चुनाव की ड्यूटी में चुदाई का मजा

हाय फ्रेंड्स, Antarvasna मेरा नाम सुनील है मेरी उम्र 28 साल की है और मैं बिहार का रहने वाला हूँ. मेरी लम्बाई 5.8 फुट की है और मैं दिखने में भी ठीक-ठाक हूँ. मैं सरकारी नौकरी में काम करता हूँ. दोस्तों यह घटना पिछले साल की है जब मेरी ड्यूटी एक गाँव में चुनाव में लगी थी और सब तो वहाँ पर सरकारी गाड़ी में गए थे लेकिन मेरा गाँव ज्यादा दूरी पर नहीं था तो मैं वहाँ पर अपनी बाइक से गया था।

दोस्तों वह काफ़ी पिछड़ा इलाका था. मैं अपने रहने की जगह पर जहाँ पर हमको ठहराया गया था वहाँ पर अपना सामान रखने के बाद जब वहाँ से बाहर निकला तो वहाँ पर मैं एकदम चौंक गया था क्योंकि वहाँ पर जो 2 लेडिज कॉन्स्टेबल भी थी और वह दोनों मेरे ही गाँव की थी और उनमें से एक तो मेरे दोस्त की बीवी थी और दूसरी वाली दिखने में बहुत ही सेक्सी थी और वह मेरे सपनों की रानी की तरह थी. जब भी मैं उसको गाँव में देखता था तो मेरा उसको चोदने का बहुत मन करता था और यह बात उसको भी पता थी लेकिन मेरी उससे कभी बात भी नहीं हो पाई थी. वह बड़ी ही मस्त और सेक्सी थी और उसका नाम विभा था, मैं उसके फिगर के बारे में ठीक से जानता तो नहीं था पर वह दिखने में एकदम मस्त माल थी उसको देखकर तो किसी के भी मन का शैतान आसानी से जाग सकता था. और फिर जैसे ही मैं बाहर निकला तो मेरे दोस्त की बीवी ने मुझको बुलाया और वह मुझको भी वहाँ पर देखकर एकदम से खुश हो गई थी. और फिर बातों ही बातों में उसने मेरे सपनों की रानी विभा को बताया कि, मैं भी उनके ही गाँव का हूँ. और फिर विभा भी बोली कि अच्छा, पहले कभी देखा तो नहीं इनको और फिर उसने चुपके से सेक्सी नज़रों से मुझको देखा। और फिर मेरी ज़ुबान से अचानक ही निकल गया कि, मैं तो आपको हर रोज ही देखता हूँ. और फिर मेरे मुहँ से यह सुनकर वह दोनों एकदम से खिलखिलाकर हँसने लग गई थी. शाम को मेरे अफ़सर ने मुझको उनके साथ घर पर जाने की छुट दे दी थी क्योंकि मेरे दोस्त की बीवी उनके किसी मिलने वाले के यहाँ पर किसी प्रोग्राम में जाने वाली थी और वह अकेली ही जा रही थी तो उसने मेरे अफसर से मुझको भी अपने साथ ले जाने की अनुमति ले ली थी और फिर भाभी ने विभा से भी कहा कि, तुम अकेली यहाँ पर क्या करोगी इसलिए तुम भी हमारे साथ चलो. दोस्तों उस समय मेरे मन में लड्डू फूट रहे थे. पहले तो वह मना कर रही थी और फिर उसने अपने ससुर को फोन किया और उसके ससुर ने मुझसे बात करी और कहा कि, तुम विभा को भी अपने साथ ले आना क्योंकि गाँव में मुझको सब एक बहुत ही अच्छा इंसान मानते है इस पर वह भी मान गई थी. और फिर विभा जब अपनी यूनिफॉर्म उतारकर सफ़ेद रंग का सूट सलवार पहनकर आई तो उसको देखकर तो मेरे लंड का एकदम बुरा हाल हो गया था।

और फिर हम अपने गाँव की तरफ चल पडे थे. भाभी को तो मेरा दोस्त लेने आ गया था तो वह तो उसके साथ चली गई थी क्योंकि उनको प्रोग्राम में देने के लिये कोई उपहार खरीदना था. और मैं विभा को अपने साथ अपनी बाइक पर लेकर जा रहा था. मैंने जानबूझकर लम्बा रास्ता चुना था. और फिर मैंने एक पंचर वाले की दुकान पर अपनी बाइक के अगले टायर में हवा ज्यादा करवा ली थी ताकि ज़्यादा झटके लगे. उस गाँव से निकलने के बाद पहले तो हमने सामान्य बातें ही करी थी. और मैंने उसको कहा कि, आपका पति तो बड़ा नसीब वाला है. जिसे तुम जैसी इतनी सुन्दर और नौकरी वाली लड़की मिली है. और फिर वह बीच में ही बोली कि यह नौकरी भी कोई नौकरी है, नौकरी तो आपकी है जो हर रोज घर जाकर अपनी पत्नी से तो मिल सकते हो. तो इस पर मैंने उसको कहा कि, इसके लिये तो मुझको आप जैसी बीवी भी तो चाहिये ना, अभी तो मैं एकदम कुँवारा हूँ. तो फिर वह मुझसे बोली कि, वह भी मिल जाएगी. और अब वह भी मुझसे काफी खुल चुकी थी. और फिर उसने मुझसे सीधे ही पूछ लिया कि, तुम मुझको हर रोज घूर-घूरकर क्यों देखते हो? तो मैंने भी झट से उसको कहा कि, आप हो ही इतनी सेक्सी। और फिर यह सुनकर उसने मुझको पीछे से धीरे से मारा और साथ में यह भी कहा कि, तुम भी बड़े बेशर्म हो. और यह कहते हुए उसका चेहरा एकदम लाल हो गया था. और फिर यह कहकर वह मुझसे और भी चिपक गई थी और अब मैं उसकी गर्म साँसों को अपने कानों पर महसूस कर रहा था. और फिर तब वह मुझसे बोल पड़ी कि, तुमने अभी तक शादी क्यों नहीं करी? तो फिर मैंने उसपर एक तीर और छोड़ा और कहा कि, मुझको आप जैसी खूबसूरत और नौकरी वाली लड़की कोई मिली ही नहीं. और फिर वह अब मेरे और भी पास आ गई थी. और फिर वह मुझसे बोली कि, तुम तो मेरे पीछे ही पड़ गये हो. तो फिर मैंने उसको और भी छेड़ते हुए कहा कि, तुमने मुझको पीछे पड़ने ही कब दिया? और फिर मुझसे यह सब सुनकर उसने मुझको पीछे से ही एक चूंटी काटी और फिर कहा कि, तुम तो बड़े चालू हो. और फिर मैंने उसको कहा कि, तुम्हें देखकर तो कोई भी चालू बन जाए, और फिर मैंने अपना एक हाथ घूमाया और उसकी जाँघ पर रख दिया. तो फिर वह झट से मुझसे बोली कि, प्लीज़ बाइक ठीक से चलाओ।

उसके ऐसा कहने से मैं थोड़ा डर सा गया था और फिर मैं अपना हाथ आगे करके चुप-चाप बाइक चलाने लग गया था. और फिर 10 मिनट तक मैं चुप-चाप बाइक चलाता रहा. और फिर बारिश भी आने वाली थी, और शाम का अंधेरा भी होने लग गया था और अभी हमको 15-16 किलोमीटर दूर और भी जाना था. और फिर थोड़ी देर के बाद वह बोली कि, प्लीज़ सुनील कुछ बात तो करो ना. तो फिर मैंने उसको बोला कि तुमको जो बातें मैं करता हूँ वह अच्छी ही नहीं लगती है तो हम क्या बात करें? तो फिर वह मुझसे बोली “सॉरी प्लीज़” जैसे तुमको आती है करो लेकिन प्लीज़ करो ना मेरा ऐसे ही बैठे-बैठे मन नहीं लग रहा है. और फिर दोस्तों काफ़ी ठण्डी-ठण्डी हवा भी चलने लग गई थी और थोड़ी-थोड़ी बारिश भी होने लग गई थी. ठण्ड की वजह से मुझको बाइक चलाने में दिक्कत हो रही थी और ठण्ड की वजह से वह भी मुझसे और भी चिपक गई थी. और फिर वह मुझसे बोली कि प्लीज़ किसी जगह पर रुक जाओ नहीं तो हम बीमार पड़ जाएगें. और फिर मैंने बाइक को रास्ते से एक साइड पर लगा दिया था. और फिर हम साथ में पास ही में एक पुराने मोटर के गेराज में चले गए थे जो काफी दिनों से बन्द था. दोस्तों अब बारिश भी काफी तेज होने लग गई थी।

दोस्तों भीगने की वजह से उसका सफ़ेद रंग का सूट और सलवार उसके गोरे जिस्म से एकदम चिपक गए थे. और भीगने के कारण वह और भी सेक्सी लग रही थी. और उसका गोरा बदन पतले सूट और सलवार की वजह से एकदम साफ़ दिखाई दे रहा था. और उसकी सलवार भी उसकी गोरी गांड में घुसी हुई थी, जो मुझको और भी पागल कर रही थी. और ऊपर से बारिश की बून्दें जो उसके सेक्सी जिस्म से टपक रही थी, उनकी वजह से मेरे अन्दर का शैतान जाग रहा था. और मैं मन ही मन खुद से ही कह रहा था कि, बेटा मौका देखकर चौका मार ले यही सही समय है. और फिर हम दोनों दीवार का सहारा लेकर खड़े थे और इधर मेरा लंड सम्भलने का नाम ही नहीं ले रहा था. दोस्तों वह भी मेरी पेन्ट के उस उभार को चोरी-चोरी निहार रही थी। और फिर वह मेरी तरफ़ अपनी पीठ करके खड़ी हो गई थी और शायद वह मेरे लौड़े के कड़कपन को नज़र-अन्दाज़ करना चाहती थी. लेकिन फिर मैं थोड़ा सा आगे बड़ा और फिर मैं उसके साथ चिपक गया था. दोस्तों ठण्ड और मजबूरी की वजह से वह मुझसे कुछ भी नहीं बोली थी. और फिर मेरा लंड उसकी गांड के गरम छेद को छू रहा था. दोस्तों पहले तो उसको मेरा ऐसा करना थोड़ा अजीब-सा लगा था, लेकिन ठंड की वजह वह हिली भी नहीं थी. और इस वजह से मेरी हिम्मत और बढ़ गई थी. और फिर मैं मन ही मन यह भी सोचने लग गया था कि, अब तो जो भी होगा देखा जाएगा. और फिर मैं पूरा ही उसके साथ चिपक गया था और मेरा लंड भी उसकी गांड की हलचल को महसूस कर रहा था. और फिर मैंने हिम्मत करके अपना हाथ उसके पेट पर रख दिया था और वह मेरे ऐसा करने से डर से काँपने लग गई थी. और फिर वह मुझसे बोली कि, यह तुम क्या कर रहे हो? तो मैंने उसको कहा कि, एक कीड़ा था उसको हटा रहा था. तो फिर वह हँसते हुए मुझसे बोली कि, कीड़ा यहाँ पर नहीं बल्कि तुम्हारे दिमाग़ में है और दूसरा कीड़ा मेरी गांड में घुसा जा रहा है. और फिर उसके मुहँ से यह सब सुनकर तो मैं एकदम से पागल ही हो गया था. और फिर मैं उसकी गर्दन को और पीठ को चूमने लग गया था. और साथ ही मैं उसके बब्स को दबाने लग गया था. अब तो वह भी तिलमिलाने लग गई थी और वह उसकी उखड़ी-उखड़ी साँसों में मुझसे बोली कि, कोई देख लेगा. तो फिर मैंने उसको कहा कि, इस सुनसान जगह पर कौन आएगा. और फिर तो वह मुझसे लिपट गई थी और फिर वह मेरे कान में बोली कि, तेरी तो आज लॉटरी लग गई है. और फिर यह सुनते ही मैं तो पागल हो गया था. और फिर मैंने झट से उसकी सलवार और पैन्टी को एकसाथ ही नीचे कर दिया था. और फिर मैं नीचे झुका और मैंने अपने होंठ उसकी गर्म गिल्ली और चिकनी चूत पर लगाकर किस करने लगा तो वह तिलमिलाने लगी और फिर वह मुझसे बोली कि, प्लीज़ ऐसा मत करो मुझसे बर्दाश्त नहीं होता है नहीं तो मैं मर जाऊँगी. मेरे पति ने भी कभी मुझको नीचे किस नहीं किया. तो फिर मैंने उसको बोला कि, वह तो पागल है जिसने इस अमृत को कभी पिया ही नहीं। और फिर उसकी साँसें फूलने लगी और वह मस्ती में आकर ठीक से खड़ी भी नहीं हो पा रही थी पर मैंने उसकी एक ना सुनी थी और मैं उसकी चूत को तेज़ी से चाटने लग गया था और मैंने एक दो बार तो अपने दाँत भी उसकी चूत पर लगा दिए थे जिससे वह दर्द और मज़े से सिसकने लग गई थी. और फिर वह मुझसे बोली कि, खा ही जाओगे क्या इसको? प्लीज़ धीरे करो. वह इतनी गर्म हो गई थी कि वह मेरे मुहँ पर ही झड़ गई थी. और फिर उसने मेरे सिर को अपनी दोनों टाँगों में इतनी ज़ोर से जकड़ लिया था कि मूझको साँस लेने में भी दिक्कत हो रही थी।

और फिर मैं उठा और उसके होठों पर किस करने लग गया था. तो फिर वह मुझसे बोली कि, मेरे पति ने आज तक कभी ऐसे मेरी चूत को नहीं चाटा था. और फिर जब मैंने उसको मेरा लंड चूसने को कहा तो उसने साफ़ मना कर दिया था इसपर मुझको काफ़ी गुस्सा आया था लेकिन मैं उससे कुछ भी नहीं बोला तो वह समझ गई थी. और फिर उसने मेरे लंड को अपने मुहँ में लेकर जैसे ही किस किया तो मुझको एक अजीब सा आराम मिला और मुझको लगा कि, जैसे मेरे शरीर का सारा खून मेरे लौड़े में आ गया हो और मुझसे बर्दाश्त नहीं हुआ और मुझको लगा कि, मैं समय से पहले ही झड़ ना जाऊँ तो मैंने उसको वहाँ पर पेड़ के सहारे सटाकर घोड़ी बनाया और फिर मैंने अपना एक हाथ उसकी पीठ पर रखकर उसको नीचे की तरफ किया तो उसकी गांड मेरे सामने और भी बड़ी हो गई थी. और उसकी गांड का गुलाबी छेद और भी बड़ा हो गया था. दोस्तों बरसात के पानी की बून्दें उसके कूल्हों पर गिर रही थी जिनको मैं पागलों की तरह चाट रहा था. और फिर तो अब वह भी जोश में आकर पागलों की तरह चिल्लाने लग गई थी और वह मुझसे कहने लग गई थी कि, डाल दो अब तो प्लीज़ सुनील. तो फिर मैंने उसको बोला कि, अब बताओ कि लॉटरी किसकी लगी है? तो फिर वह मुझसे बोली कि, सॉरी दोनों की लगी है लेकिन प्लीज़ अब तुम डाल दो अब मुझसे बर्दाशत नहीं होता है. अब मैंने उसको बताए बिना ही उसकी चूत में ज़ोर का एक झटका मारा जिससे मेरा आधा लंड उसकी चूत में घुस गया था और उसका सिर पेड़ से जाकर टकरा गया था जिससे वह मुझपर नाराज़ होने लग गई थी और साथ ही वह दर्द से चीख भी उठी थी तो मैंने उसको सॉरी बोलते हुए फिर से धीरे-धीरे झटके मारने शुरू कर दिए थे. दोस्तों ये कहानी आप कामलीला डॉट कॉम पर पढ़ रहे है।

और फिर थोड़ी देर के बाद वह भी मेरा साथ देने लग गई थी. और फिर मैं उसके बाल पकड़कर ज़ोर-ज़ोर से उसकी चूत में झटके मारने लगा तो वह दर्द से फिर से चिल्ला उठी और वह मुझसे बोली कि, तूने तो मुझको सचमुच की घोड़ी समझ लिया है. और फिर मैंने थोड़ा सा मुस्कुराते हुए अपनी स्पीड और बढ़ा दी थी और साथ ही मैंने अपनी एक ऊँगली भी उसकी गांड में डाल दी थी जिससे वह दर्द से तिलमिलाते हुए मुझसे बोली कि, प्लीज़ इसको बाहर निकाल दो मुझको बहुत दर्द हो रहा है और मेरे पति ने तो मेरे साथ कभी भी ऐसा सेक्स नहीं किया था जैसा तुम कर रहे हो. और मैं अपने लंड को उसकी चूत में से पूरा बाहर निकालकर फिर से अन्दर डाल रहा था जिससे मुझको और भी मज़ा आने लग गया था. और इस बीच अचानक से मेरा लंड फिसलकर उसकी गीली गांड के छेद पर जा लगा था जिससे उसके मुहँ से एक जोर की चीख निकल गई थी, और उसे चक्कर भी आ गया था. और फिर मुझको भी लगा कि, मैंने अपना लंड उसकी कुँवारी गांड में डाल दिया है क्योंकि मेरा लंड उसकी गांड में फँस गया था. अब मैं उसके बब्स और कूल्हों को सहलाने लगा था जिससे वह फिर से गर्म हो गई थी. और फिर मैंने उसको बोला कि, मेरा लंड अब तुम्हारी गांड में से तब ही निकलेगा जब मेरा काम पूरा हो जाएगा. तो फिर वह मुझसे गुस्से में बोली कि, गांडू यह बोल कि तुझको मेरी गांड भी मारनी है. और फिर मैं पहले धीरे-धीरे और फिर ज़ोर-जोर से झटके मारने लग गया था।

और अब तो वह भी ज़ोर-ज़ोर से उछल-उछलकर अपनी गांड को हिलाकर मज़े ले रही थी. लेकिन दोस्तों कसम से उसकी गांड बहुत ही टाइट थी. और फिर 20 मिनट के बाद 8-10 तेज-तेज झटके मारने के बाद मैं उसकी गांड में ही झड़ गया था. और फिर वह बोली कि, शुक्र है कि, तुमसे छुटकारा मिला. तो मैंने उसको कहा कि तुमको मजा नहीं आया क्या? तो फिर वह मुझसे बोली कि, रात को मैसेज करके बताऊँगी. और फिर हम दोनों ने एक-दूसरे को किस किया और फिर मैंने उसको कहा कि, समय कम था नहीं तो तुमको और भी मज़ा आता. तो वह बोली कि, हाँ यह तो है और साथ ही उसने यह भी कहा कि उसको उसकी शादी के बाद आज पहली बार सच्चे सेक्स का मजा आया है उसका पति तो सीधा और साधारण सेक्स करता है तुमने तो मुझको आज जंगली सेक्स का मज़ा दिया है. और फिर हम दोनों ने कपड़े पहने और एकबार फिर से एक-दूसरे को किस किया और घर की तरफ चल पडे थे. और फिर रात को उसका मैसेज आया जिसमें उसने मुझको उस लवली सेक्स के लिये थैंक्स कहा था।

धन्यवाद कामलीला के प्यारे पाठकों !!