देवर और ननद के साथ 1

मेरा नाम है कैलाश Antarvasna में देहाती लड़की हूँ, हे कॉलेज तक पढ़ी हुई. मेरी शादी दो साल पहले हुई है. मेरे पति गंगाधर किस्सन है. वो 22 साल के हे आर में 18 साल की. घर में हम दोनों ही हे, उन के माता अंकल कई सालों से गुजर गाएँ हे. आज में आप को मेरी निजी कहानी सुनाने जा रही हूँ.

छोटी उमर से ही मुझे सेक्स का भान था. हम देहाती बच्च्चे बचपन से ही गाय, भेंस, कुत्ते वगैरह प्राणीओन की चुदाई देख पाते हे. मेरे पिताजी के घर कई गाएँ थी. वो जब चुदवाने के लिए हीट में आती थी तब हमारा नौकर सांड़ ले आता था. बचपन से ही मैंने सांड़ का पतला लंबा लंड गाय की चुत में आ जाता देखा था. दस साल की उमर तक ऐसे सेक्स देखने से मुझे खुच्छ नहीं होता था. बढ़ती उमर के सात गाय की चुदाई देख में उत्तेजित होती चली थी.

बारह साल में मेरी माहवारी शुरू हुई तब मेरी बड़ी बहन ने मुझे वो कहा जो में जानती थी. उस ने कहा की पति जो करे वो करने देना, पाँव लंबे रख कर सोते रहना. मेरे सीने पर बारे बारे स्तन उभर आए थे और नितंब भारी चौड़े हो गये थे. गांड पर काले घूंघरले बाल निकल आए थे. उसी साल मेरी माँगनी गंगाधर से हो गयी. पहली बार वो हमारे घर आए और हम मिले तब गंगा ने मेरी कच्ची चुचियाँ सहलाई थी, मेरा हाथ तुम कर अपना लंड पकड़ा दिया था. मुझे गुदगुदल हो गई थी. इतने में जीजी ना आ जाती तो उस दिन में आवश्या चुद जाती.

खैर, 16 साल की उम्र में शादी कर के में ससुराल आई. पहली रात ही मेरे पति ने मुझे जिस तरह चोदा ये में कभी भूल ना पवँगी. आधा घंटे तक चूमा छाती और स्तन से खिलवाड़ किया, गांड सहलाई, मेरे हाथ से लंड सहलवाया बाद में चुत में डाला. योनि पटल टूटा तब दर्द तो हुआ लेकिन चुदवाने के आवेश में मालूम ना पड़ा. एक घंटे तक चली चुदाई के दौरान में दो बार ज़दी. आज भी वो मुझे ऐसे चोदते हे की जैसे हमारी सुहाग रात हो. हम दोनों एक दूजे से खूब प्यार करते हे. हमारे बीच समज़ौता हुआ है की वो मान चाहे वो लड़की को चोद सके और में कोई भी मर्द से चुदाया सकूँ. लेकिन ऐसा अब तक हुआ नहीं था.

शादी के दो साल बाद मेरे पति के एक दूर के चाचा कई साल अफ्रीका रही कर वापस लौटे. उन के परिवार में एक लड़का था, परेश, मेरी उमर का और एक लड़की थी, माधवी जो दो साल छोटी थी. अफ्रीका में वो भाई बहन रेसिडेन्षियल कॉलेज में पढ़े थे. चाचा नया घर बनवा रहे थे, उस दौरान वो सब हमारे मकान में ठहरे.

परेश और माधवी बारे प्यारे थे. उन के साथ मेरी अच्छी बन गयी थी. नये घर में जाने के बाद भी वे रोज मेरे घर आते थे और दुनिया भर की बातें करते थे. मैंने देखा की उन दोनों काफी हुशियर थे लेकिन सेक्स के बारे में बिलकुल अग्यात थे. परेश मानता था की लड़की के मुँह से लड़के का मुँह लगाने से बच्चा पैदा होता है. माधवी कुच्छ ज्यादा जानती थी लेकिन उसे पता नहीं था की चुदाई कैसे की जाती है.

एक दिन गंगाधर को दूसरे गाँव जाना हुआ. इतने बारे मकान में रात को अकेले रहने से मुझे डर लगता था. मैंने परेश और माधवी को सोने के लिए बुला लिए, चाचा चाची की मंजूरी साथ.

रात का खाना कहा कर हम ताश खेलने लगे. परेश ने रानी डाली उस पर मैंने राजा डाला. माधवी शरमाती हुई हंसी और बोली, “रानी पर राजा चढ़ गया, अब बच्चा होगा.” परेश : क्या बकवास करती हो ? माधवी : तू नहीं समझेगा. है ना भाभी ? में : ये तो ताश है. इस में बच्चा कच्चा कुच्छ नहीं होता.

बाज़ी आगे चली. माधवी की रानी पर मैंने गुलाम डाला. माधवी फिर बोली : भाभी, रानी पर गुलाम चडेगा तो राजा उसे मर डालेगा. परेश अब गससे हो गया, पन्ने फैंक दिए और बोला : ये क्या चढ़ने उतरने की चला रक्खी है ? मैंने उसे शांत किया. मुँह छुपाएं माधवी हंस रही थी. वो बोली : भैया, भाभी से कहो तो बच्चा कैसे पैदा हो था है. परेश चुप रहा. मैंने धीरे से पूछा : कहो तो सही, में जानूँ तो. परेश ने माधवी से कहा : छिबावाली, तू ही बता दे ना, हुशियर कहीं की माधवी के शर्म और हंसी समाते ना थे, परेश का गुस्सा समता ना था. मैंने कहा : माधवी तू ही बता. सर झुका कर, दाँतों में उंगली डाल कर वो बोली : भैया कहते हे की लड़का लड़की का हाथ पकड़ कर मुँह से मुँह लगता है तब बच्चा पैदा होता है. में : और तुम कयस कहातीहो ? माधवी ने मुँह फेयर लिया और बोली : नहीं बताती, मुझे शर्म आती है. अब परेश बोला : में कहूँ. वो कहती है की जब लड़की पर लड़का चाड़ाता है तब बच्चा होता है. क्या ये सच है भाभी ? में : सच तो है लेकिन पूरा नहीं. माधवी, जानती हो की ऊपर चढ़ कर लड़का क्या करता है ? सर हिला कर माधवी ने हां कही और बोली : चोदता है. ये सुन कर परेश अवाक् हो गया. फिर बोला : माधवी गंदा बोली. में समाज गयी की दोनों में से किसी को पता नहीं था की चोदना क्या है. में ; जानती हो चोदना क्या होता है ? माधवी : एक दूजे के मुंह से मुँह मिलते हे. परेश : वो तो में कब का कह रहा हूँ. में : रुको.मुँह से मुँह लगता है चुदाई में, लेकिन इस से ज्यादा ओर कुच्छ भी होता है. माधवी : भाभी तुम बताओ ना.. बारे भैया तुम्हें रोज?रोज..चोदते होंगे ना ? परेश : माधो, तुम बहुत गंदा बोलती हो. माधवी : तुम्हें क्या ? तुम भी बोलो. में : ज़गाडो मत. अब कौन बताएगा की लड़का और लड़की में फर्क क्या है ? परेश : लड़के को दादी मुच्च होते हे और लड़की के सीने पर चुचियाँ. में : सही. लेकिन मुख्य फर्क कौन सा है ? माधवी : जांघें बीच लड़की की पीकी होती है और लड़के की नून्न्ी. में : बराबर. जब वो बारे होतेहें तब उसे गांड और लौंडा कहते हे.

इतनी बात होते होते हम तीनों उत्तेजित होते चले थे. माधवी बार बार अपनी निक्कर ठीक करने के बहाने अपनी गांड खुजल लेती थी. परेश के टॅटर लंड ने पजामा का तंबू बना दिया था.

मैंने आगे कहा : जब चोदने का दिल होता है तब आदमी का लौंडा टन कर लंबा, मोटा और कड़ा हो जाता है. लड़की की गांड गीली हो जाती है. आदमी अपना कड़ा लौंडा जिसे लंड भी कहते हे उसे लड़की की चुत में डाल कर अंदर बाहर करता है. इसे चोदना कहते हे. माधवी : ऐसा क्यों करते हे ? में : ऐसा करने में बहुत मजा आता है और आदमी का वीर्य लड़की की चुत में गिरता है.वीर्य में पुरुष बीज होता है जो लड़की के स्त्री-बीज साथ मिल जाता है और नया बच्चा बन जाता है. माधवी : भाभी देखो, भैया का ?.वो खड़ा हो गया है. परेश : तुझे क्या ? भाभी, एक बात बताऊं ? मेरा तो रो रात को खड़ा हो जाता है. उस में कुच्छ बुरा तो नहीं ना ? में : कुच्छ बुरा नहीं. खड़ा भी होता होगा और स्वप्न देख कर वीर्य भी निकलता होगा. परेश : भाभी, मधु के आगे क्यों?.? में : अब उन की बड़ी है. मधु, तुझे महावरिशुरू हो गयी होगी. नीचे गांड पर बाल उगे हे ? माधवी ने सर हिला कर हां कही. में : तू उंगली से खेलती हो ना ? फिर सर हिला कर हां. में :तूने लंड देखा है कभी ? शर्मा कर नीचा देख कर उस ने ना कही मेना : परेश, तूने कब्भी चुचियाँ देखी हैं ? उस ने ना कही. में : ऐसा करते हे, माधवी तू तेरे स्तन दिखा और परेश तू लंड दिखा. परेश : तू क्या दिखाएगी, भाभी ? में : में गांड दिखाऊंगी. परेश, पहले तुम. परेश ने पजामा खो नीचे सरकाया. लंड के पानी से उस की निक्कर गीली हो गई थी. वो ज़रा खिचकाया तो माधवी ने हाथ लंबाया. परेश तुरंत हाथ गया और निक्कर उतार दी.

क्या लंड था उस का ? सात इंच लंबा और दो इंच मोटा होगा. दंडी एक दम सीधी थी. मट्ठा बड़ा था और टोपी से धक्का हुआ था. चिकना पानी से लंड गीला था. माधवी आश्चर्य से देखती रही. परेश को मैंने धकेल कर लेता दिया और उस के हाथ हटा कर लंड पकड़ लिया. मेरे छूते ही लंड ने ठुमका लगाया. वेल्वेट में लिपटा लोहे का डंडा जैसा उस का लंड था, बड़ा प्यारा हां.

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