चुदाई में गर्लफ्रेंड की चूत फटी और पकडे

हाय फ्रेंड्स, मेरा Antarvasna नाम राज है, मेरी उम्र 26 साल की है और मैं पटना का रहने वाला हूँ। दोस्तों आज मैं आप सभी को कामलीला डॉट कॉम के माध्यम से अपने दोस्त की बहन की चुदाई की कहानी सुनाने जा रहा हूँ। मेरा एक दोस्त है जिसका नाम मयंक और उसकी एक बहन भी है जिसका नाम विध्या है और वह दिखने में काफ़ी खूबसूरत है और उसका फिगर भी 32-28-34 का है। हाँ तो दोस्तों अब मैं अपनी उस खूबसूरत घटना को आप सभी को बताने जा रहा हूँ।

दोस्तों मैं अपने दोस्त के साथ अक्सर उसके घर जाता रहता था तो मुझको वहाँ पर उसकी बहन भी मिलती थी लेकिन उसके प्रति मेरे दिल में कोई ग़लत भावना नहीं थी। कभी-कभी तो मैं अकेले भी उनके घर चला जाता था और चाय नाश्ता करके वापस चला आता था। मेरे घर से उनके घर की दूरी कम ही थी। एकबार मैं उनके यहाँ गया और फिर जब मैं वहाँ से वापस चलने को हुआ तो मैंने देखा मेरी बाइक पर एक फूल रखा हुआ है और फिर जब मैंने उसको उठा लिया और फिर ईधर उधर देखा तो छत पर से विध्या मुझको देख रही थी। और फिर मैंने आँखों ही आँखों में उसको थेंक्स बोला और फिर मैं वहाँ से चला आया और फिर कुछ ही दिनों के बाद होली आई तो मैं अपने दोस्त मयंक के घर पर होली खेलने गया तो वहाँ पर विध्या ने मुझे काफ़ी सारा रंग और गुलाल लगा दिया था। और फिर मैंने भी गुलाल लेकर विध्या के मुहँ पर लगा दिया था और उसके कपड़ों के अन्दर उसके बब्स में भी डाल दिया था और इस कारण से मेरा हाथ उसके 32” की साइज़ के बब्स से सट गया था। और फिर मैंने हौले-हौले से उसके बब्स को दबा भी दिया था लेकिन वह मुझसे कुछ भी नहीं बोली थी और वह सिर्फ़ आहह… करके रह गई थी। और फिर एक दिन उसने मुझको फोन किया और कहा कि, राज तुम मुझको फिल्म दिखा दोगे क्या? तो मैंने उसको बोला कि, ठीक है। और फिर मैंने बॉक्स में 3 टिकिट बुक करवा ली थी और फिर विध्या और मैं वहाँ पर गए तो वह अपनी छोटी बहन छाया के साथ आई थी और फिर हम तीनों कार से सिनेमा हॉल में गये थे, बॉक्स में मैं और विध्या पीछे की सीट पर बैठे थे और छाया आगे की सीट पर बैठी थी और फिर फिल्म शुरू होने के साथ ही मैंने अपना हाथ विध्या के कन्धे पर रखकर उसको सहलाने लग गया था लेकिन वह मुझसे कुछ नहीं बोली तो फिर मैं अपने एक हाथ से उसके बब्स को दबाने लगा, लेकिन वह फिर भी चुपचाप बैठी रही। और फिर मैं उसके कपड़ों के अन्दर अपना हाथ घुसाकर फैरने लगा और कभी-कभी मैं उसके बब्स के निप्पल को दबा रहा था तो कभी उसके बब्स को भी सहला रहा था और वह हल्की-हल्की आवाज़ में आहह… उहह… कर रही थी।

और फिर मैं अपने एक हाथ को उसकी सलवार के ऊपर से ही उसकी चूत पर फैरने लगा तो वह मदहोश सी होने लग गई थी और फिर मैंने अपनी पेन्ट की चेन खोलकर अपना लंड बाहर निकाल दिया था। दोस्तों मेरा लंड 6” लम्बा और 2.5” मोटा है और फिर मैंने उसका हाथ अपने लंड पर रखकर धीरे से उसको बोला कि, विध्या प्लीज़ इसको सहलाओ ना। और फिर उसने मेरे लंड को पकड़ा और फिर वह बोली कि, ओह्ह.. कितना लम्बा और मोटा है तुम्हारा? तो फिर मैंने उसको बोला कि, क्यों, क्या हुआ? और फिर मैंने उसको बोला कि, किसी-किसी का लंड लम्बा होता है, और फिर वह मेरे लंड को धीरे-धीरे सहलाने लगी और फिर कुछ देर के बाद मैंने उसका सिर पकड़कर अपने लंड से सटा दिया था और फिर उसने भी अपने मुँह में मेरा लंड लेकर चूसना शुरू कर दिया था। दोस्तों उस समय मैं तो पागल सा होने लग गया था और मेरा मन तो उस समय चाह रहा था कि, इसको यहीं पर लिटाकर चोद डालूँ, लेकिन उसकी छोटी बहन की वजह से मैं एकदम चुप रहा। और फिर मेरे लंड को चूस-चूसकर उसने मेरा पानी निकाल दिया था और फिर हम दोनों एकदम शान्त होकर बैठ गये थे और फिल्म देखने लग गए थे और फिर हम वहाँ से अपने-अपने घर पर आ गए थे और फिर लगभग एक सप्ताह के बाद मेरे घर पर एक पार्टी थी, जिसमें काफ़ी मेहमान आए थे और वह भी आई थी। और फिर पार्टी रात को 11.30-12.00 बजे के लगभग खत्म हुई। मेहमानों की वजह से हमारे घर के सभी कमरे फुल हो गए थे मैं अपने कमरे में अपने तीन चार छोटे-छोटे चचेरे भाई बहनों के साथ सोने गया तो विध्या भी मेरे साथ मेरे कमरे में आकर मुझसे बोली की राज मैं भी यहीं पर सो जाती हूँ, अभी रात काफी हो गई है तो मैं सुबह अपने घर पर चली जाऊँगी। और फिर वह मेरे बेड के दूसरी तरफ सो गई और फिर लगभग एक घंटे के बाद मैंने देखा कि, विध्या सो चुकी है। उस रोज विध्या ने गुलाबी रंग का लहंगा चोली पहन रखा था।

वह जब सो रही थी तब उसके बब्स से उसका दुपट्टा हटा हुआ था और उसकी साँस के साथ उसके बब्स ऊपर नीचे हो रहे थे। और फिर मैं धीरे से उसके करीब गया और फिर मैंने उसके बब्स पर हाथ रखकर उसके होठों को चूसना शुरू किया तो इस बीच विध्या ने भी अपनी आँखें खोल ली थी और फिर वह भी मुझसे लिपट गई थी। उस समय मैंने लूँगी लपेट रखी थी तो उसने लूँगी में ही मेरे खड़े लंड को पकड़ लिया था और फिर वह उसको सहलाने लग गई थी। और फिर मैंने उसका लहंगा उठा दिया था और फिर मैं उसकी पैंटी को नीचे करके उसकी चूत को सहलाने लग गया था। और फिर मैं अपनी एक ऊँगली को उसकी चूत के अन्दर बाहर करने लग गया था, जिससे उसके मुँह से आह्ह्ह… इस्सस… की आवाजें निकलने लग गई थी। और फिर मैं जोर जोर से अपनी ऊँगली को उसकी चूत में अन्दर बाहर करने लग गया था और वह भी जोर जोर से मेरे लंड को सहला रही थी। और फिर जब मैंने उसकी चोली खोलने की कोशिश करी तो विध्या मुझसे बोली कि, यहाँ पर बच्चे भी सोए हुए है वह जाग जाएँगे तो? और फिर मैं विध्या को लेकर स्टोर रूम में गया, वहाँ पर हमारा एक पुराना बेड और गद्दा पड़ा हुआ था, जिस पर मैंने विध्या को लिटाकर उसके सारे कपड़े खोल दिए थे। और अब वह मेरे सामने पूरी तरह से नंगी हो चुकी थी। और फिर मैंने भी अपनी लूँगी और शर्ट खोल दी थी। और फिर मैं उसके ऊपर लेट गया था और फिर मैंने उसके एक बब्स को अपने मुहँ में लेकर चूसना शुरू कर दिया था और उस समय नीचे से मेरा लंड उसकी चूत से टकरा रहा था। मेरा लंड उस समय काफ़ी कड़क हो गया था और फिर मैंने अपने लंड को उसकी चूत से सटाया तो विध्या ने मुझको कहा कि, राज तुम्हारा तो काफ़ी मोटा लंड है इससे तो मैं मर ही जाऊँगी, मेरी चूत छोटी है। तो मैंने उसको कहा कि, डरो मत कुछ भी नहीं होगा। दोस्तों यह कहानी आप कामलीला डॉट कॉम पर पढ़ रहे है।

और फिर मैं दबे पाँव उठकर अपने कमरे में से नारियल के तेल की बोतल लेकर आकर अपने लंड को तर किया और उसकी चूत में भी खूब सारा तेल लगा दिया था। और फिर मैंने अपने लंड को उसकी चूत के मुँह पर रखकर हल्का सा धक्का मारा तो मेरा एक 2” लंड उसकी चूत में चला गया था और विध्या आह्ह्ह… कर उठी थी। और फिर मैंने कुछ देर तक उसकी चूत में उतना ही लंड डाले रखा और साथ ही मैं उसके बब्स की निप्पल को चूसता रहा। और फिर कुछ देर रुकने के बाद मैंने एक ज़ोर का धक्का मारा तो अबकी बार मेरा 4” लंड उसकी चूत में चला गया था और विध्या ज़ोर से चीख उठी थी उइईई… उफफफ… मर गई करके, और साथ ही वह मुझसे कहने लगी कि, निकालो अपना लंड बाहर? लेकिन फिर मैंने उसके होठों पर अपने होठों को रखा और फिर एक जोरदार धक्का मारा तो मेरा पूरा का पूरा लंड विध्या की चूत को फाड़ता हुआ अन्दर घुस गया था और विध्या की आँखों से आँसूं आ गये थे और वह रोने लग गई थी और साथ ही वह छटपटाते हुए मुझसे बोली कि, मुझे नहीं चुदवाना है तुमसे। मेरी चूत फट गई है प्लीज़ अब निकाल लो अपना लंड बाहर। और फिर मैंने उसको कहा कि, सब ठीक हो जाएगा तुम बिल्कुल भी घबराओ मत। और फिर मैंने कुछ देर तक वैसे ही अपना लंड विध्या की चूत में डाले रखा और साथ ही मैं उसके बब्स के निप्पल को भी चूसता रहा और फिर 5 मिनट के बाद मैंने अपना लंड उसकी चूत से बाहर खींचा और फिर से ज़ोर का धक्का मारा तो विध्या उईईई… आहह… करने लगी और फिर कुछ देर के बाद वह भी नीचे से अपनी कमर को उछालने लग गई थी और फिर वह मुझसे कहने लगी कि, जोर से करो और जोर से मारो मेरी चूत को आह्ह्ह… बहुत मज़ा आ रहा है मुझको उफ़फ्फ़ और तेज़ करो। दोस्तों अब तो मैंने भी पूरी ताकत से उसकी चुदाई करना शुरू कर दिया था और फिर लगभग 20 मिनट की चुदाई के बाद मेरे लंड ने पानी छोड़ा और विध्या की चूत मेरे पानी से भर गई थी।

और फिर हम दोनों वैसे ही स्टोर रूम में ही सो गए थे। और फिर सुबह जब हम देर से उठे तो हमारे सामने मेरी मम्मी और उसकी बड़ी बहन थी जिसकी शादी हो चुकी थी। उस समय और विध्या एक ही बेड पर और एक चादर में एकदम नंगे होकर सोए हुए थे। और फिर हम दोनों एक दूसरे की तरफ़ देख रहे थे क्योंकि हम दोनों थे ही ऐसी हालत में, और फिर थोड़ी देर के बाद मेरी मम्मी और उसकी बहन वहाँ से हमसे बिना कुछ कहे ही चली गई थी। और फिर हम भी अपने कपड़े पहनकर नीचे आ गए थे लेकिन हम दोनों किसी से अपनी नज़रें नहीं मिला पा रहे थे, और फिर वह तो अपने घर चली गई थी और मैं घर से निकलकर किसी पार्क में जाकर बैठ गया था। और फिर उसी दिन दिन में 2.00 बजे मेरे घर से फोन आया और मेरी बड़ी बहन ने फोन पर मुझसे कि, जल्दी घर आ जाओ तो मैं बुरी तरह से डर गया था और फिर मैं सोचने लगा कि, अब क्या होगा? और फिर जब मैं घर गया तो मेरी बड़ी बहन ने आकर मुझसे अकेले में बात करी तब भी मैं इतना डर गया था कि, मेरी पेन्ट बस गीली होनी ही बाकी रह गई थी।

और फिर उसने मेरी तरफ़ देखा और फिर बोला कि, कल तुम दोनों ने जो किया है वह तो ठीक नहीं था पर अब हम सबने विचार करते हुए यह तय किया है कि, हम तुम दोनों की शादी करवा देगें। दोस्तों उस समय मैं कुछ देर के लिए तो चौंक सा गया था और फिर मुझको बहुत खुशी भी हुई। और फिर मैं तभी विध्या के घर गया और फिर मैंने उसको यह खुशखबरी सुनाई। उसके बाद 2 महीनें में ही हमारी शादी हो गई थी पर उस रात मैंने विध्या को फिर से चोदा था और वह भी मेरे ही कमरे में।

धन्यवाद कामलीला के प्यारे पाठकों !!