बदसूरत आदमी – उसका है इंतेज़ार

मैं दिल थामे 15 मिनट तक उसे देखता रहा. इस डर्मायाण मैंने एक नयी बात देखी वो बार बार अपनी गर्दन घूमकर पीछे देख रही थी, जैसे उसे किसी का इंतजार हो…

“लेकिन किसका ?” मेरा दिल जोरों से धड़का. कहीं उसका कोई प्रेमी तो नहीं, लेकिन इतने दीनों में मैंने कभी भी उसे किसी लड़के के साथ नहीं देखा. तो फिर ये किसका इंतजार कर रही है ?

पिछले 1 महीने में उस लड़की के अतिरिक्त मैंने किसी को भी इधर आते नहीं देखा. कहीं ऐसा तो नहीं ये मेरा ही इंतजार कर रही हो. जो भी हो मुझे उसके पास जाना ही चाहिए और आज उससे अपने दिल की बात कह देनी चाहिए.

मैं साहस करके झाड़ियों से निकाला और उसकी तरफ कदम बढ़ाया. तभी मुझे ठिठक कर रुक जाना पड़ा. मुझे पास ही किसी बाइक की आवाज़ सुनाई दी थी. साथ ही उसे लड़की को खुशी से खड़ा होते हुए भी देखा.

मैंने अपने बढ़ते कदमों को वापस झाड़ियों की और खींचा.

मैंने देखा…एक बाइक बिलकुल झरने के पास आकर रुकी.

आने वाला एक बेहद खूबसूरत नौजवान लड़का था. उसकी आगे 20 से अधिक नहीं होगी.

वो बाइक से उतरा और उस लड़की की तरफ तरफ गया. वो लड़की भी उसकी तरफ लपकी और मेरे देखते ही देखते वो उस लड़के की बाहों में समा गयी.

अगले ही पल मेरे सारे ख्वाब मेरे सारे अरमान बिखरते चले गये.

जिसकी मोहब्बत में मैंने कई रातें जगह कर गुज़री थी, वो किसी और की मोहब्बत थी.

मुझे अपनी किस्मत पर रोना आ गया. दिल में एक हुक सी उठी और मेरी आँखों से गर्म आँसू बह निकले.

मैंने भीगी पलकों से उस लड़के को देखा. वो बेहद खूबसूरत युवा लड़का था. वो अगर सूरज था तो मैं उसके सामने दिया भी नहीं था. मुझे उसकी किस्मत से जलन महसूस हुआ. वो दोनों हंस हंस कर बातें कर रहे थे, किंतु मेरे सीने में साँप लौट रहा था.

मैं और अधिक नहीं देख पाया. अब मेरा वहाँ रुकने का कोई कारण नहीं था. मैं पलटा और अपनी बाइक की तरफ तरफ गया.

तभी मुझे ठिठक कर रुक जाना पड़ा.

मुझे इसी और 2 बाइक आते हुए दिखाई दिए. दोनों बाइक पर दो दो लड़के बैठे हुए थे उन सबकी आयु भी 19 से 20 के आस-पास होगी.

उनकी बाइक्स सीधे पहले वाले लड़के के बाइक के पास जाकर रुकी. वो चारों लड़के फुर्ती से उतरे.

मैं उत्सुकतावास देखता रहा.

उनकी शक़ले बता रही थी की वो अच्छे लड़के नहीं हैं. मुझे किसी अनहोनी की आशंका हुई. मैं अपने स्थान पर खड़े खड़े देखने लगा.

उन चारों को देखकर अकेले आए लड़के का चेहरा पीला पड़ गया.

वो लड़की ना समझने वाले भाव से उन चारों को देख रही थी.

सहसा चारों लड़कों में से एक लड़का लपक कर पहले आए लड़के तक पहुँचा और उसकी कॉलर पकड़कर चीखा. “क्यों भी साले क्या सोचकर बाइक ठोका था, की हम तुम्हें ढूँढ नहीं पाएँगे, और तुम्हें छोड देंगे.”

उसने उसके कॉलर छोडकर उसके पेट में एक जोरदार घुसा मारा.

मुझे मामला समझते देर नहीं लगी.

मैं उनकी तरफ लपका. मैं जैसे ही उनके करीब पहुँचा, उस लड़की की नज़र मुझसे टकराई…उसका सामना होते ही मैं ठिठक कर रुक गया. उस लड़की के चेहरे से हवाईयाँ उड़ रही थी.

अचानक मेरा ध्यान एक जोरदार चीख से टूटा. मैंने उन लड़कों के तरफ देखा. वो चारों बदमाश लड़के उस लड़के को ज़मीन पर पटक कर उसपर टूट पड़े थे.

मर खाने वाला लड़का मेरे खुशियों का लुटेरा था, लेकिन फिर भी उसे बचना मेरा फर्ज था.

मैंने लड़की के तरफ देखा. वो असहाय भाव से मेरे तरफ ही देख रखी थी. वो मुझसे मदद की उम्मीद कर रही थी.

मैं तेजी से उन लड़कों के पास गया. मैंने 2 लड़कों को गर्दन से पकड़ा और दूर उछल दिया. बाकी 2 को अपने लात की जोर्डाए ठोकर से दूर कर दिया.

अभी मैं झुककर उस लड़के को उठा ही रहा था की, पीछे से 2 लड़कों ने मुझपर हमला किया. मैं संभाल ना सका और मुँह के बाल ज़मीन पर गिरा. वो दोनों फुर्ती का परिचय देते ही मुझपर चढ़ गये.

मैंने लेते लेते ही दोनों को लात की ठोकर से दूर उछल दिया. मैं तेजी से उठा. तभी दूसरी और से एक लड़का मेरी और लपका उसके हाथ में एक बड़ा सा चाकू था. लेकिन इससे पहले की वो मुझपर वार करता मैंने फुर्ती से एक लात उसकी छाती पर मारा. वो उछल कर पीछे गिरा. मैं पलटा और तीसरे की तरफ लपका लेकिन मैं उस तक पहुँचता उससे पहले उसके 2 और साथी आ गये. मैं उन दोनों पर टूट पड़ा. वो अधमरे से हो गये.

मैं उनको छोड चौथे की तरफ घुमा तो देखा वो अपना खंजर लिए अकेले आए लड़के की तरफ तरफ रहा था.
बदसूरत आदमी – उसका है इंतजार – Part-4

मैं फुर्ती से उसकी और बढ़ा. तभी “ढायं…” एक गोली चली और वो अपनी छाती पकड़कर चीखा और अगले ही पल ज़मीन पर गिर कर शांत हो गया.

गोली लड़की ने चलाई थी. उसके हाथों में मेरा सर्विस रिवाल्वर था.. वो भय से थरथर काँप रही थी.

उठापटक में मेरा रिवाल्वर पता नहीं कब गिर गया था. जिसे उस लड़की ने उठा लिया था. और अब उसने अपने प्रेमी की जान बचाने के लिए उस लड़के को अपना निशाना बना चुकी थी.

गोली की आवाज़ सुन मरने वाले के बाकी साथी पालक झपकते ही गायब हो चुके थे.

“ये तुमने क्या किया साना ?” उसका प्रेमी बोला.

उसके मुँह से साना सुनकर मैं चौंका. आज जब सरपंच अपनी बेटी की शादी का कार्ड देने आए थे उसमें उनकी बेटी का नाम भी साना ही लिखा था.

“मैं उसे नहीं मार्टी तो वो तुम्हें मर देता” साना रोती हुई बोली.

“अरे तो उसके टांगों में गोली मारती…जान से क्यों मारा.” वो चीख कर बोला_”साना तुमसे एक खून हो गया है अब मेरी बात ध्यान से सुनो, तुम पुलिस या और किसी को नहीं बनाएगी की मैं यहाँ आया था. ये खून तुमने किया है….इसमें मेरा नाम नहीं आना चाहिए….अब मैं जा रहा हूँ, तुम्हें अकेले आना होगा” वो बोला और बाइक की तरफ तरफ गया.

साना उसकी तरफ लपकी…”प्लीज़ क़ासिम मुझे अकेले छोडकर मत जाओ…मैं उसे जान से नहीं मारना चाहती थी….मैं तुम्हें बचना चाहती थी….प्लीज़ क़ासिम मुझे अपने साथ ले चलो”

साना बहुत घबरा गयी थी, वो उसके आगे रोने लगी. लेकिन क़ासिम नहीं रुका. और ना उसे साथ ले गया. वो पालक झपकते ही बाइक में बैठकर वहाँ से गायब हो गया. वो पलटी और मेरी तरफ देखने लगी.

“मैंने ये खून जान बूझकर नहीं किया है” वो मेरे सामने गिड़गिड़ाई.

“मैं जानता हूँ….और तुम्हें घबराने की जरूरत नहीं है. वो रिवाल्वर मेरा है. पुलिस को लगेगा की खून मैंने किया है. मुझे रिवाल्वर दो और यहाँ से जितना जल्दी हो सके तुम भाग जाओ” मैंने उसका खून अपने सर लिया.

साना आश्चर्य से मुझे देखने लगी. फिर अपने काप्ते हाथ मेरी और बढ़ा दिए.

“यहाँ जो कुच्छ भी हुआ है इसका जिकर तुम किसी से नहीं करोगी. समझ लो तुम यहाँ आई ही ना हो” मैंने उसे मशवरा दिया.

वो सहमति में सर हिलाई और जाने लगी.

“रुको….” मैंने उसे आवाज़ दिया.”एक बात कहनी है तुमसे. शायद मैं तुमसे फिर कभी मिल ना सकूँगा.” वो हैरत से मुझे देखती रही.

“तुमने एक दिन पूछा था क्या मैं तुमसे प्यार करता हूँ ? तो सुनो… हाँ मैं तुमसे प्यार करता हूँ…बहुत प्यार करता हूँ. जब तुम्हें पहली बार झरने के किनारे बैठा देखा था उसी पल से लेकर आज तक सिर्फ़ तुम्हारा नाम लेकर जी रहा हूँ. और यही बात कहने के लिए पिछले 15 दीनों से यहाँ आता रहा हूँ, और आज मैं तुम्हें बच्चा भी इसलिए रहा हूँ…. क्योंकि मैं तुम्हें जेल जाते नहीं देख सकता…..! अब तुम जाओ इससे पहले की कोई तुम्हें देख ले”

मैंने कहा और उसकी आँखें हैरत से फैलती चली गयी. फिर अचानक वो मुड़ी और तेज कदमों से भागती हुई मेरी नजरों से ओझल हो गयी”

मैंने अपनी बात पूरी की और जालोर को देखा. उसकी आँखें नाम थी. वो उठा और मुझे अपने गले से लगा लिया.

“यू अरे आ ग्रेट मान” जालोर बोला.

2 दिन बाद मैं जेल से बाहर निकला. जैसे ही मैं बाहर निकला. सामने एक 28 से 29 साल की औरत खड़ी दिखाई दी. उसके बदन पर सफेद सलवार कमीज़ था. मैंने ध्यान से देखा. वो साना थी, अचानक उसके कदम उठे और वो मेरे पास आ गयी. मैं आश्चर्य में डूबा उसे देखता रहा.

“कैसे हैं आप…?” वो बोली.

मैं कुच्छ ना बोला. बस उसे देखता रहा, वो आज भी उतनी ही सुंदर थी. मैं एक बार फिर उसकी सुंदरता में खोता चला गया.

“मुझसे शादी करेंगे आप…..?” वो फिर बोली.

उसकी आवाज़ सुनकर अपने वर्तमान में लौटा. साथ ही चौका…वो अभी तक कुँवारी थी जब की मुझे उसकी शादी का कार्ड भी मिला था.

वो 10 साल तक मुझ जैसे बदसूरत आदमी का इंतजार करती रही थी. मेरी आँखें खुशी से बरस पड़े. मैं कुच्छ ना बोला बस तेजी से आगे बढ़ा और उससे लिपट गया.

उसका है इंतजार

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