शादीशुदा बहिन की चूत में लंड रस निचोड़ा

हैल्लो दोस्तों, Antarvasna मेरा नाम राहुल है और मैं जयपुर में रहता हूँ। मैं एक जवान, सुंदर लड़का हूँ और मेरी उम्र 27 साल है। मैं पढ़ाई कर रहा हूँ, मेरे लंड का आकार सात इंच लंबा तीन इंच मोटा है। दोस्तों आप लोगों की तरह मैं भी कामलीला डॉट कॉम की सच्ची सेक्सी कहानियों को पढ़कर बड़े मस्त मज़े लेता हूँ। और इन कहानियों को पढ़कर मेरा मन बड़ा खुश हो जाता है, लेकिन आज मैं अपनी एक घटना को सभी पढ़ने वाले के लिए तैयार करके लाया हूँ जिसमें मैंने अपनी ही बहिन को चोदकर उसकी चुदाई के मज़े लिए और उसे माँ भी बनाया। अब आप सभी को ज़्यादा बोर ना करते हुए मैं अपनी आज की सच्ची कहानी पर आता हूँ, इस कहानी को मैंने बड़ी मेहनत से आपके लिए तैयार किया और यह कहानी करीब 8 महीने पहले की है।

मैं एक बहुत ही साधारण सी फेमिली से हूँ मेरे घर में मेरे मम्मी पापा और एक छोटी बहन है जिसका नाम संध्या है और उसका फिगर बड़ा ही कमाल का है। मेरी बहन की शादी को दो साल हो गये है और मैंने मेरी बहन को उसकी शादी के पहले बहुत बार चोदा था। अपनी बहन के बदन के एक एक हिस्से को मैंने तबीयत से रगड़ा था। और मेरी बहन भी मेरे लंड की बड़ी दीवानी थी, उसकी शादी के 2 साल पहले तक मैंने उसके साथ घर के हर कौने में हर तरह की चुदाई की थी। संध्या भी मेरे साथ सेक्स में मेरा पूरा पूरा साथ देती थी हम दोनों साथ में नहाते थे, जब भी अकेले होते थे तो बिना कपड़ो के ही घूमते थे। पर जबसे उसकी शादी हुई तो मैं संध्या के बिना एकदम अकेला पड़ गया। फिर मेरी किस्मत ने मेरा साथ दे दिया। संध्या ससुराल से पूरे 10 दीनों के लिए रहने के लिए हमारे घर पर आई। हमने वैसे फोन के ऊपर ही सब प्लानिंग कर ली थी। मम्मी पापा एक शादी की वजह से शहर से दूर गये हुए थे, वो जिस दिन निकले उसी दिन संध्या आ गई। अब हमारे पास पूरे 10 दिन थे एक दूसरे के साथ मस्ती करने के लिए, और पूरा घर हमारे लिए खाली ही था। मैं संध्या को स्टेशन पर लेने के लिए गया, वहां पर हम दोनों बिल्कुल अनजान तरीके से मिले। मैंने सामान उठाया और हम कार में घर आ गये, संध्या ने कार में बैठते ही मुझे अपने गले से लगा लिया अगले 5 मिनट तक हम ऐसे ही एक दुसरे से चिपके रहे। फिर हमने एक किस की और वहां से घर की और निकल पड़े।

घर आकर संध्या ने अपने आने की वजह बताई की उसके ससुराल वाले अब उसे बच्चे के लिए बोलने लगे है की परिवार को अगला वंश कब मिलेगा? मैंने पूछा तो इसमें तेरे को क्या दिक्कत है? फिर संध्या ने मुझे बताया की वो अपना बच्चा मुझसे चाहती है, अपने पहले प्यार से। इसीलिए वो कोई बहाना बनाकर यहा मेरे पास चली आई थी। मैंने भी उसे दिलासा देते हुए कहा तेरी कोख को मैं ही भरूँगा घबरा मत बहन, तू ही मेरे पहले बच्चे को जन्म देगी फिर हम दोनों ही शाम की तैयारी में लग गये। शाम हुई और मैं जल्दी से नहाकर टी-शर्ट और पजामे में घूमने लगा। संध्या ने भी जल्दी से तैयारी कर ली फिर हमने खाना खाया और फिर संध्या नहाने के लिए बाथरूम में चली गई। लगभग 20 मिनट के बाद जब वो बाहर निकली तो मैं उसे देखकर के हैरान रह गया। अब तो वो पहले से भी ज़्यादा गदराई हुई और खूब सेक्सी लग रही थी। उसका जिस्म खूब चमक रहा था और उसकी गांड तो पूछो ही मत दोस्तों, और उसने हल्के से गहरे रंग का टॉप और नीचे एक छोटी सी स्कर्ट पहन रखी थी जो मुश्किल से उसकी चूत को ढँक पा रही थी। मैं उसे इस तरह से देखकर अपने लंड को सहलाने लगा। वो दूसरे कमरे में जाकर हल्का सा तैयार होकर मेरे कमरे में आई, उसने आते ही कमरे की लाइट को बंद कर दिया मैं उसके करीब गया और उसे अपनी बाहों में भर लिया। मैंने फिर उसके जिस्म की तारीफ़ की और उसको बेतहाशा किस करने लगा। उसने भी इस काम में मेरा पूरा साथ दिया मैं अपने एक हाथ से उसके बब्स को टटोलने लगा और दूसरा हाथ को उसकी स्कर्ट में डालकर उसकी गांड की लकीर को सहलाने लगा। संध्या आहें भरने लगी थी। मैं उसे ऐसी ही पोज़िशन में बेड के करीब ले आया वहां जाकर मैंने उसे गले पर काटना और चूसना चालू कर दिया, मैंने उसकी दूध से भरी चुचियां दबा दबाकर जी भर के काटी और खूब चुसी।

फिर मैंने संध्या के जिस्म से उसका टॉप अलग कर दिया और फिर मैंने एक एक करके उसकी स्कर्ट फिर उसकी पैंटी को भी उतार दिया। संध्या ने झट से मेरे पजामे में हाथ डालकर मेरे लंड को पकड़ लिया और दूसरे हाथ से मेरे कपड़े उतार दिए। फिर मैंने अपना लंड हल्का सा हिलाया और संध्या को इशारा किया। और संध्या ने मेरे सात इंच के लंड को अपने मुहँ में भर लिया और बड़े ही प्यार से उसे चूसने लगी। वो मेरे लंड को बड़ी बेकरारी से चूस रही थी मैंने उसकी चुचियां मसलनी शुरु की। जैसे जैसे मुझे मज़ा आने लगा मैंने संध्या के मुहँ में ही झटके मारने चालू किए और अगले 5 मिनट में ही मैं उसके मुहँ में ही झड़ गया। संध्या ने मुहँ से लंड बाहर निकालना चाहा पर मैंने निकालने ही नहीं दिया बल्कि उसे कस के पकड़कर पूरा माल ज़बरदस्ती से उसे पीला दिया। उसने भी पूरा रस गपा गप पी लिया। उसके बाद उसने अपना मुहँ साफ किया, मैंने उसे उठाया और किस करने लगा वो भी अब तक बहुत गरम हो गई थी। मैंने उसे गोद में उठाकर बिस्तर पर पटका और उसकी टाँगो के बीच में आ गया। उसकी चूत में से क्या मस्त खुशबु आ रही थी, मैंने अपनी बहन की चूत की दोनों दीवारों को अलग किया और अपनी जीभ से बीच में चूत के लाल दानों को चाटना शुरु कर दिया, चूत पर जीभ के स्पर्श से वो तो मानो स्वर्ग में पहुँच गई थी। पूरा कमरा उसकी आवाज़ो से गूँज रहा था वो बिस्तर को मसले जा रही थी और मैं उसकी चूत को बड़े मज़े के साथ चूसता जा रहा था, फिर उसने मेरे सर को पकड़कर अपनी चूत पर दबा दिया मैं जान गया की संध्या झड़ने वाली है। अगले ही पल उसका पूरा बदन जैसे अकड़ गया और एक तेज धार उसने मेरे मुहँ में ही छोड़ दी। मैं भी उसकी चूत का रस पी गया। इतने में वो थक गई पर मेरा लंड उसकी चूत को देखकर के फिर से तैयार हो गया।

मैंने संध्या से कहा तैयार हो जाओ मेरी जान आज तू अपने भाई का लंड फिर से लेने वाली है मेरी जान! फिर मैंने उसे नीचे लिटाया और उसके ऊपर आ गया लंड को चूत पर सेट करके उसकी चूत में एक ही झटके में अपना आधा लंड घुसा दिया। वो दर्द से चिल्ला पड़ी लेकिन मैंने परवाह ना करते हुए लंड तोड़ा पीछे निकाला और एक और झटके के साथ पूरा घुसा दिया। उसकी आँखो से आँसू निकल आए, फिर मैंने उसकी चीख को दबाते हुए अपने होंठो को उसके होंठो पर रख दिया और कुछ देर तक उसे यू ही चूमता रहा। और फिर उसकी चूत में धीरे धीरे अपना लंड हिलाने लगा और पाँच मिनट के बाद उसकी चूत में ज़ोर ज़ोर से झटके मारने लगा। संध्या दर्द से चिल्लाती हुई चीखती रही पूरा कमरा उसकी आहों से गूँज रहा था पर वो साथ भी पूरा दे रही थी मेरा। करीब 10 मिनट तक मैं उसे इसी तरह से चोदता रहा। और फिर मैंने अपना लंड बाहर निकाला और उसे किस करने लगा वो तोड़ा शांत हो गई पर बहुत खुश भी थी। फिर मैंने संध्या को डॉगी स्टाइल में झुकाया और इस पोज़िशन में काफ़ी देर तक चोदता रहा। और वो इस बीच में दो बार झड़ गई। अब मैं भी झड़ने वाला था इसलिए मैंने फिर से उसे नीचे लिटाया और उसकी टांगो को अपने कंधो पर रखकर के उसे जोर जोर से चोदने लगा। मेरा लंड उसकी चूत की जड़ में अकड़ रहा था, जब जब मेरा लंड पूरा अंदर जाता था संध्या चीख उठती थी। दोस्तों यह कहानी आप कामलीला डॉट कॉम पर पढ़ रहे है।

मैं जैसे ही झड़ने वाला था तो मैंने संध्या को कसकर पकड़ लिया और फिर उसकी चूत में मैंने अपना गरम पानी छोड़ दिया और उसके ऊपर ही लेट गया अगले 10 मिनट तक उसकी चूत से मैंने अपना लंड नहीं निकाला। उस रात मैंने संध्या को 3 बार चोदा और सुबह के पाँच बज गये थे। जब हम दोनों आखरी बार झड़े तो थककर संध्या मेरे ऊपर ही सो गई। पापा मम्मी जब तक नहीं आए तब तक मैं और संध्या खाते पीते चुदाई करते थे। और मम्मी पापा के आने के बाद हम फिर से भाई बहन वाले रोल में आ गए। मेरे लंड ने अपना काम कर दिया था संध्या ससुराल गई और वहां से ही उसका फोन आया की आज मैंने चेक किया तो दो पिंक लाइन आ रही थी, और उसने कहा धन्यवाद भाई मुझे माँ बनने की खुशी देने के लिए।

धन्यवाद कामलीला के प्यारे पाठकों !!