भाभी की चूत के मुँह पर लंड लगाया

हैल्लो दोस्तों, antarvasna मेरा नाम मानव है। में दिल्ली का रहने वाला हूँ और मेरी हाईट 5 फुट 9 इंच है, मेरी उम्र 26 साल है। में बैंक में जॉब करता हूँ। आज में भी आप लोगों को अपना एक किस्सा सुनना चाहूँगा। ये कहानी मेरी पड़ोस में रहने वाली भाभी की है, जो 2 साल पहले हमारे पड़ोस में रहने आई थी। उनके पति एक मल्टीनेशनल कंपनी में काम करते है और बहुत अच्छी पोस्ट पर है। फिर कुछ ही दिनों में भाभी का हमारे घर आना जाना शुरू हो गया। वो दिखने में बहुत सुंदर है, एकदम गोरी, हाईट 5 फुट 4 इंच, फिगर साईज 34-29-34 होगा, उनकी आँखें मुझे बहुत अच्छी लगती है। फिर शुरू में तो सब ठीक चला। में हमेशा उनसे कहता था कि उनकी आखें मुझे बहुत अच्छी लगती है और ये सिर्फ़ मेरे लिए मज़ाक तक ही सीमित था।

अब भाभी को जब भी कोई काम होता तो वो मुझे बता देती थी और में बेफ़िक्र होकर उनका काम कर देता। हम कई बार एक साथ मार्केट गये घूमे फिरे, लेकिन कभी मेरे मन में कोई गलत फिलिंग नहीं आई, लेकिन 1 महीने पहले जब में उनके घर गया, तो तब भाभी खाना बना रही थी और अब में नॉर्मल बात करने लगा था। बात करते वक़्त मुझे ऐसा महसूस होने लगा कि भाभी मुझे बहुत गौर से देख रही है। तब मैंने देखकर अनदेखा कर दिया और फिर में अपना काम ख़त्म करके वहाँ से चला गया। फिर शाम को भाभी मेरे घर पर आई, जब में अपने रूम में कंप्यूटर पर काम कर रहा था। तब वो मेरे पास आकर बैठ गई और बात करने लगी और फिर उन्होंने मज़ाक में मुझे छेड़ना शुरू कर दिया। आज मुझे उनका छूना अच्छा लग रहा था। तभी अचानक से मैंने उनका एक हाथ ज़ोर से पकड़ लिया। तब वो मुझे देखती रही और में उन्हें देखता रहा।

फिर मम्मी ने नीचे से आवाज लगा ली और फिर में कंप्यूटर बंद करके भाभी के साथ नीचे चला गया। अब अगले दिन मुझे भाभी को शॉपिंग करने ले जाना था। तब में मम्मी को स्कूल छोड़कर भाभी के साथ शॉपिंग करने चला गया। फिर वहाँ से आने के बाद मैंने अपनी बाइक पार्क की और भाभी की सामान उठाने में मदद करने लगा। फिर हम दोनों उनके घर गये, तो तब वहाँ उन्होंने मुझे कोल्डड्रिंक दी और फिर हम मज़ाक करने लगे और फिर वो उठकर रसोई की तरफ कुछ खाने के लिए लाने के लिए चल दी। तब में भी उनके पीछे चल दिया और उनको बताया कि मेरा खाने का मूड नहीं है, लेकिन वो ज़बरदस्ती खाना डालने लगी थी। तब मैंने उनका हाथ पकड़कर उन्हें रोका और फिर मेरी हिम्मत नहीं हुई कि में उनका हाथ छोड़ सकूँ।

अब भाभी मुझे देख रही थी और फिर अचानक से पता नहीं क्या हुआ? मैंने और उन्होंने आपस में किस करना शुरू कर दिया। फिर करीबन 2 मिनट की किस के बाद हम अलग हो गये और फिर में बाहर आकर बैठ गया। अब में उनसे आँख नहीं मिला पा रहा था। फिर थोड़ी देर के बाद वो बाहर आई और मेरे सामने बैठ गई और फिर उन्होंने कहा कि जो आज हुआ, वो शायद नहीं होना चाहिए था। अब में कुछ नहीं बोल पा रहा था। तब उन्होंने पूछा कि तुम्हें ये गलत नहीं लगता? तो तब मैंने कहा कि में आपके बारे में बहुत अच्छा सोचता हूँ। तब वो हंस पड़ी और बोली कि पागल में भी बहुत अच्छा सोचती हूँ। तब मैंने कहा कि शायद आई लव यू। तो तब उन्होंने मुस्कुराकर कहा कि ये प्यार है या सिर्फ़ जरूरत? तो तब में जवाब नहीं दे पाया और वहाँ से जाने लगा और उनसे कहा कि में बस आपके साथ रहना चाहता हूँ। तो तब वो मुस्कुरा दी और मेरा हाथ पकड़कर मुझे फिर से सोफे पर बैठा दिया। दोस्तों ये कहानी आप चोदन डॉट कॉम पर पड़ रहे है।

अब हम बातें करने लगे थे और फिर बातें करते-करते ना जाने क्या हुआ? हम दोनों ने एक दूसरे को किस करना शुरू कर दिया। अब में अपने आप पर काबू नहीं पा रहा था और अब मेरे हाथ उनके बूब्स तक जाने लगे थे और उन्होंने उसे रोका नहीं। तब मैंने उनके बूब्स को मसलना शुरू कर दिया। अब वो मुझे और ज़ोर-ज़ोर से किस करने लगी थी। तब मुझसे रहा नहीं गया और फिर मैंने उनको सोफे पर लेटा दिया और उनके ऊपर चढ़कर उन्हें ज़ोर-ज़ोर से किस करने लगा था। अब मेरे हाथ उनके ब्लाउज के अंदर थे। फिर मैंने उनके होंठो पर, गले पर किस किया और सक कर रहा था और अब मेरे हाथ उनके बूब्स से नीचे की तरफ जाने लगे थे। फिर मैंने अपने हाथ से उनकी साड़ी ऊपर की और उनकी चूत को सहलाने लगा था, तो तब वो मुझे गीली महसूस हो रही थी।

फिर में उनको किस करता रहा और अब मेरी एक उंगली उनकी चूत के अंदर थी। अब उनके मुँह से बहुत हल्की-हल्की सिसकियाँ निकल रही थी। तब मैंने थोड़ा पीछे होकर उनकी पेंटी निकाल दी और उनकी साड़ी ऊपर कर दी, ताकि में उनकी चूत को पूरी तरह देख और महसूस कर सकूँ। फिर मैंने अपनी जीभ उनकी चूत में डाली और उसे सक करने लगा था। तब उन्होंने मेरे सिर को ज़ोर से पकड़ लिया और अपनी चूत की तरफ धकेलने लगी थी, शायद उन्हें अच्छा लग रहा था। फिर मैंने अपनी पूरी जीभ उनकी चूत में डाल दी और उसे सक करने लगा था और फिर मैंने अपनी पेंट घुटनो तक कर दी और उन्हें सोफे से उठाकर जमीन पर लेटा दिया और उनकी दोनों टाँगे चौड़ी कर दी थी। फिर मैंने अपना लंड उनकी चूत के मुँह पर लगाया। अब मेरा लंड धीरे-धीरे उनकी चूत में अंदर जाने लगा था। अब मुझे अच्छा महसूस हो रहा था। अब में उनके बूब्स पर सकिंग कर रहा था और थोड़ा अपने लंड से झटके भी दे रहा था, ताकि में और वो दोनों ही संतुष्ट हो सके। फिर करीब 10-15 मिनट के बाद में झड़ गया और उन्हें किस करने लगा था। अब मुझे उनके चेहरे को देखकर यह महसूस हो रहा था कि वो संतुष्ट है।

फिर उसके बाद में अपने घर आ गया और आते ही बिस्तर पर लेट गया। उस पल की याद ने मुझे कई दिनों तक सोने नहीं दिया था। फिर में भाभी से उस दिन के बाद आँख नहीं मिला पाया और ना ही वो मुझसे खुलकर बात कर पाई। फिर ना जाने उस वक़्त में ऐसा क्या हुआ? जो मुझे आज भी शादीशुदा लड़कियों की तरफ आकर्षित करती है, में आज भी उस पल को जीना चाहता हूँ, ताकि उस चीज को महसूस कर सकूँ जिसे सेक्स कहते है ।।

धन्यवाद …