रानी सन्ग होली बनाई

आप साबो ने मेरी पहली सच्ची कहानी तो पढ़ ही ली होगी जिसमें मैंने बताया था की मैंने कैसे अपनी ममेरी दोस्त टीना की वर्जिन चुत की चुदाई करके लहू लुहन कर दिया था. अब मैं आपको बताने जा रहा हूँ की कैसे मैंने अपनी सगी दोस्त रानी दोस्तऔर की चुत का सील थोड़ा. दरअसल में मेरी दोस्त मुझसे करीब दो साल बड़ी थी और काफी गोरी चिट्ठी थी. हाइट थोड़ी कम थी लेकिन शरीर एकदम गठीला था. चुचियाँ ऐसी थी मानो सूट को फड़कर बाहर निकल जाएगी. उसे देखने के बाद अच्छे अच्छे का दिमाग खराब हो जाने वाला फिगर था उसका. चूतड़ भी बिलकुल मस्त. जब चलती थी तो मानो राहगीरों का लंड पर तूफान आ जाता होगा लेकिन मेरी दोस्त रानी थी बहुत शर्मीली. कभी किसी से बात तक नहीं करती थी किसी लड़कों के तरफ देखना तो बहुत दूर की बात थी. कॉलेज में भी वो लड़के से बात तक नहीं करती थी हालाँकि लड़के उसे चोदने के लिए आहें भरते रहते थे. अब मैं सीधा कहानी पर आता हूँ. मेरी दोस्त रानी ,मैं और मेरे आंटी पिताजी यही मेरा परिवार था लेकिन एक ममेरी दोस्त टीना भी आकर हमलोगो के साथ ही रहती थी. जैसा की मैं पिछली कहानी में बताया था की टीना मेरे घर पर करीब एक साल रही थी और लगभग रोज चुदवाती थी.ये बात मेरी दोस्त रानी को किसी तरह पता चल गया था शायद वो मुझे टीना को चोदते हुए देख ली थी.होली की छुट्टी में टीना अपने घर चली गयी थी इसलिए रानी दोस्त मेरे साथ सोने आ गयी.होली में कई दिन पहले से लोग होली का गीत ढोलक बजा बजा कर गाने लगते है . गीतों में चोदने चुदवाने की बातें खुलेआम होती है. रानी सन्ग होली बनाई

जब मैं और रानी एक ही चारपाई पर सो रहे थे तो होली गीत की आवाज़ आ रही थी .हंदोनो चुप चाप सोने का नाटक कर रहे थे . गीत सुनकर मेरा लंड तनतना गया था. मैं अपने हाथों से अपने लंड को पकड़ रखा था.टीना होती तो अब तक मैं उसे चोद चुका होता लेकिन रानी को चोदने का मान कर रहा था लेकिन डर लग रहा था.करीब एक घंटा बीत जाने के बाद मैंने करवट बदल कर अपना हाथ रानी के पेट के ऊपर रख दिया.उसकी तरफ से कोई रिएक्शन नहीं हुआ.अब मैं थोड़ी देर के बाद अपना हाथ उठाकर थोड़ा पेट के नीचे रख दिया फिर भी कोई रिएक्शन नहीं हुआ.अब मैं डरते डरते अपना हाथ उसके सलवार के ऊपर से ही चुत पर रख दिया. क्या गरम चुत था मानो सलवार से आग निकल रही हो.थोड़ी देर वैसे ही हाथ को रख कर रानी के रिएक्शन का इंतजार करते रहे लेकिन वो वैसे ही सोई रही.मैं धीरे धीरे चुत पर अपना उंगली घूमने लगा. मुझे बहुत मजा आ रहा था.वो सलवार के अंदर कुछ भी नहीं पहनी थी, वैसे भी वो सलवार के नीचे पैंटी कभी नहीं पहनती थी .मैं उंगलियों से ही उसके चुत को टटोल कर उसके चुत के होल के पास उंगिली को रगड़ने लगा.उसके बूर में हल्का हल्का गीलापन आ रहा था.मैं हिम्मत करके प्युरे चुत को अपनी मुट्ठी में दबा लिया. क्या मस्त बूर था. एकदम पुए की तरह गूड़ेदार फूली . उसी तरह मैं पूरे चुत को अपनी मुट्ठी से कसकर पकड़ कर दबाता रहा जैसे चूची को दबाते है.चुत से काफी पानी निकल रहा था जिससे सलवार भी गीला हो गया था और मेरा हाथ भी गीलापन महसूष कर रहा था.अब मेरी हिम्मत बढ़ती झड़ रहा थी. रानी सन्ग होली बनाई

मैं अपना हाथ रानी दोस्त के बूर से हटाकर उसके सलवार के नडे को खोलने लगा लेकिन नाडा खुलने के बजाई गाँठ बन गया जिससे नाडा नहीं खुल सका. नाडा खोलकर दोस्तदोस्त के बूर को चाटने का मान कर रहा था लेकिन ऐसा हो ना सका. मैं अपना हाथ अब धीरे धीरे दोस्तदोस्त के सूट के अंदर घुसा कर उसकी चूची तक पहुँच गया .वो कपड़े का घर का बना हुआ गांजी पहन रखी थी जो बिलकुल ही ढीला ढाला था . मेरा हाथ आराम से चुचियों पर चला गया. क्या बताऊं यारो वैसी चूची तक मैंने नहीं देखी. कहते है ना की भगवान किसी को देता है तो च्चप्पर फाड़ कैद एटा है . मेरी दोस्तदोस्त को भी भगवान इतनी मस्त चूची दिया था की बस दिल कर रहा था की लाइट में उसे देखकर चूसता रहूं. बहुत बड़ा बड़ा और एकदम एप्पल की तरह हार्ड चुची.निप्पल भी बहुत छोटा और निप्पल के चारों तरफ बहुत छोटा छोटा मसूर कैद ऑल की तरह घुंघरू जैसा दाना. निप्पल के चारों तरफ गुलाबी रंग का घेरा. चुची भी इतनी बड़ी की एक मुट्ठी में आ ना सका. मैं आराम से बड़ी बड़ी से दोनों चुचियों को सहलाता रहा निप्पल को उंगिलियो से मसलता रहा.धीरे धीरे उसके गांजी को ऊपर खिसककर उसके दोनों चुचियों को बाहर निकाला और सूट को भी ऊपर खिसका कर चुचियों को कपड़े से बाहर निकल दिया. मेरा दिल ज़ोर ज़ोर से धड़क रहा था लेकिन दोस्तदोस्त की मस्त चूची और चुत देखकर किसका लंड चोदने को नहीं करेगा. आज मेरा भी लंड तूफान मचा रहा चोदने के लिए. मैं फिर से नाडा खोलने की कोशिश करने लगा लेकिन साला नाडा खुल ही नहीं रहा था. मैं अपना हाथ नडे के अंदर से सलवार में घुसा कर चुत को भर मुट्ठी दबा दिया. अभी तक दोस्तदोस्त सोने का नाटक कर रही थी लेकिन अचानक वो अपने हाथ से मेरे हाथ को पकड़ ली और बाहर निकल दोस्त. मैं घबरा गया की पता नहीं दोस्तदोस्त अब क्या करेगी लेकिन वो मेरा हाथ बाहर निकल कर अपने चुची पर रख दोस्त.

मेरा था लॉटरी निकल गया. मैं कस कर उसके चूची को मुट्ठी में भींच लिया और उसके ऊपर चढ़ के दूसरे चूची को मुंह से चूसने लगा.मुझ पर पागलपन सवार हो गया था. मैं कभी मुंह से चुचियों को चूसता तो कभी ज़ोर ज़ोर से दबाता, निप्पल को रगड़ने लगा. वो बिलकुल गरम हो चिकी थी. मुंह से बहुत धीरे धीरे आ आ कर रही थी.मैं अपना लंड निकल कर उसके मुंह में डालने लगा लेकिन वो मुंह नहीं खोली मैं उसके होठों पर ही अपने मोटे लंबे तँटानाए हुए लंड को रगड़ने लगा. उसके दोनों च्चियो के बीच अपना लंड फसकर चोदने लगा. वो पूरा शरीर मेरे हवाले कर दोस्त थी. मैं उसके होठों को गालों को गर्दन को चूसने चाटने लगा.मैं फिर से उसका नाडा खोलने लगा लेकिन वो मना कर दोस्त. बोली की अभी पीरियड का चौथा दिन है. हल्का हल्का खून रिस रहा है.आज मत चोदो परसों होली के दिन चोदना. मैं उसको बहुत समझाया की पीरियड में भी चोद जाता है लेकिन वो नहीं तैयार हुई.फिर मैं उसे बहुत रिकवेस्ट करके गांड में डालने को राजी किया. राजी होने के पहीलेऔर वो मुझे डाटने लगी की पागल हो गये हो गांड भी चोदने की चीज़ है फिर मैं उसे प्यार से बहुत समझाया की लंड सिर्फ़ चुत में ही नहीं डाला जाता है बल्कि गांड में चोद जाता है और मुंह से भी चूसा जाता है.मैं उसे सब कुछ बताया की पिछले एक साल से टीना मुझसे हमेशा चुदाया रही है मुंह से लंड भी चूस रही है और गांड में भी मेरा लंड कई बार डलवा चुकी है. जब भी वो पीरियड में रहती है गॅंड ही चुदवाती है.दोस्तदोस्त बोलने लगी की मैं तुम दोनों को कई बार चोदा छोड़ी करते देख चुकी हूँ यह सुनकर मैं सहम गया लेकिन वो बोली यह बात मैं किसी को नहीं बोलूँगी.मैं उससे खुलकर बोला की आने दो टीना को टुंदोनो को एक साथ चोडंगा तब और मजा आएगा, लेकिन वो बोली की नहीं उसे मत बताना की मुझे भी तुम चोदे हो. रानी सन्ग होली बनाई –

मैं उसका नाडा तोड़ दिया और सलवार निकल दिया. उसका कमीज़ और गांजी खोलकर उसको बिलकुल नंगा कर दिया और मैं भी नंगा हो गया. क्या मस्त चुत और चूची थी.मैं तो उसके ऊपर लोटने लगा चुचियों को मुंह से ज़ोर ज़ोर से निचोड़ने लगा मानो उससे दूध निकल देता. अपने लंड को उसके दोनों चुचियों के बीच फसकर चूची चोद करने लगा.मैं उसके मुंह में डालने लगा लेकिन वो मुंह में नहीं ली.वो फिर से गरम होते जा रही थी.अब उसको पलट कर उसके पीठ पर चढ़ गया और अपना लंड उसके गांड के पास रगड़ने लगा. मैं बैठकर उसके गांड के होल में अपना लंड फसकर अंदर डालने की कोशिश करने लगा लेकिनूंदर नहीं घुस पा रहा था. मैं थोड़ा थूक गांड में लगाकर लंड डालने लगा लेकिन फिर भी नहीं घुस पा रहा था. मैं जाकर वैसलीन ले आया और गांड में तथा लंड पर लगा कर बिलकुल चिकना बना दिया और गांड के छेद पर लंड को रखकर धीरे अंदर पेलने लगा मेरा लंड धीरे धीरे गांड की गहराई में ड्रिल करता हुआ घुसता झड़ रहा था और रानी दोस्त रगड़ती जा रही थी. करीब आधा घुस चुका था और मैं उसके कमर को दोनों हाथों से पकड़ कर थोड़ा ऊपर उठाकर ज़ोर का झटका मारा.रानी दोस्त के मुंह से आवाज़ निकालने से पहले ही मैं उसका मुंह तकिया में नीचे दबा दिया. वो दर्द से बिलबिला उठी थी लेकिन मेरा लंड तो अपना कम कर चुका था दोस्तदोस्त की गांड में बोरिंग करता हुआ पूरा घुस चुका था. मैं उसको ऊपर से इस तरह जकड़ रखा था जैसे बैग किसी जानवर का शिकार में जकड़ता है. रानी दोस्त मुझे कुत्ता, कमीना, दोगला,रणडिबाज,गान्डू, बहँचोड़ पता नहीं और कितनी गलियां दे रही थी लेकिन मैं कसकर उसको अपने शिकंजे में पकड़ रखा था और जीभ से उसके पीठ, गर्दन को चाट रहा था हाथ घुसकर चुचियों को दबा झड़ रहा था. कुछ देर के बाद उसका दर्द कुछ कम गया. रानी सन्ग होली बनाई –

मैं वैसे उसको चूमा छाती कर के उसके दर्द को कम करने की कोशिश करता रहा. शायद उसका दर्द खत्म हो चुका था इसलिए वो अपने गांड से मेरे लंड पर दबाव बनाना लगी . मैं तो इसी इंतजार में था और शुरू कर दिया उसके गांड में लंड की आवा जाहि.रानी दोस्त एक ही झटके में चुदाई की उस्ताद बन गयी और अपने गांड को उठा उठा कर चुदवाने लगी. मैं भी ज़ोर ज़ोर से धक्के मरता रहा .लंड को बाहर निकल कर छेद पर रखता और ज़ोर से धक्का मरता, फ़चक…….. फ़चक…….. फ़चक………. करता हुआ उसके गांड की बोरिंग करता रहा और वो भी मजे ले -ले कर गांड हिलती रही.दोनों चुचियों को तो मैं ऐसे रगड़ रहा था जैसे रूई की धुनाई होती है. कुछ देर के बाद सेट हो गयी मैं समझ गया की वो अंदर से झाड़ चुकी है.मैं भी अपना लंड के धक्के का रफ्तार बढ़ा दिया और फिर सारा माल अंदर पेल दिया.दोनों सेट हो चुके थे. रात भर दोनों चिपक कर नंगे ही सोए.अगली रात मुझे छूने भी नहीं दोस्त कारण की उसका गांड सुजकर दर्द कर रहा था.

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