नौकर के साथ मिलकर मारी

हाय फ्रेंड्स, antarvasna मेरा नाम जसवीर है मेरी उम्र 26 साल की है और मैं पंजाब का रहने वाला हूँ और मेरे लंड की लम्बाई 7” की है. दोस्तों आज मैं आपको जो कहानी बताने जा रहा हूँ वह मेरी एक आंटी और उसके नौकर सुरेश की है. दोस्तों यह बात आज से 8 महीने पहले की है. और तब मैं अपने एक अंकल के यहाँ पर चंडीगढ़ गया हुआ था. मेरे अंकल एक अपार्टमेंट में रहते है. दोस्तों मेरी आंटी की उम्र करीब 40 साल की है लेकिन वह दिखने में बहुत खूबसूरत और गोरी है और उनके बब्स भी बड़े-बड़े और गोल है वह ज्यादातर साड़ी ही पहनती है और वह अपनी साड़ी को अपनी नाभि के नीचे ही बाँधती है। दोस्तों उन आंटी के घर में एक नौकर था जिसका नाम सुरेश था उसकी लम्बाई कुछ कम थी लेकिन वह काफी हट्टा-कट्टा था. दोस्तों जब मैं उनके घर पर गया तो अंकल तो किसी काम से दिल्ली गए हुए थे और आंटी ने उनके घर की सफाई का काम निकाला हुआ था तो मैं भी सुरेश के साथ सफाई के काम में आंटी की मदद करने लग गया था।

पहले तो हमने किचन की सफाई का काम शुरू किया था इसलिए मैंने बरमूडा और टी-शर्ट पहन ली थी. और सुरेश ने भी एक टी-शर्ट और पजामा पहन रखा था और आंटी ने भी एक पीले रंग की शिफौन की साड़ी पहन रखी थी पहले हमने किचन के प्लेटफार्म को साबुन और ब्रश लगाकर साफ किया था किचन में चारों तरफ पानी ही पानी फैला हुआ था तो आंटी ने अपने पेटीकोट और साड़ी को थोड़ा सा ऊपर करके अपनी नाभि के पास में घुसा दिया था जिससे आगे से उनकी चिकनी टाँगें उनके घुटनों तक साफ दिखाई देने लग गई थी. उनकी टाँगें बहुत ही गोरी थी और उनको देखकर मेरे लंड में भी हलचल होने लग गई थी। तभी आंटी ने मुझे और सुरेश को कहा कि, तुम दोनों भी अपनी टी-शर्ट को निकाल दो वरना गीली हो जाएगी. तो फिर मैंने अपनी टी-शर्ट निकाल दी थी. और फिर वह आंटी मेरी बॉडी को देखती ही रह गई थी, तो फिर मैंने आंटी को कहा कि, ऐसे क्या देख रही हो आंटी? तो उन्होंने मुझको कहा कि, कुछ नहीं. और फिर सुरेश ने भी अपना टी-शर्ट निकाल दी थी. और अब मैं सिर्फ़ बरमूडे में था और सुरेश सिर्फ़ पजामे में। और फिर आंटी ने किचन के प्लेटफार्म के ऊपर से गैस के चूल्हे को नीचे उतारा और फिर हमने प्लेटफार्म के ऊपर रखी सभी चीजें नीचे उतार दी थी. और फिर आंटी किचन के प्लेटफार्म के ऊपर चढ़ गई थी और मैं और सुरेश नीचे की साफ-सफाई कर रहे थे. और फिर मैं धीरे-धीरे किचन के फर्श की सफाई करते हुए प्लेटफार्म के नज़दीक पहुँच गया था. और फिर जैसे ही आंटी नीचे झुकी तो मुझको उनके पेटीकोट में से उनकी जाँघें साफ़-साफ़ दिखाई दे गई थी।

मेरा लंड तो उस नज़ारे को देखते ही एकदम टाइट हो गया था और फिर मैं तो तिरछी नज़रों से उस नज़ारे को देखता ही जा रहा था. दोस्तों कसम से बहुत ही गोरी और माँसल जाँघें थी आंटी की. और तभी सुरेश ने भी मेरी तरफ देखा और फिर वह भी मेरे पास आ गया था. और फिर वह भी उस नज़ारे को देखने लग गया था. और उस नज़ारे से उसका लंड भी टाइट हो गया था जो कि, उसके पजामे में से साफ दिख रहा था. और फिर आंटी नीचे उतर गई थी, और फिर वह मुझसे कहने लगी कि, अब मुझको अलमारी भी साफ करनी है तो तुम दोनों ज़रा टेबल को पकड़ना. और तभी उनकी नज़र सुरेश के पजामे पर गई जिसमें से उसका टाइट लंड साफ दिख रहा था. और फिर आंटी टेबल पर चढ़ गई थी. और फिर मैंने टेबल को आगे से पकड़ा और सुरेश ने पीछे से, और फिर जैसे ही आंटी टेबल के ऊपर चढ़ी तो उनके बब्स बिल्कुल मेरे मुहँ के सामने थे और उस समय उनकी साड़ी भी उनके बब्स के ऊपर नहीं थी. दोस्तों आंटी ने उस समय पीले रंग का ब्लाऊज भी पहना हुआ था जिसमें से उनके बब्स और निप्पल साफ दिख रहे थे। और जैसे ही आंटी थोड़ा आगे आई तो मेरे होंठ उसके बब्स को छूने लग गए थे. मेरा लंड तो उस समय पूरा 7” का एकदम टाइट हो गया था और मुझे उस समय बहुत ही अच्छा लगा था. और फिर जैसे ही आंटी अलमारी में सफाई करने लगी तो उनके बब्स की निप्पल बार-बार मेरे होठों को छूने लगी थी. और फिर मैंने अपने होंठ थोड़े से खोल दिए थे तो उनके बब्स की निप्पल मेरे मुहँ में आने लगी थी. तो फिर मैंने अपने होठों के बीच में उनके बब्स की निप्पल को दबा दिया था. फिर भी आंटी मुझसे कुछ नहीं बोली थी. तो फिर मेरी हिम्मत अब और बढ़ गई थी. और फिर मैंने उनका आधा सा बब्स अपने मुहँ में ले लिया था. और वह जब अलमारी की सफाई कर रही थी तो उनके बब्स आगे-पीछे होने लग गए थे. और सुरेश भी पीछे से वह सब देख रहा था।

और फिर सुरेश ने मुझको कहा कि, अब तुम टेबल को पीछे से पकड़ो और मैं आगे से पकड़ता हूँ. और फिर उसने भी आंटी के बब्स की निप्पल को उनके ब्लाऊज के ऊपर से ही अपने मुहँ में डाल लिया था. और फिर उत्तेजना में आकर उसका लंड भी रोड की तरह खड़ा हो गया था जो कि उसके पजामे में से साफ दिखाई दे रहा था. और फिर सुरेश ने आंटी के ब्लाऊज के नीचे के हुकों को खोलना शुरू कर दिया था. और फिर हुक खुलते ही सुरेश ने नीचे से उनके बब्स बाहर निकाल लिए थे. दोस्तों क्या गोरे-गोरे बब्स थे, और फिर तो मैं भी टेबल के आगे की तरफ आ गया था. और फिर आंटी के एक बब्स को सुरेश चूसने लगा और एक बब्स को मैं चूसने लग गया था. और फिर मैंने आंटी के ब्लाऊज के ऊपर के दो बचे हुक भी निकाल दिए थे जिससे उनके दोनों बब्स अब बिल्कुल नंगे हो गये थे. और फिर उनके एक बब्स की निप्पल को अपने मुहँ में डालकर चूसने लगा और दूसरे बब्स की निप्पल को सुरेश अपने मुहँ में डालकर चूसने लग गया था, दोस्तों उस समय हम दोनों को बहुत मज़ा आ रहा था। और फिर आंटी टेबल के ऊपर से नीचे उतर गई थी. और फिर उन्होंने मेरे बरमूडा और अंडरवियर को निकाल दिया था तो फिर आंटी को मेरा 7” का लम्बा लौड़ा दिखाई दिया था. वह तो उसको देखती ही रह गई थी. और फिर उन्होंने सुरेश के पजामे को भी निकाल दिया था. उसका लंड भी काफ़ी बड़ा था. और फिर आंटी ने हम दोनों के लंड को अपने हाथ में पकड़ लिया था, और फिर बारी-बारी से वह हम दोनों के लौडों को अपने मुहँ में डालकर चूसने लग गई थी. और वह अपने मुहँ में डालकर लंड के सुपाड़े पर अपनी जीभ से रगड़ने लगी तो मुझे और सुरेश को बड़ा मज़ा आ रहा था, और हमारे मुहँ से आवाज़ भी निकल रही थी आहहह… आंटी औरररर चूसो मेरे लंड को. और फिर मैंने आंटी की साड़ी को निकाल दिया था और फिर सुरेश ने आंटी के पेटीकोट को भी निकाल दिया था. और फिर हम तीनों पूरी तरह से नंगे हो चुके थे. और फिर सुरेश नल में लगी हुई बाल्टी को लेकर आया और फिर वह बाल्टी को आंटी के ऊपर रखकर उनको नहलाने लग गया था. और फिर मैं भी आंटी के आगे आ गया था और मैं उनके होठों को मेरे मुहँ में रखकर चूसने लगा था. और फिर सुरेश ने भी पीछे से अपना लंड उनकी गांड पर लगा दिया था और फिर वह अपने लंड को आंटी की गांड पर रगड़ने लग गया था।

आंटी और हम दोनों पानी में पूरे ही भीग चुके थे और फिर मैंने आंटी के पूरे बदन को चूमना और चूसना शुरू कर दिया था और फिर मैं उनके दोनों बब्स पर किस करने लग गया था और फिर मैं उनकी पतली कमर को मुहँ में लेकर चूसने लगा था. और सुरेश भी उनके कूल्हों पर किस करने लगा था और फिर उनकी पीठ पर भी. और फिर आंटी के मुहँ से आवाजें निकल रही थी आहहह… उहहह… कितना मज़ा आ रहा है और चूसो मेरे पूरे बदन में आग लगी है आज तुम मेरे पूरे बदन को मसल दो और चूस लो मेरे पूरे बदन को. और फिर मैं और सुरेश भी पूरी तरह से जोश में आ गये थे. और फिर मैंने उनकी चूत को अपने मुहँ में ले लिया था और फिर मैंने अपनी जीभ को उनकी चूत में डाल दिया था, और फिर मैं अपनी जीभ को उनकी चूत में अन्दर-बाहर करने लगा था और उनकी चूत का रस पीने लगा था. और मेरे चूसने और चाटने से उनकी चूत पूरी तरह से गीली हो चुकी थी। और फिर मैंने आंटी को नीचे सुला दिया था. और फिर मैंने अपना लंड उनकी चूत के मुहँ पर लगाकर थोड़ी देर तक रगड़ते हुए एकदम से उनकी चूत के अन्दर घुसा दिया था. और फिर मैं अपने लंड को उनकी चूत में अन्दर-बाहर करने लग गया था. और सुरेश हम दोनों के ऊपर बाल्टी से पानी डाल रहा था. और वह एक हाथ से अपना लंड हाथ में लेकर मूठ भी मारता जा रहा था. और इधर आंटी मुझको बोल रही थी कि, फाड़ दो आज तुम मेरी इस चूत को और अपना पूरा लंड इसमें घुसा दो। दोस्तों ये कहानी आप कामलीला डॉट कॉम पर पढ़ रहे है।

और फिर आंटी की बात को सुनकर मैं और भी जोश में आ गया था, और मैं और भी ज़ोर-ज़ोर से अपने लंड को आंटी की चूत में अन्दर-बाहर करने लग गया था. और फिर करीब 20-25 मिनट की जबरदस्त चुदाई के बाद आंटी झड़ गई थी लेकिन फिर भी मैं अपना लंड उनकी चूत में अन्दर-बाहर कर रहा था और फिर 10 मिनट के बाद मैंने भी अपना सारा पानी उनके बब्स पर ही छोड़ दिया था. और फिर सुरेश ने पानी डालकर उसको साफ कर दिया था. और फिर सुरेश ने भी अपना लंड आंटी की चूत में डाल दिया था और उसने मुझको पानी की बाल्टी दे दी थी, और फिर मैं उन दोनों के ऊपर पानी डालने लग गया था. और फिर सुरेश आंटी को घोड़ी बनाकर उनकी चुदाई करने लग गया था और आंटी भी फिर से मदहोश हो गई थी और वह फिर से अपने मुहँ से मादक सी आवाजें निकालने लग गई थी. और फिर आंटी उत्तेजना में आकर उसको कहने लग गई कि, सुरेश मेरी चूत के गुलाम डाल दे अपनी मेमसाब की चूत में अपना पूरा लंड. और फिर सुरेश भी ज़ोर-ज़ोर से उनकी चूत में लंड डालने लग गया था. और फिर आंटी फिर से झड़ गई थी और फिर सुरेश ने अपना लंड आंटी के मुहँ में घुसा दिया और आंटी उसको चूसने लग गई थी. और फिर सुरेश ने अपना पूरा पानी उनके मुहँ में ही छोड़ दिया था और आंटी भी उसका पूरा पानी पी गई थी। और फिर उस शानदार चुदाई के बाद हमने अपने-अपने कपड़े पहन लिये थे और आंटी नहाने के लिये बाथरूम में चली गई थी।

धन्यवाद कामलीला के प्यारे पाठकों !!