भैया की साली की चूत को फाड़कर बनाया

हाय फ्रेंड्स, Antarvasna मैं भी आप सभी की तरह ही कामलीला डॉट कॉम की लगातार सेक्सी कहानियाँ पढ़ने वाला एक पाठक हूँ और मैं ऐसा पिछले कुछ सालों से लगातार करता आ रहा हूँ और मैं इस वेबसाइट पर छपी सभी कहानियों को पढ़कर बहुत मज़े करता हूँ और ऐसा करना मुझे बहुत अच्छा लगता है। दोस्तों आज मैं जो अपनी सच्ची कहानी आप सभी को बताने जा रहा हूँ वो एकदम सच्ची घटना है जो मेरे साथ घटित हुई थी और इस घटना ने मेरे जीवन के साथ-साथ मेरी सोच को भी बदल दिया और अब मैं आप सभी का ज़्यादा वक़्त ना खराब करते हुए पहले अपना परिचय करवाकर अपनी इस कहानी को बताना शुरू करता हूँ।

दोस्तों मेरा नाम रोहित है और मेरी उम्र 26 साल की है. मैं मेरी दिलरुबा संजना को पिछले 5 सालों से जानता था पर मुझको उसके साथ कभी चुदाई का मौका ही नहीं मिला था. लेकिन एक दिन किस्मत से मैंने उसकी कुँवारी चूत को खूब जमकर चोदा ही नहीं बल्कि फिर मैंने उसके साथ अपनी चुदाई का सिलसिला भी शुरु कर दिया था।

दोस्तों मेरी दिलरुबा यानी की मेरे बड़े भैया की साली का नाम संजना है और उसकी उम्र अभी 24 साल की है इस वक्त उसके फिगर का साइज़ 34-28-36 का है. दोस्तों हम पिछले 5 सालों से एक-दूसरे को जानते थे और भैया की शादी से ही हम एक-दूसरे को चाहने लग गए थे और उनकी शादी हमारे गाँव ही में हुई थी. दोस्तों मेरे भैया अपने काम की वजह से हमसे अलग होकर शहर में रहते है, दोस्तों एक दिन भैया के घर मैं रात में जागरण का प्रोग्राम था और उस दिन हम सब वहाँ पर गए थे. दोस्तों उस दिन संजना भी वहाँ पर आई हुई थी और वह चौकी के पास ही बैठी हुई थी. दोस्तों उस वक्त उसके बब्स कुछ ज़्यादा बड़े तो नहीं थे लेकिन कुछ तो था उसमें जो मुझको उसकी तरफ खीच रहा था. और फिर मैंने उसको कहा मेरे हाथ में भी पूजा का डोरा बाँध दो ना, और फिर मैंने उसके आगे अपना हाथ किया और फिर वह मेरे हाथ में डोरा बाँधने लगी. तभी मेरा हाथ उसकी छाती को छू गया और मेरे अन्दर एक बिजली सी दौड़ गई थी. दोस्तों उस वक्त तो मुझको चुदाई के बारे में कुछ मालूम ही नहीं था. दोस्तों मैं आप सभी को बता दूँ कि, हम दोनों का घर पास ही के गाँव में ही था और फिर दो दिन के बाद हम अपने-अपने घर पर आ गये थे. दोस्तों जब भी मेरा मन नहीं लगता था तो उसके घर पर चला जाता था और वह भी मुझको देखकर बहुत खुश होती थी और कभी-कभी तो हम रात को भी साथ में सो जाते थे और रात भर हम एक दूसरे के शरीर को चूमते चाटते थे और फिर करीब 2 साल के बाद वह एकदम मस्त लगने लग गई थी और मैं उसको चोदने की सोचने लग गया था।

दोस्तों वह अब मुझको खुद को छूने नहीं देती थी. मैं जब भी उसके घर जाता था तो उसके बड़े-बड़े बब्स को देखकर मैं एकदम पागल सा हो जाता था. दोस्तों उसके कमरे में एक खिड़की है जहाँ से बरामदे में सबकुछ साफ-साफ़ दिखाई देता है और मैं वहीं से उसको देखता था. दोस्तों एकबार मैं उसके घर पर गया और वहाँ पर मुझको पैशाब आया तो मैं पैशाब करने गया और फिर पैशाब करके हाथ धोने के लिये बाथरूम में गया तो वहाँ पर संजना की गीली ब्रा और पैन्टी पड़ी हुई थी तो फिर मैंने उसकी गीली पैन्टी को उठाकर उसको सूँघकर अपने लंड पर लगा दी और उसको उसकी चूत समझकर मैं अपने लंड को हिलाने लगा और फिर मैंने अपने लंड का सारा माल उसकी पैन्टी में ही निकाल दिया था और फिर मैं वहाँ से चुप-चाप चला आया था. और फिर कुछ दिन के बाद मैं दिल्ली में एक बड़ी कम्पनी में काम करने लग गया था और अब वह भी गाँव में रहकर ही अपनी कॉलेज की पढ़ाई कर रही थी. वह पढ़ने के लिये रोज ही शहर आती जाती थी. दोस्तों अब हमारी बातें फ़ोन पर ही होती थी और वह मुझसे धीरे-धीरे हर तरह की बातें करने लग गई थी. दोस्तों अब हम चुदाई की बातें भी करने लग गए थे. और फिर 6 महीनें के बाद जब मैं छुट्टियों में गाँव आया तो सीधे उससे मिलकर उसके साथ घूमने गया. उसके बाद दूसरे दिन मैं रात को 11 बजे सबके सोने के बाद उसको फोन करके बुलाकर उससे मिलने उसके घर के पास बनी गायों और भैंसों को बाँधने वाली जगह पर गया तो वह बाहर आई और फिर हम धीरे-धीरे से एक-दूसरे से बातें करते हुए एक-दूसरे से चिपक गए थे. दोस्तों उस समय उसके बब्स मेरी छाती से छू गए थे और उस समय मैं तो एकदम पागल सा हो गया था. और फिर मैं उसके होठों को चूमने लगा और साथ ही उसकी पीठ को और गांड को भी अपने हाथों से सहलाने लगा जिससे उसका पूरा बदन गरम हो गया था. और फिर मैं उसके एक बब्स को अपने मुहँ से उसके कपड़ों के ऊपर से ही चूसने लगा था. और फिर उसने मुझे कसकर पकड़ लिया और फिर वह भी मुझको चूमने लग गई थी. उसके बाद मैं अपने हाथों से धीरे-धीरे उसके दूसरे बब्स को दबाने लग गया था. और फिर मैंने उसके कुरते को ऊपर कर दिया था और फिर मैं अब उसके नंगे बब्स को चूसने लग गया था. और फिर अब मैं उसके दोनों बब्स को अपने दोनों हाथों से दबाने लग गया था. और फिर मैंने भी अपना लंड उसके हाथों में दे दिया था. और उसके बाद मैं उसे ज़मीन पर लेटाकर अपने लंड से उसके बब्स को चोदने लग गया था. और फिर कुछ देर के बाद मैंने उसे खड़ा किया और फिर उसकी सलवार के ऊपर से ही उसकी चूत को सहलाने लगा. और फिर मैंने उसकी सलवार के अन्दर अपना हाथ डाल दिया था और फिर मुझको किसी जन्नत का मज़ा आ रहा था और उसे भी मजा आ रहा था. और फिर मैंने अपनी एक ऊँगली को उसकी चूत के छेद में डाल दिया था जिससे उसे बहुत दर्द हो रहा था इसीलिए वो आहहह… इस्सस… कर रही थी. और फिर उसकी चूत के अन्दर मुझको कुछ गरम जैसा महसूस हुआ, जैसे कि, उसकी चूत के अन्दर आग सी लगी हो. और फिर मैंने उससे पूछा कि, तेरी चूत इतनी गरम क्यो है? तो वह मुझसे बोली कि, मुझको मालूम नहीं है।

और फिर मैंने उससे कहा कि, मैं तुमसे एक बात पूछूँ? बताओ तुमको यह सब कैसा लग रहा है? तो वह मुझसे बोली कि, तुम्हारी ऊँगली और अन्दर नहीं जा सकती है क्या? तो फिर मैं उसकी बात को सुनकर और भी जोश में आ गया और फिर मैं ज़ोर-ज़ोर से अपनी ऊँगली को उसकी चूत में अन्दर-बाहर करने लगा. और फिर मुझसे बिल्कुल भी रहा नहीं गया और मैंने उसकी सलवार को पूरा नीचे कर दिया और फिर उसको ज़मीन पर लेटा दिया था. दोस्तों उस समय मुझको बिल्कुल भी मालूम नहीं था कि, चुदाई कैसे करते है. और फिर मैंने उसकी पैन्टी को थोड़ा नीचे किया और फिर मैं उसके ऊपर लेटकर उसकी चूत में अपना लंड घुसाने लगा, लेकिन उसकी पैन्टी बीच में दीवार बन रही थी. मेरा लंड उसकी चूत से छुआ तो सही लेकिन धक्का मारने पर अन्दर नहीं गया. दोस्तों उसको इस बात का डर भी था कि, कोई घर से बाहर ना आ जाए, इसीलिए वह खड़ी हो गई थी. और फिर वह मुझसे बोली कि, रोहित अब मुझसे बिल्कुल भी रहा नहीं जा रहा है. और फिर मैं उसका हाथ पकड़कर अपने लंड के ऊपर नीचे करने लगा और वह शरमा रही थी. और फिर कुछ देर के बाद मैंने अपना सारा वीर्य उसके हाथ में ही छोड़ दिया था और फिर मैं एकदम शान्त हो गया था और फिर मैं वहाँ से आ गया था.

दोस्तों कुछ दिन के बाद मेरी बहन की परीक्षा थी तो मैंने अपनी बहन को संजना के कमरे में ही उसके साथ सुला दिया था. रात में मेरी बहन और संजना अलग-अलग पलंग पर सो गई थी और मैं नीचे बिछाकर सो गया था संजना मेरे पास वाले पलंग के ऊपर ही सोई हुई थी. और फिर मुझसे रहा नहीं गया और फिर मैं उसके पास जाकर उसके शरीर को छूने लगा. और फिर मैंने उसकी चूत के अन्दर अपनी ऊँगली डाल दी थी और फिर मैं अपनी ऊँगली को उसकी चूत में अन्दर-बाहर करने लग गया था. और फिर मैं पलंग पर चढ़कर अपना लंड उसकी चूत पर लगाकर उसे चोदने की कोशिश करने लगा। दोस्तों यह कहानी आप कामलीला डॉट कॉम पर पढ़ रहे है।

तो वह धीरे से मुझसे बोली कि, तुम्हारी बहन जाग जाएगी ना. तो फिर मैंने उसे तुरंत उसको पलंग से नीचे लेटा दिया और फिर मैंने उसकी सलवार और पैन्टी दोनों को पूरा नीचे कर दिया था. और फिर मैं उसके दोनों पैरों के बीच में आकर उसकी रस भरी चूत में अपना 6.5” का लंड घुसाने लगा, लेकिन मेरा लंड बार-बार फिसल रहा था. और फिर मैंने पहले अपनी ऊँगली घुसाकर देखी कि, उसकी चूत का छेद किस तरफ है और फिर इस बार मेरा लंड थोड़ा सा घुस गया था. और उससे वह भी थोड़ा चिल्लाने लग गई थी उसके बाद मैंने अपने हाथ से उसका मुहँ बन्द कर दिया था और अब मैंने उसकी चूत में एक ज़ोर से धक्का मारा तो वह दर्द से तड़पने लगी और मेरा पूरा लंड उसकी चूत में चला गया था. दोस्तों उसके बाद मैं थोड़ी देर तक रुका और मैं उसको चूमने लग गया था. और फिर उसे भी मजा आने लगा तो फिर मैंने नीचे से एक और जोरदार झटका लगाया. दोस्तों उसकी चूत इतनी टाईट थी और मुझको ऐसा भी लग रहा था कि जैसे मैं स्वर्ग में पहुँच गया हूँ और फिर मैंने उसके दर्द को थोड़ा कम करने के लिए उसको अपनी बाँहों में ले लिया और उसको चूमने और चाटने लगा तो थोड़ी ही देर के बाद उसका दर्द कुछ हद तक तो कम भी हो गया था और अब वह आहहह… आहहह… उफ्फ्फ… करके चिल्लाने लगी और फिर करीब 10-15 धक्कों के बाद वह भी अपनी गांड को उठा-उठाकर मुझसे चुदवाने लगी तो मैंने भी अपने धक्कों की रफ़्तार को थोड़ा और बढ़ा दिया था. दोस्तों मेरा लंड लेकर उसको भी बड़ा ही मज़ा आ रहा था और मुझे उसकी चूत में अपना लंड डालकर जन्नत का अहसास हो रहा था और फिर करीब 15-20 मिनट की चुदाई के बाद मैं झड़ने वाला था और मैं अब अपनी चरम सीमा पर पहुँच गया था और फिर मैंने अपना सारा वीर्य उसकी चूत में ही छोड़ दिया था. दोस्तों उस समय मुझे ऐसा लग रहा था कि जैसे मेरे अन्दर कोई ज्वालामुखी फट गया हो और मैं उसके ऊपर वैसे ही ढेर हो गया था अब हम दोनों पास–पास लेट गये थे और संजना मेरे लंड को अपनी चूत में लेकर बहुत खुश लग रही थी शायद वह बहुत दिनों के बाद इतनी संतुष्ट लग रही थी।

और फिर मैं उठकर बाथरूम में गया और पैशाब करके आकर फिर से सो गया. और फिर कुछ देर के बाद वह भी बाथरूम में गई. दोस्तों बाथरूम के दरवाजे के नीचे एक इंच की जगह थी तो मैं जाकर नीचे से बाथरूम में देखने लगा तो पहले उसने अपनी सलवार उतारी और फिर वह मेरी तरफ अपनी चूत करके बैठ गई थी. बाथरूम के अन्दर बल्ब जल रहा था इसीलिए उसकी चूत का नज़ारा मुझको साफ दिखाई दे रहा था, उसकी चूत में से घने बालों के अन्दर से पैशाब निकल रहा था।

तो दोस्तों यह थी मेरी पहली कामलीला और उस दिन से लेकर आज तक मैं उसकी चूत की चुदाई कर रहा हूँ और अब तो मेरी चुदाई से उसकी चूत फटकर भोसड़ा बन चुकी है और अब तो वह एक बार में ही 2-2 लंड ले सकती है।

धन्यवाद कामलीला के प्यारे पाठकों !!