भाभी की चूत को बनाया अपने लंड का ठिकाना

हाय फ्रेंड्स, Antarvasna कामलीला डॉट कॉम के चाहने वालों, मैं राज एकबार फिर से आप सभी की सेवा में अपनी दूसरी कहानी को लेकर आया हूँ। दोस्तों यह भी मेरी एक सच्ची चुदाई की कहानी है जो की मेरे साथ आज से 2 साल पहले घटित हुई थी। और आज मैं जो कहानी आप लोगों को बताने जा रहा हूँ वह मेरे किरायेदार की सेक्सी बीवी यानि मेरी भाभी की है। हाँ तो चलिये दोस्तों अब मैं आप सभी को कामलीला के सेक्स सागर की तरफ ले चलता हूँ।

दोस्तों उससे पहले मैं आपको अपने बारे में बता दूँ कि, मेरा नाम राज है और मैं उत्तरप्रदेश का रहने वाला हूँ. इस वक़्त मेरी उम्र 28 साल की हो गई है और आज भी मैं हर वक़्त सेक्स का भूखा रहता हूँ। यह बात उन दिनों की है जब मैं 26 साल का था और तब हमारे यहाँ पर एक परिवार किराए पर रहने आया था। उस परिवार में एक आदमी उसकी बीवी और 2 बच्चे थे और उनका कमरा मेरे बगल में ही था. उस आदमी की उम्र यही कोई 32 साल के आस-पास की रही होगी और उस औरत की 30 साल थी लेकिन वह लगती 25-26 साल की थी। वह बहुत ही खूबसूरत औरत थी और मैं उसे भाभी कहता था। लेकिन मुझे वह औरत कुछ चालू किस्म की भी लगती थी। जब उसका पति अपनी ड्यूटी पर चला जाता था और बच्चे स्कूल चले जाते थे तो उस वक़्त वह मुझसे थोड़ा हँसी मज़ाक कर लेती थी. लेकिन मैं भी उनकी बातों को हँसी मजाक में ही लेता था। और फिर इसी तरह से 2-3 महीने बीत गये और हम लोग आपस में काफ़ी खुल गये थे। अक्सर ऐसा होता था कि, रात में नज़दीक होने की वजह से मैं उनका बाथरूम इस्तेमाल कर लेता था. दोस्तों उसके पति जिनका नाम वीरेन्द्र था. वह कई बार अपने ऑफीस के काम से शहर से बाहर भी जाते रहते थे और उनको वहाँ पर कुछ दिन रुकना भी पड़ जाता था। और तब भाभी घर में अकेली ही रह जाती थी. और उस समय उससे मेरी खूब बातें होती थी। मैं कभी-कभी छत पर जाकर छुपकर 2-4 पेग पी लिया करता था. और इसी तरह एक दिन मैं शाम को छत पर बैठकर पी रहा था और अचानक से वह भाभी भी ऊपर आ गई थी और उसने मुझे पीते हुए देख लिया था तो मैं तो एकदम से डर गया था और फिर मैं मन ही मन सोचने लग गया कि, आज तो मेरा भांडा फूट गया. लेकिन फिर वह मुझे देखकर मुस्कुराई और फिर वह मुझसे बोली कि, जब मेरे ‘वह’ यहाँ नहीं होते है तो तुम मेरे कमरे में बच्चो के सोने के बाद आकर पी सकते हो।

और फिर मैंने उन्हें धन्यवाद दिया और फिर मैंने उनको बताया कि, भाभी जी बस मैं तो कभी कभार ही पी लेता हूँ. और फिर मैं अपना शराब का क्वॉर्टर लेकर उनके साथ उनके कमरे में आ गया. उन्होंने फ्रीज़ से ठंडे पानी की बोतल और ग्लास टेबल पर रख दिया था और फिर वह मुझसे बातें करने लगी। अब मुझे शराब का सुरूर चढ़ने लगा था. और फिर उन्होंने मुझसे पूछा कि, तुम्हारी कोई गर्लफ्रेंड भी है क्या? नहीं तो, (मैंने उनको अपने लंड पर अपना हाथ फेरते हुए बताया) अभी तक तो कोई मिली ही नहीं है। और फिर उन्होंने मुझे मेरे लंड पर हाथ फेरते हुए देखा तो मुस्कुराते हुए पूछा कि, तुमने कभी सेक्स किया है? तो फिर मैं एकदम से चौंक सा गया था क्योंकि मुझे इतनी जल्द ऐसी उम्मीद नहीं थी, उस समय मुझको बड़ा अजीब सा लगा था। और फिर मैंने उनको कहा कि, नहीं तो। और फिर वह मुझको आँख मारते हुए बोली कि, अच्छा इतने शरीफ लगते तो नहीं हो तुम। और फिर बस मुझसे और रहा नहीं गया और मैंने झट से उनको अपनी बाँहों में भर लिया और उनसे बोल दिया कि, भाभी आप मुझे बहुत अच्छी लगती हो. और फिर उसने खुद को मुझसे छुड़ाने की कोशिश करते हुए कहा कि, तुम भी मुझे बहुत अच्छे लगते हो पर अभी तुम अपने कमरे में जाओ रात को आना जब तुम्हारे सभी घर वाले सो जाएँगे।

और फिर तो दोस्तों मैं समझ गया था कि, चुदाई की आग दोनों तरफ बराबर लगी हुई है और फिर मैं वहाँ से उठकर अपने कमरे में आ गया और खाना खाकर सोने का नाटक करने लगा। और फिर 2 घंटे के बाद मेरे सभी घर वाले भी सो गये थे तो मैं चुपके से उठा और भाभी के कमरे में घुस गया था क्योंकि उन्होंने अपने कमरे का दरवाजा बन्द नहीं किया था. और फिर मैं जैसे ही उनके कमरे के अन्दर घुसा तो मैं तो बस देखता ही रह गया था. उस समय भाभी ने गुलाबी रंग की एकदम पारदर्शी नाइटी पहनी हुई थी और वह उसमें बड़ी ही मस्त लग रही थी. और फिर मैंने जाते ही उनको दबोच लिया था। लेकिन फिर अचानक से उन्होंने मुझको कहा कि ऐसे नहीं, पहले बाथरूम में जाकर मूठ मारके आओ. तो फिर मैंने भाभी से पूछा कि भाभी, जब आप तैयार हो तो फिर मूठ मारने की ज़रूरत क्या है? तो उन्होंने मुझको कहा कि, जो मैं कहती हूँ वह करो।

और फिर मैं बाथरूम में घुस गया और मैंने मूठ मारी और मैं फिर से भाभी के कमरे में आ गया था. दोस्तों इसबार मैंने भाभी को देखा तो भाभी बिल्कुल नंगी होकर बिस्तर पर बैठी थी. कसम से वह उस समय क्या कयामत लग रही थी, मैं आपको बता नहीं सकता। और फिर उन्होंने अपने बिस्तर के बगल में नीचे बिस्तर लगा दिया था जिससे बच्चों की आँख ना खुल सके और फिर भाभी ने मेरे कपड़े भी खुद ही उतार दिए थे। और फिर मैंने उनके होठों पर अपने होंठ रख दिए तो मैं फिर से गरम होने लग गया था और भाभी ने भी अपनी जीभ मेरे मुहँ में डाल दी, वाह क्या मज़ा आ रहा था दोस्तों। फिर मैंने उनके बब्स को चूसना शुरू कर दिया था. और फिर मेरे ऐसा करने से भाभी भी बहुत ही गर्म हो गई थी। और फिर उन्होंने मुझे नीचे लिटा दिया और फिर उन्होंने अपनी चूत मेरे मुहँ की तरफ कर दी थी और फिर अपना मुहँ मेरे लंड की तरफ करके वह मेरा लंड अपने मुहँ में लेकर चूसने लगी. और इधर मैंने भी अपनी जीभ को उनकी चूत में डाल दिया था. कसम से दोस्तों उस समय हम दोनों को ही जन्नत का मज़ा आ रहा था और फिर ऐसे ही लगभग 5-7 मिनट तक चूसा-चासी का कार्यक्रम चला. और फिर कुछ ही देर में भाभी की चूत से पानी की धार बह निकली और उधर मेरा भी निकलने को हो गया था. और फिर मैंने भाभी से कहा कि, मेरा निकल जाएगा तो उन्होंने मुझसे कहा कि, छोड़ दो मेरे मुहँ में ही मैं मुहँ में ही ले लूँगी। और फिर मेरे लंड ने उनके मुहँ में ही पिचकारी छोड़ दी थी और फिर वह मेरा सारा गरम वीर्य पी गई थी. और फिर वह उठी और मेरे बगल में आकर लेट गई थी और फिर वह मुझे सहला रही थी और मैं भी उनके बब्स को मसल रहा था. और फिर इसी तरह से मुश्किल से 10 मिनट ही बीते थे कि, मेरा लंड फिर से पूरा खड़ा हो गया था और भाभी भी पूरी गर्म हो गई थी। और फिर उन्होंने अपनी दोनों टाँगों को हवा में फैलाते हुए अपनी ऊँगलियों से अपनी चूत को फैलाते हुए कहा कि, ले अब अन्दर डाल। दोस्तों यह कहानी आप कामलीला डॉट कॉम पर पढ़ रहे है।

और फिर मैं उनके ऊपर आ गया और फिर मैंने अपने लंड का टोपा उनकी चूत पर रखा और फिर मैंने अपने लंड को उनकी चूत के अन्दर डाल दिया था. और फिर मैंने आगे-पीछे होते हुए उनकी चुदाई शुरू कर दी थी. और फिर लगभग 7-8 मिनट की चुदाई के बाद भाभी ने मुझे अपनी बाहों में बुरी तरह से कस लिया था और फिर वह मुझसे बोली कि, थोड़ी सी अपनी चुदाई की रफ़्तार को और बढाओ। और फिर मैंने भाभी की चुदाई रफ़्तार बढ़ा दी तो भाभी की साँसे एकदम से रुक गई थी और उनका जिस्म बुरी तरह से अकड़ा और फिर वह झड़ गई थी। लेकिन दो बार मेरा वीर्य निकलने की वजह से मैंने इसबार चुदाई जारी रखी और मैं उनको चोदता ही रहा। और फिर 10 मिनट के बाद भाभी एकबार फिर से अकड़ गई थी और वह फिर से झड़ गई थी. और फिर अब वह मुझे अपने ऊपर से उतरने के लिए कहने लगी। और फिर मैंने अपना लंड उनकी चूत से बाहर निकाला और फिर उनको घोड़ी बनाकर मैंने फिर से उनकी चूत में अपना लंड पेल दिया था. और फिर मैंने करीब 10 मिनट तक उन्हें चोदा। और इस बार हम दोनों का साथ-साथ में ही माल निकला था और फिर हम एकदूसरे के बगल में लेट गये थे. भाभी पूरी तरह से संतुष्ट हो चुकी थी. और फिर उन्होंने मुझसे कहा कि, आज तो असली मज़ा आया है मुझको, तुम्हारे भैया तो ढंग से चुदाई करते ही नहीं। और फिर एक घंटे के बाद मेरा लंड एकबार फिर से तैयार था और इस बार भाभी मेरे ऊपर बैठ गई और फिर वह उछल-उछलकर मुझको चोदने लगी. और फिर यह दौर भी लगभग 20 मिनट तक चला था और वह दो बार झड़ गई थी. लेकिन अब हमको थकान सी होने लग गई थी खास तौर पर भाभी को लेकिन मैं उनके कमरे से जाना नहीं चाहता था लेकिन फिर उन्होंने मुझको कहा कि, अब तुम थोड़ी देर के लिये अपने कमरे में जाकर सो जाओ. तो फिर मैं बुझे मन से अपने कमरे में आकर सो गया लेकिन फिर ज़ोर से पैशाब आने के कारण मेरी आँख 3 बजे फिर से खुल गई और फिर मैं बाथरूम में होकर वापस आया तो मैंने देखा की भाभी ने अपने कमरे का दरवाजा बन्द नहीं किया था, तो फिर उत्सुकतावश मैंने अंदर झाँककर देखा तो भाभी बिस्तर पर नाइटी पहने हुए सो रही थी. उनको देखकर मेरा मन एकबार फिर से खराब हो गया था और मेरे लंड ने भी फिर से भाभी को सल्यूट मारा और फिर मैं धीरे से उनके कमरे में घुस गया था और फिर मैंने उनको जगा दिया था।

और फिर मैंने उनको कहा कि, भाभी एकबार और हो जाये? और फिर वह फिर से अपनी नाइटी उतारकर नीचे वाले बिस्तर पर आ गई थी. और फिर वह मुझसे बोली कि, बड़ी जबरदस्त जवानी है राज तुम्हारी तो. तो फिर मैंने भी उनको कहा कि, भाभी क्या करूँ उम्र ही ऐसी है. और फिर वह एक रंडी की तरह मुस्कुराई और फिर उन्होंने लेटकर फिर से अपनी चूत को मेरे सामने फैला दिया था. लेकिन मैंने भाभी से कहा कि, भाभी मैं इसबार आगे से नहीं बल्कि पीछे से करना चाहता हूँ तो फिर वह मुझसे बोली कि, आज तुमने मुझे जो सुख दिया है उसके लिए तुम कहीं भी अपना लंड डाल सकते हो लेकिन जरा धीरे से करना।

और फिर वह उठकर नारियल के तेल की शीशी ले आई और उन्होंने वह मुझे दे दी थी. और फिर मैंने अपनी ऊँगली से उनकी गांड में जहाँ तक हो सकता था तेल डाल दिया था और फिर मैंने अपने लंड पर भी तेल लगा लिया था। और फिर मैं उनको घोड़ी बनाकर उनकी गांड में अपना लंड डालने की कोशिश करने लगा लेकिन बड़ी ही मुश्किल से मेरे लंड का केवल टोपा ही उसकी गांड के अन्दर गया था कि, भाभी मुझको मना करने लगी और साथ वह मुझसे बोली कि, बहुत दर्द हो रहा है, तो फिर मैं सिर्फ़ अपने लंड का टोपा ही डालकर रुक गया था. और फिर मैं भाभी के बब्स से खेलने लग गया था. और फिर कुछ ही पलों में भाभी भी उत्तेजित हो गई थी और उन्होंने धीरे-धीरे अपनी गांड को मेरे लंड की तरफ सरकाया और फिर धीरे-धीरे उन्होंने मेरा पूरा लंड अपनी गांड में ले लिया था।

सच में दोस्तों भाभी की गांड में लंड डालकर मुझको तो ऐसा लगा कि, जैसे किसी ने मेरे लंड को बुरी तरह से भींच लिया हो. और फिर मैंने भी धीरे-धीरे धक्के लगाने शुरू किए और फिर मैं अपनी रफ़्तार को बढाता चला गया, लेकिन उनकी गांड बहुत कसी हुई थी. और फिर मैंने अपने एक हाथ से भाभी के बब्स को पकड़ा और अपने दूसरे हाथ की ऊँगली को उनकी चूत में अन्दर-बाहर कर रहा था, हाय… क्या मस्त नज़ारा था। भाभी भी चुदाई से मस्त होकर सिसकारियाँ ले रही थी लेकिन बहुत धीमी आवाज़ में। और फिर भाभी का जिस्म एकबार फिर से अकड़ा और वह झड़ गई थी. और फिर 5-7 मिनट के बाद मैंने भी अपना सारा वीर्य भाभी की गांड में ही भर दिया था. दोस्तों भाभी की उस चुदाई में मुझको बहुत ही ज़्यादा मज़ा आया था. उसके बाद मैं उठकर अपने कमरे में आ गया था और सो गया था।

और फिर सुबह जब भाभी से मेरा सामना हुआ तो उन्होंने मुस्कुराकर मुझे आँख मारी और फिर तो हमारा यह चुदाई का सिलसिला लगभग 1 साल तक चला. लेकिन फिर मेरी माँ को मुझपर कुछ शक सा हो गया था और उन्होंने उनसे मकान खाली करवा लिया था। और फिर कुछ दिन के बाद उनके पति का तबादला भी कहीं और हो गया और वह लोग दूसरे शहर में चले गये थे। लेकिन भाभी की वह मस्त चुदाई मैं आज तक नहीं भूल पाया हूँ।

धन्यवाद कामलीला के प्यारे पाठकों !!