स्टूडेंट की खाला की चूत में लंड

हाय फ्रेंड्स, Antarvasna मेरा नाम शाहिद है, मेरी उम्र 30 साल की है और मैं एक स्कूल मैं प्रिन्सिपल हूँ। दोस्तों आज पहलीबार मैं आपकी खिदमत मैं हाज़िर हो रहा हूँ अपनी एक कहानी को लेकर और मैं उम्मीद करता हूँ कि, आपको यह जरूर पसन्द आएगी।

दोस्तों यह बात आज से कोई 3 साल पहले की बात है तब मैं अपने ऑफिस मैं था और उस समय एक 35-36 साल की एक औरत मेरे ऑफिस में दाखिल हुईं और फिर अपना परिचय करवाया कि, मेरा नाम नाज़िमा है और मैं सोहैल की खाला हूँ जो कि, आपके स्कूल में पढ़ता है और फिर मैंने उनको पूछा कि, आखिर मसला क्या है? तो फिर वह मुझसे कहने लगी कि, टीचर सोहैल को 11 वीं क्लास मैं साइन्स की क्लास मैं नहीं बैठा रही है और वह कहती है कि, इसके नम्बर कम है जिसकी वजह से सोहैल को साइन्स नहीं मिल सकती, लिहाज़ा मैंने उनसे गुजारिश भी करी कि, आप मेरी मदद करें, तो फिर उन्होंने मुझसे साफ साफ कह दिया कि, स्कूल के नियमों के मुताबिक़ सोहैल को साइन्स नहीं मिल सकती है। और फिर वह यह सुनकर रोने लगी और रोते हुए उन्होंने मुझसे कहा कि, मेरा घर बर्बाद हो जाएगा और फिर मैंने उनसे पूछा कैसे तो उन्होने मुझको बताया कि, सोहैल उनका भतीजा यानी उनके जेठ का बेटा है और उनके जेठ अपने काम के सिलसिले में कुवैत में रहते हैं और उनकी बीवी भी अब इस दुनिया में नहीं है और मेरे पति को भी उन्होने ही मोबाइल की दुकान खुलवाकर दी है। मेरे जेठ ने हमको बड़ी ही सख्ती से कहा था कि, सोहैल को हर सूरत में डॉक्टर बनाना है इसमें किसी किस्म की कोताही नहीं होनी चाहिए। वह हर महीना सोहैल की पढ़ाई के अलावा भी पैसे भेजते हैं, अब अगर सोहैल को साइन्स नहीं मिली तो वह ना सिर्फ़ नाराज़ होंगे बल्कि पैसे भेजना भी बन्द कर देंगे, जिससे मेरे घर मैं तंगी हो जाएगी क्योंकि मेरे पति अक्सर दुकान खोलते ही नहीं है तो आमदनी भी कोई ख़ास नहीं होती है। और फिर कुछ देर की खामोश के बाद वह मुझसे फिर से बोली कि, सर अब आप ही कुछ कीजिए प्लीज़ आप को जितना पैसा चाहिए मैं दे दूँगी। जब वह मुझसे यह बातें कर रही थी तब मेरी नज़र उनके आधे नज़र आने वाले बब्स पर थी क्योंकि उनके रोने के कारण उनका दुपट्टा उनके गले से हट गया था, और उनका सीना मुझको साफ नज़र आ रहा था दोस्तों वह बहुत ही खूबसूरत नज़ारा था. और फिर उनको भी इसका एहसास हो गया था और फिर उन्होंने जल्दी से अपना दुपट्टा अपने सीने पर डाल लिया था. और फिर वह मुझसे बोली कि, सर आपने जवाब नहीं दिया? तो फिर मैंने उनको कहा कि, मुझे सोचने दो और फिर मैंने उनको अपना नम्बर देते हुए उस रात को फोन करने को कहा और फिर वह जाने लगी तो मैंने उनको सिर्फ़ इतना ही कहा कि, आप बहुत हसीन हो, जिसपर उन्होने मुस्कुराकर थैंक्यू कहा और फिर वह चली गई थी।

और फिर उनके जाने के बाद मैं अपने दूसरे काम में लग गया था लेकिन मेरे दिमाग में तो उनके वह आधे बब्स का मंज़र ही घूम रहा था और फिर दोपहर में 3 बजे मैं घर पहुँचा और फिर खाना खाने के बाद कुछ देर आराम करने के लिए लेटा तो फिर वही मंज़र मेरी आँखों के सामने था। अब शैतान ने मेरे दिमाग में उसे हासिल करने का प्रोग्राम बना लिया था और फिर लगभग 5 बजे मैं उठकर चाय पीकर बाहर अपने दोस्तों के पास चला गया था और फिर वहाँ से 9 बजे रात को वापस अपने घर आया ही था कि, मेरे फोन की घंटी बजी, वह एक अनजान नम्बर था और फिर मैंने उसको उठाया तो वह सोहैल की आंटी थी। मेरे हैल्लो कहते ही दूसरी तरफ से आवाज़ आई कि, सर आपने क्या फ़ैसला किया? मैंने उससे अपनी जान छुड़ाने के लिए सीधा उससे कह दिया कि, मुझे पैसे नहीं चाहिए, तो फिर उन्होने मुझसे पूछा कि, तो फिर? तो मैंने उनसे कहा कि, आप चाहती हैं कि, सोहैल को साइन्स मिल जाए और अगर उसको मैं परीक्षा में पास होने की ज़मानत भी दे दूँ तो आप मेरी, यह कहकर मैंने जानबूझकर बात आधी रखी, तो फिर वह झट से मुझसे बोली कि, आपकी क्या? तो मैंने उनको कहा कि, मेरी ख्वाइश… तो उन्होने मुझसे पूछा कि, क्या है आपकी ख्वाइश? तो फिर मैंने झट से उनको कहा कि, अगर आप बुरा ना मानो तो कहूँ? इस पर उन्होने मुझको कहा कि, आप कहो मैं बुरा नहीं मानूँगी। और फिर मैंने उनको कहा कि, मेरी ख्वाइश तो आप है. और फिर फ़ोन पर दूसरी तरफ से एक लम्हे की खामोशी के बाद आवाज़ आई कि, यह आप क्या कह रहे है? तो मैंने उनको कहा कि, सोच लो मैं आपके साथ एक सौदा कर रहा हूँ, मेरी बात मानने की सूरत में सोहैल की स्कूल फीस भी मैं ही भर दूँगा और इसके अलावा उसको परीक्षा में भी पास करवा दूँगा, इसके लिए आपको एक महीनें में सिर्फ़ 2 बार अपने आपको मेरे हवाले करना होगा मेरी तरफ से पूरी राज़दारी रहेगी, अगर आपको मंज़ूर हो तो कल स्कूल आकर बात कर लेना। और फिर यह कहकर मैंने फोन बन्द कर दिया और फिर अगले दिन सुबह मैं अपने वक़्त पर स्कूल पहुँच गया और फिर स्कूल का तक़रीबन पूरा वक़्त गुज़र गया लेकिन सोहैल की खाला नहीं आई, तो मैं समझा कि, शायद वह राज़ी नहीं है और फिर स्कूल की छुट्टी हो गई और सभी बच्चे और स्कूल का स्टाफ अपने अपने घर जाने लगे और मैं भी अपने घर जाने की तैयारी कर रहा था कि, सोहैल की खाला मेरे ऑफिस के कमरे में दाखिल हुई और फिर मैंने उनको देखकर झट से उनसे पूछा कि, क्या फ़ैसला किया फिर? तो फिर वह मुझसे बोली कि, आपने जो बातें कही उनकी ज़मानत क्या है? तो फिर मैंने उनको कहा कि, देखिए मैं सोहैल को साइन्स की क्लास में बैठने की अनुमति भी दे दूँगा और उसकी स्कूल की फीस भी पूरे साल की माफ़ कर दूँगा, अगर आप राज़ी हुई तो।

तो फिर उन्होने मुझसे कहा कि, यह बात अगर किसी को पता चल गई तो? तो मैंने उसको कहा कि, यह बात हम दोनों के बीच ही राज़ रहेगी और किसी को भी इस बात का पता भी नहीं चलेगा और फिर कुछ देर के बाद कुछ सोचकर वह मुझसे बोली कि, मुझे कहाँ पर आना होगा? तो मैंने उसको कहा कि, कल सुबह 9.00 बजे स्कूल में ही आ जाना। तो फिर वह मुझसे बोली कि, कल तो दूसरा शनिवार है तो कल तो स्कूल बन्द रहेगा ना और अगर मैं स्कूल में आऊँगी तो किसी को मुझपर शक हुआ तो? तो फिर मैंने उसको कहा कि, दूसरे शनिवार को स्कूल स्टूडेंट और टीचर्स के लिए बन्द होता है उस दिन बच्चों के माता पिता तो आ सकते है और उस दिन खाली मैं ही आता हूँ और मेरे अलावा सिर्फ़ चौकीदार ही होता है और फिर उन्होने मुझसे पूछा कि, क्या चौकीदार को कुछ पता नहीं चलेगा? तो मैंने उसको कहा कि, नहीं आपके आते ही मैं उसको किसी काम से भेज दूँगा। और फिर वह मुझसे बोली कि, अच्छा तो फिर मैं कल आ जाऊँगी और फिर वह वहाँ से चली गई थी और फिर उसके जाते ही मैंने भी ऑफिस को बन्द किया और चौकीदार को भी मैंने गेट बन्द करने का कहा और फिर उससे यह भी कहा कि, कल तुमको बाज़ार जाकर कुछ सामन लाना है। तो फिर उसने बोला कि, ठीक है साब. और फिर अगले दिन सुबह पूरी तैयारी के साथ सुबह 9 बजे मैं स्कूल पहुँच गया और फिर ठीक 9.30 बजे सोहैल की खाला भी आ गई थी उनके हाथ में फीस माफी की अर्जी थी जो कि, मैंने ही उनको कल दी थी और उनसे कहा था कि, आप कल सुबह जब आए तो यह चौकीदार को दिखा देना और उसको बोल देना कि, यह प्रिन्सिपल को देनी है और फिर उन्होने ऐसा ही किया, तो चौकीदार भी उनके साथ मेरे ऑफिस में आया और फिर मैंने उसको 2000 और एक लिस्ट थमा दी और कहा कि, बाजार जाकर यह चीज़ें ले आओ और फिर उससे यह भी कहा कि, मैं अभी 1 घंटे के बाद किसी काम से बाहर जाऊँगा तो तुम वापस 3-4 बजे तक आना। और फिर उसके सामने मैंने सोहैल की खाला से आँख मारकर यह कहा कि, मैं अभी तो किसी काम से जा रहा हूँ इसलिए आप कल आईएगा। तो उन्होंने मुझसे कहा कि, सर प्लीज़ बस 2 मिनट की ही बात है आप मेरा यह काम कर दो और फिर वह मुझसे बहुत ज्यादा गुजारिश करने लगी जिसपर मैंने उनसे कहा कि, अच्छा ठीक है दिखाइए क्या काम है, और उसी समय चौकीदार भी बोला कि, मैं जाऊँ साब? तो मैंने उसको कहा कि, हाँ अब तुम जाओ. और फिर वह वहाँ से चला गया था और फिर मैं उठकर गेट तक आया और फिर जब वह वहाँ से चला गया था तो मैंने मेन गेट बन्द कर दिया था और फिर मैं अपने ऑफिस में आ गया था।

उस समय नाज़िमा कुछ डर रही थी तो मैंने उनको पकड़कर खड़ा किया और फिर उनके होंठों पर अपने होंठ रख दिए थे और फिर वह डरकर कुछ पीछे को हुई तो मैंने उनको उनकी कमर से पकड़कर अपनी तरफ खींचा जिससे उनके बब्स बिल्कुल मेरे सीने से चिपक गये थे। और फिर मैंने ज़ोरदार तरीके से उनको किस करना शुरू कर दिया था. कभी उनके होंठो पर तो कभी उनकी गर्दन पर और कभी उनकी कान की लौ पर जिससे वह गरम होने लग गई थी और फिर मैं उनको अपने आराम करने वाले कमरे में ले गया जो कि, मेरे ऑफिस से ही लगा हुआ था और फिर वहाँ पर उनको बेड पर लेटाकर उनको किस करना शुरू कर दिया था और साथ अपने एक हाथ से उनके बब्स को भी दबाने लग गया था और फिर मैंने उनका कुर्ता उतारा तो उनके जिस्म के गोरेपन को देखकर मैं तो हैरान रह गया था, अंदर से नाज़िमा का जिस्म बहुत गोरा था और फिर मैंने उनके बब्स को अपने हाथों से मसलना शुरू कर दिया था जिससे उनके मुँह से आहहह… इस्सस की आवाज़ें निकलने लग गई थी। और फिर मैं उनके बब्स की निप्पल को चूसने लग गया था और फिर मैं अपने एक हाथ से उनकी चूत को भी सहलाने लग गया था जो कि, बड़ी ही नरम और मुलायम थी। और फिर मैंने एक एक करके उसके और अपने सभी कपड़े उतार दिए थे और फिर हम दोनों बेड पर इस तरह लेट गये थे कि, मैं उनकी चूत को चाटने लगा और वह मेरे लंड को चूसने लगी दोस्तों उस समय हम दोनों को ही बहुत मज़ा आ रहा था। और फिर जब वह पूरी तरह से गरम हो गईं तो मैं उठकर बैठा और फिर मैंने उनकी दोनों टाँगों को ऊपर उठाया और फिर उनकी चूत में अपना लंड डालकर मैंने एक ज़ोरदार धक्का दिया जिससे उनके मुँह से एक जोर की चीख निकल गई थी और मेरा लंड पूरा उनकी चूत के अन्दर चला गया था और फिर नाज़िमा की दोनों टाँगों को अपने कन्धे पर रखकर अपने लंड को मैं उनकी चूत में अन्दर बाहर करता रहा और मेरे इस तरह से करने से नाज़िमा को भी बहुत मज़ा आ रहा था और वह भी ज़ोर लगा रही थी। और फिर कुछ देर तक इस तरह से करने के बाद मैंने उनको घोड़ी बनाया और फिर उनको पीछे से चोदना शुरू किया जब मैं उनको ज़ोर जोर से चोद रहा था तो वह भी आह्ह्ह… ऊह्ह्ह… की आवाज़ें निकाल रही थी। और फिर कोई 10-15 मिनट तक उसको घोड़ी बनाकर चोदने के बाद मैंने फिर से उसको सीधा लेटाया और फिर मैं उसके बब्स और निप्पल को चूसने लगा और वह भी मेरे लंड को सहला रही थी. और फिर वह खुद ही फिर से मेरे लंड को अपनी चूत में डालने लगी तो मैंने भी एक ज़ोर से धक्का लगाया जिससे मेरा लंड उनकी चूत में पूरा घुस गया था और वह चीखने लगी तो मैं पहले आहिस्ता आहिस्ता और फिर बाद में ज़ोर ज़ोर से धक्के लगाने लगा और वह तकलीफ़ की वजह से अपने दोनों हाथों से मुझको खुद के ऊपर से हटाने की कोशिश करती रही और मैं उसी समय उसकी चूत में ही झड़ गया था। उसके बाद हमने कुछ देर आराम किया और फिर हमने एकबार और चुदाई करी थी। और फिर हमने एक दूसरे को साफ़ किया उसके बाद वह अपने घर जाने लगी तो मैंने उसको एक लम्बा किस किस किया और उससे यह भी पूछा कि, तुम मेरी इस चुदाई से खुश तो हुई ना? तो उन्होने सिर्फ़ शरमाकर इतना ही कहा कि, शादी के बाद आज मैं पहलीबार ठीक तरह से चुदी हूँ। और फिर यह कहकर वह चली गई थी. हाँ तो दोस्तों यह थी मेरी बीवी से हटकर मेरी पहली चुदाई की कहानी।

धन्यवाद कामलीला के प्यारे पाठकों !!