे ही टहलने गई थी, मगर मेरे बिखरे हुए बाल और मेरी हालत देखकर शायद उनको शक हो गया था। और फिर मेरे कमरे के अन्दर चले जाने के बाद मौसा जी नीचे भी देखने गए थे, मगर अब जो होना था वह तो हो ही चुका था। और फिर मैं बेड के पास गई तो रोहित पहले वाली जगह पर ही मेरा इन्तजार कर रहा था और फिर मैं भी उसके पास जाकर सो गई थी मगर तभी मुझे याद आया कि, मैं अपनी पैन्टी तो नीचे स्टोर-रूम में ही भूल आई हूँ, अगर वह कहीं मौसा जी के हाथ में लग गई तो? उस समय मौसा जी भी बाहर थे तो मैं नीचे नहीं जा पाई थी और मुझको नींद भी नहीं आ रही थी और फिर सुबह सबसे पहले नीचे जाकर मैंने अपनी पैन्टी को संभाला और फिर तब कहीं जाकर मैंने चैन की साँस ली।

दोस्तों उसके बाद मैं वहाँ जब तक रही मैंने रोहित से 3 बार अपनी चुदाई और करवाई थी।

धन्यवाद कामलीला के प्यारे पाठकों !!