भाभी से पहला इकरार

भाभी से पहला इकरार

मेरी भाभी रेणु च्छुतियों में घर आई थी. Antarvasna मैंने पूरे 8 साल तक सिर्फ़ भाभी को निहारा था और ठंडी आहें भारी थी.वैसे मैंने उनको भैया' से चुदते हुए तो उनकी शादी के तीन दिन बाद ही देख लिया था लेकिन उनकी जवानी का पूरा जम नहीं पी पाया था. वैसे भाभी मुझे बहुत प्यार करती थी,और में उनके सुन्दर,कोमल हाथों को अपने हाथों में ले कर घंटों बैठा रहता था.लेकिन इस के आगे कभी कुछ भी नहीं हुआ.

इस बार जब वो आई तो सूरयाग्रहण था और पंडितजी ने बताया की मुझे और मेरी भाभी को यह ग्रहण शुभ नहीं है,इस लिए हमें यह ग्रहण नहीं देखना चाहिये.घर के सारे लोग छत्त पर ग्रहण देख रहे थे,और मुझे और भाभी को बाहर नहीं आने का बोल गया थे.

में खाना कहा कर ज़मीन पर गद्दे पर चादर ओढ़ कर लेट गया.थोड़ी देर में मेरी आँखें खुली तो देखा की भाभी अपने पर मेरी चादर में डाल कर त.भी. देख रही है.मैंने आँखें बंद कर ली और सोने का नाटक करता रहा.लेकिन मेरे पर तो भाभी को छूने का बहुत सवार था,इस लिए मैंने धीरे से मेरे हाथ को भाभी के पर के पंजों पर रख दिया.है…कितने चिकने पंजे भाभी के थे.भाभी जब कुछ नहीं बोली तो मैंने धीरे धीरे पंजों को सहलाना शुरू कर दिया.अचानक भाभी ने अपने पर और अंदर खिसका दिए और उनका पाँजा मेरे लोहे की तरह तनतनाते लंड से सूट गया.मैंने उनका पाँजा ज़ोर से पकड़ लिया और मेरे ताने हुए लिंग पर रगड़ने लगा.आँखें मैंने अभी भी बंद कर रखी थी,और नीने का नाटक कर रहा था.

थोड़ी ही देर में मेरा हाल बेहाल हो गया और मैंने मेरा हाथ भाभी के पंजे से उप्पर खिसकना शुरू कर दिया.मैंने सुना भाभी के होठों से सिसकियां निकल रही थी.मैंने मेरा हाथ और उप्पर बढ़ाया और मेरे को तो मजा आ गया जब मेरा हाथ उनकी चिकनी फूली हुई चुत से जा टकराया.भाभी ने अपनी जंघों बिंच ली और मेरे हाथ को सारी के उप्पर से अपने हाथ से ज़ोर से दबा दिया.मैंने अपना दूसरा हाथ भी भाभी के पेटीकोट में डाल दिया और ज़बरदस्ती उनकी जांघों को सारा करने लगा.अब तक में भी निडर हो गया था इस लिए भाभी का रिएक्शन देखने के लिए मैंने आँखें खोल कर भाभी की तरफ देखा.भाभी आँखें बंद कर लंबी लंबी सांसें चोद रही थी और अपनी जीभ अपने होठों पर फिरा रही थी.मेरा जोश तरफ गया और मैंने भाभी के पर के पंजों को अपनी जांघों के बीच में दबा लिया.मेरा लोड्‍ा ताना हुआ था और भाभी भी अब अपने पंजों से मेरे उफान लिए लंड को रगड़ रही थी.मुझ से रहा नहीं गया और मैंने दोनों हाथों से भाभी की जांघें छोड़ी कर दी और एक उंगली उनकी दाहाकति,भट्टी सी गरम चुत में घुसेड़ दी.भाभी ने ज़ोर से सिसकारी ली और मुझे झटके से परे कर दिया.

मैंने देखा भाभी का सुन्दर चेहरा वासना से तमतमा रहा था और उसने अपनी आंखें खोल कर मेरी तरफ देखा और मुस्करा दी.मैंने भी उसे पकड़ने की कोशिश की,लेकिन वो खड़ी हो गयी,और मुझे जीभ दिखा कर रूम से बाहर जाने लगी,तो में चिल्ला कर बोला “भाभी आपका बाहर जाना मना है,प्लीज़ बाहर मूत जाओ.अगर आप नहीं चाहती हो तो मैं अब आपको हाथ भी नहीं लगाऊँगा.

मेरी प्यारी भाभी वापिस मेरे पास आई और मेरे लंड को हाथ में ले कर बोली “मुझे तुम्हारे इरादे बहुत साल पहले से पता थे,जब में शादी कर के इस घर में आई थी.अब जल्दी ही तुम्हारी जवानी का जोश देखहोंगी”.और मेरे लंड को और ज़ोर से मसल दिया.मेरे कुंठ से सिसकारी निकल गयी और मैंने पूछा की वो शुभ घड़ी कब आएगी जब में मेरी रेणु भाभी की मस्त चुत के दीदार कर सकूँगा”.भाभी हंस कर बोली”मेरे प्यारे देवर जी,इसके लिए तुम्हें अगले महीने मेरे यहाँ आना पड़ेगा,जब तुम्हारे भैया तीन महीने की ट्रेनिंग पर बाहर चले जाएँगे”. भाभी ने मेरे होठों पर अपने होंठ रुख कर एक प्यारी सी चुम्मा झड़ दी और मैंने भी देरी किए बिना उनके होठों को चबा डाला. अगले महीने मैं भाभी की चुत की चुदाई की तमन्ना लिए भाभी के पास पहुँच गया.

अभी मेरा लोड्‍ा खड़ा हो गया है इस लिए मैं चला सुनंदा को चोदने.

भाभी से पहला इकरार

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