चुपके से दीदी की गांड मसली

हैल्लो दोस्तों, Antarvasna मेरा नाम संजय है और मेरी उम्र 23 साल है जो कहानी मैं आप सबको बताने जा रहा हूँ वो 3 साल पहले की कहानी है और मेरे परिवार में 2 भाई, और एक 20 साल की बहन है, बहन का नाम दीपा है, पिता जी की डेत को 5 साल हो गये है और हम ज्यादा अमीर नहीं है लेकिन सब ठीक ठाक है, तो दोस्तों यह बात जबकी है जब गर्मियाँ चल रही थी तो गर्मियों मैं ज्यादातर लाइट चली जाती है रात को और लाइट जाती है तो हम लोग ऊपर छत में सोते थे, नाईट वाले कपड़े पहनकर मैं और बहन, और मैं तब ज्यादा बड़ा नहीं था तो कभी कभी माँ कभी बहन के साथ सोता था, रात को 9 बजे हम सब खाना ख़ाकर ऊपर छत पर चले गये तब उसका रंग गोरा था और क्या बताओं क्या जिस्म था उसका जो की अब भी है।

तो दोस्तों यही से शुरु होती है मेरी कहानी, मुझे चुदाई के बारे मैं कुछ ज्यादा पता नहीं था और तोड़ा बहुत पता था वो भी फ़िल्म देखकर के, मैं और बहन सो रहे थे तो रात को अचानक मेरा हाथ बहन की गांड में जाकर लगा तो मेरी नींद खुल गयी तो मैंने देखा की बहन दूसरी तरफ मुहँ करके लेटी हुई थी और उसकी गांड मेरी तरफ थी, तो मैं वही पर अपना हाथ रखकर लेट गया और मज़े लेता रहा और मेरी बहन सूट पहनकर सोती है तो मैं सलवार के ऊपर से ही उसकी गांड में हाथ फैरने लगा और मज़ा लेने लगा और दूसरे हाथ से अपना लंड सहलाने लगा बाद मैं मुझे नींद आ गई तो मैं सो गया वही हाथ रखकर फिर सुबह जब जागा तो सब उठे हुए थे, भाई काम पर गये हुए थे बहन और मैं कॉलेज चले गये, फिर रात को मुझे नींद नहीं आ रही थी जब बहन सो गयी तो मैंने बहुत हिम्मत करके मेरा हाथ उसकी गांड पर रख दिया और हाथ वहां घूमाने लगा और बहन के नज़दीक आ गया, मेरे लंड खड़ा हो गया तो मैंने अपनी बहन की गांड के पास करके ज़ोर लगाकर के उसके साथ चुप छाप लेटा रहा और सुबह उठे तो फिर वही सब, उस दिन कॉलेज के बाद बहन से थोड़ी बहुत बातें हुई लेकिन वो थोड़े अजीब तरीके से बात कर रही थी, फिर उस रात बहन सो गई तो मैंने फिर से उसकी गांड पर अपना हाथ रख दिया और सहलाने लगा वो थोड़ी हिली मैं चुप हो गया तो वो दूसरी तरफ मुहँ करके लेटी हुई थी और वैसे ही लेटी रही फिर मैंने भी अपना हाथ वही पर रहने दिया जब उसने मेरा विरोध नहीं किया तो मेरी हिम्मत और बढ़ गई।

फिर मैंने अपने हाथ से उसकी गांड को सहलाने लगा और उसकी पेंटी को अपने हाथ से महसूस करने लगा और वही पर अपना हाथ घूमाता रहा और फिर मैंने अपने लंड को बाहर निकाला पजामें से फिर उसकी गांड के ऊपर ठिका दिया और धीरे धीरे उसकी गांड के ऊपर से ही रगड़ता रहा और पता ही नहीं लगा मैं कब सो गया। सुबह जब उठा तो देखा लंड बाहर ही था और बहन उठ चुकी थी मैं डर गया उस दिन रविवार था जब मैं नीचे गया तो देखा बहन घर की सफाई कर रही थी माँ किचन में थी और फिर मैंने ब्रश और चाय पीने के बाद नहाकर आया और तैयार होकर टीवी देखने लगा, बहन ने भी काम ख़तम कर लिया और वो भी नहाकर बेड पर लेट गई फिर मैं भी बहन के करीब लेट गया मैं उठकर बैठ गया तो बहन ने कहा क्या हुआ, डर क्यों रहे हो? रात को भी तो साथ ही लेटे थे और यह कहकर मुस्कुराने लगी, मैं समझ गया बहन को पता चला गया तो मैं चुप चाप बाहर चला गया, बाद में रात को खाना ख़ाकर ऊपर गये और बहन मेरे करीब लेट गयी और कहने लग गई अब भी तुम डर रहे हो। करीब 11 बजे तक मुझे नींद नहीं आई फिर बहन दूसरी तरफ मुहँ करके सो गयी फिर 12 बज गये फिर मैंने महसूस किया बहन मेरे और करीब आ गई थी, तो मैंने देखा मौका अच्छा है चौका मार दूँ और बहुत हिम्मत करके अपना हाथ बहन की गांड पर रख दिया फिर हाथ से गांड को सहलाने लगा तब मैंने महसूस किया उसकी सलवार ढीली थी शायद सलवार का नाडा ढीला था फिर मेरे सहलाने से सलवार थोड़ी नीचे खिसक गयी और मेरा हाथ उसकी चूत के करीब चला गया मैंने भी हाथ वैसे ही रखा चूत के करीब और इस तरह थोड़ा सलवार को और नीचे कर दिया और अपना हाथ उसकी गांड पर घूमाने लगा तो वो तोड़ा सीधी होकर लेट गयी और मेरा हाथ उसके आगे वाले हिस्से को चूत के ऊपर से ही सहलाने लगा फिर मैं चुप चाप लेट गया और इस तरह सलवार बहुत नीचे आ गई अब बहन की पूरी सलवार घुटनों से नीचे तक आ गई थी फिर मैं अपना हाथ उसकी पेंटी पर रखकर लेट गया और इस तरह फिर वो दूसरी तरफ लेट गयी जिससे मेरा हाथ उसकी गांड पर आ गया फिर दोस्तों पूरी रात उसकी गांड और चूत पर हाथ फैरते हुए ऐसे ही गुज़र गयी फिर वो सुबह 8 बजे कॉलेज चली गयी और मैं तैयार होकर स्कूल चला गया दोस्तों मुझे मालूम था की उसकी चूत को लेने के लिये मुझे बहुत मेहनत करनी पड़ेगी।

फिर बहन शाम को घर आई मैं टेबल पर अपने स्कूल का काम कर रहा था और मैंने बहन को एक प्यारी सी स्माइल दी और कहा सब ठीक है मैंने कहा हाँ सब ठीक और मैं समझ गया इस को रात का पता चल गया फिर रात को दीदी ने स्कूल के बारे में पूछा और करीब 10 बजे कहा मुझे नींद आ रही है तुम भी सो जाओ, अगले दिन सरकारी छुट्टी थी इस तरह मैंने उसी तरह अपना काम रिपीट किया और अपना हाथ उनकी गांड में रखा और सहलाने लगा, और इस तरह सलवार नीचे हो गई फिर देखा तो उस दिन बहन ने पेंटी नहीं पहनी हुई थी मैं खुश हो गया और मैंने अपना हाथ जैसे ही उसकी चूत पर रखा तो मैंने उसकी चूत पर छोटे छोटे बाल महसूस किए फिर दीदी इस तरह थोड़ी हिली और उन्होंने सिसकी ली तो मैंने लंड उनकी गांड की दरार में घुसा दिया तो एकदम चौंक गई लेकिन फिर भी हिली ढूली नहीं, मैं समझ गया दीदी ज़ानबूझकर के सोने का नाटक कर रही है, इसलिए वो चड्डी भी नहीं पहने हुई थी और मैं अपनी उंगली उनकी चूत के ऊपर फैरने लगा फिर थोड़ा और ऊँगली से ज़ोर दिया, दीदी का शरीर अकड़ा हुआ था और इधर मेरा लंड भी उनकी चूत में जाने के लिये उफान मार रहा था फिर मैं अपनी उंगली को आगे पीछे करने लगा तो वो सिसकियां लेने लगी, आआह… ऊईई… ऐसी ही, फिर वो जाग गयी और ऐसे ही लेटी रही फिर मैंने उनकी गांड को पकड़ा और पीछे से खिंच लिया, जब मैं उंगली फैरने लगा तो उन्होंने अपनी गांड और मेरे नज़दीक कर दी और जब मैं अपना लंड उनकी गांड के करीब ला रहा था तो उन्होंने अपने हाथ से मेरा लंड पकड़ लिया मैं एकदम चौंक गया और मेरा लंड पकड़कर के आगे पीछे करने लगी और सिसकियाँ लेने लगी वो एक मिनट हिली नहीं और वही पर लेटी रही और मैं धक्के मारता रहा करीब 20 मिनट बाद जब मैं झड़ने वाला था तो बैठकर उनकी गांड पर लंड से पिचकारी मार दी और चुप चाप लेट गया और सो गया, जब सुबह उठा तो दीदी उठ चुकी थी और काम कर रही थी, मैं नहाने के बाद दीदी के पास बैठ गया और वो अपना हाल मुझे बताने लगी की उनका एक बॉयफ्रेंड था उनके साथ वो रात गुज़ार चुकी है मैं उनकी बात को सुनकर हैरान रह गया और समझ गया जब ही दीदी इतनी गरम होती थी फिर उन्होंने मुझे चूमा और मैं भी गरम हो गया और कहने लगी मगर तुम्हारी बात कुछ और है मेरे बॉयफ्रेंड में यह बात कहाँ।

उस दिन घर में कोई नहीं था फिर मैंने भी दीदी को चूमा और उनके सारे कपड़े उतार दिए, दीदी कहने लगी आहिस्ता डियर मैं कहाँ भागी थोड़ी ही जा रही हूँ, फिर मैंने अपना लंड बाहर निकाला और सीधा दीदी की चूत के ऊपर रगड़कर उनकी चूत में डाल दिया और दीदी उसको अपनी हाथों से अपनी चूत में सेट करने लगी और बोलने लगी अब मारो झटके फिर मैंने पहले दीदी की चूत में अपना लंड आगे पीछे किया और फिर एक ज़ोरदार झटका दिया तो वो चिल्ला उठी फिर कहने लगी आराम से डियर आराम से, मैंने कुछ नहीं सोचा और उनकी चूत में जोर जोर से झटके मारने लगा और जल्दी ही उनकी चूत को अपने पानी से भर दिया फिर उनकी चूत को चूसने लगा जिससे वो और गरम हो गई और एकदम मस्त होकर अपने मुहँ से आवाजें निकालने लगी फिर मेरा भी लंड खड़ा हो गया और फिर मैंने फिर से उनकी चूत पर अपना लंड सेट किया और एक ज़ोर का झटका मारा और जिससे उनकी तो शायद जान ही निकल गई हो और फिर मैं अब उनकी चूत में जोर जोर से झटके मारने लगा और उनको भी अब मज़ा आने लगा था फिर उनका शरीर अकड़ने लगा और उन्होंने अपना पानी छोड़ दिया थोड़ी देर चुदाई करने के बाद मैं भी उनकी चूत में ही झड़ गया और हम दोनों एक दुसरे से लिपटकर कुछ देर ऐसे ही रहे और फिर हम दोनों ने अपने अपने कपड़े पहनकर तैयार हो गये, दोस्तों जब भी घर में कोई नहीं होता तो मैं उसको जी भरके चोदता था अब तो उनकी और मेरी शादी हो गई है और यह सब खेल अब हमने बंद कर दिया है।

धन्यवाद…