ये मेरा प्यार था या सिर्फ़ कोशिश

ये मेरा प्यार था Antarvasna या सिर्फ़ कोशिश- kahani hindi

विजय मल्होत्रा, बिज़्नेस ट्यcऊन, शहर के चाँद रहिसों में से एक. रुपया, पैसा, गाड़ी, नौकर किसी चीज़ की कोई कमी नहीं थी. बस एक कमी थी उनका बेटा अजय जो शरीर से तो 20 साल का हट्टा कट्टा आदमी बन गया था लेकिन एक आक्सिडेंट की वजह से उसके दिमाग पर चोट लगी जिससे उसका दिमाग एक बच्चे की तरह काम कर रहा था. कई बार वो अनजाने में अपने आंटी -बाप को चुदाई करते हुए देख चुका था लेकिन उसकी समझ में कुछ नहीं आता था बस एक जिज्ञासा सी बनी रहती थी हमेशा जैसे की अक्सर बच्चों में देखी जा सकती है.

विजय ने अजय को बारे से बारे डॉक्टर्स से दिखवाया. लंडन, अमेरिका तक में उसका इलाज चला लेकिन कहीं कोई फायदा हुआ. विजय को हमेशा यही चिंता खाई जा रही थी की उसके बाद इतना बड़ा बिज़्नेस अजय कैसे संभालेगा. और यही चिंता उसकी गिरती सेहत का कारण बनती जा रही थी जो आगे चलकर उसके बिज़्नेस को खत्म कर सकती थी.

उन्होंने अपने फॅमिली डॉक्टर विशाल से सलाह मशविरा किया तो उन्होंने बताया “की फिलहाल तो कोई हाल नज़र नहीं आ रहा है तो एक काम कर सकते हैं अजय को कहीं दूर किसी हिल स्टेशन पर भेज देते हैं. वहाँ की हरियाली, शूध ताज़ी हवाएँ, मौसम और बारिश का मजा, हो सकता है अजय के द्‍माग पर कुछ असर करे. क्या पता वो वही जाकर ठीक हो जाए. वहाँ तुम्हारे पेरेंट्स भी हैं गाँव में. और वो एरिया हिल स्टेशन ही तो है. वहाँ क्यों नहीं भेज देता अजय को. उसकी देखभाल की भी चिंता खत्म और अंकल आंटी को भी थोड़े दिन पोते के साथ समय बिताने के लिए मिल जाएगा.”

विजय ने कहा “हाँ यार तूने अच्छा याद दिलाया. दो दिन बाद से अजय की कॉलेज से दो महीनों की छुट्टी पड़ रही है. इन छुट्टियों में वो वहीं घूम आएगा. शायद उसकी किस्मत में वहाँ ही ठीक होना लिखा है. अब तो भगवान से यही प्राथना है की वो जल्दी से ठीक हो जाए. चलो ये कोशिश भी करके देख लेते हैं वरना तो हर जगह से उम्मीद ही टूट चुकी है और इतना कहते हुए विजय की आखों में आँसू आ गये.”

विशाल ने उसे हौंसला दिया और तैयारी करने को कहा. दो दिन बाद जब अजय के कॉलेज की छुट्टियाँ स्टार्ट हो गयी तो विजय उसे उसके दादा-दादी के पास चोद आया. अजय यहाँ आकर बहुत खुश था. रोज सुबह सुबह खेतों में चला जाता. दिन भर खेतों में, पहाड़ों पर खेलता. चिड़ियों से, पेड़-पोढ़ों से बातें करता, तितलियाँ पकड़ता बस दिन भर उसका मान वहीं लगा रहता था. उसे यूँ खुश देखकर उसके दादा-दादी भी बहुत खुश थे.

एक दिन अचानक जब वो खेल रहा था तभी उनके खेतों की रखवाली करने वाले माली की लड़की मीना अपनी सहेलियों के साथ खेतों के पास बने तालाब पर नहाने आई. उन्हें पता नहीं था की अजय वहाँ खेल रहा है. सबने अपने अपने कपड़े उतरे और उतार गयी पानी में. वहाँ कोई आता जाता नहीं था तो सब ऊपर से नंगी होकर पानी में आतकेलियन कर रही थी. गोरी गोरी, छोटी-बड़ी चुचियाँ पानी में उछाल-कूद मचा रही थी. अगर कोई उस डरशया को देख लेता तो उसका लंड पेंट फाड़ कर यक़ीनन बाहर आ जाता. अजय पास ही खेल रहा था तो पानी की आवाज़ सुनकर तलब की तरफ चला आया.. वहाँ आकर जब उसने सुन्दर सुन्दर लड़कियों और उनकी चुचियों को देखा तो जैसे खो ही गया. धीरे धीरे वो सम्मोहित सा तालाब के पास आ गया और एकटक लड़कियों खासकर मीना को निहारने लगा.

अचानक मीना की नज़र उस पर पड़ी तो वो चिल्ला उठी. उसने अजय को देशी भाषा में गलियाँ निकलनी शुरू कर दी जिसे सुनकर अजय घबरा गया और वहाँ से तुरंत भाग गया. मीना का चेहरा गुस्से से लाल हो गया था. उसे अपनी सहेलियों से पता चल गया था की ये लड़का शहर से आया है और कहाँ ठहरा है तो वो सीधा वहीं चली गयी.

जब अजय ने उसे खिड़की से उसके घर की तरफ आते देखा तो डर के मारे वो अपने कमरे को अंदर से बंद करके बैठ गया. मीना ने सारी घटना अजय की दादी को बताई तो दादी ने उससे अपने पोते के किए की माँफी माँगी और अजय की हालत से अवगत कराया जिसे सुनकर मीना चौंक गयी. उसे अब अफ़सोस हो रहा था की उसने बेवजह ही उसे कितना दाँत दिया था और यहाँ शिकायत भी करने चली आई थी.

उसे लगा की उसे अजय से माफी माँगनी चाहिए और उसकी दादी से पर्मिशन लेकर अंदर चली गयी. वहाँ जाकर जब उसने दरवाजा खटखटाया तो अजय ने डर के मारे दरवाजा ही नहीं खोला. उसने अजय को कहा “अगर तुम दरवाजा नहीं खॉलोगे तो मैं तुम्हारी दादी को सब बता दूँगी” बेचारा अजय क्या करता उसने धीरे से दरवाजा खोल दिया. दरवाजा खुलते ही मीना किसी प्यासी शेरनी की तरह अंदर लपकी और अजय को पीछे धकेलते हुए अंदर से दरवाजा बंद कर दिया.

अजय की तो हालत खराब थी. उसकी आँखें गीली हो गयी थी ये सोचकर की अब उसका क्या होगा. मीना को उसका मासूम चेहरा और उसकी भोली अदाएँ भा गयी और वो सोचने लगी की भगवान भी कितना निस्तूर है जो इतने सुन्दर और जवान लड़के को दिमाग से कमजोर बना दिया.

इसके बाद मीना ने पूछा “तुम वहाँ रोज़ जाते हो” अजय ने बताया “हाँ मैं रोज़ वहाँ जाता हूँ”. मीना ने कहा “कल मेरे साथ चलना”. पहले तो अजय ने मना करने की सोची लेकिन फिर उसे मीना द्वारा दादी को बात बता देने की धमकी याद आ गयी मरता क्या ना करता मान गया. इतना बोलकर मीना वहाँ से चली गयी. अगले दिन मीना अजय के घर पहुँच गयी क्योंकि वो जानती थी की अजय नहीं जाएगा. लेकिन रास्ते भर मीना उससे हल्की फुल्की मज़ाक भारी बातें करती रही जिससे अजय का डर दूर भाग गया और तालाबत्क पहुँचते पहुँचते अजय और मीना अच्छे दोस्त बन गये थे.

तालाब पर पहुँचते ही मीना कपड़े समेट पानी में उतार गयी. उसने अजय को भी आने को कहा लेकिन वो शर्मा रहा था. तालाब के ठंडे पानी में मीना का जिस्म गरमा रहा था. जवानी की दहलीज पर उसने कदम रखे ही थे और अजय उसको नगञा देखने वाला पहला पुरुष था. उसकी तरफ आकर्षण स्वाभाविक है. उसने अजय को कहा “अब तो हम दोस्त हैं तो साथ क्यों नहीं नहा सकते”. अजय ने एक पल को सोचा और अपने कपड़े (आंडरवेयर छोड़कर) उतारकर पानी में आ गया. पानी में आकर दोनों अठखेलियन करने लगे. मीना का जिस्म गरम होता जा रहा था और इसका कुछ कुछ असर अजय पर भी पड़ रहा था. उसका लंड आंडरवेयर में तंबू बना चुका था जिसे मीना देख चुकी थी. मीना की धधकने तेज हो चुकी थी.

मीना ने अजय को कसकर अपनी बाहों में समेट लिया. अजय घबरा गया और मीना की गिरफ्त से छूटने की कोशिश करने लगा. मीना ने कहा “यार दोस्तों से भी कोई शरमाता है. बच्चों जैसी हरकतें मत करो. मैं तुम्हें आज एक नया खेल सिखाऊंगी.” अजय अपने आप को बच्चा समझ बोले जाने से गुस्सा हो गया और नया गेम खेलने की इच्छा के कारण भी वो वहीं रुक गया. मीना ने अजय के जिस्म को, उसके होठों को, उसकी छाती को चूमना चाटना शुरू कर दिया. अजय के जिस्म में झुरजुरी दौड़ गयी. उसकी लंड की नसों में खून उफान मारने लगा. लगा जैसे की वो फट जाएगा. अनजाने में ही उसके हाथ कब मीना की चुचियों पर चले गये उसे पता ही नहीं चला.

फिर तो जैसे तूफान आ गया. मीना ने अपना सूट सलवार उतार दिया. अब उसके जिस्म पर सिर्फ़ ब्रा-पैंटी ही थी. अजय ये देखकर पागल हो रहा था. उसका दिमाग उसके काबू में नहीं रहा. वो पागों की तरह ब्रा के ऊपर से ही मीना की चुचियों को दबाने और निचोड़ने लगा. मीना मस्ती में कराह रही थी और उसके होठों को चूमे जा रही थी. मीना ने इसके बाद अजय का आंडरवेयर उतार दिया . कच्चा उतरते ही अजय का 7 इंच लंबा और 2 इंच मोटा गोरा लंड उसकी आँखों के सामने था. मीना उसे देखकर एक बार तो डर गयी लेकिन चुत की खुजली इतनी तरफ गयी थी की उस समय उसे कोई होश नहीं था. उसने अजय का लंड अपने मुंह में भर लिया और आगे पीछे करने लगी. अजय के हाथ मीना की चुचियों से हाथ गये तो मीना ने पीछे से अपनी ब्रा के स्ट्रॅप खोलते हुए ब्रा उतार दी.

ब्रा उतरते ही मीना की गोरी और कसी हुई चुचियाँ अजय के सामने थी जो उसे बुला रही थी. अजय ने उनका निमत्रन स्वीकार किया और एक चूची को हाथ से दबाते हुए दूसरी चूची को मुंह में भर लिया. जैसे ही चूची के दाने को अजय ने हल्के से काटा तो मीना की मस्ती भारी चीख निकल गयी और वो झाड़ गयी. मीना ने अपनी पैंटी उतरी और अजय के ऊपर 69 की पोज़िशन में लेट गयी. अजय को सब बहुत अच्छा लग रहा था. अब तक ये सब उसने सिर्फ़ अपने मम्मी- अंकल को करते देखा ताओर आज खुद उसके साथ ऐसा हो रहा था. उसका दिमाग सैकड़ों विचारों से झूझ रहा था. उसका लंड ऐसे क्यों फूल रहा है ? वो क्या कर रहा है? क्या ऐसा करना सही है? लेकिन इस समय उसे इन सवालों के जवाब नहीं बल्कि उस असीम आनंद कॉप रॅप्ट करना था जिसे हासिल करने का सपना हर लड़की-लड़का देखते हैं.

मीना ने अजय के लंड को मुंह में ले लिया और ज़ोर ज़ोर से चूसने लगी. उसने अजय को उसकी चुत चाटने को कहा. अजय ने पहले उसकी गंध लगी और फिर उस पर हौले से अपनी जीभ फिराई. उसे कुछ नमकीन सा लिसलिसा का टेस्ट लगा. लेकिन इतना बुरा भी नहीं था. आख़िर मीना भी तो उसका लंड चूस रही थी. उसने मीना की चुत को पहले ऊपर ऊपर से और फिर चुत की फांकों को हटते हुए अंदर गहराई तक जीभ डालकर चाटना शुरू कर दिया या यू कहिए चूसना और जीभ से चोदना शुरू कर दिया.

इधर अजय की जीभ को अपनी चुत में इतनी गहराई में पकड़ मीना ने अजय का लंड और जोरों से चूसना शुरू कर दिया. अजय पर से भी कंट्रोल हटता जा रहा था. उसने मीना को बताया की उसे बाथरूम आ रहा है लेकिन मीना को पता था की क्या बात है तो उसने अजय को नहीं चोदा और बस चुस्ती रही. अजय का लंड बर्दाश्त नहीं कर पाया और उसने पानी छोड़ दिया. मीना उसकी एक एक बंद को चाट गयी. लंड से पानी निकालने के बाद वो छोटा होने लगा लेकिन मीना ने उसे चूसना नहीं चोदा. हालाँकि चुत चुसाई से वो भी दूसरी बार झाड़ गयी थी.

अजय का लंड चूज़ जाने से दुबारा खड़ा होने लगा. लंड के खड़ा होते ही मीना उसके ऊपर से हाथ गयी और उसे अपने ऊपर आने को कहा. मीना ने अपनी टाँगें फैलाई और अजय को चुत की तरफ इशारा करते हुए बताया की इस छेद में अपना लंड डाले. अजय ने एक दो बार प्रयास किया लेकिन एक तो चुत टाइट थी और दूसरा ये उसका फर्स्ट टाइम था जिसकी वजह से लंड बार बार फिसल रहा था. मीना ने अपनी चुत की फांकों अपने हाथों से फैलाया और अजय के लंड को छेद पर टिकते हुए ज़ोर से धक्का मरने को कहा.

अजय ने ज़ोर से धक्का मारा तो उसका लंड का सूपड़ा मीना की चुत में फँस गया. मीना दर्द से तड़प उठी लेकिन वो जानती थी की आज नहीं तो कभी नहीं. उसने अजय को दुबारा धक्का मारने को कहा. अजय ने उसकी कमर को पकड़ा और एक ज़ोर से धक्का मर दिया. उसका लंड 2 इंच अंदर जाकर अटक गया. इससे पहले मीना कुछ कहती अजय ने और एक जोरदार धक्का मर दिया जो मीना की चुत की झिल्ली फाड़ता हुआ 5 इंच अंदर चला गया था. मीना का दर्द के मारे बुरा हाल हो गया. उसकी चुत से खून निकल आया और वो चीख पड़ी. लेकिन अजय पर तो जैसे नशा छा गया था. मीना उसकी गिरफ्त से छूटने की कोशिश करने लगी लेकिन अजय ने उसे कसकर पकड़ कर रखा था.

उसने मीना की चीख अनसुनी करते हुए एक और ज़ोर का धक्का मर दिया और उसका लंड मीना की चुत में खो गया. इसके बाद उसने लंड को मीना की चुत के अंदर-बाहर करना शुरू कर दिया. मीना की चीखें धीरे धीरे सिसकारियों में बदलने लगी. जो लंड पहले उसे तकलीफ दे रहा था अब उसे जन्नत की सैर करा रहा था. अजय एक बार झाड़ चुका था तो इस बार उसका लंड पानी छोड़ में समय ले रहा था. अजय ने कभी सपने में भी नहीं सोचा था की चुदाई में इतना मजा आता है. जब भी वो अपने पेरेंट्स को चुप कर चुदाई करते हुए देखता था तो अक्सर सोचा करता था की मम्मी- अंकल ये गंदा काम क्यों करते हैं? लेकिन आज उसे ये खेल सब खेलों से प्यारा लगने लगा था.

अजय की जोरदार चुदाई में मीना एक बार झाड़ चुकी थी और दूसरी बार झड़ने की तरफ तरफ रही थी. इधर अजय के जिस्म का लावा भी बाहर आने को उतावला हो रहा था. अजय ने धक्के और तेज लगते हुए मीना की चुत को अपने लंड के पानी से भरना शुरू कर दिया. इसी के साथ मीना की चुत ने भी पानी छोड़ दिया और दोनों एक दूसरे के ऊपर लेट कर हाँफने लगे.

इसके बाद दोनों ने एक बार और चुदाई की और अपने अपने कपड़े पहनकर वापस घर आ गये. अब तो ये उनका रोज़ का काम बन गया था. रोज़ तालाब और खेतों में जाते और मनपसंद जगह पर चुदाई किया करते थे. पहले तो दादी को उसका मीना के साथ रोज़ रोज़ जाना नागवार गुजरा लेकिन जब अजय की हालत में उन्हें सुधार दिखा तो उन्होंने सोचा की शायद मीना उसे ठीक करने की कोशिश कर रही है. क्यों ना मीना को कोशिश करने दी जाए. शायद अजय ठीक हो जाए. फिर तो कोई रोक टोक नहीं. दोनों दिन में कम से कम एक बार तो जरूर चुदाई करते थे. धीरे धीरे अजय की हालत में सुधार आता गया.

इसका कारण सिर्फ़ चुदाई नहीं थी बल्कि वो प्यार, हमदर्दी, अपनापन था जो उसे अपने घर में कभी नहीं मिला. अंकल बिज़्नेस में उलझे रहते थे तो आंटी किटी पार्टीस में. ऐसा नहीं की वो अजय को प्यार नहीं करते थे लेकिन उनके पास अजय के लिए समय नहीं था. शायद यही कारण था अजय रिकवर नहीं कर पा रहा था. अब वही प्यार और अपनापन उसे मीना के रूप में दिखाई दे रहा था.

धीरे धीरे अजय पूरी तरह ठीक हो गया. उसकी दादी ने ये खूसखबरी अजय के अंकल विजय मल्होत्रा को सुनाई जिसे सुनकर तो उन्हें विश्वास ही नहीं हुआ. वो बहुत खुश थे की उनकी ये कोशिश कितनी सफल हुई है. उन्होंने तुरंत गाँव जाकर अजय को वापस लाने की सोची. वो गाँव गये और अजय को वापस लेकर चलने लगे. अजय गाड़ी में बैठ गया जाकर और रोज की तरह उस समय मीना वहाँ पर आई जिसे अजय देख ना सका.

मीना को देखकर अजय की दादी ने बताया “विजय बेटा आज अगर अजय ठीक हुआ है तो सिर्फ़ इस लड़की की वजह से. इसकी कोशिश का ही नतीजा है की आज हमारा अजय बिलकुक ठीक है. विजय ये सुनकर बहुत खुश हुआ और उसने कुछ पैसे निकालकर मीना को देने चाहे और कहा “बेटी तुमने हमारे बेटे के लिए कोशिश की ये उसका इनाम है रख लो.”

मीना को तो झटका सा लगा क्योंकि वो अजय से प्यार लार्न लगी थी और यहाँ उसके प्यार का मज़ाक बन रहा था. उसने पैसे लेने से इनकार कर दिया और कहा “नहीं बाबूजी आप लोगों की सेवा करना तो हमारा कर्तव्य है. मुझे ये पैसे नहीं चाहिए. विजय उसकी बातें सुनकर हैरान रही गया. और वो अपनी आंटी से विदा लेकर वहाँ से निकाला और अपनी गाड़ी में बैठ गया और गाड़ी ने शहर के लिए चलना शुरू कर दिया. मीना भी वहाँ से चल दी. उसकी आँखें नाम थी और बार बार एक ही सवाल उसके मान में उठ रहा था की “ये मेरा प्यार था या सिर्फ़ कोशिश”
ये मेरा प्यार था या सिर्फ़ कोशिश- kahani hindi

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