देवर और ननद के साथ

इधर तेज Antarvasna रफ्तार से धक्के दे कर परेश ज्यादा. थोड़ी देर तक वो मूज़ पर पड़ा रहा और बाद में उतरा. उस का लंड अभी भी टॅटर था. में माधवी के पास गयी. गंगा को हटा कर मैंने माधवी को गोद में लिया. में पलंग की धार पर बैठी और मैंने माधवी की जांघें चौड़ी पकड़ रक्खी. उस की गीली गीली गांड खुली हुई.

माधवी सोलह साल की थी लेकिन उस की गांड मेरी गांड जैसी बड़ी थी. ऊंची मन्स पर और बारे होंठ के बाहरी हिस्से पर काले घूंघरले झाट थे. बारे होंठ मोटे थे, बारे संतरे की फाड़ जैसे और एक दूजे से सटे हुए. बीच की दरार चार इंच लंबी होगी. कोलाइटिस एक इंच लंबी और मोटी थी. उस वक्त वो कड़ी हुई थी और बारे होंठ के अगले कोने में से बाहर निकल आई थी. गंगा फर्श पर बैठ गये. दोनों हाथ के अंगूठे से उस ने गांड के बारे होंठ चौड़े किए और गांड खोली. अंदर का कोमल गुलाबी हिस्सा नज़र अंदाज हुआ. छोटे होंठ पतले थे लेकिन सूजे हुए थे. चुत का मुँह सिकुड़ा हुआ था और कम रस से गीला था. गंगा की उंगली जब कोलाइटिस पर लगी तब माधवी कूद पड़ी. मैंने पीछे से उस के स्तन थाम लिए और निपल्स मसल डाली. गंगा अब गांड चाटने लगे. गांड के होंठ चौड़े पकड़े हुए उसने कोलाइटिस को जीभ से रगड़ा. साथ साथ जा सके इतनी एक उंगली चुत में डाल कर अंदर बाहर करने लगे. माधवी को ऑर्गॅज़म होने में देर ना लगी. उस का सारा ब्दान अकड़ गया, रोएँ खड़े हो गये, आँखें मिच गागयइ और मुँहसे और चुत से पानी निकल पड़ा. हलकी सी कंपन बदन में फैल गयी. ऑर्गॅज़म बीस सेकेंड चला. माधवी बेहोश सी हो गयी.

मैंने उसे पलंग पर सुलाया. थोड़ी देर बाद वो होश में आई. वो बोली : भाभी, क्या हो गया मुझे ? गंगाधर : बिटिया, जो हुआ इसे अँग्रेज़ी में ऑर्गॅज़म कहते हे. मजा आया की नहीं ? माधवी : बहुत मजा आया, अभी भी आ रहा है. नीचे पीकी में फट फट हो रहा है. क्या तुमने मुझे चोदा ? गंगाधर : ना, चोदा नहीं है, तू अभी कुंवारी ही हो. अब में कुच्छ नहीं सुननाए चाहता. तुम दोनों चुप चाप सो जाओ और आराम करो. परेश : आप क्या करेंगे ? में : हमारी बाकी रही चुदाई पूरी करेंगे. परेश : में देखूँगा.ये मुझे सोने नहीं देगा. परेश ने अपना लंड दिखाया जो वाकई पूरा टन गया था. माधवी लेटिराही और करवट बदल कर हमें देख ने लगी.

में फर्श पर चित लेट गयी. गंगा ने मेरी जंघों इतनी उठाई की मेरे घुटने मेरे कानों से लग गये. घच्छ सा एक धक्के से उस ने पूरा लंड चुत में घुसेड़ दिया. हम दोनों काफी उत्तेजित हो गये थे. घचा घच्छ, घचा घच्छ धक्के से वो चोदने लगे. चुत सिकोड़ कर में लंड को भिँसती रही. बीस पचीस टल्ले बाद गंगा उतरे और झट पटा मुझे चार पाँव कर दी, घोड़ी की तरह. वो पीछे से चड़े. जैसा उस ने लंड चुत में डाला की मुझे ऑर्गॅज़म हो गया. वो लेकिन रुके नहीं, धक्के मरते रहे. दस बारह धक्के के बाद मेरी कमर पकड़ कर उस ने लंड को चुत की गहराई में घुसेड़ दिया और पुच्छ, पुच्छ पिचकारियाँ लगा कर ज़दे. मुझे दूसरा ऑर्गॅज़म हुआ. मेरी योनि उन के वीर्य से चालक गयी. में फर्श पर चपत हो गयी. थोड़ी देर तक हम पड़े रहे, बाद में जा कर सफाई कर आए.

माधवी बैठ गई थी वो बोली : भाभी, परेश ने मेरी पीकी देख ली पर अपना लंड देखने नहीं देता. गंगाधर : कोई बात नहीं,बेटा, मेरा देख ले. कैलाश, तू ही दिखा. गंगा लेट गये. एक ओर में बैठी दूससरी ओर माधवी. परेश बगल में खड़ा दिखाने लगा.

एक हाथ में लौंडा पकड़ कर मैंने कहा :ये है दंडी, ये है मट्ठा. यूँ तो मट्ठा टोपी से धक्का रहता है. चुत में पैयसते वक्त टोपी ऊपर चढ़ जाती है और नंगा मट्ठा चुत की दीवारों साथ घिस पता है. ये जगह जहाँ टोपी मत्थे से चिपकी हुई है उस को फ्रेनुं बोलते हे. लड़की की कोलाइटिस की तरह फ्रेनुं भी बहुत सेन्सिटिव है. ये है लोडे का मुँह जहाँ से पेशाब और वीर्य निकल पता है.

लोडे की ओपी ऊपर नीचे कर के में आगे बोली : मूठ मारते वक्त टोपी से कम लेते हे. लंड मुँह में भी लिया जाता है. देख, ऐसे?.. मैंने लोडे का मट्ठा मुँह में लिया और चूसा. तुरंत वो अकड़ ने लगा. माधवी : में पकादून ? गंगाधर : जरूर पकड़ो. दिल चाहे तो मुँह में भी ले सकती हो. आधा ताना हुआ लौंडा माधवी ने हाथ में लिया की वो पूरा टन गया. उस की अकड़ाई देख माधवी को हंसी आ गयी. वो बोली : मेरे हाथ में गुदगुदी होती है. मैंने लंड मुँह से निकाला और कहा : मुँह में ले, मजा आएगा. सर झुका कर डरते डरते माधवी ने लंड मुँह में लिया. मैंने कहा : कुच्छ कराना नहीं, जीभ और ताल्लू के बीच मट्ठा दबाए रक्ख. जब वो तुमक लगाए तब चूसना शुरू कर देना. माधवी स्थिर हो गयी. परेश ये सब देख रहा था और मूठ मर रहा था. वो बोला : भाभी, में माधो की चुचियाँ पकादून ? मुझे बहुत अच्छी लगती है. गंगाधर : हलके हाथ से पकड़ और धीरे से सहला, दाबना मत. स्तन अभी कच्चे हे, दबाने से दर्द होगा. माधवी गंगा का लंड म्न्ह में लिए आगे ज़ुकी थी. परेश उस के पीछे खड़ा हो गया. हथेलिओं में दोनों स्तन भर के सहलाने लगा. वो बोला : भाभी, माधो के स्तन कड़े हे और निपल्स भी छोटी छोटी है. तेरे स्तन इन से बारे हे और निपल्स भी बड़ी हे. में बगल में खड़ी थी. मेरा एक हाथ परेश का लंड पकड़े मूठ मर रहा था. दूसरा हाथ माधवी की कोलाइटिस से खेल रहा था. कोलाइटिस के स्पंदन से मुझे पता चल की माधवी बहुत उत्तेजित हो गयी थी और दूसरे ऑर्गॅज़म के लिए तैयार थी अचानक मुँह से लंड निकल कर वो खड़ी हो गयी. अपने हाथ से गांड हूँ हुई बोली : बारे भैया, चोद डालो मुझे, वारना में मर जाऊंगी. गंगा : पगली, तू अभी कम उमर की हो. माधवी : देखिए, में सोलह साल की हूँ लेकिन मेरी चुत पूरी विकसित है और लंड लेने काबिल है. भाभी, तुम ने पहली बार चुड़वाया तब तुम भी सोलह साल की ही थी ना ? गंगा : फिर भी, तू मेरी छोटी बहन हो माधवी : सही, लेकिन आप चाहते हे की में किसी ओर के पास जाऊं और चुदओन ? गंगा : बेटे, चाहे कुच्छ कहो, तेरे मैं बाप क्या कहेंगे हमें ? माधवी ने गुस्से में पाँव पटाके और बोली : अच्छा, तो में चलती हूँ घर को. परेश, चल. घर जा के तू मुझे चोद लेना. गंगा : अरे पगली, ज़रा सोच विचार कर आगे चल. मुँह लटकाए वो बोली : भाभी ने परेश को चोदने दिया क्यों की वो लड़का है. मेरा क्या कसूर ? मुझसे अब रहा नहीं जाता. परेश ना बोलेगा तो किसी नौकर से चुदाया लूँगी. माधवी रोने लगी. मैंने उसे शांत किया और कहा : घर जाने की जरूरत नहीं है इतनी रात को. तेरे भैया तुम्हें जरूर छोड़ेंगे

इतने में फिर से दरवाजा खिटकिटने की आवाज़ आई. फटा फट ताश खेलते हो ऐसा माहौल बना दिया. मैंने जा कर दरवाजा खोला. सामने चाची खड़ी थी. अंदर आ कर उस ने दरवाजा बंद किया और बोल : सब ठीक तो है ना ? में : वो आ गये हे. उन दोनों ने काफी कुच्छ देख लिया है. एक मुसीबत है लेकिन. चाची : क्या मुसीबत है ? में : परेश से तो वो?वो?करवा लिया, समाज गयी ना ? अब माधवी भी माँग रही है. चाची : तो परेशानी किस बात की है ? तुझे तो मलून होगा की गंगाधर झिल्ली तोड़ने में कैसा है. में : उन की हुशियारी की बात ही ना करे. कौन जाने कहाँ से सिख आए है तकनीक. चाची : बस तो में चलती हूँ. गंगाधर से कहना की सब्र से कम ले.

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