चुदाई की तड़प मेरे ऑफिस वाली बॉस की

नमस्कार दोस्तों, Antarvasna मेरा नाम राहुल है, मेरी उम्र 25 साल की है और मैं जबलपुर का रहने वाला हूँ। कामलीला डॉट कॉम वेबसाइट पर यह मेरी पहली कहानी है जो आप पढ़ने जा रहे है। अब आपका ज्यादा समय ना लेकर मैं “सीधी बात नो बकवास” वाले फार्मूले पर आता हूँ।

दोस्तों मैंने जैसे ही अपनी कॉलेज की पढ़ाई पूरी करी, मुझे नोएड़ा की एक बहुत ही अच्छी कम्पनी में नौकरी मिल गई थी और वहाँ पर सहकर्मी भी बहुत ही अच्छे थे, पर सबसे अच्छी बात यह थी कि, हमारी मैनेजर एक महिला थी और वह बहुत ही खुले स्वभाव की थी। मैंने जब उस कम्पनी में काम करना शुरु किया था तो हमारी मैनेजर ने मुझे बहुत सहयोग किया था। और फिर देखते-देखते कैसे महीना बीत गया पता ही नहीं चला और मेरी पहली तनख्वाह आ गई थी। दोस्तों मुझे अच्छी तरह से याद है कि, मैं उस महीनें की 5 तारीख को अपने दोस्तों को पार्टी देने के लिए एक बीयर बार में ले गया था। हालांकि वह रात एक सर्दी की रात थी, इसलिए बार में भीड़ कुछ ज्यादा थी, पर मेरे एक दोस्त की जान पहचान वहाँ के मैनेजर से होने के कारण हमको जल्दी ही प्रवेश मिल गया था। और फिर हमने अन्दर जाकर खूब डान्स किया और फिर मेरे दोनों दोस्त तो बीयर पीने चले गए थे और मैं डान्स फ्लोर पर ही डान्स करता रहा। और तभी अचानक मेरी नज़र एक जगह पर रुक गई थी और मैंने देखा कि, वहाँ पर एक कौने में मेरी कम्पनी की मैनेजर दीपिका मेमसाहब बैठी हुई थी, शायद उन्होंने भी मुझे देख लिया था। और फिर मैं उनके पास गया और उनको गुड ईव्निंग मेमसाहब बोला।

दीपिका :- गुड ईव्निंग।

और फिर उसकी बातों से मुझको लगा कि, वह हल्के से नशे में थी और फिर मैंने उनको पूछा कि, आपके साथ कौन आया है मेमसाहब?

इस पर वह गुस्से से मुझसे बोली कि, क्या मेमसाहब.. मेमसाहब… लगा रखा है दीपिका मेमसाहब मैं सिर्फ़ ऑफिस में हूँ। और फिर मैंने उनको कुछ नहीं कहा और चुपचाप खड़ा रहा, और फिर दीपिका मुझसे बोली कि, तुम किसके साथ आए हो, कोई गर्लफ्रेंड है क्या? दोस्तों इस बार मैंने उसकी तरफ देखा तो मैं उनको देखता ही रह गया था, क्या मस्त लग रही थी वह, एकदम कसी हुई जीन्स और काले रंग की डिज़ाइनर टी-शर्ट जिसमें से उनके उठे हुए बब्स बाहर निकलने को बैताब थे। मैं तो बस एकटक खड़ा होकर उनको ही देखता रहा और फिर उसने भी इस तरह से देखते हुए मुझको देख लिया था और फिर वह मुझसे बोली कि, मैं तुम्हे कब से डान्स करते हुए देख रही थी तुम बहुत अच्छा डान्स करते हो। क्या तुम मेरे साथ भी डान्स करोगे? तो मैंने उनको कहा कि, हाँ, क्यों नहीं। और फिर हम दोनों डान्स फ्लोर पर चले गये। पहले तो हम दोनों कुछ दूरी पर रहकर डान्स कर रहे थे और वह मुझको अपनी नशीली आँखों से देख रही थी, पर मेरी नज़र तो बार-बार उसके बब्स की तरफ जा रही थी। डान्स करते समय उसके बब्स ऐसे उछल रहे थे कि, मानों वह आज़ाद होना चाह रहे हो, पर मैं कर भी क्या सकता था मैं तो बस अपनी चोर नजरों से उनको निहार रहा था। अब उस पर धीरे-धीरे बीयर का असर होने लगा था। और फिर जैसे-जैसे उसका नशा बढ़ रहा था तो उसका संकोच भी मर रहा था और वह मेरे और भी करीब आ गई थी। और फिर उसने मेरा हाथ पकड़कर अपनी कमर पर रख दिया था और अपनी बाहें भी मेरे गले में डाल दी थी। और फिर वह अपने बब्स को मेरे सीने से सटाकर बड़ी ही मस्ती भरी आवाजें निकालने लग गई थी। दोस्तों उसके ऐसा करने से मेरा लंड 90 डिग्री का एंगल बनाकर खड़ा हो गया था और तब मुझे बिल्कुल भी समझ में नहीं आ रहा था कि, मैं क्या करूँ। वह अपने बब्स को मेरे सीने पर रगड़े जा रही थी और साथ ही वह मेरे हाथों को बार-बार अपने कूल्हों पर ले जा रही थी। दोस्तों उस समय मुझे शरम तो बहुत आ रही थी क्योंकि मेरे दोस्त भी यह सब होता देख रहे थे, पर मुझे मज़ा भी बहुत आ रहा था। और फिर किसी तरह मैंने खुद को संभाला और फिर मैं उसे एक कौने में ले गया और वहाँ पर मैंने उसको एक कुर्सी पर बैठाया और फिर मैंने उसको बोला कि, दीपिका तुम्हे अब बहुत चढ़ गई है, चलो अब मैं तुमको अपने घर छोड़ देता हूँ। और फिर दीपिका भी इस बात के लिए राज़ी हो गई थी. और फिर मैंने अपने दोस्तों को दूर से ही इशारा किया और फिर हम ऑटो पकड़कर उसके घर की तरफ चल दिए थे।

दोस्तों ऑटो में भी वह मुझसे चिपकी रही और वह मेरे गालों को चूम रही थी और उसने मेरे लंड पर अपना हाथ भी रख दिया था। सच बताऊँ तो दोस्तों उस समय मेरा भी बड़ा बुरा हाल था और उस समय मेरा मन तो कर रहा था कि, साली को इसी ऑटो में अभी ही चोद दूँ, लेकिन मैंने अपने आपको किसी तरह संभाला और फिर लगभग 30 मिनट के बाद हम दोनों दीपिका के घर पहुँच गए थे। और फिर मैंने ऑटो वाले को पैसे दिए और उसको चलता किया। और फिर मैंने दीपिका से पूछा कि, क्या अब आप खुद चली जाओगी? क्योंकि मुझे उस समय यह डर लग रहा था कि, अगर इसको मैं अन्दर ले गया तो इसके घर वाले क्या सोचेंगे पर उसे लड़खडाता हुआ देखकर मैंने उसको कहा कि, चलो मैं तुम्हे घर के अन्दर तक छोड़ देता हूँ। और फिर उसके घर के पास पहुँचकर मैंने दरवाज़े पर ताला लगा देखकर मैंने उससे पूछा कि, चाबी कहाँ है? तो उसने अपना पर्स मुझे थमा दिया। और फिर मैंने उसमें से चाबी निकाली और दरवाज़ा खोला। और फिर मैं उसको अपने कन्धे का सहारा देकर उसको अन्दर ले आया था और फिर मैंने उसको पूछा कि, कॉफी पियोगी क्या? तो वह मुझसे बोली कि, नहीं, मुझे तो लोलीपॉप चाहिए है।

मैं :- पर यहाँ पर लोलीपॉप कहाँ है?

दीपिका :– है ना, तुम्हारे पास एक बड़ा सा लोलीपॉप है।

मैं :– अभी आप नशे में है, अगर आप होश में आओगी तो लोलीपॉप क्या, मैं आपको आइसक्रीम भी खिला दूँगा।

और फिर वह यह सुनते ही झट से खड़ी हो गई और फिर वह मुझसे बोली कि, तुम क्या समझ रहे हो कि, तुम मुझे यहाँ लाए हो, जबकि तुम्हारे लोलीपॉप के लिए मैं तुमको यहाँ लाई हूँ। और फिर झट से मेरे पास आकर उसने मेरी बेल्ट खोल दी थी और फिर मेरा जीन्स का बटन खोलकर मेरी ज़िप नीचे सरका दी थी। उसके बाद उसने मेरी तरफ देखा और बोला कि, तुम्हारा लंड तो बड़ा शानदार है, भला ऐसे लंड को भी कोई छुपाता है क्या? और फिर उसने तुरन्त ही मेरा अंडरवियर नीचे सरकाकर अपने होठों से लगाकर मेरे लंड को वह चूसने लग गई थी। दोस्तों अब तो मुझे भी मजा आने लग गया था, क्योंकि जिन्दगी में पहलीबार उस दिन मेरे लंड ने किसी औरत का स्पर्श पाया था और मेरी तो जैसे कोई लॉटरी निकल गयी हो। इतनी सुन्दर लड़की मेरा लंड को चूस रही थी। और फिर लगभग 10 मिनट तक मेरे लंड के रसपान के बाद वह खड़ी हो गई थी और फिर वह मेरे होठों को चूसने लग गई थी। हालांकि मैं भी उसका साथ दे रहा था पर उस समय मुझको ऐसा लग रहा था कि, जैसे वह तो इस कला में पहले से ही निपुण थी। उसके बाद उसने मेरे सारे कपड़े उतारकर मुझे एकदम नंगा कर दिया था और फिर वह अपने कपड़े भी उतारने लग गई थी। और तब मैंने उसको कहा कि, अगर तुम्हारे कपड़े मैं उतारूं तो तुमको कोई दिक्कत तो नहीं? तो फिर वह मुझसे बोली कि, यह बदन तुम्हारा ही तो है और इसके साथ तुम जो चाहे करो, जैसे चाहे करो। और फिर यह सुनते ही मैं उसके एक-एक करके सारे कपड़े उतारने लगा और मैं जहाँ-जहाँ से उसके कपड़े उतारता जा रहा था वहाँ-वहाँ मैं उसको चूमता भी जा रहा था। मेरे हल्के-हल्के चूमने से वो सिहर उठती थी और वह अपने मुहँ से तरह-तरह की मादक आवाजें निकाल रही थी और उसकी ऐसी प्यारी-प्यारी सी सिसकारियों को सुनकर मैं भी मन्त्र-मुग्ध हो रहा था।

और फिर जब मैंने उसके बदन से एक-एक करके सारे कपड़े उतार दिए थे तो वह एकदम पागल सी हो गई थी और फिर वह मुझसे कहने लगी कि, अब जल्दी करो, और चोद दो मुझको मेरे राजा… लेकिन फिर भी मैंने कोई जल्दबाज़ी नहीं करी। और फिर मैं 10-15 मिनट तक उसके पूरे बदन को और बब्स को चूमता रहा और साथ ही उसकी चूत को भी सहलाता रहा। उसके बाद तो वह जैसे रोने ही लग गई थी और वह मुझे नोचने भी लग गई थी और मारने भी लग गई थी, तब कहीं जाकर मैंने उसको बिस्तर पर लेटाया था और फिर मैंने उसकी सफाचट चिकनी चूत पर अपने लंड को लगाया था पर वह मेरे अनाड़ी होने के कारण फिसल गया था। दोस्तों दीपिका तो पुरानी खिलाड़ी थी तो उसने मेरे लंड को पकड़कर अपनी चूत के छेद पर टिकाया और फिर उसने मुझको मेरे लंड से धक्का मारने का इशारा किया और फिर मैंने पूरे जोश में आकर अपना लंड उसकी चूत के छेद में घुसा दिया था और फिर उसके मुहँ से तो सिर्फ़ एक लम्बी सी आहहह… निकली थी, पर उस समय मैं दर्द से बिलबिला उठा था क्योंकि मेरा लंड पहलीबार किसी की चूत में घुसा था तो मेरे लंड के टोपे का धागा टूट गया था और मैं दर्द से चीख उठा था। दोस्तों यह कहानी आप कामलीला डॉट कॉम पर पढ़ रहे है।

और फिर मैं उठने को हुआ पर दीपिका ने मुझे अपने ऊपर से उठने ही नहीं दिया था और उसने अपनी दोनों टाँगों को मेरी कमर से लपेट लिया था और मैं एकदम बेबस था। और फिर उसने मुझे बहुत चूमा और मैं उसके चूमने से फिर से उत्तेजित हो उठा था और फिर मैंने उसकी जमकर चुदाई शुरू कर दी थी। और फिर मैंने उसको लगभग 20-25 मिनट तक चोदा था और इसबीच वह भी 2 बार झड़ चुकी थी। और फिर अंत में मैंने बिना उससे पूछे ही अपना सारा माल उसकी चूत में ही गिरा दिया था और फिर मैं उसकी बाँहों में ही गिर गया था और दीपिका ने मुझे अपने सीने से चिपका लिया था। और फिर कुछ देर के बाद मैं उठा और फिर मैंने अपने कपड़े पहने और फिर मैं उसको बिना कुछ बोले ही अपने घर चला आया था।

धन्यवाद कामलीला के प्यारे पाठकों !!