विधवा आंटी की चूत को ठंडा किया

हैल्लो दोस्तों, Antarvasna मेरा नाम ऋषि है। मेरी उम्र 35 साल की है और मैं गुजरात का रहने वाला हूँ। मेरी लम्बाई 5.9 इंच मेरा बदन गोरा, गठीला मैं दिखने में भी ठीक ठाक लगता हूँ और मेरे लंड का आकार 6 इंच लंबा और तीन इंच मोटा है, मेरे इस बदन को देखकर हर लड़की मेरी तरफ बहुत आकर्षित हो जाती है। दोस्तों आज मैं आप सभी को जो कहानी सुनाने जा रहा हूँ। यह कुछ साल पहले की एक सच्ची घटना है, और आज अपनी जीवन की एक सच्ची घटना आप लोगों को बताने के लिए आया हूँ जिसमें मैंने एक आंटी के साथ जमकर सेक्स किया था।

दोस्तों यह कहानी करीब 6 साल पहले की है एक दिन मैं शाम को अपनी फैक्ट्री से वापस आ रहा था अपने घर से कुछ देरी पर जहाँ पर बस स्टैंड था, वहां पर एक करीब 38 साल की आंटी बस का इंतजार करती हुई खड़ी थी। मैं वहां से निकला तो उन्होंने मेरी तरफ एक हसरत भरी निगाहो से देख लिया मैं भी कुछ आगे जाकर रुक गया, आंटी चलकर मेरे पास आई और उसने पूछा की तुम किस तरफ जा रहे हो? मैं भी उसी तरफ जा रहा था जिधर आंटी को जाना था। तो उन्हें मैंने अपनी बाइक पर बिठा लिया, वो मुझसे कुछ ज़्यादा ही चिपककर बैठ गई थी कुछ देर आगे जाते ही हमने बातें करना शुरु कर दिया, मैंने उन्हें अपने बारे में बताया और उनके बारे में पूछने लगा. वो चिपककर बैठी थी तो उनके बड़े बड़े बब्स मेरे पीठ के ऊपर से रगड़ रहे थे। मुझे तो बब्स के स्पर्श से कुछ कुछ होने लगा था, ना चाहते हुए भी मेरे मुहँ से निकल गया की आप मेरे से ऐसे चिपक के बैठे हो तो मुझे कुछ कुछ हो रहा है, तो आंटी ने मुझसे पूछा किधर और क्या हो रहा है? मैंने कहा नीचे कुछ हो रहा है, ये सुनकर के वो खिलखिला के हंस पड़ी। बस इतनी सी बात हुई थी की उनका उतरने का स्टॉप भी आ गया था। मैंने उन्हें अपना मोबाइल नंबर दे दिया वो स्माइल के साथ हंसते हुए वहां से चली गई और जाते जाते उन्होंने मुझे फोन करने को भी बोला था। बस मुझे उनके फोन का ही इंतजार था, रात को मैं खाने के बाद अपने घर की छत पर टहल रहा था की एक नये नंबर से मेरे फ़ोन में मिस कॉल आई मैंने उस नंबर पर कॉल किया वो नंबर आंटी का ही था।

हम दोनों ने कुछ देर बातें की और अगले दिन मिलने का प्रोग्राम बनाया, दूसरे दिन शाम को उनकी कॉल आई तो मैंने कहा की रात को दस बजे उसी जगह मिलेंगे जहाँ मैंने कल आपको छोड़ा था, और रात को बताए हुए समय पर मैं उनसे मिलने निकल पड़ा। और वो वही पर खड़ी मिली मैं उन्हें अपनी बाइक पर बिठाकर चल पड़ा, कहा जाना था वो कुछ तय नहीं था। बस हम दोनों यू ही चलते जा रहे थे. चलते चलते हम दोनों मैन हाइवे रोड पर आ गये, वहां पर सिर्फ अंधेरा था और सड़क भी सुनसान थी, फिर मैंने बाइक साइड पर खड़ी कर दी और हम दोनों वही पर बैठ गये और कुछ देर बातें की, और मैंने उनके हाथ को अपने हाथ में ले लिया और सहलाने लगा। उस समय रोड पर कोई दिखाई नहीं दे रहा था। उन्होंने मेरी तरफ बड़े ही प्यार से देखा तो मैंने धीरे धीरे से आगे बढ़कर उनके तपते हुए होंठो के ऊपर अपने होंठो को रख दिया। उन्होंने कोई ऐतराज़ नहीं किया करीब 10 मिनट तक हम दोनों एक दुसरे में खोए रहे। आहह क्या हसीन अहसास था, मैंने धीरे धीरे से आंटी के मस्त मोटे बब्स दबाने चालू किए, वो भी धीरे धीरे गरम होती जा रही थी फिर मैंने उनके ब्लाउस के बटन को खोलना शुरु किया मगर उन्होंने ऐसा करने से मना कर दिया। क्यूंकि हम दोनों सड़क पर थे इसलिए उन्हें किसी के आ जाने का डर था। अब मैं वैसे ही उनके बब्स को दबाने लगा वो अपने आपे से बाहर होती जा रही थी, उन्होंने मेरे लंड को पेंट के ऊपर से ही सहलाना शरु किया। मैं उनके मोटे मोटे बब्स को दबा रहा था और वो मेरा लंड सहला रही थी. मुझे लगा मेरा लंड यू ही झड़ जाएगा तो मैंने अपनी पेंट की ज़िप को खोलकर लंड को बाहर निकाल दिया। अब ये सेक्सी आंटी बड़े ही प्यार से मेरे लंड को सहला रही थी अपने हाथों से। मैंने उन्हें लंड चूसने को बोला तो वो निचे झुककर मेरे लंड के टोपे को लोलीपॉप समझकर के उसे चूसने लगी, कुछ ही पलों की चुदाई से मेरे लंड से माल निकलने वाला था तो मैंने उनसे पूछा लिया की क्या वो मेरा माल मुहँ में लेंगी? तो उन्होंने इशारा करके कहा की आने दो! इतने में ही मैं झड़ गया। उन्होंने बड़े ही चाव से मेरा माल पी लिया और मेरे पूरा लंड को ऊपर से नीचे तक चाट चाटकर साफ भी कर दिया।

इसके बाद उन्होंने कहा की तुम्हारा तो हो गया लेकिन मेरा क्या? मुझे उनकी बात सुनकर अच्छा नहीं लगा. मैंने अपनी तसल्ली तो कर ली अब वो जगह सही नहीं थी की मैं उन्हें वहां पर चोद सकू तो मैंने उनकी साड़ी और पेटीकोट को ऊपर करके अपने हाथ को डालकर आंटी की चूत को सहलाने लगा। उनका चूत के मोटे दाने अंगूर के दाने जितना बड़ा था, कुछ देर सहलाने के बाद मैंने उनका भी पानी निकाल दिया और थोड़ी देर बाद हम लोग वहाँ से निकल पड़े। उस दिन के बाद हम रोज़ ही फोन पर बातें करने लगे और अगली बार कहा मिला जाए उसका प्लान बनाने लगे, चार दिन बाद हमने फिर से मिलकर सेक्स करने का प्लान बनाया, इस बार मैं उन्हें ऐसे सुनसान रास्ते पर ले गया जहाँ कोई भी आता जाता नहीं था। वो एक विधवा औरत थी और उन्हें घर पर कोई पूछने वाला भी नहीं था, और अक्सर वो घर से रात भर बाहर ही रहती थी, फिर हम लोग उस सुनसान जगह पर गये तो हम लोग पास ही बाइक रोककर बैठ गये। चाँदनी रात में पानी के किनारे ठंडी ठंडी हवा चल रही थी रात के करीब 10 बजे के आस पास वहां एकदम सन्नाटा था हम लोग एक दूसरे को किस करने में लगे हुए थे। वो धीरे धीरे से मेरे लंड को सहलाने लगी और मैं उसके बब्स को टटोलने लग गया था। काफ़ी देर बाद वो बोली अब बर्दाश्त नहीं हो रहा है मेरे से, अब अपना डाल भी दे मेरे अंदर। फिर मैंने उन्हें वही पर बाइक पर हाथों के सहारे घोड़ी बनाया और उनकी पेंटी को आधा उतार दिया। पीछे से मैंने अपने लंड को आंटी की चूत की गहराई में डाल दिया, वो थोड़ी सी कसमसाई क्यूंकी बहुत दीनों के बाद आज किसी ने उसकी चूत में लंड जो दिया था। उसकी चूत एकदम पानी पानी थी और मज़ा आ रहा था अंदर लंड डालकर, धीरे धीरे से मैं अपने लंड को उनकी चूत के अंदर बाहर कर रहा था और वो भी अपना पिछवाडा हिला हिलाकर मेरा पूरा साथ दे रही थी। कुछ देर यू ही चोदते हुए उन्होंने कहा अब मैं तुम्हारे ऊपर सवारी करना चाहती हूँ, मैंने कहा ठीक है और मैंने अपने लंड को उनकी चूत से निकाल दिया। फिर उन्होंने वही ज़मीन पर अपना दुपट्टा डाल दिया और मुझे लेटने के लिए बोला मैं दुपट्टे के ऊपर लेट गया और वो अपनी पेंटी को उतारकर मेरे ऊपर आ गई। उन्होंने मेरे लंड को अपने हाथों से पकड़कर के अपनी चूत पर सेट कर दिया और उसके ऊपर बैठ गई। दोस्तों यह कहानी आप कामलीला डॉट कॉम पर पढ़ रहे है।

उनकी चूत पहले से ही पानी पानी हुई थी तो मेरा लंड बिना किसी परेशानी के आंटी की चूत में चला गया अब तो वो ऊपर से जोर जोर से धक्के लगाते हुए जंप कर रही थी और मैं नीचे से उच्छल उच्छलकर उनकी ताल से ताल मिला रहा था करीब 10 मिनट तक चुदाई के बाद वो एक बार फिर से मेरे लंड पर ही झड़ गई। अब वो थक चुकी थी उनकी चूत से उनका पानी बहता हुआ मेरी जाँघो पर आ गया, उन्होंने मुझे अब ऊपर आने को कहा और वो अपने बिछाए हुए दुपट्टे पर अपनी दोनों टांगे फैलाकर लेट गई। मैं उनकी टाँगो के बीच में आकर अपना लंड उनकी चूत में रगड़ने लगा, फिर धीरे से लंड को उनकी चूत की जड़ में डाल दिया। मैं पहले धीरे धीरे और फिर जोरो से धक्के लगाने लगा कुछ ही मिनट की चुदाई के बाद वो फिर से झड़ गई। अब मैं खुद भी चुदाई के अंतिम पलों में था, और एक बड़े से झटके के साथ मेरा भी वीर्य आंटी की चूत में ही छुट गया. मेरे वीर्य से उसकी सेक्सी चूत एकदम लबालब भर गई थी। फिर हम लोग कुछ देर यू ही एक दूसरे से चिपककर लेट गये। फिर उठकर हम दोनों ने अपने कपड़े ठीक किए और अपने घर की और निकल गये। उसके बाद आंटी को मैंने और भी कई बार चोदा था और अलग अलग जगह पर ले जाकर चोदा था।

धन्यवाद कामलीला के प्यारे पाठकों !!