देवर और ननद के साथ

में : माधु, Antarvasna ये लंड की टोपी चढ़ सकती है और मट्ठा खुला किया जा सकता है. देख. मैंने टोपी चड़ाई तो लंड से समेग्मा की बदबू आई. मैंने कहा : परेश, नहाते समय उस को साफ करते नहीं हो ? ऐसा गंदा लंड से कौन चुड़वाएगी ? जा, साफ कर आ. परेश बाथरूम में गया.

में : माधवी, पसंद आया परेश का लंड ? अच्छा है ना ? माधवी : में उसे छू सकती हूँ ? में : क्यों नहीं ? लेकिन चुदाया नहीं सकोगी.. माधवी : क्यों नहीं ? मेरे पास गांड जो है ? में : सही,लेकिन भाई बहन आपस में चुदाई नहीं करते.

इतने में परेश आ गया. ठंडा पानी से ढोने से लंड ज़रा नर्म पड़ा था. मैंने परेश को फिर लेता दिया. लंड पकड़ कर टोपी चड़ा दी. बड़ा मशरूम जैसा चिकना मट्ठा खुल गया. मैंने हलकाए हाथ से मूठ मारी तो लंड फिर से टन गया. मैंने पूछा : मजा आता है ना ? परेश : खूब मजा आता है भाभी, रुकना मत. मैंने होल होल मूठ मरती रही और बोली : माधवी, कुरती खोल और स्तन दिखा. माधवी खूब शरमाई, पलट कर खड़ी हो गयी. उस ने कुरती के हुक खोल दिए लेकिन खुले पदखों से स्तन ढके रख सामने हुई. लंड छोड मैंने माधवी के हाथ हटाए और कुरती उतार दी. उस ने ब्रा पहनी नहीं थी, जवांन स्तन खुले हुए.

उमर के हिसाब से माधवी के स्तन काफी बारे थे, संपूर्ण गोल और कड़े. पतली नाज़ुक चमड़ी के नीचे खून की नीली नसें दिखाई दे रही थी. एक इंच की अरेवला ज़रा सी उपासी आई थी. बीच में किशमिश के दाने जैसी छोटी सी निप्पल थी. एग्ज़ाइट्मेंट से उस वक्त निप्पल कड़ी हो गई थी जी से स्तन नोकदार लगता था. स्तन देख कर परेश का लंड ने त्माका लिया और कुच्छ ज्यादा टन गया. वो बोला : में छू सकता हूँ ? में : ना, बहन के स्तन भाई नहीं छूटा. परेश : भाभी, तू तो मेरी बहन नहीं हो. तेरे स्तन दिखा और छू ने दे.

में भी चाहती थी की कोई मेरी चुचियाँ दबाए और मसले. मैंने चोली उतार दी. वो दोनों देखते ही रही गये. मेरे स्तन भी सुंदर हे, लेकिन शादी के बाद ज़रा ज़ुक गये हे. मेरी अरेवला बड़ी है पर निपल्स अभी छोटी है. मेरी निपल्स बहुत सेन्सिटिव है. गंगाधर उसे छूते है की मेरी गांड पानी बहाना शुरू कर देती है. चोदते हुए वो जब मुँह में लिए चूसते हे तब मुझे झड़ने में देर नहीं लगती.

बिना कुच्छ कहे परेश ने स्तन पर हाथ फिराया. तुरने मेरी निप्पल कड़ी हो गयी. उस ने हथेली से निप्पल को रगड़ा. स्तन के नीचे हाथ रख कर उठाया जैसे वजन नापता हो. मेरे बदन में ज़ूरज़ूती फैल गयी. उस के हाथ पर हाथ रख कर मैंने मेरे स्तन दबाए. आगे सीखना ना पड़ा, परेश ने बेदर्दी से स्तन मसल डाले. मेरी गांड पानी बहाने लगी.

मेरे दिमाग में चुदवाने का ख्याल आया की किसी ने दरवाजा खिटकहिटाया. फटा फट कपड़े पहना कर उन दोनों को सुला दिए और मैंने जा कर दरवाजा खोला. सामने खड़े थे गंगाधर. में : आप ? अभी कैसे आ सके ? गंगा : एक गाड़ी आ रही थी, जगह मिल गयी. में : अच्छा हुआ, चलिए, खाना कहा लीजिए.

मुझे आगोश में लेते हुए वो बोले : खाना बाद में खाएँगे पहले ज़रा प्यार कर लें. में कुच्छ बोलूं इस से फले उन्होंने मेरे होठों से हॉट चिपका दिए. कपड़े उतरे बिना मुझे पलंग पर पटक दी. किस करते करते घाघारी ऊपर उठाई और निक्कर खींच उतरी. में उन को कभी चुदाई की ना नहीं कहती हूँ. मैंने जांघें पसरी और वो ऊपर आ गये. उन का लंड खड़ा ही था. घच्छ से चुत में घुसेड़ दिया. मुझे बोलने का मौका ही ना दिया, घचा घच्छ, घचा घच्छ ज़ोर ज़ोर से चोदने लगे. पंद्रह बीस धक्के बाद वो धीरे पड़े और लंबे और गहरे धक्के से चोदने लगे. से..आर..आर..आर..र्ररर लंड अंदर, से?आर?आर?आर.. बाहर. थोड़ी देर चुदाई का मजा ले कर में बोली : घर में मेहमान हे. चुदाई रुक गई. वो बोले : मेहमान ? कौन मेहमान ?

मैंने परेश और माधवी के बारे में बताया और कहा : वो शायद जागते होंगे.

घबडा कर गणगा उतार ने लगे. मैंने रोक दिया : उन दोनों को चुदाई दिखानी जरूरी है. में उन को बुला लेती हूँ. गंगा : अरे, वो तो अभी बच्चें हे, चाचा, चाची क्या कहेंगे ? में : तुम फिक्र ना करो. दो दिन पहले चाची ने मुझसे कहा था की उन दोनों को चुदाई के बारे में शिख्सा दम. गंगा : क्यों ? में : बात ऐसी हुई की चाची के मायके में एक नयी दुल्हन को उस के पति ने पहली रात ऐसे चोदा की उस की चुत फट गयी. लड़की को इस्पिटल ले गये लेकिन बच्चा ना सके. खून बह जाने से लड़की मर गयी. ये सुन कर चाची घबडा गयी है की कहीं माधवी को ऐसा ना हो. इस लिए वो चाहती है की हम उन्हें चुदाई की सही शिक्षा दे. जरूरत लगे तो उस की झिल्ली भी तोड़ दे. वैसे भी वो दोनों कुच्छ नहीं जानते. गंगा : बुला लंड उन को ?

परेश और ंधवी को बुलाने की जरूरत ना थी. वो दरवाजे में खड़े थे. गंगा को मैंने उतार ने ना दिया. उन का लंड ज़रा नर्म पड़ा था, मैंने चुत सिकोड़ कर दबाया तो फिर कड़ा हो गया. वो चोदने लगे. चुदाई के धक्के खाते खाते मैंने कहा : आंटी ..मां?माधवी?त?तुम?.ऊओ, सीईइ, तुम और पा?पा?परेश यहाँ..आ?आ?कर, गंगा ज़रा धी..धीरे?उउउइई ?तुम देखो. वो पलंग के पास आ गये. गंगा हाथों के बाल ऊपर उठे जिस से हमारे पेट बीच से देखा जा सके की लंड कैसे चुत में आता जाता है. माधवी खड़े खड़े एक हाथ से अपना स्तन मसल रही थी, दूसरा गांड पर लगा हुआ था. परेश होल होल मूठ मर रहा था. गंगा मेरे कोन में बोले : देखा परेश का लंड ? ऐसा कर, तू उन से चुदाया ले. में माधवी साथ खेलता हूँ. में ; माधवी को चोदना नहीं. गंगा : ना, ना. चुत में लंड डाले बिना स्वाद चाखौँगा.

गंगा उतरे. उन का आठ इंच लंबा गीला लंड देख माधवी शरमाई. उस ने मुस्कुराते हुए मुँह फेयर लिया. परेश का लंड पकड़ कर मैंने पूछा : पार्ऋेश, चोदना है ना ?

बिन बोले वो मेरी ज्ञगहें बीच आ गया. लंड पकड़ कर धक्के मर ने लगा. वो इतना जल्दी में था की लंड गांड पर इधर उधर तकर्या लेकिन उसे चुत का मुँह ना मिला. बाहर ही गांड पर झड़ जाय उस से पहले मैंने लंड पकड़ कर चुत पर धार दिया. एक ही धक्के से पूरा लंड चुत में उतार गया. आगे सीखने की जरूरत ना रही/ ढाना धन, घचा घच्छ धक्के से वो मुझे चोदने लगा.

उधर गंगा माधवी लो गोद में लिए बैठे थे. माधवी ने अपना मुँह उस के सीने में छुपा दिया था. गंगा का एक हाथ स्तन सहला रहा था और दूसरा निक्कर में घुसा हुआ था. बार बार माधवी छटपटा जाती थी आर गंगा का निक्कर वाला हाथ पकड़ लेतीति. मेरे ख्याल से गंगा उस की कोलाइटिस छेद रहे थे. इतानाए में गंगा ने माधवी का हाथ पकड़ कर लंड पर रख दिया. पहले तो ज़टके से माधवी ने हाथ हटा लिया लेकिन जब गंगा ने फिर पकड़ाया तब मात्र उंगलियों से छुआ, पकड़ा नहीं. गंगा बोले : माधो, मुट्ठी में पकड़, मीठा लगेगा. कुच्छ आनाकानी के बाद माधवी की मुट्ठी ने लंड पकड़ लिया. गंगा के दिखाने मुताबिक वो होल होल मूठ मर ने लगी.

माधवी का चहरा उठा कर गंगा ने मुँह पर चुंबन किया. में देख सकती त की गंगा ने अपनी जीभ से माधवी के होंठ चाहते ओट खोले. मैंने परेश को ये नज़ारा दिखाया. अपनी बहन के स्तन पर गंगा का हाथ और बहन के हाथ में गंगा का लंड देख परेर्श की उत्तेजना तरफ गयी. घच घच्छ, घचक घच्छ तेज दाहक्के से चोदने लगा. अचानक में झड़ गयी.

गंगाधर का कम मषकिल था लेकिन वो सब्र से कम लेते थे. माधवी अब शरमाये बिना लंड पकड़े मूठ मर रही त्ति. उस के मुँह से सिसकियां निकल पड़ती थी ओए नितंब डोलने लगे थे.

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