स्नेहा मेरी आंटी की लड़की 3

माथुर अंकल Antarvasna मैं ये सोचता हूँ की …इतनी उमर हो गयी है तुम्हारी स्नेहा की लेकिन बिना शादी के कैसे रही सकती है वो…

आज पता नहीं मुझे स्नेहा के बारे में दूसरे के मुख से अटपटी बातें भी अच्छी लग रही…ये एक बदलाव था ..मोहित अंकल मेरे नशे में होने का मौका उठा रहे थे….

मैं : क्यों अंकल …सारी से क्या होगा…

माथुर अंकल : अरे तुम तो बच्चे जैसे बात कर रहे हो….क्या कभी किसी को सेक्स करते नहीं देखा तुमने….

मैं : नहीं…
माथुर अंकल : तुम्हें बहुत सारी ट्रेनिंग की जरूरत है…तुम रात में मेरे फ्लैट में आओ खाना खाने के बाद…मैं तुम्हें कुच्छ दिखाऊंगा…

मैं : ओके अंकल…

फिर मैंने अपना गिलास फिनिश किया और अपने फ्लैट में चला गया और स्नेहा के आने का इंतजार करने लगा.

मेरा सर घूम रहा था लेकिन एक अलग एहसास भी हो रहा था मुझे…
मैं मोहित अंकल के फ्लैट से निकल कर अपने फ्लैट में आया….और स्नेहा के आने का इंतजार करने लगा…मेरा सर चकरा रहा था और मैंने अपना सर दो तीन बार धोया….

करीब आधे घंटे के बाद..डोरबेल बाजी और मैं समझ गया की स्नेहा आ गयी है. मैंने जा कर दरवाजा खोला..सामने स्नेहा ही थी….और पता नहीं आज बहुत अच्छी लग रही थी…अच्छी यानि हॉट लग रही थी… शायद ड्रिंक का कमाल था …दीदी बिज़्नेस सूट में कयामत लग रही थी मुझे …उसकी बारे बारे ब्रेस्ट शर्ट में काफी कमाल दिख रहे थे..और टाइट पेंट में उसकी बड़ी बड़ी चूतड़ भी कहर दा रही थी…वो कमरे के अंदर आई और अपना बैग रखकर…बाथरूम में चली गयी…

आज तक मेरी इतनी हिम्मत नहीं थी की मैं स्नेहा के चेहरे के अलबा उसके मुममे या चूतड़ को देखु…लेकिन आज मेरा मान कुच्छ और चाह रहा था…और स्नेहा को देखने के बाद मेरे लंड में सुरसूराहट हो रही थी…

मैंने बाहर सोफे पे बैठकर स्नेहा का इंतजार किया..कुच्छ देर में स्नेहा ब्लू जीन्स और वाइट टॉप पहन के आई…और पानी का बोतल लेकर सोफे के दूसरे तरफ बैठ गयी…

स्नेहा : ( मुझसे ) और दीपक कैसा रहा तुम्हारा दिन …

मैं : अच्छा दीदी…थोड़ा एग्ज़ॅम का टेन्शन है…

स्नेहा: कोई टियूशॅन की जरूरत हो तो बता देना….

मैं : नहीं दीदी…अभी तो मेरे दो सीनियर है..उनसे हेल्प ले लेता हूँ कॉलेज में

स्नेहा : तो मैं खाना लगती हूँ….

मेरे यहाँ एक मैड सर्वेंट आता था और मॉर्निंग और ईवनिंग में खाना बनाकर चला जाता था साथ में कपड़े भी वही धोता था…इसलिए स्नेहा या मुझे खाना बनाना का कोई टेन्शन नहीं था…..

खाने की टेबल पे मैंने स्नेहा से राजेश और अब्दुल के बारे में बात की.

मैं : स्नेहा , मेरे सीनियर राजेश और अब्दुल को जॉब नहीं लग रहा है लेकिन दोनों बहुत ही इंटेलिजेंट है…टॉपर है..क्या आप उनकी मदद कर सकते है…

स्नेहा : मैं कैसे मदद कर सकती हूँ…

मैं : आप अपने कंपनी में ट्राइ करते…

स्नेहा: ठीक देखती हूँ…लेकिन उनसे बोलो अपना रेज़्यूमे दे दे मुझे और…हां एक काम…

मैं : क्या स्नेहा?

स्नेहा: उन्हें घर पे बुलके ट्यूशन लो….दूसरों से काम भी निकलना सीखो..अगर हेल्प कर रहे हो तो उनसे भी मदद लो…

मैं : लेकिन दीदी…

स्नेहा: मेरे भाई…इस दुनिया में कुच्छ फ्री नहीं है..मैं उसके जॉब की बात कर रही हूँ…तो वो तुम्हें यहाँ आ कर पड़ा जाए…

मैं : ओके स्नेहा मैं, बात करता हूँ…

फिर हमने खाना फिनिश किया…दीदी अपने कमरे में चली गयी…मैं फ्रेश हुआ और सोचा की अब ज़रा मोहित अंकल के फ्लैट से हो आता हूँ..

मैंने स्नेहा के बेडरूम का दरवाजा खोला…दीदी बेड पे ला कर के लॅपटॉप पे काम कर रही थी और उसकी बड़ी सी चूतड़ मेरे तरफ यानि दरवाजे की तरफ फिर…जिसे देखकर मेरे लंड में सुसुराहट होने लगी ..मैंने उसे हाथ से पाकारकर स्नेहा से पूछा : स्नेहा मैं ज़रा टहल के आता हूँ…

स्नेहा : ठीक है…

फिर मैं अपने फ्लैट से निकालकर मैं माथुर अंकल के फ्लैट के पास पहुंचा और डोरबेल बजाई.

मैंने माथुर अंकल के घर की बैल बजाई ही थी की दरवाजा खुला और माथुर अंकल खड़े थे…
माथुर अंकल : आ जाओ ….स्नेहा सो गयी…
मैं : नहीं…उन्हें कुच्छ काम है….ज़रा लेट सोती है…
माथुर अंकल : क्या बोल की आए…
मैं: यही की घूम के आता हूँ बाहर से…
माथुर अंकल ; चलो अच्छा है…अगर मेरे रूम में आने का बताते तो ढेर सारा क्वेस्चन पुचहति…
मैं : इसलिए नहीं बताया…
फिर मैं अंकल के ड्रॉयिंग रूम में बैठा जहाँ लिड लगा था उन्होंने अपना पेन ड्राइव उसमें लगाया और आकर मेरे पास बैठ गये….
माथुर अंकल : एक बोतल और निकलता हूँ बियर की….?
मैं: ठीक है….
मेरे हामी भरते ही…उन्होंने दो बोतल निकाला और गिलास में डाला…और फिर हम दोनों उसे पीने लगे…अंकल ने लिड ऑन कर दी….स्क्रीन पे लिखा आया “बिग टिट्स अट वर्क” और जो ब्रंनेते लेडी स्क्रीन पे आई वो काफी सेक्सी थी, और उसके बूब्स और गान्ड बड़ेबड़े थे…वो लड़की बिज़्नेस सूट में थी…
माथुर अंकल : ये कुच्छ कुच्छ तुम्हारी स्नेहा जैसी लगती है ना…
मैं: हां … कह सकते है….
मुझे लगा की ये कोई सॉफ्ट पॉर्न है..क्योंकि अभी तक मैंने हिन्दी सेक्स मूवी नहीं देखी थी…मैंने अंकल से पूछा..
मैं: अंकल ये कौन सी मूवी है…..
माथुर अंकल : तुमने टाइटल नहीं देखा शुरू में…
मैं : मिस कर गया…
माथुर अंकल : पहले ये बोलो की ये सही में तुमको स्नेहा की कॉपी लगती है या नहीं…?
मैं : हां लगती तो है…लेकिन आप आज स्नेहा के बारे इतना क्यों पुच्छ रहे है…
अंकल ने समझ लिया की मैं अब तैयार हूँ सुनाने के लिए क्योंकि मेरी बोतल खत्म हो गयी थी और सामने आक्ट्रेस ने अपना कपड़ा उतार दिया था…कहानी कुच्छ इस तरह की ही की …आक्ट्रेस बॉस थी और अपने ऑफिस में थी और तभी एक ऑफिस बॉय पानी का बॉटल रखने आता है…आक्ट्रेस उसे पानी लेकर देने के लिए बोलती है…और वो ऑफिस स्टाफ गिलास में पानी भरके जब देने जाता है तो ,जानबूझ गिलास का पानी बॉस लेडी के ऊपर गिरा देता है…मजबूरी में गुस्सा करते हुए बॉस लेडी अपना ऑफिस सूट निकल देती है और अभी वो केबल ब्रा में है..उसके बारे बारे मुममे बहुत ही अच्छे लगते है…अंकल के कहने के बाद मैं भी उसे अपनी स्नेहा ही मान बिता था…ऑफिस स्टाफ जैसे ही उसे ब्रा में देखता है…उसके मुममे दबाने लगता हईयोर उसके बूब्स को ब्रा से निकालकर मूच से चूसने लगता है…..
माथुर अंकल : मैंने इसकी तुलना तुम्हारे स्नेहा से इसलिए की ही..की देखो इसके मुममे क्या तुम्हारी स्नेहा के भी इतने बारे बारे नहीं है…?
मैं पूरी तरह से मूवी में खो गया था और उसे अपनी स्नेहा ही संघ बैठा था…मेरा लंड खड़ा हो गया था और उसे सहला रहा था और बॉटल पूरी खत्म हो जाने के बाद नशा भी हो गया था….
मैं: हां…अंकल स्नेहा के मुममे भी ऐसे ही है….
माथुर अंकल ; तुमने देखे कभी?
मैं: हां देखे है कपड़ों में ही….
माथुर अंकल : कभी नंगी नहीं देखी….क्या न्रा में देखी ?
मैं : हां..ब्रा में देख चुका हूँ दो बार…
माथुर अंकल : स्नेहा के चुच्चे इससे भी मस्त है…क्योंकि वो नॅचुरल है ये तो फेंक है…
मैं ; मुझे भी स्नेहा के मुममे काफी अच्छे लगते है…
माथुर अंकल : चीज़ ही ऐसी है तुम्हारी स्नेहा..किसी का भी मान उसे चोदने को हो जाए….तुम भी तो आख़िर लड़के ही हो…
मैं: अभी मैंने ऐसा नहीं सोचा….
माथुर अंकल ; कैसे कंट्रोल कर पाते हो तुम..अगर ऐसी स्नेहा घर में हो तो डेली चोद मैं…..
मैं ; क्या स्नेहा को चोदना गलत नहीं है…?
माथुर अंकल: तुम स्नेहा और भाई की तरह मत सोचो…एक जबान लड़की और लड़के की जरूरत की तरह संघो…वो कभी ना कभी किसी से चुदेगी ही….
अंकल काफी खुल गये थे..और मुझे भी स्नेहा की बारे में बात करके मजा आ रहा था…सामने स्क्रीन पर आक्ट्रेस उस ऑफिस स्टाफ के लंड को चूस रही थी फिर उस आदमी ने बॉस की पेंट उतरी और टेबल पे डॉगी स्टाइल में खड़ा कर के अपना लंड उसकी चुत में घुसा दिया…मैं ये देख कर मस्त हो रहा था…उधर अंकल भी अपना लंड मसल रहे थे और उन्होंने अपना लंड पेंट से बाहर कर लिया मैं हैरान था की…ये कैसे कर रहे है वो…उनका लंड सामने स्क्रीन पे दिख रहे लड़के से कम मोटा या लंबा नहीं था…उनकी लंबाई 10 इंच और मोटाई 4 इंच की ही.वो अपने लंड को हाथ में लेकर हिला रहे थे और मेरी स्नेहा के बारे में बात कर रहे थे . मैं भी काफी खुल गया था उनसे…
माथुर अंकल :और दीपक गान्ड देख इसकी…क्या स्नेहा की गान्ड ऐसी नहीं लगती तुम्हें…
मैं : मुझे तो स्नेहा की गान्ड इससे भी बड़ी लगती है….
माथुर अंकल ; सही में…क्या तुम्हारी स्नेहा ऑफिस में किसी से ऐसे चुदी होगी…
मैं: क्या पता….
माथुर अंकल : आजकल तो हर बड़ी पोस्ट पे लड़कियाँ जो जॉब करती है चुदती जरूर है…
मैं : हो सकता है…स्नेहा स्नेहा भी चुदी हो किसी से…
माथुर अंकल : तुम्हारा मान तो लकरता ही होगा की अगर सामने तुम्हारी स्नेहा चुद रही हो तो मजा आ जाए..
मैं : मैं तो इसे स्नेहा ही संघ कर देख रहा हूँ…
माथुर अंकल: रियल में मान नहीं करता की कोई तुम्हारी स्नेहा की चुत में ऐसे ही लंड डाले…
मैं : अब मान कर रहा है….
माथुर अंकल : मेरे लंड के बारे में क्या ख्याल है…ये अगर स्नेहा की चुत या गान्ड में घुसे तो…
मैं : (चौक गया उनकी बात सुनकर , लेकिन मान में सोचने लगा की स्नेहा की चुदाई अगर इस लंड से हो तो सही में मजा आएगा)लेकिन आप छोड़ोगे कैसे उसको….
मातुए अंकल : अगर तुम मदद करो तो…हो सकता है…
मैं: मैं कैसे मदद कर सकता हूँ….