हिटलर कज़न शिखा

अहह अहह धीरे Antarvasna करो ना होने. मर जायूंगी मैं”……सीमा पूरे मुझे में कह रही थी. आज उसको मैं फिर से चोद रहा था.. रात के आँधरे में अपने बेड पे पूरा नंगा करके उसकी चुत पूरे मुझे से ले रहा था.

“आह…..जान…….सस्स्स्स्सस्स…….” यही वो आवाजें है जो मेरे मुंह से निकल रही थी. पूरे कमरे में सिर्फ़ दीवार पर लटकती घारी की टिक टिक के अलावा बस हमारी चुदाई का ही शूर हो रहा था. अभी 3 महीने ही हुए थे हमारी शादी को और हम ईकदूसरे से बहुत खुल गये थे. यह एक आरंगेड़ मरीज़ थी जिसके लिए मैं क्डपि राजी नहीं था…..लेकिन घरवालों की मर्जी के आगे झुक गया था. जैसे ही मुझे कॉलेज में टीचर की नौकरी मिली घरवालों ने रिश्ते के लिए ज़ोर दिया. और मुझे अपनी आंटी की ज़िद्द की वजह से हाँ करनी प्री. सीमा खूबसूरत होने के साथ साथ बहुत ही शरीफ और परे-लिखे घराने की लड़की थी, इसीलिए जब के कहने पर मैंने भी हाँ कर दी थी.

मैंने उस रात 15-20 मिनट तक अपनी बीवी की चुत अच्छे से मारी और जब माल निकले लगा तो उसके गोरे से पेट पर निकल दिया. उसे काफी असीम शांति मिली और मुझसे लिपट गयी और ना जाने कब उसकी आँख लग गयी.लेकिन मेरे मान में अशांति का तूफान चल रहा था. मेरे ज़हेन में वही पुरानी यादें का बवांडर गूमे जा रहा था. वो एक ऐसी याद थी जो ना चाहते हुए भी मुझसे अलग नहीं हो रही थी और मैं दूर जाने की बजाए उसके पास आता जा रहा था……..आख़िरकार जब काफी देर तक नींद ना आई तो मैंने आँखें बंद कर ली और बिलकुल शांत मान से सोचने लगा.,……

आज सीमा को फिर से जम के छोडा. कितनी मस्त माल है वो…..कितने लोग उसके हुस्न की तारीफ करते है…..गोरे बदन पे तीखे मुम्मी…..लंबे लंबे बाल…..पतली कमर के नीचे सख्त मदमस्त गान्ड…….जब कुछ तो है उसके पास……..लेकिन मुझे वो मजा अंदर से क्यों नहीं मिल रहा…..मुझे क्यों हमेशा अधूरा सा लगता है. सेक्स करने के बाद का वो सुकुउँ मुझसे शिन गया था…… अपनी बीवी को किन लफ़्ज़ों में बता सकता था की मुझे उससे वो सुकून नहीं मिल रहा जो मुझे उस वक्त मिलता था…….ह्म्‍म्म्मम…..वो दिन भी भुलाया नहीं जा सकता जिसने इन हसीना लम्हो की नीहव र्खी थी……….

उस समय……….स्कूल का होनहार और हॅंडसम दिखने वाला लड़का था मैं और नाम था “होने” जोश-ख़रोश से भारी हुई जिंदगी में सिर्फ़ 2 दोस्तों( विक्की और सोनू ) के सहारे जिंदगी के मुझे लूट रहा था. मेरे खुशनुमा परिवार में मेरे जैसे हॅंडसम हूँकी के अलावा सुंदर सी हाउसवाइफ आंटी (एकता), कारक सुबह के मालिक अंकल (सुशील ) जो बैंक में जॉब करते थे और हसीना रूप की मालकिन और बहुत ही शरीफ सुबह वाली मेरी बड़ी काजीन (शिखा)थी जो कॉलेज में भी.कॉम फर्स्ट एअर में थी. में भी ए करने का मान उसने बनाया हुआ था और खूब प्रति थी वो(फिगर के बारे में ज्यादा आगे है). मैं मेथ्स में थोड़ा कंज़ूर था और 9त में काफी कम मार्क्स आए थे जिससे मेरी पेसेंटगे पर काफी फर्क प्रहा था. मुझे पेरेंट्स ज़ोर देते रहते थे की मेथ्स की ट्यूशन रख ले पर मैं टाल देता था क्योंकि कभी भी तूतिओन्स नहीं र्खी थी मैंने इसलिए थोड़ी हिचकिचाहट थी.

एक दिन क्लास में मेथ्स का टेस्ट हुआ और मेरे 10 में से 2 मार्क्स आए और टीचर ने कहा की पेरेंट्स के सिग्नेचर चाहिई. मैं डर गया था लेकिन कोई चारा ना दिखा तो मैं आंटी के पास गया और सिग्नेचर क्रवाए. आंटी से बहुत दाँत खाई और रिकवेस्ट की अंकल को म्ट बताना प्लीज़. आंटी ने फिर से कहा की ट्यूशन रख ले…….मैंने कहा नहीं आंटी प्ल्ज़्ज़…..आंटी ने तभी कहा की ऐसे तो तू फैल हो जाएगा……अगर ट्यूशन नहीं र्खनी है तो अपनी काजीन से प्रह लिया कर……वो भी तो सारी रात प्रति रहती है…..तू भी उसके साथ प्रह लिया कर और जहाँ कहीं भी प्राब्लम आएगी तो उससे पूछ लेना……मैं अभी कुछ कहता की आंटी ने कहा की बस अब तू आज से काजीन के साथ प्रेगा,,,,,,मैं उसको बता दूँगी.

शिखा के साथ मेरी बनती नहीं थी ज्यादा. क्योंकि आंटी-अंकल उसे अच्छा कहते रहते थे क्योंकि वो padati रहती थी सारा दिन और मैं video games या बाहर खेलता रहता था तो मुझे गालिया प्रति थी. चाहे मैं छोटा था लेकिन मैंने कभी भी उसे काजीन नहीं कहा था…मैं बस शिखा कहता था उससे. और वो भी मुझे प्यार से ज्यादा बात नहीं करती थी…..वैसे उसका सुबह अच्छा था. मैं सोचे जा रहा था की पता नहीं कैसे एडजस्ट कृुँगा. अब से पता नहीं रात को सो पाऊंगा अच्छे से या न्हीं……खैर शाम के बाद रात हुई और हम जब ने डिनर कर लिया और मैंने नाइट सूट पहना और बेड पर लेट गया. जैसे ही 9 बजे आंटी मेरे रूम में आए और कहा ” तू गया नहीं अब तक……चल शिखा के रूम में जा और उसके साथ स्टडी कर…..चल शाबाश…….मेरा गुड बॉय…..””मैं बहुत ही धीमी चाल से उठा और अपनी मेथ्स की बुक और एक फटी हुई नोटबुक और पेन के साथ शिखा के कमरे की और चल पर………

मैंने दरवाजा खटखटाया तो शिखा ने आवाज़ लगाई” आजा अंदर. खुला है”. मैंने धीरे से दूर ओपन किया तो……शिखा चश्मा पहने हुए अपने बेड पे पेट के बाल लेती हुई बुक्स को हाथों में पकड़े मेरी तरफ देख रही थी. खुली सी वाइट टी-शर्ट पहने हुए और लाइट ब्लू कलर्स के चेक वाली निकर पहने हुए मुझे कह रही थी” जल्दी आजा इधर और बैठ कर प्रह ले जो अपना प्रणा है”. मैं सुस्त सी चाल से बेड तक पहुँचा और शिखा की लेफ्ट साइड में बेड के कोने पर जाकर बैठ गया और अपनी बुक्स और नोटबुक्स खोलकर पेन हाथों में पकड़ लिया. 15 मिनट में मुझे नींद के झोंके आने ल्ग्गे. अभी 9.45 ही हुए थे की शिखा ने मेरी तरफ देखा और कहा” ओई……..क्या कर रहा है……..सोना नहीं है…..पर्णा है समझे…….चल इधर आ…..मैं देती हूँ तुझे सूम…..चुप करके सॉल्व कर”. मैंने बुक्स उन्हें पकड़ा दी और उन्होंने मुझे आल्जीब्रा के 2 सूम दिए जो मुझे बिलकुल नहीं आते थे. 5 मिनट के बाद शिखा ने मुझसे नोटबुक ली और देखा की सूम गलत सॉल्व किया है तो मुझे काश के एक छाँटा मारा…….”सतत्तटटटटटटटटटटटटटटटटतत्त”. मेरे रोंगटे खड़े हो गये और नींद गाइाब हो गयी .

शिखा- यह क्या किया है तूने……..तुझे कुछ आता भी है के नहीं…….मेरा टाइम भी बर्बाद करने आ गया तू………
मैं- शिखा मैं खुद थोड़ी आया आंटी लेकर आए…..आंटी ने कहा था……..तुम मुझे बिना बात के मर रहे हो…….
शिखा- ओई चुप कर.,…….जुबान ना लरहा…….सूम तो तुझे आते नहीं और बात करता है…….एक ईज़ी सूम देती हूँ……..वो कर चुपचाप………
मैं- मुझे आता नहीं यह अच्छी तरह चेप्टर….समजा दो मुझे ………….
शिखा- अच्छा…कुछ नहीं आता………मैं क्या तुम्हारी टीचर हूँ जो जब करवायु……….तभी कहरी हूँ ना खेला कर प्रह लिया कर मेरी तरह……
मैं- बस समजा दो मुझे फिर मैं जब सूम सॉल्व करके दिखता हूँ

शिखा ने फिर मुझे एक सूम समजना शुरू किया लेकिन आधा घंटा हो गया मुझे उसका “आ” भी समाज में नहीं आया………फिर से शिखा ने मुझे काश के छाँटा मारा जिससे मेरी अनहों में आँसू आ गये……..
शिखा- ओई तू तो बेवक्ुऊफ़ है. स्टुपिड…….कुछ नहीं आता तुझे…….अभी तेरी शिकायत अंकल से करती हूँ……
मैं- नहीं………प्ल्ज़्ज़,,,,,मत करना………..प्लज़्ज़्ज़्ज़ शिखा म्ट करना………..
शिखा- क्यों ना करूं……..तभी तू बाज़ आएगा आदतों से……..पापा……ज़रा बात सुनिए………

अभी शिखा बेड से उतरी ही थी की मैंने उसका हाथ पकड़ लिया लेकिन उसने मुझे खींच लिया……….मैं फिर उसके पैर पकड़ लिए और कहा प्ल्ज़्ज़ अंकल को मत बताना…….वो मुझे बहुत मारेंगे……..तभी अचानक शिखा रुक गयी. और मुझे अपने पैरों से लिपटा देखकर अजीब सी हंसी हँसने लगी.

मैं- प्ल्ज़्ज़ शिखा ………. अंकल को मत बताना………
शिखा- अच्छा एक शर्त में नहीं बतायूंगी अगर तू मेरा काम करोगे…….
मैं- मैं करेगा शिखा…….बस अंकल को मत बताना………..
शिखा- देख उस काम के बारे में किसी को मत बताना और हाँ अगर तू वो काम करेगा तो मैं तुझे तंग नहीं करती और आंटी-अंकल से तुझे बच्चा लिया करूंगी और तुझे वीडियो गेम खेलने के लिए बहुत वक्त दूँगी…..
मैं- हाँ……..शिखा मैं जब कारूँगा…….बायें गोद……आंटी-अंकल की कसम …….
शिखा- वेरी गुड……..तो फिर आजा बेड पे………फिर बताती हूँ……….