रखैल की बेटी की चूत का हैप्पी बर्थ-डे

हाय फ्रेंड्स, Antarvasna मेरा नाम जोसेफ है और मैं चैन्नई के एक गाँव में निवास करता हूँ। और मैं भी आप सभी की तरह ही कामलीला डॉट कॉम का एक नियमित पाठक हूँ और दोस्तों मैं काफी दिनों से यह सोच रहा था कि, मैं कामलीला के पाठकों के लिए कुछ करूँ, खास एक ही वजह के लिए और वह है हवस। दोस्तों जवानी की उम्र में बहुत सारी बैचेनियाँ होती है और इन सबको मिटाने के लिए कुछ रास्ते है जिनमें से एक आपके सामने मैं रख रहा हूँ।

दोस्तों मैं एक बड़े लंड का मालिक हूँ और सच तो यह है कि, चोदने के मामले में मैं अपने गाँव का राउडी हूँ बोले तो जो मैं कहता हूँ वह तो मैं करता ही हूँ पर जो मैं नहीं कहता हूँ वह भी ज़रूर करता हूँ। रंडीबाज़ी से लेकर जुआ और दारू तक कोई ऐसा काम नहीं है जो मुझसे बचा हो और इसलिए मेरे गाँव में मेरी दो तीन रखैलें भी है और उन सबमें मैं बहुत फैमस भी है। उनमें से रोजी जो कि, मेरी एक पुरानी प्रेमिका है और वह उसकी शादी के बाद मेरी एक रखैल बनकर रह गई है। उसकी शादी भी दूसरी जगह हुई है पर वह अपने ससुराल में ना रहकर मेरे बड़े लंड के लालच में मेरे पास ही आकर रहती है। इससे यह बात साबित होती है कि, लड़कियों और औरतों को ना केवल राज चाहिए बल्कि उनको उनकी पसन्द का लंड भी चाहिए। और वह लंड जो उनकी चूत के साथ-साथ कभी-कभी उनकी गांड की खुजली को भी मिटा सके और उनके हलक में घुसकर उनकी जुबान की बोलती भी बन्द कर दे। हाँ तो दोस्तों यहीं से शुरु होती है चूत और गांड को फाड़ने की एक सच्ची कहानी जो कुछ इस तरह से है….

दोस्तों रोजी की एक बेटी भी है और रोजी अब 38 साल की हो चली है और उसकी बेटी 20 की है। मैं एक कसरती बदन का मालिक हूँ और चोदने के लिए मैं रोज कसरत करने के बाद असली बादाम-पिस्ता खाकर दंड पेलता हूँ और शरीर को एकदम कसा हुआ ही रखता हूँ, इसलिए मेरी असली उम्र कोई नहीं बता सकता है। उस दिन रोजी की बेटी जैनी का बर्थ-डे था और मुझे भी वहाँ बुलाया गया था वैसे मैं काफ़ी दिनों से जैनी के ऊपर नज़रे गड़ाए हुए था लेकिन अब तक वह कमसिन थी इसलिए मैं उसे चोदना नहीं चाहता था और रोजी भी मुझे रोक लेती थी और वह मुझसे यह कहती थी कि, साले यह तेरी ही बेटी है और तू उसकी चूत को तो छोड़ दे। पर मैं कमीना कहाँ मानने वाला था मैं तो यह जानता था कि, रंडियों की बेटियाँ भी रंडी ही होती है और वह भी चुदने के लिए ही बनी होती है। इस लिहाज से उसको चोदने के लिए मुझे सिर्फ़ और सिर्फ़ जैनी की हाँ की ज़रूरत थी और वह उस दिन 20 साल की हो गई थी। और मैं उस दिन कन्डोम का पैकेट लेकर उसके घर आ गया था। उस दिन मैंने रोजी को 10,000 रुपये दे दिये थे और फिर धूमधाम से बर्थ-डे भी मनाया गया। और फिर रात में रोजी ने मुझे और जैनी को एक कमरे में धकेल दिया और फिर वह खुद दरवाजे को बाहर से बन्द करके चली गई थी और बैचारी जैनी को तो पता भी नहीं था कि, माँ ने दरवाजा बन्द क्यों किया और फिर मेरे सामने आकर उसने मुझसे बड़ी ही मासूमियत से पूछा कि, आप मेरे साथ क्या करोगे? तो फिर मैंने उसको कहा कि, वही जो मैं और तुम्हारी मम्मी करते है, कभी देखा है या नहीं तुमने?

तो वह मुझसे बोली कि, वह तो बहुत ही मजेदार होता है सच में आप मेरे साथ भी वही करोगे जो आप मम्मी के साथ करते हो? दोस्तों उसके ऐसा कहने से ही मेरे होश उड़ गये थे और शायद मैंने सही ही कहा था। और फिर मैंने उसको कहा कि, हाँ मेरी रानी मैं तुम्हारे साथ भी वही सब करने वाला हूँ जो कि, मैं तुम्हारी मम्मी के साथ अक्सर करता हूँ मेरी रानी। और फिर मैंने उसके छोटे-छोटे 32” की साइज़ के बब्स को पकड़ लिया और फिर मैंने उसको कहा कि, रानी इधर आओ और फिर मैंने उसके टॉप को खोल दिया था और उसकी स्कर्ट को भी नीचे सरका दिया था। दोस्तों बेचारी की चूत को ढकने के लिये अब उसके बदन के ऊपर एक कपडा भी नहीं बचा था और फिर उसने शर्म के मारे अपनी चूत को छिपा लिया था। और फिर ऐसा होते देखकर मुझे उसकी मासूमियत का अहसास होने लगा, वह बिल्कुल कोरी-कुँवारी और साफ-सुथरी लड़की थी। और फिर मैंने उसको कहा कि, आओ मेरे पास बैठो डार्लिंग और फिर सोफे पर बिठाकर मैं जैनी की चूत पर नारियल का तेल डालने लगा और उसका मसाज करने लगा तो जैनी तो मदहोश सी होती जा रही थी और उसको देखकर मुझे भी मस्ती चढ़ती जा रही थी। और फिर मैं उसकी नाभि, चूत और गांड पर भी तेल लगाकर मसाज कर रहा था जिससे उसको भी बहुत मज़ा आ रहा था और फिर जैनी एकदम उत्तेजना के मारे काँपने लग गई थी और तब तक मेरा लंड भी धीरे-धीरे खड़ा हो रहा था उसे चोदने के लिए और फिर मैंने देखा कि, वह सहमी हुई थी मैंने उसका डर खत्म करके उसको चोदने के लिए उसे पुचकारा और कहा कि, डरो मत कुछ भी नहीं होगा, यह सब तो आइसक्रीम खाने जितना ही आसान है आओ मैं तुम्हे भी आइसक्रीम खाने की प्रेक्टीस करवा दूँ। और फिर मैंने उसको पूछा कि, तुम आइसक्रीम तो खाती ही होगी ना? तो वह मुझसे बोली कि, हाँ अंकल खाई तो है और फिर मैंने उससे पूछा कि, तुम आइसक्रीम को दाँतों से काटकर खाती हो या जीभ से चाटकर? तो उसने मुझको कहा कि, मैं आइसक्रीम काटकर नहीं खाती बस मुहँ में लेकर चूस लेती हूँ। तो फिर मैंने उसको कहा कि, तो फिर लो और मेरे इस लंड को और इसको भी आइसक्रीम की तरह ही चूसो और खाने की कोशिश करो, तुम इसको चूसोगी तो मैं 1000 रुपये दूँगा, और हाँ तुम इसको काटना मत डार्लिंग।

और फिर उसने खुशी-खुशी मेरे लंड को अपने मुहँ में लेकर चूसना शुरु किया और फिर उसने बड़े ही ग़ज़ब तरीके से मेरे लंड के टोपे पर अपने लाल-लाल गुलाबी होठों की पकड़ को बनाते हुए अपनी जीभ से मेरे लंड के छेद को चूसने लगी जिससे मुझको इतनी उत्तेजना हो रही थी कि, मेरा तो मन किया कि, मैं जैनी के मुहँ में ही झड़ जाऊँ पर अभी चिड़िया को दाना खाना सिखाना था तो इसलिए मैंने उसको कुछ भी नहीं किया था और मैं मज़े से सिसकियां लेते हुए उस पल का मज़ा लेता गया और साथ ही अपने हाथ से उसके बब्स को हल्के-हल्के सहलाते हुए मैंने अपना एक हाथ उसकी गांड पर भी रख दिया था। और फिर वह धीरे-धीरे एक कली की तरह सकुचाती हुई मेरे लंड को चूसती रही और मैं मज़ा लेता रहा। और फिर उसको सोफे पर लिटाकर मैंने उसकी गर्दन को सोफे के हत्तों के नीचे लटकाकर मैंने उसके मुहँ से ऊपर से आते हुए अपना लंड उसके मुहँ में घुसाकर अंदर ठूस दिया था और फिर मैं ज़ोर-ज़ोर से उसके मुहँ में झटके मारने लगा। दोस्तों उस समय जैनी के मुहँ को ज़ोर-ज़ोर से चोदने का मज़ा ही कुछ और था। अब वह आहहह… गून्गून्गून… करने लगी थी और वह अपने हाथों से मेरे लंड को अपने मुहँ से निकालने का प्रयास करने लग गई थी पर सच तो यह था कि, अब मैं कामलीला के अंतिम पायदान पर था और उसकी हर कोशिश अब बेकार थी। और फिर मैंने धीरे-धीरे अपना लंड उसके हलक में डालकर अपना वीर्य ज़ोर से उसके हलक के नीचे उतार दिया था और फिर जब मैंने अपना लंड उसके मुहँ से बाहर खींचा तो वह उल्टी करने लग गई थी और फिर मैंने उसका हाथ पकड़ते हुए उससे पूछा कि, कैसी लगी आइसक्रीम डार्लिंग? तो वह मुझसे बोली कि, बहुत दर्द हो रहा था अंकल।

तो फिर मैंने उसको कहा कि, चलो मैं अब तुम्हारा दर्द कुछ कम करता हूँ डार्लिंग और फिर उससे यह कहकर मैंने उसको सोफे पर उसकी दोनों टाँगें खोलकर लिटा दिया था और फिर खुद मैंने उसकी चूत में मुहँ डाल दिया था और फिर तो जैनी के होश ही उड़ गये थे क्योंकि उसको बड़ा मज़ा आ रहा था। और फिर जैनी मेरे बालों में हाथ रखकर उनको मरोड़ने लगी और फिर कुछ ही देर के बाद जैनी की चूत से पानी निकल पड़ा था जिसे मैंने पी लिया था। उसकी चूत का नमकीन पानी पीकर मैं अब उसको चोदने के लिए तैयार हो गया था। और फिर जैनी की टाँगों को थोड़ा और खोलकर मैंने अपना लंड अब उसकी चूत पर रख दिया था जिससे वह छटपटा सी रही थी लेकिन मैंने उसके होठों पर किस करते हुए अपने लंड को सही तरह से सेट कर दिया था। और फिर मेरे अपने लंड का टोपा उसकी चूत के अन्दर करते ही वह कराह उठी थी लेकिन मेरे होठों से उसके होंठ लगे हुए थे इसलिये वह ज्यादा जोर से चीख नहीं पाई थी। और फिर मैंने अपना आधा लंड उसकी चूत के अन्दर किया तो वह और भी ज़ोर से छटपटा उठी थी। और फिर मैं अब थोड़ा रुका और मैंने उसको चोदना बन्द कर दिया था जैनी की आँखों से उस समय आँसूं निकल पड़े थे और वह ज़ोर-जोर से मुझे खुद से दूर करने के लिये धक्का देने लग गई थी और फिर मैंने उसे चोदा नहीं और अपने लंड को भी वैसे ही रहने दिया। दोस्तों यह कहानी आप कामलीला डॉट कॉम पर पढ़ रहे है।

और फिर 5-7 मिनट तक उसे कुछ भी नहीं करने के बाद मैंने उसके कान के ऊपर हल्के से किस किया और फिर वह फिर से गरम हुई तो यह देखकर मैंने उसकी चूत में एक झटका फिर से मारा और अब मेरा लंड पूरा का पूरा उसकी टाइट चूत में घुस गया था और जैनी कराहकर मुझसे लिपट गई थी और फिर मैंने ज़ोर-ज़ोर से उसे चोदना शुरु कर दिया था। दोस्तों उस चुदाई में जैनी की चूत से खून निकल पड़ा था और वह मेरे लंड पर लग गया था लेकिन मैंने उसे तब तक चोदना जारी रखा जब तक कि, मेरे लंड से निकला हुआ वीर्य उसकी चूत के खून में मिल नहीं गया था। और फिर जब वह कुछ शान्त हो गई थी और दर्द के मारे रो रही थी तो मैंने उसके कपड़े उसके ऊपर फेंके और फिर मैंने उसको कहा कि, अब तुमको कभी तुम्हारी मम्मी के साथ भी मिलकर करना हो तो मुझे बता देना वरना हम अकले तो करेंगे ही।

और फिर जब मैं बाहर आया तो रोजी वहीँ पर खड़ी थी, मैंने उसको कहा कि, तुम्हारी बेटी की चूत का “हैप्पी बर्थ-डे” हो चुका है और जाओ अब तुम अन्दर जाकर बेड की चादर बदल दो।

धन्यवाद कामलीला के प्यारे पाठकों !!