देवर और ननद के साथ

चाची चली Antarvasna गयी. में अंदर आई तो देखा की माधवी गंगा से लिपटी हुई लेती थी. उस की एक जाँघ सीधी थी, दूसरी गंगा के पेट पर पड़ी थी. उस की गांड गंगा के लंड साथ सटी हुई थी. उन के मुँह फ्रेंच किस इन जुड़ गये थे. गंगा का हाथ माधवी की पीठ और नितंब शाला रहा था. कुर्सी में बैठा परेश देख रहा था और मूठ मर रहा था. अब निश्चित था की क्या होनेवाला था. मैंने इशारे से गंगा को आगे बढ़ने का संकेत दे दिया. में परेश के पास गयी. उस को उठा कर में कुर्सी में बैठ गयी और उस को गोद में ऐसे बिठाया की हम गंगा और माधवी को देख सके. परेश का लंड मैंने जंघों चौड़ी कर चुत में ले लिया.

उधर चित लेते हुए गंगा पर माधवी सवार हो गयी थी, जैसे घोड़े पर. गंगा का लंड सीधा पेट पर पड़ा था. चौड़ी की हुई जांघों के बीच माधवी की गांड लंड के साथ सात गयी थी. चुत में पैठे बिना लंड गांड की दरार में फिट बैठ गया था. अपने नितंब आगे पीछे कर के माधवी अपनी गांड लंड से घिस रही थी. माधवी के हर धक्के पर उस की कोलाइटिस लंड से रगड़ी जा रही थी और लंड की टोपी चढ़ उतार होती रहती थी. गांड और लंड कम रस से तार-भी-तार हो गये थे. वो गंगा के सीने पर बहन टीका कर आगे ज़ुकी हुई थी और आँखें बंद किए सिसकियां कर रही थी. गंगा उस के स्तन सहला रहे थे और कड़ी निपल्स को मसल रहे थे.

थोड़ी देर में वो तक गयी. गंगा के सीने पर ढाल पड़ी. अपनी बाहों में उसे जकड़ कर गंगा पलते और ऊपर आ गये. माधवी ने जांघें चौड़ी कर अपने पाँव गंगा की कमर से लिपटाए, बहन गले से लिपताई. गांड की दरार में सीधा लंड रख कर गंगा धक्के देने लगे, चुत में लंड डाले बिना. माधवी की कोलाइटिस अच्छी तरह रगड़ी गयी तब वो छटपटाने लगी. गंगा बोले : माधवी बिटिया, ये आखिरी घड़ी है. अभी भी समय है. ना कहे तो उतार जाऊं.

माधवी बोली नहीं. गंगा को जोरों से जकड़ लिया. वो समाज गये. गंगा अब बैठ गये. टोपी उतार कर लंड का मट्ठा ढक दिया. एक हाथ से गांड के होंठ चौड़े किए और दूसरे हाथ से लंड पकड़ कर चुत के मुँह पर रख दिया. एक हलका दबाव दिया तो मट्ठा सरकता हुआ चुत में घुसा और योनि पटल तक जा कर रुक गया. गन्ंगा रुके. लंड पकड़ कर गोल गोल घुमाया, हो सके इतना अंदर बाहर किया. चुत का मुँह ज़रा खुला और लंड का मट्ठा आसानी से अंदर आने जाने लगा. अब लंड को चुत के मुँह में फँसा कर गंगा ने लंड छोड दिया और वो माधवी ऊपर लेट गये. उस ने महावी का मुँह फ्रेंच किस से सील कर दिया, दोनों हाथ से नितंब पकड़े और कमर का एक झटका ऐसा मारा की झिल्ली तोड़ आधा लंड चुत में घुस गया. दर्द से माधवी च्चटपताई और उस के मुँह से चीख निकल पड़ी जो गंगा ने अपने मुँह में ज़ेल ली. गंगा रुक गये.

गंगा को देख परेश भी धक्का लगा ने लगा. हम कुर्सी में थे इसी लिए आधा लंड ही चुत में जा सकता था. परेश को हटा कर में फर्श पर आ गयी और जांघें फैला कर उसे फिर मेरे ऊपर ले लिया. तेज रफ्तार से परेश मुझे चोदने लगा.

उधर माधवी शांत हुई तब गंगा ने पूछा : कैसा है अब दर्द? माधवी ने गंगा के कोन में कुच्छ कहा जो में सुन नहीं पाई. गंगा ने लेकिन अपनी कमर से उस के पाँव च्छुड़ाए और इतने ऊपर उठा लिए की घुटनें कोन तक जा पहुँची. माधवी के नितंब अद्धार हुए. गंगा की चौड़ी जांघें बीच से माधवी की गांड और उस में फँसा हुआ गंगा का लंड साफ दिखाने लगे. आधा लंड अब तक बाहर था जो गंगा धीरे धीरे चुत में पेल ने लगे. थोड़ा अंदर तोड़दा बाहर ऐसे करते करते दो चार इंच ज्यादा अंदर घुस पाया लेकिन पूरा नहीं. अब गंगा ने वो तकनीक आज़माई जो मेरे साथ सुहाग रात को आज़माई थी.

उस ने होल से लंड बाहर खींचा से..आर..आर..आर..आर कर के. अकेला मट्ठा जब अंदर रही गया तब वो रुके. लंड ने ठुमका लगाया तो मत्थे ने ओर मोटा हो कर चुत का मुँह ज्यादा चौड़ा कर रक्खा. माधवी को ज़रा दर्द हुआ और उस के मुँह से सिसकारी निकल पड़ी. इस बार गंगा रुके नहीं. से..आर.आर..आर..आर..आर.आर कर के उस ने लंड फिर से चुत में डाला. आखिरी दो इंच सारूखा तो बाकी ही रही गया, जा ना सका. बाद में गंगा ने बताया की माधवी की चुत पूरा लंड ले सके इतनी गहरी नहीं थी. उस को इजा ना लग जाय ऐसे सावधानी से चोदना जरूरी था. ये तो अच्छा हुआ की माधवी की पहली चुदाई गंगा ने की, वरना चाची की दहशत हकीकत में बदल जाती.

यहाँ परेश और में झड़ चुके थे, परेश का लंड नर्म होता चला था. गंगा हलके, धीरे और गहरे धक्के से माधवी को चोदने लगे. माधवी के नितंब डोल ने लगे थे. लंड चुत की पुच्छ पुच्छ आवाज़ के साथ माधवी की सिसकियां और गंगा की आहें गूँज रही थी. परेश : भाभी, देख, गांड के होंठ कैसे लंड से चिपक गये हे ? बारे भैया का लंड मोटा है ना ? में : देवर जी, तुम्हारा भी कुच्छ कम नहीं है.

गंगा के धक्के अब अनियमित होते चले थे. से..आर..आर..आर.आर के बजे कभी कभी घच्छ से लंड घुसेड़ देते थे. लगता था की गंगा झड़ ने से नज़दीक आ गये थे. माधवी लेकिन इतनी तैयार नहीं थी. उस ने खुद रास्ता निकल लिया. अपने ही हाथ से कोलाइटिस रगड़ डाली और च्चटपटती हुई ज़दी. गंगा स्थिर थे लेकिन माधवी के चूतड़ ऐसे हिलाते थे की लंड चुत में आया जा करता था. माधवी का ऑर्गॅज़म शांत हुआ इस के बाद तेज रफ्तार से धक्के मर कर गंगा ज़दे और उतरे. करवट बदल कर माधवी सो गई. सफाई के बाद हम सब सो गये.

दूसरे दिन जागे तब परेश ने एक ओर चुदाई मागी मुझसे. गंगा ने भी अनुरोध किया. में क्या करती ? दस मिनट की मस्त चुदाई हो गई. परेश की खुशी समाती ना हटी. शर्म की मारी माधवी किसी से नज़र मिला नहीं पति थी. फिर भी गाणग ने उसे बुलाया तो उस के पास चली गयी. गले में बहन डाल गोद में बैठ गयी. गंगा ने चूम कर पूछा : कैसा है दर्द ? नींद आई बराबर ? शर्मा कर उस ने अपना मुँह छुपा दिया गंगा के सीने में. कोन में कुच्छ बोली. गंगा : ना, अभी नहीं. दो दिन तक कुच्छ नहीं. चुत का घाव रोज़ जाय इस के बाद. लेकिन माधवी जैसी हठीली लड़की कहाँ किसी का सुनती है ? वो गंगा का मुँह चूमती रही और लंड टटोलती रही. गंगा भी रहे जवान आदमी, क्या करे बेचारा ? उठा कर वो माधवी को अंदर ले गये और आधे घंटे तक चोदा.

उस रात के बाद वो भाई बहन अक्सर हमारे घर आते रहे और चुदाई का मजा लेते रहे. जब कॉलेज खुली तब उन्हें शहर में जाना पड़ा. में और गंगाधर इंतजार कर रहे हे की कब वाकेशन पड़े और वो दोनों घर आए. आख़िर नये नये लंड से चुदवाने में और नयी नयी चुत को चोदने में कोई अनोखा आनंद आता है. है ना ?

देवर और ननद के साथ – 4 – Indian Sex Story

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