स्नेहा मेरी आंटी की लड़की

मुझे समझ Antarvasna में नहीं आ रहा था की ये ड्रिंक का असर है…या पॉर्न मूवी देखने का…या फिर अब मैं ये सब करना चाहता हूँ…
मैंने देखा माथुर Antarvasna अंकल की तरफ वो पूरे जोश में दिख रहे थे और उनकी बातों से ऐसा लग रहा था की वो मेरी स्नेहा को चोदना चाहते है….लेकिन दोनों के बीच आगे का अंतर भी काफी था स्नेहा मानेगी लासे…और इतना बड़ा लंड स्नेहा कैसे अपने चुत में ले सकती है…वैसे पॉर्न आक्ट्रेस ने तो ले लिया अंदर आसानी से लेकिन वो प्रोफेशनल है…मेरी स्नेहा तो अभी तक चुदी भी नहीं है…
मैं : अंकल मैं कैसे आपकी मदद करूं…
माथुर अंकल : तुम तैयार हो ना मदद करने के लिए…
मैं : हां मैं तैयरर हूँ…
माथुर अंकल : तब ठीक है….मेरे पास बहू से प्लान है….लेकिन क्या तुम भी चोदना चाहते हो अपनी स्नेहा को…
मैं : वो कैसे पॉसिबल है अंकल ..मेरी स्नेहा मुझसे कैसे चुदवायेगी…
माथुर अंकल : तुम आम खाओ..गुठलियान मत जीनो…
माथुर अंकल ने मुझसे कहना शुरू किया अपना प्लान…जब उन्होंने अपना पूरा प्लान मुझे बताया मैं दंग रही गया….
मैं : लेकिन अंकल एज़्म आपके फासने का डर है…
माथुर अंकल : कुच्छ नहीं होगा चिंता मत कर…बस एक कम कर ये रसगुल्ला तू कहा ले क्योंकि अगर तुम्हारे मुंह से स्मेल आएगा तो स्नेहा को सक होगा…
मैंने वो गुलाब जामुन कहा लिया और मान ही मान सोचने लगा की कैसे ये सब होगा.लेकिन मुझे अंकल के कॉन्फिडेन्स पे भरोसा था. आज क्या कुच्छ हो रहा था मेरे साथ…अब मैं समझा नशे में लोग क्यों बहक जाते है…आज मेरे जैसा लड़का अपनी स्नेहा को चोदने का प्लान बना रहा था या यू कहें की अपनी प्यारी स्नेहा की सेट्टिंग कर रहा था.
मैं : तो ठीक है अंकल मैं चलता हूँ अब…
माथुर अंकल : ओके …गुड नाइट.
वो मुझे चोदने दरवाजे तक भी नहीं आए और कुच्छ ढूँढ रहे थे और मैं मान में प्लान के बारे में सोचते हुए अपने फ्लैट में आ गया…
जैसे ही मैं अपने फ्लैट में आया..देखा स्नेहा के रूम का लाइट जल रहा था. मैंने अंदर जा के देखा तो स्नेहा बेड पे लेट के लॅपटॉप पे कम कर रही थी.
मैं : स्नेहा सोई नहीं अभी तक…
स्नेहा पलटी…जिससे उसके शर्ट से उसके बूब्स के कुच्छ पार्ट मेरे आँखों के सामने थे…
स्नेहा : हां…सो जाऊंगी..थोड़ा ऑफिस का कम फिनिश कर लेती हूँ.
मैंने अपनी आंखें उनके बूब्स से हटा ली….और बोला .
मैं : ठीक है स्नेहा..लेकिन जल्दी सो जाओ….मैं बाहर का दरवाजा बंद कर देता हूँ…
स्नेहा: ठीक है….गुड नाइट.
मैं जैसे ही अपने कमरे में पहुंचा…माथुर अंकल का फोन आया मेरे मोबाइल पे.
माथुर अंकल : और सो गये?
मैं : नहीं अंकल …कोशिश कर रहा हूँ…
माथुर अंकल : और स्नेहा सो गयी…
मैं : नहीं वो अभी कुच्छ देर में सोएंगे…
माथुर अंकल : ओके गुड नाइट…
फिर उन्होंने फोन कट कर दिया…और मैं मान ही मान सोचने लगा की क्या हमारा प्लान सच होगा या हम फँस जाएँगे…
मैं बेड पे लेते लेते ये ही सोच रहा था की अगर अंकल स्नेहा को चोदने में सफल हो गये तो उनका 10 इंच का लंड स्नेहा के चुत में कैसे जाएगा… और जाएगा तो कितना मजा आएगा.
क्या अंकल स्नेहा को चोद पाएँगे?
क्या प्लान था उनका?
मुझे अंकल का इंतजार था…हमारे प्लान के मुताबिक वो रात के 12 बजे हमारे फ्लैट में आते…मैंने स्नेहा से तो ये बोल दिया की मैं दरवाजा बंद कर दूँगा लेकिन मैंने दरवाजा खुला रखा था… जिससे माथुर अंकल मेरे घर में आसानी से घुस जाते… मैंने घारी देखी और जैसे ही घारी में 11;45 हुए मैं एक बार अपने रूम से निकल कर चेक कर लिया की स्नेहा सो गई है….उनके रूम का लाइट बंद था और वो सो रही थी.
मैंने अपने कमरे में आकर माथुर अंकल को फोन कर दिया की स्नेहा सो चुकी है और मैंने दरवाजा खुला रखा है…अब वो आ सकते है…
मैं उनके आने का इंतजार करने लगा…
मैं ड्रॉयिंग रूम में बैठा था..जैसे ही मेरे दरवाजे की कुण्डी पे हाथ रखा अंकल ने मैं उठ गया और जाकर दरवाजा खोला. वैसे दरवाजा खुला ही था..लेकिन मुझे लगा की अंकल को दिक्कत ना हो.
जैसे ही अंकल ड्रॉयिंग रूम के अंदर आए …उन्होंने अपने चेहरे को एक काले नकाब से ढक लिया और उसने अपने जेब से एक ड्यूप्लिकेट पिस्तौल निकली…
मैं समझ गया की अंकल ने ये प्लान पहले से सोच के रखा था.फिर उसने मेरे सर के ऊपर पिस्तौल लगा के स्नेहा के कमरे की तरफ बढ़े.
अंकल ने स्नेहा के कमरे का दरवाजा खोला…दीदी हमेशा अपने रूम का दरवाजा खोल कर ही रखती है.
अंधेरे में हमें दिखा की स्नेहा बेड पे लेती हुई थी ..और गहरे नींद में सो रही थी…उसने इस बक्ट एक लूस पेंट और टॉप पहली थी.
अंकल ने अपना गुण मेरे सर के ऊपर रखा और मुझे बोला की स्नेहा को जगाए…
मैं : दीदी…दीदी…
स्नेहा ..मेरी आवाज़ सुनकर उठी…और उसने अपने बेड के पास में जो स्विच था उसको ऑन किया और कमरे में उजाला हो गया…दीदी ने जैसे ही ये देखा की कोई आदमई ब्लैक कपड़े और नकाब में मेरे सर के ऊपर गुण लगाए हुए है..चीखने की कोशिश की..तभी अंकल ने उसे धमकी दी..
माथुर अंकल: ( अपनी आवाज़ को थोड़ा भारी बनाते हुए) अगर तुमने शोर किया तो तुम्हारे भाई के सर में गोली मर दूँगा.
स्नेहा: नहीं..नहीं मैं शोर नहीं मचाऊँगी…तुम्हें जो चाहिए ले लो…लेकिन मेरे भाई को कुच्छ मत करना.
माथुर अंकल: ये हुई ना बात..अब जैसा जैसा मैं कहता हूँ करते जाओ.
स्नेहा: ओके…क्या करना है…
माथुर अंकल: ओके…तुम्हें देख के मेरा लूट का मान बदल गया…
स्नेहा: तो फिर…
मैं ये सब कुच्छ देख रहा था और खुश भी हो रहा था की अंकल की चल कामयाब हो रही है..
माथुर अंकल: ज़रा मेरे पास आओ…
स्नेहा कुच्छ समझ नहीं पा रही थी..लेकिन वो अंकल के पास आई. अंकल ने एक हाथ में पकड़े अपने गुण को मेरे सर से सटाये रखा और जैसे ही स्नेहा उनके नज़दीक आई …उन्होंने अपने दूसरे हाथ से स्नेहा के चुचियों को बड़ी बड़ी से दबाने लगे.
स्नेहा ने उनका हाथ हटाया…और गुस्सा दिखाने लगी.
स्नेहा: ये क्या तरीका है…
माथुर अंकल ने अपने गुण का दबाव मेरे सर पे दिखाया स्नेहा को और गुस्से में बोला.
माथुर अंकल: मैं तुमसे तरीका सीखने नहीं आया हूँ….चुपचाप मेरे पास आ ..और जॉब ही मैं कर रहा हूँ और करने को बोल रहा हूँ कर …नहीं तो तेरे भाई का भेजा निकल दूँगा.
मैं अपनी रोने सूरत बना के वहाँ खड़ा था..
क्या स्नेहा, माथुर अंकल की बात मानेगी?
स्नेहा मजबूर थी…माथुर अंकल की बात मानने के लिए..वो छपछप अपने मुममे को डब्बा रही थी माथुर अंकल से…मुझे तो अपने आखों पे विश्वास ही नहीं हो रहा था की कैस एक ही दिन के अंदर मेरे मान में स्नेहा के लिए ऐसा ख्याल आया और मैंने स्नेहा की सेट्टिंग कर दी माथुर अंकल के साथ.
मुझे बुरा भी लग रहा था की इसे सब का ज़िमेदार मैं ही था..मेरी स्नेहा आज माथुर अंकल के हाथों में खेल रही थी….
माथुर अंकल ने सही तरीके से कुच्छ देर तक स्नेहा के चुचियों को कपड़े के ऊपर से दबाया….फिर उनका मान हुआ की अब उसकी नंगी चुचियों को दबाए…
माथुर अंकल : चलो अपने टॉप को बाहर निकालो…
स्नेहा ने नहीं मानी उनकी बात और हाथ ज़ोर कर रिकवेस्ट करने लगी….
स्नेहा: प्लीज़…ऐसा मत करो…
स्नेहा इतनी बड़ी ऑफिसर थी अपने कंपनी की और आज वो मजबूर थी अंकल के हारे के बात को मानने के लिए.
माथुर अंकल : मैंने अभी समझाया था…मुझे नखरे नहीं चाहिए…आज तुम केबल मेरा सुनोगी….कपड़े उटादो…
स्नेहा को मजबोरान अपने टॉप को निकलना पड़ा…
श ..गोद..उन्होंने अंदर ब्रा नहीं पहना था..और मेरे आँखों की आगे स्नेहा के मुममे पूरी तरह से नंगे थे..मैंने स्नेहा को दिखाने के लिए अपनी नज़र नीचे कर ली लेकिन चोर नजरों से मैं उनकी बड़ी बड़ी चुचियों को निहार रहा था..
स्नेहा ने अपने हाथों से अपने बारे बारे मुममे को छुपाने की काफी कोशिश की लेकिन अंकल ने उनका हाथ हटा दिया और उनकी दोनों बड़ी नंगी चुचियों को बड़ी बड़ी से बढ़ाने लगे अपने एक हाथ से. बीच बीच में वो स्नेहा की चूची के निप्पल को भी दबा रहे थे ब्राउन कलर की स्नेहा की निप्पल काफी मनमोहक लग रही थी…
माथुर अंकल ने तभी मेरी तरफ देखा और उन्होंने देखा की मेरी नज़र नीचे झुकी हुई है.तो उन्होंने अपने प्लान के मुताबिक ,
माथुर अंकल : और बेटे…तुम्हारा मान नहीं कर रहा है…ऐसी चुचियों को दबाने का.
स्नेहा: नहीं ऐसा कुच्छ …मत करना …वो मेरा छोटा भाई है…
माथुर अंकल : कोई नहीं…बड़ी बहन आंटी जैसी होती है ना…और बेटे को दूध पीने का तो हक है ना..
स्नेहा: नहीं..प्लीज़ कुच्छ भी ऐसा मत करो…तुम्हें जो करना है कर लो …उसे मत शामिल करो.
माथुर अंकल: आबे साले…जाकर अपनी स्नेहा का दूध भी तरफ आगे..
उसने मुझे थोड़ा सा धक्का दिया…मुझे ये सारा ड्रामा पता था इसलिए मैं केबल ऐक्टिंग कर रहा था..मैं धीरे से स्नेहा की तरफ बढ़ा और स्नेहा को बोला.
मैं: सॉरी दीदी…क्या करूँ.
स्नेहा भी समझ गयी थी की ये आदमी आज मानने बाला नहीं नहीं है, तो मना करने से काम नहीं चलेगा.
स्नेहा: कोई नहीं भाई…मान लो इसकी बात.
मैं अंदर से काफी खुश था ये बात सुनकर और आगे बढ़ा और अपना हाथ धीरे से स्नेहा की चुचियों पे रखा , स्नेहा ने अपनी आंखें बंद कर ली थी.
माथुर अंकल: आबे सहला क्या रहा है..मुंह में ले उसे …और चूस जैसे बच्चे चूसते है…उसकी निप्पल को चूसो..
मैंने माथुर अंकल की बात सुनी और अपना मुंह स्नेहा के चुचियों से लगा दिया..मुझे तो ऐसे लग रहा था जैसे मैं आसमान में और रहा हूँ..आज तक मैंने स्नेहा की चुचियाँ केबल कपड़े में यह आम से कम ब्रा में देखी थी…लेकिन आज वो चुचियाँ मेरी आँखों के सामने नंगी थी और मैंने अपना मुंह लगाया था उसपर.
मेरा मुंह जैसे ही स्नेहा की चुचियों से लगा …मेरा लंड पूरी तरह से खड़ा हो गया…दीदी भी जोश की वजह से सिसक रही थी..ये सिसकियाँ दुख की बेजाह से नहीं था ..उसे धीरे धीरे अच्छा लग रहा था..
इधर अंकल ने अपना मोबाइल निकाला और वीडियो ऑन करके रिकार्ड करने लगे…इस बीच उन्होंने कमरे में लाइट ऑन कर दिया था…
मैं ये सब कुच्छ नहीं देख रहा था , मैं तो बस स्नेहा के बारे बारे दोनों मुम्मो को अपने दोनों हाथों में पकड़े उसे पूरे मान से चूस रहा था और बीच-2 में स्नेहा के ब्राउन निप्पल को अपनी जीभ से छेद देता था..जिससे स्नेहा उहह..आ करने लगती थी..वो अब मजे ले रही थी…क्योंकि उसने अपना आँख खोल लिया था और बीच-2 में मेरे सर को पकड़ कर अपने चूची पे दबा देती थी…हो भी क्यों नहीं इतनी उमर हो जाने के बाद भी उनकी शादी नहीं हुई थी और कोई बाय्फ्रेंड भी नहीं था स्नेहा का. इसलिए अभी तक प्यासी थी वो…आज जब उनके अंगों को कोई इस तरह से छुआ था, वो अपने आपको रोक नहीं पाई थी.
माथुर अंकल अपने मोबाइल से वीडियो रिकार्ड कर रहे थे और मैं स्नेहा के दोनों चुचियों को बड़ी बड़ी से चूस रहा था और अपने हाथों से दबा भी रहा था…
स्नेहा आंखें बंद किए हुए थी और अपनी चुचियाँ चुसबा रही थी ..अभी उसे ये भी होश नहीं रहा था की वो अपने भाई से चुसबा रही है…वजह जॉब ही हो मुझे भी पूरा मजा आ रहा था और स्नेहा को भी मजा आ रहा था.
तभी माथुर अंकल की आबाज मेरे कानों में पड़ी..
माथुर अंकल : चलो अब कुच्छ नया करते है…
मैं : अब और क्या?
मैं अंजान बनते हुए उनसे ये पुच्छ बैठा…
माथुर अंकल : साले ..जैसा बोल रहा हूँ बस वैसा कर …कोई छू छपार नहीं…
मैं अंदर ही अंदर उनकी बात पे सोच रहा था की बहुत ही अच्छी ऐक्टिंग कर लेते है माथुर अंकल..
माथुर अंकल: (स्नेहा की तरफ इशारा करके) तुम अब अपने भाई का लंड चूसो…
स्नेहा: ये मुझसे नहीं होगा…