वो तो मैं थी, मेरी भाभी और वो

मैं: लेट’से स्टार्ट विद antarvasna सेम बेसिक एरोबिक्स एक्सर्साइज़स जो तुम्हारी कंप्लीट बॉडी पे वर्क करेंगी. एक वीक तक तुम्हारी बॉडी थोड़ी खुल जाएगी तो हम इंडिविजुयल बॉडी पार्ट्स की एक्साइज शुरू करेंगे.
श्रुति: ओके!

मैंने उससे 2-3 सिंपल एक्साइज करने को कही और साथ-साथ मैंने अपनी वेट्स की एक्साइज भी कर ली.

मैं: अब अपने फीट के बीच 2-3 फीट का गप कर लो. फिर एक बार आगे झुक के फ़्लोर पे हाथ लगाओ और पीछे आते हुए मॅग्ज़िमम स्ट्रेच करने की कोशिश करो.

मैं उसके पीछे जा के खड़ा हो गया क्योंकि पीछे जाते वक्त कई बार बैलेन्स बिगड़ जाता है. और वही हुआ, पीछे झुकते हुए वो गिरने लगी और उसका सारा बाहर मेरे हाथों पे आ गया. मैंने उसकी कमर पे हाथ रखते हुए उससे सीधा किया.

मैं: तुम यह वाली एक्साइज रहने दो, तुमसे नहीं होगी.
श्रुति: (शायद उसकी ईगो हर्ट हो गयी) कैसे नहीं होगी? ई विल ट्राइ अगेन.

उसने फिर ट्राइ किया और फिर वही हुआ.

मैं: (आँख मरते हुए) तुम्हें मेरे ऊपर गिरना अच्छा लग रहा है?
श्रुति: चुत उप! वो मेरा बैलेन्स थोड़ा हिल गया.
मैं: (हंसते हुए) अरे मुझे पता है तुम गिरी हुई लड़की हो, क्यों बार-बार प्रूव कर रही हो?
श्रुति: (गुस्सा होते हुए) नाउ इंतजार और .!

उसने फिर ट्राइ किया और इस बार उसने ढंग से कर लिया.

श्रुति: डॉन’त ट्राइ तो एक्ट स्मार्ट! (जीभ-छुड़ाते हुए)
मैं: ई आम नोट ऐक्टिंग, ई आम स्मार्ट!
श्रुति: भगवान सब कुछ दे पर गलत-फ़हमी ना दे.
मैं: तुम्हारी थोड़ी सी तारीफ क्या कर दी तुम तो सर चढ़ रही हो.
श्रुति: अच्छा जी, तुम कुछ भी बोलो तो चलेगा और मैं कुछ बोल दम तो मैं सर पे चढ़ रही हूँ.
मैं: अच्छा सॉरी.
श्रुति: ताकि आ चिल्ला-पिल.
मैं: ताकि आन ई-पिल.
श्रुति: वत्फ़ दीदी यू से?
मैं: कुछ नहीं.
श्रुति: तुम्हारी गर्लफ्रेंड खाती होगी ई-पिल.
मैं: मैंने बताया ना मेरी कोई गर्लफ्रेंड नहीं है.
श्रुति: सो, मेरे साथ ऐसी बातें मत करो, जब तुम्हारी गर्लफ्रेंड बनेगी तो उससे करना यह सब बातें.
मैं: ओके, ई आम सॉरी.

मैं सीरीयस हो के उससे एक्साइज करवाने लगा. कुछ देर बाद वो बोली

श्रुति: यार बोरिंग लग रहा है, कुछ इंट्रेस्टिंग एक्साइज कारवांओ ना. (मैंने मन में सोचा की कामसुत्रा इंट्रेस्टिंग लगेगा?)
मैं: इंट्रेस्टिंग एक्साइज तो मैं अपनी गर्लफ्रेंड को करेगा जब मिलेगी.
श्रुति: यार ऐसे सुनाओ मत. मैंने तो मज़ाक में बोल दिया था. अभी हममें 2 दिन हुए है मिले हुए और तुमने ई-पिल की बातें शुरू कर दी.
मैं: अच्छा, तो कितने दीनों बाद करूं ई-पिल के बातें?
श्रुति: हां हां हां. यू आर सो नॉटी.
मैं: मेरे साथ रहना है तो ऐसी बातों की आदत डाल लो.
श्रुति: मुझे तुम्हारे साथ नहीं रहना, बस एक्साइज सीखनी है.
मैं: व्होटेवेर!
श्रुति: अच्छा अब मुझे कुछ ढंग की एक्साइज कारवांओ नहीं तो मर खाओगे.

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कुछ और देर एक्साइज करने के बाद हम लोग घर(अपने-अपने) वापस आ गये.

मैंने कुछ पेट-पूजा की और रेस्ट करने चला गया. मैंने सोचा की श्रुति से अच्छी बात होने लग गयी है पर क्या फायदा, उसका तो बाय्फ्रेंड है. मैंने अपने दिल को दिलासा देते हुए भाभी की तरफ कॉन्सेंट्रेट किया. तभी आंटी ने आवाज़ दी और कहा की जा यह दवाई सामने वाली आंटी को दे आ. मैं सामने वाले घर में नीचे गया तो बाहर से लॉक लगा हुआ था. मैं वापस आने लगा तो मुझे एक दम से आइडिया आया की क्यों ना ऊपर चल के भाभी जी से मिला जाए. मैंने फर्स्ट फ़्लोर पे आ के बेल बजाई तो भाभी ने दरवाजा खोला.

मैं: नमस्ते!
भाभी: अरे आप. आइये आइये.
मैं: कैसे हो आप?
भाभी: बढ़िया. आप बताओ?
मैं: मैं भी बढ़िया हूँ! नीचे वाली आंटी कही गयी हुई हैं क्या?
भाभी: मुझे नहीं पता.
मैं: अच्छा. जब वो आए तो उन्हें यह दवाई दे दीजिएगा. आंटी ने भिजवाई है.
भाभी: ओके!
मैं: आपके घर कोई गेस्ट आए हुए हैं?
भाभी: नहीं तो. क्यों?
मैं: वो कल शाम मैंने किसी को देखा था. एक बहुत सुंदर सी लेडी थी बिलकुल ऐश्वर्या राई जैसी लग रही थी, बल्कि उससे

भी सुंदर.
भाभी: (शरमाते हुए) वो तो मैं थी.
मैं: क्या बात कर रहे हो? सच में?
भाभी: हाँ जी. मैं क्यों झूठ बोलूँगी.
मैं: मतलब आप ऐश से भी ज्यादा सुंदर हो?
भाभी: (कुछ नहीं बोली बस शर्मा रही थी)
मैं: आप मेरे साथ मज़ाक तो नहीं कर रहे ना?
भाभी: नहीं नहीं. मैं सच बोल रही हूँ. पर मैं इतनी अच्छी भी नहीं लग रही थी जितना आप कह रहे हैं.

मैंने सोचा लड़कियाँ भी कमाल करती है. खोइ उनकी तारीफ ना करे तो मुश्किल और कोई तारीफ करे तो मानती नहीं है या ना मान ने की ऐक्टिंग करती है.

मैं: यह तो आप का बड़प्पन है जो आप ऐसा कह रही है. नहीं तो गली के काफी लोग आपको देख रहे थे कल.
भाभी: (सर्प्राइज़ होते हुए) क्या? गली के लोग मुझे देख रहे थे?
मैं: अब वो भी क्या करे. आप लग ही रही थी इतनी कमाल. प्लीज़ बुरा मत मान ना मैंने जो देखा वो बता दिया.
भाभी: अरे कोई नहीं. वैसे थॅंक्स फॉर थे कॉंप्लिमेंट. मैं चाय बना के लाती हूँ. (और वो शरमाते हुए चली गयी)

मुझे यकीन नहीं हो रहा था की मैंने यह सब कह दिया भाभी को और गली के लोगों को भी इन्वॉल्व कर दिया. लेकिन मैंने सोचा की जो हुआ अच्छा ही हुआ, भाभी खुश हो गयी! फिर हम लोगों ने चाय पी मगर मैंने इस बारे में आगे बात नहीं की. मैंने सोचा अभी के लिए इतना काफी है.

वो तो मैं थी मेरी भाभी और वो!

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