एक खूबसूरत चुदाई की यादगार दास्तान भाग -1

हाय फ्रेंड्स, Antarvasna मेरा नाम मनीषा है मेरी उम्र 28 साल की है और मैं पटियाला के पास एक गाँव में अपनी सास और ससुर के साथ रहती हूँ। मेरे पति फोज में है, मेरी लम्बाई 5.6 फुट की है और मैं एक स्लिम बॉडी की मालकिन हूँ। मेरे बड़े-बड़े बब्स 34” के एकदम गोल-मटोल है और वह आगे को तने हुए रहते है। उनके नीचे मेरी पतली सी 28” की कमर है और उसके नीचे तो कयामत है मतलब मेरी बड़ी सी गांड 36” की जिसको मैं बड़े ही मस्त अन्दाज से लटक-झटक कर चलती हूँ। और मेरी गांड तक लहरहाते हुए मेरे काले रेशमी बालों को देखकर तो लड़कों के होश ही उड़ जाते है। मेरे फिगर को देखकर तो लड़कों के ही नहीं मुझे देखकर तो बुड्डों के मुहँ में भी पानी आ जाता है। हाँ तो दोस्तों अब मैं अपनी तारीफ छोड़कर सीधी अपनी कहानी पर आती हूँ।

दोस्तों यह पिछले साल की ही बात है तब मेरी मौसी की बेटी की शादी थी अमृतसर में और मैं मौसी जी के कहने पर ही शादी से 10 दिन पहले ही उनके पास चली गई थी। और फिर पहले 2 दिन तो मुझे मेरी मौसी की लड़की नेहा और लड़के दिनेश ने पूरा अमृतसर घुमाया और फिर हम शादी की शॉपिंग करने में व्यस्त हो गये थे। हमारे साथ मेरे मौसा जी के भाई का लड़का रोहित भी हमारी मदद करता था। घर में शादी का माहौल था तो हम सब लोग देर रात तक जागते और फिर सुबह देर से ही उठते थे और रोहित भी वहीं रुक जाता था, और ऐसे में जिसको जहाँ जगह मिलती थी वह वहाँ सो जाता था। दोस्तों रोहित देखने में तो थोड़ा शर्मिला सा था मगर वह लड़कियों के एक-एक अंग को बड़ी लालची नज़रों से देखता था, यह बात मुझको तब पता चली जब वह हमारे साथ मार्केट जाता था और अक्सर ही वह मुझे भी बड़े ध्यान से देखता था मगर जब मैं उसकी तरफ देखती थी तो वह दूसरी तरफ देखने लग जाता था। और फिर एक रात जब हम सोने की तैयारी कर रहे थे तो मैं बाथरूम में चली गई थी और फिर जब मैं वापस आई तो मैंने देखा कि, सब लेटे हुए है, मौसा जी और मौसी जी अलग कमरे में थे और एक कमरे में दिनेश और रोहित बेड पर सो रहे थे और उनके पास ही नेहा भी सो रही थी। वहाँ पर मेरे लिए जगह नहीं थी तो मैंने सोचा कि, मैं दूसरे कमरे में जाकर अकेली ही सो जाती हूँ, मगर जब मैंने वहाँ जाकर देखा तो वहाँ पर पड़े बेड के ऊपर बहुत सारा सामान पड़ा हुआ था। और फिर मैंने सोचा कि, नेहा के पास जाकर नीचे ही सो जाती हूँ और फिर मैं नेहा के साथ में जाकर सो गई थी।

मगर कुछ देर लेटने के बाद भी मुझे नीचे नींद नहीं आ रही थी, तो नेहा ने मुझसे कहा कि, दीदी आप ऊपर बेड पर चली जाओ आप तीनों तो बेड पर सो जाओगे और नेहा ने मुझको कहा कि, मैंने इसीलिए नीचे अपना बिस्तर लगाया था कि, आप तीनों ऊपर सो सको। लेकिन फिर मैंने दिनेश और रोहित के पास सोने में थोड़ी हिचकिचाहट दिखाई तो नेहा ने मुझको कहा कि, दीदी वह आपके भाई ही तो है। और फिर मैंने बेड की तरफ देखा तो एक किनारे पर दिनेश सो रहा था और उसके साथ रोहित सो रहा था और उनके पास वाली जगह खाली पड़ी थी, वह दोनों गहरी नींद में सो रहे थे। और फिर मैंने भी सोचा कि, यह तो सो रहे है और फिर मैं रोहित के पास वाली जगह पर लेट गई, मगर अब मुझे नींद कहाँ आने वाली थी क्योंकि पास में जब कोई मर्द लेटा हो और मुझे नींद आ जाए यह तो हो ही नहीं सकता। और फिर मैं रोहित की तरफ देखने लग गई थी कि, वह सो रहा है या जाग रहा है, मगर वह सच में सो रहा था। और फिर मेरी नज़र उसके लंड वाली जगह पर गई, वहाँ पर कुछ भी हलचल नहीं थी, मगर मेरे बदन में तो आग दहक रही थी. और फिर मैं सेक्स के लिए बेचैन होने लग गई थी, मगर वह तो होना मुझे मुश्किल लग रहा था। क्योंकि दिनेश मेरा भाई था और रोहित भी तो मेरे भाई की तरह ही था और फिर मैं सोने की कोशिश करने लग गई थी, मगर मुझको नींद आ ही नहीं रही थी और फिर मैंने उठकर देखा तो नेहा भी सो चुकी थी। और फिर मैंने कमरे की लाइट बन्द कर दी थी और मैं फिर से सोने की कोशिश करने लगी और तभी थोड़ी देर के बाद रोहित ने करवट बदली और वह मेरी तरफ घूम गया, उसकी एक टाँग मेरी टाँग के ऊपर आ गई और उसका एक हाथ मेरे गले के ऊपर आ गया था और उस समय मुझको लगा कि, शायद अब रोहित जाग जाएगा, इसलिए मैं बिना हिले चुप-चाप लेटी रही, मगर मुझे उसका स्पर्श मदमस्त करने लग गया था और उस समय मेरा भी मन कर रहा था कि, मैं भी करवट बदलकर उसके साथ चिपक जाऊँ। और फिर जब काफ़ी देर के बाद भी वह नहीं हिला तो मैं खुद ही सीधे लेटे-लेटे ही उसके पास सरक गई थी और फिर उसकी छाती मेरे बाजू को छू रही थी और उसका एक हाथ मेरे बब्स के ऊपर से होता हुआ मेरी दूसरी तरफ जा रहा था, मेरी जाँघ अब उसके लंड के बिल्कुल पास थी और उसकी जाँघ मेरी जाँघ के ऊपर थी. और फिर मैंने धीरे से अपना हाथ उसकी पेन्ट पर लगाया और फिर मैं उसका लंड देखने लगी।

मैंने उसकी पेन्ट के ऊपर से ही उसका लंड पकड़ा, मगर वह भी रोहित की तरह ही सो रहा था. और फिर मैंने अपनी जाँघ बिल्कुल उसके लंड के साथ दबा दी थी और फिर मैं खुद भी उसके साथ लेटी-लेटी सोचने लगी कि, काश ऐसे ही रोहित मुझे चोद डाले और तभी अचानक से रोहित ने फिर से हिलना शुरू किया और मैं थोड़ी सी सहम गई और वैसे ही चुप-चाप लेटी रही, रोहित शायद अब अपनी नींद से थोड़ा सा बाहर आया था, इसलिए उसने अंधेरे में ही मेरे बदन को हाथ लगाकर देखना चाहा कि, मैं कौन हूँ, मगर उसका हाथ सीधा ही मेरे बब्स पर लगा, मेरे बब्स पर उसका हाथ लगते ही शायद वह समझ गया था कि, उसके साथ एक लड़की सो रही है और फिर उसने झट से अपना हाथ और टाँग पीछे खींच ली थी। और फिर वह थोड़ा सा पीछे होकर लेट गया था, मगर उसकी साँसों से अब मुझको लग रहा था कि, बिजली के जिस हाइ-वोल्टेज करंट को उसने छू लिया है उससे उसकी नींद उड़ गई है। और फिर वह अपने बिस्तर से उठा और लाइट जलाकर उसने मेरी तरफ देखा तो मैं वैसे ही आँखें बन्द करके लेटी रही ताकि रोहित समझे कि, मैं भी सो रही हूँ। और फिर उसने लाइट वापस बन्द कर दी थी और वह फिर से मेरी बगल में आकर सो गया था। शायद वह यह देखना चाहता था कि, कहीं मैं नेहा तो नहीं? और फिर थोड़ी देर तक तो वह चुप-चाप लेटा रहा और फिर उसने अपना हाथ धीरे-धीरे मेरी तरफ बढ़ाना शुरू किया और फिर उसने मेरी बाजू के ऊपर अपना हाथ रख दिया था। और फिर जब मेरी तरफ से कोई हलचल नहीं हुई तो उसने फिर से मेरी जाँघ के साथ अपना लंड चिपका लिया, मगर अब उसका लंड मेरी जाँघ पर ऐसे लगा कि, जैसे वह कोई लोहे का रॉड हो, वह एकदम तना हुआ था. मैं मन ही मन यह सोचकर बहुत खुश हो रही थी कि, इतने दिनों के बाद लंड का स्पर्श तो मिला। और फिर धीरे से उसने मेरे पेट पर अपना हाथ भी रख दिया था, मैंने उस समय नाइटी पहनी हुई थी, जिसमें उसका हाथ नहीं घुस सकता था, मगर उसने मेरी नाइटी के ऊपर से ही अपना हाथ ऊपर को बढ़ाते हुए मेरे बब्स पर हाथ रख दिया था। और फिर धीरे-धीरे वह मेरे बब्स को मसलने लगा, अब तो मुझको भी चुप-चाप लेटे रहना मुश्किल लगने लगा था क्योंकि मेरे बदन में अब ज्वालामुखी फूट रहे थे और गला भी सूख रहा था।

और फिर रोहित अपना मुहँ मेरी गर्दन के पास ले आया था और फिर वह अपनी नाक मेरे खुले बालों में घुसाकर अपनी साँस को अन्दर खींचने लगा जैसे वह मेरे बालों की खुशबू ले रहा हो, और उसका हाथ भी अब मेरे बब्स पर ज़्यादा दबाव डाल रहा था और उसका लंड मेरी जाँघ पर। मुझसे अब और ज्यादा देर तक चुप रहना मुश्किल था और फिर मैंने भी करवट बदली और रोहित को अपनी बाहों में ले लिया था, मगर मेरे ऐसा करने से रोहित डर गया था, मगर जब मैंने उसकी पीठ पर हाथ फेरा तो वह समझ गया कि, मैं भी ऐसा ही चाहती हूँ और फिर उसने भी मुझको अपनी बाहों में जकड़ लिया था. और फिर हम दोनों एक-दूसरे के साथ चिपक गए थे। रोहित ने फिर मेरे होठों को अपने मुहँ में ले लिया था और फिर वह मेरे होठों का रस चूसने लग गया था और मैं भी उसका साथ दे रही थी वह अब मेरी पीठ पर, मेरे बालों में और मेरी गांड पर अपना हाथ घुमा रहा था और मैं भी उसकी पीठ पर और उसके बालों में अपना हाथ घुमा रही थी। और फिर करीब 5-7 मिनट तक हम वैसे ही एक-दूसरे के मुहँ में मुहँ डाले एक-दूसरे से चिपके रहे और फिर वह मेरे ऊपर आ गया और अपने लंड को मेरी चूत वाली जगह पर रगड़ने लगा, हम दोनों के बदन उस समय आग के जैसे दहकने लग गए थे।

रोहित ने फिर अपने एक हाथ से मेरी नाइटी को ऊपर खींचने की कोशिश करी, तो मैंने भी अपनी गांड को उठाकर उसका साथ दिया. और फिर उसने मेरी नाइटी को मेरी कमर तक उठा दिया था और फिर वह अपना लंड मेरी पैन्टी के ऊपर से मेरी चूत पर रगड़ने लगा, अब मैंने उसकी पेन्ट को नीचे किया और फिर उसका लंड अपने हाथ में ले लिया था। कसम से क्या लंड था उसका, एकदम तना हुआ और वह करीब 7” तक लम्बा था। उसको हाथ में पकड़ते ही मुझे पता चल गया था कि, यह मुझे जरूर खुश करेगा और फिर हम दोनों अपने-अपने काम बड़े आराम से कर रहे थे ताकि हमारे पास ही में सो रहे दिनेश और नेहा को पता ना चल जाए, मगर रोहित तो जैसे पागल हो रहा था, उसने मेरे कान में मुझे बाहर आने के लिए कहा और फिर वह खुद मेरे ऊपर से उठकर बाहर चला गया था। दोस्तों यह तो मुझे भी पता था कि, यहाँ पर वह सब कुछ करना ख़तरे से खाली नहीं है और फिर मैं भी उसके पीछे-पीछे बाहर चली गई। हमने धीरे से उस कमरे का दरवाजा बन्द किया और फिर वह मुझे दूसरे कमरे में ले गया था. वहाँ पर पड़े बेड के ऊपर तो पहले से ही सामान बिखरा हुआ था. तो फिर वह मुझे नीचे स्टोर-रूम में ले आया था।

दोस्तों मुझको माफ़ करना मैं अपनी इस कहानी को किन्ही कारणों से यहीं अधूरी छोड़ रही हूँ और जल्द ही मैं अपनी इस कहानी के अगले भाग के साथ फिर से आपके सामने आऊँगी।

धन्यवाद कामलीला के प्यारे पाठकों !!