भाई के सांड जैसे लंड से चुदी

हैल्लो दोस्तों, Antarvasna मेरा नाम नव्या है और मेरी उम्र 26 साल की है और मैं आप सभी का कामलीला डॉट कॉम पर बहुत-बहुत स्वागत करती हूँ। आप लोगों की तरह मुझे भी सेक्सी कहानियाँ को पढ़कर उनके मजे लेना बड़ा अच्छा लगता है, मैंने अब तक ना जाने कितनी कहानियों के मजे लिए, लेकिन आज मैं अपनी एक सच्ची सेक्स घटना को सुनाने आई हूँ जो मेरे भाई और मेरे बीच हुई चुदाई की घटना है मैं उम्मीद करती हूँ कि यह कहानी सभी पढ़ने वालो को जरुर पसंद आएगी।

दोस्तों जवानी की दहलीज पर कदम रखते ही कोई भी नादानी हो ही जाती है और कुछ वैसी की एक नादानी बचपन में अपने चचेरे भाई के साथ मेरी चुदाई होने से हो गयी थी. दोस्तो आज मैं आपको एक अपनी जिंदगी की खूबसूरत पल का एहसास आपके सामने पेश कर रही हूँ, इसमें कोई बनावटी बात नहीं है, सिर्फ मैंने अपने अहसास को शब्दो के माध्यम से आपके सामने ला रही हूँ. सभी के जिंदगी में कुछ पल ऐसे आते है जहा पर रिश्तो की मर्यादा टूट जाती है, मेरे साथ भी यही हुआ था. मैंने रिश्तो की मर्यादा को तार-तार करने में कोई कसर नहीं छोड़ी, करती भी क्या? कुछ रास्ता भी नहीं था. जवानी की दहलीज पर बड़ी-बड़ी गलतियां आसानी से हो ही जाती है, मैं अपने दादी के साथ रहती थी, क्योंकि मेरे पापा, माँ और भाई बहन सारे जयपुर में रहते थे. मेरे अंकल का लड़का विजय भी यही सीकर में ही रहता था, और उसकी उम्र मेरे से काफी कम थी वो रोज मेरे घर पर आया करता था. मेरे घर के बगल में उसका घर था. मैं मोबाइल में गाना सुनती और वो गाने का विश्लेषण करता था, वो मेरे से काफी घुला-मिला रहता था, मैं भी उसके साथ अपने मन की बात को शेयर किया करती थी. मैं भरपूर जवानी की दहलीज पर थी, मेरी चुचियाँ भी काफी बड़ी-बड़ी और जिनको मैं ब्रा से बाँध के रखती थी, पर मेरी जवानी फिर भी छलक जाती थी।

मैं जब काम करती तब विजय मेरे बब्स को देखकर उसके मजे लेता था. जब मैं आँगन में मटक कर के चलती थी तो वो मेरी गांड को निहारता रहता था, उसका देखना मुझे अच्छा लगता था. मेरी दादी शाम के करीब 7 बजे खाना खाकर के सो जाती थी, मैं फोन पर गाने सुनकर करीब 9 बजे तक सोती थी, एक बार विजय रात को करीब 8 बजे आया और मेरे पास बैठकर के अपने पेपर के बारे में बातचीत करने लगा. दादी घर के बाहर बंगले पर एक कमरा था वही पर सोती थी, गाँव में बिजली बड़ी मुश्किल से आती थी, सारा काम लालटेन से ही होता था, हम दोनों बैठकर बात कर रहे थे, तभी जोर से आँधी चलने लगी, आँगन में पड़े सामान को मैं कमरे में रखने लगी, वो भी मेरी मदद कर रहा था. और कुछ देर में ही बारिश होने लगी थी, मैं भीग गयी थी, मेरे कपड़े मेरे बदन से चिपक गये थे. उस दिन मैंने ढीला सा सूट पहन रखा था, ब्रा भी नहीं पहनी थी और भीगने की वजह से मेरे बदन में मेरे बब्स साफ दिख रहे थे. जब मैं लालटेन की रोशनी में आई तो मेरा भाई विजय मुझे भूखी निगाहो से देख रहा था, मैंने देखा की उसका लंड खड़ा हो रहा था उसने टी-शर्ट और पजामा पहन रखा था, मेरा भी मन उसके लंड को देखकर के डोल रहा था. पर रिश्तो की मर्यादा का भी ख्याल था, क्योकी वो मेरा चचेरा भाई था. अचानक से विजय ने मुझे पीछे से पकड़ लिया, उसके दोनों हाथ मेरे बब्स पर थे, वो कह रहा था, माफ करना दीदी अब बर्दास्त नहीं हो रहा है, अगर मैं अपने लंड की भूख नहीं मिठाऊंगा तो मैं पागल हो जाऊंगा।

मैंने भी उसके दोनों हाथों को पकड़कर के उसको दूर हटाने की कोशिश की पर उसने मुझे जोर से पकड़ रखा था, मैंने कहा विजय यह सब गलत है, मैं तुम्हारी दीदी हूँ तुम मेरे साथ ऐसा नहीं कर सकते? उस पर विजय बोला मैं आपका भाई हूँ और रहूँगा भी हमेंशा के लिए लेकिन ये किसी को भी पता नहीं चलेगा, मैं आप से बहुत प्यार करता हूँ, मैं आपके साथ सेक्स करना चाहता हूँ, उसकी मजबूत बाँहों ने मुझे पिघला दिया था. मुझे भी उसका पकड़ना अच्छा लगने लगा था फिर मैं बड़ी शांति से बोली विजय पता है अगर यह किसी को पता चल गया तो क्या होगा? उसने कहा माँ कसम दीदी मैं कभी किसी को पता नहीं चलने दूंगा, मैंने कहा की ठीक है, पर एक बार ही दूँगी पगले प्रोमिस करो, विजय ने मुझसे प्रोमिस किया की वह भी मुझे एक बार ही चोदेगा. फिर मैं उसकी तरफ घूम गयी, दोस्तों जब मैंने उसकी अंडरवियर में उसका तना हुआ लंड देखा तो मेरे तो होश ही उड़ गये फिर जब मैंने उसके लंड को उसकी अंडरवियर से बाहर निकालकर के देखा तो मैं तो दंग रह गई उसका सांड के जैसा एकदम तना हुआ लम्बा मोटा लंड था। जिसको मैं अपने हाथों मे लेकर के आगे-पीछे कर रही थी जिससे मेरी चूत ने पानी छोड़ना शुरु कर दिया था अब उसने भी मेरे बब्स को छोडकर मेरे बड़ी-बड़ी गांड को दोनों हाथों से दबाकर के अपने लंड के पास मेरी चूत से सटा लिया और धक्के मारने लगा, मैंने उसको किस करना शुरु कर दिया. मैं भी चुदना चाह रही थी, तभी विजय ने मेरे गीले कपड़ो को उतार दिया और मेरे बड़े-बड़े बब्स उसके सामने जैसे ही आज़ाद हुए वह बच्चो की तरह पीने लगा. मैंने पूछा की विजय क्या मिल रहा है इसमें? उसने कहा की दीदी जब लड़की के बब्स को पियो तो अमृत दूध से नहीं, चूत से निकलने लगता है देखो हाथ लगाकर अपनी चूत में अमृत निकल रहा होगा।

मैंने अपने सलवार का नाडा ढीला कर दिया और चूत पर हाथ लगाकर देखा तो चूत बहुत गरम थी और कुछ निकल रहा था, मैंने कहा विजय सही कह रहे हो चूत से तो अमृत निकल रहा है पर तुम ऊपर क्या कर रहे हो पीना है तो अमृत पियो. फिर वो नीचे बैठ गया और मैंने अपने दोनों पैर फैला दिए, वो बीच में आकर मेरी चूत को चाटने लगा, मैं बैचेन होने लगी. मैं उसके बालों को पकड़कर उसके मुहँ में भोसड़े में सटाए जा रही थी. मैंने कहा बस विजय अब छोड़ दो मुझे. पूरी कर लो अपनी हसरत, मैं तुम्हारी हूँ आज रात के लिए, जो मर्ज़ी कर लो मेरे साथ मैं तुम्हारी हूँ, आई.लव.यू.माय ब्रदर. उसने मुझे गोद में उठा लिया. और मुझे पलंग पर लेटा दिया, मेरी चूत में बहुत खुजली हो रही थी, तभी वो मेरे पैर के पास बैठ गया मेरे दोनों पैरों को फैला दिया और अपना लंड मेरी चूत के ऊपर से गांड के छेद पर रगड़ने लगा। दोस्तों यह कहानी आप कामलीला डॉट कॉम पर पढ़ रहे है।

अब मुझे बर्दाश्त नहीं हो रहा था और वो मजा लेने में लगा हुआ था. अचानक से उसने पूरा का पूरा लंड मेरी चूत में उतार दिया और मैं आहह.. ओउ… आऊ… ऐइ.. करने लगी. बाहर निकाल भोसड़ी के तेरी माँ को चोदो मादरचोद आहह.. मेरी चूत में बहुत दर्द हो रहा है, उसका लंड मेरी चूत में सेट हो गया था, मेरी आँख में आँसू आ गये थे. उसने लंड को धीरे से निकाला और फिर से एक झटका दिया तो में पहले समझ रही थी की उसका लंड पूरा मेरी चूत में चला गया पर मैं गलत थी. उसका लंड अभी आधा ही अंदर गया था, अब दो इंच और गया तीसरे झटके में पूरा लंड मेरी चूत में समा गया. मुझे बहुत दर्द हो रहा था शायद मेरी चूत कि झिल्ली फट गई थी फिर वो मुझे जोर-जोर से चोदने लगा, मैं भी गांड उठा-उठाकर के चुदवा रही थी, कमरे में सिर्फ फच-फक-फक की आवाज़े आ रही थी मैंने बोला बहनचोद अपनी बहन को और जोर से चोद। फिर विजय ने बोला रंडी आज तेरी चूत का भोसड़ा बनाकर के छुड़ूँगा, ऐसी आवाज़े आ रही थी और फिर धीरे-धीरे उसका पानी मेरी चूत के अंदर निकलने लगा था. और साथ में मेरी भी चूत ने अपना पानी छोड़ दिया था उसका गर्म-गर्म लावा मेरी चूत में मुझे अंदर महसूस हो रहा था। फिर उसने मुझे कई तरीके से पूरी रात भर एकदम उच्छल-उच्छलकर के चोदा. मैंने पूछा तुम्हें इतने सारे चुदाई के तरीके कैसे आते है, तो वो बोला हम लोग सेक्सी मूवी देखते है इसीलिए मुझे पता है की चुदाई का तरीका क्या होना चाहिए. रातभर चोदने के बाद मेरा भोसड़ा सूज गया था, दर्द के मारे चला भी नहीं जा रहा था, सुबह के करीब चार बजे विजय वापस अपने बंगले में सोने चला गया और मैं भी सो गयी।

इस साल मेरी शादी होने वाली है. देखते है उतना मजा मिलता है की नहीं जितना विजय ने दिया था, वो अपनी प्रोमिस को नहीं निभा पाया. और उसने मुझे कई बार चोदा जब भी उसका मन किया, मुझे भी लग रहा था की ये गलत प्रोमिस मैंने करवाया था उसके साथ क्युंकी मुझे भी अपने भाई से चूदना अच्छा लगता था।

धन्यवाद कामलीला के प्यारे पाठकों !!