गर्मी की रात अंकल के साथ

मेरी सहेलिया मुझे अक्सर मेरे सामने औरत और मर्द के रिश्तो की बात करती थी, मैं फिर भी बेख़बर थी,जानती ही नहीं थी की क्यों मैं ऐसा फील करती हूँ?? क्या कारण है की मैं सब लड़कियों की चुचियों को,और सब लड़कों के पेंट के उस उभरे हिस्से को मैं इतने लालच से, इतनी गौर से देखती हूँ…….

उस दिन जब अंकल बनारस से आए और मुझे पुकारा .. मैं भागी भागी उनके पास गयी और बोली ..हांजी अंकल!!

अंकल बोले.. अरे बेटा इतनी दूर क्यों खड़ी है याहान आ देख मैं तेरे लिए क्या लाया हूँ??
मैं पास आकर अंकल की चेयर के पास खड़ी हो गयी…
अंकल ने मुझे एक पैकेट दिया जिसमें दो बहुत सुंदर बनारसी सादिया थी.. फिर एक और पैकेट दिया जिसमें शायद साज़ शिनगर का समान था…
मैं तो जैसे खुशी से झूँ उठी….
कैसा लगा ???? ये कह कर अंकल ने मेरे गोल गोल चूतड़ पर हाथ रख दिए और उन्हें सहलाते हुए बोले… अपनी आंटी से मत कहना नहीं तो अभी जल मरेगी!!!…
मैंने चुपचाप अपनी गर्दन हाँ करते हुए हिलाई लेकिन ध्यान तो उस प्यार से सीहलाते हुए हाथ पर ही था….
तभी आंटी की आवाज़ आई और पिताजी ने एकदम से हाथ खींच लिया…

मैं भी पैकेट ले कर वहाँ से भाग खड़ी हुई…
कमरे मैं आकर भी मेरे बदन पर वो प्यारा सा स्पर्श मुझे महसूस हो रहा थे ….और ठीक उसी रात एक बहुत प्यारा सा हादसा हुआ जब हम सब चाट पर सो रहे थे….आक्च्युयली हम लोग एक मिड्ल क्लास फॅमिली से है…. घर भी ज्यादा बड़ा नहीं है…..इसलिए अक्सर गर्मी के कारण हम अक्सर ऊपर चाट पर सो जा करते थे …..
जुलाई का महीना था, सब लोग खाना कहा कर सो गये थे लेकिन पता नहीं क्यों मेरी आंखों से तो जैसे नींद गायब थी..मेरे दिमाग मैं तो रही रही कर वो अजीब सी गुदगुदी जो मुझे पिताजी के सहलाने से हुई थी गूँज रही थी….
तभी आंटी जो की मेरी बराबर मैं लेती थी धीरे से फुसफुसाई..
….कोमल बेटा!!!!
मैंने सोचा जरूर पानी वाणी मंगाएगी आंटी मैं तो चुप चाप ही लेती रही…. आंटी ने एक आवाज़ और लगाई और उठ के बैठ गयी..
मैं फिर भी चुप चाप लेती रही..
तभी आंटी उठ कर पिताजी के बिस्तर की तरफ चली गयी..
मैंने सोचा आंटी वहाँ क्यों गयी है?? लेकिन आंटी तो अंकल के पास पहुँचते ही उनसे किसी भूखे भादीए की तरह लिपट गयी….
ये देखते ही मेरा अंग अंग झनझणा उठा…..
तभी अंकल की आवाज़ आई इतनी देर क्यों लगा दी….
आंटी बोली तुम तो कुछ भी नहीं समझते घर मैं जवान बेटी है और एक तुम्हारी भूख है की बाधती ही जा रही है!!!
अंकल बिना कुछ बोले आंटी की बड़ी बड़ी चुचियों को दबाने लगे….
मैं चुप चाप हड़बड़ाई सी पड़े हुए उन्हें देखने लगी….चाँदनी रात मैं मैं तो उन्हें साफ देख पा रही थी लेकिन मुझे नहीं पता के उन्हें मेरी खुली हुई आंखें दिख रही थी या नहीं???
अंकल आंटी के गोल गोल चुचियों को ज़ोर ज़ोर से दबा रहे थे…मां के चेहरे जैसे बदल सा गया था..माँ अंकल के पाजामे ऊपर से ही अंकल के लिंग को सहला रही थी … मुझे तो जैसे सब कुछ बर्दाश्त के बाहर लग रहा था… पता नहीं क्यों मेरा हाथ मेरे सलवार के अंदर सरक गया..और मैं अपनी चुत को धीरे धीरे मसलने लगी…
हाईए….. क्या मस्त फ़ीलिंग्स आ रही थी…
उधर अंकल ने आंटी का ब्लाउज खोल कर अलग कर दिया था..आंटी भी अंकल का लिंग पाजामे का नाडा खोल कर बाहर निकल चुकी थी….. अचानक आंटी झुकी और अंकल के लिंग को मुँह में लेकर किसी लोलीपोप की तरह छहुउसने लगी…उधर मेरे हाथ की रगड़ान मेरी चुत पर बादती ही जा रही थी…
अचानक अंकल बोले …ज़रा नीचे आजाऊ
आंटी चुप चाप नीचे लेट गयी और अंकल ऊपर आ गये …. अंकल ने आंटी के हाथों पर एक जाबर दस्त चुंबन लिया और .. उसके ऊपर लेट गये ..तभी अंकल ने आंटी की सारी को उनके पेट तक सरका दिया और अपना लंड सेट किया और आंटी की चुत मैं सरका दिया…. मेरी तो जैसे सिसक सी नकल गयी….
आंटी भी कराहने सी लगी… फिर अंकल धीरे धीरे झटके मरने लगी….. मैं तो जैसे पागल सी हो गयी थी…
अंकल जो की पेला धीरे धीरे झटके मर रहे थे तभी ज़ोर ज़ोर से धक्के मरने लगे…. आंटी ने अपनी टांगों को पिताजी के बदन से लपेट लिया …तभी आंटी ने उन्हें ज़ोर से भीएंच लिया और धीरे धीरे जैसे उनका शरीर जैसे ठंडा सा पड़ने लगा और वो बिलकुल बेजान सी हो कर लेट गयी ….लेकिन अंकल अभी भी आउस्यू जोश से लगे हुए थे …. तभी आंटी बोली ..बोस करो! अब क्या जान ही निकलोगे ….
अंकल बोले … तू तो बुद्धि हो गयी है अगर मेरे सामने कोई सोलह साल की जवान लड़की भी आ जाए तो मैं उसको भी नानी याद करा दम….
मेरे दिमाग मैं सीटिया सी बजने लगी.. मैं भी तो सोलह साल की ही हूँ…..
और एक बात जब अंकल ये बात बोल रहे थे तो मुझे लगा की शायद अंकल मेरी ही और देख रहे थे.. मैं तो गंगना उठी मेरे हाथ की उंगली मरी चुत मैं सरक चुकी थी..मैं तो पागलों की तरह अपने मस्त हुए अंकल की तरफ देख कर ज़ोर ज़ोर से अपनी उंगली को अंदर बाहर करने लगी…तभी अंकल जी बोले.. बस कोमल की आंटी,, थोड़ी देर और बर्दाश्त करले मैं भी झड़ने ही वाला हूँ..
ये सुनकर तो मैं और ज़ोर ज़ोर से हाथ चलाने लगी…
तभी अंकल जी जैसे अकड़ से गये और उन्होंने आंटी को ज़ोर से बाहों मैं भींच लिया…
उधर मुझे भी ऐसा लगा की जैसे मेरा पिशब निकल जाएगा…मैं अपनी उंगली को चाह कर भी ना रोक पे और अचानक मैंने देखा की अंकल के मुंह से एक ज़ोर की सिसरी निकली है….उतार मैं भी पानी छोड़ चुकी थी मैं और अंकल एक साथ ही झंड़े ये सोच कर मैं तो जैसे गंगना उठी…. अंकल ने आंटी को फिर एक बार ज़ोर से चूमा और अलग हो कर लेट गये….. मैंने भी अपना हाथ अपनी सलवार से निकाला और चुपचाप आंखें बांड करली….
मैंने फिर आंटी के उठने की आवाज़ सुनी जैसे वो अंकल की चारपाई से उठ कर फिर से मेरे पास ही लेट गयी हो…
उस रात तो ऐसी नींद आए की मुझे अपनी भी हूष नहीं रही…
सुबह आंटी ने मुझे ज़ोर ज़ोर से हिला कर उठाया ….कोमल उठ घर का कम नहीं करना है क्या … भंग कहा के सोई थी क्या????
मैं उठ कर जब बाथरूम गयी तो अपने सलवार की तरफ देखा वहाँ पर एक बड़ा सा निशान बन चुका था… मेरे अंदर तो एक गुदगुदी सी दौड़ गयी.. मैंने चुप चाप नये कपड़े निकले और उन्हें लेकर नहाने के लिए चली गयी..लेकिन रात की बात मुझे जैसे कचोट रही थी…
जब मैं नहा कर निकली तो अंकल बाहर ही खड़े थे मैं तो जैसे सकपका गयी .. अंकल मेरे पास आए और बोले…. अरे!बेटा आज तो बड़ी जल्दी नहीं ली?? मैंने जवाब दिया … अंकल आज गर्मी बहुत है….
अंकल बोले… बेटा जवानी मैं गर्मी कुछ ज्यादा ही लगती है!!
ये कह कर उन्होंने एक हाथ मेरी गाल पर रख दिया ..और एक हाथ को बेख़बरी के साथ मेरी चुछीी पर टीका कर सहलाने लगे… मैं तो जैसे मस्त सी हो गयी….. तभी जैसे कुछ आहट सी हुई..अंकल मुझसे अलग हो गये..मैं भी अपने कमरे की तरफ चल दी…
तभी आंटी किचन से बाहर आ गयी…. और मुझे देखते हुए बोली …शाबाश बेटा .. रोज जल्दी नहन ले तो तू अच्छी बचीी ना बन जाई…
मैं चुप चाप कमरे मैं चली गयी….
उस समय मुझे मेरी आंटी मेरी सबसे बड़ी दुश्मन लग रही थी…
मेरे दिमाग तो जैसे हर समय अंकल के पास जाने को ही मचलता रहता था..
और फिर वो दिन भी आया जिसका मुझे इंतजार था …..करीब दस दिन के बाद संदेसा आया की एक हफ्ते बाद मेरे सबसे छोटे ममाजी की शादी थी… आंटी तो बहुत खुश थी …मुझसे बोली बेटा मैं तो कल ही चली जाऊंगी तू अंकल के साथ शादी से दो दिन पहले पहुँच जाना.. मैं तुझे भी साथ ले चलती लेकिन यहाँ तेरे अंकल का खाना कौन बनेएगा….
आंटी ने उसी रात सारी पेकिंग करली… सुबह ही आंटी की ट्रेन थी..
अगले दिन सुबह ही आंटी ने मुझे जगाया बोली…बेटा मैं जा रही हूँ अपना और अपने अंकल का ख्याल रखना…और आंटी ने मुझे कुछ रुपये भी दिए.. ये कह कर आंटी अंकल के साथ निकल गयी….
मैं घर पर अकेली हूँ ये सोच कर तो जैसे मेरे सारे बदन मैं आग सी लगी हुई थी…
मैंने सोच लिया की आज तो कुछ करके ही मानूँगी….
मैं उठी और नहन कर तैयार हो गयी… तभी अंकल का फोन आया…. बेटा कोमल मैं इधर से ही काम पर जा रहा हूँ शाम को जल्दी आ जाऊँगा.. तू घर का ख्याल रखना!!!!
मुझे इतना गुस्सा आया …मैं तो जैसे जल भून सी गयी….
सारा दिन मैंने कैसे गुजरा मुझे ही पता है..
मैंने इतने प्यार से अंकल की लाई हुई सारी पहनी थी .. गुस्से मैं आ कर मैंने वो सारी उतार कर फेंक दी… और पेटीकोट ब्लाउज मैं आ गयी..
दिमाग तो जैसे खराब हो चुका था …मैं जा कर अपने बिस्तर पर लेट गयी…पता नहीं कब नींद आ गयी…
रात को दूर बेल की आवाज़ से मेरी नींद खुली…..देखा 8 बज चुके थे मैं उठी और जा कर दरवाजा खोला.. देखा अंकल आ गयी थे..अंकल ने मेरी और प्यार से देखा..और बोले.. क्या बात है सारी नहीं पहनी…मुझे होश आया ..और मैं अंदर की और चुप गयी..
अंकल बोले..अरे!! शर्मा क्यों रही है मैं तेरा बाप हूँ तुझे तब से देखता हूँ जब तू नंगी सारे घर मैं घूमती थी..
मैं धीरे से बोली.. खाना लगा दम????
अंकल बोले …नहीं मैं तो कहा के आया हूँ .. तू बिस्तर लगा दे मैं आराम करना चाहता हूँ..
मैं बोली…. अच्छा !!! और खिड़की के पास जा कर खड़ी हो गयी..
अंकल बोले.. क्या हुआ? और मेरे पास आकर खड़े हो गये..
मैंने खिड़की की तरफ मुँह कर लिया और झुक कर बाहर झांकते हुए उनसे बोली ..अंकल! बाहर तो बदल से हो रहे है .. लगता है बारिश होगिइ.. अंकल मेरे करीब आ गये और उन्होंने मेरी गांड पर हाथ रख दिया..
और बोले.. हाँ लगता है आज जम कर बारिश होगी! इतना कह कर अंकल मेरी गांड को धीरे धीरे दबाने लगे….मैं तो जैसे सारे दिन का गुस्सा भूल कर मदमस्त हो गयी.. तभी अंकल ने मेरी गांड के बीच मैं हाथ रखते हुए अपनी उंगली ठीक मेरी गान्ड के छेद पर दबाइइ…. मेरे तो सारे बदन मैं एक आग सी दौड़ गये..
अंकल मेरी गांड पर हाथ फेरते हुए बोले … बेटा तेरी आंटी कहती है की तू जवान हो गयी है .. तेरे लिए लड़का दीख लंड.. आज मैं भी देखूँगा की तू कितनी जवान हो गयी है…
यह कह कर उन्होंने मेरी ब्लाउज के ऊपर की खुली हुई पीठ पर धीरे से एक पप्पी ले ली… और मुझे चोद कर दूसरे कमरे की तरफ तरफ गये…
मैं भी आकर बिस्तर को लगा ने लगी,मैं दूसरा बिस्तर लगा ही रही थी की अंकल आ गये और बोले ..अरे.. ये दूसरा बिस्तर किसलिए ?? तू जब छोटी थी तो मेरे ही पास सोती थी… आज अनपे अंकल के साथ सोने मैं डर लगता है क्या???
मैंने भी चुप चाप अपने बिस्तर को समेट कर रख दिया….
पपबोले …बेटा तू लेट जा मैं अभी ज़रा फ्रेश हां के आता हाँ ???
मैं अकेली ही बेड पर लेट गयी मैंने सोचा ..आज तो जरूर कुछ करने है..
यह सोच कर मैंने अपने ब्लाउज ऊपर के दोनों स्तनों खोल लिए…और अपना पेटीकोट भी घुटनों तक चढ़ा कर लेट गयी ..
तभी अंकल कमरे मैं आए ..मुझे देख कर वो मुस्कराए..मैं उनकी आंखों मैं चमक साफ देख सकती थी..
वो मेरे पास आकर बैठ गये..और बोले.. कोमल बेटा!ज़रा ऊपर को सार्को..
मैं जानभूझ कर अपने पैरों को मोड़ कर उठी.. पेटीकोट ऊपर था इसलिए शायद अंकल को मेरी मदमस्त चुत की एक झलक तो मिल ही गयी हो गी…
तभी अंकल ने अपना हाथ मेरी टांगों पर रख दिया… और बोले..कोमल तू तो सच मैं काफी बड़ी हूँ गयी है मैंने शर्म से आँखें बंद कर ली.. अंकल ने धीरे धीरे मेरी झाआँगे सहलानी शुरू कर दी . मैं तो जैसे मस्त सी हो गयी.सहलाते सहलाते अंकल ने अपना हाथ मेरी चुत की तरफ बढ़ा दिया..मेरी मस्त झांघो को देख कर वो भी मस्तेय से लग रहे थे… तभी अंकल ने अपना हाथ बड़ा कर मेरी चुत के ऊपर रख दिया,,मुझे ज़ोर से कुरृूणत सा लगा…
अंकल मेरी चुत को धीरे धीरे सहलाने लगे..मैंने अपनी आंखें बंद कर ली… तभी अंकल ने मेरे पेटीकोट का नाडा खोल दिया.. और मेरी पेटीकोट को नीचे से सरका कर अलग कर दिया ..अब मैं नीचे से बिलकुल नंगी अपने अंकल के सामने थे..अंकल बोले..कोमल आंखें खोल!!! मैयाने आंखें खोली और अंकल की तरफ देखा..अंकल ने झुक कर मेरे होठों को चूम लिया…फिर अंकल ने मेरे ब्लाउज को खोलना शुरू किया….उसे भी उतरने के बाद तो जैसे वो पागल से हो गये और मुझे पागलों की तरह चूमने लगे..फिर उन्होंने मेरी चुचियों को अपने हाथों मैं भर लिया.. और उन्हें ज़ोर ज़ोर से दबाने लगे मुझे दर्द भी हो रहा था और मजा भी आ रहा था…..तभी अंकल नीचे की और सरके और उन्होंने मेरी चुत पर अपने होंठ रख दिए… पहले तो धीरे धीरे फिर तेज तेज वो मेरी चुत को चूसने लगे..मैंने भी धीरे से अपनी टांगे चौड़ी कर ली और मस्ती के मारे अपनी आंखें बंद कर ली… तभी अंकल उठे और बोले..कोमल ज़रा उठ जा.. मैं उठ कर बैठ गयी..अंकल बोले ले ज़रा इसे सहला दे.. मैंने अपने हाथों से अंकल का लंड सहलाना शुरू कर दिया …फिर अंकल ने अपने नाडा खोल दिया और अपने आंडरवेयर के साथ ही उसको उतार दिया….मेरे सामने काम से कम 7 इंच का ताना हुआ लंड था.. मैं सोचने लगी क्या आंटी की तरह मैं भी इसे अंदर ले पावंगी. तभी अंकल बोले.. बेटा कोमल!इसे थोड़ा सा चूस दे ….
मैं तो चाहती ही यही थी मैंने उस प्यारे से लंड को अपने मुउन्ह मैं भर लिया ….और धीरे धीरे टॉफ़फे की तरह चूसने लगी.. अंकल के मुँह से सिसकियां निकल रही थी…तभी अंकल बोले बेटा ज़ोर ज़ोर से चूस..इसे पूरा अंदर लेले…
मैं कोशिश करने के बाद भी उसे सिर्फ़ 4-5 इंच ही अंदर ले पे..
फिर मेरा मुउन्ह दूहने लगा … मैं अंकल की तरफ देखा ..अंकल बोले …चल अब तू लेट जा बेटा… मैं लेट गयी..फिर वो भी मेरी बगल मैं बनियान उतार कर लेट गये…उनके नंगा बदन जैसे ही मेरे नंगे बदन से टकराया मैं तो जैसे काँप सी उठी…
फिर अंकल ने मेरी चुचियों को बड़ी बड़ी चूसा.. और मेरे हूँठों को चूसने लगे ….अचानक ही अंकल मेरे ऊपर आ कर लेट गये…. और अपने लंड का एंगल मेरी चुत पर बैठने लगे…
मैं डर गयी और बोली… अंकल ये तो काफी बड़ा है….
अंकल बोले ……अरे! मेरा बच्चा..तू रुक बेटा मैं अभी आया …
ये कह कर अंकल उठ कर बराबर वाले कमरे मैं गये…और जब आए तो उनके हाथ मैं एक तेल की शीशे थे… फिर तेल को पहले मेरी चुत पर लगा कर मसलने लगे और अपनी एक उंगली भी अंदर सरका दी….पहले एक, फिर दो उंगलियों को वो मेरी चुत मैं अंदर बाहर करने लगे मैं तो जैसे पागल सी हो गयी थी…. तभी अंकल ने मेरा हाथ पकड़ कर अपने लंड पर रख लिया न बोले.. कोमल बेटा ले इसपर भी तेल लगा दे..
मैं भी उनके रोड जैसे सख्त लंड पर तेल लगाने लगी…
फिर करीब 10 मिनट बाद अंकल फिर से मेरे ऊपर आ गये और अपने लंड के एंगल मेरी चुत से लगाया….फिर धीरे से उन्होंने मेरी चुत मैं अपना लंड सरका दिया .. मैं तो हैरान थी इतना बड़ा लंड इतने प्यार से मेरी चुत मैं घूसा जा रहा है….
फिर अंकल ने धक्के मरने शुरे किए …पहले धीरे …फिर तेज …मेरी तो जैसे जान ही निकल गयी थी… अंकल ने धक्कू की बढ़ता बढ़ा दी मैं…. मैं भी मस्त हो कर अंकल से चिपट गयी..
करीब 1/2 घंटे के बाद मैं और अंकल एक साथ झंड़े,… अंकल के गरम गरम वीर्य ने मेरी चुत को भर कर रख दिया…. मैं तो जैसे बेहोश सी हो गयी थी… झाड़ते समय ऐसा लग रहा था जैसे चुत से पानी नहीं मेरी जान निकल रही थी……
उस रात अंकल ने मुझे पता नहीं कितने एंगल से चोदा… और मैंने भी भरपूर सहयोग दिया…. करीब 5 बार हमने चुदाई का प्यारा सा गेम खेला…..
अगले दिन अंकल ने छुट्टी लेली..और फिर से मेरी जम कर चुदाइि की………

आंटी के आने तक तो लगभग रोज़ ये सिलसिला चला…फिर आंटी आ गयी तो भी मौका मिलते ही हम एक दूसरे को पूरा पूरा सुख देते रहे

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