हिटलर कज़न शिखा

फिर मैंने अपनी Antarvasna जीभ अपनी काजीन की मोटी गान्ड के अंदर बाहर की………पूरी थूक से गीली हो गयी थी गान्ड………सुराख बिलकुल गीला था और मैं अपनी जीभ की पूरा शीद के अंदर डाल रहा था जहाँ तक जा रही थी…………काजीन लघ्हबग आधे घंटे तक वही पोज़ में अपनी गान्ड मेरे मुंह के ऊपर लेकर बैठी रही और मैं अपनी जीभ अपनी काजीन की गान्ड के अंदर डालता रहा………तभी काजीन ने कहा की मैं झरने ल्ग्गी हूँ…….मैंने कहा काजीन मैं कुछ करूं……काजीन ने उत्क्र मेरे तापर्र मारा और फिर बैठ गयी मेरे उपार्र और कहा” काजीन के लोडे……….गान्डू………सिर्फ़ गान्ड चाट मेरी……….चुत नहीं मिलेगी अभी तुझे………..फिर मेरी काजीन अपनी गान्ड को गिसने लगी मेरे मुंह पर………और एक हाथ से चुत को हाथों से सहलाने ल्ग्गी और कुछ ही मिनटों में एक सुकून सी चीख निकली………….

“अहह………..कुट्तीईए…………..भैय्ाआआआआअ…………अहह…………”. मेरी काजीन झारह गयी और मैं उसका पानी तक ना पी स्का……….तभी मेरी काजीन गुम गयी और मेरा लंड को नाइट सूट से आज़ाद किया और माज़ाक उराने ल्ग्गी ” बहनचोद भैया यह क्या छोटा सा नणना मुन्ना लंड………..तू तो गान्डू है भैया………..बहनचोद है पूओरा………मेरा भैया छूतियाआआआआआआअ” मुझे यह सुनकर पहले थोड़ा बुरा ल्ग्गा लेकिन यह बेज़्ज़ती थोड़ी डॉक्टर तक मजा देने ल्ग्गी……………काजीन ने कहा मैं तो इससे लुल्ली कहूँगी………चल गान्डू भैया अब इस लुल्ली की मूठ मारु……….तू मेरी गान्ड को चाट बहनचोद…………. तभी काजीन मेरे मुंह पे गान्ड लेकर बैठ गयी और मेरी मूठ मारने ल्ग्गी………मैं इतना ज्यादा हॉट था की काजीन के एक-दो बार हिलने से ही मेरा माल चुत गया………मैं मुझे से आवाज़ भी निकल स्का क्योंकि मेरा मुंह गान्ड से धक्का हुआ था और मेरी जीभ मेरी काजीन की गान्ड में फँसी गुई थी……………..”अहह” मेरा पूरा माल मेरे पेट पे निकाला काजीन ने और फिर काजीन उठे और कहा की भेंहकोड चल अब ऐसे ही नाइट सूट ऊपर कर और चुप चाप अपने कमरे में चला जा. आज के लिए इतनी सेवा बहुत है मेरी………..काजीन फिर बाथरूम में चले गये और मैंने ऐसे ही नाइट सूट पहना और कमरे से निकलते बस इतना देखा और याद है की घारी पर 4 ब्जञे वाले थे……………

सुबह जल्दी उत्क्र कॉलेज जाने के लिए मैं तैयार हो रहा था पर पिछली रात को जो मेरे साथ हुआ था वो ज़हेन में इस कद्र बस चुका था की ना चाहते हुए भी मैं मान से जुड़ा नहीं कर पा रहा था. ऊड्र काजीन भी कॉलेज के लिए रेडी हो रही थी. मैंने 8 बजे कॉलेज से निकलने से पहले आंटी को माता टेकने आया तो काजीन भी पास में हल्की सी मुस्कुराहट लिए हुए खड़ी थी. आंटी ने उत्सुकता से पूछा” बेटा कल अच्छे से प्रह लिया था ना?” मैं कुछ कहता इससे पहले ही काजीन बोली” हाँ आंटी….डियर रात तक प्रते रहे हम. ” मैंने काजीन की तरफ असमंजस से देखा और कॉलेज के लिए साइकिल लेकर चल प्रहा(स्कूल थोड़े दूर ही था इसीलिए साइकिल से भी जा जा सकता था)

स्कूल में भी एक लम्हा ऐसा ना गुजरा जब मैंने पिछली रात को याद ना किया हो. की बार वो सीन सोचते सोचते मेरा लंड ताना और बैठा. ना जाने कैसे हो गया ईकडुम जब. काजीन की गान्ड की स्मेल के बारे में सोचक्र ही लंड टाइट हो जाता था. लड़कियों की गान्ड की तरफ मेरा जुकाह ज्यादा होने लगा . मैंने उस दिन अपनी क्लास की सभी लरकियों की गान्ड को अपनी आँखों की टेप से मीनाअ. 2 लड़कियाँ सुकन्या और एकता की गान्ड भी काजीन की तरह चोरही और मोटी थी. सुकन्या ईकडुम गोरे चीतते दूध में न्हाई सी लगती थी . मोटे मोटे मुम्मों के साथ उसकी गान्ड टाइट और बाहर को निकली हुई थी और एकता का रंग सांवला था पर सेक्सी फिगर में जरहा हुआ था जिसमें से गान्ड बहुत ही चोरही थी और ऐसे लगता था की अभी पकड़ कर इसके गांड का होल चेक कर लू. लेकिन मेरी काजीन की बात तो अलग ही थी. कॉलेज में समय बड़ी ही मुश्किल से कटा और जब छुट्टी हुई तभी जाकर साँस आई और मैं सीधा घर की तरफ निकल प्रहा.

मैं घर आया और आंटी को विश की और अपने कमरे की तरफ कदम ब्रहा लिए. फ्रेश होकर खाना खाया और वीडियो गेम खेलने लगा . काजीन ट्यूशन की वजह से लेट आती थी . फिर 5 बजे काजीन आए और मैंने जैसे ही उन्हें देखा तो वीडियो गेम बंद कर दी क्योंकि वो हमेशा मुझे दाँत ते थे………पर आज उन्होंने मुझे देखते ही बिलकुल प्यार से कहा ” अरे खेलते रो…..कोई बात नहीं है…….मैं कुछ नहीं कहती” और अपने रूम में चली गयी. मुझे काफी आश्चर्य हुआ पर याद आया की काजीन ने कल वादा किया था और वो निभा रही है. अभी 5 ही मिनट हुए थे की काजीन ने कहा की अभी 5 मिनट में मेरे रूम में आ जा. नहीं तो तुझे पता ही है मेरा गुस्सा. मैं अंकल को………अभी इतना ही कहा था की मैंने कहा” मैं आ जाऊंगा काजीन”. फिर काजीन ने बारे ही प्यार से “शाबाश मेरे भैया” कहा और रूम में चली गयी.

मैं टिक-टिक लगे घारी की तरफ देखे जा रहा था और जैसे ही सुई ने 5 मिनट को शुआ तो मैंने वीडियो गेम बंद की और आंटी को देखा तो वो किचन में थे. बस मैं चुपके से काजीन के कमरे में आ गया और देखा की बेड पर काजीन नहीं थे……तभी मुझे काजीन की आवाज़ सुनाई दी………..

“चुपचाप बाथरूम में आ जयूओ बहनचोद भैया” काजीन ने आर्डर देते हुए बोला. मैं चुप काजीन के बाथरूम में आ गया तो देखा……..की काजीन ने वही क्लोथस पहने है जो कॉलेज के लिए पहने थे- ब्लैक टाइट पाजामी सूट जो काजीन के जिस्म के साथ ऐसे चिपका हुआ था की शरीर की बनावट साफ नज़र आ रही थी. काजीन ने बाथरूम का दरवाजा लॉक किया और कहा की कोई आवाज़ नहीं निकलनी चाहिई समजीई. मैंने हाँ में सर हिलाया और तभी काजीन ने अपने हाथों को उठाया और कहा की यहाँ देखो……..मैंने देखा की काजीन के उंड़रांस में पसीने के दाग थे……जो एक गोल आकर में पूरी अंडरआर्म्स को समेटे हुए थे. काजीन ने कहा बहनचोद भैया देखते क्या हे चल अपनी काजीन के आर्म्पाइट्स की गांड ससुन्नग…..मैं कुछ स्माज ही पता की काजीन ने अपने दाएँ हाथ से मेरे बाल पकड़े और पूरे ज़ोर से मेरा मुंह अपने बाए आर्म्पाइट्स में गाड़ा दिया…….उफफफफफफफफफफफफफफफफफफफ्फ़ मेरी नाक सीडी काजीन के आर्म्पाइट्स के बीचो-बीच थी और पसीने की स्मेल से मेरा नाक भर गया था……..

“हाँ बहनचोद ससुंगगगगगगगग……यह देख पूरे दिन तेरी काजीन की मेहनत का पसीना सुउनगगगगगग अच्छे से………..हाँ ऐसे ही……….” यही आवाजें मेरे कानों में गूँज रही थी जब मैं काजीन के आर्म्पाइट्स में मुंह फंसाया हुआ था……आर्म्पाइट्स की बदबुऊ थोड़ी ही देर में खुशबू में तब्दील हो गयी और मेरा लंड धीरे धीरे टवर के जैसा कारक होकर टन गया……जब मेरी साँसें टूटने लगी तभ काजीन ने मेरा मुंह साइड पर किया और फिर थोड़े सेकेंड्स से पहले ही मुझे अपने दाएँ आर्म्पाइट्स की खुसबुऊउ सुंगाई जो मैंने पूरे मुझे से सुंगिइिईई…….फिर काजीन ने अपनी कमीज़ उतारी और मैंने देखा की रेड ब्रा में काजीन के मोटे मोटे मुम्मीई मस्त लग रहे थे……ईकाएक मेरे मुंह से निकल गया” काजीन प्ल्ज़्ज़ मुझे यह डिहयूओ……मैंने चूसना है इन्हें”.

इतना कहने की ही देर थी की काजीन ने मेरे मुंह पाकारकर काश के 2 छानते मारे और गुस्से से बोला” भेंहोड़ कुट्तीए…….तेरी हिम्मत कैसे हुई मुझे कुछ कहने की…….मेरी मर्जी चलेगी समझे………तू मेरा कुत्ता भाई है……..जो तेरी शरीफ काजीन कहेगी वही तुझ जैसे हरामी भैया को करना प्रेगा …..समझे गांडुऊऊुुुउउ भैया……….” मैंने हाँ में सर हिलाया और काजीन ने अपनी नंगे आर्म्पाइट्स मुझसे बड़ी बड़ी चटवआइए……….मैंने देखा की जब मैं उनपर जीभ फेयर रहा था तो काजीन की आक्नें मुझे से बंद हो रही थी. मैंने 15 मिनट तक दोनों आर्म्पाइट्स चाट चाट कर सारा पसीना साफ कर दिया था और अच्छे से अपने थूक से गीले कर दिए थे……….

तभी काजीन ने मेरे सारे कपड़े उतरवाइए और मेरी लुल्ली का फिर से माज़ाक उरायाअ…….जो मुझे काफी मजा आया…..फिर काजीन ने कहा चल अभी तुझे मेरी इस खूबसूरत गान्ड की सेवा और करनी है. काजीन ने अपनी पाजामी धीरे से नीचे की और काजीन के गोरे और चौड़े थाइस मेरे सामने थे और लाल रंग की पैंटी काजीन के चितड़ों में फँसी हुई थी जिससे देखकर मेरे अंदर आग लग गयी. काजीन ने पैंटी उतारी जिससे काजीन की मोटी मस्त गान्ड के दर्शन मुझे हुए और फिर काजीन ने तभी कहा……….

शिखा- चल बहनचोद इसे पहन कुट्टीईईईई………अपनी काजीन की पैंटी पहन और लंड से रगड़ हरामी की औलाआद………..मैंने काजीन के कहने पर पैंटी पहनी और उसे पहनने का वो एहास मेरे अंदर वो सुकून आया की मैं बता ंही सकता. अपनी काजीन की पहने हुए और लंड का स्पर्श पैंटी से हो रहा था उससे महसूस करके स्वर्ग सा मजा आ रहा था. फिर काजीन ने मुझे नीचे लिटाया और मेरे ऊपर खड़ी हो गयी और फिर धीरे धीरे अपनी मोटी सेक्सी गान्ड को नीचे लाने ल्ग्गी और फिर अपने दोनों हाथों से चितड़ों को अलग किया जिससे मुझे काजीन का शीद साफ दिखाई दिया…….फिर एक ही झटके से काजीन ने पूरा बाहर डालकर अपनी गान्ड मेरी नाक पे रख दी. जिससे मैं फिर से काजीन के चोतदों की वो ना भूल सक्ने वाली सुगंधह से मदहोश होने लगा…….इतने में मुझे आंटी की आवाज़ सुनाई दी
आंटी- ” शिखा बेटा नहा रही हो क्या…….”?
शिखा- हाँ आंटी……..क्या हुआ?