भाभी की प्यास मेरे खड़े लंड ने भुज़ाई

भाभी की प्यास मेरे खड़े लंड ने भुज़ाई – bhabhi ki pyaas mere khade lund ne bhujai – Part – 1

हेलो दोस्तों… मैं देव एक बार फिर से आपकी सेवा मैं हाज़िर हूँ… एक नया सेक्स एक्सपीरियेन्स लेकर. तो आप सभी मजे लीजिए मेरे साथ और मैं उम्मीद भी करता हूँ की यह कहानी आप सभी को बहुत पसंद आएगी. कुछ समय पहले मेरी वाइफ को किसी कारण से हॉस्पिटल मैं भरती करवाना पड़ा और करीब 4 सप्ताह तक वो वहां पर रही और मैं उसे-से मिलने समय समय पर चला जाता और मेरी आंटी जो गाँव मैं रहती थी वो भी आकर मेरी बारे भैया एक प्राइवेट कंपनी मैं बाहर नौकरी करते और घर पर कभी कभी आते थे.

चलो दोस्तों अब मैं थोड़ा अपनी भाभी के बारे मैं आप सभी को बता दम. मेरी भाभी 26 साल की है और उनका गोरा कलर, लंबे बाल, गो चेहरा, बड़ी बड़ी आंखें, सुंदर होंठ वो देखने मैं एकदम सेक्सी दिखती है. वो इसे है की हर कोई उनकी और अट्रॅक्टिव हो वहां उसे पाने की आग तो लग हे जाती है.

मुझे वो अच्छी तो बहुत लगती थी… लेकिन उनका फॅमिली सदसाया होने पर मुझे अपने उन्न विचारों को कंट्रोल करना हे पड़ता है. आंटी का तो ज्यादातर टाइम हॉस्पिटल मैं हे गुजरता था बस जब भी किसी चीज़ की जरूरत होती तब घर आकर ले जाती और फिर हॉस्पिटल चली जाती. मेरा तो ऑफिस जाना होता होता डेठ ओह मैं सभी जरूरी काम निपटा कर फिर ऑफिस की तैयारी मैं जुट जाता. सुबह आंटी के हॉस्पिटल जाने के बाद मैं और भाभी घर पर अकेले रही जाते. जब तक मैं ऑफिस नहीं जाता तब तक भाभी को देखकर आंखें गरम कर लेता… क्योंकि वो मुझे बहुत मस्त लगती थी और जब सारी पहनती थी तो एकदम कसा हुआ बदन, गोरी बाहे, चिकनी पीठ, गदराए हुआ पाते, सेक्सी गांड, पाएरो मैं पायल थी जो छान छान करके बजती थी तो मैं तो मदहोश हो जाता था. भाभी मुझे नाश्ता करती और घर के बाकी कामों मैं लगी रहती थी.

फिर मैं उन्हें अपने साथ हे नाश्ता करने को कहता…. पहले वो इनकार करती रही… लेकिन फिर कुछ दीनों बाद रोज़ का वही रुटीन था.. तो हम एक दूसरे को समझने लगे और करीब भी होने लगे. वो भी अब मुझ मैई रचे लेने लगी और छुपी छुपी नजारे से देखती थी. फिर एक दिन मैं ऑफिस से जल्दी छुट्टी लेकर घर आया और दोपहर मैं भाभी सो रही थी तो उन्होंने उठकर दरवाजा खोला. फिर मैं अपने रूम मैं रेज़र लेकर झांटे बनाने लगा… वैसे तो झांटे बनते वक्त लंड तो कहा हो हे जाता है और मेरा भी 7 इंच ला लंड टंकार खड़ा था और मैं बाल काट रहा था. फिर झांटे काटने के बाद मैंने तेल लिया और अपने लंड महाराज पर तेल मालिश करने लगा.

अब तो मेरा लंड एकदम लंबा खड़ा होकर टन गया और हर एक हिस्सा भी तेल की वजह से चिकना और चमकदार हो गया था. मैं लंड की मालिश करते वक्त एक भाभी के बारे मैं सोचने लगा और मुझे बड़ा मजा आ रहा था. तभी मुझे एहसास हुआ की मेरे रूम के दूर पर कोई है और मैंने कुछ छा छान की आवाज़ सुनी थी. मुझे शक हुआ की कही वो भाभी तो नहीं और मैंने जल्दी से सारा समान समेटा और फिर नॉर्मल होकर बाहर आया तो वहां पर कोई नहीं था और मैंने भाभी के रूम मैं देखा तो वाउ रहा पर नहीं थी… वो बाथरूम मैं थी. फिर मेरे मान माई शक हो गया की हो ना हो भाभी दूर के होल से मुझे देख रही थी और अब घबराकर बाथरूम मैं चली गयी है. फिर मैं हॉल मैं आ गया और त.भी. देखने लगा और कुछ देर बाद भाभी भी आ गयी और उन्होंने मुझसे पूछा.

भाभी: कैसे हो देवर जी? कुछ लोगे?

मैं: आपके पास क्या है देने के लिए?

भाभी चौंकते हुए: क्या? अरे चाय, कॉफी कुछ बनाकर लाउ?

मैं: श हां हां चाय बना लीजिए.

फिर वो चाय बनाने किचन मैं चली गयी और थोड़ी देर बाद उन्होंने आवाज़ लगाई.

भाभी: अरे सुनो देवर जाए… यहां पर आना ज़रा.

तो मैं (किचन मैं पहूचकर) क्या हुआ बोलिए?

भाभी: अरे यह शक्कर का डिब्बा ऊपर अलमारी मैं रखा है ज़रा उतार दीजिए.

फिर मैंने वहां पर अक्सर रहने वाले स्टूल को खोजा… लेकिन वो वहां पर नहीं था.

मैं: भाभी वो स्टूल कहा पर गया?

भाभी: अरे आज मैं उसे चाट पर लेकर गयी थी… लगता है मैं उसे वही पर भूल गयी.

मैं: अब यह कैसे उतरेगा?

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