रिसोर्ट में करी एक अजनबी के साथ कामलीला

हाय फ्रेंड्स, Antarvasna मेरा नाम महक है, मेरी उम्र 27 साल की है और मैं बैंगलोर में एक बड़ी कम्पनी में काम करती हूँ और मैं यहाँ पर किराये से एक फ्लेट में रहती हूँ। दोस्तों मैं अपने खाली समय में कामलीला डॉट कॉम की सेक्सी कहानियाँ पढ़ती हूँ और मुझको इस वेबसाइट की सभी कहानियाँ बहुत ही अच्छी लगती है। दोस्तों आज मैं भी कामलीला डॉट कॉम के इस मंच से आप सभी के सामने मेरे जीवन में घटी एक बहुत ही प्यारी और सेक्सी घटना को रखने जा रही हूँ। अब मैं आप सभी का कीमती समय ज्यादा ना लेते हुए अपनी एकदम सच्ची कहानी पर आती हूँ।

दोस्तों यह बात आज से 2 साल पहले की बरसात के दिनों की है उस समय मुझको अपने ऑफिस से छुट्टियाँ लिए हुए बहुत दिन हो गये थे तो, मैंने सोचा था कि क्यों ना इस बारिश में “रेनी-वेकेशन” मनाया जाए और फिर मैं केरला पहुँच गई थी वहाँ पर सिटी से दूर मैंने एक कॉटेज बुक कर लिया था। कॉटेज एक फ्लोर का था और उस समय मेरे अलावा वहाँ पर एक ही रूम बुक था और फिर मैंने वहाँ पर 2-3 दिन तक खूब घुमाई की और फिर चौथे दिन शाम के 4 बजे थे और मौसम भी मस्त हो रहा था और मेरे तन-बदन में अज़ीब सी गुदगुदी हो रही थी, और हो भी क्यों ना क्योंकि मुझको मेरे शरीर को मसालवाए बहुत दिन जो हो गये थे। और फिर मैंने अपनी पसन्द की माइक्रो मिनी गुलाबी रंग की स्कर्ट और जी-स्ट्रिंग की ब्रा पहनी हुई थी दोस्तों मेरी यह स्कर्ट ऐसी है कि, इसे कमर पर काफी नीचे से पहनते है, मतलब इसमें कूल्हों का ऊपरी हिस्सा साफ दिखता है, और नीचे से इतना छोटा होता है कि, कूल्हों की निचली गोलाइयाँ भी साफ़ दिखती है। इसको पहनकर अगर मैं एक इंच भी झुक जाऊँ तो मेरी पूरी गांड साफ़ दिखाई देने लग जाए और आपको मैं बता दूँ कि, मैं पैन्टी नहीं पहनती हूँ। तो अब आप सोच सकते है कि, मैं कैसी लग रही होंगी। और फिर मैंने अपने रूम से ही विस्की, और स्नेक्स का ऑर्डर दे दिया था जो कि गार्डन में आ चुका था। और फिर मैं गार्डन में बेंच पर पैर फैलाकर बैठकर अपने लेपटॉप पर फिल्म देख रही थी और विस्की पी रही थी। मैं एक तरह से आधी लेटी हुई थी, इस कारण मेरी सिर्फ़ अन्दर की जाँघें और मेरी चूत ही ढकी हुई थी बाकी बब्स के नीचे का पूरा बदन खुला-खुला दिख रहा था और उस समय मुझको भी बड़ा अलग सा महसूस हो रहा था।

और तभी मैंने देखा कि, कॉटेज की छत पर एक लड़का खड़ा था और वह मुझे लगातार घूरे जा रहा था और फिर उसको देखते ही मेरे शैतानी दिमाग़ ने घंटी बजा दी और मैंने उसे नज़र अन्दाज़ करने का नाटक किया और अपना एक पैर मोड़ लिया था। ऐसा करने से मेरे एक कुल्हे का कुछ भाग अब उसे साफ नज़र आने लग गया था. और फिर मैंने देखा कि, वह अपनी जीन्स के ऊपर से अपने लंड को रगड़ रहा था और फिर अचानक से वह गायब भी हो गया था। और फिर दो मिनट के बाद वह मेरे बगल में आकर खड़ा हो गया था और फिर वह मुझसे बोला कि, “हेल्लो मेडम” और फिर मैंने भी उसे देखते हुए “हेल्लो” कहा और फिर उसने मुझको कहा कि, आई एम समीर। तो फिर मैंने भी उसको कहा कि, हाय, आई एम महक. और फिर उसने मुझसे पूछा कि, क्या आप अकेली है? तो मैंने उसको कहा कि, हाँ. तो फिर उसने कहा कि, क्या मैं आपके साथ बैठ सकता हूँ? क्योंकि मैं भी अकेला ही हूँ. तो मैंने उसको कहा कि, क्यों नहीं जरूर. तब उसने मुझको बताया कि, वह अपने ऑफीस के काम से यहाँ आया हुआ है और फिर मैंने उसके लिए भी एक पैग बनाया। वह लगातार मेरे अधनंगे बदन को घूरे जा रहा था। मेरे पास आने की वज़ह से उसे अब मेरे बब्स का भी दीदार होने लग गया था. उसके मुझको ऐसे देखने से अब मुझे भी मज़ा आने लग गया था. और फिर अपना पैग ख़त्म करने के बाद उसने मुझको कहा कि, आप बहुत हॉट और सेक्सी हो। और फिर मैंने उसको नज़र अन्दाज़ करते हुए उसको कहा कि, हाँ मुझको पता है. और फिर मैंने देखा कि, उसकी पेन्ट का आगे का हिस्सा बिल्कुल टेंट की तरह बन चुका था और वह बार बार अपनी कुहनी से अपने लंड को दबा रहा था। और फिर वह बिल्कुल मेरे पैरों के पास आकर बैठ गया था और फिर उसका दूसरा पैग ख़त्म होते ही उसकी ऊँगलियाँ मेरे पैरों पर चलने लग गई थी। और फिर धीरे-धीरे उसकी ऊँगलियाँ मेरी स्कर्ट तक पहुँच गई थी तो मैंने उसका हाथ पकड़ लिया और उसको बोला कि, बस बहुत हुई शरारत. तो फिर उसने मुझको सॉरी बोला. और फिर मैं अचानक से उठ गई थी और फिर मैंने उसको बोला कि, ठीक है तो अब मैं चलती हूँ तो वह मेरी बात को सुनकर चौंक गया था और उसका चेहरा बिल्कुल रुआंसा हो गया था और वह मुझसे बोला कि, क्यों क्या हुआ?

मगर मैं इतनी जल्दी उसकी झोली में नहीं गिरना चाहती थी मैं उसको थोड़ा और तड़पाना चाहती थी तो मैंने उसको कहा कि, अभी मुझको कहीं जाना है और हम कल मिलते है। और फिर मैं लड़खडाते हुए वहाँ से निकल गई और फिर अगले दिन मैं सारा दिन घूमती रही और फिर शाम को 5 बजे कॉटेज आई. मैंने पहले की तरह विस्की ऑर्डर किया और फिर होज़री का मिनी अंडरवियर और जी-स्ट्रिंग ब्रा पहनकर उसी बेंच पर बैठ गई थी। और फिर मैं अपना पैग पीते हुए अपने लेपटॉप पर फिल्म देखने लग गई थी. तभी मैंने देखा कि, समीर फिर से छत पर खड़ा था। और मैंने फिर से उसको नज़र अन्दाज़ किया और फिर मैंने अपने लेपटॉप को अपने पेट पर रखकर अपना एक हाथ अपनी पैन्टी में डाल दिया था और अन्दर से ही मैं अपनी चूत में ऊँगली चलाने लग गई थी और अपने दूसरे हाथ से अपनी ब्रा के ऊपर से अपने बब्स को भी दबाने लग गई थी मुझे देखकर ऐसा लग रहा था कि, जैसे मैं सेक्सी फिल्म देख रही हूँ और उत्तेजित हो रहीं हूँ, लेकिन असल में मैं समीर को रिझा रही थी और उसे ही देख रही थी। और फिर मेरा वह पैंतरा काम आया और समीर कुछ ही मिनटों मे मेरे पास था. उसने उस समय एक हाफ पेन्ट पहना हुआ था, और उसकी पेन्ट में बना हुआ टेंट बता रहा था कि, उसका लंड अकड़ रहा है और फिर उसने आते ही “हाय” कहा. मैंने उस समय तक भी अपनी पैन्टी से अपना हाथ नहीं निकाला था और फिर मैंने भी अपने दूसरे हाथ से हाथ मिलाते हुए “हाय” कहा. उसकी नज़र उस समय मेरी पैन्टी पर थी वह चुपचाप खड़ा होकर मुझको घूर रहा था. और फिर मैंने उसको कहा कि, क्या तुम भी ड्रिंक लोगे. तो उसने मुझको कहा कि, जरूर. और फिर मैंने अपनी पैन्टी से अपना हाथ बाहर निकाला और अपनी ऊँगलियों को अपने मुहँ में ले गई और उनको चाटने लग गई थी और यहीं मैंने ग़लती कर दी थी। मेरी जुबान और मेरी चूत का रस लग गया था और मैं एकदम से पागल हो उठी थी, अब तो मुझे फ़ौरन एक लंड चाहिए था जो कि, मेरे सामने तैयार भी था मगर मैंने खुद को काबू में किया। उसने जब मुझे ऐसा करते देखा तो उसकी हालत पतली हो गई थी और शायद उसमें हिम्मत भी आ गई थी. और फिर वह मेरे बगल में आकर बैठा और फिर उसने मेरे सीने पर अपना हाथ रख दिया था. और फिर मैंने झट से उसका हाथ पकड़कर कहा कि, तुम यह क्या कर रहे हो? तो फिर उसने मुझको कहा कि, तुम भी तो यही चाहती हो. वह लड़का शायद बहुत शरीफ था और फिर मैंने अपना हाथ उसके हाथ पर से हटा दिया था और उसको कुछ भी नहीं बोला था।

और फिर मैंने एक पैग बनाया और उसे दिया. पैग के बाद उसने मुझको कहा कि, मुझे अब और मत तड़पाओ प्लीज़, नहीं तो मैं पागल हो जाऊँगा। और फिर मैंने मुस्कुराते हुए उसको कहा कि, अरे मैंने ऐसा क्या किया है? तुमको शायद चढ़ गई और फिर मैं अपने रूम में चली आई. और फिर मैंने देखा कि, वह मेरे जाने के बाद वहीँ पर बैठकर मूठ मारने लगा और अब मुझको भी उसको देखकर बहुत उत्तेजना होने लग गई थी. खैर किसी तरह वह रात तो बीती. और फिर अगले दिन मैं कहीं भी नहीं गई और फिर मैं दोपहर में गार्डन में आई. मैंने अपने साथ में एक छोटा टावल ले लिया था. और फिर मैं बैंच पर बैठ गई थी और उस समय मैंने सिर्फ़ एक गाऊन ही पहना हुआ था। और फिर मैं नीचे घाँस पर लेट गई थी और मैंने अपना गाऊन उतार दिया था. और अब मैं बिल्कुल नंगी खुले आसमान के नीचे गार्डन में लेटी हुई थी. और फिर मैं पेट के बल लेट गई और फिर मैंने टावल से अपने कूल्हों को ढक लिया था. और फिर मैं अपने सिर को उठाकर एक मैगज़ीन पढ़ने लग गई थी. मैं उस समय पूरी नंगी थी और पेट के बल होने के कारण मेरी चूत छिपी हुई थी मगर सिर उठाने की वजह से मेरे दोनों बब्स हवा में लटक रहे थे। और फिर तभी ना जाने कहाँ से समीर आ गया और उसने मुझको “हाय” कहा और फिर वह मेरे बब्स को घूरते हुए कहने लगा कि, वाह! क्या बब्स है। और फिर उसने मुझको ऊपर से लेकर नीचे तक देखा और फिर बोला कि, क्या मेडम, आज ये क्या हो रहा है? तो मैंने उसको कहा कि, मेरे बदन में दर्द हो रहा था तो मैंने सोचा कि, थोड़ा सन-बाथ ले लूँ. और फिर वह भी नीचे मेरे कूल्हों के पास बैठ गया और फिर उसने मेरे कूल्हों पर से टावल को हटा दिया था और फिर उसने मेरे कूल्हों को अपने हाथों से मसलते हुए मुझसे कहा कि, अगर आप कहें तो मैं आपके बदन को दबा दूँ? तो फिर मैंने उसको कहा कि, यहीं गार्डन में या रूम में? लेकिन उसने मुझको कुछ नहीं कहा और फिर उसने मुझको अपनी गोद में उठा लिया और फिर वह मुझको रूम में ले गया। और फिर वह मुझको बेड पर पटककर मेरे ऊपर चढ़ गया था. और फिर मैंने झट से उसके कपड़े उतार दिए और फिर समीर मेरे बब्स से खेलने लगा। और फिर वह मेरे एक बब्स को अपने मुहँ में भरकर चूसने लगा और दूसरे को एक हाथ से मसलने लगा। और फिर कुछ देर के बाद वह मेरे पूरे बदन को चूमने लगा और फिर चूमते-चूमते उसने मेरी नाभि में अपनी जीभ डाल दी तो मैं एकदम से तड़प उठी थी। और तभी उसने अपना मुहँ मेरी चूत पर लगा दिया था और फिर वह ज़ोर-जोर से अपनी जीभ से मेरी चूत के छेद को चाटने लगा। अब मेरे सब्र का पैमाना टूट गया था और फिर मैंने उसे 69 की पोजीशन में होने को कहा और फिर वह फ़ौरन ही हो गया था और फिर तो मानों मुझको कोई जनन्त मिल गई हो, मैंने उसके लंड को बिना देर करे अपने मुहँ में ले लिया और फिर मैं पागलों की तरह उसके लंड को ऊपर से नीचे तक चूसने लगी। उधर वह भी मेरी पूरी चूत को अपने मुहँ में भरकर चूस रहा था. और तभी उसके लंड ने अपना गरम-गरम लावा छोड़ दिया था। और फिर मैं उसके लंड को तब तक चूसती रही जब तक उसका लंड सिकुडकर वापस लुल्ली नहीं बन गया था। और इस बीच इधर मेरी चूत भी 3 बार झड़ चुकी थी. और फिर समीर एकदम शान्त हो गया था और फिर 5 मिनट के बाद मैं फिर से उसके लंड से खेलने लगी तो समीर उठ गया और फ्रीज़ में से बीयर की 2 कैन निकाल लाया था। मुझको बीयर पसन्द नहीं थी तो मैंने उसको मना कर दिया था. तो फिर उसने दोनों कैन पी ली थी. और फिर फिर वह मेरे पास आ गया. और फिर मैंने उसे फिर से चूमना चालू कर दिया था. चूमते हुए मैं उसके निप्पल को जीभ से छेड़ने लगी जिससे उसे भी बहुत मज़ा आ रहा था और मुझे भी. और फिर मैं अपने दोनों हाथ की चुटकियों से उसके दोनों निप्पल को मसलने लगी और फिर उसके पेट को चूमते हुए मैं उसकी नाभि पर दाँत से काटने लगी तो वह उफ़फ्फ़… इसस्स… करने लगा. और अब उसका लंड एकदम मस्त होकर तन चुका था। मगर मैं फिर भी उसको चूमती ही रही. और फिर मैं उसकी जाँघों को चूमने लगी। दोस्तों यह कहानी आप कामलीला डॉट कॉम पर पढ़ रहे है।

और फिर मैं उसके लंड पर अपनी जीभ फैरने लगी तो वह एकदम से सीत्कार उठा था और फिर मैंने उसे पलट दिया और फिर उसकी गर्दन से चूमना चालू किया और फिर मैं उसकी पूरी पीठ चूमने लग गई थी. बीच-बीच में मैं उसको दाँत से भी काट लेती थी। और फिर मैं उसकी कमर पर भी अपनी जीभ फेरने लगी. उसके बाद मैंने उसके दोनों कूल्हों को खूब चूमा और अपने दाँतों से काटा भी जिससे वह सिर्फ़ उफफ्फ़… इस्स्स… आहहह… कर रहा था. और साथ ही वह मुझसे बोलता भी जा रहा था कि, प्लीज़ जान अब तो चोदने दो मुझसे बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं हो रहा है. मगर मेरा मन उसके साथ अभी और खेलने का कर रहा था। क्योंकि उसकी बॉडी एकदम चिकनी थी और मुझे उसको चूमने में बहुत मज़ा आ रहा था. फिर मैंने उसकी एक टाँग उठा दी थी और फिर मैं उसकी गांड के छेद और लंड के बीच की जो जगह होती है उसको चूमने लगी। कसम से मुझे ऐसा करने में बहुत मज़ा आ रहा था मगर समीर उधर अपने चरम पर पहुँच गया था. और फिर उसने मुझे पलट दिया था और फिर वह मेरी चूत को अपने मुहँ में भरकर चूसने लगा और अपने हाथों से मेरे बब्स को भी ज़ोर-ज़ोर से मसलने लग गया था। दोस्तों उस समय मैं दर्द और आनन्द में जोर-जोर से कराह रही थी. और फिर तभी उसने पैतरा बदला और मेरी टाँगों को फैलाया। और फिर एक ही झटके में अपना लंड मेरी चूत में डाल दिया दोस्तों उस अचानक हुए हमले की वजह से मैं एकदम से चीख पड़ी थी और मेरी आँखों में से आँसू आ गये थे। उसका लंड काफ़ी मजबूत लंड था और फिर उसने मुझे चोदना चालू कर दिया था और फिर मैं जन्नत में पहुँच गई थी. उसने अपने दोनों हाथों से मुझे जकड़ लिया था और बारी-बारी से वह मेरे दोनों बब्स को भी चूस रहा था। वह 20 मिनट तक मुझे लगातार चोदता रहा. कमरे में ए.सी. होने के बावजूद भी हम दोनों पसीने-पसीने हो गये थे। और फिर 20 मिनट की चुदाई के बाद उसने एक ज़ोर की पिचकारी मेरी चूत में छोड़ी और फिर वह मेरे ऊपर ही ढेर हो गया था, वह तो उस चुदाई में एकबार ही झड़ा था मगर मैं 2 बार झड़ गई थी और फिर हम दोनों ही हाँफ रहे थे और फिर हम आधे घन्टे तक वैसे ही पड़े रहे. और फिर समीर उठा और मुझको किस करके उसने मुझको थेंक्स बोला। और मैं भी उसकी तरफ मुस्कुरा दी थी. और फिर मैं उठकर कपड़े पहनने लगी तो समीर ने मुझको कहा कि, कहीं जाना है क्या? तो मैंने उसको कहा कि, नहीं तो. तो फिर मुझसे बोला कि, तो फिर क्यों ना आज रातभर हम मस्ती करें? तो मैंने भी उसको हाँ कर दी थी. उसके बाद उसने फ़ोन करके कमरे में ही खाना मँगवाया और फिर हम दोनों ने लंच किया और साथ में 2-2 पैग वोडका के लगाए। मेरा बदन अब फिर से तपने लगा था तो मैंने फिर से हरकत करना शुरू कर दिया था. इसबार उसने भी बहुत ही प्यार से मेरे साथ खेलना शुरू कर दिया था।

उसने मुझे मेरे पेट के बल लेटा दिया था और फिर मेरे पीछे से अपने दोनों हाथ डालकर वह मेरे दोनों बब्स को मसलने लग गया था और साथ ही वह मेरी पीठ पर किस भी करने लग गया था और दाँत से काटने भी लग गया था। उसका लंड उस समय मेरे दोनों कूल्हों के बीच की फाँकों में फँसा हुआ था और तभी मैंने अपने पैरों को थोड़ा सा फैलाया. उसका लंड अब मेरी चूत को गरम करने लग गया था और उसका लंड भी तब तक पूरी तरह से तन चुका था। और फिर उसने बिना हाथ लगाए ही अपना लंड मेरी चूत के छेद पर टिकाया और फिर उसने धीरे-धीरे करके अपना पूरा लंड मेरी चूत के अन्दर डाल दिया था. और फिर हम दोनों एक-दूसरे से पूरी तरह चिपक गए थे और फिर इसी तरह वह हल्के-हल्के धक्के मारने लगा, कसम से क्या गजब का मज़ा आ रहा था उस समय। और फिर 10-15 मिनट तक वह इसी तरह मुझको चोदता रहा. और फिर उसने मुझको पीछे से अपनी गोद में उठा लिया था. और फिर वह बेड पर अपने पैर लटकाकर बैठ गया और मैं उसके लंड पर उल्टी होकर बैठ गई थी. और उसने पीछे से अपने हाथों से मेरे दोनों बब्स को भी भींच लिया था. मैं अब उछल-उछलकर उसके लंड को चोद रही थी। दोस्तों ऐसा मज़ा मुझको आज तक नहीं आया था और फिर 10-15 मिनट के बाद हम दोनों एक साथ ही झड़ गये थे और फिर मैं उसके ऊपर ही लेट गई थी. और फिर इसी तरह पूरी रात हम दोनों सेक्स की रंगीन दुनिया में डूबे रहे थे।

उस रात में उसने मुझे 3 बार और भी चोदा था. इस बीच उसने एकबार मेरी खड़े-खड़े चुदाई करी तो एकबार मैंने उसके लंड से अपनी गांड की प्यास भी बुझाई थी। दोस्तों आखरी चुदाई हमने रात में 4 बजे करी थी और वह भी बाहर गार्डन में आकर. और फिर सुबह जब हमारी आँख खुली तो 11 बज रहे थे और उसे उसके ऑफिस के काम से जाना था, उसके जाते-जाते भी मैंने उसका लंड एकबार ज़ोरदार तरीके चूसा था और फिर मैंने उसका सारा पानी पीकर अपने दिन की शुरुआत करी थी।

हाँ तो दोस्तों कैसी लगी आपको मेरी यह सच्ची कहानी।

धन्यवाद कामलीला के प्यारे पाठकों !!