एक ही रजाई में दो बहिनों की चुदाई

हाय फ्रेंड्स, Antarvasna मेरा नाम सीमा है मेरी उम्र 25 साल की है और मेरी छोटी बहिन 23 साल की है और उसका नाम है शिखा, मेरी दीदी कविता जो की 28 साल की है उनकी शादी पिछले साल ही हुई है, और हमारे जीजाजी बड़े भी कमीने किस्म के आदमी है, क्योंकि शादी के बाद से ही वह हम दोनों बहनों के बब्स को दबा देते थे. पहले तो हम दोनों को बहुत गुस्सा आता था पर आहिस्ता-आहिस्ता हम दोनों बहनों को वह सब अच्छा भी लगने लगा था, पर मेरी कविता दीदी को यह सब बिल्कुल भी अच्छा नहीं लगता था दोस्तों कविता दीदी भी सही थी क्योंकि किसी का पति अगर कहीं और मुहँ मारे तो गुस्सा तो आएगा ही. पर हम दोनों बहनों को जीजाजी के वैसे करने में बहुत मज़ा आने लगा था। हमारे जीजू बड़े ही सेक्सी किस्म के है, जब वह मेरे कूल्हों पर चूंटी काटते थे तो दर्द तो होता था पर उस दर्द का एहसास अलग ही होता था, लगता था कि, जैसे वह मेरी पैन्टी में भी हाथ डाल रहे हो, पर घर में मम्मी का कड़ा पहरा होता था शायद मेरी मम्मी को भी पता था कि, उनका दामाद एक नम्बर का हरामी है. और वह यह भी सोचती थी कि, कही वह मेरी दूसरी बेटी पर भी अपना हाथ ना साफ़ कर दे. दोस्तों मेरे जीजू का हाथ मेरी ब्रा के अन्दर तक तो आराम से चला जाता था. हाँ तो दोस्तों मैं अब आपको बताती हूँ, कि कब ऐसा मौक़ा आया था कि जब हम दोनों बहिनें हमारे जीजू से चुद गई थी।

दोस्तों यह पिछले साल की ही बात है, जब जीजाजी किसी काम से हमारे शहर में आये हुए थे, दीदी और जीजाजी वैसे तो पटना में रहते है, तो फिर वह हमारे घर पर भी शाम को 7 बजे आ गए थे. दोस्तों उस दिन हमारे मम्मी और पापा दोनों ही भिलाई के लिए निकल गए थे क्योंकि वह मेरे लिए लड़का देखने गए थे मेरी शादी के लिए. और वह एक दिन के बाद आने वाले थे. और फिर जीजाजी को जैसे ही यह पता चला कि, मम्मी आज ही गई है, तो वह बहुत खुश हो गए थे. ख़ुशी तो हमदोनों को भी बहुत हुई थी क्योंकि हम दोनों बहनें भी कही से कम नहीं थी हम दोनों की जवानी भी लपलपा रही थी. और फिर हम सब मिलकर रात को 9 बजे का फिल्म का शो देखने गए थे पास ही के सिनेमा हाल में, वहाँ पर बीच में जीजू थे और अगल-बगल में हम दोनों बहनें थी. दोस्तों हमारे बब्स तो वहीं से दबने शुरू हो गए थे, और ढाई घंटे में तो हम दोनों की चूतों से गरम-गरम पानी भी निकलने लगा था. दोस्तों मेरा मन तो कर रहा था कि, जीजू की पेन्ट की ज़िप खोलकर वहीँ पर उनके लंड को अपने मुहँ में ले लूँ, या फिर उनकी गोद में बैठकर उनका पूरा का पूरा लंड अपनी चूत में डाल लूँ, पर कोई बात नहीं थी और फिर हम लोग 12.45 बजे तक घर आ गए थे खाना तो हमने बाहर ही खा लिया था. अब तो हम लोगों को केवल सोना ही था, लेकिन सोए तो सोए कहाँ क्योंकि रज़ाई तो एक ही बाहर थी, बाकी सब तो दूसरे कमरे में रखी थी और मम्मी घर के बाकी दूसरे कमरों का ताला लगाकर चाबी अपने साथ लेकर चली गई थी और वह ठंड की रात थी।

और फिर हम लोग एक ही रज़ाई में सो गए थे, बीच में जीजू और उनकी दोनों साइड में हम दोनों, जीजू पहले मेरी छोटी बहिन के तरफ घूमकर सो गए थे. और फिर थोड़ी देर के बाद शिखा के मुहँ से आहहह… इस्सस… की आवाज़ निकलने लगी. और फिर मैंने झट से रज़ाई हटाकर देखा तो शिखा उसके अन्दर टॉप लेस थी उसकी बड़ी-बड़ी दोनों चूचियाँ एकदम खुली हुई थी और जीजू उसके निप्पल को मसल रहे रहे थे, उसके बाद मैं जीजू से बोली कि, यह तो ग़लत है जीजू, मैं बड़ी हूँ, पहले तुम मुझे ऐसा करो, तो फिर शिखा भी बोली कि, दीदी देखो मुझे जोश आ गया है और तुम मज़ा किरकिरा मत करो. तो जीजू ने हमसे कहा कि, देखो रात अपनी है और कोई घर में भी नहीं है तो क्यों ना हम सब मिलकर खूब मज़े करे, और मैं तुम दोनों बहिनों की एक साथ चुदाई करूं. और हम फिर से रज़ाई के अन्दर चले गए थे और फिर मैंने अन्दर ही अन्दर अपने पूरे कपड़े उतार दिए थे, और शिखा ने भी अपने सारे कपड़े उतार दिए थे. और फिर तो क्या था जीजू के कपड़े भी हम दोनों ने मिलकर एक एक करके उतार दिए थे. और अब हम तीनों एक ही रज़ाई में नंगे थे। और फिर हम तीनों एक दूसरे को किस कर रहे थे, जीजू मेरी चूचियाँ दबाते और कभी पीते और कभी वह छोटी के बब्स को दबाते तो कभी पीते. उसके बाद तो वह शिखा के ऊपर चढ़ गए थे और उन्होंने शिखा के दोनों पैरों को अलग-अलग करके, अपने लंड को उसकी चूत के बीच में रखकर, कसके एक धक्का मारा, लेकिन तब भी उसकी चूत के अन्दर जीजाजी का लंड नहीं गया था, पर शिखा की जान निकलने लगी थी और उसको काफ़ी दर्द होने लगा था और वह रोने लगी थी।

और फिर मैंने शिखा को सहलाया और शिखा के बब्स को भी सहलाया और जीजू ने फिर से कोशिश करी और जीजू ने इसबार अपना लंड पूरा एक ही झटके में उसकी चूत के अन्दर डाल दिया था और अब जीजू ज़ोर-ज़ोर से शिखा को चोदने लग गए थे. और इधर मैं भी अपनी चूत को जीजा से चटवाने लगी थी. वह शिखा को चोद भी रहे थे और मेरी चूत को चाट भी रहे थे और मैं शिखा के बब्स को दबा भी रही थी. और उसके बाद मैं बेड पर लेट गई थी और जीजू मेरे ऊपर चढ़ गए थे. और अब वह मेरी चूत में ऊँगली डालने लगे थे और वह अपने एक हाथ से मेरे बब्स को मसलने भी लगे थे, और मैं आहहह… उहहह… कर रही थी. और उधर शिखा भी जीजू के कूल्हों पर अपने बब्स को सटा रही थी. और फिर जीजू ने अपना लंड मेरी चूत में डाल दिया था. और फिर वह मुझको चोदने लग गए थे।

क्या बताऊँ दोस्तों हम दोनों को बेड पर लेटाकर कभी वह मुझे चोद रहे थे तो कभी शिखा को चोद रहे थे. पूरी रात भर वह चुदाई का खेल चलता रहा. दोस्तों रातभर एक ही रज़ाई के अन्दर हम दोनों बहनों की चूत को फाड़ दिया था जीजू ने, उसके बाद सुबह तो उनको निकलना था. तो उन्होंने एक-एकबार फिर से हम दोनों बहनों को चोदा और फिर वह चले गए थे।

धन्यवाद कामलीला के प्यारे पाठकों !!