मम्मी पापा की चुदाई देखकर झड़ी पहली

हाय फ्रेंड्स, Antarvasna मेरा नाम संगीता है, इस वक़्त मेरी उम्र 27 साल की है और मैं दरभंगा की रहने वाली हूँ मेरी शादी अभी पिछले साल ही हुई है। मेरा फिगर 34-30-36 का है, मेरे बब्स का आकार एकदम गोल-गोल है पर वह थोड़े से ज्यादा बड़े होने की वजह से थोड़े नीचे की तरफ झुके हुए है। मैं 36” की साइज़ की ब्रा पहनती हूँ जिससे मेरे बब्स ब्रा के अन्दर एकदम टाइट हो जाते है और फिर वह ज़्यादा नहीं हिलते है। लेकिन मेरे खुले गले वाली शर्ट से मेरे बब्स की घाटी की गहराई को देखकर सबका दिल हरा हो जाता है। दोस्तों यह मेरी बचपन की कहानी है लेकिन यह बिल्कुल सच्ची है, मैं बचपन से ही अपनी मम्मी पापा की चुदाई का खेल देखती आ रही हूँ, मेरे पापा रात को चौकीदार का काम करते है। पहले तो वह एक फैक्टरी में पैकिंग का काम करते थे लेकिन फैक्टरी बन्द होने की वजह से उनकी नौकरी जाती रही और उन्होंने एक गौदाम की चौकीदारी का काम शुरू कर दिया था, रात को वह चौकीदारी का काम करते थे और दिन में वह सोते रहते थे। मेरी मम्मी भी दूसरों के घर में काम करती थी और इस तरह से ही हमारे घर का खर्चा चल रहा था।

दोस्तों उन दिनों मेरी तबीयत ठीक नहीं रहती थी और मैं स्कूल नहीं जा सकती थी और मैं अपने कमरे में सो रही थी, मम्मी ने मुझे दवाई दी और बोला कि, मैं तुम्हारे पिताजी को उठाकर आती हूँ। यह उनका रोज का काम था जो वह अपने काम पर जाने से पहले मेरे पापा को उठाकर जाती थी उस समय मैंने समझा कि, शायद वह पापा को उठाने के लिए आवाज़ देकर चली जाएगी। और फिर मैं दवाई लेकर लेटी हुई थी और फिर थोड़ी देर के बाद मुझे मम्मी की आवाज़ आई. आहहह… दर्द हो रहा है, थोड़ा धीरे करो ना, संगीता घर पर ही है, उसने सुन लिया तो ग़ज़ब हो जाएगा। और फिर मम्मी की ऐसी आवाज़ को सुनकर मैं एकदम हैरान हो गई थी और फिर मैं यह सोचने लगी कि, मम्मी को मेरे पास से गए 15 मिनट से ऊपर हो चुके है और मम्मी अभी तक काम पर नहीं गई है। और फिर मैंने सोचा कि, चलकर देखूँ तो सही मम्मी को किस बात का दर्द हो रहा है लेकिन पापाजी के कमरे में मैं कैसे देखूँ। हमारा घर 3 कमरों का है एक कमरा तो पापाजी ने लिया हुआ है एक कमरे में रसोई बनाई हुई है और एक कमरे में मैं मम्मी के साथ सोती हूँ। और फिर मुझे एक उपाय सूझ गया, पापा के और हमारे सोने के कमरे के बीच में जो खिड़की थी वह बहुत ही ज्यादा टाइट होकर बन्द थी, लेकिन उस खिड़की के चारों तरफ की लकड़ी में काफ़ी जगह से सुराख बने हुए थे, जिससे मैं पापाजी के कमरे में देख सकती थी जहाँ पर मैं खड़ी थी, वहाँ पर कमरे में अंधेरा था और पापाजी के कमरे में उजाला था, क्योंकि उनका कमरा रोड की तरफ था और हमारा कमरा अन्दर की तरफ था।

और फिर मैं झाड़ू की एक तीली को निकालकर खिड़की के अन्दर जो जगह थी उसमें वह तीली डालकर धीरे-धीरे से खिड़की के बीच की उस जगह को साफ़ करने लगी, और मैं यह काम बहुत ही धीरे-धीरे कर रही थी ताकि अन्दर पापा के कमरे तक मेरी आवाज़ ना जा सके। और फिर धीरे-धीरे कचरा हटने के बाद वह जगह थोड़ी ज्यादा बड़ी हो गई थी. और फिर जब मैंने अन्दर आँख लगाकर देखा तो मेरी तो आँखें खुली की खुली ही रह गई थी। कमरे के अन्दर मेरी मम्मी पापा के बराबर में लेटी हुई थी, और वह बिल्कुल नंगी होकर लेटी हुई थी और उनके कपड़े पास ही में बेड पर ही पड़े हुए थे। और पापाजी मम्मी के होठों को चूस रहे थे और मम्मी के बब्स भी साथ-साथ में दबा रहे थे। दोस्तों उस समय मेरी उम्र 18 साल की हुई ही थी और मैं जवान होने ही लगी थी। मेरा शरीर मेरी मम्मी के जैसा ही था, गोरा और लम्बा. मेरे बब्स उस समय लगभग 30” या 32” की साइज़ के होंगे। मम्मी ने मुझे शर्ट के नीचे लड़कों के बनियान के जैसे समीज डालने के लिए दी हुई थी, इसलिए मैं शर्ट के नीचे लड़कों जैसे समीज पहनती थी। लेकिन मैंने अभी तक ब्रा नहीं पहननी शुरू की थी, ब्रा पहनने में मैं अभी बहुत शरमाती थी, लेकिन मेरा बहुत दिल करता था की मैं भी ब्रा पहनकर देखूँ कि, वह मुझपर कैसी लगती है। पापाजी को मम्मी के बब्स दबाते हुए देखकर मेरे बदन में भी कुछ-कुछ होने लग गया था।

और फिर मम्मी ने पापा की लूँगी के अन्दर अपना हाथ डाल दिया था और फिर वह अपने हाथ को आगे-पीछे करने लग गई थी, और तब मैं यह सोचने लग गई थी कि, मम्मी पापा की लूँगी के अन्दर हाथ डालकर क्या कर रही है? और फिर थोड़ी देर तक मम्मी के बब्स को चूसने के बाद पापा ने अपनी लूँगी को एक तरफ कर दिया था और फिर नीचे जो मम्मी के हाथ में था मैं उसको देखकर एकदम हैरान रह गई थी। मम्मी के हाथ में एक काली और लम्बी रॉड के जैसा फूल-झाडू का हैंडल मम्मी के हाथ में था। और फिर पापा का काला लम्बा और मोटा लंड (तब मुझे पता नहीं था की इस रॉड को ही लंड, लौड़ा कहते है) अपने हाथ में लेकर मम्मी ने उसकी टोपी को ऊपर करके ‘गप’ की आवाज़ के साथ अपने मुहँ में डाल लिया था और फिर बड़े ही प्यार से वह उसको चूसने लग गई थी। दोस्तों उस नज़ारे को देखकर मेरे नीचे के अंगों में एक अजीब सी सुरसुरी सी होने लग गई थी। और फिर मेरा हाथ मेरी सलवार के अन्दर चला गया था और फिर मेरी ऊँगली मेरी चूत में आगे-पीछे होने लग गई थी और साथ ही मैं अपने एक हाथ से अपने बब्स भी दबाने लग गई थी, उधर मम्मी पापा का लंड चूस रही थी और पापा जी भी थोड़ा सा घूमकर मम्मी की चूत की तरफ आ गये थे। और फिर उन्होंने ऊपर होकर मम्मी की टाँगों को खोलकर मम्मी की चूत को अपने दोनों हाथों से खोल दिया था। मेरी मम्मी की चूत की फाँकें बड़ी साइज़ की थी, और फिर चूत की दोनों फाँकों को खोलकर पापा ने अपनी जीभ उसके अन्दर डालकर अपनी जीभ से वह मम्मी की चूत को चोदने लग गए थे और साथ ही वह मम्मी की चूत की दोनों फाँकों को अपने होठों में लेकर जोर जोर से चूसने लग गए थे और उस समय मम्मी के मुहँ से गूं…गूं… की आवाज़ें आने लग गई थी, इसका मतलब यह था कि, मम्मी को अपनी चूत चुसवाने में बड़ा मज़ा आ रहा था। और इधर उस नज़ारे को देखकर मेरी ऊँगली भी मेरी चूत में बड़ी तेज तेज चलने लग गई थी। दोस्तों मुझे यह सब पहली बार देखने को मिला था और मुझको उस समय अपनी चूत में ऊँगली करने में भी बहुत मज़ा आ रहा था और पापा के मुहँ से भी आहह… ऊहह… की आवाजें निकल रही थी। और फिर मम्मी पापा से बोली कि, जल्दी करो कहीं संगीता, हमारी आवाज़ को सुनकर ना जाग जाये? लेकिन उनको क्या पता था कि, उनकी बेटी तो उनकी चुदाई की फिल्म का सीधा प्रसारण देख रही है और साथ ही मजा भी ले रही है। दोस्तों यह कहानी आप कामलीला डॉट कॉम पर पढ़ रहे है।

और फिर पापा ने मम्मी की टाँगों को फैलाकर उनके बीच में आकर अपने लंड को उनकी चूत के मुहँ पर लगाकर एक जोर का धक्का मारकर फका-फक मम्मी की चुदाई शुरू कर दी थी। और उधर उत्तेजना में आकर मम्मी के मुहँ से आहहह… इस्सस… की आवाजें आ रही थी। और फिर 5-7 मिनट तक ऐसे करने के बाद पापा ने मम्मी को घोड़ी बनाकर पीछे से उनकी चूत में अपना मोटा काला लंड थोड़ा सा थूँक लगाकर घुसाया, और फिर वह मम्मी को किसी मशीन की तरह दना-दन चोदने लग गए थे। और इधर मेरी ऊँगलियाँ भी मेरी चूत में तेजी से चल रही थी, दोस्तों उस दिन पहली बार मुझको झड़ने का सुख मिला था। और फिर 10 मिनट की चुदाई के बाद मम्मी का शरीर भी तेजी से अकड़ने लग गया था और वह पलंग पर ही ढेर हो गई थी क्योंकि उनकी टाँगों ने जवाब दे दिया था। और उसके साथ ही पापा के लंड का लावा भी मम्मी की चूत में ही भर गया था, और फिर वह भी मम्मी के बगल में ही ढेर हो गए थे।

और फिर मैं चुप-चाप अपने कमरे में आकर लेट गई थी और मम्मी भी काम पर चली गई थी। उस दिन के बाद तो मैंने अपने मम्मी पापा की चुदाई को छुपकर बहुत बार देखा था।

धन्यवाद कामलीला के प्यारे पाठकों !!